<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/bilaspur/tag-21761" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Bilaspur - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/21761/rss</link>
                <description>Bilaspur RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उच्च न्यायालय ने सुनायी उम्रकैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/high-court-sentences-amit-jogi-to-life-imprisonment-in-jaggi-murder-case/article-83144"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बिलासपुर।</strong> छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुमार्ना भी लगाया गया है। जुमार्ना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। न्यायालय ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया। गौरतलब है कि यह मामला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से अधिवक्ता बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को समाप्त कर दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि चार जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। शुरूआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में शीर्ष अदालत ने मामल्े को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यवसाय से जुड़े रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब श्री शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/high-court-sentences-amit-jogi-to-life-imprisonment-in-jaggi-murder-case/article-83144</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/high-court-sentences-amit-jogi-to-life-imprisonment-in-jaggi-murder-case/article-83144</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:08:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/bilaspur.jpg"                         length="32115"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ की साध-संगत बनी जरूरतमंद परिवारों को सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर। बिलासपुर डेरे में पावन अवतार माह की खुशी के अवसर पर मानवता और सेवा भाव का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। इस पावन अवसर पर साध-संगत द्वारा 20 जरूरतमंद परिवारों को कंबल वितरित किए गए। ठंड के मौसम में कंबल पाकर जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ झलक रहा था। इस सेवा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chhattisgarhs-sadh-sangat-became-a-support-for-needy-families/article-80502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बिलासपुर।</strong> बिलासपुर डेरे में पावन अवतार माह की खुशी के अवसर पर मानवता और सेवा भाव का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। इस पावन अवसर पर साध-संगत द्वारा 20 जरूरतमंद परिवारों को कंबल वितरित किए गए। ठंड के मौसम में कंबल पाकर जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ झलक रहा था। इस सेवा कार्य का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सहारा देना और उनमें अपनापन व सुरक्षा की भावना पैदा करना रहा। आश्रम से जुड़े भाई-बहनों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ इस आयोजन में भाग लिया। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में ही है। ऐसे सेवा कार्य न केवल जरूरतमंदों को राहत पहुँचाते हैं, बल्कि समाज में प्रेम, करुणा और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chhattisgarhs-sadh-sangat-became-a-support-for-needy-families/article-80502</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/chhattisgarhs-sadh-sangat-became-a-support-for-needy-families/article-80502</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 11:04:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-01/bilaspur.jpg"                         length="34676"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        