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                <title>Ravana - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Haryana News: जानिये, हरियाणा के इस गांव से रावण का क्या था रिश्ता, क्यों खाली कराया जा रहा है गांव!</title>
                                    <description><![CDATA[कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Haryana News: गांव पोलड़ को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। मान्यता है कि पुलस्त्यमुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। ग्रामीण यह भी मानते हैं कि रावण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/what-was-ravanas-relation-with-this-village-of-haryana/article-71465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/haryana-news-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> Haryana News: गांव पोलड़ को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। मान्यता है कि पुलस्त्यमुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। ग्रामीण यह भी मानते हैं कि रावण का बचपन इसी स्थान पर बीता। गांव में स्थापित सरस्वती मंदिर और सैकड़ों वर्ष पुराना शिवलिंग इसकी ऐतिहासिकता को दशार्ते हैं। इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज बताते हैं कि यह स्थान एक प्राचीन नगर था जो प्राकृतिक आपदा के कारण उजड़ गया। बाद में इसे पुन: बसाया गया और इसका नाम ‘थेह पोलड़’ पड़ा। ‘थेह’ का अर्थ होता है वह स्थान जहां कभी कोई बस्ती रही हो।क्या है मामला गांव पोलड़ को रावण के दादा पुलस्त्यमुनि तपोस्थली माना जाता है। कैथल – पटियाला मार्ग पर सरस्वती नदी के किनारे बसे गांव पोलड़ में थेह की काफी धार्मिक मान्यता है। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">यहां माता सरस्वती का मंदिर भी स्थापित हैं। जहां कई सैकड़ों वर्षों पुराना शिवलिंग भी है। अब यह गांव सीवन नगरपालिका के अधीन आ चुका है। जो हाल ही में नई बनी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अब गांव पोलड़ को खाली करने के आदेश दिए गए है। जिसके बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया है। विभाग ने गांव के 206 घरों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। गांव खाली करवाने के आदेशों के बाद ग्रामीण गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस को मिले और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने विधायक से गांव को खाली कराने के आदेशों को रद्द करवाने की। अपील की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने घर किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि यह हमारी पूर्वजों की धरोहर है। हम यहां से हटेंगे नहीं, चाहे कुछ भी हो जाए। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि अब तक गांव में पुरातत्व विभाग द्वारा तीन बार खुदाई की जा चुकी है, पर कोई ऐतिहासिक अवशेष नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें बेघर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।पुरातत्व विभाग ने कोर्ट में दायर की थी याचिकागांव पोलड़ की जमीन को ऐतिहासिक घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग ने पूर्व में कई बार खुदाई करवाई है। विभाग का कहना है कि यहां अति प्राचीन व दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं, इसलिए संरक्षित किया जाना जरूरी है। कोर्ट में विभाग की याचिका के बाद ही गांव को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।पहले बसाने की योजना बनाई जाए : ग्रामीणगांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। प्रदर्शन, धरना और न्यायालय तक जाने की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार यदि वाकई संरक्षण चाहती है, तो पहले उन्हें बसाने की योजना पेश करें। Haryana News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Roadways Bus Accident: रोडवेज बस पलटी, एक छात्र की मौत, कई छात्राएं घायल" href="http://10.0.0.122:1245/roadways-bus-overturned-near-rajli-village/">Roadways Bus Accident: रोडवेज बस पलटी, एक छात्र की मौत, कई छात्राएं घायल</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 May 2025 16:38:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रावण के पुतले में 7 बार आग लगाने पर भी नहीं जला, पुतला नीचे गिरा और लोगों ने पटाखे लूटे</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा (राजस्थान)। कोटा शहर के सुल्तानपुर कस्बे में देर रात रावण दहन के दौरान अजीबो गरीब वाक्या हुआ। करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद भी रावण के पुतले में आग नहीं लग पाई। बताया जा रहा है कि आखिर में पुतले को नीचे गिरना पड़ा। जैसे ही नीचे पुतला गिरा लोग उस पर टूट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ravana-effigy-didnt-burn-in-kota-city/article-38673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/ravana-effigy-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोटा (राजस्थान)।</strong> कोटा शहर के सुल्तानपुर कस्बे में देर रात रावण दहन के दौरान अजीबो गरीब वाक्या हुआ। करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद भी रावण के पुतले में आग नहीं लग पाई। बताया जा रहा है कि आखिर में पुतले को नीचे गिरना पड़ा। जैसे ही नीचे पुतला गिरा लोग उस पर टूट पड़े। रावत के पुतले के अंगो की छीना झपटी शुरू हो गई। रावण दहन नहीं हो पानी से लोगों में काफी निराशा हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर में बुधवार दोपहर को झमाझम बारिश हुई जिसमें करीब 30 फीट ऊंचा रावण का पुतला गीला हो गया। करीब रात 8 बजकर 40 मिनट पर रावण के पुतले में आग लगाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">आग लगने के बाद कुछ देर रावण जला थोड़ी देर में ही आग बुझ गई। उसके बाद फिर से दोबारा आग लगाई गई लेकिन हर बार प्रयास करने के बाद भी विफल रहे। इसके बाद दमकल गाड़ी बुलाई गई। पालिकाकर्मियों ने फायर ब्रिगेड पर चढ़कर रावण के पुतले पर पेट्रोल का छिड़काव किया उसके बाद आग लगाई गई इसके बाद भी पुतले ने आग नहीं पकड़ी। आखिर में 9 बजकर 20 मिनट पर नीचे गिर गया। रावण के पुतले नहीं जलने पर लोगों में काफी निराशा देखने को मिली।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पारंपारिक हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया दशहरा पर्व</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा (विजया दशमी) पर्व बुधवार को पूरे देश में पारंपरिक हर्षाेल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। दशहरा मनाने के लिए हिंदू धर्मावलंबियों ने व्यापक तैयारियां की। विजयादशमी पर ही भगवान श्रीराम ने बुरायी और अन्याय के प्रतीक लंका के राजा रावण का वध किया था। इसलिए नागरिक विजयादशमी पर्व मनाते हैं। विजयादशमी को अस्त्र-शस्त्र पूजन का भी विशेष विधान है और आज सुबह से ही अनेक स्थानों पर अस्त्र-शस्त्र की पूजा की गयी। सोशल मीडिया के जरिए नागरिकों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की बधाइयां दीं। इस साल दशहरा यानी विजयादशमी के त्योहार पर बहुत अद्भुत संयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में विजयादशमी ऐसा त्योहार है जिसे साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त में से एक माना जाता है यानी कि दशहरा का पूरा दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए बहुत फलदायी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विजयादशमी पर मयार्दा पुरुषोत्तम राम ने रावण और देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का संदेश दिया था। दशहरा के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा का विधान है। मान्यता है कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। दशहरा पर विजय मुहूर्त या अपराह्न काल में पूजा करना उत्तम माना गया है। श्रवण नक्षत्र में श्रीराम और उनकी वानर सेना ने लंका पर आक्रमण किया था और विजय का परचम लहराया था, इसलिए इस दिन प्रदोषकाल में रावण का पुतला जलाने की परंपरा है। नयी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में विजयादशमी के पर्व पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले दहन किये गये।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में कुछ स्थानों पर बारिश होने से रावण दहन से संबंधित आयोजन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। विजयादशमी पर जहां पूरे देश मे उत्साह का माहौल रहता है। जोधपुर में रावण दहन के बाद शोक मनाया जाता है, जहाँ पूरे देश मे रावण दहन करने के बाद जश्न मनाया जाता है। जोधपुर में एक समाज ऐसा भी है, जो रावण दहन के बाद शोक मनाता है। जोधपुर रावण का ससुराल है। लिहाजा जोधपुर में रावण के वंशज रावण दहन के बाद शोक मनाते हुए। रावण के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।</p>
<p>यह भी पढ़ें – <a title="आर्थिकी को मजबूत करने में त्योहारों का योगदान" href="http://10.0.0.122:1245/contribution-of-festivals-in-strengthening-the-economy/">आर्थिकी को मजबूत करने में त्योहारों का योगदान</a></p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 10:39:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तीन पीढ़ियों से रावण का पुतला बना रहा सुब्बन मियां का परिवार</title>
                                    <description><![CDATA[जौनपुर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में शाहगंज के भादी खास मोहल्ला के सुब्बन मियां और उनका परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से दशहरा में दहन होने वाले रावण के पुतले को बना रहा है। इनके द्वारा बनाये गए पुतले की लंबाई लगभग 80 फुट के आसपास है। इलाके में इनके पुतलों की मांग भी खूब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/subban-mian-family-has-been-making-an-effigy-of-ravana-for-three-generations/article-38592"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/ravana-effigy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जौनपुर (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के जौनपुर में शाहगंज के भादी खास मोहल्ला के सुब्बन मियां और उनका परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से दशहरा में दहन होने वाले रावण के पुतले को बना रहा है। इनके द्वारा बनाये गए पुतले की लंबाई लगभग 80 फुट के आसपास है। इलाके में इनके पुतलों की मांग भी खूब रहती है। सुब्बन मियां बताते हैं कि लगभग 3 पीढ़ियों से उनका परिवार यह काम कर रहा है। उनका कहना है कि यह कारीगरी उन्हें विरासत में मिली है। जौनपुर मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर शाहगंज में बन रहा 80 फीट के रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह से यह पुतला चर्चा का विषय बना हुआ है वैसी ही कहानी उस पुतले को बनाने वाली परिवार की भी है। यहां रामलीला की शुरूआत 160 साल पहले हुई थी। तब से लेकर आज तक रावण के पुतले सहित राजा दशरथ का दीवान, अशोक वाटिका, मेघनाथ, सूपर्णखा, जटायू, हिरन आदि का पुतला बनाने का काम यह मुस्लिम परिवार करता चला रहा है। यह परिवार सुब्बन मियां का है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3 पीढ़ियों से यह सिलसिला चला आ रहा है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भादी गांव निवासी सुब्बन खां बताते हैं कि उनके पहले उनके पिता कौसर खान रावण के पुतले को बनाने का काम करते थे। उनके पिता से पूर्व उनके दादा इस काम को करते थे। लगभग 3 पीढ़ियों से यह सिलसिला चला आ रहा है। वह बताते हैं कि उन्होंने यह कारीगरी देखते देखते सीख ली है। अपने पिता को पुतला बनाते देखते हुए सुब्बन मियां ने भी पुतला बनाना सीख लिया। वह बताते हैं कि उन्होंने बिल्कुल पढ़ाई लिखाई नहीं की है। उनकी आय का साधन यही है। वह बताते हैं कि मोहर्रम में ताजिया बनाते हैं तो वहीं दशहरा के रावण का पुतला भी बनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका परिवार भी इस काम में उनका सहयोग करता है। वह बताते हैं कि तीन पीढ़ियों से यह सिलसिला चला आ रहा है। इस काम मे कमाई कम रह गयी है, लेकिन ये चीजें कई पीढ़ियों से चली आ रही है ऐसे में वह भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके 4 बच्चे हैं। वह कहते हैं कि उनके बच्चे पहले इस काम में उनका सहयोग करते थे। लेकिन अब पढ़ाई लिखाई कर अलग अलग काम में वह सभी लग गये हैं। वह बताते हैं कि इस बात के लिए कभी किसी ने उन्हें परेशान नहीं किया।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 13:47:21 +0530</pubDate>
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