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                <title>World - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Artificial Intelligence : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में रहने की तैयारियां</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence  राजीव गुप्ता। ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/artificial-intelligence-world/article-55794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><div>
<h3 style="text-align:center;"><strong>शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence </strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>राजीव गुप्ता।</strong> ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और कंप्यूटर के आविष्कार तक मानव के आविष्कारों ने इस बात को सिद्ध किया है। वर्ष 2016 में हॉलीवुड की फिल्म ‘हिडन फिगर्स’ में एक अश्वेत महिला जॉन ग्लेन का वर्णन किया गया है जो नासा के लिए कार्य करती है तथा जिन्होंने अमरीका के मानव युक्त अंतरिक्ष उडान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इस बात की कल्पना करना कठिन है कि आधुनिक कंप्यूटरों के आविष्कार से पूर्व अंतरिक्ष यात्रा के लिए अपेक्षित जटिल और लंबी गणनाओं को व्यक्तियों द्वारा किया जाता था और इसलिए फिल्म में दर्शायी गई इन तीन महिलाओं को मानव कंप्यूटर कहा गया। हम जानते हैं कि इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर के आविष्कार से घर के बजट से लेकर जटिल वैज्ञानिक गणनाओं के तरीकों में पूर्ण बदलाव आया है। एक ऐसी दुनिया में शिक्षा की भूमिका को पूर्णत: स्वीकार किया जाना चाहिए जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) आज इंटरनेट की तरह अनिवार्य हो जाएगी इसलिए शिक्षा के तीन महत्वपूर्ण अवयवों पर विचार किया जाना चाहिए जिनमें पाठयक्रम का डिजाइन, पाठ्य वस्तु का निर्धारण और मूल्यांकन और इन तीनों पहलुओं पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम शिक्षा प्रणाली का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। यदि पाठ्यक्रम छात्रों और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप न हो तो यह महत्वपूर्ण नहीं रह जाता है कि इसे कितने प्रभावी ढंग से पढाया जाता है।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">अतीत में पाठ्यक्रम में मोटे तौर पर तथ्यों, दृष्टिकोणों और विभिन्न कार्यकलापों को करने की विधियों तक सीमित रहना था और अधिकतर मामलों में तथ्य, दृष्टिकोण और विधियां पुरानी हो जाती थी क्योंकि समाज में नए बदलाव आ जाते हैं। पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में विचार करने और सीखने की क्षमता का विकास करना है। इस क्षमता का तात्पर्य है कि छात्रों की भूमिका सूचना प्राप्त करने वालों के स्थान पर शिक्षण प्रक्रिया में सहयोगी और साझीदारी की बन गयी। इसी तरह अध्यापकों की भूमिका भी बदल गयी है। अब उनकी भूमिका ज्ञान के भंडार के बजाय ऐसे व्यक्ति के रूप में हो गयी है जो छात्रों की सर्वोत्तम क्षमताओं का विकास कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा साफ्ट स्किल्स पर बल दिए जाने की आवश्यकता है। जिस पर आज अधिक ध्यान नहीं दिया जा सकता है। इन साफ्ट स्किल में क्रिटिकल थिंकिंग स्किल, कप्यूनिकेशन, कोलोबोरेशन आदि शामिल हैं। क्रिटिकल थिंकिंग स्किल प्रश्न पूछने, विश्लेषण करने, व्याख्या करने और निर्णय करने की क्षमता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) के माध्यम से तथ्यों तक पहुंच आसान हो जाएगी इसलिए सूचना का विश्लेषण और उपयोग करने की क्षमता का विकास करने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के विकास करने वाले चाहे कोई भी दावा करें, किए जाने वाले कार्यों के बारे में जिनमें निर्णय निकट भविष्य में भी मानव प्रयासों से ही किए जाएंगे। संप्रेषण कौशल लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए आवश्यक है। किंतु शिक्षा में वर्तमान नेतृत्व इन छात्रों में इन कौशलों के विकास में शिक्षा की भूमिका को नहीं देख पाते हैं जिसमें बदलाव लाया जाना चाहिए। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के समक्ष समस्याएं और जटिल बन गयी है इसलिए आवश्यक हो गया है कि हम अन्य लोगों के साथ सहयोग करना सीखें तथापि हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यक्तिगत कार्य निष्पादन और विकास पर बल दिया जाता है इसलिए आवश्यक कौशल के विकास में अंतर रह जाता है और इस अंतर को दूर किए जाने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए वह सामग्री को उपलब्ध कराना है। परंपरागत रूप से अध्यापकों को सभी सूचनाओं का स्रोत मााना जाता था जहां पर अध्यापक व्याख्यान देते और छात्र कक्षाओं में निष्क्रिय होकर सीखते। शिक्षा के इस मॉडल मे छात्र सक्रिय साझीदार नहीं होते और पाठ्यक्रम समाप्त होने के बाद छात्र पाठ्य वस्तु को भूल जाते थे। इस बात के र्प्याप्त साक्ष्य हैं कि यदि छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया के दौरान भागीदारी करते हैं तो वे पाठ्य सामग्री को लंबे समय तक याद रखते हैं। इसका तात्पर्य है कि अध्यापकों की भूमिका सर्वज्ञ गुरू से बदलकर ऐसे व्यक्ति के रूप में होनी चाहिए जो छात्रों के साथ संवाद करे और उन्हें सीखने में मदद करे।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व मूल्यांकन है। पिछले कुछ दशकों में मूल्यांकन की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। सत्र के अंत में परीक्षा के माध्यम से एकल मूल्यांकन का स्थान अब आवधिक मूल्याकनों ने ले लिया है और इसके लिए प्रतियोगिताएं, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट आदि का सहारा लिया जाता है किंतु इसमें और प्रगति की आवश्यकता है। मूल्यांकन अभी भी मूलत: किसी विशेष कार्य के पूर्ण होने पर उसमें दक्षता पर आधारित है। छात्रों की क्षमताओं के मूल्यांकन के लिए बेहतर विधियों की आवश्यकता है जो उनके कार्य स्थल पर उनके लिए उपयोगी सिद्ध हों।</div>
<div style="text-align:justify;">हमारी शिक्षा प्रणाली में ग्रेड और मूल्यांकन गहरे समाए हुए हैं और इसमें बदलाव के लिए एक दूरदृष्टि नेतृत्व की आवश्यकता है। तथापि भावी छात्रों के लिए आवश्यक है कि वे नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने में क्षमताएं विकसित करें। इस लेख का उद्देश्य भावी दुनिया के लिए छात्रों को तैयार करने हेतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली के कुछ पहलुओं में बदलाव की आवश्यकता पर बल देना है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षा प्रणाली में बडे बदलाव लाने में समय लगता है इसलिए हमें अभी से शुरूआत करनी चाहिए। <strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)।</strong></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2024 10:56:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Russia Jet Crash: रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ बगावत करने वाले वैगनर प्रमुख प्रिगोझिन की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[Yevgeny Prigozhin: रूस में निजी सेना वैगनर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की मॉस्को के पास टवर क्षेत्र में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। रुस की हवाई परिवहन संघीय एजेंसी ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। एजेंसी द्वारा अपने टेलीग्राम अकाउंट पर जारी सूची के अनुसार, प्रिगोझिन उन दस लोगों में शामिल थे, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wagner-chief-prigozhin-killed-in-rebellion-against-russian-president-putin/article-51549"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/russia-jet-crash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Yevgeny Prigozhin: रूस में निजी सेना वैगनर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की मॉस्को के पास टवर क्षेत्र में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। रुस की हवाई परिवहन संघीय एजेंसी ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। एजेंसी द्वारा अपने टेलीग्राम अकाउंट पर जारी सूची के अनुसार, प्रिगोझिन उन दस लोगों में शामिल थे, जिनकी बुधवार को विमान दुर्घटना में मौत हो गयी थी। एजेंसी ने पहले कहा था कि टवर क्षेत्र में विमान दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यात्रियों में येवगेनी प्रिगोझिन भी शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को से सेंट पीटर्सबर्ग जा रहा एक निजी एम्ब्रेयर विमान बुधवार को टवर क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में विमान में सवार सभी दस लोगों की मौत हो गई। व्हाइट हाउस प्रेस पूल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को इसके बारे में जानकारी दी गई। दुर्घटना के बारे में पूछे जाने पर बाइडेन ने कहा, ‘मैं वास्तव में नहीं जानता कि क्या हुआ लेकिन मैं आश्चर्यचकित नहीं हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन ने सोशल मीडिया साइट एक्स, पर अपने अकाउंट के माध्यम से कहा, ‘हमने रिपोर्ट देखी है। अगर पुष्टि हो जाती है, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।’</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 17:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Twitter New Rules: एलन मस्क के नये फरमान से मचा हड़कंप!</title>
                                    <description><![CDATA[मस्क ने ट्विटर पर पोस्ट पढ़ने की सीमा का नया अपडेट पेश किया | Twitter New Rules वाशिंगटन (एजेंसी)। Twitter Update: ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने सत्यापित खातों (Twitter Temporary Limit) के लिए उपयोगकताओं द्वारा प्रतिदिन पढ़े जाने वाले ट्वीट्स की संख्या को अपडेट कर 10 हजार कर दिया है। मस्क ने शनिवार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/twitter-new-rules/article-49506"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/elon-musk.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">मस्क ने ट्विटर पर पोस्ट पढ़ने की सीमा का नया अपडेट पेश किया | Twitter New Rules</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)। </strong>Twitter Update: ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने सत्यापित खातों (Twitter Temporary Limit) के लिए उपयोगकताओं द्वारा प्रतिदिन पढ़े जाने वाले ट्वीट्स की संख्या को अपडेट कर 10 हजार कर दिया है। मस्क ने शनिवार को कहा कि ‘एआई करने वाली लगभग हर कंपनी’ ‘बड़ी मात्रा में डेटा’ को स्क्रैप कर रही है। Twitter New Rules</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ट्वीट किया कि ‘डेटा स्क्रैपिंग और सिस्टम हेरफेर के चरम स्तर से निबटने के लिए, हमने निम्नलिखित अस्थायी सीमाएं लागू की हैं। सत्यापित खाते प्रति दिन 6000 पोस्ट पढ़ने तक सीमित हैं। असत्यापित खाते प्रति दिन 600 पोस्ट तक सीमित हैं। नए असत्यापित खाते प्रति दिन 300 तक सीमित हैं। Twitter New Rules</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Rate limits increasing soon to 8000 for verified, 800 for unverified &amp; 400 for new unverified <a href="https://t.co/fuRcJLifTn">https://t.co/fuRcJLifTn</a></p>
<p>— Elon Mu (@elonmu) <a href="https://twitter.com/elonmu/status/1675214274627530754?ref_src=twsrc%5Etfw">July 1, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">बाद में दिन में मस्क ने कहा कि यह सीमा जल्द ही सत्यापित उपयोगकताओं के लिए प्रति दिन 8,000 पोस्ट, असत्यापित उपयोगकताओं के लिए 800 और नए असत्यापित उपयोगकताओे के लिए 400 तक बढ़ जाएगी। लगभग तीन घंटे बाद, मस्क ने ट्वीट किया कि संख्याएँ अब 10 हजार, 1हजार और 500 हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्विटर ने सिस्टम में रजिस्ट्रेशन किए बिना पोस्ट देखने की सुविधा भी रद्द कर दी है।</p>
<h4>यूजर्स को रेट लिमिट पार होने मिली चेतावनी | Twitter New Rules</h4>
<p>आपको बता दें कि शनिवार को दुनियाभर में कई यूजर्स ने ट्वीट करने या फॉलो करने जैसी समस्या की शिकायत की है। कर्इं यूजर्स ने कहा कि उन्हें रेट लिमिट पार होने की चेतावनी का संकेत मिल रहा है। यानी इसका मतलब है कि उन्होंने एक निश्चित अवधि के भीतर ट्वीट करने या नए अकाउंट्स को फॉलो करने की संख्या के लिए निर्धारित साइट की सीमा को पार कर लिया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/latest-update-on-petrol-and-diesel-rates/">Petrol-Diesel Price Update: पेट्रोल-डीजल के रेट्स को लेकर आया ताजा अपडेट</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 11:02:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुद्रास्फीति और कच्चे तेल में उबाल से टूट रही है वैश्विक आर्थिक वृद्धि की लय : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली/वाशिंगटन (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वीरवार को कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की गति विभिन्न बाधाओं के कारण अवरूद्ध हो रही है तथा इस पर ऊंची मुद्रास्फीति के लंबे दौर, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं, कच्चे तेल के बाजार में उफान और निवेशकों के मन में अनिश्चितता का भी असर पड़ रहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/inflation-and-boiling-in-crude-oil-is-breaking-the-pace-of-global-economic-growth-sitharaman/article-32584"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वीरवार को कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की गति विभिन्न बाधाओं के कारण अवरूद्ध हो रही है तथा इस पर ऊंची मुद्रास्फीति के लंबे दौर, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं, कच्चे तेल के बाजार में उफान और निवेशकों के मन में अनिश्चितता का भी असर पड़ रहा है। श्रीमती सीतारमण वॉशिंगटन में जी-20 समूह के देशों के वित्त मंत्रियों और उनके केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों की बैठक को संबोधित कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जी-20 समूह वृहद आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतियों के समन्वय को उत्प्रेरित करने के लिए एक अच्छी स्थिति में है। श्रीमती सीतारमण ने विश्व की अर्थव्यवस्थाओं की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह आह्वान ऐसे समय में किया है, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की विश्व आर्थिक परिदृश्य पर ताजा रिपोर्ट (वर्ल्ड इकोनोमिक आउटलुक) में 2022 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया गया है। आईएमएफ ने चालू वित्त वर्ष में भारत के वृद्धि दर के अनुमान को भी घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<h4><strong>भारत की वृद्धि दर 9.0 प्रतिशत रहने का अनुमान </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आईएमएफ का कहना है कि वैश्विक आर्थिक महामारी के दीर्घकालिक प्रभावों के साथ-साथ यूक्रेन संकट और वैश्विक जिंस एवं र्इंधन बाजार में कीमतों में भारी उछाल का निजी निवेश और उपभोग मांग पर असर पड़ रहा है। जनवरी में आईएमएफ ने भारत की वृद्धि दर 9.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। श्रीमती सीतारमण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की ग्रीष्मकालीन बैठकों के सिलसिले में वॉशिंगटन में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर जी-20 के वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैंकों के गर्वनरों की भी बैठक आयोजित की गई। वित्त मंत्री ने वॉशिंगटन में एक अलग बैठक में सेमिकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन न्यूफर से मुलाकात की। उन्होंने न्यूफर को भारत में सेमीकंडक्टर और माइक्रो चिप उद्योग में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार की नीतिगत पहलों की जानकारी दी। दिल्ली में वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार न्यूफर ने वित्त मंत्री से कहा कि वह भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण उद्योग के लिए अनुकुल परितंत्र के विकास के लिए भारत सरकार की पहल से उत्साहित हैं। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/inflation-and-boiling-in-crude-oil-is-breaking-the-pace-of-global-economic-growth-sitharaman/article-32584</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 11:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व में कोरोना वायरस के 20,600 से अधिक मामले</title>
                                    <description><![CDATA[डब्ल्यूएचओ ने जारी की रिपोर्ट  | Corona Virus जेनेवा (एजेंसी)। कोरोना वायरस (Corona Virus) को लेकर कोई राहत भरी खबर नहीं आ रही है। दिन-ब-दिन इसकी भयावहता बढ़ती जा रही है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इसे लेकर गंभीर हो गया है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 20,600 से अधिक इसके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/more-than-20600-cases-of-corona-virus-in-the-world/article-12927"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/corona-virus-report.jpg" alt=""></a><br /><h2>डब्ल्यूएचओ ने जारी की रिपोर्ट  | <span lang="en" xml:lang="en">Corona Virus </span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जेनेवा (एजेंसी)।</strong> कोरोना वायरस (<span lang="en" xml:lang="en">Corona Virus</span>) को लेकर कोई राहत भरी खबर नहीं आ रही है। दिन-ब-दिन इसकी भयावहता बढ़ती जा रही है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इसे लेकर गंभीर हो गया है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 20,600 से अधिक इसके मामले सामने आ चुके हैं। अकेले चीन में कोरोना वायरस के 20,471 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जबकि 23,214 अन्य लोगों में कोरोना वायरस के होने का संदेह है।<br />
कोरोना वायरस के कारण अब तक 425 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें अधिकतर वृद्ध लोग शामिल हैं। कोरोना वायरस से ग्रसित 2788 मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। जबकि 680 लोग इस बीमारी से उबर चुके हैं। डब्ल्यूएचओ ने चीन के बाहर नौ अन्य देशों में कोरोना वायरस के मानव-से-मानव में संक्रमित होने के 27 मामलों की सूची तैयार की है।</p>
<h3>रिपोर्ट में खुलासा</h3>
<ul>
<li><strong>चीन में कोरोना वायरस के 20,471 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। </strong></li>
<li><strong>23,214 अन्य लोगों में कोरोना वायरस के होने का संदेह है।</strong></li>
<li><strong>कोरोना वायरस के कारण 425 लोगों की हो चुकी है मौत </strong></li>
<li><strong>मरने वालों में अधिकतर वृद्ध लोग शामिल </strong></li>
<li><strong>कोरोना ग्रसित 2788 मरीजों की हालत नाजुक </strong></li>
<li><strong>680 लोग इस बीमारी से निजात पाकर ठीक हुए </strong></li>
<li><strong>चीन से बाहर 24 देशों में कोरोना वायरस के 176 मामले आए सामने</strong></li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2020 13:14:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना: खतरनाक वायरस से सहमी दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[यह आहार शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों ही प्रकार का होता है।
समुद्र में सर्पों की भी अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं।
इन्हें मनुष्य पकड़ कर व्यंजन बनता है और खा जाता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/corona-virus-threatens-the-world/article-12764"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/corona-virus-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>कोरोना वायरसों का एक ऐसा बड़ा समूह है, जो आमतौर से जानवरों में पाए जाते हैं। अभी तक ज्ञात ऐसे छह वीषाणुओं की पहचान हो चुकी है, जो मानव समूहों पर संक्रमण का कहर ढा रहे हैं। इनकी संख्या सात भी हो सकती है। फिलहाल इस वायरस के उत्पन्न होने के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। चीन के पेकिंग विश्व-विद्यालय के स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र के शोधार्थियों ने इस कोरोना वायरस के सांप से इंसानों में प्रवेश का अंदेशा जताया है। जबकि चीनी अकादमी आॅफ साइंसेज द्वारा कराए गए शोध से पता चला है कि कोरोना की उत्पत्ति चमगादड़ व सांप दोनों में से हो सकती है।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">खतरनाक वीषाणु (वायरस) से इसी समय पूरी दुनिया सहमी हुई है। चीन के ग्यारह करोड़ की आबादी वाले वूहान नगर में संक्रमित हुए इस वायरस के विस्तार ने चीन के अनेक शहरों में दहशत फैला दी है। यहां के करीब 1283 लोग इसकी चपेट में हैं। 42 की मौत हो चुकी है। अनेक की हालात गंभीर है। यह विषाणु बिना किसी अवरोध के चीन की सीमा लांघ कर हांगकांग, मकाऊ, ताइवान, नेपाल, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, वियतनाम, फ्रांस और अमेरिका में फैल चुका है। भारत भी इसकी दस्तक से चैकन्ना होकर सावधानी बरत रहा है, जिससे इसका संक्रमण नियंत्रित रहे। गोया, भारत में दो हजार लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा है। चीन से लौटे तीन लोगों को मुंबई के एक अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण किया गया, जिनमें से दो की जांच रिपोर्ट नकारात्मक है।</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरे संदिग्ध यात्री के रक्त के नमूनों को जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्ट्रीट्यूट आॅफ वायरोलॉजी भेजी गई है। मुंबई में चीन से लौटने वाले 1789 और हैदराबाद में 250 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई है। चीन में भारत की शिक्षिका प्रीति महेश्वरी इस संक्रमण से गंभीर रूप से पीड़ित हैं। प्रिती यहां के इंटरनेशनल स्कूल आॅफ सांइस एंड टेक्नोलॉजी में शिक्षिका हैं। उनके उपचार में करीब एक करोड़ रुपए खर्च आ रहा है। साफ है, आंख से नहीं दिखने वाला यह अत्यंत मामूली वीषाणु जहां इंसान पर कहर बनकर टूट रहा है, वहीं आधुनिकतम चिकित्सा विज्ञान के लिए भयावह चुनौती के रूप में पेश आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकसर हर साल दुनिया में कहीं न कही, किसी न किसी वायरस से उत्पन्न होने वाली बीमारी का प्रकोप देखने में आ जाता है, जिस पर यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हो पाया तो महामारी फैलने में देर नहीं लगेगी। इस नए वायरस के अवतार को जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और दूषित होते पर्यावरण का कारक बताया जा रहा है। ऋतुचक्र में हो रहे परिवर्तन और खान-पान में आए बदलाव को भी इसके उत्सर्जन का कारण माना गया है। साफ है, प्रकृति के अंधाधुंध विकास पर टिकी यह जीवन-शैली हमें एक ऐसे अंधकूप में धकेल रही है, जहां जीवन जीने के खतरे निरंतर करीब आते दिख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गोया, चिकित्सा विज्ञान अपनी उपलब्धियों के चरम पर जरूर है, लेकिन जिस तरह से नए-नए रूपों में निपाह, एड्स, हेपोटाईटिस-बी, स्वाइन-फ्लू, बर्ड-फ्लू और इबोला जैसी बीमारियां वायरसों के प्रकोप से सामने आ रही हैं, उससे लगता है, अंतत: हम प्रकृति के प्रभुत्व के समक्ष लाचार ही हैं। इस वायरस के परिप्रेक्ष्य में आशंका यह भी है कि कहीं इन वायरसों का उत्सर्जन वैज्ञानिकों द्वारा जेनेटिकली इंजीनियरिंग से खिलवाड़ का कारण तो नहीं है ? क्योंकि अनेक देश अपनी सुरक्षा के लिए घातक वायरसों का उत्पादन कर इन्हें, जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल की फिराक में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन से फैले इस कोरोना वीषाणु से फैलने वाली बीमारी के इलाज के लिए फिलहाल कोई टीका (वैक्सीन) का आविष्कार नहीं हो पाया है। हालांकि अमेरिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य शोध एजेंसी ने कोरोना वायरस से बचाव का टीका विकसित करने पर काम शुरू कर दिया है। वर्तमान दुनिया को परेशान कर रहे इस वायरस का संबंध ‘कोरोनोवाइरीडी’ परिवार से है। इस परिवार के वायरस से फैलने वाली ‘सार्स’ (सीवियर एक्यूट रेस्पेरेटरी सिंड्रोम) बीमारी ने 2002 में 800 लोगों की जान ले ली थी। यह बीमारी चीन से शुरू हुई थी। इसके अलावा 2012 में पश्चिम एशिया में रेस्पेरेटरी सिंड्रोम कोरोनोवाइरस (मर्स) ने कोहराम मचाया था। उस समय प्रत्येक 10 संक्रमित लोगों में से 3 से 4 लोगों को बचाया नहीं जा सका था।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन में की गई आरंभिक जांचों से पता चला है कि वूहान सी-फूड बाजार में यह वायरस जानवरों के जरिए ही फैला है। सी-फूड यानी समुद्री जीव-जंतुओं व वनस्पतियों से निर्मित भोजन। इसका मुख्य स्रोत समंदर ही होता है। यह आहार शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों ही प्रकार का होता है। समुद्र में सर्पों की भी अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। इन्हें मनुष्य पकड़ कर व्यंजन बनता है और खा जाता है। कुछ मामलों में इन सांपों द्वारा शिकार बनाए जो जीव आधे-अधूरे खाए छोड़ दिए जाते हैं, उन्हें भी इंसान पका कर खा जाता है, जो कालांतर में इस जानलेवा वीषाणु के शरीर में उत्सर्जन का कारक बन जाता है। समुद्री भोजन के रूप में बड़े पैमाने पर मछली, झींगा, केकड़ा, लॉबस्टर, स्क्विड और ओएस्टर जीव खाए जाते हैं। शाकाहारी भोजन के रूप में अनेक प्रकार की समुद्री काईयों को खाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिलहाल इस वायरस के प्रकोप से बचने के उपायों में खाने से पहले हाथ धोना और मांसाहारी भोजन से बचने की सलाह दी है। यदि यह वायरस मनुष्य में पहुंच जाता है, तो इसके लक्षण जुकाम, खांसी व बुखार के रूप में सामने आने लगते हैं। यदि इसका समय पर इलाज शुरू नहीं हुआ तो यह फेफड़ों को संक्रमित की न्यूमोनिया में परिवर्तित होकर श्वास-क्रिया से जुड़े लोगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। लाइलाज रहते हुए यह एक इंसान से अनेक इंसानों में फैलने लगता है। छींक और हाथ मिलाने से भी इसका संक्रमण फैलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि 2002 में यह वायरस पहली बार संज्ञान में आया था। तब 37 देशों में इसका संक्रमण फैल गया था। इसके बाद 2003 में 8098 लोग इसकी चपेट में आए थे, जिनमें से 774 लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2012 में यूरोप और मध्य-पूर्व में इस वायरस से संक्रमित होने वाले रोगियों की संख्या 33 तक पहुंच गई थी। इनमें से 18 काल के गाल में समा गए थे। इस खतरनाक वायरस का प्रकोप अब सऊदी अरब, जॉर्डन, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस में भी दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना वीशाणु के जेनेटिक कोड के विश्लेषण से पता चला है कि मनुष्य को संक्रमित करने की क्षमता रखने वाला यह कोरोना-वायरस, सार्स का निकट संबंधी है। 2002 में इसी सार्स के कहर से लगभग 800 लोगों की मौत हुई थी। बहरहाल इस खतरनाक वायरस के लक्षण जरूर सामान्य से रोग सर्दी-जुकाम-बुखार व सूजन के रूप में सामने आते हैं, लेकिन इस बेअसर करने वाला फिलहाल कोई टीका अस्तित्व में नहीं आ पाया है। इसलिए यह जानलेवा बना हुआ है, गोया इसके संक्रमण से बचने का फिलहाल सबसे प्रमुख उपाय समुद्री खाद्य सामग्री खाने से बचना तो है ही, सावधानी व सतर्कता बरतना भी जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>प्रमोद भार्गव</strong></em></p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jan 2020 20:23:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊंचा हुआ भारत का कद</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक कूटनीति पर केन्द्रीत रायसीना डायलॉग 2020 में भू राजनीति और भू अर्थनीति पर तो चिंता और चिंतन हुआ ही इसके अलावा अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, अफगान शांति प्रक्रिया, पर्यावरण, वैश्विक राजनीति, क्लाइमेंट चेंज, सोशल मीडिया, एजेंडा 2030 और काउंटर टेरेरिज्म सहित देश और दुनिया को प्रभावित करने वाले दूसरे जरूरी मुद्दों पर भी चर्चा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-stature-rose/article-12660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/india-reputation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वैश्विक कूटनीति पर केन्द्रीत रायसीना डायलॉग 2020 में भू राजनीति और भू अर्थनीति पर तो चिंता और चिंतन हुआ ही इसके अलावा अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, अफगान शांति प्रक्रिया, पर्यावरण, वैश्विक राजनीति, क्लाइमेंट चेंज, सोशल मीडिया, एजेंडा 2030 और काउंटर टेरेरिज्म सहित देश और दुनिया को प्रभावित करने वाले दूसरे जरूरी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सोशल मीडिया की भूमिका पर उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपनी चिंता जाहिर की। प्रसिद्व अर्थशास्त्री और कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर ने बच्चों को प्रोपोगैंडा वाली खबरों से बचाने के लिए एक ऐसे पाठ्यक्रम की आवश्यकता पर बल दिया जिसके तहत बच्चे यह सीख पाएं कि खबरों को किस तरह पढ़ा जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-decoration:underline;">एन.के. सोमानी</span></p>
<p style="text-align:justify;">देश और दुनिया के कूटनीतिक मसलों को समझने के लिए भारत द्वारा शुरू किया गया रायसीना डायलॉग वैश्विक भू-राजनीति और अर्थनीति के लिहाज से तो महत्वपूर्ण है ही, राष्ट्रों के बीच आपसी विवादों और तनावों को कम करने में भी कारगर साबित हो रहा है। भारत साल 2016 से लगातार इस डायलॉग का आयोजन कर रहा है। इस बार यह डायलॉग 14-16 जनवरी तक नई दिल्ली के होटल ताज में रखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुराष्ट्रीय देशों के इस संवाद कार्यक्रम में 12 देशों के विदेशमंत्रियों समेत दुनिया के अलग-अलग कोनों से 100 देशों के 700 प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जबकि उद्घाटन सत्र में पीएम नरेंद्र मोदी, डेनमार्क के पूर्व पीएम व नाटो के पूर्व महासचिव अनस राममुसन, न्यूजीलैंड की पीएम हेलेन क्लार्क, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर, स्वीडन के पूर्व पीएम कार्ल ब्लिडर, भूटान के पूर्व पीएम शिरिंग तोग्बे, दक्षिण कोरिया के पूर्व पीएम हांग सुइंग सू आदि मौजदू थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की कुर्द सेना के कमाडर कासीम सुलेमानी की हत्या के तुंरत बाद होने वाले रायसीना डायलॉग को 2020 काफी अहम माना जा रहा था। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि इसमें ईरान के विदेशमंत्री जावेद जरीक व अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू पोटिंगर भी उपस्थित हो रहे थे। यूक्रेन के प्लेन को गिराने के बाद आंतरिक और बाहरी मोर्चे पर घिरा हुआ ईरान चाहता था कि भारत इस मामले में मध्यस्थता करे। ऐसा हुआ भी। ईरान के विदेशमंत्री जवाद जरीक ने कान्फ्रेंस से इतर भारत के विदेश मंत्री एस.जयशकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होेंने विवाद का हल निकालने के लिए भारत के समक्ष मध्यस्थता की पेशकश की । इसके अलावा उन्होंने ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के मामले में भी भारत से मदद की उम्मीद की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का स्वतंत्र थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर प्रतिवर्ष रायसीना डायलॉग का आयोजन करता है। इसका मकसद दुनिया के अलग-अलग देशों को एकमंच पर लाना है, ताकि वैश्विक हालात और चुनौतियों पर सार्थक चर्चा की जा सके। कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से भी रायसीना डायलॉग का पांचवा संस्करण भारत के लिए काफी अहम रहा। डायलॉग में पहुंचे ब्रिटेन के विदेश एवं कॉमनवेल्थ विभाग के दक्षिण एशिया प्रमुख गैरेथ बेल ने न केवल आतंकवाद से लड़ने में भारत की मदद करने का आश्वासन दिया बल्कि वैश्विक आतंकवाद के लिए उन्होंने सीधे-सीधे पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने एशिया, यूरोप, अफ्रीका व संसार के दूसरे कोनों से आए हुए प्रतिनिधियों के सामने पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की काली सूची से बचना चाहता है, तो उसे अपने यहां सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह सच है कि आतंकवादी समूह पाकिस्तान के भीतर से ही अपनी कार्रवाई का संचालन करते हुए पाकिस्तान सरकार और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी धरती पर 19 आतंकी हमलों को नाकाम किया है, हम अपने अनुभव भारत के साथ साझा कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी और रूस ने एक बार फिर भारत और ब्राजील को यूएनओ सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता देने की वकालत की। हालांकी रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव द्वारा हिंद-प्रशांत अवधारणा की आलोचना किए जाने के बाद तकनीकी सत्र में परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के स्वर उठे। लावरोव ने हिंद-प्रशांत अवधारणा का विरोध करते हुए कहा कि इसका असल मकसद केवल मौजूदा संरचना में व्यवधान उत्पन्न करना और इस क्षेत्र में चीन के दबदबे को रोकना है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी विदेशमंत्री की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत और अमेरिका ने कहा कि हिंद-प्रशांत अवधारणा का मकसद किसी देश को अलग-थलग करना नहीं है, बल्कि यह सिद्धात आधारित सोच है। अमेरिकी प्रतिनिधी ने डायलॉग के अंतिम सत्र में कहा कि यह देशों का समुदाय है, जो कानून के शासन का सम्मान करता है, समुद्री क्षेत्र तथा आसमान तक के परिवहन की आजादी के लिए खड़ा रहता है, खुले व्यपापार, खुली सोच को बढ़ावा देता है, तथा प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का बचाव करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यूरेशियाई आर्थिक परियोजना जैसी हिंद प्रशात की स्पर्धा वाली सोच की आलोचना करते हए कहा कि इन दृष्टिकोणों में कम स्वतंत्रता, कम खुलापन, कम लचीलापन है और यह अधिक अवरोधक लगाते हैं। रूस ने खाड़ी देशों से क्षेत्र के लिए एक सामान्य सुरक्षा तंत्र विकसित किए जाने की बात कर वैश्विक शांति स्थापना की दिशा में नई पहल के संकेत दिये। रूस ने सुझाव दिया कि इसकी शुरूआत विश्वास निर्माण उपायों और एक दूसरे को सैन्य अभ्यास के लिए आमंत्रित करके होनी चाहिए। भारत अफगानिस्तान संबंधों पर चर्चा करते हुए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि भारत अफगानिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">रायसीना पहाड़ियों के नाम पर रखे गये वैश्विक विमर्श के इस मंच का जब साल 2016 में तत्कालीन विदेशमंत्री श्रीमति सुषमा स्वराज ने उद्घाटन किया उस वक्त डायलॉग में 35 देशों के 100 से ज्यादा वक्ताओं ने हिस्सा लिया था। इस बार 100 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वैश्विक प्रतिनिधियों का यह जमावड़ा डायलॉग की सफलता का तो द्योतक है ही, साथ ही यह भी दर्शाता है कि भारत ग्लोब फोरन पॉलिसी में मेजर प्लेयर की भूमिका निभाए। देखा जाए तो यह सच भी है। उन्होंने भारत चीन संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत-चीन संबंध बहुत अनोखा है। क्योंकि दोनों ही पड़ोसी देश इस समय में काफी तेजी से आर्थिक उन्नति कर रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि रायसीना डायलॉग शुरू होने से पहले ही इस पर नागरिकता संशोधन कानून की छाया पड़ गयी थी। बांग्लादेश के विदेशमंत्री और गृहमंत्री के बाद उप विदेशमंत्री शहरयार आलम ने भी अचानक डायलॉग में शामिल होने का फैसला बदल दिया। लेकिन बांग्लादेश का कहना है कि पीएम शेख हसीना के संयुक्त अरब अमीरात के दौरे में उनके साथ जाने की वजह से शहरयार ने अपना भारत दौरा रद्द किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरयार आलम को डायलॉग में प्रमुख वक्ता के तौर पर बुलाया गया था। लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि भारत में सीएए और एनआरसी की वजह से पैदा हुए तनाव और दोनों देशों के बीच इस वजह से आई दूरियों की वजह से बांग्लादेश ने यह फैसला लिया है। खैर स्थिति चाहे जो भी रही हो रायसीना डायलॉग 2020 के सभी तकनीकी सत्रों के निष्कर्ष की बात करें तो यह कहा जा सकता है कि 2020 की सदी में जलवायु परिर्वतन, टेक्नोलॉजी, ग्लोबल सिक्योरिटी और मल्टी लैटलिजम यानी बहुपक्षीयवाद जैसे मुद्दे छाये रहने वाले हैं।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 20:20:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आस्ट्रेलिया की आग से सबक लेगी दुनिया?</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक ऊष्मण, बाढ़, सूखा जैसी समस्याएं वनों के ह्रास के कारण ही उत्पन्न हुई हैं।
मजे की बात यह है कि इसका समाधान भी पौधारोपण में ही छिपा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/will-the-world-learn-from-the-fire-of-australia/article-12567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/fire-of-australia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया पिछले पांच महीने से विकराल दावानल की चपेट में है। अत्यधिक गर्म मौसम, सूखे की स्थिति और तेज गति से बहती गर्म हवाओं ने दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित इस महाद्वीप की पारिस्थितिकी को तहस-नहस कर दिया है। न्यू साउथ वेल्स समेत आस्ट्रेलिया के कई इलाके अभी भी भीषण आग से प्रभावित हैं। जंगल की आग धीरे-धीरे मानव बस्ती की ओर बढ़ने लगी है, जिससे वहां के नागरिकों को परेशान होना पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ, सुलगते जंगलों से उठकर वायुमंडल में मौत बनकर मंडराते धुएं ने वहां के निवासियों को हाँफने को विवश कर दिया है। आॅस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग का धुंआ अब ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना तक जा पहुंचा है, जिससे वहां की हवा में भी जहर घुलने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों आस्ट्रेलिया इतिहास के सबसे बड़े दावानल से जूझ रहा है। जंगली हिस्सों में दूर-दूर तक केवल तबाही के मंजर ही दिखाई दे रहे हैं। वहां के कई प्रांतों की बिजली गुल हो चुकी है। वहीं जलस्रोतों के सूखने के कारण पीने के पानी को लेकर लोगों में व्याकुलता बढ़ती जा रही है। इस भीषण आग में अब तक दो दर्जन से भी अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। जबकि दो हजार से भी अधिक घर उजड़ गये हैं। हालांकि पिछले दिनों बारिश होने से थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन हालात अब भी नियंत्रण से बाहर हैं। दूसरी तरफ सूखाग्रस्त इलाकों में पीने का पानी बचाने के लिए आॅस्ट्रेलिया में दस हजार ऊंटों को मारने का काम भी शुरू हो गया है। कितनी विडंबना की बात है कि आस्ट्रेलिया के प्रमुख जानवरों में एक रहे ऊंटों को सिर्फ इस तर्क के आधार पर मारा जा रहा है कि वे अधिक पानी पीते हैं!यह समझना कठिन है कि जिन ऊंटों को आस्ट्रेलिया में परिवहन की सुविधा हेतु ‘रेगिस्तान के जहाज’ के रूप में आयात किया जाता है, उसे ही अब मौत के घाट उतारा जा रहा है!</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल की आग कितनी खतरनाक हो सकती है, इसे आस्ट्रेलिया के मौजूदा हालात से समझा जा सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दावानल की वजह से अब तक वहां एक अरब से भी अधिक जीव-जंतुओं की मौत हो चुकी है। जबकि, एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक वनों से आच्छादित भू-भाग आग से प्रभावित हुआ है। कोआला, कंगारू, वालाबी और पोसम जैसे तमाम जानवर, जिससे आस्ट्रेलिया की खूबसूरती बढ़ी है, उन पर भी यह आग आफत बनकर बरसी है। इधर घायल जानवरों की जो तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं, वह भी काफी विचलित करने वाली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आग में कई जानवर जलकर पूरी तरह राख तो गये, तो कई अधजले जीवित हैं। कई जानवर दौड़कर दूर तो भाग गये, लेकिन किसी के मुंह, पैर या शरीर का कोई हिस्सा जल गया। कई जानवरों के शरीर में छाले देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कई जानवर धुएं की वजह से दम घुटने से मर गये, तो कइयों ने आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होने की वजह से दम तोड़ दिया। कई अब भी जीवित हैं लेकिन कष्ट इतना है कि कहना मुश्किल है कि वे बचेंगे भी या नहीं!आग के बाद जानवरों और पौधों की कई प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इस आग में कई विशिष्ट प्रजातियां भी राख हो गईं। जहां कुछ समय पहले घने जंगल थे, वहां अब केवल राख और पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं। जाहिर है, ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहे विश्व को इसकी भरपाई करने में वर्षों लग जाएंगे!</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कमर कस रही दुनिया के समक्ष दावानल ने नई चुनौती खड़ी की है। हाल के वर्षों में दावानल की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे न सिर्फ तबाही का दायरा बढ़ा है, अपितु वनावरण में भी कमी आई है। गौरतलब है कि पिछले साल दक्षिण अमेरिका के अमेजन, इंडोनेशिया और अफ्रीका के जंगलों में जो आग लगी थी, उससे पारिस्थितिक तंत्र को गहरा आघात पहुंचा है। एक तरफ भारत जैसे देश में जंगल के क्षेत्रफल में वृद्धि हो रही है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में सफलता मिलती दिख रही है, तो वहीं दुनिया के दूसरे हिस्से में स्थित जंगलों में जब आग लगती है, तो पूरी दुनिया स्तब्ध और परेशान हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल की आग की वजह से जंगल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो जाता है, जिससे पर्यावरण में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। प्रकृति में हो रही अनावश्यक हलचल के चलते प्राकृतिक आपदाएं पहले से कहीं अधिक सक्रिय हुई हैं, जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ी हैं। पारिस्थितिक तंत्र के विच्छेद होने का ही परिणाम है कि इन दिनों भारत हाड़ कपाने वाली सर्दी, आस्ट्रेलिया इतिहास के सबसे बड़े दावानल और इंडोनेशिया भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। अमेजन के घने जंगलों में 2018 की तुलना में पिछले साल आगलगी की घटनाओं में तीस फीसदी का इजाफा देखने को मिला था। आस्ट्रेलिया में अभी जो आग लगी है, उसके बारे में पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसी आग प्राकृतिक तौर पर प्रत्येक 350 साल में घटित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार इसका शिकार आस्ट्रेलिया हुआ है। हालांकि दावानल से निपटने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय जगत का रवैया हतप्रभ करने वाला रहा है। वहीं जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक मंच पर एकजुटता का नहीं दिखना भी गंभीर विषय बन चुका है। गौरतलब है कि पिछले महीने ही स्पेन की राजधानी मैड्रिड में कॉप-25 के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का जुटान हुआ था, लेकिन वह पूरी तरह निरर्थक रहा। अब तक का सबसे लंबी अवधि तक चले पर्यावरण सम्मेलन के बेनतीजा रहने से दुनियाभर में नाराजगी देखी गई। विडंबना है कि उस समय भी आस्ट्रेलिया में दावानल को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयास नहीं किए गए। जिसका दुखद परिणाम हम सब देख रहे हैं!</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चाई यह है कि पर्यावरण संबंधी अधिकांश समस्याओं की जड़ वनोन्मूलन ही है। वैश्विक ऊष्मण, बाढ़, सूखा जैसी समस्याएं वनों के ह्रास के कारण ही उत्पन्न हुई हैं। मजे की बात यह है कि इसका समाधान भी पौधारोपण में ही छिपा है। भारत में जन्मदिन के मौके पर लोगों से पौधे लगाने का आह्वान किया जाता रहा है, लेकिन शायद ही एक बड़ी आबादी इस पर जोर देती है!अगर वास्तव में एक खुशहाल विश्व बनाना है तो प्रकृति को सहेजने को लिए हम सबों को आने आना होगा। जो जंगल शेष हैं उनकी रक्षा करनी होगी। इसके अलावा पौधारोपण के लिए हरेक स्तर से प्रयास करने होंगे। आपदा प्रबंधन को लेकर आम नागरिकों को जागरूक करना होगा। प्राकृतिक संतुलन के लिए जंगलों का बचे रहना बेहद जरुरी है। पृथ्वी पर जीवन को खुशहाल बनाए रखने का एकमात्र उपाय पौधारोपण पर जोर देने तथा जंगलों के संरक्षण से जुड़ा है।<br />
<em><strong>-सुधीर कुमार</strong></em></p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 21:01:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विश्व में होने वाली मौतों का वायु प्रदूषण पांचवा बड़ा कारण</title>
                                    <description><![CDATA[अब कंपनी ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए एक विशेष वाहन के भीतर कुछ लैंप लगाए हैं जिसके चारों तरफ पर नमक की एक परत है और इसमें विशेष लैंपों के जरिए इसे बहुत कम गर्म कर वाष्प में बदला जाता है और यह सांस के जरिए भीतर जाकर सांस नलिकाओं को खोल देता है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pollution-is-the-fifth-largest-cause-of-deaths-in-the-worldpollution-is-the-fifth-largest-cause-of-deaths-in-the-world/article-12358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/pollution.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">देश में वायु प्रदूषण की भयावहता को देखते हुए अब देशी तरीके से इससे निपटने की मुहिम शुरू की है</h2>
<ul>
<li style="text-align:center;">
<h3 style="text-align:left;">चिंताजनक: स्टेट आफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2019 में हुआ खुलासा (Pollution )</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विश्व में होने वाली मौतों में सबसे बड़ा पांचवा कारण (Pollution ) वायु प्रदूषण है और यह कुपोषण तथा शराब से होने वाली मौतों के आंकडे को भी पार कर गया है। स्टेट आफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2019 में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण अब युवा वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहा है और उनमें अस्थमा तथा कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैं। देश के अग्रणी संस्थान टाटा केमिकल्स लिमिटेड ने देश में वायु प्रदूषण की भयावहता को देखते हुए अब देशी तरीके से इससे निपटने की मुहिम शुरू की है और नमक के इस्तेमाल से लोगों को प्रदूषण का मुकाबला करने का अभियान शुरू किया है। टाटा ने इस अनूठे प्रयोग को ‘साल्ट थैरेपी’ का नाम दिया है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">टाटा केमिकल्स के विपणन, उपभोक्ता कारोबार के प्रमुख सागर बोके ने गुरुवार को बताया।</li>
<li style="text-align:justify;"> यह साल्ट थैरेपी सदियों से घरों में इस्तेमाल की जा रही थी ।</li>
<li style="text-align:justify;">और लोगों के गले और सीने में जब भी कोई दिक्कत होती थी।</li>
<li style="text-align:justify;">तो वे नमक के पानी के गरारे करते थे ।</li>
<li style="text-align:justify;">और अब नमक के इसी प्राकृतिक गुण को टाटा ने घर घर तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">थैरेपी में मरीजों को नमक का इस्तेमाल करके उन्हें भाप के रूप में लेना पड़ता है</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस थैरेपी में मरीजों को नमक का इस्तेमाल करके उन्हें भाप के रूप में लेना पड़ता है और जिन मरीजों की छाती में बलगम अधिक जम जाता है यह वाष्प युक्त नमक उनकी सांस की नलियों को खोल देता है। अब कंपनी ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए एक विशेष वाहन के भीतर कुछ लैंप लगाए हैं जिसके चारों तरफ पर नमक की एक परत है और इसमें विशेष लैंपों के जरिए इसे बहुत कम गर्म कर वाष्प में बदला जाता है और यह सांस के जरिए भीतर जाकर सांस नलिकाओं को खोल देता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस तरह का एक वाहन आम लोगों के लिए निशुल्क बुधवार को लाजपत नगर में लगाया गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी कड़ी में यह हौज खास में लगाया गया जहां स्थानीय लोगों ने जाकर इस थैरेपी का आनंद निशुल्क उठाया।</li>
<li style="text-align:justify;">कंपनी इस तरह के वाहन का इस्तेमाल 14 जनवरी तक विभिन्न क्षेत्रों में करेगी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी गंभीर</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इन दिनों राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी गंभीर हो गया है और अगर कोई व्यक्ति खुले में एक घंटा किसी चौराहे पर खड़ा हो जाए तो वह 30 सिगरेटों के बराबर प्रदूषक तत्व अपने भीतर ले जाता है और लंबे समय तक वायु प्रदूषण के कारण जीवन के कम से कम चार पांच साल कम हो जाते हैं। कईं शोधों से यह बात सामने आई है कि नमक का इस्तेमाल शरीर की कोशिकाओं की सूजन और संक्रमण को कम करता है और नमक के इसी प्राकृतिक गुण को आम लोगों तक पहुंचाया जाना जरूरी है। गौरतलब है कि नमक का रासायनिक संघटन सोडियम क्लोराइड है और हर स्थान पर पाए जाने वाले नमक में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2020 16:56:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>World Suicide Prevention Day : पुरुष करते हैं सबसे ज्यादा आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[WHO के एक डाटा के अनुसार हर दिन 3000 लोग दें रहे जान नई दिल्ली,एजेंसी। World Suicide Prevention Day 2019: आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है। अभी कुछ ही दिन पहले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/world-suicide-prevention-day/article-10404"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/world-suicide-prevention-day.jpg" alt=""></a><br /><h2>WHO के एक डाटा के अनुसार हर दिन 3000 लोग दें रहे जान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली,एजेंसी।</strong> <strong>World Suicide Prevention Day 2019</strong>: आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है। अभी कुछ ही दिन पहले एक महिला ने अपनी बच्ची के साथ इमरात से छलांग लगाकर आत्महत्या की थी। चौकाने वाली खबर तो वो थी जिसमें तीसरी क्लास में पढ़ने वाली एक छात्रा ने मिट्टी के ताल छिड़क कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा की उम्र महज 8 से 9 साल रही होगी। इसी तरह हर वर्ग के लोग रोजाना आत्महत्या करते हैं। भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। हर साल दुनिया में लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क ऑन सुइसाइड रिसर्च एंड प्रिवेंशन के मुताबिक हर साल 2.3 लाख लोग भारत में आत्महत्या करते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है आत्महत्या रोकथाम दिवस</h2>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाओं को देखते हुए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या दिवस मनाया जाता है। इस दिन आत्महत्याओं की घटनाओं को रोकने के दुनियाभर में अलग-अलग तरह के आयोजन आयोजित किए जाते हैं। ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके ती आत्महत्या समय से पहले होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर रोज आत्महत्या कर रहे 3000 लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">WHO के आंकड़ों के मुताबिक हर रोज करीब 3000 लोग आत्महत्या कर मर रहे हैं। साथ ही हर रोज 20 या उससे अधीक लोग अपने जीवन को समाप्त करने का प्रयास करते हैं। पहली बार विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत 10 सितंबर को की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुरुष ज्यादा करते हैं आत्महत्या विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमानों के मुताबिक 2016 में आत्महत्या से 7,93,000 लोगों की मौतें हुई थी। जिसमें से ज्यादातर पुरुष थे। NCRB के डेटा के अनुसार 2015 में 91,528 पुरुषों ने अपनी जान ली, वहीं, 2005 और 2010 में 66,032 और 87,180 पुरुषों ने आत्महत्या की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आपके मन में कभी भी इस तरह का विचार आता है तो मदद मंगने में संकोच ना करें। अपने किसी करीबी से मदद मांगे। यदि किसी करीबी से मदद नहीं मांग सकते तो डॉक्टर की मदद लें। क्योंकि ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती जिसका समाधान ना हो। इसलिए हिम्मत करें और अपनी तकलीफ साझा करें।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2019 10:23:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आय बढ़ने पर भी खुशहाली की गारंटी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में संयुक्त राष्टÑ की ओर से विश्व खुशहाली पर एक रिपोर्ट जारी हुई है, भारत उसमें 140वें पायदान पर है जबकि कुछ वर्ष पहले भारत 133वें पायदान पर था, हम सात पायदान नीचे गिर चुके हैं। देश में जैसे-जैसे आर्थिक तानाबाना फैल रहा है देश में खुशहाली का स्तर गिर रहा है। आखिर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में संयुक्त राष्टÑ की ओर से विश्व खुशहाली पर एक रिपोर्ट जारी हुई है, भारत उसमें 140वें पायदान पर है जबकि कुछ वर्ष पहले भारत 133वें पायदान पर था, हम सात पायदान नीचे गिर चुके हैं। देश में जैसे-जैसे आर्थिक तानाबाना फैल रहा है देश में खुशहाली का स्तर गिर रहा है। आखिर इस आर्थिक दौड़ का लाभ कौन ले रहा है? साफ है गरीबों को खुशहाली नहीं मिल रही बल्कि देश का उद्योगजगत अपनी सम्पति बढ़ाने में लगा हुआ है। अभी लोकसभा चुनाव हो रहे हैं एक बार फिर कांग्रेस ने नारा दे दिया है कि वह देश के 20 प्रतिशत गरीब परिवारों को गरीबी से मुक्त करेगी ऐसे परिवारों के न्यूनतम छह हजार रूपये महीना व 72000 रूपये वार्षिक आय गारंटी के साथ उपलब्ध करवाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा इससे बेचैन हो उठी है, भाजपा नेता एवं वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस के वादे को छोटा करने के लिए कहा है देश का हर परिवार पहले ही 106000 रूपये की निश्चित आय सब्सिडी के तौर पर ले रहे हैं। वित्तमंत्री की बात से बहुत कम लोग सहमत होंगे चूंकि ये 106000 रूपये गरीबों को नजर नहीं आ रहे। गरीबी हटाने का सर्वप्रथम नारा 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने दिया था, तब से अब तक पिछले करीब 50 साल में गरीबी बहुत ही सुस्त चाल से हटी है,</p>
<p style="text-align:justify;">बल्कि जितने परिवार गरीबी में फंस रहे हैं उसकी तुलना में बहुत कम परिवार इससे उबर पा रहे हैं। कोई भी राजनीतिक पार्टी पता नहीं क्यों उन कारणों को दूर नहीं करना चाह रही जो गरीबी को मिटने नहीं दे रहे, रह-रहकर राजनेता नगद आय या सहायता का प्रलोभन देते रहते हैं, जिससे गरीबी का एकमात्र कारण भ्रष्टाचार दिन-दोगुना रात चौगुना बढ़ रहा है। इस देश में अभी तक भी शासन व प्रशासन में भ्रष्टाचार खत्म हो इस पर कोई ईमानदार पहल नहीं हो सकी है। यही एकमात्र कारण है कि भारतीय बहुत कमा लेने के बाद भी खुशहाल नहीं हैं और यह खुशहाली भारतवासियों से सदैव दूर बनी रहेगी यदि यहां भ्रष्टाचार नहीं मिटता।</p>
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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2019 20:02:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>विश्व शक्तियां कर रही हैं भारत को सलाम </title>
                                    <description><![CDATA[भारत के पक्ष में समय और परिस्थितियां कैसे बदल रहीं हैं, दुनिया की शक्तियां भारत के सामने कैसे झुक रही हैं, भारत के विचार को जानने के लिए खुद दस्तक दे रही हैं, इसका एक उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत है। अफगानिस्तान में शांति वार्ता में भारत की भूमिका और विचार को जानने के लिए अमेरिका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div style="text-align:justify;">भारत के पक्ष में समय और परिस्थितियां कैसे बदल रहीं हैं, दुनिया की शक्तियां भारत के सामने कैसे झुक रही हैं, भारत के विचार को जानने के लिए खुद दस्तक दे रही हैं, इसका एक उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत है। अफगानिस्तान में शांति वार्ता में भारत की भूमिका और विचार को जानने के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि खुद अमेरिका से चलकर भारत आये, अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जाल्माई खलिलजाद ने दिल्ली पहुंच कर भारत सरकार के प्रतिनिधियों से विस्तृत वार्ता की और तालिबान को लेकर बढ़ती आशंकाओं का निराकरण भी किया। अमेरिकी प्रतिनिधि ने अपने बयान में दृढता के साथ कहा कि अफगानिस्तान में शांति का कोई भी प्रयास या फिर तालिबान को शांति के मार्ग पर लाने की कोई भी कोशिश भारत की सहायता और हस्तक्षेप के बिना संभव नहीं है।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">इसके पहले रूस ने कहा था कि भारत की आशंकाओं को दूर किये बिना अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन की कोई भी कोशिश और अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता में हिस्सेदारी देने के प्रयास के पहले भारत की भूमिका तय होनी चाहिए और भारत के विचार को देखना-समझना होगा। इसके पूर्व अफगानिस्तान-पाकिस्तान के पड़ोसी ईरान ने घोषणा किया था कि तालिबान और भारत जब साथ-साथ बैठेंगे तभी अफगानिस्तान में कोई भी राजनीतिक निर्णय सार्थक होगा और वह तालिबान को भारत के साथ शांति वार्ता में बैठाने की कोशिश करेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अफगानिस्तान की वर्तमान सरकार दुनिया की शक्तियों अमेरिका और रूस की शांति प्रयासों से संशकित तो जरूर है पर अफगानिस्तान सरकार भारत की भूमिका और भारत के हस्तक्षेप को अनिवार्य मान रही है।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने साफ-साफ कहा है कि जब तक भारत की भूमिका सर्वश्रेष्ठ नहीं होगी, भारत की आशंकाएं निर्णय में शामिल नहीं होगी तब तक अफगानिस्तान में शांति के प्रयास सफल नहीं होंगे, हामिद करजई ने दुनिया की शक्तियों से अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को बढ़ाने की मांग की है। भारत के पक्ष में यह स्थितियां तब भी बनीं हैं जब पाकिस्तान और चीन की जुगलबंदी भारत के खिलाफ रही है। पाकिस्तान और चीन नहीं चाहते हैं कि दुनिया की समस्याओं के समाधान में भारत की कोई सार्थक या फिर सर्वश्रेष्ठ भूमिका होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">उस दौर को याद कीजिये। जब भारत को अराजक, हिंसक और विफल राष्ट्र की अवधारणा से ग्रसित पड़ोसियों की शिकायत करने के लिए विश्व शक्तियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता था, आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए विश्व की शक्तियों के सामने हाथ-पैर जोड़ने पड़ते थे। विश्व शक्तियां और विश्व जनमत भारत की खिल्ली उड़ाती थी, कहती थी कि भारत बेवजह आतंकवाद-आतंकवादव चिल्लता है। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति से शिकायत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री को देहाती औरत की संज्ञा दी थी।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">देहाती औरत का वह मुहावरा पूरी दुनिया में ही नहीं चर्चित हुआ था बल्कि भारत में भी चर्चित हुआ था और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी देहाती औरत का मुहाबरा यदा-कदा गर्मी पैदा करती थी। भारत को हमेशा पाकिस्तान के साथ जोड़कर देखा जाता था और यह कहा जाता था कि आतंकवाद का प्रश्न दोनों देशों के बीच का है। सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया का कोई भी शक्ति का शासक भारत आता था तो पहले या फिर बाद में पाकिस्तान जाना नहीं भूलता था और पाकिस्तान के विचारों को भी अपनी यात्रा में प्रमुखता के साथ देखता था। उस काल में विश्व की शक्तियां भारत के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होती थी, कश्मीर के प्रश्न पर विश्व की शक्तियां भारत की एकता और अखंडता पर कुठाराघात करती थी, भारत की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करती थी। कश्मीर पर कथित मानवाधिकार हनन पर भारत को धमकाने की कोई कोशिश छोड़ी नहीं जाती थी।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">             वही विश्व शक्तियां आज न केवल अपना विचार बदल चुकी हैं, भारत को हमेशा पाकिस्तान के साथ रख कर तुलना करने की अपनी अराजक और एक पक्षीय मानसिकता को आत्मघाती मान रही हैं। खास कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने एक बयान में साफतौर पर कह दिया कि उसके लिए पाकिस्तान किसी काम का नहीं है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को स्वभाविक दोस्त मान कर विश्व व्यवस्था में भारत की शक्तियां बढ़ाने की बार-बार घोषणा की है। पाकिस्तान बार-बार कहता रहा है कि अफगानिस्तान में कोई भी शांति के प्रयास उसके सहयोग और समर्थन के बिना संभव नहीं हो सकता है। दुनिया अब यह समझ गयी है कि अफगानिस्तान की अशांति, अफगानिस्तान में हिंसा का राज सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान के पाप की गठरी है। पाकिस्तान ही अफगानिस्तान में हिंसा का स्थायीकरण किया है। जिस तालिबान के कारण अफगानिस्तान में अशांति है, हिंसा है उस तालिबान को पाकिस्तान ने खाद और पानी दिया है। तालिबान को पाकिस्तान आज भी समर्थन और संरक्षण देता है।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">तालिबान का नेता मुल्ला उमर पाकिस्तान में ही मरा था। मुल्ला उमर की जब पाकिस्तान में मौत हुई थी तब यह स्वीकार कर लिया जाना चाहिए कि मुल्ला उमर पाकिस्तान की निगरानी और पाकिस्तान के संरक्षण में रह रहा था। आज भी पाकिस्तान गुड तालिबान के नाम पर हिंसा और आतंकवाद को संरक्षण दे रहा है। इस कारण विश्व की शक्तियां पाकिस्तान को नजरअंदाज कर रही हैं। फिर भी पाकिस्तान नहीं माना तो फिर उसे दंड मिलना तय है। आज पाकिस्तान कंगाल हो चुका है पर आतंकवाद को हथियार बना कर विश्व शक्त्यिां पाकिस्तान को कर्ज देने के खिलाफ रही हैं। विश्व शक्तियों के विरोध के कारण कंगाल पाकिस्तान को दुनिया के नियामकों से कर्ज नहीं मिल रहे हैं। अफगानिस्तान के अंदर में भारत की भूमिका निर्णायक और सर्वश्रेष्ठ क्यों मानी जा रही है, इसके पीछे कोई एक नहीं बल्कि कई कारण है। कभी अमेरिका चाहता था कि भारत भी अफगानिस्तान में अपनी सेना खड़ी करे और तालिबान के खिलाफ भारतीय सेना युद्ध में शामिल रहे। इसके पीछे कारण यह था कि आतंकवाद से लड़ने में भारतीय सेना को महारत हासिल थी। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में शांति सेना के रूप में भारतीय सेना ने अपना प्रभुत्व कायम किया था।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">
<div style="text-align:right;"><strong>विष्णुगुप्त</strong></div>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jan 2019 13:37:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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