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                <title>Reserve Bank - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Reserve Bank RSS Feed</description>
                
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                <title>Subprime Crisis: भारतीय रिजर्व बैंक ने सबप्राइम संकट को लेकर दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[Subprime Crisis: भारतीय राजनीति में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति छायी रहनी चाहिए या जातिगत जनगणना। सामान्यतया भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को सुर्खियों में छाए रहना चाहिए था किंतु चुनावों में जातीय कारकों से अधिक लाभ मिलता है क्योंकि लोग भूल जाते हैं कि दशकों से जातियां सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/reserve-bank-of-india-warns-about-subprime-crisis/article-53575"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/reserve-bank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Subprime Crisis: भारतीय राजनीति में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति छायी रहनी चाहिए या जातिगत जनगणना। सामान्यतया भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को सुर्खियों में छाए रहना चाहिए था किंतु चुनावों में जातीय कारकों से अधिक लाभ मिलता है क्योंकि लोग भूल जाते हैं कि दशकों से जातियां सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं न कि उस संस्था की चेतावनी को जो अर्थव्यवस्था पर पैनी निगाह रखता है। Reserve Bank</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक ने उन तथ्यों को उजागर किया है जो आर्थिक स्थिति के बारे में सुखद संकेत नहीं दे रहे हैं। इनमें व्यक्तिगत ऋण और ऋण चूककर्ताओं में वृृद्धि के सबप्राइम संकट की परोक्ष चेतावनी भी शामिल है। मूल्यों में वृृद्धि के चलते रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत बने रहने दिया है। बैंक ने संकेत दिया है कि आम चुनावों तक रेपो रेट यही बने रहेंगे। दूसरे शब्दों में बैंक ने स्पष्टत: कहा है कि दरों में कटौती की बहुत कम गुंजाइश है। इसका अर्थ है कि ऋण लेने वालों चाहे वे वैयक्तिक हो या कारपोरेट, ऋण की लागत बढ़ती जाएगी। Reserve Bank</p>
<p style="text-align:justify;">क्या ऐसी स्थिति में बिहार की जातिगत जनगणना महत्वपूर्ण है? अगस्त 2023 के आंकड़ों के अनुसार मुद्रा स्फीति की दर 6.83 प्रतिशत है जो जुलाई में 7.44 प्रतिशत थी और भारतीय रिजर्व बैंक की सहन सीमा 6 प्रतिशत से आगे चली गयी और रिजर्व बैंक चाहता है कि यह 4 प्रतिशत से नीचे आए और यदि यह लक्ष्य प्राप्त होता है तो अच्छी बात है और नहीं होता है तो चुनावों के बाद दरें बढ़ सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">112 अत्यधिक पिछड़ी जातियां और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग जो सरकार की उज्जवला गैस योजना के अंतर्गत आते हैं, वे यह जानकर खुश होंगे कि सरकार ने रसोई गैस सिलेंडरों के दामों में 200 रूपए की कटौती की है। इसके साथ ही व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में 300 रूपए की वृृद्धि की है। यह क्रास सब्सिडी है। इससे गैस कंपनियों को नुकसान नहीं हो रहा है किुंत इससे अनेक मदों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। इससे महंगाई और जीवन की लागत बढ़ेगी। गैस पर सब्सिडी के स्थान पर बाजार से अधिक राशि जुटाई जाएगी। तकनीकी रूप से देखें तो इससे तेल कंपनियों का खजाना सिकुड़ जाएगा किंतु बाजार की लागत रिजर्व बैंक के आकलन को गड़बड़ा सकता है और इससे बैंक का 5.2 प्रतिशत का भावी आकलन गड़बड़ा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कमजोर वर्गों की प्रतिक्रिया के बारे में कहना आसान नहीं है। खुशहाली और कठिनाई की भावनाएं संतुलित नहीं हंै। ऐसी स्थिति में वे अपनी जातियों के अनुसार निर्णय ले सकते हैं और जिनके बारे में राजनीतिक रूप से कुछ भी भविष्यवाणी करना कठिन है। इससे अनेक अटकलें पैदा होती हैं और चुनावी पंडितों का कार्य कठिन हो जाता है। हालांकि रिजर्व बैंक का कदम चुनावी मुद््दों के पूर्णत: अनुकूल नहीं है किंतु इससे ये प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति में उठाए कदम और अधिक महत्वपूर्ण होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरीका में स्थिति इसके विपरीत है। वहां पर फेडरल बैंक दरों में वृृद्धि कर रहा है और दरों में एक और वृृद्धि की संभावना और है किंतु वहां पर रोजगार का सृजन हो रहा है। बेरोजगारी की दर घटकर 3.8 प्रतिशत रह गयी है और मजदूरी में भी वृृद्धि हुई है। यह भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। अमरीका में दरों में प्रत्येक वृृद्धि से शेष विश्व से पूंजी का प्रवाह अमरीका की ओर होता है। इसका तात्पर्य है कि अन्य देशों में निवेश में गिरावट आएगी और भारत को इस बारे में चिंतित होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक चाहता है कि सरकार के बॉण्ड, जी-सेक, सिक्योरिटी. बिक्री आदि पहले ही अधिक हो चुके हैं। दस वर्ष के बॉण्डों पर कम प्रतिफल मिल रहा है। बैंक ने कहा है कि वह तरलता के प्रबंधन के लिए उसके कदमों का लाभ नहीं मिला है। कुल मिलाकर अमरीका और जी सिक्योरिटी के बीच प्रतिफल में अंतर निचले स्तर तक पहुंच गया है और इससे रूपए-डालर की विनिमय दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। डॉलर पहले ही 83.25 रूपए तक पहुंच गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंक के खुला बाजार कार्य बॉण्ड की कीमतें गिर रही हैं। किंतु अमरीका में 20 वर्ष के बॉण्ड की कीमतें भी बढ़ रही हैं। मुद्रा की दरों का प्रबंधन करना कठिन हो रहा है। आवास क्षेत्र में ब्याज दरों में परिवर्तन करने से यह आशा जगी है कि बिक्री बढ़ सकती है किंतु यह भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास के लिए सांत्वना की बात नहीं है। वे व्यक्तिगत ऋणों के बारे में चिंतित हैं और उन पर निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वार्षिक आधार पर अगस्त 2023 में व्यक्तिगत ऋण बैंकों के ऋण का 37.7 प्रतिशत है। मौद्रिक नीति समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2022 में 33 लाख करोड़ और 2021 में 29 लाख करोड़ की तुलना में 2023 में यह 40 लाख करोड़ रूपए से अधिक है। इन ऋणों में क्रेडिट कार्ड ऋण में अगस्त में 23 प्रतिशत की वृृद्धि हुई है, वाहन ऋण में 21 प्रतिशत और आवास ऋण में 14 प्रतिशत की वृृद्धि हुई है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में खुदरा ऋण की कंपाउंड वार्षिक वृृद्धि दर मार्च 2021 और मार्च 2023 के बीच 24 प्रतिशत की वृृद्धि हुई। Reserve Bank</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक की वितीय स्थिरता रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। यह बैंकों के सकल ऋणों की कंपाउंड वार्षिक वृृद्धि दर 13.8 प्रतिशत से काफी अधिक है। असुरक्षित खुदरा ऋणों की हिस्सेदारी मार्च 2021 से मार्च 2023 में 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 25.2 प्रतिशत हो गयी है जबकि सुरक्षित ऋण 77.1 प्रतिशत कम होकर 74.8 प्रतिशत रह गयी है। जुलाई के अंत में बैंकों के असुरक्षित ऋण का कुल मूल्य 12 लाख करोड़ रूपए था।</p>
<p style="text-align:justify;">नोमुरा ग्लोबल मार्केट रिसर्च की 29 अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर ऋणों में बैंकों के लिए तात्कालिक जोखिम नही हैं किंतु विनियामक बार बार इन ऋणों में अत्यधिक वृृद्धि के बारे में चेतावनी दे रहा है और इससे निवेशक भी चिंतित हो रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक 2007-08 के वैश्विक सबप्राइम संकट जैसी स्थिति से चिंतित है तथापि शक्तिकांत दास ने ऐसी पुनरावृृति की संभावना के बारे में कुछ नहीं कहा है। इस क्षेत्र में अधिक चूक की प्रवृृति देखी गयी है। Reserve Bank</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में असुरक्षित ऋण भुगतान चूककतार्ओं की संख्या बढ़ रही है। व्यक्तिगत ऋण क्षेत्र में यह अप्रैल 2021 में 21.4 प्रतिशत थी और अब 21 अप्रैल 2023 को यह 32.9 प्रतिशत थी। बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 16044 उधारकतार्ओं पर कुल 396469 करोड़ रूपए का कर्ज है और यह राशि जानबूझकर चूककर्ता की श्रेणी में फंसी राशि में 41 प्रतिशत की वृृद्धि हुई है अ‍ैर यह दिसंबर 20220 में 245767 करोड़ रूपए से 1 लाख करोड़ रूपए अधिक हो गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बात के लिए अटकलें लगायी जा रही हैं कि जातिगत जनगणना के बाद ऋण माफी की मांग भी बढ़ेगी किंतु माइक्रो फाइनेंस उद्योग का कहना है कि उनके उधारकर्ता जानते हैं कि ऋण माफी की घोषणाआें से चूककर्ताओं की संख्या में वृृद्धि नहीं होगी या ऋण लागत में वृृद्धि नहीं होगी। राज्य और अन्य सरकारों को राजनीतिक दृृष्टि से इस ओर ध्यान देना होगा। कर दरों में मई 2024 तक परिवर्तन न हो किंतु बढ़े व्यक्तिगत ऋण और चूककर्ताओं की संख्या में वृृद्धि शुभ संकेत नहीं है जिसके बारे में भारतीय रिजर्व बैंक ने आगाह कर दिया है। Reserve Bank</p>
<p style="text-align:right;"><strong>शिवाजी सरकार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Indian Railways: यात्रीगण ध्यान दें! शुरू होने जा रही है एक नई एक्सप्रेस ट्रेन, जानें एक क्लिक में सारी जानकारी" href="http://10.0.0.122:1245/attention-passengers-a-new-express-train-is-going-to-start/">Indian Railways: यात्रीगण ध्यान दें! शुरू होने जा रही है एक नई एक्सप्रेस ट्रेन, जानें एक क्लिक में स…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Oct 2023 13:24:53 +0530</pubDate>
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                <title>अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए रिज़र्व बैंक भी मेरी सलाह से सहमत: राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को उन्होंने जो सलाह दी वह उचित थी और अब रिजर्व बैंक ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। गांधी ने बुधवार को ट्वीट किया “अर्थव्यवस्था को लेकर महीनों से जो चेतावनी मैं दे रहा हूं, आरबीआई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/reserve-bank-also-agrees-with-my-advice-to-improve-the-economy-rahul/article-17849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/rahul-gandhi4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को उन्होंने जो सलाह दी वह उचित थी और अब रिजर्व बैंक ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। गांधी ने बुधवार को ट्वीट किया “अर्थव्यवस्था को लेकर महीनों से जो चेतावनी मैं दे रहा हूं, आरबीआई ने अब उसकी पुष्टि की है। सरकार को यह कदम उठाने की जरूरत है: अधिक खर्च करें और ना ही ज्यादा उधार दे। गरीबों को पैसा दे और उद्योगपतियों को कर में छूट मत दीजिए। खपत बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में सुधार का काम आरंभ करें।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया के माध्यम से जो खतरनाक संदेश फैलाया जा रहा है, उससे गरीब को मदद नहीं मिलेगी और ना ही आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी।” इसके साथ ही गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर को भी पोस्ट किया है जिसमें रिजर्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए खपत बढ़ाना और कर्ज देना कम किया जाना ज़रूरी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2020 12:31:37 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशी मुद्रा भंडार 454 अरब डॉलर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[हालांकि इस दौरान स्वर्ण भंडार 27.08 अरब डॉलर से घटकर 26.97 अरब डॉलर का रह गया।
 विशेष निकासी अधिकार की राशि 13 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 20 लाख डॉलर बढ़कर 1.44 अरब डॉलर पर पहुँच गयी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/foreign-exchange-reserves-exceeded-454-million/article-11918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/foreign-currency.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> विदेशी मुद्रा का देश का सुरक्षित भंडार 13 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 1.07 अरब डॉलर और बढ़कर 13 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 454.49 अरब डॉलर के नए शिखर पर पहुंच गया। इससे पहले 06 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 453.42 अरब डॉलर रहा था। इस वर्ष मार्च के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार में 41.62 अरब डॉलर बढ़ चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक की तरफ से जारी आँकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा भंडार में 13 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ पहले के 421.26 अरब डॉलर से बढ़कर 422.42 डॉलर के बराबर पहुँच गई। हालांकि इस दौरान स्वर्ण भंडार 27.08 अरब डॉलर से घटकर 26.97 अरब डॉलर का रह गया। विशेष निकासी अधिकार की राशि 13 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 20 लाख डॉलर बढ़कर 1.44 अरब डॉलर पर पहुँच गयी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास सुरक्षित राशि एक करोड़ 40 लाख डॉलर बढ़कर तीन अरब 65 करोड़ 80 लाख डॉलर पर पहुँच गई।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2019 15:56:50 +0530</pubDate>
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                <title>रिजर्व बैंक की स्वायत्तता में नहीं हो सरकार का दखल : आईएमएफ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) (International Monetary Fund (IMF))ने कहा है कि वह भारतीय रिजर्व बैंक में सरकार या उद्योगों के हस्तक्षेप के खिलाफ है और वह सरकार एवं केन्द्रीय बैंक के बीच हाल के विवाद पर नजर रखे हुए है। आईएमएफ के संचार निदेशक गेरी रिस ने गुरुवार को वाशिंगटन में संवाददाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/international-monetary-fund-imf/article-6546"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/international-monetary-fund-imf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) (<strong>International Monetary Fund (IMF)</strong>)ने कहा है कि वह भारतीय रिजर्व बैंक में सरकार या उद्योगों के हस्तक्षेप के खिलाफ है और वह सरकार एवं केन्द्रीय बैंक के बीच हाल के विवाद पर नजर रखे हुए है। आईएमएफ के संचार निदेशक गेरी रिस ने गुरुवार को वाशिंगटन में संवाददाता सम्मेलन में रिजर्व बैंक और भारत सरकार के बीच विवाद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मुद्रा कोष इस विवाद पर नजर रखे हुए है और आगे भी इस पर नजर रखेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केन्द्रीय बैंक में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और आईएमएफ बैंकिंग नियामक की जिम्मेदारी, दायित्व तथा अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ मानकों का समर्थन करता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच मतभेद की रिपोर्ट आयीं हैं और इसके बाद वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी कर कहा था कि सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का सम्मान करती है और दोनों पक्षों के बीच समय -समय पर होने वाले विचार-विमर्श के अंतिम निर्णय को ही सार्वजनिक किया जाना चाहिये। आरबीआई अधिनियम के तहत प्रदत्त केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता शासन के लिये जरूरी है। सरकार इसका सम्मान करती है।</p>
<p>उसने कहा कि सरकार और आरबीआई दोनों की कार्यप्रणाली लोकहित और भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार होनी चाहिये। इस उद्देश्य के साथ सरकार और आरबीआई के बीच समय – समय पर विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार विमर्श होता है। अन्य नियामकों के साथ भी ऐसा होता है। सरकार ने कभी भी विचार-विमर्श की विषयवस्तु को सार्वजनिक नहीं किया। सिर्फ अंतिम निर्णय ही सार्वजनिक किये जाते हैं। सरकार इस विचार-विमर्श के माध्यम से मुद्दों पर अपनी राय रखती है और संभावित सुझाव देती है। आगे भी सरकार ऐसा करती रहेगी।</p>
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                <pubDate>Fri, 02 Nov 2018 18:03:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनपीए समाधान: रिजर्व बैंक का बैंकों में नई पूंजी डालने पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने बैंकों का फंसा कर्ज 9.6 प्रतिशत तक पहुंच जाने को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि एक तय समय सीमा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की समस्या सुलझाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नई पूंजी डालने की जरूरत है। पटेल ने उद्योग एवं वाणिज्य संगठन सीआईआई द्वारा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने बैंकों का फंसा कर्ज 9.6 प्रतिशत तक पहुंच जाने को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि एक तय समय सीमा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की समस्या सुलझाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नई पूंजी डालने की जरूरत है। पटेल ने उद्योग एवं वाणिज्य संगठन सीआईआई द्वारा यहां आयोजित सम्मेलन में वित्त मंत्री अरुण जेटली की उपस्थिति में बैंकरों एवं उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि फंसे ऋण का 9.6 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में मार्च 2017 में सकल एनपीए अनुपात 9.6 फीसदी पर तथा संकटग्रस्त संपत्तियों की वृद्धि का अनुपात 12 प्रतिशत पर पहुंच गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सार्वजनिक बैंकों की बैलेंस शीट उनके फंसे ऋण का समाधान कर पाने के लिए पर्याप्त नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सालों में इस अनुपात का लगातार उंचे स्तर पर बने रहने के मद्देनजर यह चिंता की बात है। पटेल ने स्वीकार किया कि अधिकांश सार्वजनिक बैंकों की बैलेंस शीट उनके फंसे ऋण का समाधान कर पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में उनमें नई पूंजी डालने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक बैंकों को एक तय समयसीमा में अपेक्षित पूंजी जुटाने में सक्षम बनाने योग्य कदमों की तैयारी के लिए सरकार और रिजर्व बैंक बातचीत कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2017 06:14:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोटबंदी का असर : रिजर्व बैंक से केंद्र को मिलने वाला लाभांश आधे से भी कम</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई/दिल्ली। केंद्र सरकार नोटबंदी के फायदे बेशक गिना रही हो किंतु यह उसके लिए नुकसानदायक नजर आ रहा है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार को जून 17 में समाप्त साल के लिए 30,659 करोड़ रुपए का लाभांश देने की घोषणा की है। यह राशि पिछले साल के 65,876 करोड़ रुपए की तुलना में आधे से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/center-dividend-low-which-get-from-reserve-bank/article-3051"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bank1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दिल्ली।</strong> केंद्र सरकार नोटबंदी के फायदे बेशक गिना रही हो किंतु यह उसके लिए नुकसानदायक नजर आ रहा है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार को जून 17 में समाप्त साल के लिए 30,659 करोड़ रुपए का लाभांश देने की घोषणा की है। यह राशि पिछले साल के 65,876 करोड़ रुपए की तुलना में आधे से भी कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई के निदेशक मंडल की हुई बैठक में सरकार को जून 17 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए 306.59 अरब रुपए का अधिशेष स्थानांतरित करने का फैसला किया गया। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में केंद्रीय बैंक से 58 हजार करोड़ के लाभांश मिलने का अनुमान रखा था। रिजर्व बैंक, सरकारी बैंक और वित्तीय संस्थानों से कुल लाभांश 74,901.25 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> 2011-12 के बाद केंद्रीय बैंक से सरकार को मिलने वाला सबसे कम लाभांश</h2>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों के अनुसार, पिछले साल 09 नवंबर से हुई नोटबंदी की वजह से नए नोटों की छपाई सहित अन्य कारणों से केंद्र सरकार को रिजर्व बैंक से मिलने वाले लाभांश में कमी आई है। वर्ष 2011-12 के बाद केंद्रीय बैंक से सरकार को मिलने वाला यह सबसे कम लाभांश है। उस समय सरकार को 16,010 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे।  केंद्रीय बैंक कि कमाई में विदेशी और घरेलू स्रोतों से मिलने वाली आय है। इसमें प्रमुख योगदान ब्याज रसीदों का है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2017 07:25:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीतिगत दर में कटौती को लेकर रिजर्व बैंक पर दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[कीमत मोर्चे पर जताई गई चिंता को निर्मूल साबित किया नई दिल्ली (एजेंसी)। मुद्रास्फीति के ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर आने तथा औद्योगिक वृद्धि के दो प्रतिशत से नीचे जाने के कारण रिजर्व बैंक पर मौद्रिक नीति रुख में बदलाव लाने और नीतिगत दर में कटौती का दबाव बढ़ा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-pressure-on-the-reserve-bank-to-cut-the-policy-rate/article-2354"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/reserve-bank.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">कीमत मोर्चे पर जताई गई चिंता को निर्मूल साबित किया</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> मुद्रास्फीति के ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर आने तथा औद्योगिक वृद्धि के दो प्रतिशत से नीचे जाने के कारण रिजर्व बैंक पर मौद्रिक नीति रुख में बदलाव लाने और नीतिगत दर में कटौती का दबाव बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति की 1-2 अगस्त को बैठक होगी, जिसमें 2017-18 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति के बारे में निर्णय किया जाएगा। अगली मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले मुद्रास्फीति का आंकड़ा आ चुका है और इसने केंद्रीय बैंक की जून में पेश मौद्रिक नीति समीक्षा में कीमत मोर्चे पर जताई गई चिंता को निर्मूल साबित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमपीसी ने मुद्रास्फीति के बढ़ने का जोखिम का हवाला देते हुए लगातार चौथी बार रेपो दर 6.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। मौद्रिक नीति समिति की बैठक में पटेल ने समय से पहले नीतिगत कार्रवाई से बचने की दलील देते हुए मुद्रास्फीति के और आंकड़ों का इंतजार करने को कहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा था कि हाल में खाद्य एवं गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई में जो कमी आई है, वह कितना टिकाऊ है, आगामी आंकड़ों से साफ होगा। रिजर्व बैंक का मुख्य जोर खुदरा मुद्रास्फीति पर है और यह जून में ऐतिहासिक रूप से 1.4 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">थोक महंगाई दर भी 8 महीने के न्यूनतम स्तर पर आ गई। इसी प्रकार, मई में औद्योगिक वृद्धि 1.7 प्रतिशत रही। उद्योग मंडल सीआईआई का विचार है कि मुद्रास्फीति केन्द्रीय बैंक के लक्ष्य से काफी नीचे आ गई है, ऐसे में रिजर्व बैंक को नीतिगत दर में कमी लाने के लिए प्रेरित होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 21:10:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिजर्व बैंक ने स्थिर रखी रेपो दर</title>
                                    <description><![CDATA[एसएलआर में 0.5 प्रतिशत कटौती जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया मुंबई। रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुए राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जताई। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">एसएलआर में 0.5 प्रतिशत कटौती</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुए राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा में सांविधिक तरलता अनुपात 0.5 प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया। एसएलआर के तहत बैंकों को निर्धारित हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में लगाना होता है। शीर्ष बैंक के इस कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक नकदी बचेगी। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 7.4 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति की यहां हुई पांचवीं बैठक में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पावधि कर्ज देता जबकि रिवर्स रेपो के अंतर्गत आरबीआई बैंकों से अतिरिक्त नकदी को लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2017 08:07:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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