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                <title>Rajasthan: जुहेर के जुनून से 23 साल बाद निकली जलधारा</title>
                                    <description><![CDATA[करीब 90 घरों वाले इस गाँव में ज्यादातर मुस्लिम आबादी है। दु:ख की बात यह है कि पिछले 23 साल से इस गाँव के लोग पीने के पानी को तरस रहे थे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/zuher-ahmed-discovered-water-from-earth-after-23-years/article-11359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/water-discover.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong>800 फुट गहरे बोर से ग्रामीणों की बुझेगी प्यास</strong>| Water Discover</h2>
<p><strong>अलवर, संजय मेहरा।</strong>  ‘‘पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को, <strong>(Water Discover)</strong>  उनके मुकद्दर के पन्ने <b> </b>कभी कोरे नहीं हुआ करते…।’’ कुछ इसी तरह की बातों से प्रेरणा लेकर जीतनराम मांझी के रूप में बुलंद हौंसले लेकर चले जुहेर  अहमद के प्रयासों ने आज पूरे गाँव ही नहीं, बल्कि इलाके में उम्मीद की रोशनी जगाई और उस सपने को साकार कर दिया, जिसे देखते-देखते एक पीढ़ी आज बाल्यकाल से युवावस्था में आ चुकी है। वह सपना था पीने के पानी का।</p>
<h3>बोरवेल का पानी आने पर खुशी का माहौल | Water Discover</h3>
<p>हम बात कर रहे हैं राजस्थान के अलवर जिले के विधानसभा क्षेत्र एवं तहसील किशनगढ़ बास के गाँव रानोली की। अपने किसी परिचित के साथ इस गाँव में जाना हुआ। हम गये किसी और कार्य से थे, लेकिन वहां जश्न का माहौल देखा।न तो कोई शादी समारोह था और न ही किसी के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थी। पूछने पर पता चला कि गाँव में बोरवेल का पानी आने पर यह खुशी का माहौल है। इस खुशी में ग्रामीणों के अलावा रिश्तेदारों तक को आमंत्रित किया गया था।</p>
<ul>
<li><strong> करीब 90 घरों वाले इस गाँव में ज्यादातर मुस्लिम आबादी है।</strong></li>
<li><strong> दु:ख की बात यह है कि पिछले 23 साल से इस गाँव के लोग पीने के पानी को तरस रहे थे। </strong></li>
<li><strong>उनकी जिंदगी इसी जद्दोजहद में कट रही थी कि आज का दिन तो निकल गया, कल पानी की व्यवस्था कैसे होगी। </strong></li>
<li><strong>इस समस्या से पार पाने का बीड़ा उठाया गाँव के प्रमुख व्यक्ति जुहेर अहमद ने। </strong></li>
<li><strong> गाँव में करीब आधा दर्जन स्थानों पर बोर करा चुके थे, लेकिन पानी नहीं मिल पाया। </strong></li>
<li><strong>इस बारे में जुहेर क्षेत्र के विधायक, अधिकारियों को अवगत करा चुके थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।</strong></li>
</ul>
<h2>1000-1000 फुट बोर करके भी मिली थी निशाना | Water Discover</h2>
<p>जुहेर अहमद बताते हैं कि एक-एक हजार फुट जमीन के नीचे बोर कराने के बाद भी पानी नहीं मिलने से उन्हें निराशा तो कई बार हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। यानी वे हर बार हारे, फिर दुबारा से उठे और प्रयास शुरू किये। पहाड़ी इलाका होने की वजह से 100 फुट से भी अधिक गहरे तक तो इस गाँव में पत्थर ही हैं। जिन्हें बोर करते समय मशीन से बिल्कुल बारीक करके निकाला जाता। जुहेर अहमद का कहना है कि पानी नहीं मिलता है तो ऐसे लगता है जैसे कोई मौत हो गई हो।</p>
<p>अब 23 साल बाद उन्हें पानी मिला है तो सैकड़ों लोगों को जीवनदान मिला है। खुशी कई गुणा हो रही है। क्योंकि पानी ही जीवन है। लोग दूर से पानी देखने भी आ रहे हैं। सवा चार लाख रुपये खर्चा करके लोगों के लिए पीने के पानी, जमींदारों के लिए सिंचाई का पानी अब इस क्षेत्र में तरक्की के रास्ते खोलेगा।</p>
<h2>हर सरकार, अफसर से खफा हैं जुहेर अहमद | Water Discover</h2>
<ul>
<li><strong>जुहेर अहमद हर सरकार और अफसर से खफा हैं।</strong></li>
<li><strong> हो भी क्यों नहीं, भी किसी ने गाँव में आकर यह नहीं पूछा कि वहां क्या बिजली-पानी सही मिल रहे हैं। कोई दिक्कत तो नहीं। </strong></li>
<li><strong>जब खुद चलकर अपने मुखियाओं तक बात पहुंचाई गई तो उनसे कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। </strong></li>
<li><strong>किसी ने भी इस समस्या को शायद समस्या माना हो। </strong></li>
<li><strong>जनता की इस बड़ी समस्या का हल करना तो दूर, कभी किसी मंत्री, विधायक ने शिकायतें करने के बाद भी गाँव में आना तक मुनासिब नहीं समझता। </strong></li>
<li><strong>ग्रामीण सिर्फ वोट बैंक के रूप में ही उपयोग किये जाते रहे हैं।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 12:37:51 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रह्मांड के सबसे गर्म ज्ञात ग्रह की खोज</title>
                                    <description><![CDATA[ सूर्य से महज 926 डिग्री सेल्सियस ही ठंडा वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 650 प्रकाशवर्ष दूर स्थित सबसे गर्म ज्ञात ग्रह खोज लिया है। यह ग्रह ब्रह्मांड के अधिकांश तारों से ज्यादा गर्म है और एक धूमकेतू की तरह इसमें से एक चमकदार गैसीय रेखा निकलती दिखती है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि बृहस्पति जैसा यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/discovered-the-world-most-hottest-known-planets/article-951"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/plenet.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> सूर्य से महज 926 डिग्री सेल्सियस ही ठंडा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 650 प्रकाशवर्ष दूर स्थित सबसे गर्म ज्ञात ग्रह खोज लिया है। यह ग्रह ब्रह्मांड के अधिकांश तारों से ज्यादा गर्म है और एक धूमकेतू की तरह इसमें से एक चमकदार गैसीय रेखा निकलती दिखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि बृहस्पति जैसा यह ग्रह एक बड़े तारे केईएलटी-9 का चक्कर लगाता है। इसमें उसे डेढ़ दिन का समय लगता है। दिन का अधिकतम तापमान 4,326 डिग्री सेल्सियस रहता है। इसके चलते इस बाहरी ग्रह केईएलटी-9बी को अधिकतर तारों से गर्म करार दिया गया है। यह हमारे सूर्य से महज 926 डिग्री सेल्सियस ही ठंडा है। जिस तारे का यह चक्कर लगाता है, उससे निकलने वाला पराबैंगनी विकिरण इतना तेज है कि ग्रह संभवत: वाष्पित हो रहा हो और एक चमकदार गैसीय रेखा पैदा कर रहा हो। अमेरिका की ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और नेचर नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक स्कॉट गौडी ने कहा कि द्रव्यमान पर आधारित परिभाषाओं के तहत यह एक ग्रह है लेकिन इसका वातावरण निश्चित तौर पर किसी भी अन्य ग्रह की तुलना में अलग है। ऐसा दिन के समय इसके तापमान के कारण है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 07:52:45 +0530</pubDate>
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