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                <title>Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University RSS Feed</description>
                
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                <title>&amp;#8230; और जब उपराष्ट्रपति ने कृषि मेले में बजाया बाजा</title>
                                    <description><![CDATA[शाही हरियाणवी अंदाज़ में हुआ स्वागत | Hisar News हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCS HAU) हिसार के तत्वावधान में हकृवि कैंपस में आयोजित हरियाणा कृषि विकास मेले में मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचे देश के उपराष्ट्रपति महामहिम जगदीप धनखड़ ने मेले में पहुंचकर अपना बचपन ताजा किया। इस दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/vice-president-his-excellency-jagdeep-dhankhar-refreshed-his-childhood-by-visiting-the-fair/article-53428"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/hisar-news-3.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">शाही हरियाणवी अंदाज़ में हुआ स्वागत | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCS HAU) हिसार के तत्वावधान में हकृवि कैंपस में आयोजित हरियाणा कृषि विकास मेले में मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचे देश के उपराष्ट्रपति महामहिम जगदीप धनखड़ ने मेले में पहुंचकर अपना बचपन ताजा किया। इस दौरान जहां उन्होंने हरियाणवी साज़-बाज़ बजा कर जमकर आनंद लिया तो वहीं बाजा बजाते हुए जब उनका स्वागत किया गया तो उनसे रुका नहीं गया। उन्होंने खुद अपने गले में बाजा लटका कर ढोल की थाप में थाप मिलाने की भरपूर कोशिश की। Hisar News</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अंदाज उपस्थित लोगों का मन मोह गया। उन्होंने अपना सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ते हुए मेले में लगाई गई सभी स्टालों का निरीक्षण करते हुए ई-रिक्शा में बैठकर मेला स्थल का निरीक्षण भी किया। उपराष्ट्रपति ने हरियाणवी साज़-बाज़ चिमटा, डफली व हड़ताल बजाकर भी जमकर आनंद लूटा। याद रहे कि हाल ही में जब उनका राजस्थान दौरा हुआ था तो वह दौरा भी सुर्खियों में रहा था, क्योंकि वहां उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान पहुंचकर सबसे पहले अपने बचपन के गुरु के पाँव छूकर सबका दिल जीता था। उनका यही अंदाज हिसार में दिखाई दिया। उन्होंने ठेठ इसी अंदाज में किसानों के साथ मिलकर मेले में अपनी रुचि दिखाई।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व मेले के मंच से देश भर से पहुंचे किसानों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत देश आज विकसित देशों के श्रेणी में शामिल हो जाने होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में हमारा देश पांचवी आर्थिक शक्ति के रूप में उभर गया है। यदि देश का किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार वह विकसित किस्म की बिजाई से खेती करें एक तरफ जहां किसानों की आमदनी बढ़ेगी। वहीं कृषि संबंधी जरूरतें भी पूरी होगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश देश के खाद्यान्न के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। इस मामले में हरियाणवी किसानों की मेहनत को सलाम है। Hisar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से भी आह्वान किया कि वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए ऐसी तकनीक विकसित की जानी चाहिए। जिस देश का किसान खुद आत्मनिर्भर होते हुए देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सके। इस मौके पर हरियाणा के कृषि एवं विकास मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कृषि मेले में पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का फूलों के गुलदस्ते से स्वागत किया तो हरियाणवी परिधान दामन व कुर्ता पहने छात्राओं ने भी उनके मस्तक पर तिलक लगाकर हरियाणवी अंदाज में जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर देश भर के कोने-कोने से पहुंचे हजारों की संख्या में किसान मौजूद रहे। Hisar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="ईटीटी अध्यापक 11 अक्तूबर को शिक्षा मंत्री के गांव में लगाएंगे पक्का मोर्चा" href="http://10.0.0.122:1245/ett-unemployed-teachers-meeting-was-held-in-nehru-park/">ईटीटी अध्यापक 11 अक्तूबर को शिक्षा मंत्री के गांव में लगाएंगे पक्का मोर्चा</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Oct 2023 20:24:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हकृवि के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की दो उन्नत किस्म विकसित की</title>
                                    <description><![CDATA[पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ तेल की मात्रा भी मिलेगी अधिक | Hisar News हिसार (सच कहूँ/डॉ संदीप सिंहमार)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों (Mustard) की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। भारत देश में रबी की महत्वपूर्ण फसल माने जाने वाली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-scientists-of-chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university-have-developed-two-new-improved-varieties-of-mustard/article-52117"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ तेल की मात्रा भी मिलेगी अधिक | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/डॉ संदीप सिंहमार)।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों (Mustard) की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। भारत देश में रबी की महत्वपूर्ण फसल माने जाने वाली सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों ने सरसों की नई किस्म ईजाद कर देश भर के किसानों को सही समय पर फायदा देने का काम किया है। इन नई किस्मों में आरएच 1424 व आरएच 1706 शामिल हैं। Hisar News</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने बताया कि सरसों की नई किस्मों से बिजाई करने से किसानों को पहले से बेहतर लाभ मिलेगा। इनकी बिजाई से जहां खेतों में सरसों की पैदावार में बढ़ोतरी होगी वहीं तेल की मात्रा भी पहले से अधिक मिलेगी तिलहन वैज्ञानिकों का मानना है कि औसतन रूप से सरसों की फसल के कुल उत्पादन का 40 फ़ीसदी तेल निकलता है। लेकिन इन किस्म के बिजाई करने से 40 प्रतिशत से अधिक तेल की मात्रा मिलेगी। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुसंधान के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड मिला | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;">हकृवि को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से भी नवाजा गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि यह अवार्ड राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा जम्मू में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहायक महानिदेशक तिलहन व दाल डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के तिलहन वैज्ञानिकों की टीम ने हाल ही में सरसों की आरएच 1424 व आरएच 1706 नामक दो नई उन्नत किस्में विकसित कर एक नया आयाम स्थापित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार सहित उनकी टीम को बधाई दी। साथ ही भविष्य में इसी प्रकार गुणवत्ताशील अनुसंधान जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान कृषि वैज्ञानिकों की ओर एक बड़ी उम्मीद से देखते रहते हैं। क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में सरसों की फसल की पैदावार बढ़ाने की बहुत जरूरत है। सरसों की फसल की उत्पादकता बढ़ने से एक तरफ जहां किसने की आमदनी में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी तरफ तेल की खपत भी पूरी होगी। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">2018 में विकसित की गई आरएच 725 भी हुई लोकप्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के.पाहुजा ने बताया कि सरसों अनुभाग के वैज्ञानिकों की टीम अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर 21 किस्में विकसित कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में विकसित की गई किस्म आर.एच. 725 हरियाणा के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली व बिहार राज्यों में बहुत लोकप्रिय है, जिसकी किसान 25 से 30 मण प्रति एकड़ आसानी से उपज प्राप्त कर रहे हैं। नई किस्मों से सरसों की पैदावार पहले से अधिक होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश भर के बिक्री केदो पर उपलब्ध होगा बीज</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में विकसित की गई सरसों की दो नई किस्मों के अलावा पहले से विकसित चल रही सभी प्रकार की किस्मों के बीज विश्वविद्यालय के बिक्री केंद्र के साथ-साथ देशभर के सभी सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध करवा दिए गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्पादन में वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर पर है भारत का स्थान | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों,राया/राई व तारामीरा रबी फसल की प्रमुख तिलहनी फसल है। इस फसल का एक तरफ जहां भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है वहीं सरसों के उत्पादन से मिलने वाले तेल से रसोई में भी तड़का लगता है। उत्तर प्रदेश, बिहार,राजस्थान,दिल्ली व हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में सरसों का तेल प्रमुखता से सब्जियां चटपटे पकवान बनाने के काम में लिया जाता है। सरसों उत्पादन और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में चीन और कनाडा के बाद भारत का स्थान है। सरसों की खेती किसानों के लिए काफी लोकप्रिय खेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इस फसल की खेती कम सिंचाई और कम लागत में आसानी से हो जाती है। दूसरी तरफ सरसों की खेती से किसानों को अधिक लाभ भी होता है। साथ ही सरसों के तेल का डिमांड बाजारों में हमेशा बनी रहती है, क्योंकि सरसों के तेल के कई फायदे भी हैं। सरसों के तेल का इस्तेमाल भारत के लगभग हर एक घर में किया जाता है। वहीं सरसों का तेल बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। चर्म रोगों से छुटकारा के लिए आज भी चिकित्सा नारियल या सरसों का तेल लगाने की ही सलाह देते हैं। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत के मैदानी क्षेत्रों में सभी राज्यों में होता है उत्पादन, पर राजस्थान सबसे आगे</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे है। सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान देश के अन्य सभी राज्यों में आगे है। यहां की जलवायु और मिट्टी सरसों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। इस वजह से सबसे अधिक सरसों का उत्पादन राजस्थान में होता है। कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग आंकड़ों के अनुसार देश में कुल उत्पादित होने वाले सरसों में राजस्थान में अकेले 46.7 प्रतिशत का उत्पादन होता है। राजस्थान सहित मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारत का 88 फीसदी उत्पादन होता है। सेरसों के उत्पादन में मध्य प्रदेश की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बबेले को राष्ट्रीय पुरस्कार, अकादमी द्वारा प्रकाशित 57 किताबों का लोकार्पण" href="http://10.0.0.122:1245/babele-gets-national-award-57-books-published-by-the-academy-released/">बबेले को राष्ट्रीय पुरस्कार, अकादमी द्वारा प्रकाशित 57 किताबों का लोकार्पण</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Sep 2023 17:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>वैज्ञानिक डॉ. कौशिक ने बनाया दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. विजय कौशिक दक्ष वैज्ञानिक के साथ साथ बड़े साहित्यकार बनने की और अग्रसर सच कहूँ/विजय शर्मा करनाल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University) के कृषि विज्ञान केन्द्र करनाल में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार कौशिक ने सामाजिक कुरीतियां, रीति रिवाजों एवम् त्यौहारों पर आधारित प्रथम अंतरराष्ट्रीय काव्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university-2/article-39398"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/karnal-ok.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>डॉ. विजय कौशिक दक्ष वैज्ञानिक के साथ साथ बड़े साहित्यकार बनने की और अग्रसर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/विजय शर्मा<br />
करनाल।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार <strong>(<span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University</span></span></span>)</strong> के कृषि विज्ञान केन्द्र करनाल में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार कौशिक ने सामाजिक कुरीतियां, रीति रिवाजों एवम् त्यौहारों पर आधारित प्रथम अंतरराष्ट्रीय काव्य संग्रह ‘‘आह से आहा तक’’ नामक पुस्तक का सम्पादन करके हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स लंदन से वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धि प्राप्त की। फिलहाल ये कृषि विज्ञान केन्द्र करनाल में फार्म प्रबंधन के जिला विस्तार विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशिक की साहित्य में भी बहुत रुचि रही है। गत वर्ष ही उन्होंने भारत रत्न अवार्डीज पर प्रथम अंतरराष्ट्रीय काव्य संग्रह ‘‘भारत रत्न काव्य माला’’ नामक पुस्तक तैयार कर वर्ल्ड बुक आॅफ रिकॉर्ड्स लंदन से पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 2021 में ही दिल्ली की एक लेखिका के साथ मिलकर भारत देश की 31 अपने अपने क्षेत्रों की प्रथम महिलाओं के जीवन पर ‘प्रथमा’ नामक पुस्तक का सम्पादन किया, जिसको पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील समेत अनेकों महापुरुषों ने सराहा।</p>
<h4 style="text-align:center;"><strong>सामाजिक कार्यों के लिए मिल चुके 12 अवार्ड | <span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University</span></span></span><br />
</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ. कौशिक ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल एवं पत्रिकाओं में 35 शोध पत्र और प्रमुख पत्रिकाओं में 37 लोकप्रिय लेख प्रकाशित किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एवम् अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 16 सेमिनार और कांफ्रेंस में अपने 20 शोध पत्र प्रस्तुत किए है। 2018 व 2019 में उन्हें बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन अवार्ड तथा 2018 में बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड और यंग साइंटिस्ट अवार्ड तथा 2021 में बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एक्सीलेंस साइंटिस्ट अवार्ड से भी नवाजा गया। उनको विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए लगभग 12 अवार्ड भी प्राप्त हो चुके हंै।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अब तीसरे रिकॉर्ड की तैयारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ. कौशिक ने बताया की तीसरे वर्ल्ड रिकॉर्ड की लगभग तैयारी हो चुकी है, अबकी बार कृषि फसलों पर प्रथम काव्य ग्रंथ तैयार किया गया है, जिसको ब्रावो इंटरनेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा अनुमोदित कर अप्रूवल भी दे दिया गया है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Oct 2022 19:50:31 +0530</pubDate>
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                <title>एक आइडिया दिला सकता है आपको 25 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University हरियाणा के युवा, उद्यमी व किसानों के लिए सुनहरा अवसर चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University) हिसार में स्थापित एबिक सेंटर ने छात्रों, उद्यमी व किसानों से बिजनेस आइडिया मांगे हैं जो उनको कृषि व्यवसायी बनाने में अहम रोल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university/article-39062"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university.jpg" alt=""></a><br /><h3>Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University</h3>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा के युवा, उद्यमी व किसानों के लिए सुनहरा अवसर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय <strong>(<span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University</span></span></span>)</strong> हिसार में स्थापित एबिक सेंटर ने छात्रों, उद्यमी व किसानों से बिजनेस आइडिया मांगे हैं जो उनको कृषि व्यवसायी बनाने में अहम रोल अदा कर सकता है। अब एबिक ने पहल व सफल में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31अक्तूबर 2022 तक बढ़ा दी है। इसके लिए उम्मीदवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय व एबिक की वेबसाइट <b><a href="http://www.hau.ac.in/">www.hau.ac.in</a></b> पर आनलाइन आवेदन करना होगा।</p>
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<h3 style="text-align:justify;">स्टार्टअप को नया आयाम दे सकते हैं युवा</h3>
<p style="text-align:justify;">एबिक के प्रिंसीपल इनवेस्टीगेटर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सेंटर के माध्यम से विद्यार्थी, बेरोजगार युवा, किसान व उद्यमी मार्केटिंग, नेटवर्किग, लाईसेंसिग, ट्रैडमार्क व पेटेंट, तकनीकी व फंडिग से संबंधित प्रशिक्षण लेकर कृषि क्षेत्र में अपने स्टार्टअप को नया आयाम दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार के लिए कृषि क्षेत्र में अपना व्यवसाय स्थापित करने का यह एक सुनहारा अवसर है, जिसे पहल व सफल में आवेदन करके 25 लाख रूपए तक की ग्रांट व दो महीने के प्रशिक्षण का लाभ उठाया जा सकता है</p>
<h3 style="text-align:justify;">आवेदन से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान</h3>
<p style="text-align:justify;">आवेदन की प्रक्रिया नि:शुल्क होगी। आवेदन करने वाला व्यक्ति प्रदेश या फिर निकटवर्ती राज्य का होना जरूरी है, जो हरियाणा में आकर अपना व्यवसाय स्थापित करने का इच्छूक हो। इसके अलावा आवेदन करने वाले का मुख्य आइडिया एग्री बॉयोटैक, बागवानी, जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि अभियांत्रिकी, खेती मशीनीकरण, कम खर्च में अधिक उत्पादन, आपूर्ति श्रृखंला प्रबंधन, कटाई व कटाई के बाद की प्रक्रिया, खाद्य प्रक्रिया एवं मूल्य संवर्धन, कृषि में कृत्रिम बुद्धिमता इत्यादि का विशेष ध्यान रखना होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Oct 2022 16:20:22 +0530</pubDate>
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