<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/murrah/tag-20755" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Murrah - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/20755/rss</link>
                <description>Murrah RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>‘मुर्राह’ ने बनाया किसान नेमपाल सिंह को लखपति</title>
                                    <description><![CDATA[पशु भले ही कम रखें, लेकिन नस्ल सुधार पर ध्यान जरूर दें : डॉ. सतपाल ओढां (सच कहूँ/राजू)। खेती के साथ-साथ किसान अगर पशुपालन में नस्ल सुधार की ओर ध्यान दें तो दोहरा मुनाफा कमाया जा सकता है। कुछ ऐसे किसान भी हैं जो पशुपालन में बेहतर नस्लों का चयन कर प्रतिवर्ष लाखों रुपये की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/animals-may-be-kept-less-but-pay-attention-to-breed-improvement-dr-satpal/article-38211"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/murrah.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पशु भले ही कम रखें, लेकिन नस्ल सुधार पर ध्यान जरूर दें : डॉ. सतपाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (सच कहूँ/राजू)।</strong> खेती के साथ-साथ किसान अगर पशुपालन में नस्ल सुधार की ओर ध्यान दें तो दोहरा मुनाफा कमाया जा सकता है। कुछ ऐसे किसान भी हैं जो पशुपालन में बेहतर नस्लों का चयन कर प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आमदन ले रहे हैं। इसका एक उदाहरण ओढां खंड के गांव चोरमार खेड़ा में देखने को मिल रहा है। ये किसान पशुपालन के क्षेत्र में लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है। इस बारे सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां ने उक्त किसान से विशेष बातचीत की। पेशे से शिक्षक नेमपाल सिंह ने बताया कि किसी समय वे अपने घर में नस्ल चयन से अनभिज्ञ होकर काफी पशु रखता था। उसे एक पशु चिकित्सक ने नस्ल चुनाव का मशवरा देते हुए मुर्राह नस्ल की भैंस खरीदने की बात कही। जिसके बाद उसने ऊंचे दामों पर मुर्राह नस्ल की भैंस खरीदी। इस भैंस से उसने 3 कटड़ियां लेते हुए उनकी उचित ढंग से देखरेख की। उसने बताया कि जब वे इतने ऊंचे दामों पर भैंस खरीदकर लाए तो उन्हें लोगों ने काफी टोका। लेकिन उन्होेंने इसकी परवाह न करते हुए अपने कार्य पर ध्यान दिया। नस्ल सुधार के मामले में आज क्षेत्र में नेमपाल सिंह का नाम चर्चाओं में रहता है। नेमपाल सिंह नस्ल सुधार अपनाकर हर वर्ष अच्छा मुनाफा कमा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लाखों का जीते चुके हैं इनाम :</h3>
<p style="text-align:justify;">नेमपाल सिंह को मुर्राह नस्ल ने लखपति बना दिया है। इस व्यवसाय में सरकार की दुग्ध प्रतियोगिता के तहत उसकी भैंसें 20 से 25 किलो तक दूध देकर अब तक लाखों रुपये का इनाम जीत चुकी हैं। किसान नेमपाल सिंह दुग्ध प्रतियोगिता के अलावा इस व्यवसाय में समय-समय पर मुर्राह भैंस बेचकर मोटा मुनाफा कमा चुका है। नेमपाल सिंह ने साढ़े 4 साल उम्र की रानी नामक भैंस को 3.10 लाख में बेचकर ये साबित कर दिखाया कि अगर किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी तरजीह दें तो वह खुशहाल हो सकता है। किसान नेमपाल सिंह ने बताया कि रानी भैंस एक दिन में 19 किलो दूध देती थी। इस समय नेमपाल सिंह की रुतबा नामक भैंस ने एक दिन में 22 किलो 800 ग्राम दूध देकर ब्लॉक स्तर पर 20 हजार रुपये का इनाम जीता है। नेमपाल सिंह के पास इस समय मुर्राह नस्ल की कई भैंस हैं। नेमपाल सिंह की भैंस व कटड़ियां सौंदर्यकरण प्रतियोगिता में भी अग्रणी रहकर इनाम जीत चुकी हैं। नेमपाल सिंह से प्रेरित होकर अन्य पशुपालक भी नस्ल सुधार की ओर ध्यान देने लगे हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/record-set-for-swimming-36-km-in-northern-ireland/">सात समुद्र पार हरियाणा के दिव्यांग बेटे ने रचा इतिहास</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">भले ही पशु कम रखें, लेकिन नस्लदार हों :-</h3>
<p style="text-align:justify;">नेमपाल सिंह ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि लोग अधिक पशु रखते हैं, लेकिन नस्ल सुधार पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि पशु भले ही कम रखें, लेकिन अच्छी नसल के हों। भैंस 15 किलोग्राम से ऊपर दूध देने वाली होनी चाहिए अन्यथा दूध कम होने के कारण खर्च अधिक और आमदन कम होगी। मुर्राह भले ही थोड़ी महंगी है, लेकिन किसान की आर्थिक दशा सृदृढ़ कर सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अच्छी नस्ल अपनाएं लाखों कमाएं :-</h3>
<p style="text-align:justify;">वेटनरी सर्जन डॉ. सतपाल खुंडिया ने बताया कि किसान खेती के साथ-2 पशुपालन भी अपनाएं और अच्छी नस्ल के चयन पर ध्यान अवश्य दें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दुग्ध प्रतियोगिता शुरू की गई है। जिसमें 18 से 22 किलो दूध देने वाली भैंस पर 15 हजार रुपये, 22 से 25 तक 20 हजार रुपए व इससे ऊपर दूध देने वाली भैंस पर 30 हजार की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मुर्राह के अलावा गाय की नस्ल में भी दुग्ध प्रतियोगिता में हजारों का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिसमें हरियाणा गाय पर 8 से 10 किलो दूध तक 10 हजार, 10 से 12 तक 15 हजार व इससे ऊपर 20 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार साहीवाल 10 से 12 किलो तक 10 हजार, 12 से 15 किलो तक 15 हजार व इससे ऊपर दूध देने वाली गाय पर 20 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। डॉ. खुंडिया ने बताया कि पिछले कुछ समय से किसानों का नस्ल सुधार की तरफ काफी रूझान देखा जा रहा है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/animals-may-be-kept-less-but-pay-attention-to-breed-improvement-dr-satpal/article-38211</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/animals-may-be-kept-less-but-pay-attention-to-breed-improvement-dr-satpal/article-38211</guid>
                <pubDate>Sun, 25 Sep 2022 15:45:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/murrah.jpg"                         length="55110"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        