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                <title>Jaggery - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Jaggery: कभी म्हारे हरियाणा की पहचान था ‘गुड़’, अब नजर आते हैं इक्का-दुक्का कोल्हू</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Ikka Dukka Kolhu: एक समय था जब हर गांव में किसानों के खेत में कोल्हू चलता था और लगभग हर किसान गुड़ का उत्पादन करता था। चीनी का रसोई में नाममात्र ही स्थान था लेकिन एक समय अब है जब गुड़ का पूरा-पूरा स्थान चीनी ने ले लिया है और खेतों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/once-jaggery-was-the-identity-of-haryana-now-only-a-few-crushers-are-seen/article-68518"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/kurukshetra-news-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Ikka Dukka Kolhu: एक समय था जब हर गांव में किसानों के खेत में कोल्हू चलता था और लगभग हर किसान गुड़ का उत्पादन करता था। चीनी का रसोई में नाममात्र ही स्थान था लेकिन एक समय अब है जब गुड़ का पूरा-पूरा स्थान चीनी ने ले लिया है और खेतों में जगह-जगह दिखाई देने वाले कोल्हू लगभग खत्म हो चुके हैं। ऐसे में हरियाणा जैसे प्रदेश में गुड़ का कोल्हू कुछ स्थानों पर ही मिल पाता है। जबकि गन्ने का उत्पादन बड़े स्तर पर हरियाणा में होता है लेकिन किसान गन्ने को शुगर मिल में ही पहुंचाते हैं। हालांकि हरियाणा के साथ लगते उत्तर प्रदेश में सड़कों पर अनेक कोल्हू दिखाई दे जाते हैं। Kurukshetra News</p>
<h3 style="text-align:justify;">समय के साथ भी नहीं बदली तकनीक</h3>
<p style="text-align:justify;">यूं तो जैसे-जैसे समय बीतता है तकनीक भी बदलती रहती है लेकिन गुड़ बनाने के लिए पुरानी तकनीक का ही इस्तेमाल हो रहा है। पहले जहां कोल्हू को बैलों के माध्यम से चलाया जाता था और गन्ने से रस निकाला जाता था। जबकि आधुनिक समय में गन्ने से रस निकालने के लिए बैलों की बजाय इंजन का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद जो गुड़ बनाने की तकनीक है सारी ज्यों की त्यों है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ईंधन के रूप में प्रयोग होती है खोई</h3>
<p style="text-align:justify;">गन्ने के रस को पकाने के लिए ईंधन के रूप में गन्ने की खोई का प्रयोग ही किया जाता है। गन्ने से रस अलग हो जाता है और सुखी खोई अलग हो जाती है जिससे रस को पकाने के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। खोई की आंच तेज होती है जिसे आसानी से रस से राब बनाई जाती है। ऐसे में ईंधन के लिए गुड़ उत्पादक को ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। Kurukshetra News</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस प्रकार निकाला जाता है गुड़ | Kurukshetra News</h3>
<p style="text-align:justify;">कोल्हू चलाने वाले मोहम्मद शादाब का कहना है कि सबसे पहले गन्ने से रस निकालने का काम किया जाता है जोकि दबाव डालकर निकाला जाता है और रस के बाद बचे हुए मलबे को खोई कहा जाता है। यह रस एक बड़े बर्तन में इकट्ठा होता है। जिसमें सुगलाई डालकर रस की मैली बाहर निकाली जाती है। इसके बाद रस को पकाने की प्रक्रिया शुरू होती है और बड़े लोहे की कड़ाही के माध्यम से रस को पकाया जाता है। रस पककर गाढ़ा हो जाता है जिसे राब कहा जाता है। इसके बाद राब से गुड़ की रेपडी बनाई जाती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जब कोई रिश्तेदार आता था तो बनती थी चीनी की चाय</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जयपाल सिंहमार ने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि ग्रामीण एरिया में गुड़ की खपत इतनी ज्यादा थी कि चाय मीठी करने के लिए गुड़ का इस्तेमाल किया जाता था, दूध को मीठा करने के लिए गुड़ का इस्तेमाल किया जाता था, या फिर अन्य पकवान जो मीठे होते थे उन्हें मीठा करने के लिए गुड़ का ही इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने कहा की एक समय वह भी था कि चीनी डिपो के माध्यम से मिलती थी। और घर में चीनी का इस्तेमाल उस वक्त ही किया जाता था जब कोई रिश्तेदार आता था तो उनके लिए चाय मीठी करने के लिए चीनी या फिर दूध को मीठा करने के लिए चीनी का इस्तेमाल किया जाता था। Kurukshetra News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Super Earth Found: वैज्ञानिकों ने किया बहुत बड़ा खुलासा, मिली दूसरी दुनिया, पृथ्वी से ज्यादा दूर नहीं, पढ़ें…" href="http://10.0.0.122:1245/scientists-made-a-big-revelation-another-world-was-found-not-very-far-from-the-earth-read-on/">Super Earth Found: वैज्ञानिकों ने किया बहुत बड़ा खुलासा, मिली दूसरी दुनिया, पृथ्वी से ज्यादा दूर नहीं, पढ़ें…</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 14:31:56 +0530</pubDate>
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                <title>सेहत:- स्वाद के साथ सेहत का खजाना है गुड़</title>
                                    <description><![CDATA[औषधीय गुणों से भरपूर गुड़ एक सुपर फूड है, जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर निरोगी और स्वस्थ बना रहता है। गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। यह दोनों तत्व हड्डियों को मजबूती देने में सहायक हैं। इससे शरीर मजबूत व एक्टिव भी रहता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/jaggery-is-best-source-for-health/article-40580"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/jaggery.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">औषधीय गुणों से भरपूर गुड़ एक सुपर फूड है, जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर निरोगी और स्वस्थ बना रहता है। गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। यह दोनों तत्व हड्डियों को मजबूती देने में सहायक हैं। इससे शरीर मजबूत व एक्टिव भी रहता है। गुड़ स्वाद का ही नहीं बल्कि सेहत का भी खजाना है। इसके फायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं। गुड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा कड़वी दवा को मीठा करने और कई बीमारियों में दवा के तौर पर भी किया जाता था। अधिकतर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि गुड़ सालभर खाया जा सकता है और शरीर को इससे भरपूर लाभ भी मिलते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">जोड़ों में दर्द की समस्या हो, तो गुड़ का अदरक के साथ सेवन लाभदायक है। हर रोज गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">अस्थमा के इलाज में गुड़ फायदेमंद है। गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से अस्थमा की तकलीफ नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी भी बनी रहती है।</li>
<li style="text-align:justify;">पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">काफी थकावट है, तो गुड़ को दूध के साथ लें। यदि आपको दूध नहीं पसंद, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा-सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से शरीर की थकान दूर होती है।</li>
<li style="text-align:justify;">पेट में गैस बनने की समस्या होने पर हर रोज एक ग्लास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है और गैस भी नहीं बनती।</li>
<li style="text-align:justify;">गला बैठ जाने और आवाज जकड़ जाने पर पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है व आवाज भी खुल जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">कान में दर्द होने पर गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होने वाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है।</li>
<li style="text-align:justify;">गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में भी बेहद असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।                                                                                   <strong>  -डॉ. अभिषेक गुप्ता, नोएडा।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 15:46:50 +0530</pubDate>
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