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                <title>विंटेज कारों से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने की कवायद</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार की रैली में सबसे पुरानी विंटेज कार मुंबई से आ रही है, जिसका नाम कारलैक है और वह वर्ष 1902 का मॉडल है। इसके अलावा 1903 की जिविल कार, 1930 की बीएमडब्ल्यू, कैडिलैक, 1936 व 1938 की रॉल्स रॉयस, 1938 की ब्यूक रोडमास्टर कनवर्टेबल, 1951 की बेंटेल एमके, 1959 की अल्फा और जगुआर, 1966 की फोर्ड मस्टैंग समेत काफी पुराने मॉडल यहां प्रदर्शित किय जाएंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/drill-to-strengthen-indias-economy-with-vintage-cars/article-12566"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/vintage-car.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">आगामी 15 व 16 फरवरी को देश-विदेश से गुरुग्राम पहुंचेगी पुरानी विंटेज कारें (vintage car)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> 21 गन सेल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली में देखने को मिलेगी 1903 की जिविल कार</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम।</strong> विंटेज (पौराणिक-ऐतिहासिक) कारों के बहाने देश की अर्थवस्था को सुधारा जा सकता है। विदेशों से भारत में (vintage car) विंटेज कार रैली में भाग लेने के बहाने जो बड़े घरानों के लोग यहां पहुंचते हैं, वे यहां पर खर्चा भी दिल खोलकर करते हैं। अर्थव्यवस्था में सुधार और मजबूती के लिए भविष्य में और अधिक लोगों को भारत में आमंत्रित किया जायेगा। यह कहना है 21 गन सेल्यूट हेरीटेज एंड कल्चरल ट्रस्ट के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी मदन मोहन का। आगामी 15 व 16 फरवरी को दिल्ली, गुरुग्राम में 21 गन सेल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली और कॉन्कॉर्स डी एलीगेंस का आयोजन किया जा रहा है। इसे लेकर मदन मोहन ने विंटेज कारों के माध्यम से भविष्य की योजनाओं को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विंटेज कार देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> यहां देसी के अलावा विदेशों से भी विंटेज कारों को लेकर अमीर लोग पहुंचते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां आकर वे काफी खर्च भी करते हैं। भविष्य में उनकी संख्या को भी बढ़ाया जायेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">यह शाही अभियान भारत की भव्यता का अनुभव करने के लिए ।</li>
<li style="text-align:justify;">वैश्विक पर्यटकों में रुचि पैदा करने का माध्यम बन रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली, राजस्थान व  गुजरात में बनेगा विंटेज कारों का संग्रहालय</h3>
<p style="text-align:justify;">मदन मोहन ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विदेशों के पर्यटकों को बड़ी संख्या में भारत लाने में हम सफल भी हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अगले तीन साल मे 70 करोड़ रुपये निवेश करके भारत सरकार के सहयोग से विंटेज कारों का संग्रहालय बनाने की दिशा में काम चल रहा है। ये संग्रहालय राजधानी दिल्ली के अलावा राजस्थान और गुजरात में बनाये जाने हैं। भारत को विश्व स्तरीय मोटरिंग टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की सोच लेकर वे चल रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुंबई से पहुंचेगी 1902 का मॉडल की ‘कारलैक’</h3>
<p style="text-align:justify;">मदन मोहन ने कहा कि विंटेज कार रैली के 9वें संस्करण में इस बार भारत के दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, बैंगलोर, चेन्नई, अहमदाबाद के अलावा विदेशों में जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, अमेरिका समेत काफी देशों से विंटेज कारों को शामिल किया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">खास बात यह है कि एक बार जो कार विंटेज रैली में शामिल हो जाती है ।</li>
<li style="text-align:justify;">वह दोबारा से शामिल नहीं की जाती।</li>
<li style="text-align:justify;">इस बार की रैली में सबसे पुरानी विंटेज कार मुंबई से आ रही है ।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसका नाम कारलैक है और वह वर्ष 1902 का मॉडल है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><em><strong> -इसके अलावा 1903 की जिविल कार, 1930 की बीएमडब्ल्यू, कैडिलैक, 1936 व 1938 की रॉल्स रॉयस, 1938 की ब्यूक रोडमास्टर कनवर्टेबल, 1951 की बेंटेल एमके, 1959 की अल्फा और जगुआर, 1966 की फोर्ड मस्टैंग समेत काफी पुराने मॉडल यहां प्रदर्शित किय जाएंगे। मदन मोहन ने बताया कि 19 वर्षों में उनके पास 328 पुरानी कारें, 43 जीप और 106 बाइक के साथ घड़ियां, टाइपराइटर और अन्य सामान मौजूद है।</strong> </em></p>
<p> </p>
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<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 20:55:02 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यटन को मजबूती देगा ‘अद्भुत संग्रहालय’</title>
                                    <description><![CDATA[बटवारा यादगार दिवस के रूप में मनाया जायेगा 17 अगस्त : सिद्धू चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने उस अद्भुत पहल का स्वागत किया है जिस तहत 17 अगस्त को बंटवारा यादगार दिवस के रूप में विशेषकर पंजाब व बंगाल के उन गैर साधारण हिम्मतवाले आम लोगों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/tourism-will-strengthen-the-wonderful-museum/article-965"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sidhu.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"><strong>बटवारा यादगार दिवस के रूप में मनाया जायेगा 17 अगस्त : सिद्धू</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने उस अद्भुत पहल का स्वागत किया है जिस तहत 17 अगस्त को बंटवारा यादगार दिवस के रूप में विशेषकर पंजाब व बंगाल के उन गैर साधारण हिम्मतवाले आम लोगों की याद में मनाया जायेगा जिनका देश के विभाजन दौरान सर्वस्व तबाह हो गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अहम धार्मिक स्थान</h3>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले मंत्री नवजोत सिद्धू ने मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत दौरान कहा कि सरकार द्वारा द आर्टस एंड कल्चरल हैरीटेज ट्रस्ट को पूरी सहायता दी जाएगी जोकि अमृतसर की टाउन हाल में बंटवारे की दास्तान का व्याखयान विश्व के अपनी तरह के अद्भुत संग्राहलय को 17 अगस्त को जनता के सुपुर्द करेगा। सिद्धू ने बताया कि इस संग्राहलय से अमृतसर जोकि भारत के सबसे अह्म धार्मिक स्थानों में से एक है कि पर्यटन उद्योग को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">70 वर्ष पहले हुई थी विभाजन की घोेषणा</h3>
<p style="text-align:justify;">17 अगस्त वह दिन है जब 70 वर्ष पूर्व 1947 में भारत के विभाजन की घोषणा की गई थी, जिसका परिणाम पंजाब के इतिहास में सबसे मार्मिक और खौफनाक घटनाओं में से एक के रुप में निकला था। इतिहास में लोगों के इस सबसे बड़े परिवर्तन ने ना केवल पंजाब एवं बंगाल का विभाजन किया बल्कि असंख्य घरों को बर्बाद करने के अतिरिक्त जानी नुकसान भी बड़े स्तर पर किया। इस दुखांत के प्रभाव की बात कहती कभी भी कोई ऐसी यादगार नहीं बनी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैप्टन करेंगे शिरकत</h3>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखिका, कॉलमनवीस और ट्रस्ट की चेयरपर्सन किशवर देसाई ने कहा कि संग्राहलय के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहुंचेंगे और इससे पहले बटवारा यादगार दिवस के लिए चलो अमृतसर-17 अगस्त, 2017 नाम की एक विशेष आॅनलाइन मुहिम चलाई जायेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सूफी संगीत भी बांधेगा समां</h3>
<p style="text-align:justify;">संग्राहलय के उद्घाटन के बाद शाम के समय सूफी संगीत का प्रोग्राम होगा जोकि आर्टस एंड लिट्रेचर फैस्टीवल आॅफ अमृतसर द्वारा करवाया जायेगा। इस अवसर पर अमृतसर और लाहौर की 1947 से पूर्व पहले के जमाने की गलियां भी रूपांतरित की जायेंगी और इसके अतिरिक्त उस समय के भोजन एवं अन्य यादगारी वस्तुएं भी प्रर्दशित की जायेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 23:29:56 +0530</pubDate>
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