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                <title>Environmental Pollution - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Environmental Pollution RSS Feed</description>
                
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                <title>संगरूर : पराली जलाना पड़ा भारी, 142 किसान पहुंचे जेल</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों ने अवशेष न जलाने के लिए सरकार की ओर से ऐलानी गई मुआवजा राशि के फार्म भी भरे।
अब तक इस स्कीम का लाभ हासिल करने के लिए 965 किसानों की ओर से अपने आवेदन जमा करवाए गए हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/police-and-department-alert-about-environmental-pollution/article-11120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/environmental-pollution1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सख्ती। पर्यावरण प्रदूषण को लेकर पुलिस व विभाग स्तर्क | Environmental Pollution</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>200 से अधिक किसानों पर हुए मामले दर्ज</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर(सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> जिला संगरूर में पराली जलाने की प्रक्रिया को मुकम्मल <strong>(Environmental Pollution)</strong> तौर पर रोकने के लिए जिला प्रशासन की ओर से तेज की चौकसी मुहिम के अंतर्गत अब तक 200 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और इस मामले में 142 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी मुताबिक आज 9 सब -डिविजनल सांझी टीमों की निगरानी में समूह अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से हर गांव में पूरी छापेमारी की गई और धारा-188 के अंतर्गत 17 एफआईआर दर्ज की गई। 27 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया। चौकसी टीमों की प्रेरणा से कई किसानों ने पराली जलाने से तौबा की और भविष्य में भी पराली न जलाने का प्रण किया।</p>
<h2>कई किसानों ने मौके पर ही पराली जलाने से तौबा की</h2>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान कई किसानों ने अवशेष न जलाने के लिए सरकार की ओर से ऐलानी गई मुआवजा राशि के फार्म भी भरे। उन्होंने बताया कि अब तक इस स्कीम का लाभ हासिल करने के लिए 965 किसानों की ओर से अपने आवेदन जमा करवाए गए हैं। डिप्टी कमिशनर घणशाम थोरी ने बताया कि सरकार द्वारा पराली न जलाने वाले किसानों के लिए मुआवजा राशि ऐलाने जाने के बाद जिला संगरूर के गांवों में बड़ी संख्या में उन किसानों की ओर से फार्म भरने की प्रक्रिया जारी है जो कि पराली को जलाने की जगह पर योग्य प्रबंधन कर रहे हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>डिप्टी कमिशनर ने कहा कि पराली प्रबंधन मुहिम में योगदान देने वाले</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> किसानों को वीआईपी कार्ड जारी किये जा रहे हैं, </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिससे इन किसानों को सरकारी विभागों में काम करवाने समय प्राथमिकता दी जायेगी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>डिप्टी कमिशनर ने समूह उप मंडल मैजिस्ट्रेट को यह हिदायत भी दी </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कि पराली जलाने वालों को लगाए जाने वाले जुर्मानों की </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तत्काल वसूली के लिए कोर्ट में चालान पेश किये जाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पंजाब सरकार की ओर से </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जारी आदेशों की सख़्ती के साथ पालना को यकीनी बनाया जाना लाजिमी है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>डिप्टी कमिशनर ने बिना सुपर एसएमएस प्रणाली से चलने वाली कम्बाईनों को जब्त करने </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जुर्माने वसूलने की कार्रवाई में तेजी लाने के आदेश दिए। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>थोरी ने बताया कि जिला पुलिस और प्रशासन की ओर से आज 20 स्थान पर फ्लैग मार्च किये गए </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>25 विशेष पुलिस दस्ते गश्त कर रहे हैं।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Nov 2019 20:57:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सावधान! खुले कुड़ा जलाया या फेंका तो होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[खुले में कूड़ा न डाले व जलाये और पर्यावरण को प्रदूषित न करें।
सीएसआइ सुभाष सैनी, एएसआइ सुरेंद्र कुमार व एएसआइ राहुल की टीम ने
 शुक्रवार को शहर में कूड़ा जलाने व कूड़ा फेंकने वाले लोगों व संस्थानों
के चालान काटने के अभियान को जारी रखा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/municipal-corporation-strict-about-increasing-environmental-pollution/article-11072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/environmental-pollution.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को लेकर</h2>
<h2 style="text-align:center;">नगर निगम सख्त कार्रवाई के मूड़ में (Environmental pollution)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> तीन दिनों में 31 लोगों व संस्थानों के काटे जा चुके चालान</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार(सच कहूँ न्यूज)।</strong> पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाना प्रत्येक शहरवासी की (Environmental pollution) जिम्मेदारी है। हमें अपनी इस जिम्मेदारी को गंभीरता के साथ निभाना होगा। अन्यथा नगर निगम प्रशासन की ओर से एनजीटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम अधीक्षक अभियंता रामजीलाल ने शहरवासियों को अपील करते हुए कहां। उन्होंने कहा कि खुले में कूड़ा फेंकने वाले व जलाने वाले दोनों के खिलाफ नगर निगम की टीम अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम द्वारा पिछले तीन दिनों में 31 लोगों व संस्थानों के खुले में कूड़ा डालने व जलाने को लेकर 24 हजार 200 रूपये का जुर्माना अब तक किया जा चुका है। ऐसे में लोगों से निगम प्रशासन की अपील है कि वह खुले में कूड़ा न डाले व जलाये और पर्यावरण को प्रदूषित न करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>-सीएसआइ सुभाष सैनी, एएसआइ सुरेंद्र कुमार व एएसआइ राहुल की टीम ने शुक्रवार को शहर में कूड़ा जलाने व कूड़ा फेंकने वाले लोगों व संस्थानों के चालान काटने के अभियान को जारी रखा।</em></p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआइ सुभाष सैनी ने बताया कि शुक्रवार को जिंदल चौक से लेकर इंडस्टियल एरिया में नजदीक दो व्यक्तियों को कचरा में आग लगाते हुए पकड़ा। दोनों से 500 – 500 का जुर्माना वसूल किया । सेक्टर 27 व 28 में कूड़ा जलाने पर कई उद्योगों को जुर्माना किया गया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2019 20:40:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आपदा प्रबंधन में कमी व पर्यावरण प्रदूषण बन रहे महामारी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में आपदा प्रबंधन की हालत बहुत ही खराब है। बड़ी तो बड़ी छोटी-छोटी घटनाओं में दर्जन भर लोगों की जान पलक झपकते ही चली जाती है जबकि तब तक राहत कार्य शुरू भी नहीं हो पाते। सूरत में घटित एक कोचिंग संटर में आग की दुर्घटना में करीब डेढ़ दर्जन छात्र मौत के आगोश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/environmental-pollution-2/article-9325"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/environmental-pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में आपदा प्रबंधन की हालत बहुत ही खराब है। बड़ी तो बड़ी छोटी-छोटी घटनाओं में दर्जन भर लोगों की जान पलक झपकते ही चली जाती है जबकि तब तक राहत कार्य शुरू भी नहीं हो पाते। सूरत में घटित एक कोचिंग संटर में आग की दुर्घटना में करीब डेढ़ दर्जन छात्र मौत के आगोश में समा गए, जबकि उनको पूरी तरह से बचाया जा सकता था। मानव जनित दुर्घटनाओं से प्रति वर्ष हजारों लोग देश में काल कवलित हो रहे हैं लेकिन प्रशासन व सरकार है कि जरा सी भी सीख नहीं ले रहे। देश के शहरी क्षेत्रों में एक बहुत बड़ी आबादी तंग कॉलोनियों व असुरक्षित बिल्डिंगस में रहने का मजबूर है, जिन्हें आग, बाढ़, भूकंप के वक्त आपात सहायता पहुंचा पाना बहुत ही मुश्किल है। इस पूरी अव्यवस्था के लिए भ्रष्ट राजनेता व अधिकारी-कर्मचारी जिम्मेवार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अवैध नगरीकरण, उस पर अवैध भवनों का निर्माण आज देश के जी का जंजाल बन चुका है। सरकारी स्तर पर आपदा राहत संसाधनों जिसमें फायर ब्रिगेड, ग्रांउड फोर्स यूनिटस की बेहद कमी है। सूरत में घटित घटना में तीन मंजिला कोचिंग कम्पलेक्स सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं था, भीड़भाड़ के चलते फायर ब्रिगेड वहां तक नहीं पहुंच सकी। फिर आग से बचने के लिए जो छात्र कूद रहे थे उन्हें बचाने के लिए ग्राउंड फोर्स, जाल आदि कुछ भी उपलब्ध नहीं था। शहरी क्षेत्रों में आगजनी की हर दुर्घटना में बार-बार यही खामियां सामने आती हं वह उपहार सिनेमा अग्निकांड हो या डबवाली हरियाणा के स्कूल में लगी आग हो या कलकत्ता के अस्पताल में लगी आग हो, कई घटनाओं को घटित हुए दशकों हो गए परन्तु नगरपालिका, नगर निगम, राज्य सरकार या केन्द्र सरकार इन समस्याओं का स्थाई हल करने में अभी भी नाकाम हैं। राजनेता सरकारें बनाने के लिए मुफ्त सामान बांटने की करोड़ों अरबों रूपयों की लुभावनी घोषणाएं करते हैं, सरकार बनने पर बेमतलब की लुभावनी वायदापूर्ति योजनाओं एवं उनके प्रचार पर अरबों रूपया बर्बाद भी कर रहे हैं, परन्तु आमजन की समस्याएं जस की तस हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी देश को पर्यावरण प्रदूषण से लड़ने एवं आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निवेश की बहुत ज्यादा जरूरत है परन्तु घिसेपिटे तौर तरीकों से आगे कोई भी नहीं सोच रहा। यदि ज्यादा कुछ नहीं किया गया तो आने वाले वक्त में पर्यावरण प्रदूषण महाआपदा के रूप में भारत जैसे देशों पर टूटने वाला है, लोग बीमारियों, भूख-प्यास, तूफान, कटाव, धुएं से मरेंगे लेकिन सरकार मुआवजे व लीपापोती के प्रबंधों में वक्त व पैसा बर्बाद करने तक ही सीमित रहने वाली है। आपदा प्रबंधन में नगरीकरण में सुधार हो, पुरानी बसावट में सुविधाएं जोड़ी जाएं, प्लास्टिक का प्रयोग कम हो, अवैध खनन, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण को रोका जाए ताकि आपदा में जन-धन की हानि कम से कम हो।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/environmental-pollution-2/article-9325</link>
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                <pubDate>Sun, 26 May 2019 21:38:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रकाश प्रदूषण की अनदेखी पर्यावरण के लिए घातक</title>
                                    <description><![CDATA[हम में से अधिकांश लोग पर्यावरण प्रदूषण के मूल कारकों वायु,जल, ध्वनि आदि से परिचित हैं। लेकिन क्या कृत्रिम प्रकाश के अत्यधिक और अनावश्यक प्रयोग से पैदा होने वाले लाइट पॉल्यूशन आपकी नजर में हैं।शायद नहीं।अधिकांश लोगों को न प्रकाश प्रदूषण की जानकारी है ,न इसके साइड इफेक्ट का पता है।प्रकाश प्रदूषण कृत्रिम प्रकाश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/environmental-pollution/article-8837"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/csadfr.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हम में से अधिकांश लोग पर्यावरण प्रदूषण के मूल कारकों वायु,जल, ध्वनि आदि से परिचित हैं। लेकिन क्या कृत्रिम प्रकाश के अत्यधिक और अनावश्यक प्रयोग से पैदा होने वाले लाइट पॉल्यूशन आपकी नजर में हैं।शायद नहीं।अधिकांश लोगों को न प्रकाश प्रदूषण की जानकारी है ,न इसके साइड इफेक्ट का पता है।प्रकाश प्रदूषण कृत्रिम प्रकाश के कारण उत्पन्न एक प्रदूषण है। यह वन्य जीवन, मानव, प्राकृतिक जीवन, हमारी उर्जा और प्राकृतिक आकाशीय रोशनी की विरासत के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा है। समय समय पर पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जाहिर की जाती रही है। पर्यावरण को दूषित करने वाले विभिन्न घटकों की चर्चा की जाती हैं और समाधान के लिए वैश्विक प्रयास किए जाने के लिए अनुबंध होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्यवश मूल रूप से पर्यावरण प्रदुषण को वायु,जल, ध्वनि इत्यादि तक सीमित कर दिया जाता है।हाल ही में वायु प्रदूषण को लेकर अमरीका के हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट की वायु प्रदूषण पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई और उसके दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला गया।हर जगह उस पर विमर्श हो रहा है। यह अच्छी बात है।लेकिन ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाश प्रदूषण पर नहीं दिखाई देती है।आज तक पर्यावरण प्रदूषण के जिस रूप को अक्सर नजरअंदाज किया जाता हैं वह है- प्रकाश प्रदूषण।यह प्रदूषण भी अन्य प्रदूषण की तरह मानव जीवन पर बुरा असर डालता है लेकिन इसको लेकर जागरूकता ना होने और इस पर ज्यादा चर्चा ना होने से अक्सर इसे नजरअंदाज किया जाता रहा है! इसको लेकर कोई ठोस विमर्श भी सामने नहीं आया है।प्रकाश प्रदूषण जिसे अंग्रेजी में फोटो पोल्यूशन या लुमिनस पोल्यूशन के रूप में जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय डार्क स्काई एसोसिएशन की परिभाषा के अनुसार प्रकाश प्रदूषण अत्यधिक अथवा बाधक कृत्रिम प्रकाश होता है। प्रकाश प्रदूषण, प्रदूषण के किसी अन्य रूपों की तरह ही पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पैदा करता है। प्रकाश प्रदूषण को दो प्रकार से विभाजित किया जाता है। पहला,ऐसा कष्टदायक प्रकाश जो प्राकृतिक या हल्की प्रकाशीय व्यवस्था में दखलअंदाजी करता है। और दूसरा, घरों के भीतर या (बाहर भी)अत्यधिक चकाचौंध वाला प्रकाश जो बेचैन करने वाला होता है और स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक होता है। इसके कई प्रतिकूल परिणाम होते हैं, उनमें से कुछ के बारे में अभी तक जानकारी नहीं भी हो सकती है। शहरों, महानगरों और कस्बों का बाहरी और भीतरी तीव्र प्रकाश, विज्ञापन ,व्यावसायिक संपत्तियों, कार्यालय,कारखाने और सड़क पर लगे प्रकाश स्रोत, खेल मैदानों की फ्लड लाइट, त्योहार और उत्सव पर आर्टिफिशियल लाइट आदि प्रकाश प्रदूषण के प्रमुख स्रोत है।</p>
<p style="text-align:justify;">सही अर्थ में अति प्रकाश वैश्विक समस्या बन गया है। अगर आप शहर या महानगर में रहते हैं तो रात के समय रोशनी के चकाचौंध को देख सकते हैं ।अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके शहर में प्रकाश प्रदूषण कितना अधिक और घातक है ,तो आप नासा ब्लू मार्बल नेविगेटर या ग्लोब एट अट्रैक्टिव लाइट पॉल्यूशन मैप का प्रयोग कर सकते हैं जिसे 8 साल तक डाटा कलेक्ट करके तैयार किया गया है।तीन बिलीयन वर्षों से पृथ्वी पर प्राकृतिक प्रकाश और अंधेरों का चक्कर चल रहा है जो सूरज की रोशनी, चांद-तारों और पिंडों के कारण संपन्न होता है। लेकिन आज कृत्रिम प्रकाश अंधेरों को चीरकर रात में शहरों को दिन जैसा बना उजाला देते हैं। जिससे प्राकृतिक दिन रात का पैटर्न बिगड़ रहा है और हमारे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। लाइट पोलूशन हर शहरी को प्रभावित करता है और यह बुरे प्रभाव ऐसे हैं जिन्हें हम छू नहीं सकते बल्कि केवल उनका एहसास कर सकते हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुद्दे पर वर्षों से अध्ययन और खोज जारी है और रात के तीव्र रोशनी के बीच शहर और महानगरों की तस्वीरें ली जाती हैं ताकि मालूम पड़ सके की रोशनी से कैसा प्रदूषण वातावरण में घुल रहा है। यह बहुत ही खतरनाक समस्या है ।इस तरह स्थाई तेज रोशनी के इंतजाम से फसलों, पौधों, जानवरों और पक्षियों को भी जबरदस्त नुकसान होता है।वास्तविकता यह है कि जिन प्रकाश स्रोतों को घरों के बाहर खुले आसमानों पर और सड़कों पर लगाया गया है ,वह अप्रभावी हैं, बहुत चमकीले हैं, अनिर्देशित हैं और अनुचित हैं। जो व्यर्थ ही बिजली खर्च करते हैं ।जितने प्रकाश की आवश्यकता है उसे अधिक प्रकाश फैलाना दुषप्रभावी हैं।अधिक मात्रा में फैलाई जा रहे प्रकाश को उन जगहों पर फोकस किया जाना चाहिए जिन स्थानों पर उसकी जरूरत है और जिन लोगों को उसकी आवश्यकता है। टेक्सेस एरिजोना स्थित इंटरनेशनल डार्क स्काई एसोसिएशन के मुताबिक वर्ष 1994 में लॉस एंजिलिस में आए भूकंप के बाद शहर की रोशनी बाधित हो गई थी, जिसके बाद लोगों ने रात में आसमान में बड़े चमकीले बादल देखने की बात कही थी ।दरअसल यह प्रकाश प्रदूषण के कारण अदृश्य हुई आकाशगंगा थी।इस घटना से आप प्रकाश प्रदूषण के नुकसान के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। अन्य प्रदूषण से इतर प्रकाश प्रदूषण रिवर्सिबल है। हम इसे आसानी से ऐसा कर सकते हैं। प्रकाश प्रदूषण के प्रति जानकारी रखना और इसके कारण जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे बचाव और उसे दूर करने का प्रयास करना ही अधिक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके लिए पहला कदम होगा कि घरों में रोशनी की मात्रा इतनी ही रखनी चाहिए जिससे काम चल जाए और बेमतलब रोशनी की जरूरत ना हो।हमें रोशनी तभी करनी चाहिए जब उसकी आवश्यकता हो ।इसके अलावा घरों के निर्माण को इस तरह करना चाहिए कि प्राकृतिक रोशनी घर के भीतर आए और कृत्रिम रोशनी की निर्भरता कम हो।साथ ही मौसम डिटेक्टर और टाइमर वाले प्रकाश स्रोत का प्रयोग किया जाना चाहिए ।खुले क्षेत्र में लगे प्रकाश स्रोत सही तरीके से परिरक्षित किए जाने चाहिए।दिलचस्प बात यह है कि प्रकाश के कारण ही वायु प्रदूषण पैदा होता है दरअसल एक लाइट को हर साल चलाने के लिए कई टन कोयला खर्च हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्कर्षतया प्रकाश प्रदूषण एक ऐसा खतरा है ,जो आने वाली पीढ़ियों को ओर ज्यादा प्रभावित और परेशान करेगा ।कुदरत ने जो स्वच्छ वातावरण मानव जीवन को कायम रखने के लिए बनाया है, उसकी हर कीमत पर हिफाजत करनी चाहिए, यह हमारा फर्ज है ।और इस महत्वपूर्ण मुद्दे को हल करने का प्रयास करना चाहिए।हालांकि अच्छी बात यह भी है की प्रकाश प्रदूषण के खिलाफ बहुत सी संस्थाएं हरकत में आई है। खासकर आसमान पर रोशनी के प्रदूषण के खिलाफ उनका कहना है कि आसमान पर ज्यादा अंधेरा रहना चाहिए।शहरी महकमों,लोकल सेल्फ काउंसिल और कॉरपोरेशन काउंसिल रोशनी के डिजाइन बनाने वाले इंजीनियरों को इस बात का एहसास हो रहा है कि रोशनी के प्रदूषण को कम करने की जरूरत है।<br />
<strong>नरपत दान चारण</strong></p>
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                <pubDate>Thu, 02 May 2019 21:34:39 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यावरण प्रदूषण: सब हमारा किया धरा है</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/environmental-pollution-we-have-done-all-this/article-963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/factory.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस निकल गया। पर्यावरण पर काफी विचार-विमर्श इस दिन किए जाते हैं। बावजूद इसके सदियों से चला आ रहा ऋतुचक्र गड़बड़ाने लगा है। गरमी का प्रकोप हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। ग्लेशियर पिघलने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ओजोन की परत में छेद हो गया है। विश्व भर में पानी की भीषण कमी के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं चर्चित मुददा बन गया है, विश्व भर में संस्थाएं इस दिशा में क्रियाशील भी हैं। सरकारी स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन जन-जागरण की सर्वाधिक आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी विडम्बना यह है कि एक ओर तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयास हो रहे हैं, दूसरी ओर पर्यावरण को दूषित करने वाले कारण बदस्तूर बने हुए हैं बल्कि उन में निरन्तर वृद्धि हो रही है। उदाहरणस्वरूप प्लास्टिक उत्पादन, केमिकल कारखाने, दुपहिया तथा चारपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण को ही लें।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर सल्फर रहित पैट्रोल तथा सी. एन. जी. के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है, दूसरी ओर वाहनों की संख्या में दिनोंदिन अंधाधुंध वृद्धि हो रही है। पर्यावरण को दूषित करने में हमारी नासमझी, कहीं हमारी परम्पराओं, कहीं हमारी आधुनिकता, हमारी वैज्ञानिक प्रगति, हमारे स्वभावगत लोभ, हमारे नेताओं को वोट की भूख, सभी का मिलाजुला योगदान है।</p>
<p style="text-align:justify;">झुग्गी-झोंपड़ियों की बसाहट, यहां-वहां, जहां-तहां गंदी बस्तियों का कुकुरमुत्तों की भांति उगते जाना वर्षों से एक आम बात हो गई है जहां सामान्य नागरिक सुविधाओं का नाम निशान तक नहीं होता। इस बढ़ते प्रदूषण की अनदेखी ही नहीं की जाती बल्कि यह कहना अधिक सही होगा कि इसे ढके-छिपे बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेड़ कटते ही चले जा रहे हैं। नगरों के आसपास के सुंदर टीलों व पहाड़ियों का कत्लेआम आम बात है। लाखों वर्ष पुरानी चटटानों पर धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है। एवरेस्ट शिखर तक पर, पर्वतारोही दल दलों कचरा छोड़ आते हैं। जगह जगह लाउडस्पीकर बजते रहते हैं। गाड़ियों में लगे प्रेशर हार्न बजाने वालों के कानों को बहरा करते चलते हैं। साइलेंस जोन अभी भी हैं किंतु उपेक्षित।</p>
<p style="text-align:justify;">पशु पक्षी तेजी से लुप्त होते जा रहे हैं। गिद्धों, चिड़ियों की अचानक घटती संख्या आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। नदियों और समुद्रों में बढ़ते प्रदूषण के कारण जल जन्तुओं का निरन्तर हृास हो रहा है। करोड़ों वर्षों में प्रकृति ने जो सृजन किया था, वह हम कुछ वर्षों में मिटाने पर तुल गए हैं। विज्ञान और प्रकृति में बजाय सामंजस्य के एक होड़ लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक की थैलियों ने तो कहर ही ढा रखा है। पशु उन्हें निगलते हैं और बिन आई मौत मरते हैं। दूषित पर्यावरण का कुप्रभाव मनुष्य के शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। नए-नए रोग अस्तित्व में आ रहे हैं। मनुष्य आत्म-संतुलन, धैर्य व सहिष्णुता खो कर हिंसक होता जा रहा है। सीवरेज-फैक्ट्रीज से नदी-नाले दूषित हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रासायनिक खादों से मिट्टी दूषित हो चुकी है। हवा, पानी, मिट्टी का प्रदूषण अब समस्त प्राणी मात्र को निकलने लगा है। और भी बहुत कुछ कहा जा सकता है किंतु अधिक विस्तार न आवश्यक है न ही व्यवहारिक। अब समय कहने सुनने का नहीं, वास्तव में कुछ करने का है। हर व्यक्ति इस संदर्भ में अपनी प्राथमिकताएं खुद ही निश्चित कर ले और उन्हें कार्यरूप में परिणित करने में जुट जाए।</p>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 23:11:22 +0530</pubDate>
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