<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/chairman/tag-210" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>chairman - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/210/rss</link>
                <description>chairman RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लिखित परीक्षा में फेल तो दोबारा देनी होगी लिखित व प्रयोगिक परीक्षा : चेयरमैन</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारी देते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिहं ने बताया कि ऐसे परीक्षार्थी, जो किसी भी प्रायोगिक विषय/विषयों की लिखित परीक्षा में फेल तथा प्रायोगिक परीक्षा में पास हैं, उनको उस विषय के लिखित व प्रायोगिक दोनों भागों में परीक्षा देना अनिवार्य होगा
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/failing-written-test-will-again-lead-to-written-and-practical-examination-chairman/article-13009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/haryana-board-of-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा मार्च-2020 में हरियाणा मुक्त विद्यालय की सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी की वार्षिक फ्रैश/रि-अपीयर/सी०टी०पी०/अतिरिक्त विषय/आंशिक अंक सुधार/पूर्ण विषय अंक सुधार की परीक्षाओं का संचालन करवाया जाना है। जानकारी देते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिहं ने बताया कि ऐसे परीक्षार्थी, जो किसी भी प्रायोगिक विषय/विषयों की लिखित परीक्षा में फेल तथा प्रायोगिक परीक्षा में पास हैं, उनको उस विषय के लिखित व प्रायोगिक दोनों भागों में परीक्षा देना अनिवार्य होगा तथा जो परीक्षार्थी प्रायोगिक परीक्षा के लिखित भाग में पास तथा प्रायोगिक भाग में फेल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें केवल प्रायोगिक भाग की परीक्षा देनी होगी। उन्होंने आगे बताया कि सीनियर सैकेण्डरी के भौतिकी, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान प्रायोगिक विषयों की मार्च-2020 में लिखित परीक्षा 70 अंकों तथा प्रायोगिक परीक्षा 30 अंकों की होगी।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/failing-written-test-will-again-lead-to-written-and-practical-examination-chairman/article-13009</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/failing-written-test-will-again-lead-to-written-and-practical-examination-chairman/article-13009</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Feb 2020 20:02:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/haryana-board-of-education.jpg"                         length="30893"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नप कैथल के चेयरमैनी का जिन्न फिर निकला बाहर&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[चेयरमैन बनाने की लेकर भाजपा, कांग्रेस व पार्षदों में सरगर्मियां तेज, बैठकों का दौर शुरू सच कहूँ/प्रदीप दलाल। कैथल। कैथल की नगर परिषद् की कुर्सी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल चुका है। पिछले लगभग 1 साल से कैथल शहर की छोटी सरकार न होने का खामियाजा विकास कार्य न होने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-enthusiasm-in-bjp-congress-and-councilors-for-making-chairman/article-3719"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/09_06_2015-cm_chair.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">चेयरमैन बनाने की लेकर भाजपा, कांग्रेस व पार्षदों में सरगर्मियां तेज, बैठकों का दौर शुरू</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/प्रदीप दलाल। </strong>कैथल। कैथल की नगर परिषद् की कुर्सी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल चुका है। पिछले लगभग 1 साल से कैथल शहर की छोटी सरकार न होने का खामियाजा विकास कार्य न होने के चलते लगातार भुगतना पड़ रहा है,वहीं प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी कांग्रेस समर्थित पार्षद कार्यकारी चेयरमैन होना भी भाजपा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा के मंत्रियों, विधायकों व पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर चेयरमैनी जल्द ही भाजपा के हवाले होने का दावा न किया हो, लेकिन सभी दावे हवाहवाई साबित हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसको लेकर भाजपा समर्थित पार्षदों में भी बैचेनी बढ़ने लगी थी, जिसको लेकर कुछेक पार्षदों ने प्रशासन का दरवाजा कई बार खटखटाया, लेकिन चेयरमैनी चुनाव की तिथि के नाम पर प्रशासन द्वारा भी सिर्फ कोरे आश्वासन देकर पार्षदों को टरकाने के अलावा कुछ नहीं किया गया है। जिस पर कुछ पार्षदों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर अदालत द्वारा मामले में दखल देने पर अब एक बार फिर जिला प्रशासन द्वारा छोटी सरकार के चुनाव के लिए 29 मई का समय निर्धारित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसको लेकर लंबे समय से चल रही रस्साकस्सी तेज होती नजर आ रही है। शहर की सरकार भाजपा व कांग्रेस के बीच नाक की लड़ाई बन चुकी है। गत वर्ष अगस्त माह में भाजपा समर्थित शहर की सरकार को कांग्रेस विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला समर्थित पार्षदों ने गिरा दिया था। तब मुकाबला भाजपा वर्सिज सुरजेवाला हो गया था। चुनाव की तारीख आने के साथ ही पार्षदों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक अनार सौ बीमार</h3>
<p style="text-align:justify;">चेयरमैनी की चाह के कारण ही अब तक एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी भाजपा चेयरमैनी पर काबिज नहीं हो पाई है, जिसका प्रमुख कारण भाजपा समर्थित हर पार्षद चेयरमैनी कुर्सी का दावेदार होना है। आपसी रजामंदी न होने के कारण ही भाजपा की बैठकों व तमाम प्रयासों के बाद भी भाजपा चेयरमैनी पर सिर्फ तोल ठोंकने के अलावा कुछ खास नहीं कर पाई है। अब देखना यह होगा कि 29 मई को भाजपा चेयरमैनी पाने में कामयाब होती है या फिर चेयरमैनी का सपना देख रहे पार्षदों की उम्मीदों पर फिर पानी फिरता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन 21 पार्षदों ने दिया अविश्वास प्रस्ताव</h3>
<p style="text-align:justify;">अगस्त माह में उपायुक्त के समक्ष निवर्तमान चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ उपायुक्त के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड नंबर 1 से किरन, वार्ड नंबर 2 से विनोद कुमार, वार्ड नंबर 3 से महिंद्रों देवी, वार्ड 4 से निशा रानी, वार्ड 5 से संजय कुमार, वार्ड 6 से कुलदीप कुमार, वार्ड 8 से राकेश सरदाना, वार्ड 9 से बबीता मित्तल, वार्ड 10 से पूजा अग्रवाल, वार्ड 11 से हरजिंद्र सिंह, वार्ड 12 से शशी किरन, वार्ड 15 से सुनीता रानी, वार्ड 16 से सीमा कश्यप, वार्ड 17 से वेदप्रकाश, वार्ड 18 से रेखा सिंगला, वार्ड 21 से नरेश मित्तल, वार्ड 24 से महेंद्र थरेजा, वार्ड 25 से पवन थरेजा, वार्ड 26 से संतोष देवी, वार्ड 28 से मोहन लाल शर्मा, वार्ड 29 वीरेंद्र कुमार थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक मत से गिरी थी कैथल की छोटी सरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">शायद भाजपा की नियती में ऐसा ही कुछ लिखा है, जहां हार हो वहां अंतर एक मत का ही रहता है। जहां पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी एक मत से गिर गई थी, वहीं अगस्त माह में भी ऐसा ही नजारा कैथल नगर परिषद चेयरमैनी को लेकर देखने को मिला जहां चेयरमैन यशपाल प्रजापति एक मत के अंतर से अपनी कुर्सी बचाने में नाकामयाब साबित रहे। चेयरमैन को अपनी कुर्सी बचाने रखने के लिए कुल 31 पार्षदों में से 11 पार्षदों की अपने समर्थन में जरूरत थी, परंतु उनके समर्थन में 10 ही नजर आए और बाकी बचे 21 ने चेयरमैन के खिलाफ अपना अविश्वास मत पारित किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अपने कार्यकाल में जनता की नि:स्वार्थ सेवा की: डॉ. थरेजा</h3>
<p style="text-align:justify;">नगर परिषद् के कार्यकारी चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने कहा कि नगर परिषद में हर अधिकारी, कर्मचारी व शहरवासी ने हमेशा शहर के विकास में उनका पूरा सहयोग व साथ दिया है, जिसके लिए सबका तह दिल से आभारी हूं। उन्होंने कहा कि जितना समय मुझे शहरवासियों की सेवा करने का मिला है, जिस पर मेरा खरा उतरा हूं। अब शहर को स्थाई चेयरमैन मिल जाऐगा तो निसंदेह शहर के विकास कार्यों में तेजी आऐगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-enthusiasm-in-bjp-congress-and-councilors-for-making-chairman/article-3719</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-enthusiasm-in-bjp-congress-and-councilors-for-making-chairman/article-3719</guid>
                <pubDate>Tue, 22 May 2018 08:21:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-05/09_06_2015-cm_chair.jpg"                         length="103067"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस में है दम कि वह राहुल को अध्यक्ष बनाकर भी चल लेगी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस की सर्वोच्चय नीति निर्धारक समिति ने मंगलवार को एक सामूहिक प्रस्ताव पार्टी की सर्वेसर्वा सोनिया गांधी को दिया है कि राहुल गांधी को अब पार्टी की कमान संभालनी चाहिए। अपने 15 वर्ष के संसदीय जीवन में यूं भी राहुल गांधी काफी कुछ सीख चुके हैं। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेताओं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/rahul-become-chairman-and-congress-having-the-power-to-run/article-283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/rahulgandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कांग्रेस की सर्वोच्चय नीति निर्धारक समिति ने मंगलवार को एक सामूहिक प्रस्ताव पार्टी की सर्वेसर्वा सोनिया गांधी को दिया है कि राहुल गांधी को अब पार्टी की कमान संभालनी चाहिए। अपने 15 वर्ष के संसदीय जीवन में यूं भी राहुल गांधी काफी कुछ सीख चुके हैं। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेताओं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वरिष्ठ नेता एके एंटोनी, रणदीप सिंह सुरजेवाला प्रमुख तौर पर शामिल हैं, ने यह प्रस्ताव भेजा है। अभी जो कांग्रेस पार्टी है, यह अपने-आपको देश का सबसे पुराना संगठन कहती है और अपने सभी प्रचार अभियानों में यह बकायदा लिखा जाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी, लेकिन यह पार्टी कांग्रेस (आई.) यानि कांग्रेस इंदिरा का विस्तार मात्र है, जो 1967 में अस्तित्व में आई है। जिस पर एकमात्र हक स्वयं कांग्रेसियों द्वारा इंदिरा गांधी के पारिवारिक वारिसों का ही माना जाता है। तभी 1984 में कांग्रेस के पास बेहद अनुभवी नेता होने के बावजूद पार्टी नेताओं ने पीसी एलेक्जेण्डर द्वारा सुझाए या यूं कहे लाईन में धक्के से खड़े किए गए, राजनीति के अनिच्छुक इंदिरा गांधी के ज्येष्ठ एवं एकमात्र जीवित पुत्र राजीव गांधी को नेता चुना व प्रधानमंत्री पद सौंपा। 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो गई, तब उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने पार्टी से दूरी बना ली, जिसे पीवी नरसिम्हा राव ने संभाला। तत्पश्चात सीताराम केसरी ने पार्टी की बागडोर संभाली। लेकिन कांग्रेसी, जिन्हें सोनिया गांधी की पार्टी से दूरी तड़पा रही थी, वह सोनिया गांधी के 1998 में अध्यक्ष पद संभालने पर ही अपने आपको सच्चा कांग्रेसी व सुरक्षित महसूस करने लगे। अब कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, जिनकी तबियत काफी नासाज रहती है और वह पार्टी की अहम् गतिविधियों में सक्रिय भाग भी नहीं ले पा रहीं, तब उनके पुत्र राहुल गांधी को पार्टी अपना अगला अध्यक्ष ‘बैठा’ लेना चाहती है। भले ही राहुल गांधी पर यह आरोप लगते आए हैं कि वह राजनीति में अनिच्छापूर्ण घूम रहे हैं। एक खानदानी राजनीतिक परिवार से होते हुए भी वह सामान्य सी राजनीतिक घटनाओं को भी संजीदगी से नहीं ले रहे। बहुत बार राहुल गांधी की तुलना उनकी बहन प्रियंका गांधी से भी होती है, जिन्हें हर चुनाव के वक्त कांग्रेस का एक खेमा सक्रिय होने के लिए काफी जोर अजमाइश भी करता है। लेकिन शायद यह गांधी परिवार की आंतरिक इच्छा है कि वह राहुल गांधी को ही इस देश का व पार्टी का सर्वोच्चय नेता बना हुआ देखना चाहते हैं। राहुल गांधी भले ही भारतीय राजनीति में या कांग्रेस में एक अनिच्छुक चेहरा हों। बावजूद इसके उनके कई प्रयोग पार्टी के लिए काफी अच्छे रहे हैं, जैसे कि उन्होंने निचले स्तर पर पार्टी में युवाओं व पंक्ति दो के नेताओं को बेहद सक्रिय कर दिया है। जो पार्टी में अपना मुकाम बनाने के लिए बहुत मेहनत करने लगे हैं। फिर राहुल गांधी ने अपने आसपास के नेताओं की टीम में या तो आला दर्जे के प्रशासक, बुद्धिजीवी जोड़ लिए हैं या फिर वह बेहद सक्रिय युवा हैं, जो पार्टी को किसी भी मोर्चे पर पिछड़ने नहीं देना चाहते। ऐसे नेताओं के लिए अध्यक्ष अब ‘ब्रिटेन का शाही ताज’ मात्र भी रहे, तो भी चलेगा। कांग्रेस का वर्तमान काल ऐसा हो चुका है कि भले ही उसका अध्यक्ष कम अनुभवी हो, राजनीति में अनिच्छुक हो या पार्टी एवं परिवार के पास राहुल से भी बेहतर नेता हों, लेकिन राजीव गांधी, सोनिया गांधी की परिपाटी को ढोने में कांग्रेस पार्टी अभी भी दमखम रखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/rahul-become-chairman-and-congress-having-the-power-to-run/article-283</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/rahul-become-chairman-and-congress-having-the-power-to-run/article-283</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 18:34:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2016-11/rahulgandhi.jpg"                         length="20156"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        