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                <title>Little Genius - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कहानी:-सफलता की सीढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[सामान्य ट्रायल के बाद चुने हुए विद्यार्थियों को खेल अध्यापक के द्वारा अभ्यास करवाया जाना था ताकि प्रतियोगिता में ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार जीत सकें। (Little Genius) जीवन के पापा का फिर तबादला हुआ, इसलिए नई जगह जाकर स्कूल में दाखिला लिया गया। नए दोस्त बनने लगे। सोहन जीवन का सहपाठी था। उसकी और जीवन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-ladder-to-success/article-50906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/little-genius.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सामान्य ट्रायल के बाद चुने हुए विद्यार्थियों को खेल अध्यापक के द्वारा अभ्यास करवाया जाना था ताकि प्रतियोगिता में ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार जीत सकें।</h3>
<p style="text-align:justify;">(Little Genius) जीवन के पापा का फिर तबादला हुआ, इसलिए नई जगह जाकर स्कूल में दाखिला लिया गया। नए दोस्त बनने लगे। सोहन जीवन का सहपाठी था। उसकी और जीवन की मित्रता होते देर नहीं लगी। पढ़ाई में दोनों अच्छे थे। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे, उनकी आपस में खूब पटने लगी थी। कुछ ही महीनों में उनके परिवार भी एक-दूसरे को जानने लगे, मिलने-जुलने लगे। उनके सहपाठियों में उनकी मित्रता ने पहचान बना ली। अध्यापक किसी काम को कहते तो वे दोनों लपककर उसे करने को तैयार रहते।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल में सहज प्रतिस्पर्धा का माहौल होता ही है। कुछ दिन बाद स्कूल में वार्षिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन होना था। उसके बाद स्कूल के खिलाड़ियों का एक समूह तैयार किया जाना था, जिसे कुछ महीने बाद शिमला में आयोजित होने वाली अंतर्विद्यालय खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। अध्यापकों के कहने पर सभी कक्षाओं के इच्छुक विद्यार्थियों ने अपने नाम लिखवाए। सामान्य ट्रायल के बाद चुने हुए विद्यार्थियों को खेल अध्यापक द्वारा अभ्यास करवाया जाना था ताकि प्रतियोगिता में ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार जीत सकें। खेल या शौक के सन्दर्भ में सभी की रूचियां समान नहीं होतीं। जीवन की दिलचस्पी खेलों में कम डांस, पेंटिंग और डिबेट में ज्यादा थी। सोहन के कहने पर वह ट्रायल में चला तो गया, लेकिन क्वालिफाई नहीं कर पाया। सोहन पहले से खेलता था, सफल रहा और अन्य विद्यार्थियों के साथ अभ्यास के लिए जाने लगा। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">अब सहपाठी जीवन को यह कहकर चिढ़ाने लगे कि तुम्हारा मित्र तुमसे आगे निकल गया। तुम्हें खेलना नहीं आता, अब तो तुम्हारी दोस्ती खत्म। जीवन ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया, चुपचाप सुनता रहा। शाम को घर पहुंचकर उसने अपनी मम्मी से बात की। स्कूल की बातें वह रोजाना मम्मी से शेयर करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">मम्मी उसे उचित सुझाव देती थीं। इस बार भी पूरी बात सुनकर मम्मी ने कहा, ‘देखो बेटा, संसार में सब एक जैसे नहीं होते। यह जरूरी नहीं कि हर विद्यार्थी, हर काम करे या सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर</p>
<p style="text-align:justify;">पुरस्कार जीते। एक बच्चा एक काम में बेहतर होता है, दूसरा किसी दूसरे काम में किसी की दिलचस्पी फुटबॉल तो किसी की टेबल टेनिस में होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वहीं दूसरे की मिमिक्री या चित्रकारी में, हां अगर हम कोशिश करें तो….</h4>
<p style="text-align:justify;">‘मैं किसी खेल में भी कोशिश करना चाहता हूं’ जीवन ने कहा। ‘हां, क्यों नहीं, कुछ सीखने या करने की अगर ठान लो तो क्या मुश्किल है? तुम्हारे दादा कहा करते थे ‘मेहनत का रास्ता मुश्किल है, मगर यह हर मुश्किल का हल है।’</p>
<p style="text-align:justify;">सोहन खेल प्रतियोगिता से लौटकर आया तो कक्षा और स्कूल में उसकी चर्चा होती रही, क्योंकि वह तीन इनाम जीतकर लाया था। जीवन ने जाकर उसे बधाई दी, लेकिन पता नहीं क्यों उसने अच्छे से बात नहीं की। संभवत: उसे सफलता का अभिमान हो गया था। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन को यह अच्छा नहीं लगा। उसने फिर मम्मी से बात की, उस दिन पापा भी वहीं बैठे हुए थे। उन्होंने कहा, ‘अच्छे मित्रों को ऐसा नहीं करना चाहिए। सफलता का अभिमान नहीं करना चाहिए। भविष्य में कोई और कोशिश करेगा तो वह भी जीत सकता है।’</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन ने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि वह खेलों में भी हिस्सा लेगा। इस बारे में उसने पापा से कहा तो उन्होंने समझाया, ‘खेलना भी जरूरी है बेटा, ताकि हमारा शरीर स्वस्थ रहे, स्वस्थ शरीर से ही सब कुछ संभव है, लेकिन यह जरूर समझना चाहिए कि जीवन में जो कुछ भी हमें मिलना है, वह पढ़ाई के दम पर ही मिलना है। पहले पढ़ाई, बाकी सब बाद में । हां, अगर आप खेल में दिलचस्पी रखते हो तो जरूर खेलना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन को बैडमिंटन देखना अच्छा लगता था, उसने पापा से कहा, ‘मुझे तो बैडमिंटन पसंद है, आप भी तो यही खेलते हो, क्या मैं कल से, आपके साथ बैडमिंटन सीखने क्लब चल सकता हंू?’ पापा उसको सहयोग देने को तैयार थे, बोले, ‘कल से क्यों बेटा, आज से ही क्यों नहीं? मेरे पास एक एक्स्ट्रा रैकेट है, उसे ले लो, थोड़ी देर बाद चलते हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही देर बाद जीवन और उसके पापा दोनों खेलने निकल पड़े। मम्मी ने खुश होकर दोनों को ‘आॅल द बेस्ट’ कहा। वह जानती थीं कोशिश, सफलता की पहली सीढ़ी होती है। Little Genius</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Indian Railway : रेलवे में बड़े क्रांतिकारी सुधार की उम्मीद" href="http://10.0.0.122:1245/major-revolutionary-reform-expected-in-railways/">Indian Railway : रेलवे में बड़े क्रांतिकारी सुधार की उम्मीद</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 15:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जो काम नहीं आता, उसे करने का दिखावा नहीं करना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[कबूतर का घोंसला (Pigeon Story) एक बार गौतम बुद्ध शाम के समय कुटिया के बाहर शिष्यों के साथ बैठे थे। तभी वहां एक कबूतर का जोड़ा उड़ता हुआ आ गया। उन्हें देख कर महात्मा बुद्ध को एक कहानी याद आई और उन्होंने शिष्यों को कहानी सुनाना शुरू किया। एक पेड़ पर एक कबूतर और कबूतरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/pigeon-story/article-50116"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/pigeon-story.gif" alt=""></a><br /><h3>कबूतर का घोंसला</h3>
<p style="text-align:justify;">(Pigeon Story) एक बार गौतम बुद्ध शाम के समय कुटिया के बाहर शिष्यों के साथ बैठे थे। तभी वहां एक कबूतर का जोड़ा उड़ता हुआ आ गया। उन्हें देख कर महात्मा बुद्ध को एक कहानी याद आई और उन्होंने शिष्यों को कहानी सुनाना शुरू किया। एक पेड़ पर एक कबूतर और कबूतरी रहते थे। कुछ समय बाद कबूतरी ने उसी पेड़ की टहनी पर तीन अंडे दिए। एक दिन कबूतर और कबूतरी दोपहर के समय खाना ढूंढते हुए कुछ दूर निकल गये। तभी कहीं से एक लोमड़ी आ गई। वह भी भोजन की तलाश में पेड़ पर चढ़ी। जहां उसे कबूतर के अंडे मिल गये और वो अंडों को खा गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जब कबूतर का जोड़ा वापस आया तो अंडे न पा कर बहुत परेशान हो गया। दोनों को बहुत बुरा लग रहा था। उनका मन टूट सा गया। तभी कबूतर ने निश्चय किया कि अब वह घोंसला बनाएगा। ताकि फिर कभी उसके अंडे कोई न खा जाए। कबूतर ने अपने निर्णय अनुसार तिनके इकट्ठे करके घोंसला बनाना शुरू किया। पर उसे एहसास हुआ कि उसे तो घोंसला बनाना आता ही नहीं है। तब उसने मदद के लिए जंगल के दूसरे पक्षियों को बुलाया। सभी पक्षी उसकी मदद के लिए आ गए और उन्होंने कबूतर के लिए घोंसला बनाना शुरू किया। पक्षियों ने अभी कबूतर को सिखाना शुरू ही किया था कि कबूतर ने बोला कि अब वो घोंसला बना लेगा। उसने सब सीख लिया है। सभी पक्षी यह सुन कर वापस चले गए।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कबूतर ने घोंसला बनाना शुरू किया। उसने एक तिनका इधर रखा एक तिनका उधर। उसे समझ आया कि वह अभी भी कुछ नहीं सीखा है। उसने फिर से पक्षियों को बुलाया। पक्षियों ने आकर फिर घोंसला बनाना शुरू किया। अभी आधा घोंसला बना ही था कि कबूतर जोर से चिल्लाया, तुम सब छोड़ दो अब मैं समझ गया हूं यह कैसे बनेगा। इस बार पक्षियों को बहुत गुस्सा आया। सारे पक्षी तिनके वहीं छोड़ कर चले गये। कबूतर ने फिर कोशिश की पर उस से घोंसला नहीं बना। कबूतर ने तीसरी बार पक्षियों को बुलाया, लेकिन इस बार एक भी पक्षी मदद के लिए नहीं आया और आज तक कबूतर को घोंसला बनाना नहीं आया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कहानी से सीख | Pigeon Story</h3>
<p style="text-align:justify;">गौतम बुद्ध जी की इस कहानी ने बताया कि हमें जो काम नहीं आता हो, उसे किसी की मदद से पूरी तरह सीख लेना चाहिए। जो काम नहीं आता हो उसे जबरदस्ती करने का दिखावा नहीं करना चाहिए, क्योंकि मदद करने वाला व्यक्ति एक या दो बार तो आपकी मदद करेगा, लेकिन हर बार नहीं। इसलिए, किसी की मदद का सम्मान करते हुए वह काम पूरी निष्ठा के साथ सीखना चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Costly food Item: बात पते की, चीज ये लाख टके की! दाम नहीं हैं कम, रहती महंगी हरदम!" href="http://10.0.0.122:1245/costly-food-item/">Costly food Item: बात पते की, चीज ये लाख टके की! दाम नहीं हैं कम, रहती महंगी हरदम!</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 16:04:06 +0530</pubDate>
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                <title>Little Genius:- चिड़िया और किसान</title>
                                    <description><![CDATA[एक गाँव में एक किसान रहता था। उसका गाँव के बाहर एक छोटा सा खेत था। एक बार फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसके खेत में चिड़िया ने घोंसला बना लिया। कुछ समय बीता, तो चिड़िया ने वहाँ दो अंडे भी दे दिए। उन अंडों में से दो छोटे-छोटे बच्चे निकल आये। वे बड़े […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-of-the-bird-and-the-farmer/article-49736"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/little-genius.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक गाँव में एक किसान रहता था। उसका गाँव के बाहर एक छोटा सा खेत था। एक बार फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसके खेत में चिड़िया ने घोंसला बना लिया। कुछ समय बीता, तो चिड़िया ने वहाँ दो अंडे भी दे दिए। उन अंडों में से दो छोटे-छोटे बच्चे निकल आये। वे बड़े मजे से उस खेत में अपना जीवन गुजारने लगे। कुछ महीनों बाद फसल कटाई का समय आ गया। गाँव के सभी किसान अपने खेतों की फसल की कटाई में लग गए। अब चिड़िया और उसके बच्चों का वह खेत छोड़कर नए स्थान पर जाने का समय आ गया था। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन खेत में चिड़िया के बच्चों ने किसान को यह कहते सुना कि कल मैं फसल कटाई के लिए अपने पड़ोसी से पूछूंगा और उसे खेत में भेजूंगा। यह सुनकर चिड़िया के बच्चे परेशान हो गए। उस समय चिड़िया कहीं गई हुई थी। जब वह वापस लौटी, तो बच्चों ने उसे किसान की बात बताते हुए कहा, माँ, आज हमारा यहाँ अंतिम दिन है। रात में हमें दूसरे स्थान के लिए यहाँ से निकलना होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया ने उत्तर दिया, ‘इतनी जल्दी नहीं बच्चो। मुझे नहीं लगता कि कल खेत में फसल की कटाई होगी।’ चिड़िया की कही बात सही साबित हुई। दूसरे दिन किसान का पड़ोसी खेत में नहीं आया और फसल की कटाई न हो सकी। शाम को किसान खेत में आया और खेत को जैसे का तैसा देख बुदबुदाने लगा कि ये पड़ोसी तो नहीं आया। ऐसा करता हूँ कल अपने किसी रिश्तेदार को भेज देता हूँ।’ Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया के बच्चों ने फिर से किसान की बात सुन ली और परेशान हो गए। जब चिड़िया को उन्होंने ये बात बताई, तो वह बोली, ‘तुम लोग चिंता मत करो। आज रात हमें जाने की जरूरत नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसान का रिश्तेदार आएगा।’ठीक ऐसा ही हुआ और किसान का रिश्तेदार अगले दिन खेत नहीं पहुँचा। चिड़िया के बच्चे हैरान थे कि उनकी माँ की हर बात सही हो रही है। अगली शाम किसान जब खेत आया, तो खेत की वही स्थिति देख बुदबुदाने लगा कि ये लोग तो कहने के बाद भी कटाई के लिए नहीं आते है। कल मैं खुद आकर फसल की कटाई शुरू करूंगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया के बच्चों ने किसान की ये बात भी सुन ली। अपनी माँ को जब उन्होंने ये बताया तो वह बोली, ‘बच्चो, अब समय आ गया है ये खेत छोड़ने का। हम आज रात ही ये खेत छोड़कर दूसरी जगह चले जाएंगे।’ दोनों बच्चे हैरान थे कि इस बार ऐसा क्या है, जो माँ खेत छोड़ने को तैयार है। उन्होंने पूछा, तो चिड़िया बोली, ‘बच्चो, पिछली दो बार किसान कटाई के लिए दूसरों पर निर्भर था। दूसरों को कहकर उसने अपने काम से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इस बार उसने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। इसलिए वह अवश्य आएगा।’</p>
<h3 style="text-align:justify;">उसी रात चिड़िया और उसके बच्चे उस खेत से उड़ गए और कहीं और चले गए।</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीख:</strong> दूसरों की सहायता लेने में कोई बुराई नहीं है। किंतु यदि आप समय पर काम शुरू करना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह समय पर पूरा हो जाए, तो उस काम की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी। दूसरे भी मदद उसी की करते हैं, जो अपनी मदद करता है। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों बच्चे हैरान थे कि इस बार ऐसा क्या है, जो माँ खेत छोड़ने को तैयार है। उन्होंने पूछा, तो चिड़िया बोली, ‘बच्चों, पिछली दो बार किसान कटाई के लिए दूसरों पर निर्भर था। दूसरों को कहकर उसने अपने काम से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, इस बार उसने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। इसलिए वह अवश्य आएगा।’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मॉनसून की शुरू हुई कहानी, सरसा शहर हुआ पानी-पानी" href="http://10.0.0.122:1245/the-story-of-monsoon-started-sarsa-city-became-water-water/">मॉनसून की शुरू हुई कहानी, सरसा शहर हुआ पानी-पानी</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 17:29:07 +0530</pubDate>
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                <title>पिंजरे का बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[एक समय की बात है एक शरीफ आदमी था। उसके पास एक बंदर था, वह बंदर के जरिए अपनी आजीविका कमाता था। बंदर कई तरह के करतब लोगों को दिखाता था। लोग उस पर पैसे फेंकते थे, जिसे बंदर इकट्ठा करके अपने मालिक को दे देता था। एक दिन मालिक बंदर को चिड़ियाघर लेकर गया, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/cage-monkey/article-37886"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/cage-monkey.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक समय की बात है एक शरीफ आदमी था। उसके पास एक बंदर था, वह बंदर के जरिए अपनी आजीविका कमाता था। बंदर कई तरह के करतब लोगों को दिखाता था। लोग उस पर पैसे फेंकते थे, जिसे बंदर इकट्ठा करके अपने मालिक को दे देता था। एक दिन मालिक बंदर को चिड़ियाघर लेकर गया, बंदर ने वहां पिंजरे में एक और बंदर देखा। लोग उसे देख- देख कर खुश हो रहे थे तथा उसे खाने को फल बिस्किट इत्यादि दे रहे थे। बंदर ने सोचा कि पिंजरे में रहकर भी यह बंदर कितना भाग्यवान है, बिना किसी परिश्रम के ही इसे खाना-पीना मिल जाता है। उस रात वह बंदर भी भागकर चिड़ियाघर में रहने पहुंच गया, उसे मुफ्त का खाना और आराम बहुत अच्छा लगा। पर कुछ दिनों में ही बंदर का मन भर गया। उसे अपनी स्वतंत्रता की याद आने लगी, अपनी आजादी वापिस चाहता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वह फिर चिड़ियाघर से भागकर अपने मालिक के पास पहुंच गया। उसे मालूम हो गया की रोटी कमाना कठिन होता है, किंतु आश्रित होकर पिंजरे में कैद रहना उससे भी कठिन है। अपने पौरुष से ही मनुष्य की महानता है, मुफ्त की चीजें लोगों को निक्कमी बना देती है। ‘जिंदगी तो अपने दम पर जिया जाता है यारों, दूसरों के कांधों पर तो सिर्फ जनाजे निकलते हैं।’</p>
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                <pubDate>Sat, 17 Sep 2022 17:16:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नल का महत्त्व</title>
                                    <description><![CDATA[कहानी लेखक: (उर्वशी) चीकू खरगोश, मीकू बंदर, डंकू सियार और गबदू गधा एक मैदान में फुटबाल खेल रहे थे। तभी गबदू गधे ने एक जोरदार किक मारी तो फुटबाल हवा में लहराता हुआ मैदान के बाहर जा गिरा और उछलता हुआ पानी से भरे एक गड्डे में चला गया। फुटबाल लाने मीकू बंदर तेजी से दौड़ा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/importance-of-water-tap/article-37769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/little-genius.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कहानी लेखक: (उर्वशी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">चीकू खरगोश, मीकू बंदर, डंकू सियार और गबदू गधा एक मैदान में फुटबाल खेल रहे थे। तभी गबदू गधे ने एक जोरदार किक मारी तो फुटबाल हवा में लहराता हुआ मैदान के बाहर जा गिरा और उछलता हुआ पानी से भरे एक गड्डे में चला गया।<br />
फुटबाल लाने मीकू बंदर तेजी से दौड़ा मगर फुटबाल को गड्डे में पड़ा हुआ देखकर वह उल्टे पांव लौट आया।<br />
वह बोला, ‘फुटबाल फिर उसी कीचड़ और पानी से भरे गड्डे में चला गया है। मैं उस गड्डे में घुसकर फुटबाल नहीं निकालूंगा। जिसने किक मारी है, वही घुसकर फुटबॉल लाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किक तो गबदू गधे ने मारी थी। इसलिए उसे ही उस गड्डे में घुसकर फुटबॉल लाना पड़ा।<br />
फुटबाल निकालने के चक्कर में वह कीचड़ में नहा गया। उसकी सूरत देखकर तीनों हो हो कर हंसने लगे।<br />
इसी तरह एक बार जब मीकू ने जोरदार किक मारी तो फुटबाल फिर उसी गड्डे में जा गिरा। मीकू को ही गड्डे में घुसकर फुटबाल निकाल कर लाना पड़ा।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े-</strong></span> <strong><a href="http://10.0.0.122:1245/mysterious-light-like-a-train-seen-in-the-y-of-fatehabad/?utm_source=newsshowcase&amp;utm_medium=gnews&amp;utm_campaign=CDAqEAgAKgcICjCp5pgLMLnwsAMwqf9V&amp;utm_content=rundown">फतेहाबाद के आसमान में दिखी ट्रेन जैसी रहस्मयी रोशनी</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;">मैदान के किनारे एक पेड़ था। पेड़ के पास ही एक नल था। जो भी बच्चे मैदान में खेलते, अगर थक जाते तो सुस्ताने के लिए पेड़ के नीचे जाकर बैठ जाते और प्यास लगती तो नल का ठंडा पानी पीते।<br />
नल के पास ही एक गड्डा था जिसमें नल का पानी बहकर जमा हो जाता था।<br />
चारों दोस्तों को उस गड्डे के कारण फुटबाल खेलते समय रोज परेशान होना पड़ता था। उनके कपड़े भी खराब हो जाते थे।<br />
जिसकी भी किक से फुटबाल गड्डे में जा गिरता, फुटबाल उसी को बाहर निकालकर लाना पड़ता था।<br />
एक दिन गबदू गधे ने कहा, ‘या तो गड्डे को मिट्टी डालकर भर दो या वहां जो नल है, उसे बंद कर दो।’<br />
‘गबदू ने फिर कहा, मेरे विचार से नल को ही बंद कर देना चाहिए।’<br />
तीनों की बातें सुनकर चीकू कुछ सोच रहा था।<br />
‘चीकू तुम क्या सोच रहे हो? तुम भी तो कुछ बोलो न’ तीनों एक साथ बोले।<br />
चीकू बहुत समझदार था। कुछ भी करने या कहने से पहले वह अच्छी तरह सोच विचार कर लेता था।<br />
कुछ देर सोचकर चीकू ने जवाब दिया, ‘यह ठीक है कि हम लोगों को उस गड्डे के कारण बहुत परेशानी होती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम नल को ही बंद कर दें। नल वहां होने से हमें पानी पीने दूर नहीं जाना पड़ता है।’<br />
‘पानी तो हम नदी के किनारे भी जा कर पी सकते हैं।’<br />
‘नदी यहां से कितनी दूर है, तुम्हें पता है?’ चीकू ने कहा, ‘वहां जाने में 15 मिनट लगते हैं।’<br />
‘तो क्या हुआ। पानी पीने के लिए 15 मिनट चल नहीं सकते’। तीनों ने तर्क पेश किया।<br />
इन लोगों को इस नल का महत्त्व तभी पता चलेगा जब इन्हें पानी पीने रोज नदी पर जाना पड़ेगा। यह सोचकर चीकू ने कहा, ‘नल को बंद करने के पहले एक बार फिर अच्छी तरह सोच लो।’<br />
हमने सोच लिया है। हम नल को बंद कर देंगे। तीनों एक साथ बोले।<br />
तीनों ने नल की टोंटी खोली और पाइप में लकड़ी का टुकड़ा डालकर उसे बंद कर दिया।<br />
अगले दिन खेलने के बाद चारों को प्यास लगी। तभी मीकू बंदर ने कहा, ‘चलो, नदी के किनारे पानी पीने चलते हैं।’<br />
चीकू बोला, ‘तुम लोग जाओ, मैं घर से पानी की बोतल साथ लाया हूं’ इतना कहकर वह मैदान के किनारे रखे अपने बैग से बोतल निकाल कर पानी पीने लगा। तीनों नदी की तरफ चल दिए। इधर पानी पी कर चीकू सुस्ताने लगा। करीब 2० मिनट के बाद तीनों पानी पी कर लौटे। वे फिर खेलने लगे। इस तरह तीनों को पानी पीने रोज नदी के किनारे जाना पड़ता था। आने जाने में वे थक जाते थे। उनसे ठीक से खेला नहीं जाता था।<br />
एक दिन चारों खेल रहे थे कि तभी गबदू गधा बेहोश हो कर गिर पड़ा।<br />
‘जल्दी से पानी लाओ,’ मीकू बंदर घबरा कर बोला, झ्इसके मुंह पर पानी के छींटे मारने से इसे होश आएगा।’<br />
‘अरे चीकू, तुम्हारे पास तो पानी की बोतल है न, ‘डंकू सियार ने कहा, झ्जल्दी से ले कर आओ।’<br />
‘पानी तो पीकर मैंने खत्म कर दिया, ‘चीकू बोला, ‘खाली बोतल ले कर जाओ और नदी से पानी भर कर ले आओ।’<br />
चीकू से बोतल लेकर डंकू नदी की तरफ दौड़ा। 15 मिनट बाद वह पानी लेकर लौटा।<br />
मीकू ने गबदू के मुंह पर छींटे मारे तो वह होश में आया।<br />
‘आज अगर नल चालू होता तो पानी लाने नदी पर नहीं जाना पड़ता, ‘चीकू ने कहा, ‘डंकू को पानी लाने में अगर थोड़ी देर हो जाती तो गबदू की जान भी जा सकती थी।’<br />
तीनों को लगा कि चीकू ठीक कहता है। नल का मैदान के किनारे होना बहुत जरूरी है।<br />
‘चीकू, हमने फैसला किया है कि हम आज ही नल को फिर से चालू कर देंगे,’ मीकू बंदर ने कहा, झ्नल का यहां होना बहुत जरूरी है।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘आज अगर नल चालू होता तो पानी लाने नदी पर नहीं जाना पड़ता, ‘चीकू ने कहा, ‘डंकू को पानी लाने में अगर थोड़ी देर हो जाती तो गबदू की जान भी जा सकती थी।’ तीनों को लगा कि चीकू ठीक कहता है। नल का मैदान के किनारे होना बहुत जरूरी है।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Sep 2022 15:47:50 +0530</pubDate>
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