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                <title>मुद्दा गायब, राजनीति चमकी</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्मी अभिनेता सुशात सिंह राजपूत की मौत का मामला इतना पेचीदा हो गया है कि मूल मुद्दा जो पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी की जांच से सुलझना थी, जो अब नजर ही नहीं आ रहा है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि वह समय दूर नहीं जब राजनीतिक पार्टियां चुनावों में अपनी जीत-हार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/issue-disappears-politics-shines/article-18435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/politics-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फिल्मी अभिनेता सुशात सिंह राजपूत की मौत का मामला इतना पेचीदा हो गया है कि मूल मुद्दा जो पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी की जांच से सुलझना थी, जो अब नजर ही नहीं आ रहा है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि वह समय दूर नहीं जब राजनीतिक पार्टियां चुनावों में अपनी जीत-हार के लिए भी इस मुद्दे के नाम पर वोट मांगने से भी गुरेज नहीं करेंगी। मृतक सुशांत सिंह बिहार से संबंधित है। जांच का सामना कर रही रिया चक्रवर्ती बंगाल से है। इससे अलग ब्यानबाजी के कारण महाराष्ट्र सरकार के साथ उलझ रही फिल्मी अभिनेत्री कंगना रानौत हिमाचल प्रदेश से संबंधित है। बिहार में सत्ताधारी भाजपा सुशांत सिंह के परिवार के साथ खड़ी है। कोलकाता कांग्रेस ने रिया चक्रवर्ती के समर्थन में रैलियां निकालने की शुरूआत कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में शिवसेना कंगन रानौत को भाजपा के समर्थित होने का इशारा कर रही है। बिहार और पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव नजदीक आ रही हैं। तीनों राज्यों की पार्टियां बॉलीवुड की त्रिकोणीय घटना को अपने-अपने समर्थन में जुटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। हालांकि अभिनेताओं का एक बड़ा और गैर-राजनीतिक दायरा होता है जिसमें मुख्य रूप से उनके प्रशंसक होते हैं लेकिन इस राजनीतिक बयानबाजी के दौर में प्रशंसकों का मंच नहीं नजर आ रहा है और न ही कोई आवाज सुनाई दे रही है। वास्तव में राजनीतिक शोर और मीडिया ट्रायल ने गाड़ी को पटरी से उतार दिया है। अभिनेता की मौत दुख:द मामला है जिसकी गुत्थी बिना किसी पक्षपात से सुलझनी चाहिए थी। महाराष्ट्र की क्षेत्रवादी राजनीति ने भी मामले को पेचीदा कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुशांत के परिवार के साथ हमदर्दी के नाम पर मामले को उलझाने की बजाय इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। अपने-अपने राज्य के व्यक्ति के लिए भावनात्मक मुहिम चलाना तर्कहीन व मामले की सही जांच को उलझाना है। बेहतर होगा यदि राजनीतिक पार्टियां वोटों का लालच त्यागकर संयम व जिम्मेदारी से काम करें। सुशांत मौत मामले को चुनावी मुद्दा बनाने से गुरेज करना चाहिए। यदि ऐसे मामले में राजनीतिक रोटियां सेकी गई तब यह संवेदनहीनता की एक ओर बुरी मिसाल इतिहास में दर्ज हो जाएगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2020 09:44:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गार्गी कालेज छेड़छाड़ मामले में सभी आरोपियों को जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[यह वाकिया छह फरवरी का है। जब गार्गी कालेज के वार्षिक समारोह के दौरान कुछ लड़के गेट का दरवाजा तोड़कर जबरन कालेज प्रांगण में घुस गए। वहां उन्होंने छात्राओं के साथ छेड़खानी की।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/all-accused-get-bail-in-gargi-college-issue/article-13043"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/gargi-college-issue.jpg" alt=""></a><br /><h2>सीसीटीवी फुटेज में हुई थी पहचान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> गार्गी कालेज में छात्राओं से छेड़खानी मामले में गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों को शुक्रवार को साकेत कोर्ट ने जमानत दे दी। यह वाकिया छह फरवरी का है। जब गार्गी कालेज के वार्षिक समारोह के दौरान कुछ लड़के गेट का दरवाजा तोड़कर जबरन कालेज प्रांगण में घुस गए। वहां उन्होंने छात्राओं के साथ छेड़खानी की। इस मामले (Gargi College Issue) के तूल पकड़ने पर दिल्ली पुलिस ने बुधवार को दस लोगों को गिरफ्तार किया था। अदालत ने पहले इन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। शुक्रवार को इन्हें अदालत ने दस-दस हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी। सीसीटीवी फुटेज देखने पर सामने आया कि सभी गिरफ्तार लोगों ने कालेज के गेट को तोड़ दिया। और ये जबरन कॉलेज में घुस गए। वहां छात्राओं के साथ छेड़खानी और बदतमीजी की थी। गिरफ्तार किए गए युवकों की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>छह फरवरी को गार्गी कॉलेज के वार्षिक समारोह में हुई थी वारदात</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कॉलेज का गेट तोड़कर जबरन घुस गए थे आरोपी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>छात्राओं के साथ की थी छेड़खानी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>शिकायत के बाद पुलिस ने 10 आरोपियों को किया था गिरफ्तार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सभी आरोपियों को 10-10 हजार के मुचलके पर दी जमानत</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2020 14:18:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विधानसभा में उठा चीन में कोरोना वायरस से राजस्थानियों की सुरक्षा का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[वायरस के मद्देनजर उन्हें शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। देवनानी ने कहा कि चीन से राजस्थान के कई लोग लौटे हैं और उनकी पूरी स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/security-issue-with-china-coronavirus-raised-in-rajasthan-legislative-assembly/article-13000"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/rajasthan-assembly.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">यह बीमारी 27 देशों में दस्तक दे चुकी हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Rajasthan Assembly)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान विधानसभा में आज चीन में कोरोनो वायरस से राजस्थानियों की सुरक्षा करने का मामला उठा। शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक वासुदेव देवनानी ने यह मामला उठाते हुए राज्य सरकार से मांग की कि चीन में फैले कोरोना वायरस से चीन में एक हजार से अधिक लोग मारे जा चुके है और वहां काम कर रहे राजस्थान के जालोर, किशनगढ, चित्तौड़गढ, मकराना, भीलवाड़ा आदि जगहों के कई लोगों की कोरोना वायरस से सुरक्षा करने संबंधी कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वायरस के मद्देनजर उन्हें शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। देवनानी ने कहा कि चीन से राजस्थान के कई लोग लौटे हैं और उनकी पूरी स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वायरस की जांच के लिए पीपीई किट उपलब्ध होने चाहिए जो उपलब्ध नहीं हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सरकार को किट उपलब्ध कराना चाहिए ताकि राजस्थान में यह वायरस नहीं फैले।</li>
<li style="text-align:justify;">चीन में इस बीमारी से 1016 लोगों की मौत हो चुकी है और इसके 42600 मरीज हो गये है।</li>
<li style="text-align:justify;">यह बीमारी 27 देशों में दस्तक दे चुकी हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे पयर्टन, आईटी सहित अन्य उद्योग प्रभावित हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जिससे 14 हजार करोड़ रुपए की हानि की संभावना है।</li>
<li style="text-align:justify;">विधायक अशोक लाहोटी ने कहा कि कोरोनो वायरस के प्रति राज्य सरकार को सजग रहने की जरुरत है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">राजस्थान: बच्चों की मौत के मामले को लेकर भाजपा सदस्यों ने वेल में की नारेबाजी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान विधानसभा में विपक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने आज प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बच्चों की मौत के मामले को लेकर आज सदन के वेल में आकर नारेबाजी की। प्रश्नकाल में विधायक मदन दिलावर के कोटा के जेके लोन अस्पताल में मौत के संबंध में पूछे गये प्रश्न का चिकित्सा मंत्री डा रघु शर्मा के जवाब देते हुए पिछले पांच साल में हुई मौतों का जिक्र करते ही भाजपा के सदस्य खड़े हो गये और जोर जोर से बोलने लगे जिससे सदन में शोरगुल शुरु हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान सत्ता पक्ष से एक सदस्य उठकर एक कागज दिखाते हुए विपक्ष की तरफ आये और भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी को थमा दिया, जिसका विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया। बाद में इस कागज को श्री देवनानी ने फाड़कर फेंक दिया। इस बीच अध्यक्ष डा सी पी जोशी ने अगला प्रश्न पुकार लिया और विपक्ष के सदस्य वेल में आ गये और नारेबाजी करने लगे। सदस्य शर्म करो, शर्म करो, चिकित्सा मंत्री हाय हाय, बच्चों की हत्यारी सरकारी निकम्मी हैं के नारे लगाये। सदन में करीब ग्यारह बजकर 51 मिनट पर शोरगुल शुरु हुआ जो बारह बजे प्रश्नकाल समाप्त होने पर विपक्षी सदस्यों के अपनी जगह पर आ जाने से थम गया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/security-issue-with-china-coronavirus-raised-in-rajasthan-legislative-assembly/article-13000</link>
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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2020 16:47:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Budget session : सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर आज संसद में हंगामे के आसार</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के बजट सत्र में सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और राजद समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/budget-session-uproar-in-parliament-today-on-the-issue-of-caa-nrc/article-12901"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/budget-session.jpg" alt=""></a><br /><h2>विपक्ष ने राज्यसभा में इन मुद्दाें पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया |Budget session</h2>
<h6>Edited By Vijay Sharma</h6>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> संसद के बजट सत्र <strong>(Budget session )</strong> में सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और राजद समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। विपक्ष ने राज्यसभा में इन मुद्दाें पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर, लाेकसभा में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियां भी नोटिस दे सकती हैं।</p>
<h2>तृणमूल सांसदों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान भी प्रदर्शन किया था। Budget session</h2>
<p>वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण में सीएए, एनआरसी और कश्मीर में प्रतिबंधों को शामिल नहीं करने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी इसमें संशोधन की मांग कर रही है। तृणमूल सांसदों ने शुक्रवार को संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान भी प्रदर्शन किया था।</p>
<h2>विपक्ष सीएए-एनआरसी के विरोध में | Budget session</h2>
<ul>
<li><strong>विपक्ष ने संसद द्वारा पारित नागरिकता कानून को असंवैधानिक करार दिया है । </strong></li>
<li><strong>और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। </strong></li>
<li><strong>इस पर इसी महीने सुनवाई होने वाली है। </strong></li>
<li><strong>विपक्षी पार्टियों ने उन मुख्यमंत्रियों से एनपीआर लागू नहीं करने का आग्रह किया है। </strong></li>
<li><strong> जो नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं।</strong></li>
<li><strong>इस दशक का पहला बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हुआ। </strong></li>
<li><strong>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया। </strong></li>
<li><strong>सोमवार से लोकसभा और राज्यसभा राष्ट्रपति के </strong><strong>अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 11:17:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विस में पुरानी पैंशन का मुद्दा उठाएंगे भूपेंद्र हुड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[इस के मद्देनजर प्रदेश कर्मचारियों के सबसे बड़े मुद्दे पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करवाने की मांग को समर्थन देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मांग को सदन में उठाने का ऐलान किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/will-raise-old-pension-issue-in-hooda-vis/article-12486"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/bhupendra-hooda.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">विधानसभा सत्र की तैयारी : भाजपा-जजपा पर निशाना लगाएगी कांग्रेस (Bhupendra Hooda)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> कर्मचारियों की मांग को कांग्रेस ने दिया समर्थन</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> 20 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में प्रदेश के कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के जरिए भाजपा-जजपा सरकार को घेरने की तैयारी में प्रदेश कांग्रेस जुट गई है। इस के मद्देनजर प्रदेश कर्मचारियों के सबसे बड़े मुद्दे पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करवाने की मांग को समर्थन देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Hooda) ने इस मांग को सदन में उठाने का ऐलान किया है। कर्मचारियों ने एक मांग पत्र पूर्व मुख्यमंत्री को उनके आवास पर सौंपा। पेंशन बहाली संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधि मंडल ने इस बाबत मंगलवार को हुड्डा से मुलाकात की।</p>
<h3>नैशनल पैंशन सिस्टम के खिलाफ आंदोलनरत है संघर्ष समिति</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पेंशन बहाली संघर्ष समिति लगातार बाजार आधारित नेशनल पेंशन सिस्टम को बंद करने के लिए आंदोलन कर रही है। पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी कई बार कर्मचारियों की इस मांग को उठा चुके हैं। वहीं दीपेंद्र हुड्डा कर्मचारियों के साथ सड़क पर और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पार्टी विधायकों के साथ सदन में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भूपेंद्र हुड्डा के सरकार से सवाल</h3>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीजेपी-जजपा गठबंधन सरकार से कहा कि वे बताएं कि पुरानी पेंशन स्कीम पर उसका क्या स्टैंड है? उन्होंने कहा कि क्या इसे कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में जगह दी जाएगी? क्या जेजेपी 5100 रुपये बुढ़ापा पेंशन को इसमें शामिल करेगी? या कर्मचारियों की तरह बुजुर्गों से भी धोखा किया जाएगा? आखिर गठबंधन ने अबतक अपना कॉमन मिनिमम प्रोग्राम क्यों नहीं जारी किया? सरकार इस पर क्यों टालमटोल कर रही है?</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये गाड़ी दूर तक नहीं चलेगी?</h3>
<p style="text-align:justify;">हुड्डा ने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने भी गठबंधन की सरकार बनाई है, लेकिन सरकार बनने के साथ ही पार्टी ने अपना कॉमन मिनिमम प्रोग्राम जारी कर दिया था। इससे सरकार के काम में स्पष्टता आती है। लेकिन लगता है कि बीजेपी-जेजेपी सरकार अपने गठबंधन और मंत्रियों की अंतर-कलहों में घिरी हुई है। सरकार के भीतर ही किसी तरह का सामंजस्य नजर नहीं आता।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ये दो पहियों की ऐसी गाड़ी है, जिसके दोनों पहिए अलग-अलग दिशा में दौड़ रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसीलिए आमजन में चर्चा जोरों पर है कि ये गाड़ी दूर तक नहीं चलेगी।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p style="text-align:justify;"><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 19:49:41 +0530</pubDate>
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                <title>हर मुद्दे पर विवाद उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एनपीआर का उद्देश्य देश में हर सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बॉयोमीट्रिक विवरण शामिल होंगे। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए यह जनसांख्यिकीय विवरण आवश्यक है, जिसके तहत नाम, मां-पिता या पति का नाम, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, वर्तमान पते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/controversy-is-not-appropriate-on-every-issue/article-12028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/nrc-bill.jpg" alt=""></a><br /><h4>एनपीआर का उद्देश्य देश में हर सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बॉयोमीट्रिक विवरण शामिल होंगे। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए यह जनसांख्यिकीय विवरण आवश्यक है, जिसके तहत नाम, मां-पिता या पति का नाम, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, वर्तमान पते पर रहने की अवधि, स्थायी निवास पता, व्यवसाय, शैक्षणिक योग्यता से लेकर वर्तमान स्थिति की जानकारी देनी होगी।</h4>
<h4><strong>लेखक राजेश महेश्वरी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन काूनन के विरोध में जिस तरह की हिंसक घटनाएं देश के कई राज्यों में घटी, उनका जितनी निंदा की जाए उतना कम है। असल में जिस कानून का देश के नागरिकों से कुछ लेना देना ही नहीं है, उस पर हिंसा समझ से परे है। लेकिन चंद ताकतों ने देश के एक बड़े वर्ग का उकसाने, भरमाने और बरगालने का काम किया जिसका नतीजा सड़कों पर हिंसा प्रदर्शनों के रूप में दिखा। सरकार के हर निर्णय का विरोध (Controversy) करना विपक्ष ने अपना धर्म समझ लिया है। अपने राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने के लिये षडयंत्र के तहत जब राजनीतिक दल आम लोगों को उसमें शामिल कर विरोध करने लगते हैं तो अनियत्रिंत भीड़ विस्फोटक स्थितियां पैदा कर देती है।</p>
<h4>नागरिकता कानून से पहले मोटर वाहन कानून का भी देशभर में विरोध हुआ था। लोग हेल्मेट और सीट बेल्ट बांधने को तैयार नहीं हैं। यातायात नियमों का पालन वो करना नहीं चाहते।</h4>
<p>हर काम में राजनीति। हर निर्णय का विरोध। ऐसी प्रवृति देश में बड़ी तेजी से आम आदमी में फैल रही है। विपक्ष के राजनीतिक दल इस विरोध को हवा देने का काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन कानून के बाद अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू होता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने जनगणना-2021 की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंजूरी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले साल अप्रैल से सितंबर के बीच होने वाली इस जनगणना पर 8,500 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। जनगणना आयोग ने कहा है कि एनपीआर का उद्देश्य देश के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। जनगणना पूरे देश की होगी, जबकि एनपीआर में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल गया है। असम को इस प्रक्रिया से इसलिए बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां एनआरसी हो चुका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एनपीआर को लेकर केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश में एक बड़ा वर्ग नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ उद्वेलित है।</h4>
<p style="text-align:justify;">देश में बड़ी आबादी ऐसी भी है, जो एनसीआर और एनपीआर में अंतर नहीं समझती। इसलिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में अंतर समझना-समझाना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधे शब्दों में कहा जाए तो एनपीआर देश में रहने वाले निवासियों का राष्ट्रीय डाटा तैयार करने की रूटीन कवायद है। इसमें विदेशी भी शामिल किए जाएंगे, जो 6 माह से अधिक समय से एक स्थान पर रहते होंगे या आगामी 6 माह में बसने की योजना बना रहे होंगे। आबादी के स्तर पर बदलाव स्वाभाविक हैं, क्योंकि कोई दिवंगत होता है, तो कोई जन्म लेता है, कोई कामकाज के सिलसिले में अपना पुश्तैनी घर, गांव या कस्बा भी छोड़ता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">बदलाव के ऐसे असंख्य आंकड़े सामने कैसे आएंगे या सरकार की जानकारी में कैसे होंगे? बेशक सरकारें और प्रशासन इसी आधार पर योजनाओं और नीतियों के प्रारूप तय करते हैं। लेकिन चूंकि देश में नागरिकता कानून से लेकर एनआरसी की बातें चल रही हैं, ऐसे में सरकार के हर कदम को विपक्षी दल उससे जुड़ा बता रहे हैं जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।</h5>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि एनपीआर जैसी कवायद केवल भारत में ही होती है। विश्व के अधिकतर देशों में एनपीआर का प्रावधान है। महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय एनपीआर की व्याख्या इस तरह करता है कि एनपीआर देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। यह नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम-2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय (ग्रामध्उप-टाउन), उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">एक सामान्य निवासी एनपीआर के उद्देश्यों के तहत वह व्यक्ति है, जो पिछले 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहता है या जो अगले 6 महीने या उससे अधिक समय तक उस क्षेत्र में निवास करने का इरादा रखता है।</h5>
<p style="text-align:justify;">आबादी के आंकड़ों के हिसाब से योजनाओं का प्रारूप बनता है और वो जमीन पर उतर पाती हैं। एक और गौरतलब तथ्य यह है कि भारत में 3.5 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं। कुछ भटकी प्रजातियां भी हैं और कुछ हजार सिर्फ गन्ना काटने वाले समुदाय भी हैं। करीब 2 करोड़ भिखारी भी बताए जाते हैं। ये सभी अस्थायी और अस्थिर निवासी हैं। बेशक वे सभी ‘भारतीय’ ही होंगे। योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आंतरिक सुरक्षा वहां भी एक संवेदनशील समस्या है। तो समय-समय पर उनका हिसाब-किताब क्यों नहीं होना चाहिए? 2003 में तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने एक नियम बनाया था-नागरिकों के पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करना। उसके तहत गांव, कस्बा, तहसील, जिला, राज्य और देश के स्तर पर यह काम किया जाना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">लिहाजा एनपीआर देश के स्वाभाविक निवासियों का रजिस्टर है। इसका पालन यूपीए सरकार ने भी किया। बेशक पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर किया गया, लेकिन एनपीआर की प्रक्रिया शुरू की गई।</h4>
<p style="text-align:justify;">हमारी राष्ट्रीय जनसंख्या का मौजूदा आंकड़ा भी जानना जरूरी है। सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक अनुपात के यथार्थ भी सामने आने चाहिए। सवाल है कि इस विश्लेषण में ऐसी कौन-सी साजिशें छिपी हैं, जिनके मद्देनजर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और केरल की वामपंथी सरकार ने एनपीआर की प्रक्रिया लागू करने से इनकार कर दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पंजाब राज्यों के अलावा पुडुचेरी संघ शासित क्षेत्र में कांग्रेस की सरकारें हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">कांग्रेस महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में भी शामिल है। इन सरकारों को अभी निर्णय लेना है और कांग्रेस भी आधिकारिक तौर पर खामोश है। एनपीआर की अधिसूचना केंद्र सरकार ने 31 जुलाई, 2019 को जारी की थी।</h5>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद लगभग सभी राज्य सरकारें अधिसूचना जारी कर चुकी हैं। गृहमंत्री अमित शाह और सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी इन तथ्यों को स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार यह भी स्पष्ट दावा कर रही है कि एनआरसी और एनपीआर में कोई संबंध नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनपीआर का डाटाबेस एनआरसी में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। तो ओवैसी सरीखे नेता किस आधार पर यह अफवाह फैला रहे हैं कि एनपीआर ही एनआरसी का पहला कदम है? बहरहाल, कई विपक्षी दल इसे भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में लग गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अच्छा हुआ कि गृहमंत्री अमित शाह ने समय पर सफाई दे दी कि एनपीआर का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। देश को मालूम होना चाहिए कि उसके यहां कौन-कौन रहते हैं।</h4>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों व अन्य संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में राजनीति करने की बजाय लोगों को सही जानकारी दें। हर मामले में राजनीति और विवाद से देश और देशवासियों का नुकसान होना लाजिमी है। सीधी सी बात है जब तक आपके पास आंकड़ें नहीं होंगे तब तक आप विकास का खाका नहीं खींच पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में राजनीति करने के लिये तमाम मुद्दे और मसले बाकी हैं, राजनीतिक दलों का उन पर ध्यान लगाकर देश की जनता की भलाई सोचनी चाहिए। गृहमंत्री इस मामले में अपनी राय एक साक्षात्कार के माध्यम से देश के समक्ष साफ कर चुके हैं, अब इस मामले में राजनीति बंद होनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2019 14:40:28 +0530</pubDate>
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                <title>तेजस्वी ने जारी किया घोषणा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[पटना, (एजेंसी) । नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज पार्टी कार्यालय में राजद का घोषणा पत्र जारी किया, जिसे इस बार प्रतिबद्धता पत्र का नाम दिया गया है। राजद के घोषणापत्र में ‘हर थाली में खाना और हर हाथ में कलम’ देने की बड़ी बात कही गयी है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>पटना, (एजेंसी) ।</strong> नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज पार्टी कार्यालय में राजद का घोषणा पत्र जारी किया, जिसे इस बार प्रतिबद्धता पत्र का नाम दिया गया है। राजद के घोषणापत्र में ‘हर थाली में खाना और हर हाथ में कलम’ देने की बड़ी बात कही गयी है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने, मंडल कमीशन के मुताबिक आरक्षण देने, प्रवासी बिहारियों के लिए हेल्पलाइन जारी करने की भी बात कही गई है।</p>
<h2>घोषणा पत्र से सवर्ण आरक्षण गायब</h2>
<p>राजद के घोषणा पत्र में सामाजिक न्याय की बात तो की गई है लेकिन इस घोषणा पत्र से सवर्ण आरक्षण गायब है। इस बारे में जब तेजस्वी यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमने सवर्ण आरक्षण का विरोध नहीं किया है लेकिन राजद चाहती है कि जातीय जनगणना के आधार पर ही आरक्षण की व्यवस्था हो। राजद दलितों और पिछड़ों को आबादी के अनुसार आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही हम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।</p>
<h2>ताड़ी को करेंगे टैक्स फ्री</h2>
<p>उन्होंने कहा कि राजद सभी जातियों की जनगणना को सुनिश्चित करेगा। गरीब सवर्णों को भी आरक्षण मिलना चाहिए। हम मीडिया की स्वतंत्रता चाहते हैं। मीडिया को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि ताड़ी को टैक्स फ्री किया जाएगा।</p>
<h2>कांग्रेस के घोषणा पत्र से राजद सहमत</h2>
<p>राजद कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान घोषणा पत्र जारी करते हुए तेजस्वी ने कहा कि कांग्रेस का घोषणा पत्र सही है और राजद उससे सहमत है। तेजस्वी ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी प्रोग्राम का पूरे भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विस्तार किया जाएगा। हर राज्य के हिसाब से कम से कम 150 दिन का न्यूनतम वेतन पर व्यस्त व्यक्ति को मिलेगा।</p>
<p>तेजस्वी यादव ने कहा कि हम सामाजिक न्याय की दिशा में मंजिल हासिल करेंगे। उस लक्ष्य को हासिल करेंगे, जिसे बाबा साहब आंबेडकर ने दिया था और मेरे पिता लालू प्रसाद ने गरीबों की भलाई के लिए देखा था।</p>
<h2>नहीं दिखे तेजप्रताप, तेजस्वी ने नहीं दिया जवाब</h2>
<p>घोषणा पत्र जारी करने के समय प्रेस कांफ्रेंस में राजद के कई बड़े नेता शामिल रहे, लेकिन इस प्रेस कांफ्रेंस में राबड़ी देवी या तेजप्रताप नजर नहीं आए। इस दौरान उन्होंने तेजप्रताप यादव पर कुछ भी बोलने से मना किया और कहा कि आज सिर्फ मैनिफेस्टो पर बात करूंगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2019 12:48:58 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अयोध्या मुद्दा पुन: गरमाया</title>
                                    <description><![CDATA[राजनेता अपवित्र लोग हैं। वे चाहे धर्म हो, दंगे हों या घोटाले हर किसी मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण को सबसे अच्छा दृष्टिकोण मानते हैं और जब अपना सत्ता का आधार बचाने की बात आती है तो वे सत्ता के भक्त बन जाते हैं और कट्टरपंथी बन जाते हैं। संघ परिवार द्वारा अयोध्या मुद्दे पर जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">राजनेता अपवित्र लोग हैं। वे चाहे धर्म हो, दंगे हों या घोटाले हर किसी मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण को सबसे अच्छा दृष्टिकोण मानते हैं और जब अपना सत्ता का आधार बचाने की बात आती है तो वे सत्ता के भक्त बन जाते हैं और कट्टरपंथी बन जाते हैं। संघ परिवार द्वारा अयोध्या मुद्दे पर जारी जिहाद इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। इसकी शुरूआत पिछले अक्तूबर में हुई जब उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि वह 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को चुनौती देने वाली 16 अपीलों पर तत्काल सुनवाई करे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद मामले में 2.77 एकड़ भूमि के बारे में निर्णय दिया था कि इसे रामलला, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के बीच बराबर बांट दिया जाए और उच्तचम न्यायालय ने इस मामले को 4 जनवरी तक के लिए टाल दिया था। इससे नाराज हिन्दुत्व ब्रिगेड ने सरकार से मांग की कि वह इस संबंध में अध्यादेश जारी करे जिसे प्रधानमंत्री ने यह कहते हए अस्वीकार कर दिया था कि इस बारे में कोई भी निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। किंतु उच्चतम न्यायालय ने फिर से संघ परिवार की इच्छानुसार निर्णय नहीं लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर उठाए जा रहे शोर के समय के बारे में अनेक प्रश्न उठते हैं। इसकी तात्कालिकता क्या है? चुनावों के लिए भाजपा के लिए अयोध्या मुद्दा महत्वपूर्ण क्यों है? चुनाव के समय ही संघ परिवार इस मुद्दे को क्यों उठाता है? 1989 से यही स्थिति है। संघ परिवार चुनाव आते ही इस मुद्दे को उठा देता है और इससे चुनावी लाभ उठाता है। 1989 में राम मंदिर के शिलान्यास से लेकर संघ परिवार के लिए अयोध्या एक केन्द्रीय बिन्दु बन गया है। विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल इसे राष्ट्रवाद का मुद्दा बताते हैं और उसे भारतीय चेतना का केन्द्र बताते हैं। आडवाणी की रथ यात्रा ने इसे हिन्दू राष्ट्रवाद का स्वरूप दिया। उसके बाद कार सेवा की गयी और 1999 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया। संघ परिवार किसी भी चुनाव आने से कुछ माह पूर्व अयोध्या में मंदिर निर्माण का वायदा करता है। 1991 में उसने ऐसा किया और भाजपा ने इसका लाभ उठाया क्योंकि 1984 में भाजपा के लोक सभा में दो सदस्य थे जो 1991 में 91 तक पहुंच गयी और उसके बाद केन्द्र और राज्यों में भाजपा को इससे लाभ मिलता रहा। 1996 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में भाजपा अकेली सबसे बड़ी पार्टी बनी। 1999 के लोक सभा चुनाव में भाजपा ने वायदा किया कि वर्ष 2000 तक मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। 2004 और 2009 में भी यही स्थिति रही।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भाजपा के लोक सभा में 273 सांसद हैं और उत्तर प्रदेश में उसकी सरकार है। किंतु शेर आया, शेर आया की तरह यह मुद्दा अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। उच्च जाति के हिन्दुओं का भाजपा से मोह भंग हो रहा है और कुछ लोग पुन: कांग्रेस की ओर देखने लग गए हैं जबकि नई पीढी इसे मुद्दा ही नहीं मानती। वह रोजगार, आर्थिक विकास, जीवन की गुणवत्ता इन्हें ज्यादा महत्व देती है जबकि उच्चतम न्यायालय ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाने का आदेश दिया है और संघ परिवार को लगने लगा है कि इस मुद्दे से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता है फिर भी वह इसे छोड़ना नहीं चाहता है। हाल के सप्ताहों में अयोध्या मुददे का फिर गरमाना विरोधाभास है क्योंकि 2014 में भाजपा अच्छे दिन, रोजगार, भ्रष्टाचार मुक्त शासन, और नए भारत के निर्माण के वायदे से जीती थी। किंतु हाल के विधान सभा चुनावों में तीन बड़े राज्यों में भाजपा की हार और आम आदमी का भाजपा से मोह भंग होने के कारण भाजपा की हताशा समझी जा सकती है और इसलिए वह आम चुनावों के लिए नया फार्मूला तलाश रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक वर्ष पूर्व की तुलना में आज भाजपा की जीत अनिश्चित लग रही है इसलिए पुन: अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे को पुन: उछाला गया है और भाजपा को आशा है कि इससे हिन्दू वोट एकजुट होंगे और उसे पुन: भारत की राजगद्दी पर बैठाएंगे। इस मुद्दे को आगे करने में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की अग्रणी भूमिका है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ सर चालक ने कहा है कि अयोध्या में केवल राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा तो दूसरी विश्व हिन्दू परिषद का कहना है कि न्यायालय के निर्णय के लिए हिन्दू अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं। भगवा ब्रिगेड़ भी दुविधा की स्थिति में है कि वह सरकार का रूख अपनाए या इस मुद्दे पर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाए। वर्तमान में मोदी समर्थक गुट यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और वह राम मंदिर के निर्माण के लिए माहौल बनाना चाहता है जबकि कट्टरवादी गुट इस मुद्दे पर पांव पीछे खंींचने से नाराज हैं। परिवार में कुछ लोगों का मानना है कि संघ इस आंदोलन को कमजोर होने नहीं दे सकता है इसीलिए अयोध्या मुद्दे को पुन: उछाला गया है। यदि सरकार और अपने संगठन में से किसी एक को चुनने की बारी आयी तो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ अपरे संगठन को चुनेगा हालांकि केन्द्र के निर्णयों और नीतियों से वह लाभान्वित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के लिए अयोध्या करो और मरो का संघर्ष है क्योंकि उत्तर प्रदेश से लोक सभा में 80 सीटें हैं और उसे आशा है कि भगवान राम उस पर कृपा करेंगे। हार का मतलब है भारत पर शासन करने और कांगे्रस मुक्त भारत का सपना टूट जाएगा और उसके राजनीतिक अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो जाएगा। लगता है मोदी सरकार के पास अब समय नहीं है क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए संघ समर्थक अपनी रूपरेखा तय करने लगे हैं और इसीलिए हिन्दुत्व ब्रिगेड चिर-परिचित फार्मूले पर उतर आए हैं और उन्होने मंदिर को फिर से मुख्य मुद्दा बनाया है जिस पर फिर से मतदाताओं का धु्रवीकरण किया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद ने प्रत्येक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र में धर्म संसद आयोजित करने की योजना बनायी है। विश्व हिन्दू परिषद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए जन समर्थन जुटाने हेतु घर-घर अभियान की तैयारी शुरू कर रहा है। यह मुद्दा हमेशा से उनकी धर्म आधारित राजनीति का हिस्सा रहा है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>पूनम आई कौशिश</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ayodhya-issue-again/article-7379</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Jan 2019 19:24:24 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास के मुद्दे पर लडेगें चुनाव: सैनी</title>
                                    <description><![CDATA[अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा सीकर। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा है कि अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। श्री सैनी ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि पार्टी चुनाव में जाति ,धर्म के मुद्दे नहीं उठाकर विकास को मुद्दा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा</h1>
<p><strong>सीकर।</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा है कि अगला विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। श्री सैनी ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि पार्टी चुनाव में जाति ,धर्म के मुद्दे नहीं उठाकर विकास को मुद्दा बनायेगी। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष में भजपा सरकार में काफी काम हुआ है। उन्होंने दोहराया कि वह अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाकर ही घर में प्रवेश करेगें। पार्टी दफ्तर में वह रात -दिन कार्यकतार्ओं की सुनवाई करेगें। भाजपा मे विवाद को खारिज करते हुए श्री सैनी ने कहा कि पार्टी एक है तथा सभी नेता मिलकर चुनाव लडेंगें। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी एवं चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया के बीच विवाद को सोशल मीडिया की उपज बताते हुए कहा कि तेज आवाज में बातचीत को झगड़ा नहीं कहा जा सकता।श्री सैनी ने कहा कि उन्हें जातीय आधार पर पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनाया। मैं सभी को साथ लेकर काम करूंगा। उन्होंने सालासर बालाजी के दर्शन भी किये ।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/saini-contest-development-issue/article-4651</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Jul 2018 00:46:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर मामले पर बोली महबूबा, ‘मोदी निकाल सकते हैं स्थायी समाधान’</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास प्रचंड जनादेश है और यदि वह तय कर लें तो कश्मीर मसले का स्थायी हल निकालकर इतिहास रच सकते हैं । एक अंग्रेजी दैनिक के अनुसार सुश्री मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर मसले के समाधान का एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/mehbooba-speech-on-kashmir-issue-modi-can-remove-permanent-solution/article-3506"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/mahboba.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास प्रचंड जनादेश है और यदि वह तय कर लें तो कश्मीर मसले का स्थायी हल निकालकर इतिहास रच सकते हैं । एक अंग्रेजी दैनिक के अनुसार सुश्री मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर मसले के समाधान का एक ही रास्ता है और वह है बातचीत का। उन्होंने कहा ,’मुझे इस बात की खुशी है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जब केंद्र के एक प्रतिनिधि कोे बातचीत के लिए भेजा गया है और उन्हें कैबिनेट सचिव का दर्जा दिया गया है जबकि इससे पहले किसी भी वार्ताकार को यह दर्जा नहीं दिया गया था। सुश्री मुफ्ती ने कहा कि इस बार ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो बहुत ही शक्तिशाली हैं और उनके पास प्रचंड जनादेश है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि वह तय कर लें तो वह समूचे परिदृश्य को बदल सकते हैं और और हमेशा -हमेशा के लिए कश्मीर मसले का समाधान करके इतिहास रच सकते हॅैं। पीडीपी -भाजपा गठबंधन सरकार की अगुवाई कर रही सुश्री मुफ्ती ने श्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा ,’ वह खुले विचारों के और जमीन से जुड़े नेता हैं। वह आम जुबान में बात करते हैं। मैं जब परेशान होती हूं तो वह मुझे आश्वस्त करते हैं। ‘ सुश्री मुफ्ती ने कहा कि स्वायत्तता की बात को ‘राष्ट्रविरोधी ‘करार देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ‘स्वशासन’ की बात करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसमें बातचीत और मेलमिलाप तथा विभिन्न मार्गाें को खोले जाने की बात है और यह सबकुछ ‘एजेंडा फार अलायंस’ में शामिल है। उनका कहना था कि भाजपा के साथ सरकार बनाकर उन्होंने सबकुछ दांव पर लगा दिया । कांग्रेस के साथ भी सरकार बनायी जा सकती थी और तब उन्हें इतनी आलोचनाओं का भी सामना न करना पड़ता। अनुच्छेद 370 को जम्मू कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाला पुल करार देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश के लोगों ने 70 वर्ष पहले राज्य की जनता के साथ इस अनुच्छेद की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Nov 2017 05:55:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश को जंग की तरफ धकेल रही है मोदी सरकार: चीनी मीडिया</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने मोदी सरकार पर साधा निशाना बीजिंग।  भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। बढ़ते तनाव के बीच चीनी मीडिया आग में घी डालने का काम कर रहा है।डोकलाम विवाद के बीच चीन ने एक बार फिर सीधे-सीधे मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chinese-media-comment-against-modi-government/article-2909"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/india-v-china.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चीन ने मोदी सरकार पर साधा निशाना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग।</strong>  भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। बढ़ते तनाव के बीच चीनी मीडिया आग में घी डालने का काम कर रहा है।डोकलाम विवाद के बीच चीन ने एक बार फिर सीधे-सीधे मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि मोदी सरकार भारत को जंग की ओर धकेल रही है। अखबार ने यहां तक कहा कि युद्ध होने की स्थिति में नतीजा जगजाहिर है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने कहा कि मोदी हमारे लिए हार्ड लाइन स्टैंड अपनाकर अपनी अवाम की किस्मत के साथ जुआ खेल रहे हैं और अपने मुल्क को जंग की ओर धकेल रहे हैं। मोदी को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की जबरदस्त ताकत का अंदाजा होना चाहिए, जो डोकलाम में भारतीय सेनाओं को कुचलने में सक्षम है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">युद्ध की स्थिति में परिणाम जगजाहिर</h4>
<p style="text-align:justify;">अखबार ने कहा कि पीएलए ने सैन्य टकराव के लिए पर्याप्त तैयारी की है। युद्ध की स्थिति में परिणाम जगजाहिर है। मोदी सरकार पीएलए की ताकत के बारे में पता होना चाहिए। भारतीय सीमा पर तैनात सैनिक पीएलए क्षेत्र बलों के लिए कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। यदि की स्थिति में पीएलए सीमा क्षेत्र में सभी भारतीय सैनिकों को खत्म करने में पूरी तरह सक्षम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मिलिट्री ऑपरेशन की आशंका</h3>
<p style="text-align:justify;">हू झियॉन्ग शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस में रिसर्च फेलो हैं। इनके मुताबिक चीन अपना मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने से पहले भारत की फॉरेन मिनिस्ट्री को इन्फॉर्म भी करेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डोकलाम से सेना को नहीं हटाया जाएगा: भारत</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद भारत ने चीन को जवाब देते हुए सेना हटाने से इंकार किया है। भारत की ओर से कहा गया है कि एक भी भारतीय सैनिक डोकलाम से पीछे नहीं हटेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chinese-media-comment-against-modi-government/article-2909</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 04:38:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>किसी भी मुद्दे अथवा विवाद का हल सिर्फ बातचीत: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। चीन के साथ चल रहे डोकलाम विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों में चीन को घेरा है। नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मुश्किल मुद्दों, विवादों को सिर्फ बातचीत के रास्ते ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने खुद को प्राचीन भारत की परंपरा में यकीन करने वाला बताया। मोदी ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/conversation-the-solution-of-any-issue-modi/article-2907"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/modi-in-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन के साथ चल रहे डोकलाम विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों में चीन को घेरा है। नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मुश्किल मुद्दों, विवादों को सिर्फ बातचीत के रास्ते ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने खुद को प्राचीन भारत की परंपरा में यकीन करने वाला बताया। मोदी ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘यह एक पुरानी भारतीय अवधारणा है जिसमें संवाद और बहस पर विचारों के आदान-प्रदान के मॉडल को अपनाया गया है। जिसमें किसी भी मुद्दे को बातचीत के जरिए हल किया जाता था।’</p>
<p>‘संवाद-ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन कॉन्फ्लिक्ट अवॉयडेंस एंड एंटरटेनमेंट कॉन्शियसनेस’ कार्यक्रम को वीडियो मैसेज के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “21वीं सदी में दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से जुड़े हुए और एक-दूसरे पर निर्भर हैं। फिर भी यह सदी आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन (climate change) जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है। मुझे भरोसा है कि इसका हल एशिया की सबसे पुरानी बातचीत और चर्चा की परंपरा से ही निकलेगा।”</p>
<h2>भारत-चीन के बीच सिक्किम में सीमा विवाद</h2>
<p>गौरतलब है कि भारत-चीन के बीच सिक्किम में सीमा विवाद काफी बढ़ चुका है। चीन, भूटान के डोकलाम में सड़क बना रहा है और भारत ने इसका जोरदार विरोध कर रहा है।</p>
<p>भूटान का डोकलाम पठार भारत (सिक्किम), चीन, भूटान के ट्राइजंक्शन पर है। डोकलाम को चीन डोंगलांग कहता है। इस इलाके में चीन की दखलंदाजी और सड़क बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने से भारत और भूटान को परेशानी है।</p>
<p>मोदी ने कहा, “तर्क शास्त्र (डिबेट) प्राचीन भारत का ही कॉन्सेप्ट है, बातचीत और चर्चा के जरिये इसे पाया गया और यह विवादों को खत्म करने और विचारों को एक-दूसरे से साझा करने का मॉडल बना।”<br />
– “भारत में मानवता का लंबा इतिहास रहा है, कई धर्मों, सभ्यताओं और अध्यात्म में इसकी गहरी जड़ें हैं। इसके रास्ते ही हमनें कई सवालों के जवाब खोजे हैं।”</p>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 03:34:43 +0530</pubDate>
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