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                <title>Repo Rate - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Repo Rate: क्या रेपो रेट में हो सकती है कटौती? जानिये क्या कहते हैं एक्सपर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[Repo Rate: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। बाजार के विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) को वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकता है। खुदरा मुद्रास्फीति के आरबीआई ने फरवरी 2023 से रेपो दर 6.5 प्रतिशत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/can-the-repo-rate-be-cut-know-what-the-experts-say/article-60805"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/repo-rate.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Repo Rate: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बाजार के विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) को वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकता है। खुदरा मुद्रास्फीति के आरबीआई ने फरवरी 2023 से रेपो दर 6.5 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास एमपीसी के निर्णयों की घोषणा गुरुवार को करेंगे। एमपीसी की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नयी सरकार का वर्ष 2024-25 के का पूर्ण बजट जुलाई में पेश कर दिया है और राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान लगाया है। पिछले वित्त वर्ष में यह 5.1 प्रतिशत रहा। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, ‘एमपीसी बैठक से अपेक्षाओं पर परिप्रेक्ष्य इन मुद्रास्फीति जोखिमों को देखते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि आरबीआई प्रमुख नीतिगत दरों को स्थिर रखेगा। उन्होंने एक संक्षिप्त अनुमान में कहा कि वर्तमान समय में, स्थिर ब्याज दर का माहौल और अर्थव्यवस्था पर मजबूत विकास परिदृश्य भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए अच्छा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-you-are-bored-of-eating-dal-and-vegetables-everyday-then-definitely-try-this-tadka-dahi-once/">Dahi Tadka: रोज-रोज दाल सब्जी खाते-खाते ऊब गया है मन, तो एक बार जरूर ट्राई करें ये तड़का लगा दही</a></p>
<p style="text-align:justify;">रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटीज एंड करेंसी, एमके ग्लोबल की जिंस और विदेशी विनिमय बाजार की अनुसंधानकर्ता सुश्री रिया सिंह ने कहा है कि उच्च खाद्य मुद्रास्फीति के खतरे के कारण नीतिगत दर में कमी की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। उनका कहना है कि आरबीआई रेपो दर में कटौती का विकल्प चुनता है तो यह कटौती 0.25 प्रतिशत हो सकती है।<br />
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च की अर्थव्यवस्था के बारे में एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यदि जीडीपी पूवार्नुमान से अधिक है, तो प्राकृतिक दर का अनुमान अधिक होगा.. इसका मतलब यह हो सकता है कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती का इंतजार लंबा हो सकता है….। वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत थी जो अनुमान से अधिक थी। आर्थिक समीक्षा 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7.0 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। Repo Rate</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि फरवरी 2024 में पेश बजट में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 5.9 प्रतिशत के बराबर निर्धारित किया गया था जो संशोधित बजट अनुमान में 5.5 प्रतिशत पर आ गया। आरबीआई द्वारा सरकार को पिछले वित्त वर्ष के लाभांश के रूप में 2.11 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति का राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को तेजी से नीचे लाने में बड़ा योगदान है। आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘प्रभावी रूप से, अगस्त 2024 की मौद्रिक नीति लगातार नौवीं नीति हो सकती है जब कि आरबीआई दरों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना नहीं है। नीतिगत ब्याज दर में स्थिरता बनाए रखने के कारणों की तलाश करना कोई बड़ी दूर की बात नहीं है। जीडीपी वृद्धि अभी मजबूत चल है और (खुदरा) मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है जो केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से अभी एक प्रतिशत ऊपर है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईएफएल सिक्योरिटीज का कहना है कि अमेरिकी मंदी की आशंकाओं के कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति दरों के प्रक्षेपवक्र पर अपने बयान को थोड़ा अधिक सावधानी से तैयार कर सकता है। कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि वैश्विक घटनाओं को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर एमपीसी की द्वैमासिक बैठकों के बीच में भी नीतिगत दरों में संशोधन किया जा सकता है। भूराजनीतिक संकटों के कारण जिंस की कीमतों में अस्थिरता तथा उसके चलते आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं पर जोखिम बना हुआ है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारत में मुद्रास्फीति इस समय मुख्य रूप से खाने पीने की वस्तुओं के चलते है और मानसून अच्छा रखने पर इसका दबाव कम हो सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 10:50:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RBI MPC June 2023: दो हजार की नोटबंदी के बाद, आरबीआई ने दिया बड़ा तोहफा</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। RBI MPC June 2023 अलनीनो के प्रभाव से मानूसन के प्रभावित होने के जोखिम पर नजर लगाते हुये महंगाई को लक्षित दायरे में रखने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आज नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया, जिससे आम लोगों के घर, कार और अन्य प्रकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/rbi-mpc-june/article-48592"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/rbi-mpc-june-2023.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> RBI MPC June 2023 अलनीनो के प्रभाव से मानूसन के प्रभावित होने के जोखिम पर नजर लगाते हुये महंगाई को लक्षित दायरे में रखने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आज नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया, जिससे आम लोगों के घर, कार और अन्य प्रकार के ऋणों की किस्तों में बढोतरी नहीं होगी। समिति ने रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। Repo Rate</p>
<p style="text-align:justify;">चालू वित्त वर्ष में समिति की पहली तीन दिवसीय बैठक के बाद आज जारी बयान में यह घोषणा की गयी है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने यह घोषणा करते हुये कहा कि पिछले वर्ष मई से अब तक रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की बढोतरी की जा चुकी है। फिलहाल इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है लेकिन नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने के बीच समिति ने समयोजन वाले रूख से पीछे हटने का निर्णय लिया है। Monetary Policy</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/financial-inclusion/">financial inclusion: वित्तीय सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए Rbi ने उठाया बड़ा कदम</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">नीतिगत दरें यथावत, किस्तों में नहीं होगी वृद्धि | RBI MPC June 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">समिति के इस निर्णय के बाद फिलहाल नीतिगत दरों में बढोतरी नहीं होगी। रेपो दर 6.5 प्रतिशत, स्टैंडर्ड जमा सुविधा दर (एसडीएफआर) 6.25 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग सुविधा दर (एमएसएफआर) 6.75 प्रतिशत, बैंक दर 6.75 प्रतिशत, फिक्स्ड रिजर्व रेपो दर 3.35 प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात 4.50 प्रतिशत, वैधानिक तरलता अनुपात 18 प्रतिशत पर यथावत है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में विकास दर के 7.2 प्रतिशत पर रहना भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र की वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में आयी सुस्ती के बीच सशक्त और मजबूत होने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके आधार पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत रह सकती है। RBI MPC June 2023</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक पूरा ध्यान महंगाई को चार प्रतिशत के लक्षित दायरे में लाने का है। हालांकि चालू वित्त वर्ष में 5.1 प्रतिशत रह सकती है। पहली तिमाही में यह 4.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। दास ने कहा कि मई 2022 से नीतिगत दरों में की गयी 2.5 प्रतिशत की बढोतरी का इच्छित परिणाम मिल रहा है। समिति ने आम सहमति से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर रखने का निर्णय लिया है। दास ने कहा कि यह निर्णय खुदरा महंगाई को रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के दायरे में रखने के लक्ष्य के अनुरूप लिया गया है। यह निर्णय विकास को गति देने का काम करेगा। RBI MPC June 2023</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक महंगाई और विकास पर करीबी नजर रखे हुये है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल एवं भूराजनैतिक स्थिति के कारण आयातित महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। यदि अलनीनो से मानसून प्रभावित नहीं होता है तो चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई 5.1 प्रतिशत पर रह सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मौद्रिक नीति की मुख्य बातें | RBI MPC June 2023</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में लिए गये निर्णयों की मुख्य बातें इस प्रकार है:</li>
<li style="text-align:justify;">रेपो दर 6.50 प्रतिशत पर यथावत</li>
<li style="text-align:justify;">स्टैंडर्ड जमा सुविधा दर (एसडीएफआर) 6.25 प्रतिशत पर स्थिर</li>
<li style="text-align:justify;">मार्जिनल स्टैंडिंग सुविधा दर (एमएसएफआर) 6.75 प्रतिशत पर यथावत</li>
<li style="text-align:justify;">बैंक दर 6.75 प्रतिशत स्थिर</li>
<li style="text-align:justify;">फिक्स्ड रिजर्व रेपो दर 3.35 प्रतिशत बरकरार</li>
<li style="text-align:justify;"> नकद आरक्षित अनुपात 4.50 प्रतिशत पर</li>
<li style="text-align:justify;">वैधानिक तरलता अनुपात 18 प्रतिशत पर यथावत</li>
<li style="text-align:justify;">चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया</li>
<li style="text-align:justify;"> पहली तिमाही में जीडीपी 8 प्रतिशत रह सकता है</li>
<li style="text-align:justify;">दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत रह सकती</li>
<li style="text-align:justify;"> मार्च 2023 में समाप्त वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 7.2 प्रतिशत रही</li>
<li style="text-align:justify;">चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान</li>
<li style="text-align:justify;">पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत पर</li>
<li style="text-align:justify;">दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई 5.2 प्रतिशत पर</li>
<li style="text-align:justify;">तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई 5.4 प्रतिशत पर</li>
<li style="text-align:justify;">चौथी तिमाही में खुदरा महंगाई 5.2 प्रतिशत रह सकती</li>
<li style="text-align:justify;"> मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 8 से 10 अगस्त 2023 को</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 12:16:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रिजर्व बैंक ने फिर बढ़ाया 0.50 फीसदी रेपो रेट, महंगी होंगी घर और कार की किस्तें</title>
                                    <description><![CDATA[नीतिगत दरों में हुई बढ़ोतरी, घर और कार की किस्तें होंगी महंगी मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई को काबू में करने के लिए लगातार दूसरे महीने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आम लोगों के लिए घर, कार और अन्य ऋणों की किस्तों में वृद्धि होगी तथा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/reserve-bank-again-increased-the-repo-rate-by-0-50-percent/article-34292"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/rbi.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>नीतिगत दरों में हुई बढ़ोतरी, घर और कार की किस्तें होंगी महंगी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई को काबू में करने के लिए लगातार दूसरे महीने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आम लोगों के लिए घर, कार और अन्य ऋणों की किस्तों में वृद्धि होगी तथा ऋण महंगे हो जायेंगे। आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में एमपीसी की हुयी तीन दिवसीय बैठक के बाद आज जारी बयान में कहा गया है कि सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। महंगाई तथा रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण वैश्विक स्तर अनिश्चितता बढ़ी है और इससे आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर हुआ है, जिसके कारण दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत पर भी उसका असर हुआ है। दास ने कहा कि समिति ने रेपो दर को 50 आधार अंक बढ़ाकर 4.90 प्रतिशत करने के साथ ही स्टैंडिंग डिपोजिट फैसिलिटी दर को भी आधी फीसद बढ़ाकर 4.65 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी को इतनी ही बढ़ाकर 5.15 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही समिति ने विकास को मदद करने और महंगाई को काबू में करने के उद्देश्य से अपने सामंजस्य वाले रूख को वापस लेने पर ध्यान केन्द्रित करने का भी निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति ने चालू वित्त वर्ष में विकास दर अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर यथावत बनाये रखा और कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में महंगाई भी रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के दायरे से बाहर रहने का अनुमान है। समिति ने नीतिगत दरों में एक महीने में दूसरी बार यह बढ़ोतरी की है। पिछले महीने रेपो दर में 40 आधार अंकों की बढ़ोतरी की गई थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आरबीआई ने सहकारी बैंकों की आवास ऋण की सीमा बढ़ाई</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) की ओर से ग्राहकों को दिये जाने वाले आवास ऋण की सीमा 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 60 लाख और ग्रामीण सहकारी बैंक (आरसीबी) की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी है। आरबीआई की बुधवार को विकासात्मक और नियामक नीतियों पर जारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा दिशानिर्देश में व्यक्तिगत आवास ऋण पर विवेकपूर्ण सीमाएं निर्धारित की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबी), और ग्रामीण सहकारी बैंकों (आरसीबी – राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों) द्वारा अपने ग्राहकों को दी जा सकती हैं। इससे पहले आवास ऋण सीमाओं को यूसीबी के लिए वर्ष 2011 में और आरसीबी के लिए वर्ष 2009 में संशोधित किया गया था।</p>
<h3><strong>यक्तिगत आवास ऋण पर मौजूदा सीमा को बढ़ाने का लिया निर्णय</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पिछली बार सीमा को संशोधित करने के बाद से आवास की कीमतों में वृद्धि और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहकारी बैंकों में व्यक्तिगत आवास ऋण पर मौजूदा सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस निर्णय के आलोक में टियर एक यूसीबी की आवास ऋण सीमा 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 60 लाख रुपये और टियर दो यूसीबी की सीमा 70 लाख से बढ़ाकर 140 लाख रुपये कर दी गई है। इसी तरह 100 करोड़ रुपये से कम नेटवर्थ वाले आरसीबी की आवास ऋण सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये और अन्य आरसीबी के लिए 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये हो गई है। इस संबंध में विस्तृत सर्कुलर अलग से जारी किया जाएगा।</p>
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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 11:56:01 +0530</pubDate>
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                <title>रेपो दर में 40 आधार अंकों की कटाैती, ऋण सस्ते होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते संकट के मद्देनजर रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने और ब्याज दरों में कमी लाने के उद्देश्य से रेपो दर (Repo Rate) में 40 आधार अंक की कमी करने का निर्णय लिया है। कोरोना वायरस के बढ़ते संकट की वजह से समिति की एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/40-basis-points-reduction-in-repo-rate-loan-expected-to-be-cheap/article-15545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/pbi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कोरोना वायरस के बढ़ते संकट के मद्देनजर रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने और ब्याज दरों में कमी लाने के उद्देश्य से रेपो दर (Repo Rate) में 40 आधार अंक की कमी करने का निर्णय लिया है। कोरोना वायरस के बढ़ते संकट की वजह से समिति की एक विशेष बैठक बुलाई गई और उसमें बहुमत के आधार पर लिये गये निर्णय की जानकारी देते हुये रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज संवाददाताओं से कहा कि समिति ने कोरोना वायरस की वजह से देश और दुनिया के हालात की समीक्षा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में मदद के उद्देश्य से रेपो रेट में 40 आधार अंकों की कटौती की गयी है। अब रिपो दर 4 प्रतिशत हो गयी है। दास ने कहा कि देश में इस बार मानसून, विनिर्माण , कृषि उपज, कच्चे तेल, धातु आदि की आने वाले दिनों में स्थिति पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया है। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि पिछले तीन दिन में समिति ने कोरोना संकट की वजह से बने घरेलू और वैश्विक माहौल की समीक्षा की। लॉकडाउन में यह दूसरी बार है जब आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की है। इससे पहले 27 मार्च को रेपो दर में 0.75 फीसदी कटौती की गयी थी।</p>
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                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2020 11:44:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेपो रेट में कटौती समस्या का समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बंैक द्वारा रेपो रेट में कटौती से अर्थव्यवस्था को संभवतया इससे अधिक कोई लाभ नहीं मिलेगा कि सरकार का वित्तीय घाटा कुछ कम होगा। सरकार को यह लाभ भी होगा कि आवास ऋण पर सब्सिडी का भार भी कुछ कम होगा। रेपो रेट में .25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6 प्रतिशत लाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/repo-rate-cuts-will-not-solve-the-problem/article-2930"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rbi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बंैक द्वारा रेपो रेट में कटौती से अर्थव्यवस्था को संभवतया इससे अधिक कोई लाभ नहीं मिलेगा कि सरकार का वित्तीय घाटा कुछ कम होगा। सरकार को यह लाभ भी होगा कि आवास ऋण पर सब्सिडी का भार भी कुछ कम होगा। रेपो रेट में .25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6 प्रतिशत लाने से छोटे जमाकर्ताओ को नुक्सान हुआ है। इससे सेवानिवृत कर्मचारी, महिलाएं और अन्य लोग भी प्रभावित होंगे। बैंक जमा पर ब्याज दर में तेजी से कटौती कर रहे हैं, हालांकि इसका लाभ ऋण लेने वालों को नहीं दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रेपो रेट क्या है? ऋण लेने वाले बैंकों और वित्तीय संंस्थानों से ऋण लेते हैं और ये संस्थान उस पर ब्याज लेते हैं। इसलिए जिस दर पर ऋण लेने वाला बैंक से ऋण लेता है वह ब्याज दर होती है और बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं और इसके लिए वे अपनी सरकारी प्रतिभूतियों को भारतीय रिजर्व बैंक को बेचते हैं। जिस दर पर ये बैंक इन प्रतिभूतियों को बेचते हैं उसे ही रेपो रेट कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में यह नहीं माना गया है कि ऋण की लागत बढ़ गयी है। रेपो रेट में वृद्धि से अल्पकालिक ऋण महंगा हो जाता है और यदि इसकी दर कम होती है तो यह सस्ता हो जाता है। कुल मिलाकर रेपो रेट में कटौती से व्यापारियों को लाभ मिलता है। इससे नए घर खरीदने वालों को भी लाभ मिल सकता है क्योंकि इससे आवास ऋण पर ब्याज दर में कटौती होती है। रेपो रेट में इसलिए कटौती की गयी क्योंकि मुद्रा स्फीति में काफी गिरावट आ गयी और जून में यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर 1.5 प्रतिशत थी उसके बाद इसमें थोड़ी वृद्धि हुई। भारतीय रिजर्व बैंक ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रा स्फीति का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों का मानना है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अपने आकलन में बहुत अधिक परंपरावादी है। 2010 से 2014 के बीच सकल मुद्रा स्फीति 48 प्रतिशत तक पहंच गयी थी और इसलिए इस तथ्य को नजरंदाज कर ब्याज दरों में यकायक कटौती बैंको, व्यापारियों और आम आदमी के हित में नहीं होगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में गिरावट जारी नहीं रहेगी। कम मुद्रा स्फीति के अनेक कारण हैं। अर्थव्यवस्था में नकदी का अभाव, कम उत्पादन और कम मांग प्रमुख हैं। मौद्रिक नीति समिति इस बात से चिंतित है कि देश में प्राइवेट निवेश कम है। कारपोरेट क्षेत्र अपनी आरक्षित निधि का निवेश नहीं कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि वह अवसंरचना परियोजनाओं में अड़चनों और परियोजनाआें को स्वीकृति देने में विलंब से चिंतित है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक कारपोरेट ऋण लेने वालों पर दबाव से चिंतित है। वे अपनी ऋण राशि नहीं लौटा पा रहे हैं, इससे बैंकों की गैर-निष्पादनकरी आस्तियां बढ़ गयी। बैकों का बड़े पैमाने पर पुर्नपूंजीकरण किया जा रहा है और इससे सरकार की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। दूसरे शब्दों में जमाकर्ताआें का पैसा ऋण के रूप में दिया जा रहा है और यह ऋण दबाव युक्त ऋण बन रहा है और जमाकर्ता को दो तरह से नुक्सान हो रहा है। उसकी ब्याज दर में कटौती हो रही है और उसकी जमा की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। कारपोरेट क्षेत्र के लोग मूल राशि को भी नहीं लौटा रहे हैं और अपने भुगतान का पुनर्निर्धारण और रियायतें प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए रेपो रेट में कटौती के बिना भी बड़े कर्जदारों को लाभ मिल रहा है। इसलिए ब्याज दर में वृद्धि करनी चाहिए ताकि फिजूलखर्ची के लिए ऋण लेने वालों पर अंकुश लग सके।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंक आम आदमी की जमा राशि के सहारे चल रहे हैं और आम आदमी को हर मोर्चे पर नुक्सान उठाना पड़ रहा है। ब्याज की आय कम हो रही है और जो थोड़ी बहुत राशि उन्हें ब्याज के रूप में मिल रही है उस पर भी आयकर लगाया जा रहा है। इसलिए नीति निर्माताओं को ध्यान में रखना होगा कि जमा पर ब्याज दर मुद्रा स्फीति से कम है और बैंकों द्वारा आम आदमी की जमा राशि का उपयोग अपने व्यवसाय चलाने के लिए किया जा रहा है। किंतु वे जमाकर्ता को समुचित क्षतिपूर्ति नहीं दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही ऐसी राशि आय में भी शामिल नहीं की जानी चाहिए। जमाकर्ताओं को कम लाभ देने और उन पर कर लगाने से अर्थव्यवस्था को लाभ नहीं मिलेगा। इससे जमाकर्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होगी। यह मई में निक्की के विनिर्माण क्षेत्र के लिए परचेंजिंग मैनेजर इंडेक्स में गिरावट से स्पष्ट है जो 51.6 प्रतिशत से गिरकर 50.9 प्रतिशत रह गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मांग की कमी और जीएसटी की चिंता के कारण जून में विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर काफी कम रही। यह एक संक्रमण काल है और जीएसटी के कारण व्यवसाय की लागत भी बढ़ी है। तो क्या इससे भी मुद्रा स्फीति बढ़ेगी? इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यदि इससे लागत में वृद्धि हुई तो या तो मूल्य बढ़ेंगे या इसे लागत में खपाना पड़ेगा और यदि इसे लागत में खपाया गया तो लाभ कम होगा। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मई में कारखाना उत्पादन में गिरावट आयी।</p>
<p style="text-align:justify;">आठ मुख्य उद्योगों में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि अन्य उद्योगों में गिरावट आयी। प्राथमिक वस्तुआें के उत्पादन में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि पूंजीगत उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आयी। अवसंरचना और निर्माण वस्तुओं के उत्पादन में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हई। सेन्टर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनोमी के अनुसार सरकारी और निजी क्षेत्र की कुल परियोजनाओं में से 12.3 प्रतिशत परियोजनाएं 2017 की पहली तिमाही में ठप्प रही। 1995 के बाद यह तीसरी बार सर्वाधिक उच्च स्तर था और 2004 के बाद पहली बार ऐसा अवसर था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए लगता है रेपो रेट में कटौती से उन लोगों के अलावा किसी को लाभ नहीं हो रहा है जो अपनी जमा राशि को बैंक से निकाल रहे हैं। इसके अलावा सभी नीतिगत मुद्दों को रेपो रेट में कटौती के साथ जोड़ना बुद्धिमता नहीं है। यह दुधारी तलवार है। ब्याज दर अपने निम्नतर स्तर पर हैं और बैंक प्रभार अपने उच्चतम स्तर पर हैं और इसी स्थिति में सुधार की आवश्यकता है। इसलिए ब्याज दरों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। कम ब्याज दर से अर्थव्यवस्था में तेजी नहीं आएगी किंतु कम बैंक प्रभारों से निश्चित रूप से आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>–<em>शिवाजी सरकार</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 04:26:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[ऋण सस्ता होने की बनी उम्मीद नई दिल्ली। महंगाई में नरमी आने के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों रेपो और रिवर्स रेपो दर में एक चौथाई फीसदी की कटौती करने की बुधवार को घोषणा की, जिससे व्यक्तिगत ऋण के साथ ही आवास एवं कार ऋण के भी सस्ते होने की उम्मीद बनी है। मौद्रिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/0-25-percent-reduction-in-policy-rates/article-2796"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bank-rbi.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ऋण सस्ता होने की बनी उम्मीद</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> महंगाई में नरमी आने के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों रेपो और रिवर्स रेपो दर में एक चौथाई फीसदी की कटौती करने की बुधवार को घोषणा की, जिससे व्यक्तिगत ऋण के साथ ही आवास एवं कार ऋण के भी सस्ते होने की उम्मीद बनी है। मौद्रिक नीति समिति की दो दिवसीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल सहित पांच सदस्यों ने इस कटौती के पक्ष में मतदान किया जबकि एक सदस्य ने इसमें आधी फीसदी की कटौती करने का और एक सदस्य ने यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में मत दिया।</p>
<p>बैठक के बाद जारी बयान में पटेल ने कहा कि महंगाई में आई नरमी के मद्देनजर नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती की गई है। अब रेपो दर 6.25 प्रतिशत से घटकर 6.0 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 6.0 प्रतिशत से घटकर 5.75 प्रतिशत हो गई है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसी तरह से मार्जिनल स्टैंडिंग फैसेलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर भी 6.50 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत हो गई है। हालांकि समिति ने चालू वित्त वर्ष में विकास अनुमान को 7.3 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 06:22:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिजर्व बैंक ने स्थिर रखी रेपो दर</title>
                                    <description><![CDATA[एसएलआर में 0.5 प्रतिशत कटौती जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया मुंबई। रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुए राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जताई। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">एसएलआर में 0.5 प्रतिशत कटौती</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुए राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा में सांविधिक तरलता अनुपात 0.5 प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया। एसएलआर के तहत बैंकों को निर्धारित हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में लगाना होता है। शीर्ष बैंक के इस कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक नकदी बचेगी। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 7.4 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति की यहां हुई पांचवीं बैठक में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पावधि कर्ज देता जबकि रिवर्स रेपो के अंतर्गत आरबीआई बैंकों से अतिरिक्त नकदी को लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/reserve-bank-fixed-of-repo-rate/article-986</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2017 08:07:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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