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                <title>रूसो का सिद्धांत ‘लैसिते’ धर्म निरपेक्ष है न कि धर्म विरोधी</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के राष्टÑपति मैक्रों की इस्लाम संबंधी विवादिक टिप्पणियों से मुस्लिम जगत में काफी ज्यादा रोष हो गया है। कई मुस्लिम देशों ने फ्र ांसीसी सामान के बायकाट का ऐलान भी कर दिया है। यह घटना जलती पर तेल डालने के समान है, क्योंकि पहले ही आतंकी संगठन इस्लाम के नाम पर युवाओं को गुमराह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/rousseau-doctrine-lasite-is-secular-and-not-anti-religious/article-19562"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/religious.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फ्रांस के राष्टÑपति मैक्रों की इस्लाम संबंधी विवादिक टिप्पणियों से मुस्लिम जगत में काफी ज्यादा रोष हो गया है। कई मुस्लिम देशों ने फ्र ांसीसी सामान के बायकाट का ऐलान भी कर दिया है। यह घटना जलती पर तेल डालने के समान है, क्योंकि पहले ही आतंकी संगठन इस्लाम के नाम पर युवाओं को गुमराह कर गैर मुस्लिमों के खिलाफ भड़का रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मैक्रों की टिप्पणियां इस चलन के लिए और ज्यादा सहायक बनेंगी। घटना फ्रांस के सिद्धांत, ‘लैसिते’ के साथ जुड़ी हुई है। लैसिते को ‘धर्म से मुक्ति’ के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसमें असल में धर्म निरपेक्षता को गलत तरीके से दर्शाया गया है। फ्रांस की क्र ान्ति की जमीन रूसो जैसे दार्शनिकों ने तैयार की थी जो लोगों की आजादी के समर्थक थे। फ्रांस के इस सिद्धांत का प्रभाव मार्क्सवादी चिंतन व रूसी क्रान्ति पर भी पड़ा। दरअसल न तो रूसो धर्म के खिलाफ थे और न ही रूस का समाजवादी शासन धर्म के विरूद्ध था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुद्दा केवल इतना ही था कि स्टेट किसी धर्म या धर्म प्रचार के लिए काम नहीं करेगा। सोवियत यूनियन के दौरान भी चर्च कायम रहे। अब जहां तक फ्रांसीसी राष्टÑपति की ओर से धर्म के खिलाफ टिप्पणियां की जा रही हैं उनका कोई मानवीय या सामाजिक आधार नहीं। फ्रांसीसी शासन धार्मिक मामलों से दूर रहकर अपनी प्रशासनिक गतिविधियां चला सकता है। फ्रांस सरकार को अंतरराष्टÑीय स्तर पर अमन शांति की स्थिति को देखते हुए नाजुक मामलों के प्रति पूरी सर्तकता से काम करना चाहिए। भले ही राष्टÑपति सरकोजी के समय भी धर्म निरपेक्षता को जोरदार तरीके से लागू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन वर्तमान राष्टÑपति मैक्रों की ओर से जिस तरह से एक धर्म विशेष के खिलाफ गतिविधियों को मान्यता दी जा रही है, वह फ्रांस से बाहर तनाव का कारण बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह चिंताजनक है कि फ्रांस जैसे धर्म निष्पक्ष देशों में सत्ता हासिल करने के लिए धर्माें का विरोध चुनावी प्रपंच बन गए हैं। फ्रांस के राष्टÑपति चुनावों में डेढ़ वर्ष का समय रह गया है। सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विपक्षी पार्टी के नेता मारीन ले पैन धार्मिक मुुद्दे पर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा मारीन के लिए सत्ता प्राप्ति का रास्ता खोल सकता है। फ्रांसीसी राजनीति के इतिहास में धर्म निरपेक्षता का जिक्र तो रहा है लेकिन किसी धर्म के विरोध का कोई इतिहास नहीं रहा। वर्तमान मानववादी व लोकतांत्रिक युग में सद्भावना, प्रेम व दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुणों के बिना एक आदर्श समाज की कल्पना असंभव है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Oct 2020 09:44:05 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका में जज ने धार्मिक समारोहों पर लगी पाबंदी को अमान्य करार दिया</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका में सर्किट जज मैथ्यू शर्टक्लिफ ने ओरगन प्रांत के गवर्नर केट ब्राउन के उस आदेश को अमान्य करार दिया है, जिसके तहत उन्होंने कोरोना वायरस (कोविड-19) के मद्देनजर धार्मिक समारोहों पर रोक लगा दी थी। ओरेगोनियन अखबार ने मैथ्यू के हवाले से कहा, ‘ जब हम बड़े धार्मिक समारोह के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/restrictions-on-religious-ceremonies-declared-invalid-in-america/article-15446"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/jama-masjid-court-hearing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका में सर्किट जज मैथ्यू शर्टक्लिफ ने ओरगन प्रांत के गवर्नर केट ब्राउन के उस आदेश को अमान्य करार दिया है, जिसके तहत उन्होंने कोरोना वायरस (कोविड-19) के मद्देनजर धार्मिक समारोहों पर रोक लगा दी थी। ओरेगोनियन अखबार ने मैथ्यू के हवाले से कहा, ‘ जब हम बड़े धार्मिक समारोह के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और सुराक्षात्मक मापदंडों का पालन कर सकते हैं, तो गवर्नर के इस आदेश की जरूरत नहीं थी ।” जज शर्टक्लिफ इस संबंध में दस चर्चा द्वारा दायर की गई अपील पर सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका मामनना है कि इससे वादियों के अधिकारों का उल्लंघन होगा। राज्यपाल को यह आदेश नहीं लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा, “वादियों ने बताया है कि इस आदेश से उनके धार्मिक स्वतंत्रका हनन होगा। उनके व्यवसाय को आर्थिक नुकसान पहुंचेगा। आजीविका की क्षति होगी।”</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2020 09:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन में धार्मिक आजादी पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति का यह खुलासा चीन के दोहरे चरित्र को उजागर करने वाला है कि उसने 10 लाख से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को कथित तौर पर कट्टरवाद विरोधी गुप्त शिविरों में कैद रखा है और 20 लाख अन्य को विचारधारा बदलने का दबाव बना रहा है। इस रिपोर्ट में कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-crisis-on-religious-freedom-in-china/article-5521"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/cinaa-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति का यह खुलासा चीन के दोहरे चरित्र को उजागर करने वाला है कि उसने 10 लाख से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को कथित तौर पर कट्टरवाद विरोधी गुप्त शिविरों में कैद रखा है और 20 लाख अन्य को विचारधारा बदलने का दबाव बना रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक स्थिरता और धार्मिक कट्टरता से निपटने के नाम पर चीन ने इगर स्वायत क्षेत्र को कुछ ऐसा बना दिया है जो गोपनीयता के आवरण में ढंका बहुत बड़ा नजरबंदी शिविर जैसा है। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इन शिविरों में जबरन राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वफादारी की कसम दिलवाई जाती है और कम्युनिस्ट पार्टी के नारे लगवाए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौर करें तो इस तरह का खुलासा कोई पहली बार नहीं हुआ है। अभी चंद दिन पहले ही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉपियो द्वारा धार्मिक आजादी के मुद्दे पर चीन की यह कहकर आलोचना की गयी थी कि वहां धार्मिक स्वतंत्रता संकट में है और रह रहे विभिन्न धर्मावलंबियों के धार्मिक क्रियाकलापों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चीन द्वारा उइगर मुसलमानों और तिब्बती बौद्धों की धार्मिक स्वतंत्रता का दमन किया जा रहा है जो कि मौलिक मानवाधिकारों का उलंघन है। इस कड़ी टिप्पणी से चीन को शर्मसार होना पड़ रहा है कि वह अपनी सुरक्षा व संप्रभुता के नाम पर अपनी भूमि पर रहने वाले गैर धर्मावलंबियों के साथ सख्ती से पेश आ रहा है। नि:संदेह चीन को अधिकार है कि वह दुनिया भर में इस्लामिक आतंक के कहर से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं कि वह लोगों की धार्मिक आजादी पर पाबंदी थोप उन्हें कैदी बना ले। अब चीन चाहे जो भी सफाई दे लेकिन यह सत्य है कि वह अपने मुस्लिम बाहुल्य प्रांतों में ऐसा ही अत्याचार कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
चीन की सरकार ने इन प्रांतों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगा दी है। जिन मस्जिदों में कभी हजारों बच्चे कुरान पढ़ने के लिए आते थे, अब वहां उनका प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। बच्चों के परिजनों को भी हिदायत दी गयी है कि वे बच्चों को मस्जिदों में कुरान पढ़ने के लिए न भेजें क्योंकि इससे वे धर्मनिरपेक्ष पाठ्यक्रमों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। यहां के स्थानीय प्रशासन ने उन छात्रों की तादाद घटा दी है जिन्हें 16 साल से अधिक उम्र के चलते मस्जिदों में पढ़ने की अनुमति मिली हुई है। मस्जिदों में नियुक्त किए जाने वाले नए इमामों के लिए प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया को भी सीमित कर दिया गया है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार शिनजियांग प्रांत में और भी अधिक कठोरता से पेश आ रही है। यहां के रहने वाले उइगर समुदाय के लोगों को शिक्षा शिविरों में डाल दिया गया है जहां उन्हें कुरान पढ़ने या दाढ़ी रखने की सख्त मनाही है।</p>
<p style="text-align:justify;">याद होगा इस वर्ष के जनवरी माह में ही चीन की सरकार ने यहां के मुस्लिम समुदाय के लोगों को चेतावनी दी कि वे नाबालिगों को कुरान पढ़ने के लिए या धार्मिक गतिविधयों में भाग लेने के लिए मस्जिदों में न जाने दें और न ही इसका समर्थन करें। अगर वे ऐसा करते हैं तो उन्हें दंड भुगतना होगा। सरकार के इस रवैए से यहां रह रहे मुसलमानों के मन में इन प्रतिबंधों से यह धारणा पनपने लगी है कि सरकार उनकी रीति-रिवाज और परंपाओं को खत्म करने पर आमादा है। उन्हें लग रहा है कि सरकार 1966 का माहौल निर्मित करना चाहती है, जिस दौरान मस्जिदों को ढहा दिया गयाया फिर जानवरों को रखने की जगह के रुप तब्दील कर दिया गया था। उइगर मुसलमानों की यह चिंता अनायास नहीं है। गौर करें तो चीन की सरकार ने यहां के मस्जिदों पर राष्ट्रीय झंडा लगाना अनिवार्य कर दिया है और ध्वनि प्रदुषण की आड़ में इन मस्जिदों के इमामों को चेताया है कि वह नमाज के लिए माइक के जरिए लोगों को बुलावा न भेंजे। दरअसल विगत वर्षों में चीन में कई आतंकी घटनाएं हुई हैं जिनमें कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों का हाथ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की सरकार इस नतीजे पर है कि भले ही उसने तत्कालीन आक्रोश को दबा दिया लेकिन उसकी आग अभी बुझी नहीं है। चूंकि इस्लामिक आतंकी संगठन पहले ही शिनजियांग प्रांत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का आह्नान कर चुके हैं ऐसे में चीन एक रणनीति के तरत उइगर मुसलमानों के खिलाफ काम कर रहा है। शिंजियांग प्रांत की बात करें तो यह प्रांत प्रारंभ से ही संवेदनशील रहा है। यहां 40 से 50 फीसदी आबादी उइगर मुसलमानों की है जिसे काबू में करने के लिए वहएक रणनीति के तहत यहां हान वंशीय चीनियों को बड़ी संख्या में बसाना शुरू कर दिया है। नतीजा उइगर मुसलमानों की संख्या सिकुड़ने लगी है। वह चीनी हान वंशियों की आबादी के आगे अल्पसंख्यक बन कर रह गए हैं। ऐसे में उइगर मुसलमानों को अपनी संस्कृति को लेकर चिंता सताना लाजिमी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अभिजीत मोहन</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Aug 2018 08:43:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जिंदगी का तजुर्बा है बुजुर्गों के पास, निरादर न करें: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[रूहानी सत्संग: पालमपुर में डॉ एमएसजी ने अनमोल वचनों से किया निहाल पूज्य गुरु जी ने दी ईद की मुबारकबाद पालमपुर। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में रविवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने अनमोल वचनों की वर्षा कर श्रद्धालुओं को उच्च सामाजिक मूल्यों को जीवन में अपनाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-in-palampur-by-saint-dr-msg/article-1638"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">रूहानी सत्संग: पालमपुर में डॉ एमएसजी ने अनमोल वचनों से किया निहाल</h2>
<h2>पूज्य गुरु जी ने दी ईद की मुबारकबाद</h2>
<p><strong>पालमपुर।</strong> देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में रविवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने अनमोल वचनों की वर्षा कर श्रद्धालुओं को उच्च सामाजिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। स्थानीय शहीद कैप्टन बिक्रम बत्तरा स्टेडियम में आयोजित रूहानी सत्संग में बड़ी तादाद में स्थानीय लोगों ने शिरकत की।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने हजारों अभिलाषी लोगों को गुरुमंत्र की अनमोल दात प्रदान की और रूहानी जाम (जाम-ए-इन्सां) पिलाकर मानवता की सेवा करने का प्रण करवाया। सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने श्रद्धालुओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।</p>
<p>पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान को कभी भी अपने मां-बाप की निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह हमारी संस्कृति के खिलाफ है। जो इन्सान मां-बाप की निंदा करता है उसमें खून भी तो उन्हीं का ही होता है, जिनकी वे निंदा करते है, इसलिए वह खुद अच्छा कैसे हो सकता है। दोस्त वही अच्छा होता है जो सही बात मुंह पर कह दे और गलत होने पर उसे टोक दे। इन्सान को चापलूसी दोस्ती से बचकर रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग दौरान पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आधुनिक सोच और बुजुर्गों की सोच में फर्क जरुर हो सकता है, लेकिन मां-बाप को कभी बुरा नहीं कहना चाहिए। इन्सान को चाहिए कि वह अपने बुजुर्गों की बात को जरुर सुने।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी लगे तो मान लो, नहीं तो आप की मर्जी, क्योंकि जो उम्र होती है वह भी एक गुरु के समान होती है। पढ़ने-लिखने से ज्यादा इन्सान को जिंदगी सिखा देती है। जिंदगी का तुजुर्बा बुजुर्गों के पास होता है, इसलिए इन्सान को कभी भी अपने बुजुर्गों का अनादर नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके ज्ञान का लाभ लेना चाहिए। जो दादा-दादी की कहानियां होती थी, उनमें जिंदगी का निचोड़ होता था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन्सान को अपने अवगुण छोड़ने चाहिए और गुण ग्रहण करने चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आजकल घर-परिवार टूट रहे हं, जिसका सबसे बड़ा कारण बुजुर्गों का साथ न होना है। समय के साथ-साथ इन्सान बहुत कुछ सीखता है, ग्रहण करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को अपने अवगुण छोड़ने चाहिए और गुण ग्रहण करने चाहिए। पूज्य गुरु ने आगे फरमाया कि आज हम उन्हीं लोगों को याद करते है जिन्होंने अच्छे कर्म किए हों, अच्छे काम किए हों, उनके लिए आज भी हमारे दिल में सम्मान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं उसी समयकाल में जो बुराई से जुडे करोड़ लोग आए, उन्हें आज कोई याद नहीं करता। इन्सान को पशुओं से अच्छी जिंदगी जीनी चाहिए। पशु कभी भी अपने सुख के लिए दूसरों को मारता नहीं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जहा मोहब्बत, तंदरुस्ती और आपसी प्यार नहीं होता वह नर्क के सम्मान होता है</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि संत-पीर फकीर कभी भी किसी को पैसा कमाने के लिए मना नहीं करते, लेकिन कभी भी इन्सान को किसी का हक मारकर पैसा नहीं कमाना चाहिए। जब किसी का हक मारकर खाते हो तो तकलीफ बहुत होती है और जो पाप जुल्म की कमाई होती है वह नागनी की तरह होती है। इससे घर में दुख-दर्द और परेशानियां आती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान जिसका हक मारकर खाता है उसके अंदर से जो बदुआ निकलती है उसका फल उसके साथ-साथ उसकी पीढ़ियों को भी भोगना पड़ता है। आप जी ने फरमाया कि जिसघर में मोहब्बत, तंदरुस्ती और आपसी प्यार नहीं होता वह नर्क के सम्मान होता है। सभी धर्मों में लिखा है कि कड़ा परिश्रम करके खाओ। इन्सान को कर्मयोगी और ज्ञान योगी बनना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राम-नाम का निरंतर जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जो हमारी शिक्षा है वो महाविज्ञान है, धर्म महाविज्ञान है जो हजारों साल पहले बने थे। विज्ञान कभी भी दिमाग को आक्सीजन नहीं दे सकती, चाहे जितना मर्जी जोर लगा लो, लेकिन धर्म चुटकी में माइंड को आक्सीजन दे सकता है। राम-नाम का निरंतर जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और आत्मबल से हारी हुई बाजी जीती जा सकती है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कि मन, माया, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार ये सातों मिलकर आपके कीमती स्वासों को खत्म कर रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विस स्पीकर बुटेल ने उठाया सत्संग का लाभ</h2>
<p style="text-align:justify;">सत्संग कार्यक्रम में कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की, जिनमें विधानसभा के स्पीकर बृज बिहारी बुटेल, चीफ पार्लियामेंट सैक्टरी जगजीवन पाल, बीजेपी के पूर्व विधायक प्रवीन शर्मा आदि मौजूद थे। इस दौरान विस स्पीकर ने रूहानी जाम भी ग्रहण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2017 02:37:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘ज्ञान का दीपक जलाता है सच्चा गुरु’</title>
                                    <description><![CDATA[रूहानी सत्संग: धर्मशाला में हुई राम-नाम की बरसात, 2520 लोगों ने लिया गुरुमंत्र धर्मशाला (सुनील वर्मा)। गुरु शब्द दो अक्षरों के संयोग से बना है। ‘गु’ प्लस ‘रु’। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार व ‘रु’ का अर्थ प्रकाश यानि जो अज्ञानता रूपी अंधकार में ज्ञान रूपी दीपक जला दे और इन्सानियत की अलख जगाए, उसे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-in-dharamshala-hp-by-saint-dr-msg/article-1391"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/msg.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">रूहानी सत्संग: धर्मशाला में हुई राम-नाम की बरसात, 2520 लोगों ने लिया गुरुमंत्र</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>धर्मशाला (सुनील वर्मा)।</strong> गुरु शब्द दो अक्षरों के संयोग से बना है। ‘गु’ प्लस ‘रु’। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार व ‘रु’ का अर्थ प्रकाश यानि जो अज्ञानता रूपी अंधकार में ज्ञान रूपी दीपक जला दे और इन्सानियत की अलख जगाए, उसे सच्चा गुरु कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त अनमोल वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में आयोजित विशाल रूहानी सत्संग में उपस्थित साध-संगत को लाभान्वित करते हुए फरमाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने श्रद्धालुओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया। वहीं 2520 लोगों ने पूज्य गुरु जी से गुरुमंत्र (नाम शब्द) की अनमोल दात प्राप्त कर तमाम दुनियावी नशे नहीं करने का प्रण लिया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘लिये जा प्रभु का नाम लिये जा, अमृत रस घूंट पिये जा…’</h2>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने अपनी अलौकिक वाणी से ‘लिये जा प्रभु का नाम लिये जा, अमृत रस घूंट पिये जा…’ गाया, जिस पर उपस्थित साध-संगत झूम उठी। पूज्य गुुरु जी ने फरमाया कि गुरुमंत्र पुरातन शब्द है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुमंत्र गुरु के शब्द नहीं होते, बल्कि भगवान के शब्द होते हैं, जिन्हें पहले गुरु खुद अभ्यास करता है, जाप करता है। गुरु मंत्र का नियमित अभ्यास करने से ही भगवान के दर्श-दीदार हो सकते हैं। राम-नाम का निरंतर जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है, नेगेटिव विचार खत्म होते हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अक्सर देखा जाता है कि जैसा हम मन में विचार लाते हैं, वैसा ही होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम परीक्षा के समय यह देखेंगे कि मैं परीक्षा में फेल होऊंगा तो रिजल्ट नेगटिव ही आता है। अगर हम परीक्षा से पहले मन में धार लें कि मेरी मेरिट आएगी तो परिणाम भी वैसा ही आता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राम के नाम का जाप करने से जिंदगी जीने की आ जाती है ताकत</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि गुरुमंत्र का जाप करने से चौथे स्टेज तक का कैंसर, जिसे डॉक्टर जवाब दे देते हैं, वो भी श्रद्धा से राम-नाम का जाप करने पर खत्म हो जाता है। राम के नाम का जाप करने से जिंदगी जीने की ताकत आ जाती है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आत्मबल बढ़ता है। ईश्वर के नाम का जाप करने से इंसान अपनी तकदीर बदल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीव-जंतु, पशु-पक्षी किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह अपना भाग्य बदल सके। आप जी ने फरमाया कि दुनियादारी में देखने में आता है कि लोग जितनी मेहनत करते हैं, उन्हें उतना फल नहीं मिलता, इसका कारण है जन्मों-जन्मों के संचित कर्मों का होना। संचित कर्म इन्सान को मनुष्य जीवन में ही भोगने पड़ते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संचित कर्मों को खत्म करने का एकमात्र तरीका है भगवान का नाम। जो इन्सान मालिक की भक्ति करेगा, यकीनन उसके संचित कर्म, गलत कर्म कट जाएंगे। जब शरीर और आत्मा अलग-अलग राह पर चलने लगते हैं तो शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। आत्मा की खुराक सिर्फ प्रभू का नाम है। अगर इन्सान परमात्मा का नाम जपता है तो वह मन को हराकर आत्मा की बाजी जीत सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने भगवान की परिभाषा बताते हुए फरमाया कि भगवान वह है जो किसी से कुछ नहीं लेता। भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा। भगवान कभी किसी से चढ़ावा नहीं लेता।</p>
<p style="text-align:justify;">जो इन्सान भगवान के नाम से चढ़ाते हैं, वो चढ़वा उन जैसे इन्सान ही ले जाते हैं। ईश्वर के पास कुछ नहीं जाता। भगवान से इन्सान को मांगना चाहिए अच्छी धरती, अच्छा पानी, अच्छी संतान और मांगना ही है तो भगवान से भगवान को मांगों। सभी धर्मों में लिखा गया है कि जब भगवान रहमोकर्म करता है तो इन्सान के दामन छोटे पड़ जाते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संतों का कोई ड्रेस कोड नहीं होता: पूज्य गुरु जी</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि संतों का कोई ड्रेस कोड नहीं होता। संत सच्ची बात सुनाते हैं, सच की राह दिखाते हैं तथा एक-दूसरे को जोड़ना सिखाते हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि धर्म का अर्थ है धारण करना, यानि जोड़ना। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जो इन्सान दूसरों के लिए कार्य करते हैं, उनके मरने के पश्चात वो लोग उन्हें पूरी इज्जत के साथ याद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इन्सान को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी को मशाल-चिराग की तरह जीये। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान नशा करता है शौकिया तौर पर, गम भुलाने के लिये, इंज्वायमेंट के लिए लेकिन ये नशा सिर्फ चंद घंटों के लिए होता है, परमानेंट नहीं। राम-नाम का नशा ऐसा नशा है, जो एक बार चढ़ जाता है तो जल्दी से उतरता नहीं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राम-नाम की मिठास से  कटते हैं जन्मोंजन्म के पाप कर्म</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि राम-नाम की मिठास के सामने दुनियादारी में मौजूद चीनी, सहित अन्य वस्तुओं की मिठास गंदगी के सामान है। राम-नाम की मिठास से जन्मोंजन्म के पाप कर्म तो कटते ही हैं, साथ में इस जन्म की बुराई भी खत्म हो जाती हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि भगवान का नाम पूरी श्रद्धा और ध्यान को एकाग्र करके करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जो ऐसा करके ईश्वर का नाम जपते हैं, वो दरगाह में मंजूर-कबूल होता है। राम की महिमा अपरम पार है। राम नाम शब्द, गुरुमंत्र पवित्र ग्रंथों में से निकलकर आए हैं। राम नाम की साबुन से जन्मों-जन्मों की मैल साफ हो जाती है, परमानंद की प्राप्ति होती है, बीमारियों से छुटकारा पाने का अंदर से हल मिल जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि राम का नाम अनमोल है, उसका कोई दाम नहीं होता। जिसे सच्चा संत, पीर-फकीर बिना दाम के देता है। राम का नाम पुन: जिंदगी बख्श देता है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान अपने बच्चों के साथ फ्रैंड जैसा व्यवहार करे। अगर बच्चे पहली बार कहने पर गलती मान लें तो उसे डांटने की बजाय आगे से ऐसा न करने का प्रण लें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मंदबुद्धियों को अपनों से मिलवाया</h2>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत सड़कों पर बेसहारा घूम रहे व अपनों से बिछड़े हुए लोगों को घर पहुंचाने में मददगार बन रही है। इसी के तहत सत्संग के दौरान दो और मंदबुद्धि साध-संगत की सेवाभावना के चलते अपने परिजनों से मिल पाए। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि साध-संगत यह बेमिसाल काम कर रही है। भगवान उनके घर में बरकत डाले। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जो इन्सान ईश्वर की बनाई सृष्टि की, औलाद की सेवा करता है, भगवान उनके घर कोई कमी नहीं छोड़ता।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अब तक साध-संगत ले चुकी है ये प्रण</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>मरणोपरांत नेत्रदान           1,44,090   लोग</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीते जी गुर्दादान               56,768       लोग</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नियमित रक्तदान              1,30,000   से अधिक लोग</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मरणोपरांत शरीरदान        1,21,260</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दहेज न लेने वाले               1,35,173     परिवार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सफाई अभियान के लिए    1,49,587    लोग</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भक्तयोद्धा                         1522           युवा</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>21 शुभदेवियों की भक्तयोद्धाओं से हो चुकी हैं शादियां</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 02:40:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुख पाने के लिए करो प्रभु-भक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान का नाम लेने के लिए कोई घर परिवार नहीं छोड़ना पड़ता चचिया नगरी: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ईश्वर का नाम सब सुखों की खान है और भगवान का नाम लेने के लिए कोई घर परिवार नहीं छोड़ना पड़ता, कोई काम-धन्धा नहीं छोड़ना पड़ता। इन्सान घर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/do-meditation-for-better-life-saint-dr-msg/article-1130"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/gurmeet-ram-rahim-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">भगवान का नाम लेने के लिए कोई घर परिवार नहीं छोड़ना पड़ता</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चचिया नगरी:</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ईश्वर का नाम सब सुखों की खान है और भगवान का नाम लेने के लिए कोई घर परिवार नहीं छोड़ना पड़ता, कोई काम-धन्धा नहीं छोड़ना पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान घर गृहस्थी में रहकर, कड़ा परिश्रम व मेहनत की कमाई करता हुआ अगर परमात्मा का नाम जपता है तो इस जहान में भी उसके दर्श-दीदार करके परमानन्द को प्राप्त कर सकता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जीव नाम ले लेता है, लेकिन जाप नहीं करता।</p>
<h1 style="text-align:center;">काम-धंधा करते हुए मालिक को याद करें</h1>
<p style="text-align:justify;">नाम लेकर सुमिरन करे, भक्ति इबादत करे तो कोई गम नहीं रहता, कोई दु:ख तकलीफ नहीं रहती। अगर इन्सान सुमिरन करे ही नहीं, भक्ति करे ही नहीं तो अंत:करण में शांति कहां से आएगी, दिलो-दिमाग में खुशी कहां से आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप चाहते हो कि प्रभु की कृपा दृष्टि हो, आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं दूर हो जाएं तो आप सभी तड़प से सच्ची लगन से चलते, बैठते, लेटके, काम-धंधा करते हुए मालिक को याद करें, तो प्रभु की कृपा दृष्टि जरूर होगी और आपका जीवन खुशियों से महक उठेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 00:19:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम-नाम का जाप करने से बरसेगी मालिक की अपार रहमत</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। राम का नाम इंसान को अंदर बाहर से खुशियों से भर देता है। इसलिए राम का नाम लेते रहना चाहिए। राम का नाम लेते समय आप कभी भी समय बर्बादी के बारे में न सोचें। आपको कई बार लगता है मैंने इतना समय भगवान को दे दिया, लेकिन अब सोचिए शेष बचा हुआ टाईम किसके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-will-give-you-all-happiness-saint-dr-msg/article-942"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/pita-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा। </strong>राम का नाम इंसान को अंदर बाहर से खुशियों से भर देता है। इसलिए राम का नाम लेते रहना चाहिए। राम का नाम लेते समय आप कभी भी समय बर्बादी के बारे में न सोचें। आपको कई बार लगता है मैंने इतना समय भगवान को दे दिया, लेकिन अब सोचिए शेष बचा हुआ टाईम किसके लिए दिया।’</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त अनमोल वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रविवार को शाह सतनाम जी धाम में आयोजित रूहानी सत्संग के दौरान फरमाएं। इस अवसर पर पूज्य गुरु जी ने 2860 नामाभिलाषी जीवों को नाम की अनमोल दात प्रदान की तथा हजारों लोगों ने रूहानी जाम ग्रहण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अक्सर देखा जाता है कि जिस औलाद को सींचकर बड़ा करते हो, वही औलाद एक दिन छोड़ देती है और जब आपके सामने आपके विरोध में खड़े हो जाते हैं तो बड़ा दर्द होता है। लेकिन इंसान इस बारे में पहले कभी नहीं सोचता। लेकिन जब ऐसा हो जाता है तो इंसान परेशान होता है कि ये क्या हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वो समय जो आपने उनके ऊपर लगाया तो उसका ये नतीजा निकला। अगर वही समय आप राम-नाम में लगाएं, वही समय प्रभु भक्ति में लगाएं, सतगुरु, अल्लाह के प्यार में लगाएं तो वो समय बेशकीमती हो जाएगा और आपकी जिंदगी में बहारें ले आएगा। इसलिए समय का सदुपयोग करो। जितना हो सके अच्छे कर्म करो। ईश्वर के नाम का जाप करो, ईश्वर से ईश्वर को मांगते रहो। भले कर्म करते रहो यकीनन उस मालिक की रहमत जरूर बरसेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भगवान आजमाता भी है</h2>
<p style="text-align:justify;">जब सब युक्तियां हार जाती है। जब इन्सान का मार्इंड टोटली जवाब दे जाता है कि ये मैं नहीं कर सकता या मुझसे ये नहीं होगा। ये संभव नहीं है। उस समय अगर ईश्वर का नाम लिया जाए तो असंभव पल में संभव हो जाता है। जो कभी सोचा नहीं होता वो खुशियां इंसान को मिल जाती हैं। वो भगवान, वो राम जिसे अपनी खुशियों से, अपनी भक्ति से नवाजता है, उसे पहले आजमाता जरूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजमाने में जो फेल हो जाते हैं, वो उस परम पद को हासिल नहीं कर पाते, उन्हें अंदर-बाहर से एक जैसे नजारे नहीं मिल पाते। वहीं जो मालिक की परीक्षा में सफल हो जाते हैं वो अंदर मालामाल रहते हैं। संत, पीर-फकीर वचन करते हैं, कि भई! इस बात को मान लो। ये आपकी जिंदगी में काम आने वाली चीजें हैं, ऐसा करने से आप खुशियां हासिल कर पाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">निंदा-चुगली से खत्म होती है एनर्जी</h2>
<p style="text-align:justify;">आप राम-नाम का जाप करते हो, समाज का भला करते हो तो पूरी दुनिया में आपका नाम याद रखा जाएगा। वर्ना कितने बेनाम यहां आते हैं और चले जाते हैं। कोई याद तक नहीं करता। जिंदगी मिली है तो क्यों न ऐसा कुछ किया जाए, जो हर कोई याद रखे। इसलिए बहुत जरूरी है राम का नाम जपो, मालिक की भक्ति इबादत करो।</p>
<p style="text-align:justify;">ताकि उस भक्ति से आपको खुशियां मिले ही मिलें, आपकी आने वाली पीढ़ियां भी मालामाल हो सकें। कितना आसान सा कार्य है, सुमिरन करना। निंदा-चुगली करने में भी जोर लगता है, क्योंकि उसमें एनर्जी वेस्ट होती है, आप जोर लगा-लगा के बातें करते हैं ताकि सामने वाला प्रभावित हो, क्योंकि धीमें आवाज में चुगली करोगे तो आदमी को मजा नहीं आता, प्रेशर डालकर जब चुगली करते हो तो पता चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दावे से कहते हैं तो आदमी को लगता है कि ये सही कह रहा होगा। तो राम नाम तो कुछ भी नहीं है, जुबान चलाओ चाहे न चलाओ, विचारों से करते रहो। बल्कि जैसे-जैसे राम का नाम जपते जाओगे। वैसे-वैसे मालिक के खुशियों के अधिकारी बनते जाओगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सतगुरु पर दृढ़ यकीन रखो</h2>
<p style="text-align:justify;">संत, पीर-फकीर कभी किसी का बुरा करना तो दूर, सोचते नहीं। जो उन्हें भी बुरा कहते हैं, संत-पीर-फकीर परम पिता परमात्मा से दुआएं मांगते रहते हैं। सबका भला करते हैं, सबको खुशी देने के लिए हर अच्छा कर्म करते हैं। इंसान जो सच्चे दिल से, भावना से मान लेते हैं, उन्हें तमाम खुशियां जरूर हासिल होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जितनी श्रद्धा होगी, जितना दृढ़ यकीन होगा उतने ही नजारे ईश्वर के ज्यादा मिलेंगे। इसलिए दृढ़ यकीन रखो, ईश्वर की भक्ति करते रहो, मालिक का नाम जपते रहो। ज्यों-ज्यों मालिक का नाम जपते जाओगे त्यों-त्यों आपकी भावना, आपके विचार शुद्ध हो जाएंगे और मालिक के दर्श-दीदार के लायक आप बनते जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी भावना का शुद्धिकरण करने के लिए विचारों का शुद्धिकरण करना बेहद जरूरी है। आप ईश्वर का नाम जपते हुए, समाज का भला करना सीखें। ज्यों-ज्यों समाज का भला करते जाएंगे, प्रभु की सृष्टि का भला होगा। और जिसकी औलाद का भला होगा, वो परम पिता परमात्मा आपका भला 100 प्रसेंट जरूर करेंगे। तो सबका भला मांगो और सबका भला करो ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संत बाग के माली की भांति समाज को सुधारते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">इस कलयुग में लोग खुदगर्ज हो गए हैं। अपने अलावा कोई दूसरा दिखता ही नहीं, अपने अलावा वो दूसरों की बात करना पसंद नहीं करते। मन और मनमते लोगों की बातें भाती हैं। लेकिन गुरु पीर-फकीर की बातें अच्छी नहीं लगती। कई बार व्यक्ति ऐसा सोचता है कि, यार! पीर-फकीर तो कहते ही रहते हैं। इनका तो काम ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जी नहीं, ऐसा नहीं है, पीर-फकीर सच्ची बात कहते हैं, सच के राह पर चलाते हैं। उनका कोई स्वार्थी मकसद नहीं होता, उनका एक ही मकसद होता है कि ईश्वर की रियाय, प्रजा का भला हो। ईश्वर ने जो सृष्टि बना दी है, उसके भले के लिए संत, पीर-फकीर ऐसे आते हैं, जैसे बाग में माली जाता है। क्योंकि जैसे ही वो बाग में जाएगा उसको पता चल जाएगा कि इस पौधे को ये बीमारी हुई है, ये टहनियां सूख गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर न काटी तो और सूख जाएंगी। उसी तरह संत पीर-फकीर मालिक की बनाई दुनिया में आते हैं। और वो निगाह मारते हैं उन्हें नजर आता है कि यहां तो लोग बहुत तरह से बीमार हैं। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और मन-माया के पूरी तरह से बीमार हैं। इनकी एकमात्र दवाई ईश्वर का नाम है। जब तक ये दवा नहीं लेंगे और रेगुलर नहीं खाएंगे तो इनके ऊपर से इन बीमारियों का साया नहीं हटेगा। अंदर का नूरी स्वरूप नजर नहीं आएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बच्चों को गलत और सही की पहचान करवाओ</h2>
<p style="text-align:justify;">आप पांच मिनट एकांत में बैठो, ईश्वर के नाम का सुमिरन करो, आपको पता चलेगा कि आपमें कौन सी कमियां हैं और कौन से गुण हैं। जो कमियां हैं, उनको दूर करने की कोशिश करो। और जो गुण हैं, उन पर अहंकार न करो। कमी इंसान में खुद होती है और निकालता भगवान में, पीर-फकीर सतगुरु में हैं। अपनी कमी इंसान को नजर नहीं आती।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या आपने किसी को सरेआम कहते हुए देखा है कि मैं गंदा हूँ, मैं बुरा हूँ, मेरे में ये कमियां हैं। सवाल ही नहीं पैदा होता, क्यों? क्योंकि इंसान ईगो (अहंकार) से भरा हुआ है। गलती करके भी लोग नहीं मानते, बड़ों की छोड़ो, छोटे-छोटे बच्चों से सॉरी कहलवाने के लिए माँ-बाप को पसीना आ जाता है। इतनी अकड़, इतनी ईगो क्यों आती है? ये सब माँ-बाप की कमी से होता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गलती को गलती मानों और सही को सही</h2>
<p style="text-align:justify;">माँ-बाप अगर शुरू से सिखाएं कि गलती को गलती मानों, सही को सही, ये पहचान होनी चाहिए। कई बार आप लाड़-प्यार में आकर बच्चों को सही-गलत का अंतर करवाना भूल जाते हो और बड़े होने पर उनको लाईफ में बहुत सारी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ हाँ ही हाँ सुनी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वो कभी ना करना जानते ही नहीं। उन्होंने प्यार ही प्यार देखा होता है, उन्हें पता ही नहीं होता कि वो गलती भी करते हैं। तो सीधी सी बात है, अगर आपका बच्चा गलत काम करता है, गलत जिद करता है, कभी पूरी न करो। क्योंकि आज छोटी गलत जिद पूरी करते हो तो बड़े होकर कोई गलत जिद करेगा, जो पूरी नहीं कर पाओगे और आपके रिश्ते तार-तार हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए बच्चों की जायज बात ही मानों और जो नाजायज बात है उसके बारे में बच्चों को मनवाओ कि ये गलत है। ताकि बच्चा सही और गलत की पहचान बचपन से ही जान जाए। उसे समझ हो कि ये गलत है और ये सही होता है। हद से ज्यादा कुछ भी सही नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चों का पालन-पोषण सही ढंग से करें। ईश्वर का नाम जपें और काम-धंधा करते हुए अगर सुमिरन करते हैं तो मालिक बिगड़े हुए काम बना देते हैं।</p>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 03:23:49 +0530</pubDate>
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