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                <title>burning - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पराली न जलाने को जागरूक बनें किसान</title>
                                    <description><![CDATA[धान की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने के कारण हवा में बेहद प्रदूषण फैल रहा है, जो चिंता का विषय बन चुका है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसका ज्यादा असर जहां पराली जलाई जाती है, वहां के गांवों और वहां के बच्चों तथा अन्य लोगों पर देखा जाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/become-aware-of-not-burning-a-farmer/article-3466"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/prali1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">धान की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने के कारण हवा में बेहद प्रदूषण फैल रहा है, जो चिंता का विषय बन चुका है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसका ज्यादा असर जहां पराली जलाई जाती है, वहां के गांवों और वहां के बच्चों तथा अन्य लोगों पर देखा जाता है। हरियाणा-पंजाब की सरकारों ने पराली न जलाने की अपीलें की हुई है, साथ ही पराली जलाने वाले किसानों पर कानूनी कार्रवाई तक करने के आदेश हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बावूजद इसके किसान मानने को तैयार नहीं हैं। लेकिन किसानों को यह बात समझ में नहीं आ रही कि इसके भविष्य में परिणाम बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। आमतौर पर प्रदूषण का स्तर सौ से ऊपर नहीं जाना चाहिए, परन्तु पराली जलाने के दिनों में यह बढ़कर सवा तीन सौ से ऊपर चला जाता है। आज के वैज्ञानिक युग में जबकि मशीनों ने कृषि के धंधे को बड़ी सीमा तक आगे बढ़ाया है, उस समय ऐसी बड़ी समस्या को हल करने के लिए रास्ते निकालने मुश्किल तो हो सकते हैं, परन्तु असम्भव नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सरकारों को इस संबंधी कड़े निर्देश दिये थे। वर्ष 2015 में उसने पंजाब सरकार को इसलिए कटघरे में भी खड़ा किया था और यह भी कहा था कि पराली को संभालने के लिए कोई ठोस और प्रभावशाली प्रबंध किये जाएं। इसलिए किसानों को पर्याप्त मशीनें मुहैया करवाई जाएं, ताकि वह पराली को जलाने का कार्य न करें। परन्तु सरकार ने उस समय इतना बड़ा खर्च करने से अपनी असमर्थता जाहिर कर दी थी। परंतु प्रत्येक वर्ष भारी मात्रा में पराली जलाई जाती है, जिससे स्थिति और भी गम्भीर हो जाती है। कृषि यूनिवर्सिटी अपने तौर पर अपने सीमित साधनों से किसानों को पराली न जलाने के लिए जागृत करने की कोशिश कर रही है, परन्तु इसका किसानों पर ज्यादा असर नहीं हो रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए किसान जो उपयुक्त मशीनरी चाहते हैं, वह उनको मुहैय्या नहीं करवाई जा रही। जहां तक पराली का संबंध है, यदि इसका अच्छा उपयोग किया जाए तो इससे बहुत सारे लाभ हासिल किये जा सकते हैं। इससे कार्ड-बोर्ड और कागज व गत्ता भी बनाये जा सकते हैं। इससे गैस तैयार की जा सकती है और पर्याप्त बिजली भी पैदा की जा सकती है, परन्तु यह सब कुछ करने के लिए बड़ी धनराशि के साथ-साथ बड़े प्रयासों की भी जरूरत होगी और इसके लिए अच्छी योजनाबंदी की भी जरूरत है। हम यह बात विश्वास से कह सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कि यदि सरकार इस गम्भीर मामले के बारे में प्रतिबद्ध होती तो अब तक इसके कई तरह के हल निकाले जा सकते थे। परन्तु ऐसा कर सकने से वह असमर्थ रही है। इस संबंधी किसान भी लापरवाह रहा है, उसने भी अपने तौर पर पराली को संभालने का कोई प्रयास नहीं किया, जिस कारण अब सारा खेल बिगड़ गया नजर आ रहा है। परन्तु कोई नकारात्मक अमल जब सीमा से बढ़ जाता है, उस समय स्थिति को सुधारने के लिए कोई न कोई बड़ा कदम उठाया जाना आवश्यक हो जाता है। अत: यदि इसके प्रति लापरवाही और सुस्त कार्रवाई ही रही, तो आगामी समय में पर्यावरण प्रदूषण का खतरा और अधिक बढ़ना तय है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2017 03:35:55 +0530</pubDate>
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                <title>जलता हुआ उल्कापिंड खेत में गिरा, फैली सनसनी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के भाकरोटा थाना क्षेत्र में आज एक खेत में जलता हुआ उल्कापिंड गिरने से सनसनी फैल गयी। थानाधिकारी हेमेन्द्र शर्मा ने बताया कि थाना क्षेत्र के मुकुंदपुरा गांव में बंशीधर के खेत में तडके करीब चार बजे तेज धमाके के साथ गिरे इस उल्कापिंड से गांव में जाग हो गयी और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/burning-meteorites-fall-into-the-farm/article-941"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/pind.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर: </strong>राजस्थान की राजधानी जयपुर के भाकरोटा थाना क्षेत्र में आज एक खेत में जलता हुआ उल्कापिंड गिरने से सनसनी फैल गयी। थानाधिकारी हेमेन्द्र शर्मा ने बताया कि थाना क्षेत्र के मुकुंदपुरा</p>
<p style="text-align:justify;">गांव में बंशीधर के खेत में तडके करीब चार बजे तेज धमाके के साथ गिरे इस उल्कापिंड से गांव में जाग हो गयी और लोग घरों से बाहर आ गये।घटना की जानकारी मिलते ही खेत में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पडी जिसे मौके पर पहुंची पुलिस ने हटाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गयी है</h2>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि लगभग 5 किलो वजनी काले रंग के इस उल्कापिंड के गिरने से जमीन पर गहरा गड्ढा बन गया और उल्कापिंड के छोटे-छोटे टुकडे हो गये। पुलिस ने बताया कि इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के फिजिक्स के सेवानिवृत प्रोफेसर आर एन त्रिपाठी ने आकाश से गिरे इस पत्थर को उल्कापिंड होने का दावा करते हुये जिला प्रशासन से जांच के लिये इसको अहमदाबाद लेबोरेटरी में भिजवाने का सुझाव दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि उल्कापिंड सामान्यतया चुम्बकीय परिधि से गिरे रहते है और जो इस परिधि में नही आ पाते वह कई बार गिर जाते है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 02:44:39 +0530</pubDate>
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