<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/crop-damage/tag-20775" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Crop Damage - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/20775/rss</link>
                <description>Crop Damage RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IMD Alert : पंजाब में फिर येलो अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[16 अप्रैल से राहत के आसार 17-18 अप्रैल को पूरे पंजाब में होगी बारिश अमृतसर। (सच कहूँ न्यूज)। गर्मी की तपिस धीरे-धीरे बढ़ रही है। (IMD Alert) पंजाब के अधिकतर शहरों का तापमान 35 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है। लेकिन कुछ ही दिनों में बढ़े पारे से एक बार फिर राहत के आसार बनते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/yellow-alert-again-in-punjab/article-46120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/weather1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">16 अप्रैल से राहत के आसार</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>17-18 अप्रैल को पूरे पंजाब में होगी बारिश</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर। (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गर्मी की तपिस धीरे-धीरे बढ़ रही है। (IMD Alert) पंजाब के अधिकतर शहरों का तापमान 35 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है। लेकिन कुछ ही दिनों में बढ़े पारे से एक बार फिर राहत के आसार बनते दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में पंजाब में बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। जिसे देखते हुए पंजाब में मौसम विभाग ने एक बार फिर येलो अलर्ट जारी कर दिया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पंजाब के अधिकतर हिस्सों में बारिश की संभावना</h3>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग ने पंजाब को चार हिस्सों माझा, दोआबा और पश्चिम व पूर्व मालवा में बांट रखा है। मौसम विभाग के अनुसार 16 मार्च को पंजाब के माझा और दोआबा में बारिश हो सकती है। वहीं, 17-18 अप्रैल को पूरे पंजाब में बारिश होगी। मौसम विभाग ने 16 से 18 अप्रैल तक येलो अलर्ट किया जारी दिया है। उसके बाद भी 20 अप्रैल तक पंजाब के अधिकतर हिस्सों में बारिश के आसार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शाह सतनाम जी सार्वजनिक अस्पताल के चिकित्सकों को हासिल हुई बड़ी सफलता" href="http://10.0.0.122:1245/doctors-of-shah-satnam-ji-hospital-achieved-great-success/">शाह सतनाम जी सार्वजनिक अस्पताल के चिकित्सकों को हासिल हुई बड़ी सफलता</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">फसलें हो सकती हैं बर्बाद</h3>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पंजाब में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं खेतों में खड़ी फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। (IMD Alert)</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसान उठा चुके हैं काफी नुकसान</h3>
<p style="text-align:justify;">बीते दिनों हुई बारिश से पहले ही पंजाब के किसान काफी नुकसान सह चुके हैं। काफी अधिक झाड़ झड़ चुका है। इतना ही नहीं, गेहूं के दाने का आकार भी सामान्य से कम हो चुका है। राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्र ने गेहूं खरीदने में हामी तो भर दी है, लेकिन दाम में कटौती कर दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तापमान में हो सकती है बढ़ोतरी</h3>
<p style="text-align:justify;">अगले दो दिनों के अंदर दिन के तापमान में काफी अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के अधिकतर शहरों का तापमान अगले दो दिनों में 39 डिग्री तक पहुंच सकता है, जो सामान्य से काफी अधिक है।<br />
वहीं 16 अप्रैल के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। दिन के तापमान में 3 से 6 डिग्री तक गिरावट होगी। तापमान कम होकर 33 डिग्री तक पहुंच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/yellow-alert-again-in-punjab/article-46120</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/yellow-alert-again-in-punjab/article-46120</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Apr 2023 18:03:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-04/weather1.jpg"                         length="49836"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sangrur: गेहूं की जगह की फूलों की खेती, अच्छे मुनाफे की थी उम्मीद, अचानक कुदरत के कहर ने सब कुछ किया तबाह</title>
                                    <description><![CDATA[संगरूर। पिछले दिनों जहां आसमान से बरसी आपदा ने किसानों की फसल को चौपट कर दिया, वहीं नई फसल उगाने वाले किसानों के चूल्हे भी जलते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक संगरूर के गिदरियानी गांव में किसान 150 से 200 एकड़ में फूलों की खेती करते हैं, लेकिन अब ओलावृष्टि से उनकी फसल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/flowers-were-cultivated-in-place-of-wheat-there-was-hope-of-good-profit-suddenly-natures-havoc-destroyed-everything/article-45563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/sangrur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर।</strong> पिछले दिनों जहां आसमान से बरसी आपदा ने किसानों की फसल को चौपट कर दिया, वहीं नई फसल उगाने वाले किसानों के चूल्हे भी जलते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक संगरूर के गिदरियानी गांव में किसान 150 से 200 एकड़ में फूलों की खेती करते हैं, लेकिन अब ओलावृष्टि से उनकी फसल बर्बाद हो गई है। ये किसान अमेरिका, हॉलैंड और जर्मनी में 300 से 500 किलो बीज बेचते थे। किसानों का कहना है कि अभी भी सिर पर बादल छाए हुए हैं। बरस गया बादल का पानी उन्हें रात को नींद भी नहीं आती। जिन खेतों में खुशी चेहरे पर दिख रही थी, अब उनका खेतों में जाने का मन नहीं कर रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अब वे सरकार से मुआवजा देने की गुहार लगा रहे हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले लोग खेतों में तस्वीरें लेने जाया करते थे क्योंकि जहां तक ​​नजर जाती पूरी जमीन रंग-बिरंगे फूलों से ढकी रहती थी। किसान भी खुश थे कि अच्छी फसल होने से इस बार अच्छा मुनाफा होगा लेकिन 30 मार्च को आसमान से आई ओलावृष्टि ने सपनों को चकनाचूर कर दिया। अब वे सरकार से मुआवजा देने की गुहार लगा रहे हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/flowers-were-cultivated-in-place-of-wheat-there-was-hope-of-good-profit-suddenly-natures-havoc-destroyed-everything/article-45563</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/flowers-were-cultivated-in-place-of-wheat-there-was-hope-of-good-profit-suddenly-natures-havoc-destroyed-everything/article-45563</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Apr 2023 15:07:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-04/sangrur.jpg"                         length="51006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुशखबरी: मोदी सरकार ने किसानों को दी बड़ी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[कटाई के बाद रखी फसल बरसात से खराब होने पर भी मिल सकेगा बीमा: कटारिया जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान में खेत में कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी फसल बरसात से खराब होने पर भी बीमा क्लेम मिल सकेगा और इसके लिए 72 घंटे में सूचना देनी होगी। यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/insurance-claim-even-if-the-crop-is-damaged-after-cutting/article-38808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/modi-21.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>कटाई के बाद रखी फसल बरसात से खराब होने पर भी मिल सकेगा बीमा: कटारिया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान में खेत में कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी फसल बरसात से खराब होने पर भी बीमा क्लेम मिल सकेगा और इसके लिए 72 घंटे में सूचना देनी होगी। यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत नुकसान की भरपाई हो सकेगी। इसके लिए प्रभावित किसान को 72 घंटे के भीतर खराबे की सूचना संबंधित जिले में कार्यरत बीमा कंपनी को देनी होगी। कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि राज्य में वर्तमान में कुछ स्थानों पर असामयिक वर्षा एवं जल भराव के कारण किसानों की खरीफ की फसलों में नुकसान होने की आशंका है। कृषि विभाग ने बीमा कंपनियों को तत्काल सर्वे कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बीमा कंपनियों को दिए निर्देश | PMFBY</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जलभराव के कारण किसान की बीमित खड़ी फसल में तथा फसल कटाई उपरान्त खेत में बंडल के रूप में सुखाने के लिए रखी फसल को 14 दिन तक की अवधि में नुकसान होने पर व्यक्तिगत आधार पर बीमा आवरण उपलब्ध कराने का प्रावधान है। कटारिया ने बताया कि असामयिक वर्षा एवं जल भराव से प्रभावित काश्तकारों के लिए बीमित फसल के नुकसान की सूचना घटना घटने के 72 घण्टे के भीतर जिले में कार्यरत बीमा कंपनी को देना जरूरी है ताकि नुकसान का आकलन कर बीमा क्लेम देने की कार्यवाही की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि फसल में हुए नुकसान की सूचना बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से भी दी जा सकती है। इसके अलावा प्रभावित किसान जिलों में कार्यरत बीमा कंपनी, कृषि कार्यालय अथवा संबंधित बैंक को भी हानि प्रपत्र भरकर सूचना दे सकते हैं। कृषि आयुक्त कानाराम ने विभागीय अधिकारियों और बीमा कंपनियों को तत्काल फील्ड में पहुंचकर फसल खराब पर संयुक्त सर्वे कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/insurance-claim-even-if-the-crop-is-damaged-after-cutting/article-38808</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/insurance-claim-even-if-the-crop-is-damaged-after-cutting/article-38808</guid>
                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 10:23:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-10/modi-21.jpg"                         length="25449"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसून की विदाई के बाद हुई बरसात से फसलों में भारी खराब</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा (सच कहूँ न्यूज़)। राजस्थान के कोटा संभाग में पिछले दो दिनों में हुई बरसात ने खरीफ की फसल को व्यापक नुकसान पहुचाया है। संभाग के चारों जिलों में से बारां जिले में सबसे अधिक दो दिन की बरसात के कारण वहां सबसे अधिक खराबा का अनुमान है। किसानों ने राज्य सरकार से फसली नुकसान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/damage-to-crops-due-to-rain-after-the-departure-of-monsoon/article-38694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/rain-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोटा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> राजस्थान के कोटा संभाग में पिछले दो दिनों में हुई बरसात ने खरीफ की फसल को व्यापक नुकसान पहुचाया है। संभाग के चारों जिलों में से बारां जिले में सबसे अधिक दो दिन की बरसात के कारण वहां सबसे अधिक खराबा का अनुमान है। किसानों ने राज्य सरकार से फसली नुकसान का आकलन करवाकर नुकसान के अनुरूप मुआवजा दिलवाने की मांग की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong> <a href="http://10.0.0.122:1245/environment-protection-thousands-of-houses-will-be-illuminated-with-cow-dung-lamps-on-diwali/">पर्यावरण संरक्षण : दीपावली पर गोबर के दीयों से जगमग होंगे हजारों घर</a></p>
<p style="text-align:justify;">संभाग में मानसून की विदाई के बाद बीते दो दिनों में हुई बरसात के कारण खरीफ़ के कृषि सत्र की सोयाबीन,धान और उड़द की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है क्योंकि संभाग में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में सोयाबीन की फसल कट चुकी है और खेत-खलियानों में पड़ी है जबकि धान की फसल कटने को तैयार है। इस बरसात से खरीफ़ की इन दोनों मुख्य फ़सलों के अलावा दलहनी फसल उड़द को भी काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है।</p>
<p style="text-align:justify;">बारां जिले में अटरू क्षेत्र के मोठपुर हलके के गांव हाथी दिलोद निवासी प्रगतिशील किसान राकेश चौधरी गुड्डू ने बताया कि इस बरसात के कारण खेतों में पड़ी सोयाबीन की फसल को व्यापक पैमाने पर नुकसान होने की आशंका है। किसान अपनी फसल काटकर उसे या तो थ्रेसर आदि से निकलवा रहे हैं या निकालने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में बीते दो दिनों में हुई बरसात से खेत-खलियान में पड़ी सूखी पड़ी सोयाबीन की फलियां गीली हो गई है और अब मशीन से निकालने से पहले सुखाना पड़ेगा और धूप लगने से फलियों के तड़कने और उसके दाने गिर जाने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। किसानों के लिए इस तड़की उपज को समेटना भी मुश्किल होगा और गीली फलियों का मशीन से दाना निकालना मुश्किल है।</p>
<p style="text-align:justify;">राकेश चौधरी गुड्डू ने यह भी बताया कि पिछले दो दिनों में बारां जिले के ज्यादातर इलाकों में धीमी से मध्यम बरसात हुई है जिससे नुकसान तो है ही लेकिन बरसात के साथ तेज हवाएं चलने के कारण धान की फसल में इसलिये सबसे अधिक खराबा हुआ है क्योंकि धान को पांच-सात दिन में एक काटने की तैयारी थी लेकिन अब तेज हवाएं चलने के कारण खड़ी फ़सल आड़ी पड़ गई है। इसके अलावा दलहनी फसल उड़द में भी व्यापक नुकसान है क्योंकि जिन खेतों में उड़द कटने को तैयार है, वहां बरसात और तेज हवाओं के असर से उम्मीद की फलियां टूट कर जमीन पर बिखर गई है और जहां भी यह हालात बने हैं, उसका व्यापक नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">संभाग के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के कई इलाकों में इस बार मानसून की अतिरिक्त मेहरबानी के कारण अतिवृष्टि जैसे हालात बने जिससे कृषि सत्र खरीफ में फसल खराबा हुआ जो अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके अलावा दो दिन की बरसात के बाद आज मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में कोटा संभाग के चारों जिलों में कई जगह मध्यम से तेज बरसात होने की चेतावनी दी है जिससे किसानों की पेशानी पर चिंता की लकीरें और ज्यादा ज्यादा गहरा गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच हाडोती किसान यूनियन ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि हाल ही में हुई अतिवृष्टि से खरीफ़ के कृषि क्षेत्र में करीब 1.15 लाख हेक्टेयर की के धान और छह से सात लाख हैक्टेयर के रकबे में सोयाबीन की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस खराबा का अभी तक आकलन नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार ने कहा कि राज्य सरकार कोटा संभाग के सभी जिलों में अतिवृष्टि से हुए खराबे के शीघ्र सर्वे के जिला कलक्टरों को निर्देश दे। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि खराबे के सर्वे के लिये आने वाले कर्मचारी प्रभावित किसानों को साथ लेकर उनके खेत – खलियान तक पहुंचे ताकि किसान से बातचीत एवं मौके के हालात के आधार पर वास्तविक नुकसान का आकलन हो सके। आमतौर पर कर्मचारी कार्यालय में बैठकर ही कागजी खानापूर्ति कर लेते हैं, जिससे किसानों को उनकी वास्तविक क्षति के अनुरुप मुआवजी नहीं मिल पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">दशरथ कुमार ने मांग की कि जमीनी स्तर पर खराबे के आकलन के बाद किसानों को कम से कम 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर सोयाबीन और 70 हजार से एक लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से धान का मुआवजा दिया जाना चाहिए। हालांकि मुआवजे की यह रकम भी नुकसान की तुलना में कम है, लेकिन इतना मुआवजा मिलने की स्थिति में किसान आंशिक राहत महसूस करेंगे।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/damage-to-crops-due-to-rain-after-the-departure-of-monsoon/article-38694</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/damage-to-crops-due-to-rain-after-the-departure-of-monsoon/article-38694</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 15:44:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-10/rain-4.jpg"                         length="84398"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरसात से हुए नुक्सान की कैसे हो भरपाई</title>
                                    <description><![CDATA[खेती किसानी अब तुक्का हो गई है, सही सलामत फसल कट जाए तो समझो बड़ी गनीमत है। वरना, कुदरत का प्रकोप उन्हें नहीं छोड़ता। बीते तीन वर्षों से लगातार बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। जब फसल पक कर खेतों में खड़ी होती है तभी बारिश हो जाती है और उसे बर्बाद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/crops-damaged-due-to-rain-2/article-38365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/vegetable-crop-destroyed.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खेती किसानी अब तुक्का हो गई है, सही सलामत फसल कट जाए तो समझो बड़ी गनीमत है। वरना, कुदरत का प्रकोप उन्हें नहीं छोड़ता। बीते तीन वर्षों से लगातार बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। जब फसल पक कर खेतों में खड़ी होती है तभी बारिश हो जाती है और उसे बर्बाद कर देती है। किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। सिर्फ अपनी किस्मत को कोसते रह जाते हैं। अन्नदाताओं को बेमौसम बारिश ने एक बार फिर फसल हीन कर दिया। किसान खेतों में जाकर बर्बाद हुई फसलों को रूआंसी आंखों से देख रहे हैं। तेज बौछारों ने हजारों-लाखों हेक्टेयर फसल चौपट कर दी। कई महीनों की मेहनत क्षणभर में पानी-पानी हो गई। अपने खेतों में बेचारे असहाय खड़े होकर कुदरत के कहर से बर्बाद होती अपनी फसलें देखते रहे। देखने नहीं, तो और कर भी क्या सकते थे? आखिर कुदरत के प्रकोप के सामने किसी की क्या मजाल?</p>
<p style="text-align:justify;">तबाही के बाद किसान अपनी उजड़ती फसलों को मन मसोसकर बस चुपचाप देखते रहे। ये दुखदाई तस्वीरें देखकर किसान क्या महसूस करते होंगे, ये हम-आप शायद अंदाजा भी नहीं लगा सकते? किसानों के लिए उनकी फसलें नवजात शिशु समान होती है जिसे वह छह महीने अपनी औलाद की तरह पालता-पोसता है। नवजात बच्चे हमारे लिए कितने दुलारे होते हैं शायद बताने की आवश्यकता नहीं? सोचो, जब उनके फसल नुमा बच्चे उनकी आंखों के सामने ओझल हो जाएं, तो उनके दिल पर क्या गुजरती होगी। सितंबर के अंत में अधिक वर्षा होना निश्चित रूप से खेतीकिसानी के लिए हानिकारक होता है। इस वक्त धान की फसल अधपकी खेतों में खड़ी होती है। कई जगहों पर तो पक चुकी होती है। मौसम वैज्ञानिकों ने फिलहाल मौजूदा बरसात का कारण पश्चिमी क्षेत्र के उपरी भाग में बहती चक्रवाती हवाओं को बताया है। ये भी सब कुदरत की ही माया है जिसके सामने किसी का कोई बस नहीं चलता।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, समूचे देशभर में लगातार पिछले सप्ताह हुई तीन दिनी तेज बारिश ने फसलों को जमीन पर बिछा दिया है। जब तक उठेंगी, तब तक बालियों के दाने सड़ चुके होंगे। धान के अलावा इस वक्त गन्ना भी खेतों में पका खड़ा है, वह भी बरसात और ओलावृष्टि से बर्बाद हुआ है। तराई जैसे कई जिलों में खेतों के भीतर पानी लबालब भरा हुआ है। निचले इलाकों में तो बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहां सब्जियां और कच्ची फसलें खेतों में ही सड़ने लगी हैं। मूली, मूंगफली, पालक, गोभी का तो नामोनिशान मिट गया। विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश जैसे इलाकों में हालात बद से बदतर हुए हैं। दरअसल, ये ऐसे राज्य हैं जहां दूसरी फसलों के मुकाबले धान की फसल इस मौसम में बहुतायत रूप से होती है। पंजाब को जैसे धान का कटोरा कहते हैं, तो वहीं तराई क्षेत्र समूचे हिंदुस्तान में धान उगाने के लिए प्रसिद्ध है। दोनों जगह बरसात ने फसलों को तबाह कर दिया है। फिलहाल नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकारों ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण करना शुरू कर दिया है, जांच टीमों को भेजा जाने लगा है। शासनादेश पर प्रदेश स्तर पर जिला प्रशासन भी मुस्तैद हो गए हैं। फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजा देने की प्रक्रिया आरंभ होगी। पर, सवाल उठता है कि क्या मुआवजे से किसानों के नुकसान की भरपाई हो पाएगी, शायद नहीं? सबको पता है कितना मुआवजा मिलेगा, शायद नाम मात्र का?</p>
<p style="text-align:justify;">अगर याद हो तो बीते वर्ष भी इसी मौसम में बेहिसाब बारिश ने किसानों को बेहाल किया था। पता नहीं खेती किसानी पर किसी की नजर ही लग गई है। क्योंकि कृषि क्षेत्र पर वैसे ही संकट के बादल छाए हुए हैं और बेमौसम बारिश ने संकट और गहरा दिया। ऐसी स्थितियों में किसानों को समझ नहीं आता वो करे तो क्या करें? कागजों में किसानों के लिए कल्याणकारी सरकारी सुविधाओं कोई कमी नहीं? फसलों को एमएसपी पर खरीदने की बातें कही जाती हैं, अन्य फसलों का उचित दाम देने का दम भरा जाता है। पर, धरातल पर सच्चाई शून्य होती हैं। दरअसल, सच्चाई तो ये है किसान बेसहारा हुआ पड़ा है। सुख-सुविधाओं से वह कोसों दूर है। सब्सिडी वाली खादें को भी उन्हें ब्लैक में खरीदना पड़ता है। यूरिया ऐसी जरूरी खाद है जिसके बिना फसलों को उगाना अब संभव नहीं? उसकी किल्लत से भी किसानों को बीते कई वर्षों से जूझना पड़ रहा है। बाद में रही सही कसर कुदरत निकाल लेता है। इस वक्त बरसात से जो फसलें बच गई हैं उनका दाना काला पड़ जाएगा, जिसे मंडी में सरकार द्वारा तय कीमत पर नहीं खरीदा जाएगा। मजबूरी में उसे किसान औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कायदे से गौर करें, तो फसल नुकसान का विकल्प मुआवजा कतई नहीं हो सकता। बर्बादी की भरपाई मुआवजे से नहीं की जा सकती है। इसके लिए बीमा योजना को ठीक से लागू करना होगा। वैसे, योजना अब भी लागू है, पर जिस ढंग से लागू होनी चाहिए, वैसी नहीं है? फसल बर्बाद होने पर किसानों को प्रति एकड़ उचित बीमा फसल के मुताबिक देने का प्रावधान बनाया जाए। केंद्र सरकार से लेकर सभी राज्य सरकारों को इस दिशा में कदम उठाने की दरकार है। इस वक्त किसानों की छह महीने की कमाई पानी में बही है। इस दरम्यान किसानों ने क्रेडिट कार्ड, बैंक लोन व उधारी लेकर फसलों को उगाने में लगाया होगा। सौ रुपए के आसपास डीजल का भाव है। बाकी यूरिया, डाई, पोटाश जैसी खादें की दोगुनी-तिगुनी कीमतों ने पहले से ही अन्नदाताओं को बेहाल किया हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कायदे से अनुमान लगाएं तो किसानों की लागत का मूल्य भी फसलों से नहीं लौट रहा। यही वजह है खेती नित घाटे का सौदा बनती जा रही है। इसी कारण किसानों का धीरे-धीरे किसानी से मोहभंग भी होता जा रहा है। इसलिए निश्चित रूप से उतना मुआवजा हुकूमतों की ओर से किसानों को उनकी बर्बाद हुई फसलों पर नहीं दिया जाता। ऐसी नीति-नियम बनाए जाने की दरकार है जिससे किसान बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि व बिजली गिरने आदि घटनाओं से बर्बाद हुई फसलों के नुकसान से उभर सकें। इससे कृषि पर आए संकट से भी लड़ा जाएगा। क्योंकि इस सेक्टर से न सरकार मुंह फेर सकती हैं और न ही कोई और? कृषि सेक्टर संपूर्ण जीडीपी में करीब बीस-पच्चीस फीसदी भूमिका निभाता है। कायदे से देखें तो कोरोना संकट में डामाडोल हुई अर्थव्यवस्था को कृषि सेक्टर ने ही उभारा। इसलिए कृषि को हल्के में नहीं ले सकते। अगर लेंगे तो उसका खामियाजा भुगतने में हमें देर नहीं लगेगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/crops-damaged-due-to-rain-2/article-38365</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/crops-damaged-due-to-rain-2/article-38365</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 11:49:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/vegetable-crop-destroyed.jpg"                         length="70248"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        