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                <title>parents - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जो माँ-बाप बच्चों को टाइम नहीं देते, हो जाएं सावधान, पढ़ लें पूज्य गुरु जी के ये वचन</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे का सवाल : पूज्य गुरु जी मैं अपने पापा की शिकायत लगाने जा रहा हूँ, कि मेरे पापा मुझे बिल्कुल टाइम नहीं देते, पर सबके पापा तो सबको टाइम देते हैं ना। इसका क्या सोल्यूशन है? पूज्य गुरु जी जवाब : भई ये तो बुरी बात है, पापा को हर हाल टाइम देना चाहिए। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/those-parents-who-do-not-give-time-to-their-children-be-careful/article-58968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/msg10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बच्चे का सवाल :</strong> पूज्य गुरु जी मैं अपने पापा की शिकायत लगाने जा रहा हूँ, कि मेरे पापा मुझे बिल्कुल टाइम नहीं देते, पर सबके पापा तो सबको टाइम देते हैं ना। इसका क्या सोल्यूशन है?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी जवाब :</strong> भई ये तो बुरी बात है, पापा को हर हाल टाइम देना चाहिए। क्योंकि पापा आपके बहुत बिजी रहते होंगे ये बात मानी, बहुत काम धंधे में लगे रहते होंगे। आपके पापा से पूछ लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बच्चे के पापा कहते हैं :</strong> गुरु जी मैं प्रोफेशन से चार्टेड अकाउंटेंट हूं। आजकल लॉ एक्ट फ्रीकूएंटली चेंजिज होते रहते हैं तो हमें अपने आप को अपडेट रखना पड़ता है। अब तो ये हो गया है कि हमारी लाइफ ही क्लाइंट्स के लिए है। खुद की पर्सनल लाइफ ही खत्म हो गई है। और ज्यादातर मैट्रो में सभी सीए का यही हाल है। हम तो इस चीज से खुद परेशान हैं। पर अगर क्लाइंट को अच्छी सर्विस देनी है तो हमें फैमिली लाइफ से समझौता करना पड़ता है। कृपा इसको लेकर कुछ गाइड करें जी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी का जवाब</strong> : हमें लगता है कि आप अपनी जगह पर सही कह रहे हैं। लेकिन, शायद आप अपनी बॉडी के लिए तो टाइम देते ही होंगे। नहाते होंगे, कपड़े वगैरह पहनते होंगे तो ऐसा ही टाइम निकालकर थोड़ा सा टाइम बच्चों को भी दिया करो। क्योंकि ये आपका अभिन्न अंग हैं। अगर आप सिर्फ इनके लिए कमा रहे हो, लेकिन इनको नहीं संभाल रहे। तो ये अगर कोई और रास्ता पकड़ गए तो फिर आपका वो किया कराया मिट्टी में मिल जाएगा। तो आप अपने प्रोफेशन को पूरा टाइम दीजिये, लेकिन बीच में जैसे खाने-पीने, नहाने का टाइम खुद के लिए देते हैं, वैसे ही बच्चों के लिए भी एक टाइम फिक्स करके या थोड़ा आगे-पीछे हो जाए कोई बात नहीं, तो वो टाइम भी जरूर देना चाहिए। गौरतलब हैं कि जब पूज्य गुरु जी बरनावा आश्रम पधारे थे उस समय बच्चों के सवाल के जवाब में ये वचन फरमाये थे।</p>
<p><iframe title="How to Overcome the Generation Gap Between Parents and Children? Parenting Tips by Saint Dr. MSG" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/HH67wjeyDwE?start=326&amp;feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jun 2024 16:49:31 +0530</pubDate>
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                <title>मां-बाप खुद फोन पर बिजी रहते हैं? गुरु जी मैं क्या करूं?</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से बच्चों के अच्छे पालन-पोषण में आ रही परेशानियों सहित विभिन्न सवालों के जवाब देकर अभिभावकों की जिज्ञासा को शांत किया। पूज्य गुरु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/are-the-parents-themselves-busy-on-the-phone-guru-ji-what-should-i-do/article-45371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/saint-dr.-msg-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)</strong>। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से बच्चों के अच्छे पालन-पोषण में आ रही परेशानियों सहित विभिन्न सवालों के जवाब देकर अभिभावकों की जिज्ञासा को शांत किया। पूज्य गुरु जी ने अभिभावकों को बेहतरीन टिप्स और सुझाव दिए। आॅनलाइन सवाल आदरणीय ‘रूह दी’ हनीप्रीत इन्सां ने पढ़े।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बच्चे का सवाल :</strong> पूज्य गुरु जी मेरे मम्मी-पापा दोनों डॉक्टर हैं और मेरे ऊपर डॉक्टरी झाड़ते हैं, कहते हैं कि तू टैब देखती रहती है और आई साइट वीक (आँखों की रोशनी कम) हो जाएगी। इसमें रेडिएशन बहुत होता है और ख़ुद हर समय फोन पर बिजी रहते हैं। तो मैं क्या करूं?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी :</strong> वैसे बड़ी अजीबोगरीब बात है कि आपको समझाते हैं और ख़ुद फॉलो नहीं करते। पहले तो आपके मम्मी-पापा को ये कहना चाहेंगे कि वो इस चीज को पहले ख़ुद फॉलो करें। एक उदाहरण बनें अपने बच्चे के सामने, तो नैच्युरली बच्चा भी वो ही फॉलो करेगा। और दूसरी बात कि बेटा! एक फिक्स टाइम होना चाहिए। जैसे पढ़ाई के लिए आपको फिक्स टाइम है। खाने का फिक्स टाइम है। ऐसे ही आप टीवी या फोन के लिए भी एक फिक्स टाइम रख लें तो यकीन मानो आप भी खुश रहेंगे और मम्मी-पापा भी खुश रहेंगे। तो उनको भी टाइम फिक्स करना पड़ेगा इस बारे में। तो ये अगर आप तालमेल बैठा लोगे तो दोनों खुश रहोगे।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 16:17:09 +0530</pubDate>
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                <title>अपने लाडले को देखने के लिए तरसी आंखें</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की वतन वापसी की मांग, गुहार लेकर प्रशासन के पास पहुंचे परिजन हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। यूक्रेन में फंसे भारत के छात्र-छात्राओं को लेकर परिजन चिंतिंत है। वे अपने बच्चों की सकुशल भारत वापसी की आस लगाए बैठे हैं। इस आस में उनका रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों के अभिवावक दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/eyes-longing-to-see-your-beloved-son/article-31116"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/hanumangarh-1.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की वतन वापसी की मांग, गुहार लेकर प्रशासन के पास पहुंचे परिजन</h3>
<p style="text-align:justify;">
<strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> यूक्रेन में फंसे भारत के छात्र-छात्राओं को लेकर परिजन चिंतिंत है। वे अपने बच्चों की सकुशल भारत वापसी की आस लगाए बैठे हैं। इस आस में उनका रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों के अभिवावक दो दिनों से टीवी पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं और बच्चों की सकुशल वतन वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को आसपास के क्षेत्र के वे नागरिक जिनके बच्चे यूक्रेन में फंसे हुए हैं, उन्हें वापस भारत लाने की गुहार लेकर जिला प्रशासन के पास पहुंचे। इन नागरिकों ने भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं के साथ उपखण्ड अधिकारी डॉ. अवि गर्ग से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर माकपा के जिला सचिव रघुवीर सिंह वर्मा ने कहा कि यूक्रेन में करीब 20 हजार भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें हनुमानगढ़ जिले के भी कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं। जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव मक्कासर निवासी छात्र दलजीत सिंह पुत्र गुरदीप सिंह कुम्हार भी करीब तीन माह पहले ही शिक्षा ग्रहण करने के लिए यूक्रेन गया था। लेकिन अब यूक्रेन में युद्ध के हालात पैदा हो चुके हैं। इस कारण दलजीत सिंह सहित कई छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंस गए हैं। इन बच्चों के परिजनों को भारतीय दूतावास से भी कोई सन्तोषजनक जवाब नहीं मिल रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कारण यूक्रेन में फंसे भारत के छात्र-छात्राओं के साथ ही उनके परिजनों में भय व अनिश्चितता का माहौल है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से मांग की कि भारत सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर यूक्रेन में फंसे भारत के छात्र-छात्राओं के साथ भारतीय नागरिकों को सही-सलामत लाने की व्यवस्था करे। वहीं छात्र दलजीत सिंह के चाचा कुलवीर सिंह ने बताया कि यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे उसके भतीजे दलजीत सिंह के पास रुपए खत्म हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खाने-पीने की व्यवस्था करने में भी दिक्कत आ रही है। उससे रोजाना दूरभाष पर बात हो रही है। कीव पर रोजाना रूसी सेना हमला कर रही है। इस कारण पूरा परिवार दलजीत की सुरक्षा को लेकर भयभीत है। केन्द्र सरकार से मांग है कि दलजीत के साथ यूक्रेन में फंसे अन्य भारतीय बच्चों को सकुशल भारत लाया जाए। इस मौके पर सुरेन्द्र शर्मा, ओम स्वामी, अमरीक सिंह, जगदीश आदि मौजूद रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूर्व पार्षद का पुत्र भी यूक्रेन में फंसा</h3>
<p style="text-align:justify;">
उधर, जंक्शन के गांधीनगर निवासी पूर्व पार्षद परमजीत कौर सोनी व अमरजीत सोनी का पुत्र जॉफी जोरा भी यूक्रेन में फंसा हुआ है। पूरा परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। जॉफी जोरा की माता के आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे। अमरजीत सोनी के अनुसार उसका पुत्र जॉफी जोरा यूक्रेन के खारकिव में पांच साल से एमबीबीएस कर रहा है। उसकी भारत वापसी के लिए 24 फरवरी की टिकट बुक करवाई।</p>
<p style="text-align:justify;">23 फरवरी को उसका पुत्र जॉफी जोरा खारकिव से यूक्रेन की राजधानी कीव के लिए रवाना हुआ। 24 फरवरी को सुबह 6 बजे एयरपोर्ट पहुंचा तो पता चला कि एयरपोर्ट बंद है। इसके बाद जॉफी जोरा मेट्रो के जरिए भारतीय दूूतावास पहुंचा। भारतीय दूतावास में करीब 250 बच्चे हैं। अब उसका बेटा भारतीय दूतावास के पास एक स्कूल में रह रहा है। भारतीय दूतावास उसकी मदद कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">खाना उपलब्ध करवाया जा रहा है। उनकी अपने बेटे से लगातार बातचीत हो रही है। जॉफी जोरा खुद के सुरक्षित होने की बात कह रहा है। लेकिन उनमें अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है। जॉफी जोरा भी जल्द से जल्द वहां से निकालने की मांग कर रहा है। अमरजीत सोनी ने भी केन्द्र सरकार से मांग की कि उसके बेटे की भारत वापसी करवाई जाए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 21:34:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों का विकास, हमारा दायित्व</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया की तमाम प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों की ऐतिहासिक, यादगार और आशातीत सफलता के पीछे जितनी बच्चों की भागीदारी है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। ये बच्चे न होते तो हमारे कोई से आयोजन सफल नहीं हो पाते। साल भर में जाने कितने दिवस, पखवाड़े, सप्ताह और माह आते हैं, कितने सारे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childrens-development-our-liability/article-3513"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/vikas.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया की तमाम प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों की ऐतिहासिक, यादगार और आशातीत सफलता के पीछे जितनी बच्चों की भागीदारी है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। ये बच्चे न होते तो हमारे कोई से आयोजन सफल नहीं हो पाते। साल भर में जाने कितने दिवस, पखवाड़े, सप्ताह और माह आते हैं, कितने सारे राष्ट्रीय पर्व, उत्सव, त्योहार और अभियान आते हैं, किसी न किसी विषय को लेकर साल भर जितने भी कार्यक्रम आ धमकते हैं उन सभी की सफलता बच्चों पर ही निर्भर है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये बच्चे न होते तो साल भर हमारे तमाम प्रकार के आयोजन न केवल फीके रह जाते बल्कि इनका कोई अस्तित्व ही नहीं रह पाता।  देश-विदेश का कोई सा आयोजन हो, बच्चों के बगैर करने की कल्पना मात्र करके देख लीजिये, अपने आप सारी खुमारी उतर जाएगी।  हम साल भर बचपन बचाने, बच्चों के कल्याण और बाल विकास के नाम पर बातें करते झाड़ते रहते हैं, उपदेशों की वृष्टि करते हुए खुद को महानतम उपदेशक एवं बच्चों के कल्याण का मसीहा घोषित करवाने को बेताब रहते हैं। और तो और जिन बच्चों के नाम पर साल भर समर्पित रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन बच्चों के लिए साल भर में केवल एक दिन बाल दिवस के रूप में मना डालते हैं और फिर बच्चों के प्रति अपने दायित्वों की इतिश्री कर लिया करते हैं। हम सभी बड़े लोगों  को गंभीरता से सोचना होगा कि हम बच्चों के कल्याण के लिए क्या कुछ डींगे हाँक रहे हैं, क्या कुछ कर पा रहे हैं और बच्चों के कल्याण की दिशा में हमारी सच्चाई, ईमानदारी और नीयत का प्रतिशत कितना कुछ है।बचपन बचाने की हम केवल बातें ही करते हैं और बच्चों के नाम पर पुरस्कार-सम्मान खुद ले उड़ते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के लिए हमने न कोई खेल मैदान बाकी रखा है, न उनके लिए मनोरंजन और बाल उद्यान आदि। खेलने-कूदने की उम्र में बच्चे मनोरंजन और मस्ती चाहते हैं, पढ़ाई-लिखाई और श्रम के बोझ से मुक्त रहना चाहते हैं।  पर हम उनके बचपन की निर्मम हत्या करने पर तुले हुए हैं। बस्तों के बोझ के मारे कुली के रूप में देख-देख कर भी हमें बच्चों पर दया नहीं आती। हमें क्या अधिकार है बच्चों की बातें करने का, जबकि हम स्कूलों में बच्चों को शुद्ध पानी तक मुहैया नहीं करवा पाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें इस बात की भी परवाह नहीं है कि मोटी-मोटी फीस लेने के बावजूद हम बच्चों के लिए स्कूल में पानी का प्रबन्ध तक नहीं कर पाए हैं और इस स्थिति मेंं बच्चों को बस्ते के साथ पानी की बोतल तक भर कर लाने को विवश होना पड़ रहा है। शरीर की आवश्यकता के अनुपात में यह पानी कितना कम पड़ता है और हम बच्चों की सेहत का ख्याल रखने के पाठ पढ़ाते हुए यह पढ़ाते रहते हैं कि खूब पानी पीना चाहिए। सुविधाओं का अभाव भी बच्चों के लिए बड़ी समस्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुविधाओं के नाम पर बहुत कुछ किया है हमने, सरकार भी खूब कर रही है लेकिन हम क्या कर रहे हैं, यह देखा जाए तो दुर्भाग्यजनक ही है। हम भी जिम्मेदार हैं बच्चों के बैग्स का भार बढ़ाने में। देश की तमाम रचनात्मक गतिविधियों में उन बच्चों के धैर्य, साहस और सहनशीलता की तारीफ की जानी चाहिए जो गर्मी, सर्दी और बरसात और तमाम विषम परिस्थितियों में भी उत्साह के साथ भागीदारी निभाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के अधिकारों के संरक्षण व उनके विकास के लिए जितना कुछ पिछले बरसों में होता रहा है, उतना यदि ईमानदारी से होता तो आज बाल दिवस जैसे आयोजनों की कोई जरूरत नहीं पड़ती। बच्चों से हम राष्ट्रीय दिवसों पर कई-कई दिन अभ्यास करवाते हैं, ये ही बच्चे घण्टों अभ्यास करते हुए हमारे आयोजनों में चार चाँद लगाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें इस बात का भी संकल्प लेना होगा कि इन बच्चों को रोजाना दूध, फल और बिस्किट मुहैया कराएं ताकि सेहत पर बुरा असर न हो और बच्चों को भी खुशी हो। हम बड़े लोग तो इनके बाद लजीज नाश्तों और पेयों पर सादर सहर्ष आमंत्रित होकर मजे लिया करते हैं, हमने बच्चों के बारे में कभी सोचा तक नहीं। कभी किसी वर्ष बच्चों पर ही यह छोड़ कर देखें कि तमाम आयोजनों में इच्छा हो तो आएं, फिर देखें अपना प्रभाव और करें आयोजन, लें मजा, पाएं पुरस्कार-सम्मान और अभिनंदन। होश फाख्ता हो जाएंगे। बच्चों को वाकई लगना चाहिए कि बाल दिवस है। और यह तभी लग पाएगा जबकि हम बड़े लोग बच्चों के प्रति दिल से चाहत रखें, संवेदनशील बनें और बचपन बचाने के लिए नेक-नीयत से आगे आएं।</p>
<p style="text-align:justify;"> <strong>-लेखक दीपक</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Nov 2017 03:33:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवजात की मौत पर भड़के परिजन</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में जमकर किया हंगामा, पहुंची पुलिस जयपुर । राजधानी जयपुर के जेके लोन अस्पताल में वीरवार को एक नवजात की मौत पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजन बच्चे का शव लेकर सड़क पर आ गए और रास्ता जाम करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार भरतपुर से परिजन बीती रात बीमार हालत में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/parents-jammed-road-on-newborn-death/article-2837"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/police-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">अस्पताल में जमकर किया हंगामा, पहुंची पुलिस</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर ।</strong> राजधानी जयपुर के जेके लोन अस्पताल में वीरवार को एक नवजात की मौत पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजन बच्चे का शव लेकर सड़क पर आ गए और रास्ता जाम करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार भरतपुर से परिजन बीती रात बीमार हालत में नवजात को लेकर बच्चों के अस्पताल जेके लोन पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने बच्चे की नाजुक हालत के बावजूद अस्पताल में भर्ती कर लिया और उपचार के दौरान वीरवार सवेरे उसकी मौत गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चे की मौत पर परिजन आपा खो बैठे। उन्होंने हंगामा कर दिया। परिजनों के हंगामे से वहां भीड़ जमा हो गई। थोड़ी देर में वे बच्चे का शव लेकर सड़क पर आ गए तथा जेएलएन रोड जाम करने की कोशिश की। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को उचित जांच का भरोसा दिलाया एवं उन्हें समझा कर रास्ता खुलवाया। बाद में पुलिस परिजनों को लेकर अस्पताल पहुंची तथा डाक्टरों से भी बात की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">परिजनों ने लिखित में दी शिकायत</h2>
<p style="text-align:justify;">परिजनों ने आरोप लगाया कि रात को बच्चे की हालत बहुत खराब थी। डाक्टरों ने उसे एडमिट कर लिया, लेकिन गहनता से जांच नहीं की। उन्होंने इलाज में लापरवाही बरती और इस कारण सुबह बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस को इस संबंध में लिखित में शिकायत दी है। पुलिस ने डाक्टरों व परिजनों को सुनने के बाद अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 05:41:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैंगस्टर बेटे को पनाह देना पड़ा महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[मां-बाप सहित चार पर मामला दर्ज फिरोजपुर (सच कहूँ न्यूज)। गैंगस्टर की हत्या के मामले में फरार गैंगस्टर बेटे को पनाह देना मां बाप के लिए मुसीबत बन गया है। पुलिस ने उनके समेत चार के खिलाफ केस दर्ज किया। शिमला में गैंगस्टर जसविंदर सिंह राकी की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में पुलिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/four-cases-filed-with-parents/article-2823"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/gangster.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">मां-बाप सहित चार पर मामला दर्ज</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गैंगस्टर की हत्या के मामले में फरार गैंगस्टर बेटे को पनाह देना मां बाप के लिए मुसीबत बन गया है। पुलिस ने उनके समेत चार के खिलाफ केस दर्ज किया। शिमला में गैंगस्टर जसविंदर सिंह राकी की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में पुलिस पिछले कई महीनों से जयपाल की तलाश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, फिरोजपुर में ऊधम सिंह चौक पर इंस्पेक्टर सतविंदर सिंह ने नाकाबंदी की थी। इस दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि गैंगस्टर जयपाल को उसके माता-पिता और कुछेक रिश्तेदार पनाह दे रहे हैं। इन्हें मालूम है कि जयपाल कहां छिपा हुआ है। पुलिस ने जयपाल के पिता पंजाब पुलिस से इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त भूपिंदर सिंह, माता अमरजीत कौर निवासी दशमेश नगर फिरोजपुर शहर, रिश्तेदार गुरबिंदर सिंह उर्फ राकी पुत्र सविंदर जीत सिंह वासी गंजु गाजी जिला गुरदासपुर व मामा का बेटा रणजीत सिंह पुत्र जसवंत सिंह वार्ड नंबर-19 तरनतारन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सभी आरोपी फरार है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस मुताबिक गैंगस्टर जयपाल जेल में बंद गैंगस्टर चंदू गैंग से संबंधित है, कुछ माह पहले शिमला में फाजिल्का के रहने वाले गैंगस्टर जसविंदर सिंह राकी की जयपाल ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। अभी तक जयपाल पुलिस के हाथ नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 23:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों को संस्कारी बनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में माँ-बाप की भूमिका काफी अहम होती है। अगर माता-पिता संस्कारी होंगे, तभी तो बच्चे भी संस्कारी बनते हैं वर्ना संस्कारी होंगे ही नहीं। आजकल के माहौल में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल होता जा रहा है। माता-पिता कितना भी समझा लें बच्चे वही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/make-children-culturable/article-2178"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/family.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में माँ-बाप की भूमिका काफी अहम होती है। अगर माता-पिता संस्कारी होंगे, तभी तो बच्चे भी संस्कारी बनते हैं वर्ना संस्कारी होंगे ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल के माहौल में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल होता जा रहा है। माता-पिता कितना भी समझा लें बच्चे वही करते हैं, जो उनका मन कहता है। लेकिन अगर शुरू से ही आप अपने बच्चों को समझें और उनका मार्गदर्शन करें, तो आपका बच्चा जरूर आपकी बात मानेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">व्यवहारिक बातें भी हैं जरूरी</h2>
<p style="text-align:justify;">बच्चे में अच्छे संस्कार विकसित करना चाहती हैं, तो व्यवहारिक बातें समझाना भी बेहद जरूरी है। उसे बचपन से ही सिखाएं कि बड़ों से कैसे बात की जाए। बड़ों का अभिवादन करना, थैंक्यू और सॉरी कहना जरूर सिखाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">हाइजीन मेनटेन करना, पार्टी एटिकेट्स, रेस्टोरेंट मैनर इन सब चीजों को आप तो फॉलो करें ही, बच्चों को भी सिखाएं। कुछ चीजें तो वह आपसे देखकर ही सीख सकता है। इसलिए आप भी अपने व्यवहार में थोड़ा बदलाव लाएं और उनकी रोल मॉडल बनें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">डाइट भी हो राइट</h2>
<p style="text-align:justify;">ग्रोइंग बच्चों को न्यूट्रिशंस से भरपूर डाइट की जरूरत होती है। जो भी उसे खाने के लिए दें, उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू जरूर देखें। मिल्क या प्रोटीन से भरपूर सोया प्रोडक्ट डाइट में जरूर शामिल करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जंक या फास्ट फूड कभी-कभार तो ठीक है, पर हमेशा नहीं। घर पर ही बदल-बदल कर उसे कुछ-न-कुछ खाने के लिए दें, वह बाहर खाने की जिद्द नहीं करेगा। अगर हो सके तो उसे अपने साथ किचन में ले जाएं और उसके साथ बातें करते-करते उसकी मनपसंद डिश बनाएं। इस दौरान उसे भी कुकिंग में शामिल कर लें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संस्कार की जड़ें बचपन से जुड़ीं</h2>
<p style="text-align:justify;">बच्चे जो भी व्यवहार करते हैं उसकी जड़ें बचपन से जुड़ी होती हैं। बच्चों का दिमाग वो कोरी स्लेट होता है जिस पर हम जो चाहें लिख सकते हैं। यह प्रक्रिया जन्म से लेकर चार-छह वर्षों तक चलती रहती है। इस उम्र में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आपको उन्हें संस्कारी बनाना हो तो आपको अपने फर्ज से नहीं चूकना चाहिए। बच्चों को संस्कार उपदेश देकर नहीं सिखाए जा सकते। बच्चे वही सीखते हैं, जो माता-पिता को करते देखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें स्वयं के व्यवहार में वे बातें अपनानी होंगी जो बच्चों के हित में हों। जैसे आपके गुण होंगे, बच्चे वैसा ही सीखेंगे। जो आप करते होंगे, वैसा ही वे करेंगे। वे सोचेंगे कि हम अपने अभिभावकों से भी बढ़कर करें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर बच्चा यूनीक होता है</h2>
<p style="text-align:justify;">हर किसी का पेरेंटिंग स्टाइल अलग होता है। इसे एक निश्चित फॉमूर्ले में बांध कर नहीं रखा जा सकता। सभी बच्चे भी एक समान नहीं होते हैं। उनकी सारी आदतें एक-दूसरे से अलग होती हैं। कोई ज्यादा शरारती होता है, तो कोई थोड़ा कम।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में उन्हें अपने माहौल में ढालने के लिए थोड़ी मेहनत तो आपको करनी ही पड़ेगी। सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं के साथ है, जो वर्किंग हैं। प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ उन्हें अपने बच्चों के लिए भी समय निकालना जरूरी होता है। आप क्वालिटी टाइम देकर उसे सही मार्गदर्शन दे सकती हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बातचीत से जीतें विश्वास</h2>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के नजदीक रहने और उनके मन की बात को जानने का सबसे सरल तरीका है उनसे बातचीत करना। आप बच्चों से बात करके उनका विश्वास जीत सकती हैं। बातचीत के जरिए ही आप बच्चे से सबकुछ शेयर कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह वे अपने मन की बात आपसे कहने से नहीं डरेंगे। वे अपनी हर बात आपसे शेयर करेंगे। बच्चों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण भी न रखें। उन्हें भी थोड़ा स्पेस दें और उन्हें कभी-कभी अपने मन की करने दें।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार माता-पिता बच्चों के साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतते हैं। ऐसे में बच्चे डर के चलते झूठ का सहारा लेने लगते हैं। इसलिए ऐसा माहौल कभी न बनाएं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पढ़ाई को हौव्वा न बनाएं</h2>
<p style="text-align:justify;">अकसर देखने में आता है कि पेरेंट्स बच्चों पर पढ़ाई को लेकर बहुत दबाव बनाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हर दिन थोड़ा-थोड़ा अच्छी तरह से पढ़ाएं और समय-समय पर खुद रिवीजन करवाएं, तो बच्चों पर दबाव नहीं बनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस सब्जैक्ट में वह कमजोर है वहां आप उसके साथ एक्सट्रा मेहनत करें। अगर ट्यूटर की जरूरत है, तो उसका भी अरेंजमेंट करें। मगर सब कुछ उसी के ऊपर न छोड़ें। खुद भी वीकेंड में उसकी पढ़ाई में मदद करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/make-children-culturable/article-2178</link>
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 02:49:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभिभावकों ने स्कूल में जड़ा ताला</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल बिल्डिंग में भरा है बारिश का पानी फरीदाबाद (सच कहूँ न्यूूज)। बेटी पढाओ की दुआई देने वाली सरकार में बेटी पढें तो पढें कैसे-ये सबाल फरीदाबाद के संत नगर में खुले हुए सरकारी स्कूल की बेटिया सरकार से कर रही हैं, स्कूल परिसर और कक्षाओं में बरसात का पानी जमा हो रखा है, छुट्टियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/parents-locked-the-school/article-2084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/school-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">स्कूल बिल्डिंग में भरा है बारिश का पानी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद (सच कहूँ न्यूूज)।</strong> बेटी पढाओ की दुआई देने वाली सरकार में बेटी पढें तो पढें कैसे-ये सबाल फरीदाबाद के संत नगर में खुले हुए सरकारी स्कूल की बेटिया सरकार से कर रही हैं, स्कूल परिसर और कक्षाओं में बरसात का पानी जमा हो रखा है, छुट्टियों के बाद स्कूल खुले हुए 4 दिन बीत गये हैं मगर बच्चों की एक भी दिन क्लास नहीं लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्यापक और बच्चे रोजना स्कूल आते हैं मगर बरसात का पानी भरा होने के कारण वापिस लौट जाते हैं। जिससे गुस्साये छात्रों के परिजनों ने स्कूल के गेट से ताला लगा दिया है और मांग की है कि जब तक स्कूल से बरसात का पानी निकाल नहीं दिया जाता और जर्जर इमारत को ठीक नहीं करवा दिया जाता तब तक वो स्कूल का ताला नहीं खोलेंगे।</p>
<h2>चार दिनों से नहीं हो रही पढ़ाई</h2>
<p>संत नगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला यानि कि सरकारी स्कूल में 4 दिन पहले आई बरसात के चलते पानी भर गया जो कि स्कूल परिसर में ही नहीं क्लास रूम और प्रिंसीपल दफ्तर में भी जमा हो गया। बच्चें पढ़ने के लिए आते हैं मगर पानी भरा हुआ देख वापिस लौट जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्राओं का कहना है कि स्कूल की इमारत पूरी तरह से जर्जर हो गई है जिससे कभी भी कोई बडा हादसा छात्रों के साथ घटित हो सकता है। बच्चों के अभिभावकों की माने तो कई दशकों से इस स्कूल में बरसाती पानी भरने की समस्या बनी हुई है जिसकी शिकायत केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर एवं केबिनेट मंत्री को भी दे चुके हैं मगर कोई हल नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/parents-locked-the-school/article-2084</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 01:14:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अनाथ बच्चों को भी मिलेगा मां-बाप का प्यार</title>
                                    <description><![CDATA[गोद लेने वाले परिवारों को मिलेगी प्रति माह 2 हजार रुपए आर्थिक सहायता नई योजना के तहत गोद ले सकेंगे दूर के रिश्तेदार व पड़ोसी चंडीगढ़(अनिल कक्कड़)। प्रदेश के अनाथ बच्चों को पारिवारिक माहौल देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक नई योजना के तहत अनाथ बच्चे अब परिवार का प्यार और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">गोद लेने वाले परिवारों को मिलेगी प्रति माह 2 हजार रुपए आर्थिक सहायता</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नई योजना के तहत गोद ले सकेंगे दूर के रिश्तेदार व पड़ोसी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अनिल कक्कड़)।</strong> प्रदेश के अनाथ बच्चों को पारिवारिक माहौल देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक नई योजना के तहत अनाथ बच्चे अब परिवार का प्यार और माहौल दोनों प्राप्त कर सकेंगे। इन बच्चों को उनके रिश्तेदार, गाँव/ शहर में रहने वाले लोग भी गोद ले सकेंगे। ऐसा करने वाले परिवार को सरकार दो हजार रुपए प्रतिमाह आर्थिक सहायता के तौर पर देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाल सुधार गृह में लगेंगी 10वीं-12वीं की क्लास</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों को भी सरकार दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षा दिलवाने जा रही है। इस बाबत महापात्रा ने कहा कि बाल सुधार गृह में रह रहे नाबालिगों के सुधार के लिए उन्हें बोर्ड की परीक्षाएं करवाने का फैसला किया है। नेशनल ओपन स्कूल और हरियाणा ओपन स्कूल से इन बच्चों को दसवीं ओर बाहरवीं कक्षा की परीक्षा दिलवाई जाएगी और साथ ही कोई वोकेशनल ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महापात्रा के अनुसार ऐसा इसलिए ताकि जब ये नाबालिग बाल सुधार गृह से जब बाहर जाएं तो इज्जत भरी जिंदगी के लिए रोजगार एवं कैरियर की दिशा में अपने कदम बढ़ा सकें। 10वीं -12वीं की शिक्षा व परीक्षा पर सारा खर्च सरकार उठाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 09:49:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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