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                <title>suicides - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों को अनसुना कब तक करें?</title>
                                    <description><![CDATA[आत्महत्या का नाम सुनते ही आंखों के सामने मौत का एक भयावह मंजर खड़ा हो जाता है। एक डरावना शब्द, जो कल तक शब्दकोष में कहीं गुम था, वो आज देश में, समाज में और घर में इस कदर स्थापित हो गया है कि हर कोई इससे डरा सहमा है। कहने को इसके अर्थ मनचाही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-statistics-of-suicides/article-3169"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/mukesh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आत्महत्या का नाम सुनते ही आंखों के सामने मौत का एक भयावह मंजर खड़ा हो जाता है। एक डरावना शब्द, जो कल तक शब्दकोष में कहीं गुम था, वो आज देश में, समाज में और घर में इस कदर स्थापित हो गया है कि हर कोई इससे डरा सहमा है। कहने को इसके अर्थ मनचाही मौत से जुड़ते हैं, लेकिन सच ये है कि यह एक अनचाही और अनपेक्षित मौत की दर्दनाक स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया बक्सर के कलेक्टर मुकेश पाण्डेय की खुदकुशी ने एक बार फिर कई सवाल खड़े किए हैं। वह पारिवारिक उलझनों से परेशान हो गए थे। उनका कहना था कि वह जिन्दगी से काफी फ्रस्ट्रेट हो गए। हैरान करने वाली बात है कि सिविल सेवा परीक्षा में 14वीं रैंक लाने वाला प्रतिभाशाली व्यक्ति भी जीवन की इस स्वाभाविक परेशानी को झेल नहीं पाए और अवसाद से ग्रसित हो गए। लेकिन, गौर कीजिए कि मुकेश पाण्डेय की समस्या इतनी बड़ी थी कि उनको ये अतिवादी कदम उठाना पड़ा?</p>
<p style="text-align:justify;">जरा सोचिए कि उनके इस कदम से उनकी पत्नी और बच्चों के जज्बात क्या होंगे? उनके इस फैसले से उनके परिवार की विकट परिस्थितियों का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। उनको चाहिए था कि वह हालात से लड़ते और पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने की कोशिश को जारी रखते। यकीनन कई बार कोशिश करने से उन्हें कामयाबी जरूर मिलती। वह यह याद रखते कि किस प्रकार सिविल सेवा परीक्षाओं में भी बारंबार असफलताओं के बाद सफलता मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, अफसोस की बात है कि वह इस कठिन परीक्षा को पास करने के बाद भी इससे मिलने वाली सीख को सहेज कर रख नहीं सके। जरा सोचिए, उनके मरने के बाद यदि समस्या का हल हो भी जाए तो क्या वह उस क्षण के सुख को भोगने के लिए मौजूद रहेंगे? उनको यह समझना चाहिए था कि खुद को दर्दनाक मौत देना किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि समस्या का हल परिस्थितियों से डटकर मुकाबला करने में है, चुनौतियों को स्वीकार करने में है, एक प्रतिबद्धता के साथ जुझारूपन दिखाने में है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बात काबिल-ए-गौर है कि भारत में आत्महत्या करने वाले 80 फीसदी लोग पढ़े-लिखे होते हैं। तो कहीं हमारी शिक्षण-व्यवस्था तो त्रुटिपूर्ण नहीं है? इस बहस में न जाते हुए मैं यही सुझाव देना चाहुंगा कि सरकार को चाहिए कि वह युवाओं को मूल्यपरक शिक्षाओं से सुपोषित करे। युवाओं को पैसे की मशीन न बनाकर उन्हें जीवन एवं संबंधियों की महत्ता जैसे विषयों की शिक्षा दें, ताकि उनमें तनाव न आने पाए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को भरपूर समय दें।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी इच्छा व अपेक्षाओं को उन पर न थोपें और उन्हें एक आजाद जिन्दगी जीने की छूट दें। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने परिजनों एवं दोस्तों की मानसिक स्थितियों को भापें और यदि उनकी कोई समस्या है, तो उसका निवारण भी करें। कोई भी दुख या तकलीफ जिन्दगी से बढ़कर नहीं होती। हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा दौर आता है जब सबकुछ खत्म-सा लगने लगता है, लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं कि हम खुद ही खत्म हो जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी यही समस्या है कि हम अपने दुखों को दूसरे के दुखों से तुलना किए बगैर ही सबसे बड़ा समझ बैठते हैं। जिन्दगी कई बार इम्तेहान लेती है तो उसे लेने दीजिए, हौसले को बढ़ा कर रखिए। क्योंकि, जब एक तिनका डूबते का सहारा हो सकता है तो फिर हम मौत को वक्त से पहले क्यों बुलाए? अब बहुत हो गई नासमझी। हमें इसे यहीं रोक देना चाहिए। क्योंकि, आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों से निकलती आह को अनसुना नहीं किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-रिजवान निजामुद्दीन अंसारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2017 23:47:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गरीबी की भेंट चढ़ा पूरा परिवार ,  परिवार के 5 सदस्यों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[चार भाई-बहनों समेत खुद खाया जहर  मरने वालों में दो भाई नाबालिग थे कपूरथला । गरीबी के कारण 21 साल के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने चार छोटे भाई-बहनों को जहर मिला बर्गर खिला दिया और खुद भी अपनी जान दे दी। मरने वाले चार सभी बच्चे नाबालिग थे और उसमें दो लड़कियां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/5-family-members-suicides-due-to-poverty/article-1474"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/note.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चार भाई-बहनों समेत खुद खाया जहर</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong> मरने वालों में दो भाई नाबालिग थे</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कपूरथला ।</strong> गरीबी के कारण 21 साल के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने चार छोटे भाई-बहनों को जहर मिला बर्गर खिला दिया और खुद भी अपनी जान दे दी। मरने वाले चार सभी बच्चे नाबालिग थे और उसमें दो लड़कियां शामिल थीं। यह घटना मंगलवार रात यहां के लक्ष्मी नगर इलाके में हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संदीप शर्मा ने बताया कि 21 वर्षीय अभिमन्यु का परिवार भयंकर गरीबी में था, जिसके कारण उसे इस प्रकार का कदम उठाना पड़ा। शर्मा ने बताया कि अभिमन्यु बाजार से बर्गर लाया था और कथित तौर पर इसमें कोई जहरीला पदार्थ मिला दिया और सभी बच्चों से इसे खाने को कहा। उसने खुद भी यह जहरीला बर्गर खाया और अपनी जान दे दी। चिकित्सा अधिकारी अनूप मेघ के मुताबिक अनु(18 वर्ष), अर्चना (8 वर्ष)और अर्शु (15)ने स्थानीय सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि अभिमन्यु और अनुराग (12), जो शारीरिक तौर पर अक्षम थे, की जालंधर के अस्पताल में मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिमन्यु ने अपनी सात साल की बहन आरती को भी यह बर्गर खिलाया था, जो इस समय अस्पताल में भर्ती है। आरती को बर्गर खाने के बाद जल्दी ही उल्टी हो गई थी। मरने वाले अभिमन्यु ने एक चिट्ठी छोड़ी है, जिसमें लिखा है, ‘पापा, मैं आपको याद कर रहा हूं और मुझे यह सब करने के लिए माफ कर देना, क्योंकि हम सब परिवार पर बोझ थे।’ मृतक के पिता किशोर ठाकुर इस घटना के समय शहर में नहीं थे। वह पेशे से नाई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया कर लिया है और मामले की जांच कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2017 07:13:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किसान आंदोलन: फायरिंग में 6 की मौत, 4 किसानों ने किया सुसाइड</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर: मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में हिंसा का दौर थम नहीं रहा है। मंगलवार को मंदसौर में आंदोलनकारियों ने 8 ट्रक और 2 बाइक को आग के हवाले कर दिया। पुलिस और सीआरपीएफ पर पथराव भी किया। हालत पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ की फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई। इसके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/kisan-andolan-6-died-in-firing-4-farmers-suicides/article-960"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kisan-andolan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंदौर:</strong> मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में हिंसा का दौर थम नहीं रहा है। मंगलवार को मंदसौर में आंदोलनकारियों ने 8 ट्रक और 2 बाइक को आग के हवाले कर दिया। पुलिस और सीआरपीएफ पर पथराव भी किया। हालत पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ की फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों की मांग नहीं माने जाने के बाद उसने ऐसा कदम उठाया</h3>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में पिछले 24 घंटे में कर्ज से परेशान चार किसानों ने सुसाइड कर लिया। वहीं, इनमें से एक किसान नवनाथ के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि किसानों की मांग नहीं माने जाने के बाद उसने ऐसा कदम उठाया है। बता दें महाराष्ट्र के किसान कर्ज माफी जैसी करीब 6 मांगों को लेकर बुधवार को 7वें दिन हड़ताल पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> महाराष्ट्र के नासिक में अंगूर की खेती करने वाले किसान नवनाथ सुसाइड कर लिया। ऐसा कहा जा रहा कि उन्हें इस साल काफी नुकसान हुआ था। नवनाथ ने परिवार के गहने गिरवी रखकर बैंक से 4 लाख का लोन लिया था। परिवार वालों का कहना है कि किसान आंदोलन में कोई फैसला न होने से दुखी होकर उसने यह कदम उठाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कांग्रेस के बंद के एलान का असर</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों की छुट्टियों के बाद कुछ सरकारी और निजी स्लकू 6 जून से खुल गए थे, लेकिन जिला प्रशासन ने बुधवार को छुट्टी के आदेश जारी कर दिए हैं। भोपाल में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और कांग्रेस के बंद के एलान का असर लो फ्लोर बस सेवा समेत दूध की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। जिला प्रशासन और पुलिस का कहना है कि रोज की तरह सब्जी मंडी, टीटीनगर मार्केट, चौक बाजार, बैरागढ़ खुला रहेगा। अस्पतालों के आसपास भी पुलिस बल तैनात किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 22:42:06 +0530</pubDate>
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