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                <title>Sharad Pawar - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Maharashtra : विधानसभा चुनाव से पूर्व एनसीपी को बड़ा झटका! 4 नेताओं ने छोड़ी पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र (एजेंसी)। विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो चली हैं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar, Deputy CM Maharashtra) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 4 शीर्ष नेता पार्टी छोड़ गए और महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवाड़ में इस्तीफा दे दिया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-blow-to-ncp-before-assembly-elections-4-leaders-left-the-party/article-59913"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/ajit-pawar-ncp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र (एजेंसी)। विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो चली हैं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar, Deputy CM Maharashtra) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 4 शीर्ष नेता पार्टी छोड़ गए और महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवाड़ में इस्तीफा दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये चारों नेता सप्ताह के अंत में शरद पवार (Sharad Pawar) के एनसीपी के मूल गुट में शामिल हो सकते हैं। Maharashtra News</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव से पहले और हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव 2024 में अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के खराब प्रदर्शन के बाद हुआ है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के हिस्से के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह केवल एक सीट – रायगढ़ – जीत सकी, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 8 सीटें जीतीं थी।</p>
<h3>अजित पवार खेमे के कुछ नेता शरद पवार के गुट में लौटना चाहते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी छोड़ने का किस्सा उस समय चर्चा में आया कि अजित पवार खेमे के कुछ नेता शरद पवार के गुट में लौटना चाहते हैं। अपना इस्तीफा सौंपने वालों में एनसीपी की पिंपरी-चिंचवाड़ इकाई के प्रमुख अजित गव्हाने भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार अन्य लोगों में पिंपरी चिंचवाड़ छात्र विंग के प्रमुख यश साने और पूर्व पार्षद राहुल भोसले और पंकज भालेकर शामिल हैं। Maharashtra News</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में बताया गया है कि ये घटनाक्रम शरद पवार के उस बयान के कुछ दिनों बाद सामने आया जिसमें उन्होंने कहा था कि जो लोग उनकी पार्टी को ‘कमजोर’ करना चाहते हैं, उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन वे ऐसे नेताओं को स्वीकार करेंगे जो पार्टी की छवि को ‘नुकसान’ नहीं पहुँचाएँगे। पवार ने कहा था, ‘‘जो लोग पार्टी को कमजोर करना चाहते हैं, उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन जो नेता संगठन को मजबूत करने में मदद करेंगे और पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, उन्हें शामिल किया जाएगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">2023 में, अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी के संस्थापक शरद पवार के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और पार्टी को दो राजनीतिक दलों में विभाजित कर दिया। शरद पवार विपक्षी खेमे में रहे, जबकि अजित पवार महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए। पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। Maharashtra News</p>
<p><a title="समुद्र में तेल टैंकर पलटने से 13 भारतीय और 3 श्रीलंकाई लापता!" href="http://10.0.0.122:1245/13-indians-and-3-sri-lankans-missing-after-oil-tanker-capsized-in-the-sea/">समुद्र में तेल टैंकर पलटने से 13 भारतीय और 3 श्रीलंकाई लापता!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 10:39:20 +0530</pubDate>
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                <title>किलारी के भूकंप ने देश को आपदा प्रबंधन का गुर सिखाया</title>
                                    <description><![CDATA[लातूर (एजेंसी)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि 1993 में किलारी में महसूस किए गए भूकंप की वजह से देश ने आपदा प्रबंधन का गुर सीखा और व्यक्तिगत स्तर पर उन्हें भविष्य के सभी संकटों का सामना करने का साहस मिला। पवार ने किलारी गांव में भूकंप कार्रवाई समिति द्वारा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kilari-earthquake-taught-the-country-the-tricks-of-disaster-management/article-53101"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/sharad-pawar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लातूर (एजेंसी)।</strong> राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि 1993 में किलारी में महसूस किए गए भूकंप की वजह से देश ने आपदा प्रबंधन का गुर सीखा और व्यक्तिगत स्तर पर उन्हें भविष्य के सभी संकटों का सामना करने का साहस मिला। पवार ने किलारी गांव में भूकंप कार्रवाई समिति द्वारा आयोजित आभार पुरस्कार समारोह में अपने विचार साझा किये कहा, ‘मैंने जो काम किया, वह एक जिम्मेदारी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">हजारों लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। ऐसे कई व्यक्ति और संगठन थे, जिन्होंने दान दिया था। भूकंप के दो घंटे के भीतर, मैं लातूर के तत्कालीन संरक्षक मंत्री विलासराव देशमुख, धाराशिव के संरक्षक मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटिल के साथ किलारी पहुंचा था। उन्होंने कहा, ‘मैं कामकाजी संगठनों, अधिकारियों और व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं।’ उन्होंने शांतिलाल मुथा को भी विशेष सम्मान से नवाजा। मुथा ने भूकंप में अपने माता-पिता को खोने वाले सैकड़ों बच्चों की देखभाल की।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 01 Oct 2023 10:14:23 +0530</pubDate>
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                <title>Maharashtra Political Crisis: भतीजे का ‘खेल’ चाचा फेल?</title>
                                    <description><![CDATA[Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की सियासत में रविवार को बड़ा उलट-फेर हुआ और तेजी से बदले घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार 30 अन्य विधायकों के साथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए। उधर शरद पवार के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/maharashtra-political-crisis/article-49537"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/maharashtra-political-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की सियासत में रविवार को बड़ा उलट-फेर हुआ और तेजी से बदले घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार 30 अन्य विधायकों के साथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए। उधर शरद पवार के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद उनके पाले में गिने-चुने ही विधायक बचे हैं। आइए जानते हैं कि किसके पाले में कौन-कौन से और कितने विधायक हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अजित पवार के साथ ये हैं विधायक | Maharashtra Political Crisis</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि अजित पवार के साथ जाने वाले विधायकों में शेखर निकम, प्रकाश सोलखे, दीपक चव्हाण, संग्राम जगताप, चेतन तुपे, अण्णा बनसोडे, सुनील शेलके, दिलीप मोहिते, दिलीप बनकर, माणिकराव कोकाटे, नितीन पवार, चंद्रकांत नवघरे, राजेंद्र कारेमोरे, मनोहर चंद्रिकापुरे, राजेश नरसिंग पाटील, इंद्रनील नाईक, छगन भुजबल, नरहरी झिरवळ,सरोज अहिर, अदिती तटकरे, अतुल बेनके, दिलीप वळसे पाटील, संजय बनसोडे, अनिल पाटील, हसन मुश्रीफ धर्मराव आत्राम और धनंजय मुंडे जैसे नेता शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शरद पवार के साथ विधायक</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार के साथ उनके कुछ करीबी नेता बचे हुए हैं, जिन्होंने अजित पवार के साथ पाला नहीं बदला है। इनमें बाळासाहेब पाटील, जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, प्राजक्त तनपुरे, रोहित पवार, अनिल देशमुख और सुनील भुसारा जैसे नाम शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन विधायकों ने नहीं खोले पत्ते</h3>
<p style="text-align:justify;">उधर कुछ विधायक ऐसे भी हैं, जिन्होंने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इन विधायकों में आशुतोष काले बालासाहेब आजबे, राजेंद्र शिंगणेऔर नवाब मलिक हैं। बताया जा रहा है कि अजित पवार ने इन विधायकों को भी अपने पाले में खींचने की कोशिश की है, वहीं शरद पवार अभी स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। सभी को राजनीति के दिग्गज माने जाने वाले शरद पवार के अगले कदम का इंतजार है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाराष्ट्र को भाजपा के चंगुल से मुक्त कराने के प्रयास तेज करेंगे , कांग्रेस का दावा</h3>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता अजित पवार और कई अन्य नेताओं लोगों के क्रमश: उपमुख्यमंत्री और मंत्री पद की शपथ लेने पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की और कहा कि वह राज्य को भाजपा के चंगुल से मुक्त कराने के अपने प्रयासों को तेज करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए अपन ट्वीट में कहा, ‘स्पष्ट रूप से भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ ने अपना काम फिर से शुरू कर दिया है। गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की कार्रवाइयों का सामना कर रहे लोगों को क्लीन चिट मिल गयी और वे सभी आज महाराष्ट्र में भाजपा नीत गठबंधन में शामिल हो गये। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महाराष्ट्र को भाजपा के चंगुल से मुक्त कराने के लिए अपने प्रयास तेज करेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">महाराष्ट्र को जल्द मिलेगा नया मुख्यमंत्री: राउत</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित शिवसेना (शिंदे समूह) के 16 विधायक अयोग्य घोषित किये जायेंगे और राज्य को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलेगा। यह बातें शिवसेना (यूबीटी)नेता संजय राउत ने रविवार को कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) के विद्रोहियों के शपथ इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य 16 सेना के बागी विधायकों को जल्द ही अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ”मैं इसे ”राजनीतिक भूकंप” नहीं मानता, यह एक दिन होना था, जो आज हो गया। उन्होंने कहा, ”आज का राजनीतिक नाटक स्पष्ट संकेत देता है कि शिंदे-फडणवीस सरकार अस्थिर है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी" href="http://10.0.0.122:1245/water-crisis-in-india/">Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/maharashtra-political-crisis/article-49537</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 10:28:59 +0530</pubDate>
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                <title>शरद पवार को धमकी देने वाला शख्स गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे (सच कहूँ न्यूज)। महाराष्ट्र के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ( Sharad Pawar) को सोशल मीडिया पर धमकी देने वाले आईटी इंजीनियर को पुणे से अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने आज यहां बताया कि आरोपी की पहचान सागर बर्वे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/man-arrested-for-threatening-sharad-pawar/article-48750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/sharad-pawar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पुणे (सच कहूँ न्यूज)।</strong> महाराष्ट्र के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ( Sharad Pawar) को सोशल मीडिया पर धमकी देने वाले आईटी इंजीनियर को पुणे से अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने आज यहां बताया कि आरोपी की पहचान सागर बर्वे (34) के रूप में हुई है। मुंबई अपराध शाखा दल ने पुणे से गिरफ्तार किया है। आरोपी बर्वे को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पुलिस मामले की जांच में जुटी</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मुंबई अपराध शाखा ने लोकमान्य तिलक मार्ग थाने में यह मामला दर्ज किया और अपराधी को पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया गया था। अब पुलिस आरोपी से पवार को धमकी भरा संदेश भेजने के बारे में पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार पवार को धमकी मिलने पर पार्टी कार्यकतार्टों ने राज्यभर में प्रदर्शन किया था। इसी दौरान श्री पवार की पुत्री सुप्रिया सुले के नेतृत्व में राकांपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई पुलिस आयुक्त से मुलाकात की थी। आरोपी बर्वे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम करता है और पुलिस को संदेह है कि उसने दो खाते बनाए हैं, जिनसे उसने श्री पवार के खिलाफ पोस्ट प्रेषित की।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2023 11:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>पवार ने मचाई विपक्ष में खलबली</title>
                                    <description><![CDATA[क्या प्रधानमंत्री मोदी को परास्त किया जा सकता है? उन्हें परास्त करने के (Sharad Pawar) लिए क्या करना होगा? क्या उनका कोई विकल्प है? क्या कोई ऐसा नेता है जो उनकी बराबरी कर सकता है? क्या विपक्ष में एकजुटता हो सकती है? क्या विपक्षी दल ऐसा करने के लिए तैयार हैं? ऐसे अनेक प्रश्न हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pawar-created-a-panic-in-the-opposition/article-47381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/editorial.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या प्रधानमंत्री मोदी को परास्त किया जा सकता है? उन्हें परास्त करने के (Sharad Pawar) लिए क्या करना होगा? क्या उनका कोई विकल्प है? क्या कोई ऐसा नेता है जो उनकी बराबरी कर सकता है? क्या विपक्ष में एकजुटता हो सकती है? क्या विपक्षी दल ऐसा करने के लिए तैयार हैं? ऐसे अनेक प्रश्न हैं। विगत माह राकांपा नेता शरद पवार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हिंडनबर्ग-अदानी मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग पर कहा है कि उन्हें जेपीसी के गठन में कोई तर्कसंगता नहीं दिखाई दे रही है और अडानी को निशाना बनाया जा रहा है और इस प्रकार उन्होंने विपक्षी दलों में एकता की मृग मरीचिका को भी भेद दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जालंधर लोकसभा उपचुनाव : फीका रहा चुनाव प्रचार" href="http://10.0.0.122:1245/jalandhar-lok-sabha-by-election/">जालंधर लोकसभा उपचुनाव : फीका रहा चुनाव प्रचार</a></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मेरे विचार से बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के मुद्दे जैसे रोजी-रोटी से जुडे हुए मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने ऐसे समय पर कुछ अन्य दलों की भावनाओं को व्यक्त किया जब कांग्रेस नेतृत्व विपक्षी एकता के लिए उनकी मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है और यह बताता है कि अडानी मुद्दे पर विपक्षी दलों में भी मतभेद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में पवार और तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी के विचार एक समान लगते हैं (Sharad Pawar) और उन्होंने जेपीसी के गठन के लिए कांगे्रस के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन से दूरी बना ली थी। मोदी द्वारा प्रत्येक दिन भ्रष्टाचार पर हमला करने को विपक्ष अडानी मुद्दे और अपने विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को निष्फल करने के रूप में देखता है और नेतृत्व, विकास, हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के साथ-साथ एक चौथा मुद्दा भी उठाया जा रहा है। विशेषकर उच्चतम न्यायालय द्वारा विपक्षी नेताओं के विरुद्ध सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के दुरूपयोग के विरुद्ध विपक्ष की याचिका को सुनने से इनकार करने के बाद ऐसा देखने को मिल रहा है।</p>
<h3>कांग्रेसी नेता भी सशंकित | Sharad Pawar</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भाजपा ने इसमें हिन्दुत्व की विचारधारा को समाहित कर राजनीतिक माहौल को बदला है। विपक्षी दल इस मोर्चे पर इसका विरोध करने के लिए साझा वैचारिक आधार या नरम हिन्दुत्व अपनाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। मोदी को अपने व्यक्तित्व और विपक्षी दलों में मतभेद का लाभ मिल रहा है। हालांकि इसके परिणाम गिलास आधा भरा या आधा खाली हो सकता है। कांग्रेसी नेता भी सशंकित हैं कि क्या अडानी मुद्दे से लोगों में राजनीतिक और चुनावी जागृति पैदा हो रही है या इसका भी वही हश्र होगा जो 2019 के चुनावों से पूर्व राहुल द्वारा बनाए गए राफेल मुद्दे का हुआ था क्योंकि उस वक्त भी राफेल मुद्दा भी मतदाताओं को नहीं लुभा पाया था और भाजपा को प्रशासन की अनेक खामियों और कमियों से मतदाताओं का ध्यान हटाने में मदद मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">न जाने क्यों राहुल को अपनी बात से मुकरने की आदत पड़ गई है। वे बार-बार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारक सावरकर के विरुद्ध टिप्पणियां करते हैं जिससे महाराष्ट्र में उनके सहयोगी उद्धव ठाकरे की पार्टी नाराज हो गई है जो उन्हें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानती है। क्या ये सभी 16 विपक्षी दल जिन्होंने अडानी मुद्दे पर कांगे्रस के साथ संसद में विरोध प्रदर्शन किया, क्या वे एकजुट रह पाएंगे, इस बारे में अनेक आशंकाएं हैं। ममता ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे 2024 का चुनाव अकेले लड़ेंगी और किसी भी विपक्षी गठबंधन में शामिल नहीं होंगी। यही रूख समाजवादी पार्टी के अखिलेश का भी है। साथ ही कांग्रेस में कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी नेतृत्व को मोदी सरकार के विरुद्ध अभियान को व्यापक बनाना चाहिए और उसमें ऐसे आर्थिक मुद्दे भी शामिल करने चाहिए जो आम आदमी को प्रभावित कर रहा है।</p>
<h3>विपक्षी दलों की एकता में दो मुख्य अडचनें</h3>
<p style="text-align:justify;">पार्टी के रायपुर महाधिवेशन में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से बनी लोकप्रियता को भुनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी को ऐसी रणनीति बनानी चाहिए जिसके अंतर्गत वह स्वयं एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में अपनी सर्वोच्चता का प्रदर्शन न करे ताकि उसे महागठबंधन बनाने में आसानी हो। इसके अलावा चुनावों से पूर्व प्रधानमंत्री पद की घोषणा न की जाए। किंतु पार्टी उच्च कमान किसी क्षेत्रीय नेतृत्व को स्वीकार कर अपनी सर्वोच्च राष्ट्रीय स्थिति को छोड़ने या निर्णय लेने में नेहरू-गांधी के परिवार के उत्तराधिकारियों की स्थिति के साथ कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और विपक्षी दलों की एकता में ये दो ही मुख्य अडचनें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों में पहले ही इस मुद्दे पर मतभेद हैं कि कांग्रेस के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। ममता की तृणमूल कांगे्रस, केजरीवाल की आप और चन्द्रशेखर राव की बीआरएस, जिनके मिलाकर लोक सभा में 80 सीटें हैं, वे विपक्षी छतरी के नीचे कांग्रेस के खिलाफ हैं। स्टालिन की द्रमुक, नीतीश की जद (यू) लालू की राजद, सोरेन की जेएमएम, ठाकरे की शिवसेना आदि कांग्रेस की समर्थक हैं और वे मिलकर 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। तीसरा समूह अवसरवादी नेताओं का है जो किसी भी ओर जा सकते हैं हालांकि वे अपने अपने राज्यों में अपना स्थान कांग्रेस को देना नहीं चाहते हैं किंतु सत्ता के बंटवारे में कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार हैं।</p>
<h3>अन्य दल चिंतित</h3>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में पवार की राकांपा, कर्नाटक में गौडा की जद (एस), उत्तर प्रदेश मे अखिलेश की सपा, मायावती की बसपा तथा वामपंथी दल आदि की मिलाकर लगभग 80 सीटें हैं। वामपंथी दल की अब केरल के अलावा कहीं उपस्थिति नहीं रह गई है किंतु दूसरी ओर ओडिशा में पटनायक की बीजद और आंध्र प्रदेश में जगनरेड्डी की वाईएसआर-सीपी को किसी राजनीतिक शिविर में जाने के बजाय अपने-अपने राज्य महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला है जहां से लोक सभा की 90 सीटें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस स्वयं को विपक्षी एकता का केन्द्र मानती है किंतु वह दो कटु वास्तविकताओं को नजरंदाज करती है कि पहले वह अपनी पार्टी में व्यवस्था बनाने का संघर्ष कर रही है और विभिन्न राज्य इकाइयों में विद्रोह हो रहा है। दूसरा, उसका चुनावी गणित उसके पक्ष में नहीं है जैसा कि हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र में देखने को मिला है और त्रिपुरा विधान सभा चुनावों में माकपा के साथ उसका गठबंधन था पर वह अपने मतों को माकपा को अंतरित नहीं करा पाई और इससे अन्य दल चिंतित हैं। एक क्षेत्रीय नेता का कहना है कि हम अपने राज्य में भाजपा का आसानी से मुकाबला कर रहे हैं और दिल्ली में कांगे्रस को मजबूत बनाने में हमारी कोई रुचि नहीं है क्योंकि हमारे राज्य में उससे हमें कोई मदद नहीं मिलती।</p>
<h3>गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पैर जमाना चाहती है आप</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राज्य स्तरीय चुनाव जीतना एक बात है और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विरुद्ध जीत के लिए विभिन्न विचारधारा वाले विपक्षी दलों का एक क्षेत्रीय नेता द्वारा नेतृत्व करना अलग बात है। इसके अलावा एक व्यापक आधार वाले गठबंधन का दृष्टिकोण शायद सफल न हो क्योंकि राज्यों में कांग्रेस को अपने प्रतिद्वंदियों के साथ कार्य करना कठिन हो जाएगा। जरा सोचिए कांग्रेस तथा आप दिल्ली-पंजाब में प्रतिद्वंदी हैं और शायद आप गठबंधनों की ऐसी धारणा को स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि अब उसे एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता मिल गई है और वह गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने पैर जमाना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों में तब भी एकता का अभाव देखने को मिला जब आठ विपक्षी दलों ने आप के मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के विरुद्ध पत्र लिखा। किंतु कांग्रेस सहित तीन विपक्षी दलों ने ऐसा नहीं किया। यही स्थिति तेलंगाना में भी है जहां पर चन्द्रशेखर राव की बीआरएस और कांग्रेस आमने-समने हैं। इसलिए कांग्रेस विपक्षी एकता का आधार और उसमें अड़चन दोनों हैं। जब तक कांग्रेस अपने अहंकार को नहीं त्याग देती और क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत के लिए पहल नहीं करती और अनचाहे ही सही उन्हें राजनीतिक स्थान नहीं देता तब तक विपक्षी एकता की बातें सफल नहीं होंगी।</p>
<h3>विपक्ष ने पिछले आठ सालों में मतदाताओं को समझाने का कोई प्रयास नहीं किया</h3>
<p style="text-align:justify;">भाजपा को हराना और मोदी को हटाने का लक्ष्य स्पष्ट है, किंतु जिस तरह से विपक्षी दलों में अहंकार, नकारात्मकता और अपने-अपने स्वार्थ हैं, उससे यह आसान नहीं है। दुर्भाग्यवश विपक्षी या उनके नेताओं ने पिछले आठ सालों में मतदाताओं को समझाने का कोई प्रयास नहीं किया है कि वे भाजपा से बेहतर शासन दे सकते हैं। इस वर्षान्त विशेषकर कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश में वाले विधान सभा चुनाव भाजपा और विपक्षी दलों के लिए सेमीफाइनल होगा जहां पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है।</p>
<p>विपक्षी दलों को ऐसी भाषा और अन्य उपायों को करना होगा जो भाजपा के दृढ़ संकल्प, भाषा अर्थात चुनाव लड़ने वाली मशीन का मुकाबला कर सके। मोदी ने हिन्दुत्व का मुद्दा पुन: उठाकर पहल कर दी है। वे राष्ट्रवाद और देश के आत्मसम्मान के मुद्दे को उठा रहे हैं और उसको पुन: परिभाषित कर रहे हैं। जब तक दृष्टिकोण में एकरूपता न हो विपक्षी दल मतदाताओं को केवल एकता का सपना ही दिखा सकते हैं। रैलियों में नारों से परे भाजपा के विरुद्ध कौन बिगुल बजाएगा?</p>
<p style="text-align:right;"><strong>पूनम आई कौशिश</strong><br />
<strong>वरिष्ठ लेखिका एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखिका के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 May 2023 11:01:12 +0530</pubDate>
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                <title>शरद पवार को जान से मारने की धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार को मंगलवार को उनके आवास पर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने पवार को दक्षिण मुंबई के सिल्वर ओक स्थित उनके घर पर एक फोन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/president-sharad-pawar-gets-death-threat/article-40923"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/sharad-pawar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार को मंगलवार को उनके आवास पर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने पवार को दक्षिण मुंबई के सिल्वर ओक स्थित उनके घर पर एक फोन करके गोली मारने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि फोन करने वाले की पहचान हो गई है और वह बिहार का रहने वाला है। इससे पहले भी इसी व्यक्ति ने पवार को फोन करके धमकी दी थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बस स्टैंड रोड से हटवाई फल-सब्जी की रेहडिय़ां, आक्रोशित हुए रेहड़ी संचालक" href="http://10.0.0.122:1245/hanumangarh-city-council-administration-removed-fruit-vegetable-stall-street-vendors-got-angry/">बस स्टैंड रोड से हटवाई फल-सब्जी की रेहडिय़ां, आक्रोशित हुए रेहड़ी संचालक</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने कहा कि व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी और बाद में उसे छोड़ दिया गया। राकांपा के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने इस घटना को लेकर कहा कि फोन करके धमकी देने वाला व्यक्ति ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ ‘ लगता है जो नियमित अंतराल पर पवार के आवास पर फोन करता रहता है और इस तरह की धमकी देता है। तापसे ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में उसने कई बार फोन किया और इसी तरह की धमकी दी। पुलिस को सूचित कर दिया गया है।” स्थानीय गामदेवी थाने में इस घटना के संबंध में मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी गयी है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Dec 2022 15:47:30 +0530</pubDate>
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                <title>शरद पवार राकांपा के अध्यक्ष चुने गए</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली में चल रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रााकांपा) की कार्य समिति की बैठक में रविवार को महाराष्ट्र के दिग्गज नेता एवं पार्टी के संस्थापक सदस्य शरद पवार को सर्वसम्मति से एक बार फिर अध्यक्ष चुन लिया गया। पवार अगले चार वर्षों तक इस पद पर रहेंगे। महाराष्ट्र राकांपा के मुख्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sharad-pawar-elected-as-ncp-president/article-37658"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/sharad-pawar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली में चल रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रााकांपा) की कार्य समिति की बैठक में रविवार को महाराष्ट्र के दिग्गज नेता एवं पार्टी के संस्थापक सदस्य शरद पवार को सर्वसम्मति से एक बार फिर अध्यक्ष चुन लिया गया। पवार अगले चार वर्षों तक इस पद पर रहेंगे। महाराष्ट्र राकांपा के मुख्य प्रवक्ता महेश भारत तापसे ने यह जानकारी दी। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में चल रहे राकांपा के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए पवार ने मंहगाई, किसान, महिला, सुरक्षा, चीन जैसे मुद्दों पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरा और उस पर निशाना साधा। उन्होंने क्षत्रपति शिवाजी का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हम केंद्र सरकार के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने लोगों से एकजुट होने और केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े:-</strong> </span><a href="http://10.0.0.122:1245/rahul-gandhi-took-the-final-decision-regarding-the-post-of-congress-president/">अध्यक्ष पद को लेकर राहुल गांधी ने लिया अंतिम फैसला</a></p>
<p style="text-align:justify;">पवार ने कहा, ‘राकांपा किसानों के लिए हमेशा काम करेगी और उनके अधिकारों की रक्षा करेगी। कुछ साम्प्रदायिक तत्वों के कारण देश का माहौल खराब हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोग निशाना बन रहे हैं, इसलिए हमें सद्भाव का वातावरण का निर्माण करने का संकल्प लेना चाहिए। पवार वर्ष 1999 से राकांपा के अध्यक्ष पद पर हैं जब उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर सर्वश्री पी.ए. संगमा और तारिक अनवर के साथ इस पार्टी का गठन किया था। कोरोना महामारी के कारण राकांपा कार्य समिति की बैठक दो वर्षों के बाद हुई है। पवार ने इस बैठक में शामिल होने पर खुशी व्यक्त की।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Sep 2022 14:52:41 +0530</pubDate>
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