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                <title>Govt School - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सरकारी स्कूलों में प्रयोग, प्रोजेक्ट से विकसित होगी वैज्ञानिक सोच, कक्षा 6 से 12वीं तक हैंड्स-ऑन लर्निंग अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग, हर छात्र के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक जरूरी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। जिला शिक्षा विभाग ने लैब आधारित हैंड्स-ऑन शिक्षण को अनिवार्य करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें कक्षा 6वीं से 12वीं तक प्रयोग, प्रोजेक्ट और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/scientific-temper-to-be-developed-in-government-schools-through-experiments-and-projects/article-83219"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/education-officer.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग, हर छात्र के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। जिला शिक्षा विभाग ने लैब आधारित हैंड्स-ऑन शिक्षण को अनिवार्य करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें कक्षा 6वीं से 12वीं तक प्रयोग, प्रोजेक्ट और गतिविधियों के जरिए पढ़ाई पर जोर दिया गया है। विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी विद्यालय प्रमुखों के माध्यम से इन दिशा-निर्देशोें का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। नए आदेशों के तहत विज्ञान शिक्षण को पूरी तरह प्रयोगात्मक और गतिविधि आधारित बनाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि और समझ दोनों बढ़ सके। Govt School News</p>
<p style="text-align:justify;">जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक अब विज्ञान अध्यापक नियमित रूप से लैब में विद्यार्थियों से प्रयोग, मॉडल निर्माण, प्रोजेक्ट व नवाचार गतिविधियां करवाएंगे। इन सभी कार्यों का रिकॉर्ड लॉग बुक में दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। स्कूलों में उपलब्ध विज्ञान और गणित किट्स के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया है। विभाग ने साफ किया है कि कोई भी उपकरण अनुपयोगी या सीलबंद नहीं रहना चाहिए। निरीक्षण के दौरान लापरवाही मिलने पर संबंधित शिक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। वहीं स्कूल प्रमुखों को प्रयोगशालाओं में बिजली, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त रोशनी, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड और वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिल सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रयोग और गतिविधियों से मजबूत होगी विज्ञान शिक्षा | Govt School News</h3>
<p style="text-align:justify;">कक्षा 9वीं से 12वीं तक की विज्ञान कक्षाएं यथासंभव प्रयोगशालाओं में संचालित की जाएंगी और पूरा प्रैक्टिकल पाठ्यक्रम वहीं पूरा कराया जाएगा। वहीं कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को साइंस किट के माध्यम से गतिविधि-आधारित शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक अनिवार्य होगी और उसका नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा। सप्ताह में दो दिन प्रार्थना सभा के दौरान छोटे-छोटे प्रयोग, उपकरणों का प्रदर्शन और रोचक गतिविधियां करवाई जाएगी। इसके अलावा आनंदमय शनिवार के तहत विज्ञान क्विज, मॉडल प्रतियोगिता और नवाचार गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विभाग ने इंस्पायर अवार्ड, विज्ञान संगोष्ठी, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड, बुनियाद और सुपर-100 जैसे कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि हमारा लक्ष्य केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना को विकसित करना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता साईं ने कहा कि इन नवाचारपूर्ण कदमों से विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहारिक और प्रायोगिक अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी वैज्ञानिक सोच सशक्त होगी और नवाचार की नई संभावनाएं विकसित होंगी। Govt School News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:16:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा के शिक्षा विभाग की नई मुहिम</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों का भाषा में धारा प्रवाह बढ़ाने के लिए स्कूलों में होगा रामलीला का मंचन 15 अक्तूबर तक होगा आयोजन, दिए जाएंगे टिप्स | Haryana News बच्चों को आयु के हिसाब से दिए जाएंगे पात्र और संवाद | Haryana News भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। अब शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों (School) में पढ़ने वाले बच्चों की झिझक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ramlila-will-be-staged-in-schools-to-increase-childrens-language-fluency/article-53585"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/bhiwani-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बच्चों का भाषा में धारा प्रवाह बढ़ाने के लिए स्कूलों में होगा रामलीला का मंचन</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>15 अक्तूबर तक होगा आयोजन, दिए जाएंगे टिप्स | Haryana News</li>
<li>बच्चों को आयु के हिसाब से दिए जाएंगे पात्र और संवाद | Haryana News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> अब शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों (School) में पढ़ने वाले बच्चों की झिझक खत्म करने की नई युक्ति निकाली है। बच्चों को किसी भी टॉपिक पर धारा प्रवाह बोलने में सक्षम बनाने के लिए प्रत्येक स्कूल में रामलीला का मंचन का आयोजन होगा। इस रामलीला में बच्चे ही कलाकार के तौर पर शामिल होंगे। बच्चों को उनकी क्लास के हिसाब से रामलीला के मंचन टॉपिक दिए जाएंगे। बड़े बच्चों को बड़े तो छोटों को छोटे टॉपिक दिए जाएंगे, ताकि वे आसानी से उनको याद कर सकें। इसी क्रम में भिवानी जिले के गांव सूई के राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल में स्कूली बच्चों ने रामलीला के मंचन की रिहर्सल की और रामलीला के मंचन करने का अभ्यास किया। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग ने पाँच अक्तूबर से लेकर 15 अक्तूबर तक जिले के प्रत्येक स्कूल में रामलीला के मंचन का आयोजन कराए जाने के निर्देश दिए हैं। भेजे गए निर्देशों में बताया गया कि वे बच्चों को रामलीला के मंचन का अभ्यास करवाएं। बच्चों को रामायण के किसी भी टॉपिक पर धारा प्रवाह में बोले जाने का प्रयास करवाएं। बच्चा अपने आप खड़ा होकर रामायण के उस टॉपिक पर मर्जी से बिना किसी झिझक के श्रोताओं के समक्ष बोले। प्राइमरी स्कूल में पांचवीं तो अन्य स्कूलों में बड़ी कक्षाओं के बच्चों को भी शामिल किया जा सकेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षा के साथ खत्म होगी बोलने में झिझक | Haryana News</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों में आत्म विश्वास कायम करने तथा उनके अंदर की झिझक को खत्म करने के मकसद से शिक्षा विभाग ने प्रत्येक स्कूल में रामलीला का मंचन कराए जाने का फैसला लिया है। रिहर्सल के दौरान बच्चों को किस तरह से रामायाण के टॉपिक को बोलना और उससे पहले याद करने के बारे में जानकारी दी गई। स्कूल में पांचवीं कक्षा के बच्चों को राम, लक्ष्मण, सीता, भरत, शत्रुघ्न आदि के रूप में बाल कलाकारों को तैयार किया गया। उनको यह भी बताया गया कि किस वक्त किस बाल कलाकार को रामायाण के टॉपिक पर बोलना है। करीब दो से तीन घंटे तक बच्चों की स्कूल में रिहर्सल चली।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">जिला शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार मेहता ने बताया कि जिले के सभी स्कूलों में रामलीला के मंचन का आयोजन कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को किसी भी टॉपिक पर धारा प्रवाह में बोलना सिखाया जाएगा। ताकि उनमें आत्म विश्वास की बढ़ोत्तरी हो सकेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि पहले से ही शिक्षा विभाग ने निपुण कार्यक्रम चलाया हुआ है। ताकि बच्चों को हर फिल्ड में निपुण किया जा सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षकों ने भी सराहा फैसला | Haryana News</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं स्कूल के शिक्षक भी सरकार के इस फैसले को सराह रहे हैं। शिक्षिका सुनीता व सुनीता सांगवान ने बताया कि इस तरह के फैसले काफी उपयोगी साबित होंगे। बच्चे में धारा परवाह बढ़ेगा। बच्चों में झिझक खत्म होगी जिसकी वजह से वे ज्यादा कामयाब भी होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="खाना देने वाले की अर्थी पर लिपट कर रोया बंदर, वीडियो आया सामने" href="http://10.0.0.122:1245/monkey-cries-clinging-to-the-bier-on-the-death-of-an-elderly-man-in-amroha/">खाना देने वाले की अर्थी पर लिपट कर रोया बंदर, वीडियो आया सामने</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ramlila-will-be-staged-in-schools-to-increase-childrens-language-fluency/article-53585</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Oct 2023 17:36:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिड-डे-मील में ज्यादा चावल खाने से कुपोषण का शिकार हो रहे बच्चे!</title>
                                    <description><![CDATA[निरोगी हरियाणा की स्क्रीनिंग में हुआ खुलासा फतेहाबाद में 1904 में से 125 बच्चे मिले कुपोषित | Fatehabad News फतेहाबाद (सच कहूँ ब्यूरो)। सरकारी स्कूल में बच्चों को दिए जा रहे मिड-डे-मील  (Midday Meal) में चावल की मात्रा अत्याधिक परोसने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/children-becoming-victims-of-malnutrition-due-to-eating-too-much-rice-in-mid-day-meal/article-51897"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/midday-meal.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">निरोगी हरियाणा की स्क्रीनिंग में हुआ खुलासा</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>फतेहाबाद में 1904 में से 125 बच्चे मिले कुपोषित | Fatehabad News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> सरकारी स्कूल में बच्चों को दिए जा रहे मिड-डे-मील  (Midday Meal) में चावल की मात्रा अत्याधिक परोसने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों में कुपोषण को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तीनों विभागों द्वारा लगाए गए कैम्पों में पता चला है कि बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाना, इसका बड़ा कारण है। Fatehabad News</p>
<p style="text-align:justify;">इन विभागों ने स्क्रीनिंग की तो 1904 में से 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जा रहा है, लेकिन इसका बजट इतना कम है कि रेसिपी बन ही नहीं पा रही है। इसके अलावा जो रेसिपी दी गई है, उसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं। चावल की रेसिपी को कम करके गेहूं को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कुपोषण को खत्म किया जा सके। निरोगी हरियाणा और जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की स्क्रीनिंग रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। Fatehabad News</p>
<p style="text-align:justify;">निरोगी हरियाणा द्वारा जिले में स्क्रीनिंग की गई, इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके अलावा स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर रही जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम को अप्रैल से अगस्त माह तक 91 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1904 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है। इसमें 49 लड़के और 42 लड़कियां कुपोषण का शिकार मिली हैं। Fatehabad News</p>
<p style="text-align:justify;">निरोगी हरियाणा के तहत फतेहाबाद जिले में 4 लाख 62 हजार लोगों की स्क्रीनिंग होनी है। अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके पीछे कारण ये है कि बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है।<br />
<strong>                                                                                      -मेजर डॉ. शरद तुली, उप सिविल सर्जन</strong></p>
<p style="text-align:justify;">स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जा रहा है, लेकिन बजट इतना कम है कि रेसिपी बन ही नहीं पा रही है। इसके अलावा जो रेसिपी दी गई है उसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं। चावल की रेसिपी को कम करके गेहूं को बढ़ावा दिया जाए ताकि कुपोषण को खत्म किया जा सके।<br />
<strong>                                                            -देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की तरफ से स्कूलों में जाकर टीमें छात्रों की स्क्रीनिंग कर रही है। स्क्रीनिंग के दौरान जो छात्र कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं उनके मां-बाप को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत अनुसार जांच भी करवाई जा रही है ताकि बच्चों में कमियों का पता चल पाए और समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।<br />
<strong>                                                                         -सुखदेव सिंह, मैनेजर, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केन्द्र</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">रेसिपी पसंद नहीं कर रहे छात्र | Fatehabad News</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कुपोषण का शिकार न हो इसको लेकर मिड-डे मील दिया जा रहा है। विशेषज्ञों से जब बात की गई तो सामने आया कि मिड डे मील का बजट इतना ज्यादा नहीं है कि बच्चों को पूरा पौष्टिक आहार दिया जा सके। ऐसे में कम बजट के चलते विद्यार्थियों को मिड डे मील में चावल ज्यादा परोसे जा रहे हैं जबकि पौष्टिक माना जाने वाले गेहूं की नाममात्र मात्रा ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानि मिड डे मील में 60 फीसदी चावल आइटम है तो 40 फीसदी गेहूं की रेसिपी दी जा रही है। कुक भी चावल की रेसिपी बनाकर खुश है, क्योंकि चावल बनाने में उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती और ये जल्द ही बन जाते हैं जबकि गेहूं की रेसिपी बनाने में मेहनत और समय दोनों ज्यादा लगता है। इसका असर छात्रों की सेहत पर पड़ रहा है। गेहूं की रेसिपी की बात की जाए तो नमकीन दलिया बनाया जाता है, जिसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं। Fatehabad News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="नशा मुक्ति जागरूकता साइकिल रैली का खरखौदा पहुंचने पर स्वागत" href="http://10.0.0.122:1245/drug-de-addiction-awareness-cycle-rally-welcomed-on-reaching-kharkhoda/">नशा मुक्ति जागरूकता साइकिल रैली का खरखौदा पहुंचने पर स्वागत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/children-becoming-victims-of-malnutrition-due-to-eating-too-much-rice-in-mid-day-meal/article-51897</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Sep 2023 16:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है बशर्ते&amp;#8230;!</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय शिक्षा व्यवस्था उसमें भी खासकर सरकारी तंत्र के अधीन संचालित शिक्षण संस्थाएँ आज भी उस मुकाम पर नहीं पहुँच सकीं जिसकी उम्मीद थी। जिनके लिए और जिनके सहारे सारी कवायद हो रही है वहीं महज रस्म अदायगी करते हुए तमाम सरकारी फरमान एक दूसरे तक इस डिजिटल दौर में फॉरवर्ड कर खाना पूर्ति करते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/government-schools-can-change/article-38763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/haryana-govt-school.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय शिक्षा व्यवस्था उसमें भी खासकर सरकारी तंत्र के अधीन संचालित शिक्षण संस्थाएँ आज भी उस मुकाम पर नहीं पहुँच सकीं जिसकी उम्मीद थी। जिनके लिए और जिनके सहारे सारी कवायद हो रही है वहीं महज रस्म अदायगी करते हुए तमाम सरकारी फरमान एक दूसरे तक इस डिजिटल दौर में फॉरवर्ड कर खाना पूर्ति करते नजर आते हैं। ऐसी तमाम कोशिशों, योजनाओं के बावजूद मौजूदा हालात देख जल्द कुछ अच्छे सुधार की उम्मीद बेमानी है। सबसे ज्यादा बदहाल सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएँ है। सच तो यह है कि भारत में पूरी शिक्षा व्यवस्था यानी बुनियादी से लेकर व्यावसायिक तक बाजारवाद में जकड़ी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी चलते जहाँ निजी या कहें कि आज के दौर के धन कुबेरों या बड़े कॉपोर्रेट घरानों के स्कूल जो फाइव स्टार सी चमक दिखाकर रईसों में लोकप्रिय हैं तो वहीं मध्यमवर्गीय लोगों की पसंद के अपनी खास चमक-दमक, लुभावनी वर्दी, कंधों पर भारी भरकम स्कूल बैग और कई आडंबरों वाले हजारों निजी स्कूल देश की बड़ी आबादी की अच्छी खासी जेब ढ़ीली कर रहे हैं। अंत में बचते हैं साधारण, गरीब व बेहद गरीब तबके के लोग जिनके लिए सिवाय सरकारी स्कूलों के और कोई रास्ता ही नहीं बचता। ऐसे अधिकाँश सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी, एक शिक्षक के भरोसे पूरी स्कूल, सँसाधनों की कमीं, बिल्डिंग का रोना और समय की मनमानी का खुला खेल चलता है। नीतियाँ चाहें जितनी बन जाएँ लेकिन सरकारी स्कूलों में चल रही रीतियाँ बदले बिना सुधार दिखता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बड़ा सच यह भी कि प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले बेहद अच्छी पगार और ढ़ेरों सुविधाओं तथा स्कूली व्यवस्थाओं के लिए कई तरह के फण्ड से हजारों रुपए सालाना खर्चने के बाद भी जर्जर और दयनीय सी दिखने वाली स्थिति के स्कूल कब और कैसे सुधरेंगे बड़ा सवाल है? शायद इसीलिए लगभग हर प्रदेश के शहरों से गाँवों तक के प्रायमरी से लेकर हायर सेकेण्डरी स्कूलों के लिए भारी भरकम बजट पूरा का पूरा खर्चा जाता है, बावजूद उसके स्कूल बिल्डिंग की हालत देखते ही सामने वाला समझ जाता है कि यही इलाके का सरकारी स्कूल है। कोई दो राय नहीं कि देश में सबसे ज्यादा बदहाल सरकारी स्कूले ही हैं। सोचनीय है कि जब नींव ही कमजोर होगी तो आगे क्या होगा या होता होगा?</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे हालातों के बावजूद प्रतिभाओं की कमीं नहीं है और कई संस्थाएं देश का नाम रौशन कर रही हैं। हाल ही में क्वाक्वेरेली साइमंड्स वर्ल्ड यूनिवर्सिटी जो दुनियाभर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की रैंकिंग जारी करती है ने 2022 में विषय वार सूची में आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी दिल्ली, मद्रास और बॉम्बे को विश्व के 100 शीर्ष संस्थानों तथा 35 कार्यक्रमों को विश्व रैंकिंग में जगह दी। यकीनन यह सुखद और उपलब्धिपूर्ण है वह भी तब, जब देश की 80 से 90 फीसदी सरकारी स्कूलों में प्रायमरी से लेकर हायर सेकेण्डरी की तमाम व्यवस्थाएँ भगवान भरोसे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच इसी खाई से पढ़ाई अमीरों के लिए शिक्षा तो गरीबों के लिए साक्षरता के बीच के पेण्डुलम से ज्यादा कुछ नहीं होती। हमें 2018 की विश्व विकास रपट यानी वर्ल्ड डेवलपमेण्ट रिपोर्ट देखना चाहिए जिसमें लर्निंग टू रियलाइज एजुकेशंस प्रॉमिस में भारत में तीसरी कक्षा के तीन चौथाई विद्यार्थी दो अंकों को घटाने वाले सवाल हल नहीं कर पाए और पाँचवीं कक्षा के आधे विद्यार्थी ऐसा नहीं कर सके। साफ है अधिकांश विद्यार्थी पठन दक्षता के न्यूनतम स्तर पर थे। यदि सरकारी नीतियों के चलते यही आगे बने रहेंगे तो प्राइवेट स्कूलों के साधन संपन्न विद्यार्थियों की तुलना में इनका स्तर हमेशा न्यूनतम ही रहेगा। ऐसे में गुणवत्ता की बात करना ही बेमानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों का औसत प्रदर्शन अमीर परिवारों से आने वाले बच्चों की तुलना में कम होता है। एक चौंकाने वाली बात भी इसी रिपोर्ट 2018 की है। जिसमें कहा गया है कि भारत के 1300 गांवों में प्राथमिक विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान 24 प्रतिशत शिक्षक गायब मिले। इसी बीच कोरोना आ गया और दो सत्र कक्षाएँ बन्द रहीं। लंबे समय तक स्कूल बंदी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। इस बीच सरकारी घोषणा हुई कि ‘एक कक्षा, एक टीवी चैनल’ योजना का विस्तार होगा। शायद कोरोना काल में आॅनलाइन पढ़ाई के नतीजों से ऐसा ख्याल आया हो। जब सरकार को स्कूलों पर बजट बढ़ाना था और नए जोश और तौर तरीकों से संचालन कराने की रणनीति बनाना था तो टीवी से पढ़ाई की बात कर बजट कटौती की कोशिश तो नहीं? इस सच को स्वीकारना होगा कि दुनिया ने आॅनलाइन और डिजिटल एजूकेशन के परिणाम और दुष्परिणाम दोनों ही देख लिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना कहें या सच्चाई, सरकारी शिक्षक की पगार की तुलना में बेहद कम में प्राइवेट स्कूल लगातार बहुत अच्छे नतीजे देते हैं तो अपनी इस कमीं या खामीं को सरकारें क्यों अनदेखा करती हैं? हर शिक्षक में नवाचार की संभावनाएं होती हैं लेकिन व्यव्हारिक रूप से सरकारी शिक्षक इस पर ध्यान न देकर केवल बच्चों की परीक्षा पास कराने का जरिया से ज्यादा कुछ नहीं बनते। यही बड़ी चूक है। गाँवों व कस्बों के ज्यादातर स्कूल शिक्षक विहीन होते हैं तो कस्बों, शहरों में जुगाड़ के दम पर एक ही विषय के कई-कई पोस्टेड हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फजीर्वाड़ा कर अन्य विषय के शिक्षक खाली जगहों पर जा धमकते हैं। नीति आयोग की विद्यालयीन शिक्षा गुणवत्ता सूचक (एसईक्यूआई) की पहली रिपोर्ट ही बताती है कि बिहार में 80, झारखण्ड में 76, तेलंगाना में 65, मप्र में 62 प्रतिशत तो छत्तीसगढ़ में 46 प्रतिशत स्कूल प्राचार्य विहीन थे। अब तक तो स्थिति और भी बदतर हो चुकी होगी। अपात्र शिक्षकों के कंधों पर प्रधानाचार्य बोझ डाल कागजों में गोपाल गाँठ बिठायी जाती है। आलम यह है कि वरिष्ठ शिक्षक तो छोड़िए कहीं माध्यमिक तो कहीं प्राथमिक या संविदा या अतिथि शिक्षक ही एक नहीं कई जगह संस्था प्रमुख बन जाते हैं जो बाबू से लेकर दफ्तरी तक का काम करते हैं। सवाल यही कि ये पढ़ाएँगे कब और कैसे?</p>
<p style="text-align:justify;">हाँ, थोड़े से प्रयासों और जरा सी धनराशि से मौजूदा सरकारी स्कूलों का सिस्टम सुधर सकता है। महज एक पक्के सरकारी शिक्षक की मासिक पगार के खर्च जितने में उस पूरे स्कूल का कायाकल्प और लगातार निगरानी हो सकती है। करना इतना होगा कि स्कूलों में सीसीटीवी अनिवार्य हों जो प्रत्येक कक्षा, कार्यालय, प्रवेश द्वार व जरूरत वाले स्थानों पर लगे। शर्त इतनी वर्चुअली रात-दिन चालू रहें और कैमरों का रिकॉर्ड रखने की जवाबदारी तय हो तथा सारे कैमरे ब्लॉक से लेकर प्रदेश और देश के संबंधित विभागों से सीधे जुड़ें जिससे कहीं से भी कोई जिम्मेदार एक्सेस कर सके। इनमें मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री दफ्तर तक शामिल हो। बस देखिए इस औचक निरीक्षण प्रणाली के नतीजे चौंकाने वाले होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कैसे मनमानी पोस्टिंग, कहीं शिक्षकों की जबरदस्त कमीं तो कहीं भरमार का खेला खत्म होता है। मध्यान्ह भोजन, साइकिल, लैपटॉप, पुस्तक, वर्दी, वजीफा आदि में हर महीने करोड़ों खर्च होते हैं वहीं जरा से खर्च पर आल इज वेल एण्ड आल विल बी वेल को अंजाम दिया जा सकता है। यदि भारत को दोबारा विश्वगुरू बनाने का सपना सच करना है तो डिजिटल क्रान्ति के जरिए अपने लाचार सरकारी स्कूलों के सिस्टम को सुधारने का तकनीकी गुर अपनाना होगा ताकि पानी की तरह बह रहे पैसों का सदुपयोग हो सके और सरकारी शिक्षा में सुधार, बढ़ते बाजारवाद को रोकने की नई क्रान्ति से दूसरे देशों के लिए भी मिशाल बन सके।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार- ऋतुपर्ण दवे</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Oct 2022 09:28:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>स्कूलों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने अध्यापक राजिन्द्र सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[राजिन्द्र सिंह ने अपने हाथों से बदली कोठे इन्द्र सिंह स्कूल की नुहार बठिंडा(अशोक वर्मा)। कोठे इंद्र वाला का सरकारी एलिमेंट्री स्कूल अब चमकने लगा है। कई वर्ष पहले इस स्कूल की हालत ऐसी नहीं थी। गोनियाना निवासी व स्कूल के अध्यापक राजिन्द्र सिंह के प्रयासों से इस सरकारी स्कूल के अच्छे दिन आने लगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-teacher-rajendra-singh-making-a-difference-in-beautification-of-govt-school/article-4963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/punjab-teacher-rajendra-singh-making-a-difference-in-beautification-of-govt-school-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">राजिन्द्र सिंह ने अपने हाथों से बदली कोठे इन्द्र सिंह स्कूल की नुहार</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(अशोक वर्मा)। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कोठे इंद्र वाला का सरकारी एलिमेंट्री स्कूल अब चमकने लगा है। कई वर्ष पहले इस स्कूल की हालत ऐसी नहीं थी। गोनियाना निवासी व स्कूल के अध्यापक राजिन्द्र सिंह के प्रयासों से इस सरकारी स्कूल के अच्छे दिन आने लगे हैं। गांव वासी भी कहने लगे हैं कि राजिन्द्र सिंह ने बच्चों के हित में ‘पुण्य के काम’ का जो रास्ता अपनाया है, उस पर हर किसी की पैर रखने की हिम्मत नहीं होती ती यह काम सिर्फ ऊंची सोच वाला व्यक्ति ही कर सकता है। इस अध्यापक द्वारा यह सेवा नि:स्वार्थ की जा रही है। पिछली छुट्टियां राजिन्द्र सिंह ने गोनियाना मंडी से थोड़ी दूरी पर स्थित गांव कोठे इन्द्र सिंह वाला के स्कूल में बिताई हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अध्यापक राजिन्द्र सिंह ने छुट्टियों में बाहर घूमने जाने की बजाए स्कूल में रहकर स्कूल को मॉर्डन बनाने में बिताया समय</h2>
<p style="text-align:justify;">इस अरसे दौरान पंजाब भर के हजारों अध्यापक सैलानी स्थानों की सैर करने गए परन्तु इस स्कूल के अध्यापक राजिन्द्र सिंह ने इस समय का प्रयोग स्कूल को मॉर्डन दिशा प्रदान करने के लिए किया है। उसने स्कूल की दीवारों पर बहुत सुंदर पेंटिंग बनाईं, जिनमें जंगल का दृश्य, इंद्र धनुष, डोरेमोन, बत्तखें आदि शामिल हैं। इस कलाकारी का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूल को भी प्राईवेट स्कूल की तरह खूबसूरत व आर्कषण का केंद्र बनाना है, जिससे यहां पढ़ने आने वाले बच्चे खुश व कुछ सीख कर समाज में अन्यों को शिक्षा दें।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों में आत्मविश्वास की भावना पैदा करने के लिए साफ सुथरी वर्दियां व गले में पहचान पत्र पहनकर रखने भी इसी ही अध्यापक ने सिखाए हैं। बच्चों में देश भक्ति की अलख जगाने के लिए कमरों में चंद्र शेखर आजाद, शहीद भगत सिंह व कल्पना चावला की तस्वीरों भी लगाई हैं। इन सबके के लिए स्कूल के पास न तो कोई फंड था व न ही पिछले दो वर्षों से स्कूल और किसी अनुदान राशि की सरकारी मेहर हुई है गांववासी बताते हैं कि रंग खराब होने से स्कूल की इमारत की छवि ही बिगड़ गई थी यही नहीं कमरों को मुरम्मत की भी जरूरत थी इसे राजिन्द्र सिंह का जुनून ही कहा जा सकता है कि उन्होंने सारा खर्च वेतन रूपी अपनी नेक कमाई में से किया, जिससे स्कूल की नुहार ही बदल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">राजिन्द्र सिंह ने स्कूल में डिजिटल पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास रूम और कंप्यूटर रूम भी अपने हाथों से तैयार किया है। अपने विद्यार्थियों के साथ खड़े मास्टर रजिन्दर सिंह ने बताया कि पेंटिंग, बिजली व लकड़ी का काम उसने अपने हाथों से किया है। यह काम भी उस वक्त जब स्कूल में वह अकेला ही था क्योंकि इस स्कूल में अध्यापकों के दो पद थे, जिनमें से एक सेवानिवृत हो गया था।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Jul 2018 09:11:12 +0530</pubDate>
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                <title>लिजवाना खुर्द के सरकारी स्कूल में जलभराव</title>
                                    <description><![CDATA[उचित प्रबंध न होने से बिगड़े हालात, कन्या स्कूल में किया शिफ्ट जुलाना (कर्मवीर)। सोमवार रात व मंगलवार को जुलाना क्षेत्र में हुई जोरदार बरसात के कारण खेतों में तो हजारों एकड़ फसल पानी में डूब ही गई साथ में गांवों में तालाब ओवर फ्लो होकर बरसात का पानी घरों तथा सरकारी संस्थानों तक भी पहुंच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/water-logging-in-government-school/article-2825"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/school.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">उचित प्रबंध न होने से बिगड़े हालात, कन्या स्कूल में किया शिफ्ट</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जुलाना (कर्मवीर)। </strong>सोमवार रात व मंगलवार को जुलाना क्षेत्र में हुई जोरदार बरसात के कारण खेतों में तो हजारों एकड़ फसल पानी में डूब ही गई साथ में गांवों में तालाब ओवर फ्लो होकर बरसात का पानी घरों तथा सरकारी संस्थानों तक भी पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">लिजवाना खुर्द गांव में पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण बरसात का पानी लड़कों के प्राईमारी स्कूल में भर गया। स्कूल तालाब बन गया। बुधवार को स्कूल के छात्रों को गांव के बीच में बने कन्या प्राईमरी स्कूल में शिफ्ट करना पड़ा। लिजवाना खुर्द गांव में लड़कों का प्राईमरी स्कूल सिरसा खेड़ी गांव के रास्ते पर गांव से बाहर स्थित है। स्कूल का लेवल जमीन के लेवल से काफी नीचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को हुई जोरदार बारिश के चलते स्कूल की पानी की निकासी नहीं होने के कारण स्कूल तालाब बन गया। आसपास के उपल्ले व गंदगी भी स्कूल में पहुंच गई। इसके चलते बुधवार को छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो छात्रों को कन्या स्कूल में शिफ्ट कर दिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं ग्रामीण</h1>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जगजीत, प्रवीन, राजेश, रामकुवार व काला का कहना था कि स्कूल में थोड़ी बरसात होते ही पानी भर जाता है। स्कूल का लेवल जमीन के लेवल से नीचा होने के कारण व पानी की निकासी नहीं होने के कारण स्कूल में कई फुट पानी जमा है। स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">नहीं पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों में रोष</h1>
<p style="text-align:justify;">स्कूल में जलभराव की शिकायत ग्रामीणों द्वारा खंड शिक्षा कार्यालय में दी गई। शिकायत करने के बाद भी खंड शिक्षा अधिकारी ने गांव में पहुंचकर स्कूल का हाल देखना भी मुनासिब नहीं समझा। इससे ग्रामीणों में शिक्षा विभाग के प्रति रोष पनप रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना था कि खंड शिक्षा कार्यालय बच्चों की पढ़ाई प्रति गंभीर नहीं है। जब स्कूल में पानी भर गया है तो बीईओ को स्कूल का दौरा कर इसका समाधान करना चाहिए था। ग्रामीणों ने, स्कूल प्रबंधक कमेटी तथा अध्यापकों ने मिलकर ही छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो इस कारण स्कूल के बच्चों को कन्या स्कूल में शिफ्ट कर दिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">स्कूल में बरसात के कारण भर जाता है पानी : सुनील</h1>
<p style="text-align:justify;">बरसात होते ही स्कूल में बरसात का पानी जमा हो जाता है। प्रशासन को कई बार इसके बारे में सूचित किया जा चुका है।<br />
<strong>सुनील कुमार, स्कूल इंचार्ज।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 00:15:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अभिभावकों ने स्कूल में जड़ा ताला</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल बिल्डिंग में भरा है बारिश का पानी फरीदाबाद (सच कहूँ न्यूूज)। बेटी पढाओ की दुआई देने वाली सरकार में बेटी पढें तो पढें कैसे-ये सबाल फरीदाबाद के संत नगर में खुले हुए सरकारी स्कूल की बेटिया सरकार से कर रही हैं, स्कूल परिसर और कक्षाओं में बरसात का पानी जमा हो रखा है, छुट्टियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/parents-locked-the-school/article-2084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/school-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">स्कूल बिल्डिंग में भरा है बारिश का पानी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद (सच कहूँ न्यूूज)।</strong> बेटी पढाओ की दुआई देने वाली सरकार में बेटी पढें तो पढें कैसे-ये सबाल फरीदाबाद के संत नगर में खुले हुए सरकारी स्कूल की बेटिया सरकार से कर रही हैं, स्कूल परिसर और कक्षाओं में बरसात का पानी जमा हो रखा है, छुट्टियों के बाद स्कूल खुले हुए 4 दिन बीत गये हैं मगर बच्चों की एक भी दिन क्लास नहीं लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्यापक और बच्चे रोजना स्कूल आते हैं मगर बरसात का पानी भरा होने के कारण वापिस लौट जाते हैं। जिससे गुस्साये छात्रों के परिजनों ने स्कूल के गेट से ताला लगा दिया है और मांग की है कि जब तक स्कूल से बरसात का पानी निकाल नहीं दिया जाता और जर्जर इमारत को ठीक नहीं करवा दिया जाता तब तक वो स्कूल का ताला नहीं खोलेंगे।</p>
<h2>चार दिनों से नहीं हो रही पढ़ाई</h2>
<p>संत नगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला यानि कि सरकारी स्कूल में 4 दिन पहले आई बरसात के चलते पानी भर गया जो कि स्कूल परिसर में ही नहीं क्लास रूम और प्रिंसीपल दफ्तर में भी जमा हो गया। बच्चें पढ़ने के लिए आते हैं मगर पानी भरा हुआ देख वापिस लौट जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्राओं का कहना है कि स्कूल की इमारत पूरी तरह से जर्जर हो गई है जिससे कभी भी कोई बडा हादसा छात्रों के साथ घटित हो सकता है। बच्चों के अभिभावकों की माने तो कई दशकों से इस स्कूल में बरसाती पानी भरने की समस्या बनी हुई है जिसकी शिकायत केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर एवं केबिनेट मंत्री को भी दे चुके हैं मगर कोई हल नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 01:14:45 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म, सरकारी स्कूलों में लौटी रोनक</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर प्रिंसीपल्स ने करवाई स्कूलों की साफ-सफाई सरसा (सुनील वर्मा)। स्कूलों में एक माह का ग्रीष्म कालीन अवकाश शुक्रवार को समाप्त हो गया। अब शनिवार एक जुलाई से सरकारी स्कूल खुलेंगे। स्कूल खुलने के बाद विभाग द्वारा शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए प्रयास शुरू होंगे, जिसके लिए विभाग ले तैयारियां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/summer-vacation-end-school-start/article-1827"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/school.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">शिक्षा निदेशा<strong>लय के निर्देश पर प्रिंसीपल्स ने करवाई स्कूलों की साफ-सफाई</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> स्कूलों में एक माह का ग्रीष्म कालीन अवकाश शुक्रवार को समाप्त हो गया। अब शनिवार एक जुलाई से सरकारी स्कूल खुलेंगे। स्कूल खुलने के बाद विभाग द्वारा शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए प्रयास शुरू होंगे, जिसके लिए विभाग ले तैयारियां कर ली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि इसी संदर्भ में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने गत दिवस प्रदेश के सभी स्कूल मुखियाओं को पत्र भेजकर विद्यालय खुलने की तैयारी करने के निर्देश दिए थे। पत्र में कहा गया था कि जब विद्यालय खुले तो सभी कक्षाएं, बैंच इत्यादि साफ-सूथरे हो, ताकि विद्यार्थियों को पहले दिन किसी भी असुविधा का सामना ना करना पड़े।</p>
<h2 style="text-align:justify;">होमवर्क पूरा करने में जुटे रहे विद्यार्थी</h2>
<p style="text-align:justify;">गर्मी की छुट्टी में अध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों को लम्बा-चौड़ा होमवर्क दे दिया गया था। कुछ बच्चों ने जहां गर्मी की छुट्टी में अपने माता-पिता के साथ घूमने गए तो वहीं कुछ ने अपनी नानी के घर जाकर छुट्टिया मनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बच्चे होमवर्क में पिछड़ जाते है। मौैज मस्ती करके घर लौटे अधिकत्तर छोटी कक्षाओं के बच्चे शुक्रवार को अपना होमवर्क करने में व्यस्त रहे। वहीं बच्चों के अभिभावक भी शुक्रवार को बच्चों की यूनीफार्म सफाई, पे्रस करना, किताब-कॉपियों के साथ स्कूल बैग, लंच बॉक्स आदि के इंतजाम करने में जूट रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>सरकारी स्कूल में गर्मियों के अवकाश शुक्रवार को समाप्त हो चुके है और शनिवार से सभी सरकारी स्कूल खुलेंगे। विभागीय निर्देशों के अनुसार सभी स्कूलों की साफ-सफाई करवा दी गई है। </em></p>
<p style="text-align:justify;"><em>-डॉ.यज्ञदत्त वर्मा, डीईओ, सरसा। </em></p>
<h2 style="text-align:justify;">ये दिए थे निर्देश</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कक्षा कक्ष, बेंचों और कुर्सियों को साफ करवाना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>ब्लैक बोर्ड, व्हाइट बोर्ड, ग्रीन बोर्ड को प्रयोग योग्य बनाना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कंप्यूटर रूम को चका-चक करना और सभी कंप्यूटर को चलने की स्थिति में बनाना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>विद्यालय पुस्तकालय में बैठने की व्यवस्था, पुस्तकों अलमारियों की सफाई करवाना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>स्कूल में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बिजली व्यवस्था, कमरों में हवा और रोशनी के प्रबंध करना। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>विद्यालय की इमारतों की छतों, पानी की निकासी, खेल के मैदान का ट्रैक की मुरम्मत करवाना।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2017 01:40:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऐसे में मुफ्त शिक्षा कैसे दे पाएंगे?</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के रेवाड़ी की एक छात्रा ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों के साथ सरकारों की कलई खोल कर रख दी है। 1937 के राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में ही महात्मा गांधी ने मुफ्त शिक्षा की परिकल्पना रखी थी। 1966 में कोठारी आयोग ने पड़ोस स्कूल की कल्पना प्रस्तुत की। 1968 में बनी देश की पहली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/how-to-give-free-education-in-such-a-way/article-962"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हरियाणा के रेवाड़ी की एक छात्रा ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों के साथ सरकारों की कलई खोल कर रख दी है। 1937 के राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में ही महात्मा गांधी ने मुफ्त शिक्षा की परिकल्पना रखी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">1966 में कोठारी आयोग ने पड़ोस स्कूल की कल्पना प्रस्तुत की। 1968 में बनी देश की पहली शिक्षा नीति ने भी इसका समर्थन किया। इसके बाद भी देश में अगर सरकारी स्कूल सभी की जद तक नहीं पहुंच सका हैं, और देश में छ: वर्ष से चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त और सरकारी शिक्षा को लेकर किस बात की ढपली पीटी जाती है?</p>
<p style="text-align:justify;">अगर ऐसे में हरियाणा की उस छात्रा के भूख हड़ताल के निहितार्थ अर्थ को देखे, तो सच्चाई पानी की तरह साफ होती हैं, कि सरकारी स्कूलों की देश में वास्तविक स्थिति क्या है। वर्तमान दौर में देश के भीतर जहाँ सरकारी स्कूलों को अपने-अपने तर्क पर राज्य सरकारे बंद कर रही हैं, इससे सरकारों का लक्ष्य सब पढ़े- सब बढ़े कैसे पूर्ण होंगे?</p>
<p style="text-align:justify;">यह देश के समक्ष विडंबना नहीं तो क्या है कि हमारे यहां गरीबीयत की लक्ष्मण रेखा 26 और 32 रुपये में तय की जाती है। फिर पूर्ण साक्षरता का मिशन कैसे प्राप्त हो सकता है? मध्यप्रदेश में जहां लगभग 13 हजार सरकारी स्कूलों को क्लोजर एन्ड मर्ज के नाम पर बंद करने की सरकारी साजिश चल रही है, वहीं राजस्थान में भी 17 हजार के करीब स्कूलों को बंद करने की कोशिश हो रही है,</p>
<p style="text-align:justify;">यही स्थिति देश के अन्य हिस्सों की है। ऐसे में सरकार के तर्क पर गौर करें कि इन स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच रहे। तो यह उचित नहीं लगता। ऐसे में समझ आता है कि कहीं छुटभैयों की पहुंच के कारण शिक्षा के बाजारीकरण पर सरकारें, तो नहीं उतारू हो गई हैं, इन दोनों बात में फर्क देखना होगा, क्योंकि जिस देश के एक चौथाई बच्चे चार से चौदह वर्ष के बीच हैं, फिर यह समझ से परे है कि बच्चे कैसे इन स्कूलों तक नहीं पहुंच रहे?</p>
<p style="text-align:justify;">एक तथ्य यह भी हो सकता है कि सरकारी स्कूलों की अधोसंरचना और खामियों से उबकर जनता ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से दूर रखना उचित समझा हो। तो ऐसे में सरकारों को सरकारी स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए, न कि सरकारी स्कूलों को बंद करना समस्या की संजीवनी हो सकती है। दुनिया के प्रसिद्ध दर्शनिक प्लूटो मानते थे कि स्कूलों को कभी निजी हाथों में नहीं जाने देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर जिस हिसाब से देश में शिक्षा प्रणाली गर्त में जाती दिख रही है, वह बताती है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को सिंगापुर और फिनलैंड के नजदीक भटकने में वर्षों लगेंगे। यहां तक कि मालदीव और श्रीलंका जैसे देश हमसे बेहतर स्थिति में है। भारत में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का एक मुख्य कारण निजी स्कूलों को बढ़ावा देना भी है,</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके कारण गरीब बच्चे शिक्षा से दूर रह जाते हैं। हमारे देश की साक्षरता वर्तमान में लगभग 75 फीसद है, तो उसका कारण सरकार की सरकारी स्कूलों की अनदेखी के साथ निजी स्कूलों को बढ़ावा देना है। फिनलैंड, नार्वे, अजरबैजान ऐसे देश हैं, जो 100 प्रतिशत साक्षर हैं। यह देश के सामने विडंबना है कि हम अजरबैजान जैसे देश की बराबरी साक्षरता के मामले में नहीं कर पा रहे हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">फिर अन्य विकसित देशों के समक्ष खड़े होने की हम सोच ही नहीं सकते। इन तथ्यों को आधार मानें, तो शिक्षा को लेकर हमारे देश की नीति में ही झोल मालूम होता हैं। शिक्षा किसी देश का विकसित अवस्था प्राप्त होने की जननी होती है। अगर देश के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती, फिर वे देश के विकास और देश की समृद्धि के वाहक सही से नहीं बन सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में एक ओर 83 करोड़ के आस-पास जनसंख्या गांवों में रहती है और देश की कुल आमदनी का 58 फीसद हिस्से के हकदार अगर गिने-चुने व्यक्तियों के हाथ में हैं, फिर सरकार को नि:शुल्क शिक्षण पर जोर देना चाहिए, क्योंकि अगर देश मे गरीबी की लकीर सरकारी आंकड़े में 30-32 रुपये में अमीर हो जाती है, ऐसे में निजी स्कूलों में 4-5 सौ रुपये की फीस अभिवावक नहीं अदा कर सकते। देश में पूर्ण साक्षरता की बात हमारी रहनुमाई व्यवस्था करती है। उसको प्राप्त करना निजी स्कूलों की मनमानी और सरकारी स्कूलों की अन्देखी में नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-महेश तिवारी</strong></p>
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</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 23:04:44 +0530</pubDate>
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