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                <title>संतों का काम इन्सान को भगवान से जोड़ना</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से पावन वचनों की अमृतमयी वर्षा करते हुए खुशहाल गृहस्थ जीवन जीने का फलसफा समझाया। आपजी ने आम जीवन में गृह क्लेश की वजह बनने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/saints-work-is-to-connect-man-with-god-revered-guru-ji/article-43066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/saint-dr.-msg-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से पावन वचनों की अमृतमयी वर्षा करते हुए खुशहाल गृहस्थ जीवन जीने का फलसफा समझाया। आपजी ने आम जीवन में गृह क्लेश की वजह बनने वाले कारणों पर भी प्रकाश डाला और इनसे निजात का तरीका भी बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक की साजी नवाजी प्यारी साध-संगत जीओ बेपरवाह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज, बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज) के रहमोकरम, परोपकार असंख्य हैं जो गिनाए नहीं जा सकते। जो भाग्यहीन थे वो भाग्यशाली बने और भाग्यशाली अति उत्तम भाग्यशाली बन गए। तो संतों का काम समाज को नई दिशा देना होता है। किसी को बुरा कहना, किसी को गलत कहना संतों की फितरत में नहीं होता। संतों का काम इन्सान को इन्सान से जोड़ना और इन्सान को भगवान से जोड़ना होता है। पूरी सृष्टि जो परमपिता परमात्मा, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब ने बनाई है, संतों का काम उस सृष्टि के भले के लिए जरूरी कदम उठाना, सब जीवों को समझाना और परमानंद पहुंचाने का कार्य होता है। शाह सतनाम जी, शाह मस्तान जी दाता रहबर ने ये रीत चलाई। तो आपको समझाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ब्रह्मचर्य की चर्चा होती रही। उसके बाद आता है गृहस्थ आश्रम। 25 साल तक ये होता था कि ब्रह्मचर्य का पालन करना है। उस समय में गुरुकुल जंगलात, पवित्र वातावरण में होते थे। जहां पढ़ाया जाता था। धर्म सिखाया जाता था। इन्सान बनाया जाता था और फिर वहीं से ही जब पता होता था कि अब शादी के लायक है, उसके अनुकूल हो गया है, पढ़ाई पूरी हो गई तो वहां से आने के बाद उसने गृहस्थ ज़िंदगी में प्रवेश करना है, गृहस्थ आश्रम शुरू होने वाला है। तो हमारे पवित्र वेदों में हमने जो अनुभव किया, उसके आधार पर हम कहना चाहते हैं कि हर चीज सिखाई जाती थी। घर-गृहस्थ में कैसे तालमेल बैठाना है, कब स्वस्थ बच्चा होगा, कैसे परिवार के लिए समय देना है, कैसे तालमेल बैठाना है, ये छोटी बात नहीं होती।</p>
<h2 style="text-align:center;"><span style="color:#ff0000;"><strong>‘पढ़ाई के बाद मिलती थी गृहस्थ जीवन की शिक्षा’</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आप बचपन से जिस घर में रहे हो, अब तो थोड़ा बदलाव आ गया, लेकिन पहले ये होता था कि घर से बाहर जाते थे तो उस कमरे में कईयों को नींद कम आती थी, कि भई नया कमरा है, नई जगह पर आए हैं तो नैच्युरली कुछ लोग ऐसे सेंसेटिव होते हैं, जिनको नींद कम आती है। लेकिन जो बच्ची बचपन से अपने घर-परिवार में रही, माँ-बाप के साथ रही, बहन-भाई के साथ रही, छोटी से छोटी जिद भी उसके माँ-बाप, अगर अच्छे नेक हैं, बेटे-बेटी को बराबर मानते हैं, तो उसकी जायज जिद पूरी करते रहे हैं। और एकदम परिवर्तन आता था कि वो दूसरे घर में चली जाती थी। रहन-सहन पराया शरीर के अनुसार, परिवार, भाई-बहन वो भी पराए, चाहे वो ननद है, चाहे वो देवर है, जेठ है, जो भी हैं, सब नए। सास-ससुर भी नए माँ-बाप हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह से वो बच्ची इतना कुछ त्याग कर जब उस घर में आती तो कैसे उसने एडजस्ट करना है और लड़के ने कैसे उसका साथ देना है, ये गृहस्थ आश्रम में सिखाया जाता। उसकी शिक्षा ब्रह्मचर्य के लास्ट में दी जाती। हर चीज, बारीकी से बताई जाती। तो दो-तीन महीने में शिक्षा के द्वारा उसको गृहस्थ ज़िंदगी अपनाने के लिए तैयार कर दिया जाता। क्योंकि जो ब्रह्मचर्य में रहा होता है, उसे गृहस्थ ज़िंदगी से कुछ मतलब नहीं होता था। और जो 25 साल ब्रह्मचर्य में रह ले तो अपने आप में बेमिसाल हो जाता है। बॉडी इस तरह से रिएक्ट करती है कि जैसे एक मजबूती आ गई, एक अलग अनुभव फील होता है। उस वक्त वो गृहस्थ ज़िंदगी का बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं होता, इसलिए उसको पहले तैयार किया जाता। क्योंकि 25 साल के दरमियान ही वो नौकरी में भी चला जाता। मंत्री, मुनीम जो भी है, उसकी भी ट्रेनिंग हो चुकी होती, लगभग-लगभग अप्वाइंटमेंट हो चुकी होती। जिसने सेना में जाना हो सेना में, घुड़सवार घोड़ों में चले जाते, तीरंदाज और तलवारबाज आदि को अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया जाता। लेकिन उस वक्त पढ़ रहे होते थे तो लास्ट की शिक्षा गृहस्थ आश्रम की होती।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>पति इन बातों का रखे ध्यान</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि धर्मानुसार हमने जो अनुभव किया वो आपको बताने जा रहे हैं। घर-गृहस्थ में रहते हुए बेटों का ये फर्ज है कि जब वो बच्ची घर-परिवार छोड़कर आती है तो सबसे पहला सहारा उसका, उसके पति ने बनना होता है। क्योंकि वो आपके लिए, आपके साथ जीवन व्यतीत करने के लिए आई है। अगर आप भी सहारा नहीं देंगे तो कौन देगा सहारा। इसलिए उस बच्ची को, जो आपकी पत्नी के रूप में आई है, आपने एडजस्ट करना है और करवाना है। आपने उसे बताना है कि मेरी माँ का स्वभाव कैसा है? पिता का स्वभाव कैसा है? बहन-भाइयों का स्वभाव कैसा है? या यार, दोस्त, मित्र जो भी आते हैं वो कैसा है? ये पहला फर्ज होता है पति का अपनी पत्नी को शिक्षा देने का, और बेहद जरूरी भी है। उसको क्या पता आपकी माँ को क्या पसंद है? उसको क्या पता आपकी माँ का स्वभाव कैसा है? तुनकमिजाज है या नॉर्मल है या शान्त है या सामाजिक, यानी कि हर किसी को अपनाने को तैयार है, स्यानी है, समझदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक का मतलब ही ये होता है कि जो समाज में विचरते हैं और अपने वचनों पर रहते हुए, अपने किरदार को, अपने कैरेक्टर को ऊँचा रखते हुए वो एक जगह बना लेते हैं, तो वो किस किस्म में आती है। ये पति ही बता सकता है जी। दूसरे तो दूर हैं, तो गृहस्थ जिंदगी की शुरूआत यहां से होती है। जो भी नौजवान बच्चे, चाहे आज कितनी भी फूं, फां करके कुछ भी हो रहा हो, अपने आपको आप हाइटेक मानते हों या जो भी आप मानते हैं, लेकिन हमारी बात लिख लो, इस बात को फॉलो करोगे तो घर में झगड़े नहीं होंगे। अदरवाइज वो और माहौल से आई है। उसने अपने माँ-बाप को देखा है, उनके लाड-प्यार या डांट को देखा है, पर आपके परिवार का तो नहीं पता उसको।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अब लड़की को ये होना चाहिए कि वो कोशिश करे अपनी तरफ से कि कुछ समय अपने उन विचारों को, अपनी उन भावनाओं को थोड़ा छुपाकर घर के बारे में जाने। मतलब कौन किस आदत से जुड़ा हुआ है? कौन कैसा है? अब पति ने तो बताया दिया, विचरना तो उसने है। अब दोनों नौकरीपेशा हों तो भी जरूरी है। चाहे नौकरी क्यों ना करते हों, आपके पास रह रही है तो उसको बताना जरूरी है। फिर घर-गृहस्थ की गाड़ी चलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>गुस्सा बर्बादी लेकर आता है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज के दौर में देखें तो एक समझौता जरूरी है। पतिदेव को गुस्सा आया हुआ है तो उस समय पत्नी को शांतमय तरीके से ट्रीट करना चाहिए। शरीर सबके एक जैसे होते हैं, तत्व सभी के अंदर रजो, तमो, सतो। किसी को भी किसी भी क्षण ऐसा हो सकता है। किसी बिजनेस व्यापार की वजह से, बाल-बच्चे की टैंशन की वजह से, घर-परिवार की टैंशन की वजह से, इत्यादि-इत्यादि। तो उस समय उसे शांत रहकर, बल्कि साथ देना होता है, क्योंकि वो एक मरीज बन जाता है। कभी आप गुस्से में आए हो तो शीशे के सामने खड़े होकर देखना।</p>
<p style="text-align:justify;">नथूने फूल जाते हैं, आँखें फैल जाती हैं और आपके होंठ कांपते हैं, हाथ कांपते हैं, शरीर कांपता है। पर कईयों का ये नहीं होता, लेकिन नाक का फैला होना और आँखों का फैलना पक्का होता है। तब नहीं पता चलता कि आप क्या बोले जा रहे हैं, क्योंकि ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ जाता है, ब्लड धमनियों में तेजी से सर्कल करता है, जितनी भी रगें हैं उनमें चलता है। तो वो गुस्से के जो क्षण होते हैं उसमें बर्बादी होती है। पर वो बेटी बहुत महान होती है, जो उस बर्बादी को रोक ले। पता ही ना चलने दे घर में कि हमारी आज घर में लड़ाई भी हो गई। शांतमय तरीके से उसको शांत करे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;"><strong>शांति से निकालें समस्या का हल</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि पति ही नहीं पत्नी को भी गुस्सा आ सकता है। तो उसके कारण हो सकते हैं। घर-परिवार में, अपने परिवार की, कोई-न-कोई टैंशन, कोई-न-कोई बात चुभ गई। क्योंकि बहनों में ज्यादा होता है कि बीच में निकालती रहती हैं बातें। आजकल तो भाई भी कम नहीं हैं नैक-टू-नैक मुकाबला है। लेकिन टोंट कसने में बहनें अभी नंबर वन पर हैं, हमारी जो बेटियां हैं, हम किसी का बुरा नहीं कहते, हमने जो महसूस किया है, जो देखा है वो बताया। बेटे भी कम नहीं हैं पर वो ज्यादा जानती हैं। बात किसी को कह रही होती है, सुना किसी को रही होती हैं। मतलब इधर बात हो रही होती है, जला किसी और को रही होती हैं ऊँची-ऊँची बोलकर। ताकि उसको टारगेट कर सके, बिना कुछ कहे। तो पता नहीं कौन सी बात चुभी और उसको गुस्सा आया हुआ है। अब पति देव की बारी है ठंडा रहने की।</p>
<p style="text-align:justify;">शांतमय तरीके से उस गुस्से को शांत करवाएं। आराम से बैठकर अलग से पूछें कि प्रोब्लम क्या है? समस्या क्या है? दूसरी बात आपको तालमेल रखना है, माँ-बाप को भी नहीं छोड़ सकते और पत्नी को तो लेकर ही आप आए हैं उसको तो छोड़ोगे कैसे आप, वो तो आई ही आपके सहारे है। तो आप पत्नी की अलग से बात सुनें। अगर वो आपकी माँ की शिकायत करती है, फादर की या किसी की भी, सुन लीजिए, भड़किये मत, उसको कहो कि मैं जरूर हल करूंगा, हर हाल में हल करूंगा। अब आप वाकई उस समस्या का हल करें। जाएं अपनी माता को या पापा को या बहन-भाई के पास, जिसके साथ भी उसकी वो बात है। उसको अलग से मिलें, सामने नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब उससे पूछें कि मामला क्या है? फिर विवेक से काम लें, कि आखिर गलतफहमी किस बात से पनपी है। और फिर दोनों को समझाएं और मिलाएं कि ये तो बात कुछ भी नहीं थी, कोई चक्कर ही नहीं था, ताकि उस आई हुई बच्ची को, आपकी पत्नी को आपके ऊपर दृढ़ यकीन आ जाए, एक सहारा मिल जाए कि हाँ, मैं अपना हर दु:ख-सुख इनके सामने रो सकती हूँ और उसका सोल्यूशन ये मुझे दे सकता है और इसी तरह पत्नी को भी चाहिए कि वो अपने पति का सहारा बनकर उसके दु:ख-सुख में सहायता करे। यानी दोनों का बराबर का हक है। हमारी निगाह में कोई ऊपर नीचे नहीं है। तो ये गृहस्थ ज़िंदगी की शुरुआत है और फिर आगे जैसे-जैसे आप बढ़ते जाएंगे बहुत से मसले आएंगे। क्योंकि शुरुआत में कुछ और बात होती है, आदमी की नेचर है ये। चाहे वो बेटी हो या बेटा, सभी की नेचर है ये।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आपसी समझ से काम लें</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि उदाहरण के तौर पर आपके घर के बाहर फूल लगे हुए हैं, पेड़ लगा हुआ है। पर आप अपने काम धंधे में बिजी हैं, व्यस्त हैं तो आप जैसे ही घर में आते-जाते हैं, पहले दिन लगाए तो खुशी आएगी, दूसरे दिन खुशबू आई। पाँच-सात दिन खुशबू आई और देखते रहे कि यार बड़े सुंदर लगते हैं। दो महीने बात कई बार आपको पता ही नहीं होता कि मेरे घर के आगे फूल भी लगे हुए हैं। ये नेचर है। ऐसे ही जब नए रिश्ते बनते हैं तो बड़े उत्साहित होते हैं बच्चे आपस में। बड़ा, मतलब यूं लगता है कि उस जैसा दुनिया में कोई सुखी ही नहीं है। पर धीरे-धीरे दो, चार, छह महीने बाद वो नॉर्मल हो जाता है रिश्ता। एक-दूसरे की आदतों का पता चल जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के दौर की बात करें, आप दोस्त हैं, लड़का-लड़की हैं या दोस्त-दोस्त, तो उनमें जब दोस्ती होती है तब हर चीज शेयर नहीं करते आप। लेकिन जब शादी हो जाती है, शेयर करो या ना करो, आपकी हर चीज सामने आएगी ही आएगी। छुपा सकते हो आप जब कुछ देर के लिए बैठते हो, बातें करते हो, ये आसान है। दो, चार, पाँच-छह घंटे आसान है। पर दिन-रात वहीं रहना है और उसी के साथ रहना होता है लगभग-लगभग तो आप अपनी फितरत, अपनी आदतें नहीं छुपा सकते। वो दौर, वो समय अंडरस्टैंडिंग का होता है। आपसी समझ का होता है। किसी तीसरे को इन्वॉल्व ना करो अपने बीच में।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>पर्सनल बात बाहर शेयर न करें</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कभी अपने कमरे की बात बाहर शेयर ना करो तो अच्छा है। वरना कुछ भी गलत अनसर फायदा उठा सकते हैं। बेवकूफ बना सकते हैं। इसलिए ये पुराने समय से कहावत है हमारे पवित्र वेदों की, कि जो घर का भेद आगे बताता है तो घर का भेदी लंका ढाय। जो अपने कमरे का भेद आगे बताता है तो वो अपनी गृहस्थी खत्म करने के लिए वो कदम उठा रहा होता है। क्योंकि वो आपकी अर्धांगिनी है, कहने का मतलब आप दोनों एक हैं। अब दो के बीच में कोई तीसरा आएगा, चाहे कोई भी क्यों ना हो, तो गड़बड़ होती है ना।</p>
<p style="text-align:justify;">तो आपकी जो पर्सनल बातें हैं, उसका मतलब वो आपकी ही पर्सनल बातें हैं, उसमें पति या पत्नी के माता-पिता को भी इन्वॉल्व नहीं होना चाहिए। कई पुरानी कहावत धर्मानुसार, पवित्र वेद अनुसार कि खून का रिश्ता और पति-पत्नी के रिश्ते में ज्यादा नहीं पड़ना चाहिए, किसी को ज्यादा कहना नहीं चाहिए। क्योंकि वो ऐसी रबड़ होती है, जो स्ट्रैच तो हो जाती है, लेकिन खिंच कर फिर वापिस आ जाती है। यानि आपको लगता है कि उनमें झगड़ा हो गया, लेकिन वो तो फिर से एक हो जाएंगे, पर जो आपने बोला है, वो उनके दिलो-दिमाग में छपा रहेगा और याद रहेगा कि उसने हमें ये बोला था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>धर्मों में सब कुछ बताया है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि माँ-बाप को जब बच्चे बड़े हो गए, शादियां हो गर्इं आपकी, तो फिर आगे बच्चे ने भी आना है। तो धर्मों और आदिकाल से चले आ रहे हमारे पवित्र वेदों के अनुसार हमने अनुभव किया तो उसमें बिल्कुल स्वस्थ बच्चा कब होगा, उसकी टाइमिंग तक बताई हुई होती है। इससे ज्यादा धर्म क्या सिखा सकता है गृहस्थ ज़िंदगी के बारे में। बिटिया को भी पता होता है और बेटे को भी, जो गुरुकुल से निकलता है, कि हाँ, ये टाइमिंग होती है कि जब स्वस्थ, तंदुरुस्त बच्चा आ सकता है। उम्र की सीमा होती है कि तब तक आपको बच्चा लेना चाहिए, तो वो तंदुरुस्त ज्यादा रहेगा।<br />
छोटी-छोटी बातों को बतंगड़ मत बनाओ</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि गृहस्थ ज़िंदगी में छोटी-छोटी बातों को बतंगड़ मत बनाओ। चुगली-निंदा ना करो, अब आपके पास आकर पत्नी करती है या पति आकर करता है कोई बात। धैर्य से सुनो, काटो मत। हमेशा वो आदमी ज्यादा कामयाब होता है, जो धैर्य से सुनने की शक्ति रखता है। अपनी बात ना दो, पहले बात लो, यानी जो आपको बताने जा रहा है, शांत तरीके से उसकी पूरी बात सुन लो और फिर आप अपना जवाब दो। क्योंकि शॉर्टकट में हो सकता है आपको बाद में शर्मिंदगी महसूस हो, जब उस बात का रिजल्ट कुछ और हो और आपने बीच में काटकर कुछ और बोल दिया। फिर आपके साथ गड़बड़ हो जाएगी। इसलिए ये भी सिखाया जाता था कि सहने की शक्ति, बोलने की शक्ति। बोलने से पहले तोलो। कांटा थोड़ी ना लगाओगे आप। तोलने का मतलब होता है सहज मते से, शांति से एक-दूसरे की बात को सुनना। जब पति-पत्नी में ये आदत बन जाएगी, तो यकीन मानिये समाज में भी आप तरक्की करोगे। क्योंकि वो शांत स्वभाव सबको बहुत अच्छा लगता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;"><strong>संतुष्ट रहना सीखिए</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान को अग्रेसिव भी होना चाहिए, लेकिन उसकी एक सीमा है। जब लगे कि हद से कोई चीज गुजर रही है तो तब थोड़ा सा अग्रेसिव होना भी जरूरी होता है। अदरवाइज जितना हो सके प्यार, शांति के रास्ते को अपनाकर रखो। गुस्सा किसी का कुछ बिगाड़े या ना बिगाड़े, जिसके अंदर गुस्सा आता है कितनी देर वो अपसेट रहता है। उसके दिमाग में नेगेटिविटी चलनी शुरू हो जाती है। उसके शरीर में थोड़े-थोड़े विकार से फील होते हैं उसको, गुस्सा करने के बाद एकदम निढ़ाल हो जाता है। बेदम हो जाता है। फिर सोचता है कि मैं क्यों, किस लिए। इसलिए संतोष, संतुष्टि सीखिए आप।</p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Feb 2023 21:01:13 +0530</pubDate>
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                <title>‘सभी परेशानियों का एकमात्र हल है राम-नाम’</title>
                                    <description><![CDATA[आओ मिलकर मौत के मुंह में जाते माताओं के बेटों को बचाएं जीवन जीने का सही सलीका जरूर सीखें बरनावा। (सच कहूँ न्यूज) सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मंगलवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अपने अमृत वचनों के माध्यम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/online-spiritual-discourse-from-barnawa-by-saint-dr-msg/article-42974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/msg-22.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आओ मिलकर मौत के मुंह में जाते माताओं के बेटों को बचाएं</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीवन जीने का सही सलीका जरूर सीखें</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा। (सच कहूँ न्यूज)</strong> सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मंगलवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अपने अमृत वचनों के माध्यम से प्रभु के सच्चे नाम की शक्ति से रूबरू करवाया। इसके साथ ही आपजी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे के दैत्य को समाज से जड़ से उखाड़ने के लिए आगे आएं और जीवन में कभी भी नशा ना करें।</p>
<h3 style="text-align:center;"><span style="color:#ff0000;"><strong>रूहानी मजलिस</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा।</strong> सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मंगलवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अपने अमृत वचनों के माध्यम से प्रभु के सच्चे नाम की शक्ति से रूबरू करवाया। इसके साथ ही आपजी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे के दैत्य को समाज से जड़ से उखाड़ने के लिए आगे आएं और जीवन में कभी भी नशा ना करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक की साजी-नवाजी प्यारी साध-संगत जीओ सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम, शाह मस्तान दाता का एमएसजी जन्म महीना, अवतार महीना चल रहा है। साध-संगत जो अंदर से ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम, गॉड, खुदा, रब्ब को प्यार करती है, उनके लिए सिर्फ ये महीना नहीं, सारी उम्र ही खुशियां, बहारें चलती रहती हैं। कुछ दिन ऐसे होते हैं, कुछ महीने ऐसे होते हैं, जो जिंदगी में बदलाव और ऊँचाइयों को लेकर आते हैं। वो महीने, वो दिन कभी भुलाए नहीं भूलते। और जब हम उन दिनों को मनाते हैं, अपने परमपिता परमात्मा को याद करते हैं तो अंत:करण, दिलोदिमाग में खुशी की नई तरंगें जाग उठती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खुशी का नया समुन्द्र लहराने लगता है। तो इसलिए हमेशा अपने पीर-फकीर को याद रखो, उसकी भक्ति-इबादत करते रहो, क्योंकि उसी ने मालिक से हमें मिलाया है। संत, पीर-पैगम्बरों की पाक-पवित्र बाणी में वचन भी गुरु की महिमा करते हैं कि सारी धरती को कागज बना लूं, वनस्पति को कलमें बना लूं, समुन्द्र को स्याही बना लूं, हवा की गति से लिखूं तो लिख ना पाऊं। हे मुर्शिद-ए-कामिल! हे मेरे सतगुरु! हे मेरे राम! इतने तेरे गुण, इतने तेरे परोपकार हैं मुझ पर।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>नशे और बुराइयों के मक्कड़जाल से यूं निकलें</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि दुनिया की छोड़ो, अपने-अपने स्टेट और समाज को देख लो,दिन-ब-दिन बर्बादी की ओर अग्रसर हैं। नशे और बुराइयों का मक्कड़जाल चहुंओर नज़र आता है। पर उसे खत्म करने वाला ओउम्, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम लोगों को लेने में भार लगता है। आज के दौर में एकमात्र प्रभु, सतगुरु, मौला का नाम एक ऐसा है जो आपकी तमाम परेशानियों का हल ही नहीं, बल्कि पूरी उम्र आपका साथ देने वाला है। क्या चाहते हैं आप? जिंदगी में इन्जॉयमेंट हो, क्या चाहते हैं आप? जिंदगी में खुशियां हों, क्या चाहते हैं आप? दिमाग में शांति हो।</p>
<p style="text-align:justify;">आप यही चाहते हैं कि घर-परिवार में शांति हो। पर सबसे पहले जो चाह होती है, तंदुरूस्त शरीर, जब तक शरीर तंदुरूस्त नहीं, बाकी चीजों के मायने गलत हो जाते हैं। सब उल्टा हो जाता है। तो जरूरी है सबसे पहले कंचन काया, मतलब बिल्कुल स्वस्थ शरीर। पर उसके लिए आप करते क्या हैं? कोई एक्सरसाइज करते हो, पर क्या आपको पता है कि एक्सरसाइज करते-करते कौन सी घड़ी, कौन सा पल आ जाए जिसमें आपको कर्म भोगने का हुक्म हो जाए तो सारी एक्सरसाइजन धरी धराई रह जाती है। और आदमी के साथ एक्सीडेंट हो गया या बीमारी आ गई, कुछ ना कुछ ऐसा आ जाता है, जिससे उसकी वो कंचन काया बर्बादी की ओर बढ़ जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कोई है ऐसी बिना पैसे की पॉलिसी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आजकल बीमे की बड़ी पॉलिसी चली हुई हैं। जीवन बीमा है, बीमारियों का बीमा है, गाड़ियों का बीमा है और गलत भी नहीं है, अच्छा है कई मायनों में। क्या कंचन काया, हमेशा कंचन काया रहे इसका भी कोई बीमा है। वहां से तब मिलेगा ना जब बीमार होंगे। तो पॉलिसी आपका इंतजार कर रही है कि आप बीमार हो और ले लो। क्या ऐसी भी कोई पॉलिसी है, जो बीमार होने ही ना दे। ये तो गजब की है, हर कोई खरीदना चाहेगा। जी हाँ, ऐसी पॉलिसी है, लेकिन एक नया पैसा उस पर नहीं लगाना, जीेरो लॉस, देना कुछ नहीं, लेना ही लेना है और वो पॉलिसी है ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम।</p>
<p style="text-align:justify;">चलते, बैठके, लेटके, काम-धंधा करते, गाड़ी चलाते, जीभा से, ख्यालों से, कैसे भी लेते रहो, अगर जाप करते रहोगे, यकीन मानो पहाड़ जैसी बीमारी भी कंकर में बदल जाएगी और कंकर राख बनकर उड़ जाएगा। पर आपको तो शॉर्टकट चाहिए। बताइये इससे शॉर्टकट क्या है और। पैदल चलते, लेटके, बैठके, काम-धंधा करते, कहीं रुकावट नहीं है, ड्राइविंग करते, इससे अच्छा और आसान मार्ग और क्या हो सकता है? जो शाह सतनाम, शाह मस्तान दाता रहबर ने हमें उस मालिक का नाम बताया, बाइनेम उस ओउम् को, गॉड को, एकोंकार को, वाहेगुरु को याद करना। पर आप नहीं करना चाहते इसका क्या इलाज है भाई। पॉलिसी में पैसे लगाते हो तो जाकर वो आपको मिलती है। लेकिन यहां तो कुछ लगाना है तो बस दो-चार चीजें हैं, आपके पाप कर्म, आपकी बुरी आदतें और आपके संचित कर्म तक छोड़ जाओ और बदले में राम का नाम ले जाओ, जो अंदर बाहर से महकाए रखेगा, कोई सैंट या डीओ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ये सलीके बनाएंगे जीवन को उत्तम</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अब बच्चों में होता है, कई शौकीन होते हैं, हम किसी को टोकते नहीं, लेकिन इतना ज्यादा स्ट्रॉन्ग सैंट या डीओ लगा लेते हैं। तो पहले कई जगहों पर बड़ी बदबूदार जगहें होती थीं, उनका नाम लिया जाता था। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग स्टेटों में। राजस्थान में भी एक ऐसी जगह थी, जहां से ट्रेन आती थी तो वहां जब पहुंचती थी तो सारे डिब्बे बदबू से भर जाते थे। अब नाम हम नहीं बताना चाहेंगे, क्योंकि कोई ऐतराज भी कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर राजस्थान वालों को पता है, कहावत है कि तेरे च तां ऐंवे बदबू आंदी है जिवें…। सो बड़ी हैरानीजनक चीजें हैं, बुरा ना मनाना, आपको अच्छा लगता है सैंट लगाना, हमें कोई लेना-देना नहीं, लेकिन इतना स्ट्रॉन्ग लगा लेते हो कि पास बैठने वाले का जीना दुभर हो जाता है, उसकी नाक तक जलने लग जाती है, बेचारा उठकर साइड में जाता है। सफाई रखो, रोजाना नहाओ। कई कहते हैं कि जी, नहाना नहीं चाहिए, इससे स्किन खराब होती है, कई नई-नई चीजें बताते रहते हैं। एक आदमी बताने लगा, मजाक सुना रहा था वो, कहता गुरु जी पता नहीं लोग एक-एक महीना कैसे नहीं नहाते। मुझे बड़ी हैरानी होती है। हमने कहा फिर, तो वो कहता जी, मेरे 29वें दिन खाज होने लग जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो कहने का मतलब, जो नहीं नहाते उनके लिए ये बढ़िया चीज है कि भई स्किन बढ़िया रहती है, बार-बार धोओ तो खराब हो जाती है। ये कोई कपड़ा है जो फट जाएगा। मत रगड़ो ज्यादा, पानी तो डाल लो थोड़ा। साथ वाले को चैन से बैठने दो। जुराब धोई हुई पहन लिया करो। कई बार, बुरा ना मानना, लोगों को होता है, सारा-सारा दिन जुराब पहने रखते हैं और फिर जब जाकर बूट उतारते हैं तो फिर बस, चाहे कमरे में धूपबत्ती कितनी ही लगा लो आप, उनकी ही धूप चलती है। तो जीवन में एटिकेट्स आने चाहिए। जीवन जीने का ढंग आना चाहिए। कई छींक मारेंगे, देखते-देखते मार दी, सामने वाले के मुंह पर सारे छींटे, उसको मुंह धोने की जरूरत नहीं पड़ती। वैसे तो भागकर धोना पड़ता है, पर वो इतने फेंक देते हैं कि पूछो मत, कम से कम हाथ तो मुंह के आगे कर लो। खांसते हैं तो, चलो छींटे आ रहे हैं तो अपने हाथ से रुक जाएंगे। धर्मों में इस बारे में लिखा हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>शरीर को जैसा बना लो वैसा ही रहेगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि एक पुरानी बात ख्याल में आ गई। कई सज्जन थे हमारे साथ खेलते थे। हम 32 नेशनल गेम स्टेट लेवल तक खेले। हर जगह टूर्नामेंटों में खेलने के लिए जाया करते थे। और प्लेयर आलस बहुत कर जाते हैं। तो वो नहाते नहीं थे। हमने कहा, यार आप नहाते नहीं हो। नहा लिया करो ना यार। कहते, यार शेरां दा किने मुंह धोत्ता है कि शेरों का मुंह कौन धोता है। हमने कहा सुबह फ्रैश होने जाता है, कहता हाँ। तो हमने कहा कि शेर तो वो भी नहीं धोते। हाँ, अगर मुंह नहीं धोते थे तो फिर हाथ भी क्यों धोते हो। ये बड़ी अजीब सी चीजें हैं। फिर वो कहते कि हाँ, अब तो नहाया करेंगे। वे कहते कि पहले तो हमें लगता था कि बड़ी बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमने कहा कि बड़ी बात नहीं है, या तो दोनों चीजें करो शेर वाली या फिर आदमियों वाला काम कर लो और शेर वाला, पशु वाला काम छोड़ दो। सो हम ये नहीं कहते रोज नहाओ, कहीं ठंड लगवा बैठो। पर एक बार दिन में नहा कर देखो कितनी स्फूर्ति आती है, सर्दी नहीं लगती नहाने के बाद, हकीकत है ये। और कई रजाई से निकलेंगे और फिर ठुर-ठुर करते फिरेंगे, नहाना नहीं। कहते नहाने से सर्दी लग जाएगी। अरे नहाने से तो सर्दी उड़ती है, कभी नहा कर देखो आप रेगुलर। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हम अपनी एज (आयु) में, शायद ही कभी 55 साल के बीच में 2-3 दिन नहीं कह सकते, वरना डेली, चाहे कुछ भी हो, पारा माइनस डिग्री भी रहा राजस्थान में और 50+ भी हो जाता था, हमेशा ठंडे पानी से ही नहाते थे। आदत ही नहीं थी। अब की बात नहीं कर रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो चलो थोड़ा बहुत ट्यूबवेल का पानी ताजा आता है तो उससे नहाया जा सकता है, अच्छा पानी होता है। लेकिन उन टाइमों में माइनस डिग्री में भी और 50 में भी। शरीर को जैसा बना लो वैसा ही रहेगा। अब हमें लगता है कि यहां कोई बच्चे ऐसे भी बैठे होंगे, जो सारा दिन कंप्यूटर पर, फोन पर लगे रहते हैं। किलोमीटर भागना पड़ जाए सांस, ऊपर वाला एक किलोमीटर ऊपर होता है और नीचे वाला एक किलोमीटर पीछे होता है। पाँच-चार मिनट तो बात नहीं आती, उनसे पूछो आ, पा, है, यूं ही करते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बात जुड़ती ही नहीं। और कितने किलोमीटर, एक किलो…मीटर…। भई उनके लिए बड़ी चीज है ना बेटा। खाना बनाया, रसोई के साथ टॉयलेट है, बनाते-बनाते आई फड़ाक। सुबह दूर जाने की जरूरत नहीं और तड़ाक। मतलब कब घूमे वो। उठे, बैग सा उठाया, गाड़ी में बैठे, साइकिल पर बैठे, स्कूटर पर बैठे, दफ्तर में गए फिर बैठे। टाइम मिल सकता है थोड़ी सी नींद त्याग दो, घूम सकते हो आप अगर चाहो तो। पर चाहो तो ना। रास्ते निकल आते हैं लेकिन निकालना चाहो तो। तो जिंदगी में अगर कंचन काया चाहते हो, तो एक्सरसाइज भी करो और राम का नाम भी जपो ताकि इस शरीर पर आने वाले पहाड़ जैसे कर्मों को मालिक राई में बदल दे और आपको पता ही ना चले। बच्चो ! बड़ा बैनेफिट का काम है, प्रोफिट का काम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>नशे की आदत बर्बादी का संदेश</strong></span></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आम लोग नशा करके समाज को बहुत बड़ा नुक्सान पहुंचा रहे हैं। आप हमें ये बताएंगे कि क्या ओलंपिक में नशा ज्यादा करने का कांपीटिशन करने जाओगे कि ज्यादा नशा कौन करता है। आप बताओगे कि क्या आपने इसलिए जन्म लिया है। क्या आप बताओगे कि आप गुलाम हो या आजाद हो। देश आजाद हो गया, लेकिन आपकी गुलामी तब टूटेगी, जब नशे की गुलामी से आजाद हो जाओगे। आपजी ने फरमाया कि नशा कई चीजों का होता है। शरीर थोड़ा अच्छा है, उसका नशा। उसको लगता है कि मेरे जैसा शरीर नहीं, उसी नशे में घूमता रहता है। सुंदरता का नशा, जमीन-जायदाद का नशा, राज-पहुंच का नशा, अच्छी पहुंच का नशा, सोच का सूक्ष्म नशा, उसको लगता है कि मैं ही दिमाग वाला हूँ, बाकी सब पैदल हैं, तो इस तरह नशे बहुत तरह के हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाकी पोस्त, भांग, अफीम, मद्य, शराब, हेरोइन, स्मैक, चिट्टा, पीला, लाल, नीला, पता नहीं कितने हैं। बहुत सारे नशे हैं। बच्चो आप क्यों गुलाम बने हो नशे के। कहते हैं छूटता नहीं जी। कैसे नहीं छूटता, क्या माँ के पेट से जब जन्म लिया था, साथ लेकर (नशा) आए थे। अरे माँ का साथ छोड़ देते हो, तो क्या नशा माँ से बड़ा हो गया, जो नहीं छोड़ना चाहिए वो छोड़ रहे हो और छोड़ना चाहिए उससे जुड़े पड़े हो। माँ का साथ, बाप का साथ, परिवार का साथ, जहां तक संभव हो रखो। नहीं रख पा रहे माँ-बाप में कमियां आ गर्इं हैं कोई बात नहीं, राड़ से बाड़ अच्छी, लेकिन उनका सत्कार करना ना भूलो। उनके लिए अपशब्द मुंह पर नहीं आने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ये घोर कलियुग है, यहां पूत कपूत भी होते हैं और माता भी कुमाता हो जाती है। क्योंकि हमने देखा, आपने भी सुना होगा कि कई बेटियों ने अपने स्वाद के लिए, लोलुपता के लिए, बुराई के लिए अपने पूरे के पूरे परिवारों का खात्मा कर दिया जिसमें उनके अपने बच्चे भी थे, बहन-भाई थे, माँ-बाप भी थे। बड़ा दर्द होता है। कई उदाहरण हो गए हैं ऐसे। तो किस तरफ जा रहा है आज का नौजवान? जी हमें तो गम है, आपके गम का नहीं पता चलता। अब यारी लगी किसी से, दो दोस्त आपस में बन गए तो नशा। टूट गई, जिसे आजकल के लोग ब्रेकअप कहते हैं, उसमें भी नशा। गम आ गया तो नशा, खुशी आ गई तो नशा, ठंडी हवा चली तो नशा, सूरज निकला तो नशा, सूरज बादलों में तो नशा, बरसात आ गई तो नशा, आप तो बहाना ढूंढते रहते हो। चाय पी ली, उसके बाद फिर नशा। कहते चाय के बाद तो पीनी पड़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानते हो आप। हम देखते होते हैं चाय पी ली अच्छा अब ये खिसकेगा, खिसका, बस सलेंसर शुरू। अंदर से घूम-घूम कर धुंआ बाहर निकलता है। तो बच्चो ये क्या है? कौन सा जश्न मना रहे हो आप? क्या आपने कभी सोचा है, ये जो नशा करके जो जश्न मना रहे हो, ये आपके घर के लिए बर्बादी का संदेश है। समाज के लिए आप जो बहुत बड़ा स्तंभ बनने वाले थे, वो भरभराकर टूटने जा रहा है। दीमक को जानते हो, दीमक जब लग जाती है, गेट लगा हुआ है, दीमक ने अपना काम शुरू कर दिया, बाहर से दरवाजा वैसा ही है, पता नहीं चलता, लेकिन अंदर ही अंदर, अंदर ही अंदर, खाती चली जाती है, खाती चली जाती है और एक टाइम ऐसा आता है कि आपने जोर से दरवाजा बंद किया तो तड़ाक से आधा दरवाजा टूटकर वो गया, क्योंकि अंदर मिट्टी रह जाती है उनकी भरी हुई और सारा सामान खा जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो बच्चो ये नशा दीमक आपको खा रहा है और हम आपको गारंटी देते हैं, राम का नाम, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम जपो, ये दीमक मर जाएगी और आपका शरीर फिर से कंचन जैसा हो सकता है। क्या नहीं कर सकते आप। क्यों दिल छोटा करते हो। और ऊपर से जो उस्ताद होते हैं, जो नशा बेचने वाले उनकी भ्रांतियां बहुत फैलाई हुई हैं। कहते हैं एकदम नशा छोड़ा तो लकवा हो जाएगा, एकदम नशा छोड़ दिया तो दिमाग हिल जाएगा। एकदम नशा छोड़ दिया चारपाई पर पड़ जाएगा, इत्यादि, इत्यादि।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आओ मिलकर मौत केमुंह में जाते माताओं के बेटों को बचाएं</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमने छह करोड़ लोगों का नशा छुड़वाया बच्चो, एक भी ना तो चारपाई पर पड़ा और ना किसी को लकवा हुआ। 10 से 20 बोतल शराब पीने वाले, चरस, हेरोइन, स्मैक, चिट्टा खाने वाले, अफीम के कई-कई तौले खाने वाले, भयानक नशा करने वाले बच्चों को भी देखा कि वो आए, राम के नाम से जुड़े, भक्ति की और आज आॅनलाइन भी बैठे होंगे और यहां भी वो बच्चे सेवा कर रहे हैं। आज नशा छोड़कर अव्वल कोटि के भक्त बने हुए हैं हमारे छह करोड़ बच्चे। इसमें 65 से 70 प्रतिशत यूथ है, जिसने नशा छोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">तो दिन-रात एक करके सेवादार भाई लगे हुए हैं नशा छुड़वाने में और हम बार-बार आह्वान कर रहे हैं, हमारे देश के मौजिज लोगों से, और वो लोग भी कदम उठा रहे हैं। हमें बड़ी खुशी हुई, हम उनको साधुवाद कहते हैं जिन्होंने भी कदम उठाए हैं। सभी धर्मों के मौजिज लोगोें से भी हम हाथ जोड़कर विनती करते हैं और करते रहेंगे जब तक आप लोग लगोगे नहीं, आप भी आओ, ओउम्, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम नाम से लोगों का नशा छुड़वाओ तो सही। अरे एक माँ के बेटे का नशा छुड़वाकर उससे मिलवा दिया तो पता नहीं कितने पुण्य के बराबर, कितने यज्ञ के बराबर वो पुण्य होगा।</p>
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                <pubDate>Tue, 31 Jan 2023 20:25:42 +0530</pubDate>
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                <title>साध-संगत ने लिया आज प्रण | Saint Dr. MSG</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/sadh-sangat-took-vows-today/article-42907"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/saint-dr.-msg-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>हर दिन बुराई छोड़ें और अच्छाई का प्रण लें : पूज्य गुरु जी</strong></h3>
<h3 style="text-align:justify;">28 जनवरी का प्रण</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><span style="color:#ff0000;"><strong>कभी किसी पर टोंट नहीं कसेंगे, जिससे उसका दिल दुखे। अगर ऐसा होता है तो उससे माफी मांग लेंगे।</strong></span></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा। (सच कहूँ न्यूज)</strong> सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शनिवार को शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा से ‘आॅनलाइन गुरुकुल’ के माध्यम से अपने अमृत वचनों की वर्षा की। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक की प्यारी साध-संगत जीओ जैसा आपको पता है कि अवतार महीना चल रहा है। आप सबको अवतार महीने की बहुत-बहुत बधाई हो, मालिक खुशियां बख्शें, दया-मेहर, रहमत से नवाजें। हर दिन आप कुछ-न-कुछ बुराई छोड़ते रहें और कुछ-न-कुछ अच्छाई ग्रहण करने का प्रण लेते रहें, यही मालिक से दुआ है और मालिक आपकी झोलियां भरता रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सतगुरु, मौला, दाता रहबर ने जो रंग-बिरंगी फुलवारी सजा रखी है, जिसमें ये संसार, त्रिलोकी है और बहुत सी त्रिलोकियां हैं। कई बार इन्सान यह नहीं समझ पाता कि त्रिलोकी कहा किसे जाता है। लोग सोचते हैं आसमान, धरती और पाताल, इसी का नाम त्रिलोकी है। जी नहीं, त्रिलोकी का मतलब होता है तीन तरह के शरीर जहां पाए जाते हों, अस्थूल काय, कारण काय और सूक्ष्म काय। अस्थूल-जो दिखने में आते हैं, हम सब लोग, पेड़-पौधे, पशु, पक्षी, परिंदे, कीड़े-मकौड़े और सूक्ष्म-जो दिखने में नहीं आते, उदाहरण के तौर पर बैक्टीरिया कह लें, वायरस कह लें और पता नहीं कितने जीव होंगे। कारण काय में देव-फरिश्तों के शरीरों को माना जाता है, जो अपनी इच्छा अनुसार छोटे-बड़े हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी इच्छानुसार रूप धारण कर लेते हैं, तो वो कारण काय शरीर माना जाता है। कारण काय एक शरीर वो भी होता है जब आत्मा को आगे जाकर सजा भी सुनाई जाती है और उस शरीर को धारण करके उसके अनुसार खुशी या कर्मों के अनुसार वैसा अनुभव करवाया जाता है। तो जहां पर ये तीन तरह के शरीर पाए जाते हैं, उसे त्रिलोकी कहा जाता है। हमारे पाक-पवित्र धर्मों, वेदों और सभी धर्मों के पवित्र ग्रन्थों में साफ लिखा है कि ये एक त्रिलोकी है, ऐसी सैकड़ों त्रिलोकियां हैं। तो साइंस को ये चैलेंज है कि आप अभी तक एक नहीं ढूंढ पाए और हमारे संत, पीर-फकीरों, गुरु-महापुरुषों ने ये पहले ही लिख दिया है कि सैकड़ों जगह जिंदगी है और तीन तरह के शरीर सैकड़ों जगह पाए जाते हैं। तो एक दिन आप (साइंस को मानने वाले) जरूर आ जाओगे, क्योंकि आप आॅलरेडी कई बातों को मान चुके हो।</p>
<p style="text-align:justify;">शायद आपको बुरा लगे, लेकिन सच तो सच है, बहुत से उदाहरण हैं, बैक्टीरिया वायरस आप 1850 या 1890 में ढूंढा होगा, साइंस का सन थोड़ा आगे पीछे हो सकता है, लेकिन पवित्र वेदों में हजारों या लाखों साल या करोड़ों साल पहले बताया जा चुका है। अगर कहते हैं कि फलां जीव, करोड़ों साल से सर्वाइव कर रहा है तो धर्मानुसार वेद तो उससे पहले से हैं। अगर आदमी के अनुसार कह लो, प्रलय के बाद तो कम से कम हजारों साल बाद, तो उसमें ये लिखा हुआ है कि अति सूक्ष्म और सूक्ष्म जीवाणु और कीटाणु होते हैं, आपने उसको भी मान लिया, जो पहले नहीं माना था। फिर धर्मों में बताया गया कि लाखों चन्द्रमा, लाखों सूरज, नक्षत्र, ग्रह होते हैं। साइंस ने मजाक उड़ाया कि नहीं जी, ऐसा तो होता ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब खगोल शास्त्री ये मान चुके हैं कि थोड़ी सी जगह में हमने रिसर्च किया तो वहां पर वाकयी ही हमें बहुत से सूरज मिल गए, चन्द्र मिल गए और नक्षत्र मिल गए, मतलब धर्म सच कहते हैं। फिर मजाक उड़ाया गया कि कृष्ण जी के पास ऐसी कौन सी शक्ति थी, जो उन्होंने संजय को दे दी, जो कुरुक्षेत्र में युद्ध का बयान हस्तिनापुर में बैठा-बैठा बता देता था। तो अब तो आपको (साइंस के नाम पर अड़ने वालों) शर्म आनी चाहिए उसको झूठ बताते हुए। क्योंकि यहां बैठे-बैठे हमारे सामने यूएसए के लोग भी बैठे हैं, कनाडा के लोग भी बैठे हैं और हम बिल्कुल आमने-सामने सारा कुछ देख रहे हैं। अब तो मानोगे कि ये आपके मोबाइल वाला सिस्टम उनके पास पहले ही था, कोई रंग अलग तरह का हो सकता है। लेकिन मान तो गए ऐसा हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले मजाक उड़ाते थे</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि धर्मों और विज्ञान की अगर बात करें तो धर्म हमारे महा विज्ञान हैं या यूं कहें कि वो समुन्द्र हैं और उसमें से एक पतली सी निकली हुई नदी है विज्ञान। और विज्ञान कुछ अलग से पैदा नहीं हुई है। आपने धर्मों में से ही सारा सामान लिया है। चैलेंज है आपको (साइंस वालों को) कि बताइए आपके पास ऐसी कौन सी चीज है जो आपने धर्मों से नहीं ली, आपने अलग से कुछ बनाया हो। लेकिन आपको बता दें कि धर्मों में ये लिखा हुआ है कि सूरज की रोशनी ही नहीं बल्कि चन्द्र की रोशनी से खाना बनाया जाता था। आपको ये भी बता दें कि हाथ रखते ही जैसे आप ट्रेडमील पर अपनी हार्ट बीट या ब्लड प्रेशर, इन चीजों को देख लेते हैं, ये बताया गया है कि ऐसे विमान होते थे जो आपकी सोच और ध्वनि से चला करते थे, सांउडलैस होते थे और जहां मर्जी उतार लो, जहां मर्जी उड़ा लो, कितना भी ऊँचा लेकर जाना है, यानि आपके माइंड (दिमाग) से कनेक्टिड (जुड़े) थे।</p>
<p style="text-align:justify;">तो अभी तक तो आपके पास नहीं है, कल को बनाकर कह दो कि हमने नई चीज बना ली। आपको बता दें कि आप कितने पीछे हैं और धर्म कितने आगे हैं। मानो या ना मानो उसका कोई कुछ नहीं कर सकता। को मानू नी, तो वो तो भई आप मर्जी के मालिक हैं मत मानो। अब एक जमींदार था, बेचारा अनपढ़ था, खेत में काम कर रहा था। पुराने समय की सच्ची बात है। पढ़ा-लिखा लड़का उसके पास चला गया। किसान इंग्लिश के थोड़े-थोड़े अक्षर जानता था तो उस लड़के से कहने लगा, बेटा! कितना पढ़ लिया। लड़का कहने लगा कि जी बीए हूँ। किसान कहता-मूर्ख। लड़का कहता क्यों? तो किसान कहने लगा कि दो अक्षर पढ़ा है और वो भी उलटे। ए, बी होता है बीए थोड़ी होता है। अब वो लड़का कहे कि जी नहीं बीए होता है, मैं बीए करके आया हूँ। किसान कहता कि नहीं…नहीं…ए, बी होता है, मैंने सुना ही नहीं कभी। ‘बी’ कैसे आ गई ‘ए’ से पहले। पहले ‘ए’ आएगी। करलो क्या करलोगे। तो आप में भी बीए, एबी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर मानना तो पड़ेगा ही आज नहीं तो कल। धीरे-धीरे मानोगे। साइंस बहुत स्लो है, धर्म बहुत फास्ट हैं। बहुत पहले बता चुके हैं बहुत सारी चीजें। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ये हम पर बेपरवाह जी का अरबों-खरबों गुणा रहमोकरम है कि हम इन चीजों को अनुभव कर चुके हैं, कि हाँ, ऐसा था। कैसे कर चुके हैं? मेडिटेशन के द्वारा। क्या आप कर सकते हैं? हाँ 100 पर्सेंट। कैसे कर सकते हैं? मेडिटेशन ले लो। फिर क्या होगा? अभ्यास करना होगा। क्या आपने किताबें पढ़े बिना डिग्रियां हासिल कर ली? ये तो हो सकता है पॉसीबल हो, मेज के नीचे से। लेकिन ऊपर से तो पढ़कर ही की हैं। लेकिन इधर आपको मेडिटेशन में अभ्यास करना होगा, तभी ये चीजें अनुभव होंगी। और छोड़िये, हम उस युग में जाकर हम उस चीज को देख सकते हैं, जो टाइम मशीन बना रखी हैं, फिल्मों में देखा होगा, कहानियों में सुना होगा, ये हकीकत है।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मिक तौर पर वहां जाया जा सकता है। उसको जिया नहीं जा सकता है, उस काल में क्या हुआ था, ये देखा जा सकता है। उस काल को दोबारा लाया नहीं जा सकता है, लेकिन उस काल में जो-जो घटनाएं हुर्इं थी, वो एक पिक्चर की तरह लाइव दिख सकती हैं। इतनी शक्ति है मेडिटेशन में। आपको झूठ लगता है तो करलो मेडिटेशन। बड़े से बड़े सार्इंटिस्ट को चैलेंज है, कोई भी आ जाए, हम मैडिटेशन बता देते हैं, जो तरीका हम बताएंगे उसके अनुसार मेडिटेशन कर लेना, रिजल्ट ना आए तो कह देना झूठे हो, सारी दुनिया के सामने कह देना। क्योंकि हमने अनुभव किया है, जीते जागते उदाहरण हैं हम, दूसरे पर यकीन क्यों करें, जब हमने खुद कर रखा है ये। कैसे कर रखा है? वो मेडिटेशन ही है और कोई तरीका नहीं। कौन करवाने वाला है? शाह सतनाम, शाह मस्तान, हमारे गुरु, दाता, रहबर, मालिक। इसलिए तो उनको हम कुल मालिक कहते हैं। सारा अनुभव उन्होंने दिया है, सब कुछ उन्होंने करवाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि क्या आप इन चीजों पर यकीन नहीं करते कि आदमी उड़ सकता है। आप कोशिश तो कर रहे हैं। कईयों ने ऐसे-ऐसे प्रयोग कर रखे हैं और करने में लगे हुए हैं कि आदमी के पंखा लगा रखा है बड़ा सा और वो उड़ते हुए देखा होगा आपने। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग का एक प्रोग्राम हुआ था, उसमें भी एक सज्जन उड़े थे ऐसे। फूलों की वर्षा की थी। सेवादारों को तो ये बात याद ही होगी। और आजकल तो कई जगहों पर ऐसा करवाते हैं, अनुभव करवाते हैं, मतलब आदमी उड़ता तो है। पर हम आपको बता दें कि ये तो कुछ भी नहीं है आपका अडंगा, इतना कुछ बांधना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैडिटेशन से बिल्कुल इन्सान उड़ता है और आत्मिक तौर पर उड़ता है और अपने आप को अगर सिद्ध कर लिया जाए तो बॉडी भी जमीन से उठने लगती है। ये हकीकत है। झूठ लगता है तो आ जाओ, तरीका हम बताते हैं, करना पड़ेगा मेडिटेशन, टाइम तो देना पड़ेगा। अब जहाज बनाने में भी तो टाइम लगा होगा शुरूआत में। कितनी बार गिरे होंगे, पड़े होंगे, क्या-क्या हुआ होगा। तो ऐसे मेडिटेशन में गिरोगे-पड़ोगे नहीं, ये पक्का है। सेफ रहोगे 100 पर्सेंट। लेकिन गुरुमंत्र, कलमा, मैथड् आॅफ मेडिटेशन करना पड़ेगा। गुरुमंत्र के बिना नहीं हो सकेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jan 2023 21:09:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पावन भंडारे को लेकर पूज्य गुरु जी ने किए जबरदस्त वचन, जल्दी पढ़ें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से फरमाया,‘ जैसा आप कई दिनों से सुने जा रहे हैं, एक जनवरी से सतगुरु मौला के गुणगाण साध-संगत देश-विदेश में सब जगह पर गा रही है। क्योंकि ये महीना नया साल ही नहीं नये युग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/online-spiritual-discourse-in-sirsa-by-saint-dr-msg-2/article-42772"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/saint-dr.-msg1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से फरमाया,‘ जैसा आप कई दिनों से सुने जा रहे हैं, एक जनवरी से सतगुरु मौला के गुणगाण साध-संगत देश-विदेश में सब जगह पर गा रही है। क्योंकि ये महीना नया साल ही नहीं नये युग को भी लेकर आया है। कलियुग में एक ऐसा युग यहां प्यार, मोहब्बत नि:स्वार्थ भावना से कैसे किया जाता है। सच्चा प्यार मोहब्बत ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु राम का कैसे हासिल होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिंदगी जिने में मजा कैसा है और कैसे संतुष्टि के साथ तमाम खुशियों को हासिल करके भी अहंकार न आये, ये कैसे पॉसिबल है, ये सिखाने वाला इस जनवरी के महीने में आये और उस सच्चे दाता रहबर के अवतार महीने को एक जनवरी से मनाती हुई साध-संगत आज उनके अवतार दिन के नजदीक पहुंच गई है। और अवतार दिन की इस पूर्व दोपहर कहेंगे जो आज हो चुकी है और इस पूर्व दोपहर को आपको बहुत-बहुत बधाई देते हैं। आशीर्वाद कहते हैं। शाह सतनाम रहबर हमारे मालिक वालि दो जहान इस धरा पर आए उनके अवतार दिन से बस कुछ घंटे कह लो पहले की ये बात है और कल वो दिन मनाया जाएंगे जिसके लिए संगत बेताब रहती है, देश विदेश से साध-संगत आती है। सरसा में कल 11 बजे भंडारा शुरू हो जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबने जैसे-जैसे सेवादार भाई बताये उस पे अमल करना है। उसको मानना है। ताकि बेपरवाह जी की वो तमाम खुशियां जो समुंदरों के रूप में आपकी झोली में आने वाली है। उसे आप समेट सके और बात सच्चे दाता की अल्फाजों में वो दम नहीं जो उनके रहमोकर्म का वर्णन कर सके। जुबां पे वो ताकत नहीं जो उनके गुणगान गा सके। कलम में वो हिम्मत नहीं जो उनकी अपरमपार लीला का पार पा सके और किसी के दिमाग में वो शक्ति नहीं जो उनके रहमोकर्म को पहचान सके। जिन पर उनकी दया मेहर रहमत होती है, जो दृढ़ यकीन करता है, उन्हीं को वो नजारे समझ में आते है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jan 2023 14:51:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Online Gurukul | जब पूज्य गुरु जी ने देखा एक किलो का बड़ा रसगुल्ला</title>
                                    <description><![CDATA[जबलपुर/मध्य प्रदेश (सच कहूँ न्यूज)।  डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (उतर प्रदेश) आश्रम से आनलाइन गुरुकुल के माध्यम से नामचर्चा घर, मझौली, जबलपुर मध्यप्रदेश में रूहानी सत्संग फरमाया। इस दौरान सर्वप्रथम पूज्य गुरु जी का स्वागत आप जी के भजन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/dera-followers-of-mp-showed-rasgulla-of-1-kg/article-87221"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/saint-dr.-msg-2-24.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जबलपुर/मध्य प्रदेश (सच कहूँ न्यूज)।</strong>  डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (उतर प्रदेश) आश्रम से आनलाइन गुरुकुल के माध्यम से नामचर्चा घर, मझौली, जबलपुर मध्यप्रदेश में रूहानी सत्संग फरमाया। इस दौरान सर्वप्रथम पूज्य गुरु जी का स्वागत आप जी के भजन शाह समनाम की मस्ती चढ़गईयां, चढ़गईयां…भजन पर समस्त साध-संगत ने खुशी में झूमकर किया।</p>
<p><iframe title="The Power Of Faith: Embracing Spiritual Enlightenment | Gurmeet Ram Rahim Singh Insan" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/bnjBw6cCq34?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय मध्य प्रदेश के 1-1 किलों के रसगुल्ले रहे। बता दें कि जैसे ही मध्यप्रदेश के साध-संगत ने पूज्य गुरु जी के लिए नामचर्चा के मीठे अमरूद और एक-एक किलो के बड़े-बडे पांच रस गुल्ले रखे तो, पूज्य गुरु जी देकर खूब मुस्कुराये। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ‘‘बेटा एक-एक किलों का एक-एक रसगुल्ला यहां तो पहली बार लोगों ने देखा है और आप तो जानते हैं कि रसगुल्ले का नाम सुनते ही क्या हो जाता है। बेटा! आप में से कोई सेवादार आए तो ये रसगुल्ला जरूर लेते आना। आप जी ने फरमाया कि हम जब पहले आए थे तो किसी ने कभी नहीं बताया, हमने कई जगह सत्संग किये, चलो कोई बात नहीं देर आए दुरुस्त आए’’</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>डेप्थ मुहिम: सात ग्राम पंचायत हुई नशा मुक्त</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी से आॅनलाइन रूबरू होते हुए मध्यम प्रदेश के मंझौली से नवनियुक्त सरपंच बने महेन्द्र इन्सां ने बताया कि पूज्य गुरु जी द्वारा शुरू की गई देश को नशा मुक्त करने की मुहिम डेप्थ के तहत सारी पंचायत ने नशा मुक्त अभियान चलाया और गांव को नशा मुक्त किया। ग्रामीणों के सहयोग व आप जी के आशीर्वाद से 7 ग्राम पंचायत नशा मुक्त हो चुकी हैं। जिस पर पूज्य गुरु जी ने सभी आशीर्वाद देते हुए वचन फरमाये कि बेटा, आप सब ने कमाल कर दिया। सभी को बहुत-बहुत आशीर्वाद, आशीर्वाद।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>थाना प्रभारी को पूज्य गुरु जी का सैल्यूट</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आॅनलाईन गुरुकुल में पहुंचे गणमान्य नागरीक, ग्राम पंचायत अध्यक्ष, पार्षद, थाना प्रभारी सभी को पूज्य गुरु जी ने आशीर्वाद दिया और विशेष रूप से थाना प्रभारी को सैल्यूट करते हुए फरमाया कि ‘‘आप समाज के सच्चे प्रहरी पहरी हैं, क्यों कि आप जागते हैं तभी समाज चैन की नींद सोता है। तो हम भगवान से प्रार्थना करेंगे कि आपको ओर शक्ति दे और हिम्मत दे ताकि आप समाज का भला कर सके। बुराईयों को रोक सकें।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 11:30:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी ने आज ये करवाएं दो प्रण, आप भी लें&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[पहला प्रण ‘मन मते व बुराई ये जुड़े लोगों का कभी संग नहीं करेंगे’ दूसरा प्रण, साप्ताहिक व ब्लॉक नामचर्चा में जरूर जाएंगे। बरनावा/सरसा। रविवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से शाह सतनाम जी बरनावा आश्रम से आनलाइन गुरुकुल (online gurukul MSG) के माध्यम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/online-gurukul-msg/article-39821"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/90-1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>
<h3>पहला प्रण ‘मन मते व बुराई ये जुड़े लोगों का कभी संग नहीं करेंगे’</h3>
</li>
<li>
<h3>दूसरा प्रण, साप्ताहिक व ब्लॉक नामचर्चा में जरूर जाएंगे।</h3>
</li>
</ul>
<p><strong>बरनावा/सरसा।</strong> रविवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से शाह सतनाम जी बरनावा आश्रम से आनलाइन गुरुकुल <strong>(online gurukul MSG)</strong> के माध्यम से रूहानी सत्संग फरमाया। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने देश विदेश में बैठी करोड़ों साध-संगत को पावन अवतार माह के मौके पर दो प्रण भी करवाए। जिसमें पहला प्रण ‘मन मते व बुराई ये जुड़े लोगों का कभी संग नहीं करेंगे’ दूसरा प्रण, साप्ताहिक व ब्लॉक नामचर्चा में जरूर जाएंगे। साध-संगत ने हाथ उठाकर ये दोनों प्रण किये। इस दौरान साध-संगत की मांग पर पूज्य गुरु जी ने अपने पावन कर कमलों से नए साल का कैलेंडर व दो नये स्वरूप रिलीज किये। जिसमें आपको पूज्य गुरु जी का मनमोहक अंदाज आशीर्वाद के देखने को मिलेगा।</p>
<p><iframe title="Unveiling the Profound Benefits of Meditation for Personal, Professional, Spiritual Transformation" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/X-_4OzX1REI?start=9922&amp;feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<h3>लाखों को गुरुमंत्र, मैथ्ड आफ मेडिटेशन की अनमोल दात दी</h3>
<p>आपको बता दें कि इस दौरान पूज्य गुरु जी ने उत्तर प्रदेश के सहारणपुर स्थित मेला ग्राउंड देवबंद, डीएवी इंटर कॉलेज बिजनौर, नामचर्चा घर पूर्वी मुजफ्फर नगर, मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित नामचर्चा घर जाटखेड़ा, हरियाणा के पानीपत स्थित दशहरा ग्राउंड, नामचर्चा घर तोशाम रोड भिवानी, दार्जिलिंग में श्री पंचमुखी बालाजी धाम सिलीगुड़ी, गुजरात के मेहसाणा स्थित जीआईडीसी हॉल, हैदराबाद के दिलसुख नगर स्थित भाग्यश्री फंक्शन हॉल, महाराष्ट्र के आटपाड़ी नामचर्चा घर, पंजाब के सलाबतपुरा स्थित शाह सतनाम जी रूहानी धाम राजगढ़, छत्तीसगढ़ के शाह सतनाम जी सर्वकल्याण आश्रम गतौरी बिलासपुर, राजस्थान के शाह सतनाम जी दयापुर धाम कोटा व दिल्ली के नार्दन रेलवे कॉलोनी बारात घर तुगलकाबाद सहित सभी जगहों पर लाखों लोगों का नशा व अन्य सामाजिक बुराइयां छुड़ाते हुए उन्हें गुरुमंत्र, मैथ्ड आॅफ मेडिटेशन प्रदान किया। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने राम का नाम लेने में क्या-क्या फायदा है, के बारे में भी विस्तार से समझाया।</p>
<h3>राम नाम से बिना फीस दिए आत्मबल बढ़ता है</h3>
<p>पूज्य गुरु जी ने कहा कि कोई भी बिनजेस, व्यापार तब बुलंदियों पर जाता है, जब इंसान के अंदर हौंसले बुलंद होते है। जब आदमी के अंदर आत्मबल, बिल पॉवर होता है तो हर बिजनेस में, हर व्यापार में अच्छे आइडियाज आते है और जब इंसान के अंदर अच्छे आइडियाज आ जाते है तो उनको लागू करने की हिम्मत होनी चाहिए। एक आत्मबल होना चाहिए। तो वो आइडियाज जैसे जैसे लागू होते जाएंगे तो वैसे-वैसे ही बिजनेस व्यापार बढ़ता जाएगा। पूज्य गुरु जी ने कहा कि इस प्रकार जब इंसान के अंदर आत्मबल होगा, बुलंद हौसले होंगे तो इंसान बिजनेस में तरक्की कर पाएगा। साथ में देखने का नजरिया भी बदलेगा। पूज्य गुरु जी ने बताया कि राम-नाम के जाप से बिना कोई फीस दिए आत्मबल जबरदस्त तरीके से बढ़ेगा और बिजनेस व्यापार में इससे अपने आप फायदा होगा।</p>
<h3><strong>इंसान के सेहत की गारंटी देता है प्रभु का नाम</strong></h3>
<p>मनुष्य की सेहत के लिए भी क्या प्रभु का नाम फायदेमंद है, के बारे में समझाते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इंसान दुनियावी कोईचीज लेकर आता है तो उसे उसकी कुछ न कुछ गारंटी जरूर मिलती है। लेकिन इंसान को अपने शरीर की कोई गारंटी नहीं है कि वह कब तक स्वस्थ रहेगा, कब तक तंदुरुस्त रहेगा। लेकिन अगर इंसान राम, नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा के नाम का जाप करता है तो इंसान के अंदर एक ऐसी गारंटी आ जाती है कि उसके शरीर में कोई रोग आया तो भी आत्मबल के द्वारा उसे बहुत जल्द रिकवर कर पाएंगे यानी जल्दी ठीक हो पाएंगे। यह बात अब वैज्ञानिक भी मान चुके है। मेडिटेशन अपने आप में एक बहुत बड़ी पॉवर है। मनुष्य मेडिटेशन के द्वारा अपने डीएनए को ठीक कर सकता है। मेडिटेशन के लिए इंसान को सुबह-शाम एक-एक घंटा समय लगाना होगा। लेकिन इंसान प्रभु परमात्मा का नाम लेता नही। इस प्रकार हम कह सकते है कि जो इंसान राम नाम लेता है तो वह उसके लिए सेहत की गारंटी बन जाता है।</p>
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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 19:14:14 +0530</pubDate>
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