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                            <item>
                <title>सीएम अमरिंदर ने शिअद को केंद्र से गठबंधन तोड़ने की चुनौती दी</title>
                                    <description><![CDATA[कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cm-amarinder-challenges-siyad-to-break-alliance-with-center/article-12646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/cm-amarinder-captain.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सीएए कानून को पास कराने में शामिल थी शिअद (CM Amarinder Captain)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के इस दावे को हास्यास्पद करार दिया कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर मतभेदों के कारण वह दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही और चुनौती दी कि पार्टी केंद्र से संबंध तोड़े। कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</h3>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन ने अकाली नेताओं से सवाल किया,‘क्यों नहीं केंद्र में मंत्री पद छोड़ कर आप देशवासियों को दिखा देते कि आप सचमुच विभाजनकारी और विनाशकारी सीएए के खिलाफ हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली से पहले शिअद हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी भाजपा से अलग चुनाव लड़ा था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसलिए सीएए पर मतभेदों को कारण बताना स्वीकार्य नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि सच्चाई यही है कि शिअद ने महसूस कर लिया है कि दिल्ली में उनका कोई जनाधार नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकती।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">या फिर भाजपा उन्हें मांगी गई संख्या की सीटें देने को तैयार नहीं है जिससे उन्होंने यह निर्णय किया। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल पर सीएए को लेकर विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि अकालियों का राष्ट्रीय महत्व के बड़े मुद्दे पर सैद्धांतिक रुख नहीं है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 16:10:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चोरों की एटीएम तोड़ने की नाकाम कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[परमजीत कौर ब्रांच मैनेजर कोआॅप्रेटिव बैंक खाई फेमे के ने बताया कि बैंक के साथ ही बैंक का एटीएम लगा हुआ है, जिसमें तकरीबन 5 लाख का तक कैश पड़ा था, जिसे रात करीब ढाई बजे अज्ञात व्यक्तियों ने गैस कटर के साथ तोड़ने की कोशिश की और उसकी तोड़फोड़ कर दी, जिसके साथ एटीएम का काफी नुक्सान हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/attempt-to-break-atm-failed/article-12509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/failed-attempt.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई तस्वीरें, जांच में जुटी पुलिस (Failed attempt)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजपुर(सच कहूँ/सतपाल थिन्द)।</strong> फिरोजपुर -फाजिल्का रोड पर स्थित गांव खाई फेमे के स्थित कोआप्रेटिव बैंक के लगे एटीएम को आधी रात लूटने की कोशिश में कुछ व्यक्तियों की ओर से तोड़ने की कोशिश की गई जो नाकाम हुई। दिन चढ़ते जब इस का लोगों को पता चला तो पुलिस को सूचित किया गया और मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन करते आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। परमजीत कौर ब्रांच मैनेजर कोआप्रेटिव बैंक खाई फेमे के ने बताया कि बैंक के साथ ही बैंक का एटीएम लगा हुआ है, जिसमें तकरीबन 5 लाख का तक कैश पड़ा था, जिसे रात करीब ढाई बजे अज्ञात व्यक्तियों ने गैस कटर के साथ तोड़ने की कोशिश की और उसकी तोड़फोड़ कर दी, जिसके साथ एटीएम का काफी नुक्सान हुआ है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वारदात एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसमें तीन अज्ञात व्यक्ति जिनके मुंह बंधे हुए थे ।</li>
<li style="text-align:justify;">जिन्होंने गैस कटर से एटीएम काटने की कोशिश के साथ एटीएम तोड़ने की भी कोशिश की।</li>
<li style="text-align:justify;">इस मामले की जांच कर रहे एएसआई सतपाल सिंह ने बताया है।</li>
<li style="text-align:justify;">बैंक मैनेजर के बयानों पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई की जा रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे पहले भी खाई फेमे के में लगा एसबीआई बैंक का एटीएम चोरों की ओर से तोड़ा गया था।</li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/attempt-to-break-atm-failed/article-12509</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 17:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चकनाचूर होता विपक्षी एकता का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन जब विपक्ष के पास संख्या बल का अभाव होता है तो वह घायल शेर की तरह से दिखाने का प्रयास करता है। इसी दिखावे के प्रयास में कई बार ऐसी चूक हो जाती है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। संसद में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/break-opposition-unitys-dream/article-4993"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/break-opposition.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन जब विपक्ष के पास संख्या बल का अभाव होता है तो वह घायल शेर की तरह से दिखाने का प्रयास करता है। इसी दिखावे के प्रयास में कई बार ऐसी चूक हो जाती है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। संसद में विपक्षी दल तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की जिस प्रकार से किरकिरी हुई, उसकी कसक विपक्षी राजनीतिक दलों को लम्बे समय तक रहेगी। लोकसभा में पर्याप्त संख्याबल न होने के बाबजूद अविश्वास प्रस्ताव को लाना किसी भी प्रकार से न्याय संगत नहीं कहा जा सकता। इस प्रस्ताव को भले ही तेलगुदेशम पार्टी की ओर से लाया गया, लेकिन इसके केन्द्र में कांग्रेस पार्टी के नेता ही दिखाई दिए। विरासती पृष्ठ भूमि के उपजे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आपको देश के सामने एक परिपक्व राजनेता के रुप में प्रस्तुत करने का राजनीतिक खेल खेला। इसे राहुल गांधी का राजनीतिक अभिनय कहा जाए तो भी ठीक ही होगा, क्योंकि इससे पूर्व कई लोग राहुल गांधी को पप्पू जैसे संबोधन दे चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात सही है कि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में दोपहर में जब राहुल गांधी अपना वक्तव्य दे रहे थे, उस समय पूरे देश के विपक्षी दलों में एक आस बनती दिखाई दी कि राहुल गांधी अब परिपक्व राजनेता की श्रेणी में आ रहे हैं। समाचार चैनलों में चली बहस में भी राहुल गांधी के नए उदय को नए ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा था, लेकिन जैसे ही समय निकलता गया राहुल गांधी की वास्तविकता देश के सामने आने लगी। राहुल गांधी ने अपने आपको एक बार फिर से पप्पू होने का प्रमाण दे दिया। पहली बात तो यह है कि राहुल गांधी जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गले मिले, वह जबरदस्ती पूर्वक गले मिलना ही था, क्योंकि इसके लिए संसद उचित स्थान नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ी बात यह भी है कि राहुल गांधी सरकार पर आरोप लगाते समय यह भूल जाते हैं कि वर्तमान सरकार जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है। यानी लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार है, इसलिए राहुल गांधी को कम से कम लोकतंत्र का सम्मान तो करना ही चाहिए। राहुल गांधी वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसलिए उन्हें अपने पद की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसे आरोप लगाने से उन्हें बचना चाहिए, जिनका कोई आधार नहीं है। हम जानते हैं कि राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे पर जो वक्तव्य दिया था, वह सार्वजनिक करने वाला नहीं था, क्योंकि रक्षा मामले बेहद संवेदनशील होते हैं, उन्हें उजागर करना भी ठीक नहीं होता, लेकिन राहुल गांधी ने ऐसा किया, जो ठीक नहीं था। अगर राहुल गांधी को संसदीय मयार्दाओं का ज्ञान नहीं है तो उन्हें पहले इनका अध्ययन करना चाहिए, नहीं तो वह नादानी में भविष्य में भी ऐसी ही गलती करते जाएंगे और कांग्रेस पार्टी की जो वर्तमान हालत है वह और खराब होती चली जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जाता है कि आज कांग्रेस के समक्ष जो अस्तित्व का संकट पैदा हुआ है, उसके लिए कांग्रेस के नेता ही जिम्मेदार हैं, और कोई नहीं। चार वर्ष पहले जिस केन्द्र सरकार का अंत हुआ, उसके कार्यकाल से जनता प्रताड़ित थी, घोटाले होना तो जैसे सरकार की नियति ही बन गई थी। संप्रग सरकार के कार्यकाल में हुए घोटाले के कई प्रकरण आज न्यायालय में विचारधीन हैं। कांग्रेस अगर स्वच्छ प्रशासन देने की बात करती है तो इसके प्रति फिलहाल जनता में विश्वास का भाव पैदा नहीं हो सकता। इसके लिए कांग्रेस को अपने आपको बदलना होगा और कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बदल जाएगा, ऐसा अभी लगता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तवविकता यह भी है कि जिस अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से विपक्ष सरकार को घेरने की योजना बना रहा था, उसमें किसी प्रकार का कोई वजन नहीं था, यह विपक्षी भी भलीभांति जानते थे। इतना ही नहीं उनको अपना संख्या बल भी पता था, फिर भी उन्होंने केवल अपनी राजनीति चमकाने के उद्देश्य से इस अविश्वास प्रस्ताव को रखा। बाद में क्या हुआ यह सभी को पता है। जितनी उम्मीद थी, उतना भी समर्थन इस प्रस्ताव को नहीं मिला और औंधे मुंह गिर गया। जबकि कांग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जोर देते हुए कहा था कि हमारे पास अविश्वास प्रस्ताव लाने के पर्याप्त कारण हैं और हमारे पास संख्या संख्या बल है। इसे कांग्रेस का सबसे बड़ा झूठ भी कहा जा सकता है। इससे ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस नेता झूठ बोलकर देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने भी राफेल मामले में संसद में झूठ बोला। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को ऐसे झूठ बोलने से बचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अविश्वास प्रस्ताव के निर्णय के बाद राजग सरकार पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन विपक्ष द्वारा जिस प्रकार से सत्ता की तड़प को उजागर करने वाली राजनीति की जा रही थी, उसको जरुर गहरा आघात पहुंचा है। अब यह तय सा लगने लगा है कि विपक्षी गठबंधन की जो कवायद देश में चल रही थी, उसमें दरार पड़ेगी। क्योंकि इससे कांग्रेस का वास्तविक आधार देश के सामने आ गया। वर्तमान में कांग्रेस की राजनीतिक शक्ति का आकलन किया जाए तो ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस के पास उतनी भी ताकत नहीं है, जितनी चार वर्ष पूर्व थी। इसके पीछे तर्क यही दिया जा सकता है कि चार वर्ष पहले कांग्रेस के प्रति अच्छा रवैया रखने वाले कई सांसद थे, आज उन सांसदों की संख्या में कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हां, इतना अवश्य हो सकता है कि जिन राजनीतिक दलों को भाजपा का भय होगा या अपने भविष्य के प्रति संदेह होगा, वह जरुर इस मुहिम का हिस्सा बन सकता है, लेकिन यह एक बार फिर से प्रमाणित हो गया है कि देश में विपक्ष अभी मजबूत विकल्प नहीं बन सका है। सरकार मजबूत है, यह संसद ने भी बता दिया है और जनता भी बता रही है।<br />
आज देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का अध्ययन किया जाए तो यही दिखाई देता है कि कांग्रेस पार्टी को देश के कई क्षेत्रीय दल अपने स्तर का भी नहीं मान रहे हैं। यह सच भी है कि कई राज्यों में क्षेत्रीय दल आज कांग्रेस से ज्यादा प्रभाव रखते हैं। ऐसे में वह कांग्रेस को कितना महत्व देंगे, इसका पता चल ही जाता है। कांग्रेस की मजबूरी यह है कि वह कई राज्यों में अपने स्वयं की ताकत के सहारे चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं कर सकती, इसलिए उसे कई राज्यों में सहारे की आवश्यकता महसूस हो रही है। कर्नाटक में भी यही दिखाई दिया, कांग्रेस ने अपने से कम राजनीतिक प्रभाव रखने वाले दल को राज्य की सत्ता सौंप दी। इसी प्रकार के हालात उत्तरप्रदेश में बन रहे हैं, यहां अभी गठबंधन बना ही नहीं, दरार के संकेत मिलने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jul 2018 03:38:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>हेल्मेट पहनकर जाना, वरना कट जाएगा चालान</title>
                                    <description><![CDATA[पंचकूला पुलिस ने ट्रेफिक नियम तोड़ने वालों पर दिखाई सख्ती तो बढ़ने लगी हेल्मेट की बिक्री, वाहन चालकों में दिखने लगा भय पुलिस के डर से महिलाएं भी पहनने लगी हेल्मेट अब तक 627 महिलाओं के काटे गए हैं चालान सच कहूँ/चरन सिंह/पंचकूला। शहर में इन दिनों महिलाओं में पुलिस का खौफ है। महिलाएं घर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/panchkula-police-appear-strictly-to-those-who-break-traffic-rules/article-4411"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/helmet.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पंचकूला पुलिस ने ट्रेफिक नियम तोड़ने वालों पर दिखाई सख्ती तो बढ़ने लगी हेल्मेट की बिक्री, वाहन चालकों में दिखने लगा भय</h1>
<ul>
<li><strong>पुलिस के डर से महिलाएं भी पहनने लगी हेल्मेट</strong></li>
<li><strong>अब तक 627 महिलाओं के काटे गए हैं चालान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/चरन सिंह/पंचकूला।</strong> शहर में इन दिनों महिलाओं में पुलिस का खौफ है। महिलाएं घर से निकलते समय पति का ही हैलमेट उठाकर चल पड़ती हैं और पति को कई बार बगैर हैलमेट जाना पड़ता है। दरअसल पंचकूला पुलिस द्वारा इन दिनों जगह-जगह नाके लगाकर बिना हैलमेट चलने वाली महिलाओं के चालान काटे जा रहे हैं। महिलाओं के साथ ही चालान की 100 रुपये फीस लेकर पर्ची भी थमा दी जाती है। पर्स से पैसा जाता देख महिलाओं ने अब हैलमेट पहनने में समझदारी दिखाना शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल टू व्हीलर चलाते समय या पीछे बैठे होने पर महिलाओं के लिए सिर पर हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया। विदाउट हेलमेट टू व्हीलर चला रही 627 महिलाओं को पुलिस द्वारा चालान थमाया जा चुका है। पंचकूला ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निदेर्शों के अनुसार चालान किए जा रहे हैं। फिलहाल टू व्हीलर चला रही महिला के ही चालान काटे जा रहे हैं। सेकंड स्टैप में टू व्हीलर्स पर बिना हेलमेट पीछे बैठी महिला का भी चालान होगा। अभी पंचकूला ट्रैफिक पुलिस में महिला स्टाफ को मांगा गया है। जल्द ही महिला स्टाफ की भी ड्यूटी लगा दी जाएगी।</p>
<h1 style="text-align:center;">क्या कहते हैं यातायात के नियम</h1>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स 1993 के रूल 185 के तहत बीआईएस मानक वाला हेलमेट सभी दो पहिया वाहन चालकों के लिए पहनना जरूरी है। केवल उन लोगों को छूट हंै जिन्हें मेडिकल आधार पर सीएमओ ने हेलमेट न पहनने की हिदायत दी है। इसके अलावा पगड़ी पहनने वाले सिखों को हेलमेट से छूट है। हाईकोर्ट ने एक पीआइएल की सुनवाई के दौरान कहा था कि हरियाणा में हेलमेट न पहनने वालों पर कोई चेक नहीं है। नतीजा यह है कि लोग बिना हेलमेट वाहन चलाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हेलमेट रखने वाले भी इसे सिर के बजाए बाजू में रखना ज्यादा पसंद करते हैं। हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया कि दायरे में बड़ा राज्य होने और पुलिस की लिमिटेशन होने के चलते हेलमेट न पहनने वालों को पूरी तरह से चेक नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा था कि क्या मौत लिंग देखकर आती है या कोई गारंटी है कि महिलाओं का एक्सीडेंट नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सबकी जान की कीमत बराबर होती है। महिलाओं की खोपड़ी पुरुषों से अलग नहीं होती।</p>
<h1 style="text-align:center;">हेल्मेट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>अंदर का मैटेरियल भी चेक करें। खराब मैटेरियल चेहरे और बालों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हेल्मेट का साइज ऐसा हो, जो आपको आराम दे। कभी भी कसा हुआ या ढीला हेल्मेट न खरीदे। पहनकर जरूर देंखे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जो फुल फेस के साथ ठोडी को कवर करते, वही हेल्मेट खरीदें।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हेल्मेट की बेल्ट में लॉक स्विच भी चेक करें। कई बार जल्दी खराब होता है, जो दुर्घटना के समय घातक साबित हो सकता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हेल्मेट के ग्लास भी महत्वपूर्ण होते हैं। ब्रांडेड हेल्मेट के शीशे भी मजबूत होते हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>आईएसआई मार्का ही हेल्मेट खरीदें। युवतियों के लिए विशेष तौर पर हेल्मेट आते हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कम खर्च के लालच में कभी भी सडक़ किनारे दुकान से हेल्मेट न खरीदें।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खरीदते समय इस बात की जांच कर लें कि अंदर के भाग से हेल्मेट टूटा न हो।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हेल्मेट में गहरे रंग के शीशे न हो। शीशे पारदर्शी हो या हल्के काले रंग के शेड के साथ हो।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 08:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जरूरी था गठबंधन का विखंडन</title>
                                    <description><![CDATA[विष्णुगुप्त भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/it-was-necessary-to-break-the-coalition/article-4350"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kasmir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विष्णुगुप्त</strong></p>
<p>भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह से विफल साबित हुई थी।</p>
<p>भाजपा की यह सोच पूरी तरह से कमजोर साबित हुई कि पीडीपी के साथ गटजोड कर एक मजबूत और टिकाउ सरकार देकर कश्मीर में पार्टी का जनाधार विकसित किया जाये और खासकर पाकिस्तान को एक करारा जवाब दिया जाये। दुनिया मे यह स्थापित किया जाये कि कश्मीर में मजबूत लोकतंत्र कायम है, हमारा लोकतंत्र जन उम्मीदो को आधार देने के लिए कामयाब है।</p>
<p>यह सही है कि दुनिया को यह अहसास दिलाया गया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और आतंकवाद की हिंसा के बावजूद हम मानवाधिकार को सर्वश्रेष्ठ प्राथमिकता में शामिल कर रखे है पर आतंरिक तौर पर यह गठबंधन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था, पीडीपी और महबूबा मुफ्ती तो अपनी छवि चमकाने में लगी हुई थी, समय-समय पर उसके विधायाकों और पार्टी नेताओं के राष्ट्र विरोधी बोल सनसनी पैदा करते थे और भाजपा के जनाधार को ललकार कर उसे कमजोर भी करते थे।</p>
<p>महबूबा मुफ्ती की प्राथमिकता आतंकवाद को रोकने में कतई नही थी, कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण लगाने का काम करने का अर्थ, अपने जनाधार में आग लगाने जैसा है, कश्मीर में जो दल जितना देश को गाली देगा और जितना पाकिस्तान के पक्ष में दंडवत होगा वह उतना ही जनाधार विकसित करता है। इसीलिए कभी पीडीपी तो कभी नेशनल कांन्फ्रेंस भारत की एकता और अखंडता विरोधी बयान देकर सनसनी फैलाते हैं।</p>
<p>अब यहां प्रश्न उठता है कि अचानक गठबंधन तोडने के लिए भाजपा तैयार क्यों हुई? क्या मुफ्ती महबूबा सईद मनमानी पर उतर आयी थी? क्या मुफ्ती मोहम्मद सईद भाजपा की सभी बातें और भाजपा की सभी नीतियों को अनसुनी करती थी? क्या मुफ्ती महबूबा आतंकवाद को बढावा दे रही थी? रमजान के दौरान एक तरफा युद्ध विराम के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने विशेष दबाव बनाया?</p>
<p>कांग्रेस अपने आप को इस संकट की कसौटी पर किस तरह से नियंत्रित करेगी? राष्ट्रपति शासन के दौरान भाजपा अपने जमीदोंज हुए विचार और जनाधार को किस र्प्रकार से वापस लायेगी? आतंकवादी संगठन इस राजनीतिक परिस्थिति में किस प्रकार से हिंसक राजनीति को अंजाम देंगे, क्या आतंकवादी हिंसा कमजोर होगी? सबसे बडी बात पाकिस्तान की है, पाकिस्तान अपनी आतंकवादी मानसिकता का किस प्रकार से विस्फोट करता है? पाकिस्तान दुष्प्रचार की कूटनीतिक खेल-खेल सकता है, जिसका मुकाबला भारत सरकार को करना पडेगा।<br />
यह सीधे तौर पर भाजपा की विफलता है, भाजपा की राजनीतिक सोच की विफलता है।</p>
<p>गठबंधन की कोई सुखद परिणाम की उम्मीद थी नही। उम्मीद क्यों नहीं थी? उम्मीद इसलिए नही थी कि दोनो के विचार और चरित्र में कोई दूर-दूर तक समानता नहीं था। पीडीपी की सोच जहां अलगववादी के प्रति नरम थी वहीं आतंकवाद विरोध की है, धारा 370 विरोधी की है, समान नागरिक संहिता की पक्षधर है। ऐसे दो ध्रुव पर केन्द्रित पार्टियों के बीच गठबधन कोई मधुर कैसे हो सकता है?</p>
<p>सबसे बडी बात यह है कि भाजपा ने गलत सोच विकसित कर ली थी। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जो मिली थी वह स्वर्णिम सफलता पीडीपी के साथ गठबंधन करने के लिए नहीं मिली थी, भाजपा को स्वर्णिम सफलता पीडीपी के आतंकवादी समर्थक नीति को जमींदोज करने के लिए मिली थी, नेशनल कांन्फ्रेंस की बिगडैल बोल को जमींदोज करने के लिए मिली थी, आतंकवादियों का उसके मांद में जाकर सबक सिखाने के लिए मिली थी, पाकिस्तान को जैसे को तैसे स्थिति में जवाब देने के मिली थी। रमजान के अवसर पर एक तरफा युद्ध विराम का नाटक भाजपा के लिए भारी पड़ गया, आतंकवादियों ने अपनी शक्ति बढाई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि और उनके पराक्रम पर भी प्रश्न चिन्ह खडा हुआ था। नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे और प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें उनकी पाटी ने प्रस्तावित किया था तब उनकी अवधारणा क्या थी, उनके तेवर क्या थे, वे पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ किस प्रकार से दहाडते थे। वे कहते थे कि आतंकवादियों और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए देश को 56 इंच का सीना चाहिए, मनमोहन सिंह के पास 56 इंच का सीना नहीं है। नरेन्द्र मोदी यह भी कहते थे कि जब वे सत्ता मे आयेंगे तब आतंकवादियों और पाकिस्तान को सबक सिखायेंगे और पाकिस्तान भारत की ओर मुंह करने के पीछे सौ बार सोचेगा।</p>
<p>नरेन्द्र मोदी सत्ता में आये, प्रधानमंत्री की कुर्सी उन्हें मिल गयी। पर उनका 56 इंच का सीना कभी दिखा नहीं। आतंवादियों को जवाब देने में उनकी वीरता कहीं झलकी नहीं। पाकिस्तान पहले से भी अराजक और बेखौफ गया। पाकिस्तान आतंकवादियों को नियंत्रित करने, आईएसआई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नहीं दिखायी। सबसे बडी बात यह है कि नरेन्द्र मोदी बिन बुलाये पाकिस्तान चले गये। नवाज शरीफ के दावत खाने से उनकी छवि खराब हुई। जनता के बीच संदेश गया कि नरेन्द्र मोदी भी कांग्रेस की भूमिका में कैद हो गये हैं, कश्मीर और पाकिस्तान की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मोदी के पास भी कोई वीरतापूर्ण आत्म बल नही है। इतिहास भी यही कहता है कि जब-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ उदारता दिखायी है, तब-तब भारत की पीठ में पाकिस्तान ने छूरा भोका है। पाकिस्तान कोई वार्ता नहीं बल्कि शक्ति और हिंसा की भाषा ही समझता है।</p>
<p>भाजपा गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को कितना नुकसान होता? भाजपा अगर गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को अतुलनीय नुकसान होता, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की दिन-प्रतिदिन बढती धटना से देशभर में गुस्सा और आक्रोश था। विरोधी विचार धारा वाले लोग मोदी पर तो आतंकवाद के सामने घुटने टेकने और पाकिस्तान के सामने सर्मपण करने के आरोप तो लगाते ही थे पर राष्ट्रवादी खेमा जो नरेन्द्र मोदी और भाजपा की शक्ति के केन्द्र में है, भी कम आक्रोशित नहीं था। राष्ट्रवादी खेमे का आक्रोश ही भाजपा के लिए चिंता की बात थी। सबसे बडी भूमिका जम्मू संभाग ने निभायी है।</p>
<p>जम्मू संभाग ही भाजपा की शक्ति के केन्द्र मे है। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जम्मू संभाग की ही देन है। भाजपा की सभी सीटें जम्मू संभाग से मिली हुई है। लोकसभा की छह में से जो तीन सीटें भाजपा को मिली थी वह तीनों सीटे जम्मू संभाग की हैं। अगर भाजपा ने पीडीपी का गठबंधन समाप्त नहीं होता तो फिर जम्मू संभाग की राजनीति शक्ति भाजपा से दूर हो जाती। राष्ट्रपति शासन के दौरान आतंकवाद और पाकिस्तान परस्त राजनीति के पंख को मरोडना होगा, पाकिस्तान की आतंकवादी मानसिकता का भी सैनिक हल ढुढना होगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर भाजपा और मोदी को और भी नुकसान होगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 09:08:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>तीन दशकों में ही दम तोड़ने लगी हैं एटीएम मशीनें</title>
                                    <description><![CDATA[किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि बैंकिंग क्षेत्र में इस तेजी से बदलाव आएगा कि प्रतिष्ठा सूचक एटीएम कार्ड की जितनी सहज पहुंच आम आदमी तक हो जाएगी, उतनी ही जल्दी उसके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह उभरने लगेगा। हमारे देश में लगभग ऐसा होने लगा है। यह प्रतिष्ठा सूचक एटीएम कार्ड केवल पांच दशकों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/atm-machines-have-begun-to-break-in-three-decades/article-3371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/atm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि बैंकिंग क्षेत्र में इस तेजी से बदलाव आएगा कि प्रतिष्ठा सूचक एटीएम कार्ड की जितनी सहज पहुंच आम आदमी तक हो जाएगी, उतनी ही जल्दी उसके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह उभरने लगेगा। हमारे देश में लगभग ऐसा होने लगा है। यह प्रतिष्ठा सूचक एटीएम कार्ड केवल पांच दशकों में ही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले एक साल में जिस तरह से देश की बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव का दौर चला है, उससे तो ऐसा ही लगने लगा है। बल्कि यूं कहें कि डीमोनेटाइजेशन के बाद जिस तरह से सरकार ने डिजीटल लेन-देन को बढ़ावा दिया है और आम आदमी जिस तरह से डिजीटल लेन-देन की ओर बढ़ रहा है, उससे तो वो दिन दूर नहीं लगता, जब एटीएम मशीनें इतिहास की चीज हो जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा माना जाता है कि दुनिया में पहली एटीएम मशीन लंदन में 1967 में बर्कले बैंक्स ने स्थापित की थी। हमारे देश में तो इसके 20 साल बाद 1987 में एचएसबीसी बैंक एटीएम लेकर आया। हालांकि शुरुआती दौर में सिटी बैंक ने देश में सर्वाधिक एटीएम मशीनें लगाई, इसके बाद तो एटीएम मशीनें लगाने का दौर ही चल पड़ा और एसडीएफसी, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने तो एक तरह से अभियान चलाकर एटीएम मशीनें स्थापित कर दीं। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए एसबीआई के नेतृत्व में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी समूह सुविधा के रुप में एटीएम मशीनों का संजाल बिछा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो कुछ घंटों की बैंकिंग सेवाओं वाले बैंक इस एटीएम सुविधा से ही 24 गुणा 7 और एनी व्हेयर-एनी टाइम बैंकिंग सुविधा सुलभ कराने में कामयाब हो सके। यह अपने आप में बड़ी बात हो गई कि एटीएम के चलते बैंकिंग सेवाएं आम आदमी के लिए आसान व सुविधा जनक हो गई। प्लास्टिक कार्ड ने पूरी तरह से बैंकिंग तस्वीर को बदल कर ही रख दिया। भले ही एटीएम का अधिकांश उपयोग पैसा निकालने में ही हो रहा हो पर इससे बैंक के काउंटर से बैंक सेवाएं गली मौहल्ले के चौराहे तक आ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2012-13 में देश में करीब एक लाख 10 हजार एटीएम मशीनें लगी हुई थी, जो 2016-17 तक बढ़कर दोगुनी यानी की दो लाख 20 हजार के आसपास हो गई। पिछले 7-8 माह से अब इस पर ब्रेक लग गया है। इसके बाद डीमोनेटाइजेशन और उसके बाद सरकार की पांबदियों के चलते डिजीटल लेन-देन के बढ़ावे के कारण एटीएम मशीनें लगने पर लगभग ब्रेक-सा ही लग गया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थितियां यहां तक आने लगी हैं कि पहले से लगे एटीएम भी अब बैंकों के लिए नुक्सान का सौदा होने के चलते कई मशीनें बंद होने की स्थिति में आने लगी हैं। इतना जरुर है कि अब बैंकिंग सेवाएं आम आदमी की सहज पंहुच में हो गई है। लोग डिजीटल भुगतान को सहजता से लेने लगे हैं। देशवासी विमुद्रीकरण के महत्व को समझने लगे हैं, वहीं अब लोगों में बड़े नोटों को जमा करने की प्रवृति पर भी स्वप्रेरित अंकुश लगा है। कम से कम आरबीआई के आंकड़े तो यही कह रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नवंबर-दिसंबर के विमुद्रीकरण या यूं कहें कि नोटबंदी के परिणाम अब प्राप्त होने लगे हैं। विमुद्रीकरण और नकदी उपलब्धता को लेकर एसबीआई द्वारा तैयार कराई गई एक रिपोर्ट तो यही कहती है। रिपोर्ट के अनुसार देश में बड़े नोटों का चलन कम हुआ है, छोटी नकदी का उपयोग बढ़ा है और लोगों में डिजीटल भुगतान की प्रति रुझान बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां एक ओर कार्ड के जरिए भुगतान के 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, वहीं बड़े नोटों के लेन-देन में 14 फीसदी की कमी आई है। छोटे नोटों में, खासतौर से एक सौ रुपए के नोटों का चलन बढ़ा है। सरकार ने भी बाजार में छोटे नोट अधिक उतारे हैं। मजे की बात यह है कि जहां डेबिट कार्ड से प्रतिमाह करीब 75 करोड़ का लेन-देन हो रहा था, वह गिरकर 66 करोड़ पर आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो लोग आवश्यक सेवाओं की पेमेंट भी डिजीटली करने लगे हैं। दरअसल एटीएम को सबसे बÞड़ी चुनौती स्मार्टफोन के चलते मिल रही है। स्मार्टफोन की आज आम आदमी के पास आसान पहुंच हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत आर्थिक सुधारों को बढ़ावा दिया है। सरकार बनते ही पहले आम आदमी के जीरो बैलेंस पर जनधन खाते खोले गए। हांलाकि उस समय इसकी काफी आलोचना हुई। जन-धन योजना में लाखों खाते खुले और 30-35 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि इन खातों में जमा हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">देखने वाली बात यह है कि यह राशि उस गरीब आदमी की बचत है, जो दो जून की रोटी के लिए संघर्षरत है। नोटबंदी के दौरान जन-धन खातों में कालाधन जमा होने की संभावना को लेकर खूब हो-हल्ला हुआ, पर 50 दिनों में यही कोई तीन-साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए के आसपास इन जनधन खातों में जमा हुए। इससे साफ है कि जनधन खातों में अधिकांश पैसा नोटबंदी के अतिरिक्त जमा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी के दौरान आमजन को परेशानी और विपक्ष की आलोचना के बाद हुए चुनावों के परिणामों ने सरकार के पक्ष में मेंडेट देकर सारे कयासों को निर्मूल सिद्ध कर दिया। सरकार ने सोच-समझ कर ही बड़े नोट बाजार में कम उतारे और उसका परिणाम सामने है। बैंक खातों को आधार से अनिवार्य रुप से जोड़ने का परिणाम यह हो रहा है कि अब कालाधन आसानी से पकड़ में आ सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार डिजीटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए ही बैंकिंग सेवाओं को शुल्क के दायरे मेंं ला रही है। देखा जाए, तो बैंकिंग सेवाएं अब सेवा नहीं रही, बल्कि पेड सेवा बन गई हैं। आधार से जुड़ते ही बेनामी खातों या एक से अधिक खातों की पकड़ भी आसान हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन सुधारों से देश की आर्थिक विकास की गति प्रभावित हुई है, पर नए और कठोर निर्णयों का अल्पगामी व दूरगामी प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। आज दुनिया के देशों में भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त आर्थिक व्यवस्था के रुप में देखा जा रहा है। हालांकि नवंबर से अब तक अर्थ-जगत में विरोध के स्वरों के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले नोटबंदी और अब जीएसटी के नाम पर विरोध हो रहा है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि नवाचार को अपनाने में समय लगता है, पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने की पूरी संभावनाएं भी रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े नोटों के लेनदेन में 14 प्रतिशत की बड़ी कमी और डिजीटल भुगतान में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी इसका साफ संकेत हैं। आंकड़े साफ करते हैं कि देश का नागरिक आर्थिक सुधारों में विश्वास रखता है, सहजता से स्वीकार भी करता है। खासतौर से जब नई चीजें आती है, तो थोेड़े समय में स्वीकार्य भी हो जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े नोटों के लेन-देन में कमी से कालाधन का संग्रहण कम होगा, वहीं डिजीटल लेन-देन से कालाधन और भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक रोक लग सकेगी। जिस तरह से राजीव गांधी की कम्प्यूटर क्रांति के सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहे हैं, आने वाले समय में डिजीटल भुगतान के तौर पर अधिक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक सशक्त होकर उभरेगी।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2017 04:40:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अंटार्कटिका में दिल्ली से 4 गुना बड़ा हिमखंड हुआ अलग</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक समुद्री स्तर में होगी 10 सेमी. की बढ़ोतरी वैज्ञानिक बोले-कार्बन उत्सर्जन बना कारण नई दिल्ली (एजेंसी)। अंटार्कटिका में मौजूद आईसबर्ग (हिमचट्टान) लार्सेन सी का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। 5800 वर्ग किलोमीटर के इस टुकड़े के आकार का अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं कि ये राजधानी दिल्ली के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/breaks-large-part-of-glacier-in-antarctica/article-2271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/glacier.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">वैश्विक समुद्री स्तर में होगी 10 सेमी. की बढ़ोतरी</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>वैज्ञानिक बोले-कार्बन उत्सर्जन बना कारण</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अंटार्कटिका में मौजूद आईसबर्ग (हिमचट्टान) लार्सेन सी का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। 5800 वर्ग किलोमीटर के इस टुकड़े के आकार का अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं कि ये राजधानी दिल्ली के आकार से 4 गुना तो गोवा से डेढ़ गुना बड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लार्सेन सी अंटार्कटिका में मौजूद हिमचट्टानों में चौथी सबसे बड़ी हिमचट्टान है। इससे अलग हुए हिमखंड का वजन खरबों टन और इसे संभवत: हिमचट्टान से अलग हुआ अब तक का सबसे बड़ा खंड बताया जा रहा है। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के अनुसार यह हिमखंड 10 से 12 जुलाई के बीच टूटकर अलग हुआ है। इसका नाम ए68 रखे जाने की संभावना है। इसका आकार बाली के इंडोनेशियाई द्वीप के बराबर हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हिमखंड टूटने का असर</h3>
<p style="text-align:justify;">इस घटना का दुनिया के पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस हिमखंड के अलग होने से वैश्चिवक समुद्री स्तर में 10 सेमी. की बढ़ोतरी हो जाएगी। साथ ही इस महाद्वीप के पास से होकर जाने वाले जहाजों को भी दिक्कत आ सकती है।<br />
वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र स्तर पर इस हिमखंड के अलग होने से तुरंत प्रभाव तो नहीं आएगा लेकिन इससे लार्सेन सी हिमचट्टान का फैलाव 12 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। बता दें कि लार्सेन ‘ए’ और ‘बी’ हिमचट्टानें पहले ही ढह चुकी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टूटने का कारण</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक इस हिमखंड के अलग होने का कारण कार्बन उत्सर्जन को बता रहे हैं। उनका कहना है कि कार्बन उत्सर्जन से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है जिससे ग्लेशियर जल्दी पिघल रहे हैं। भारत पर इसके असर की बात करें तो अरब सागर पर इसका प्रभाव जल्द नहीं दिखेगा। लंबे समय बाद इसका असर हो सकता है। वहीं, समुद्री स्तर बढ़ने से अंडमान और निकोबार के कई टापू और बंगाल की खाड़ी में सुंदरवन के हिस्से डूब सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कहां जा रहा हिमखंड</h3>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं के अनुसार यह हिमखंड कम समय में तेजी से नहीं बढ़ेगा। लेकिन इस पर निगरानी रखने की जरूरत है। इसके बारे में अभी कुछ निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसके टुकड़े भी हो सकते हैं और यह एक ही टुकड़े में भी रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 05:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>99 प्रतिशत मतों के साथ राष्ट्रपति बने थे डा. राजेंद्र बाबू</title>
                                    <description><![CDATA[ 14 चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं तोड़ पाया रिकार्ड नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों का नाम घोषित होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा समर्थन जुटाने के प्रयासों जुट गए हैं, लेकिन उनमें से किसी के भी देश के पहले राष्ट्रपति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nobody-candidate-will-not-break-the-record-in-14-elections/article-1605"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/rajender-parsad.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> 14 चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं तोड़ पाया रिकार्ड</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों का नाम घोषित होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा समर्थन जुटाने के प्रयासों जुट गए हैं, लेकिन उनमें से किसी के भी देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सर्वाधिक 99 प्रतिशत मत हासिल करने के रिकार्ड को तोड़ पाने की उम्मीद नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. राजेंद्र प्रसाद ने 1957 में हुए चुनाव में 99 प्रतिशत से अधिक मत हासिल किए थे। राष्ट्रपति के लिए अब तक हुए 14 चुनावों में कोई उम्मीदवार इस रिकार्ड को नहीं तोड़ पाया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के ज्यादातर दलों की सहमति से 2002 में चुनाव मैदान में उतरे मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम करीब 90 प्रतिशत ही वोट हासिल कर पाए थे। अब तक सिर्फ एक बार निर्विरोध चुनाव हुआ है। वर्ष 1977 में नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी मिले थे 98 प्रतिशत वोट</h3>
<p style="text-align:justify;">राजेंद्र प्रसाद के बाद दूसरा नंबर राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्ण्न हैं, जिन्होंने 1962 के चुनाव में 98 प्रतिशत से अधिक मत हासिल किए थे। इसके बाद के. आर. नारायणन का नंबर आता है जिन्हें 1997 में हुए चुनाव में 95 प्रतिशत मत मिले थे। श्री नारायणन सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाले दलित समुदाय के पहले नेता थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले माह होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्तारुढ़ गठबंधन ने राम नाथ कोविंद को तथा विपक्ष ने श्रीमती मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ही दलित समुदाय के हैं। इसलिए इस समुदाय के नेता का एक बार फिर देश का राष्ट्रपति बनना तय है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> लगातार दो बार बने राष्ट्रपति</h3>
<p style="text-align:justify;">अब तक के राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारों को मिले मतों की बात की जाए तो 1957 में डा. राजेंद्र प्रसाद को कुल पड़े 464370 मतों में से 459698 मत मिले थे। उनके खिलाफ दो उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, उनमें से एक को 2672 तथा दूसरे को 2000 मत मिल पाए थे। डा. राजेंद्र प्रसाद एक मात्र ऐसे नेता हैं जो लगातार दो बार राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन 1952 में हुए पहले चुनाव में उन्हें करीब 84 प्रतिशत मत ही मिल पाए थे। इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे तथा कुल 605386 मत पड़े थे। डा. राजेंद्र प्रसाद को 507400 मत मिले। उनके निकटतम उम्मीदवार के टी शाह को 92827 मत मिले थे।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2017 06:00:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एटीएम को बारुद से तोड़ने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस सतर्कता से बचे लाखों रुपए गश्ती दल को देख भागे लुटेरे पुलिस ने किया पीछा, अन्धेरे का फायदा उठा हुए आंखों से ओझल मौके से बारूद व माचिस की तिल्लियां हुई बरामद सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहा है फिलहाल नहीं लग पाया लुटेरों का कोई सुराग अजमेर (सच कहूँ न्यूज)। अजमेर जिले के सावर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">पुलिस सतर्कता से बचे लाखों रुपए</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गश्ती दल को देख भागे लुटेरे</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पुलिस ने किया पीछा, अन्धेरे का फायदा उठा हुए आंखों से ओझल</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मौके से बारूद व माचिस की तिल्लियां हुई बरामद</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहा है </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>फिलहाल नहीं लग पाया लुटेरों का कोई सुराग</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अजमेर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अजमेर जिले के सावर थाना इलाके में सोमवार देर रात को दो लुटेरों ने एटीएम से नकदी नकदी लूटने के फिराक में अन्दर घुसे और उसे एटीएम से रुपए निकालने वाली जगह पर पहले तोड़-फोड़ की और जब वारदात में सफल नहीं हुए तो अपने साथ लाए बारूद से एटीएम मशीन को उड़ाने का प्रसास किया। लेकिन जैसे ही लुटेरों ने बारूद लगा कर एटीएम मशीन को आग के हवाले करने वाले थे ही उसकी दौरान पुलिस गश्ती की गाड़ी वहां से निकली तो उन्हें देख बदमाश वहां से भाग निकले। एटीएम से एकाएक तेज रफ्तार से भागते देख पुलिस ने उनका पीछा भी किया लेकिन अन्धेरे का फायदा उठाते हुए दोनों बदमाश कच्चे व छोटी गलियों के रास्ते से उनकी आंखों से ओझल हो गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मौके पर पहुंचे अधिकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं पुलिस को मौके से बारूद व माचिक की तिल्लियां मिली है जिससे अदेशा लगाया जा रहा है कि बदमाश एटीएम मशीन को बारूद से उड़ा कर तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। वहीं पुलिस ने बैक अधिकारियों को इस वारदात के बारे में सूचना दे दी है। वहीं पुलिस ने सीसीटीवी फुटेल खंगाले जिसमें दो बदमाश वारदात को अन्जाम देते नजर आए। लेकिन उनका चेहरा साफ नजर नहीं आने से उनका पहचान नहीं हो पाई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या बोले थानाधिकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">थानाधिकारी जगदीश प्रसाद ने बताया कि थाने से कुछ ही दूर तिराहे पर बैक आॅफ बडौदा का एटीएम में लगा हुआ है। जहां देर रात को दो से तीन बजे के आस-पास दो बदमाशों द्वारा एटीएम को लूटने के प्रयास किया, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते लूट में नाकाम रहे और लाखों रुपए लूटने से बच गए। वहीं पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/attempts-to-break-atm-with-gunpowder/article-944</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 06:26:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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