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                <title>समाज में नफरत नहीं प्यार के बीज बोएं सुनील जाखड़</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ राजनीतिक नेता समाज को बांटने की नीति अपना रहे हैं। उन्हें जरा सा भी दर्द नहीं आता कि पंजाब ने एक दशक तक हिंसा के काले दौर को देखा था। हालांकि उन्होंने आतंकवाद के घावों को भी देखा व खुद को आतंकवाद के कट्टर विरोधी व शांति का मसीहा समझते हैं। फिर भी राजनीति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/do-not-hate-in-society-sow-seeds-of-love-sunil-jakhar/article-5856"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/sunil-jakad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ राजनीतिक नेता समाज को बांटने की नीति अपना रहे हैं। उन्हें जरा सा भी दर्द नहीं आता कि पंजाब ने एक दशक तक हिंसा के काले दौर को देखा था। हालांकि उन्होंने आतंकवाद के घावों को भी देखा व खुद को आतंकवाद के कट्टर विरोधी व शांति का मसीहा समझते हैं। फिर भी राजनीति में पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपनी आदतों के अनुसार समाज को बांटने की कोशिश में जुटे रहते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों पंजाब के नेता सुनील जाखड़ कर रहे हैं। वह उस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हैं जो धर्म निरपेक्षता व भाईचारे को कायम रखने को अपना सिद्धांत मानती है लेकिन सुनील जाखड़ पंजाब में गुमराहकुण व झूठा प्रचार कर कुछ संगठनों के दिलों में डेरा सच्चा सौदा व डेरा श्रद्धालुओं के प्रति गलतफहमी फैलाने के हथकंडे अपना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ पहले तो मीडिया में खूब शोर मचा रहे थे कि एसएसजी फिल्म को चलाने के लिए डेरा सच्चा सौदा व अकाली दल के बीच डील हुई थी। यह बात सुनील जाखड़ जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर कहते थे कि मुंबई में अभिनेता अक्षय कुमार के घर सुखबीर बादल व डेरा सच्चा सौदा में एमएसजी फिल्म चलाने संंबंधी डील हुई थी। लेकिन यह रिपोर्ट आने से पहले ही अक्षय कुमार ने मीडिया में स्पष्ट किया कि उसके घर कोई मीटिंग नहीं हुई व न ही सुखबीर बादल उसे कभी निजी तौर पर मिले है। सुनील जाखड़ अक्षय कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देने की बजाए लगातार विरोधी राग अलाप रहे है। क्या जाखड़ यह बताएंगे कि अक्षय कुमार झूठ बोल रहा है या सच?</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ को जब यह पता लगा कि डील होने का झूठ नहीं चला उसके बाद अब वह यह बोल रहे हैं कि एमएसजी फिल्म चलाने के लिए पुलिस ने बहबल कलां में गोली चलाई। आयोग की रिपोर्ट पढ़ने पर यह पता चलता है कि बहबल कलां में मारे गए दो व्यक्तियों के परिवारिक सदस्यों ने किसी भी थाने में यह शिकायत नहीं दी कि उनके सदस्यों की मौत फिल्म के कारण हुई है। जाखड़ का इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है कि वह बहबल कलां के इक्ट्ठ को फिल्म से जोड़ रहे हैं। कोटकपूरा व बहबल कलां में धरना श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ लगाया था, उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की थी लेकिन जाखड़ समाज की अमन-शांति को भंग व जनता को भड़काने के लिए कह रहे हैं कि यह सब कुछ फिल्म के कारण हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ 2015 में न तो धरने में गए और न ही धरनाकारियों को मिले लेकिन वह घर बैठे-बिठाए कहानी बनाने में मशगूल रहे। दरअसल जाखड़ 2017 में हुई अपनी हार से बौखलाए हुए हैं। डेरा प्रेमियों ने इन चुनावों में अकाली-भाजपा को समर्थन दिया था। लेकिन जाखड़ को यह बात भूलनी नहीं चाहिए कि 2007 में डेरा श्रद्धालुओं ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। साध-संगत ने उनको हलका अबोहर से वोट देकर जिताया था। क्या जाखड़ बताएंगे कि उस वक्त उनकी वोट संबंधी डील हुई थी? बहस तथ्यों व सबूतों पर ही हो सकती है लेकिन झूठ-प्रचार करने के लिए किसी तथ्य की जरूरत नहीं होती। जाखड़ पार्टी के जिम्मेवार नेता होने के साथ-साथ गुरदासपुर से सांसद भी हैं। राजनीति चलाने के लिए अमन-शांति को दांव पर न लगाएं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Sep 2018 11:12:59 +0530</pubDate>
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                <title>आपसी प्रेम एवं अपनेपन का एहसास कराता हैै ‘रक्षाबंधन’</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षाबंधन पर्व भारत के मशहूर पर्वों में से एक है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा (Realizing love Is ‘Rakshabandhan’) के दिन मनाया जाता है। भाई-बहन का यह त्यौहार सुरक्षा, स्नेह, सम्मान, आपसी प्रेम और अपनेपन का वचन लेकर आता है। रक्षाबंधन के दिन एक तरफ जहां बहन अपने भाई को प्यार, विश्वास और सम्मान से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/realizing-love-and-belonging-is-rakshabandhan/article-5552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/realizing-love-is-rakshabandhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन पर्व भारत के मशहूर पर्वों में से एक है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा <strong>(Realizing love Is ‘Rakshabandhan’)</strong> के दिन मनाया जाता है। भाई-बहन का यह त्यौहार सुरक्षा, स्नेह, सम्मान, आपसी प्रेम और अपनेपन का वचन लेकर आता है। रक्षाबंधन के दिन एक तरफ जहां बहन अपने भाई को प्यार, विश्वास और सम्मान से राखी बांधती है, वहीं भाई अपनी बहन को पूरी उम्र उसकी रक्षा का वचन देता है। रक्षाबंधन पर बहन द्वारा भाई को बांधा जाने वाला सूत्र केवल धागा नहीं होता, यह प्रतीक होता उस आपसी प्रेम का, सम्मान का, स्नेह का, जो भाई-बहन के बीच होता है। रक्षाबंधन के नाम से ही महसूस होता है कि रक्षा का बंधन।</p>
<p style="text-align:justify;">पौराणिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन पर्व लक्ष्मी जी का बलिराज को राखी बांधने से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि दानवों के राजा बलि ने जब सौ यज्ञ पूरे करने के बाद चाहा कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो, इस पर देव इन्द्र का सिहांसन डोलने लगा। ऐसे में वे भगवान विष्णु के पास जाते हैं और उनसे प्रार्थना करते हंै, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु वामन अवतार ले, ब्राह्मण वेश धर कर, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने जाते है। भिक्षा में तीन पग भूमि मांगने पर राजा बलि अपने दिये वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में देने के तैयार हो जाते है। वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरा पग रखने के लिए राजा बलि अपना सिर आगे करते हंै, जिससे वे परलोक पहुंच जाता है। सर्वस्व दान करने के कारण ही बलिदान शब्द बना। बलि के व्यवहार से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने को कहते है, जिसपर राजा बलि उनसे हरदम अपने सामने रहने का वर मांगते है। जिसके बाद वे वहीं राजा बलि के द्वार पर उनके द्वारपाल बनकर रहते हैं। इसके बाद लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को वापिस लाने के लिए राजा बलि के पास जाकर उन्हें अपना भाई बनाकर राखी बांधती है और इसके उपहार स्वरूप अपने पति भगवान विष्णु को मांगती है। उस दिन से प्रत्येक श्रावण पूर्णिमा को भारत में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतिहास का एक दूसरा उदाहरण कृष्ण और द्रौपदी को माना जाता है। कृष्ण भगवान ने राजा शिशुपाल को मारा था। युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की उंगली से खून बह रहा था, इसे देखकर द्रौपदी बेहद दु:खी हुईं और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा चीरकर कृष्ण की उंगली में बांध दी, जिससे उनका खून बहना बंद हो गया। कहा जाता है तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। सालों के बाद जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था, तब कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन का एक और उदाहरण इतिहास के पन्नों में देखने को मिलता है, वो है रानी कर्णावती और सम्राट हुमांयू का। मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था, तब चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी। तब हुमायूं बहन की रक्षा के लिए आये किंतु तब तक देर हो चुकी थी, और रानी कर्णावती जोहर कर चुकी होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
रक्षाबंधन को भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और अलग-अलग रूप में मनाया जाता है जैसे उतरांचल में इसे श्रावणी नाम से मनाया जाता है। भारत के ब्राह्मण वर्ग में इस दिन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है, यज्ञोपवीत धारण करना शुभ माना जाता है। कई जगह रक्षा बंधन के दिन ब्राह्मण वर्ग अपने यजमानों को यज्ञोपवीत एवं राखी देकर दक्षिणा लेते हैं। भारत में स्थान बदलने के साथ ही पर्व को मनाने की परम्परा भी बदल जाती है। तमिलनाडू, केरल और उड़ीसा आदि दक्षिण भारत में रक्षाबंधन को अवनि अवितम के रुप में मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन की परंपरा उन बहनों ने डाली थी जो सगी नहीं थीं, भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरूआत क्यों न की हो, लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है। आज रक्षाबंधन भारत के बड़े त्यौहारों में शामिल है। बहनें अपने भाईयों-भतीजों के लिए सुन्दर-सुन्दर राखियां खरीद कर लाती है, और पूर्णिमा के दिन शुभ समयनुसार उनकी कलाई पर बांध उन्हें अपनी जिम्मेवारियों का एहसास दिलाती है।<em> <strong>सौरभ जैन</strong></em></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Aug 2018 13:17:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तिरुवल्लूर में देखने को मिला अध्यापक प्रेम</title>
                                    <description><![CDATA[अध्यापक का हुआ तबादला तो धरने पर बैठे स्टूडेंट्स तमिलनाडु, एजेंसी। तमिलनाडु में तिरुवल्लूर जिले के एक सरकारी स्कूल में टीचर-स्टूडेंट्स के बीच का अनुठा प्रेम देखने को मिला। तिरुवल्लूर जिले के सरकारी स्कूल में एक अध्यापक के तबादले के आदेश जारी हुए। जिसके बाद से स्कूली बचचों में उदासी ने अपना घर बना लिया, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/teacher-love-to-see-thiruvallur/article-4385"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kjkj-copy-5.jpg" alt=""></a><br /><h2>अध्यापक का हुआ तबादला तो धरने पर बैठे स्टूडेंट्स</h2>
<p><strong>तमिलनाडु, एजेंसी।</strong></p>
<p>तमिलनाडु में तिरुवल्लूर जिले के एक सरकारी स्कूल में टीचर-स्टूडेंट्स के बीच का अनुठा प्रेम देखने को मिला। तिरुवल्लूर जिले के सरकारी स्कूल में एक अध्यापक के तबादले के आदेश जारी हुए। जिसके बाद से स्कूली बचचों में उदासी ने अपना घर बना लिया, अध्यापक के तबादले से सभी बच्चे खासे नाराज थे। बच्चों का कहना था कि उनके अधयापक का तबादला न किया जाए।</p>
<p>लेकिन स्कूल प्रशासन ऐसी किसी मांग का समर्थन नहीं कर रहा था। इसी दौरान जब अध्यापक के वहां से जाने का समय आया तो बच्चों ने उनको रोक लिया, बच्चे धरना देने को तैयार हो गए, अपने प्रिय अधयापक को रोकने के लिए किसी ने अधयापक के स्कूटर की चाबी निकाली तो किसी ने अध्यापक का बैग छीना ताकि वे वहां से न जाए।</p>
<h2>रोकने के लिए किसी ने स्कूटर की चाबी छिपाई, किसी ने छीना बैग<br />
10 दिन के लिए रुका ट्रांसफर</h2>
<p>कुछ स्टूडेंट्स तो उनसे लिपटकर रोने लगे जिससे खुद अध्यापक भी भावुक हो गए। इस स्थिती को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने उनका ट्रांसफर 10 दिन के लिए टाल दिया। वेल्लिग्राम के गवर्नमेंट हाईस्कूल में अंग्रेजी के टीचर जी. भगवान पिछले चार साल से क्लास 6 से लेकर 10वीं तक के बच्चों को इंग्लिश पढ़ाते आए हैं।</p>
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<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jun 2018 14:26:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मौहब्बत करने वाले कम न होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[(रमेश सर्राफ धमोरा) मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे। मेहंदी हसन की गायी यह प्रसिद्ध गजल आज यथार्थ बन गयी है। 13 जून 2012 को पाकिस्तान के कराची शहर में पूरी दुनियां में अपने चाहने वालों को बिलखता छोड़ मेंहदी हसन इस दुनिया से दूर जा चुके हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/those-who-do-not-love-will-not-be-less/article-4126"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/love.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><b>(<strong>रमेश सर्राफ धमोरा</strong>) </b>मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे। मेहंदी हसन की गायी यह प्रसिद्ध गजल आज यथार्थ बन गयी है। 13 जून 2012 को पाकिस्तान के कराची शहर में पूरी दुनियां में अपने चाहने वालों को बिलखता छोड़ मेंहदी हसन इस दुनिया से दूर जा चुके हैं। अब हमें याद रहेंगी तो बस उनकी गायी अमर गजलें व उनकी यादें। उनकी गजलें और हमारे जज्बात आपस में बातें करते हैं। इतनी नजदीकियां शायद हम किसी से ख्वाबों में सोचा करते हैं। उनकी मखमली आवाज के दरमियां जब अल्फाज मौसिकी का दामन पकड़ती है,तब हम खुदाओं से बड़ी सैर करते हैं। मेहंदी हसन कहते थे कि बुलबुल ने गुल से,गुल ने बहारों से कह दिया,एक चौदहवीं के चांद ने तारों से कह दिया, दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं, एक दिलरूबा है दिल में, तो हूरो से कम नहीं। उनके गले से निकले यह शब्द हर प्यार करने वाले की आवाज बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी गजलों ने जैसे लोगों के अन्दर का खालीपन पहचान कर बड़ी खूबी से उस खालीपन को भर दिया। न किसी की आंख का नूर हूं, न किसी की दिल का करार हूं। जो किसी के काम न आ सके, मैं वो एक मुश्ते-गुबार हूं। कहते-कहते मेहंदी हसन साहब एक बड़ी बात कह जाते हैं-तन्हा-तन्हा मत सोचाकर, मर जावेगा, मर जावेगा, मत सोचाकर..। उनके जाने के बाद हम कह देते हैं कि लो,अब हम नहीं सोचेंगे। पर आपने तो हमें जिन्दगी भर सोचने का सामान दे दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तानी गजल गायक मेहंदी हसन का भारत से विशेष लगाव रहा था। उन्हे जब भी भारत आने का मौका मिला वे दौड़े चले आते थे। राजस्थान में शेखावाटी की धरती उन्हें अपनी ओर खींचती रही थी । यहां की मिट्टी से उन्हे सदैव एक विशेष प्रकार का लगाव रहा था इसी कारण पाकिस्तान में आज भी मेहंदी हसन के परिवार में सब लोग शेखावाटी की मारवाड़ी भाषा में बातचीत करतें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेहंदी हसन ने सदैव भारत-पाकिस्तान के मध्य एक सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाई तथा जब-जब उन्होने भारत की यात्रा की तब-तब भारत-पाकिस्तान के मध्य तनाव कम हुआ व सौहार्द का वातावरण बना। भारत से पाकिस्तान जाने के बाद मेहंदी हसन पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके थे। 1978 में मेहंदी हसन जब अपनी भारत यात्रा पर आये तो उस समय गजलों के एक कार्यक्रम के लिए वे सरकारी मेहमान बन कर जयपुर आए थे और उनकी इच्छा पर प्रशासन द्वारा उन्हें उनके पैतृक गांव राजस्थान में झुंझुनू जिले के लूणा ले जाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कारों का काफिला जब गांव की ओर बढ़ रहा था तो रास्ते में उन्होंने अपनी गाड़ी रूकवा दी। गांव में सड़क किनारे एक टीले पर छोटा-सा मंदिर बना था, जहां वे रेत में लोटपोट होने लगे । उस समय जन्म भूमि से ऐसे मिलन का नजारा देखने वाले भी भाव विभोर हो उठे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वे मां की गोद में लिपटकर रो रहे हों। उन्होंने लोगों को बताया कि बचपपन में यहां बैठ कर वे भजन गाया करते थे। जिन लोगों ने मेहंदी हसन को नहीं देखा, वे भी उन्हें प्यार और सम्मान करते हैं। शायद ऐसे ही वक्त के लिए मेहंदी हसन ने यह गजल गाई है-मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे। 1993 में मेहंदी हसन एक बार पुन: अपने गांव लूणा आये मगर इस बार अकेले नहीं बल्कि पूरे परिवार सहित।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान उन्होने गांव के स्कूल में बनी अपने दादा इमाम खान व माँ अकमजान की मजार की मरम्मत करवायी व पूरे गांव में लड्डू बंटवाये थे। आज मजार बदहाली की स्थिति में वीरान और सन्नाटे से भरी है। यह मजार ही जैसे मेहदी हसन को लूणा बुलाती रहती थी। मानो रेत के धोरों में हवा गुनगुनाने लगती है- भूली बिसरी चंद उम्मीदें, चंद फसाने याद आए, तुम याद आए और तुम्हारे साथ जमाने याद आए।</p>
<p style="text-align:justify;">उस वक्त उनके प्रयासों से ही गांव में सड़क बन पायी थी।मेहंदी हसन का जन्म 18,जुलाई 1927 को राजस्थान में झुंझुनू जिले के लूणा गांव में अजीम खां मिरासी के घर हुआ था। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त पाकिस्तान जाने से पहले उनके बचपन के 20 वर्ष गांव में ही बीते थे। मेहंदी हसन को गायन विरासत में मिला। उनके दादा इमाम खान बड़े कलाकार थे जो उस वक्त मंडावा व लखनऊ के राज दरबार में गंधार, ध्रुपद गाते थे। मेहंदी हसन के पिता अजीम खान भी अच्छे कलाकार थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कारण उस वक्त भी उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी।पाकिस्तान जाने के बाद भी मेहंदी हसन ने गायन जारी रखा तथा वे ध्रुपद की बजाय गजल गाने लगे। वे अपने परिवार के पहले गायक थे जिसने गजल गाना शुरू किया थ। 1952 में वे कराची रेडियो स्टेशन से जुड़कर अपने गायन का सिलसिला जारी रखा तथा 1958 में वे पूर्णतया गजल गाने लगे। उस वक्त गजल का विशेष महत्व नहीं था। शायर अहमद फराज की गजल- रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिये आ- से मेहंदी हसन को पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उसके बाद उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस गजल को मेहंदी हसन ने शास्त्रीय पुट देकर गाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मेहंदी हसन ध्रुपद,ख्याल,ठुमरी व दादरा बड़ी खूबी के साथ गाते थे। इसी कारण कोकिला कण्ठ लता मंगेशकर कहा करती है कि मेहंदी हसन के गले में तो स्वंय भगवान ही बसते हैं। पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है जैसी मध्यम सुरों में ठहर-ठहर कर धीमे-धीमे गजल गाने वाले मेहंदी हसन केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश जैसी राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड को भी उतनी ही शिद्दत के साथ गाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी राजस्थानी जुबान पर भी उर्दू जुबान जैसी पकड़ थी। मेहंदी हसन की झुंझुनू यात्राओं के दौरान उनसे जुड़े रहे नरहड़ दरगाह के पूर्व सदर मास्टर सिराजुल हसन फारूकी बताते थे कि मेहंदी हसन साहब की झुंझुनू जिले के नरहड़ स्थित हाजिब शक्करबार शाह की दरगाह में गहरी आस्था थी। वो जब भी भारत आये तो नरहड़ आकर जरूर जियारत करते रहें हैं। वो चाहते थे कि मेहंदी हसन की याद को लूणा गांव में चिरस्थायी बनाये रखने के लिये सरकार द्वारा उनके नाम से लूणा गांव में संगीत अकादमी की स्थापना की जानी चाहिये ताकि आने वाली पीढियां उन्हे याद कर प्रेरणा लेती रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">मेहंदी हसन के बारे में मशहूर कव्वाल दिलावर बाबू का कहना है कि यह हमारे लिये बड़े फक्र की बात है कि उन्होने झुंझुनू का नाम पूरी दुनिया में अमर किया। उन्होने गजल को पुनर्जन्म दिया। दुनियां में ऐसे हजारों लोग हैं जो उनकी वजह से गजल गायक बने। उन्होने गजल गायकी को एक नया मुकाम दिया। लूणा गांव की हवा में आज भी मेहंदी हसन की खुशबू तैरती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बचपन में मेहंदी हसन को गाायन के साथ पहलवानी का भी शौक था। लूणा गांव में मेहंदी हसन अपने साथी नारायण सिंह व अर्जुन लाल जांगिड़ के साथ कुश्ती में दावपेंच आजमाते थे। वक्त के साथ उनके संगी-साथी भी अब इस दुनिया को छोड़कर जा चुके हैं, लेकिन गांव के दरख्तों, कुओं की मुंडेरों और खेतों में उनकी महक आज भी महसूस की जा सकती है। मेहंदी हसन की मृत्यु होने की खबर सुनकर लूणा सहित पूरे झुंझुनू जिले में में शोक की लहर दौड़ गयी थी। मेहंदी हसन को चाहने वाले खुदा से दुआ करते रहतें हैं कि हसन साहब को जन्नत नसीब हो।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 08:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परस्पर नि:स्वार्थ प्रेम से रहो</title>
                                    <description><![CDATA[जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो लोग आपस में बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार किया करते हैं, अल्लाह, वाहेगुरु,सतगुरु, रहबर से वही खुशियों के खजाने लिया करते हैं। जिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो लोग आपस में बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार किया करते हैं, अल्लाह, वाहेगुरु,सतगुरु, रहबर से वही खुशियों के खजाने लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस घर में रहने वालों का आपस में प्रेम है, मालिक से प्रेम है तो घास-फूस की झोपड़ी भी महलों से कई गुणा बढ़कर खुशियां देने वाली है, स्वर्ग-जन्नत का नमूना है और वो आलिशान महल, बड़े-बड़े घर जिनमें प्यार-मोहब्बत नहीं है वो श्मशान भूमि, कब्रिस्तान की तरह सन्नाटे के अलावा कुछ भी नहीं होते। इसलिए जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं। वही सबसे अच्छा, नेक इंसान है। वो ही मालिक के रहमो-कर्म का हकदार बनता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">पाप-जुल्म की कमाई से आप गाड़ियां, मोटर सब कुछ खरीद सकते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि पाप-जुल्म की कमाई से आप गाड़ियां, मोटर सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन जब घर में बेचैनी आ गई, परेशानी आ गई तो सारा पैसा धरा-धराया रह जाएगा, सुख-शांति से महरूम हो जाओगे, खाली हो जाओगे। इसलिए कभी बिको न। अरे बिकना है तो अल्लाह, वाहेगुरु, राम के हाथों बिको क्योंकि वो तुझे खरीदकर अनमोल कर देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 01:00:32 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अनाथ बच्चों को भी मिलेगा मां-बाप का प्यार</title>
                                    <description><![CDATA[गोद लेने वाले परिवारों को मिलेगी प्रति माह 2 हजार रुपए आर्थिक सहायता नई योजना के तहत गोद ले सकेंगे दूर के रिश्तेदार व पड़ोसी चंडीगढ़(अनिल कक्कड़)। प्रदेश के अनाथ बच्चों को पारिवारिक माहौल देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक नई योजना के तहत अनाथ बच्चे अब परिवार का प्यार और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">गोद लेने वाले परिवारों को मिलेगी प्रति माह 2 हजार रुपए आर्थिक सहायता</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नई योजना के तहत गोद ले सकेंगे दूर के रिश्तेदार व पड़ोसी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अनिल कक्कड़)।</strong> प्रदेश के अनाथ बच्चों को पारिवारिक माहौल देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक नई योजना के तहत अनाथ बच्चे अब परिवार का प्यार और माहौल दोनों प्राप्त कर सकेंगे। इन बच्चों को उनके रिश्तेदार, गाँव/ शहर में रहने वाले लोग भी गोद ले सकेंगे। ऐसा करने वाले परिवार को सरकार दो हजार रुपए प्रतिमाह आर्थिक सहायता के तौर पर देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाल सुधार गृह में लगेंगी 10वीं-12वीं की क्लास</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों को भी सरकार दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षा दिलवाने जा रही है। इस बाबत महापात्रा ने कहा कि बाल सुधार गृह में रह रहे नाबालिगों के सुधार के लिए उन्हें बोर्ड की परीक्षाएं करवाने का फैसला किया है। नेशनल ओपन स्कूल और हरियाणा ओपन स्कूल से इन बच्चों को दसवीं ओर बाहरवीं कक्षा की परीक्षा दिलवाई जाएगी और साथ ही कोई वोकेशनल ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महापात्रा के अनुसार ऐसा इसलिए ताकि जब ये नाबालिग बाल सुधार गृह से जब बाहर जाएं तो इज्जत भरी जिंदगी के लिए रोजगार एवं कैरियर की दिशा में अपने कदम बढ़ा सकें। 10वीं -12वीं की शिक्षा व परीक्षा पर सारा खर्च सरकार उठाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/orphaned-children-will-also-get-the-love-of-parents/article-957</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 09:49:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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