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                <title>Krishi Vigyan Kendra - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Digital Agriculture: 3 करोड़ के करीब किसान सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े डिजिटल कृषि परामर्श सेवाओं का उठा रहे लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म के साथ 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/digital-agriculture-nearly-3-crore-farmers-are-taking-advantage-of/article-87330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/all-farmers-will-get-tubewell-connection-by-november-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Digital Agriculture: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म के साथ 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जुलाई 2021 में शुरू किए गए इस एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार मंच पर अब तक 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है। इसके अलावा, किसानों के लिए 351 कृषि उत्पादों से संबंधित 21,900 कृषि सलाह भी जारी की गई हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाकर इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया। इनमें से 5.35 लाख किसान कॉल सेंटर के माध्यम से, 21,517 मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए, 2,416 वेब पोर्टल के माध्यम से और 39,193 कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए पंजीकरण हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बताया कि किसान सारथी की सेवाएं देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और 6.63 लाख गांवों तक पहुंच चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) का उपयोग करता है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद संभव हो पाता है। साथ ही, कृषि अनुसंधान से जुड़ी जानकारी सीधे खेतों तक पहुंचाने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को समय पर, विश्वसनीय और कई भाषाओं में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, मौसम से जुड़े अपडेट और विशेषज्ञों से सीधे परामर्श की सुविधा भी मिलती है। यह प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने विकसित और लागू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि इन सभी संस्थानों के एक साथ जुड़ने से देश भर में कृषि सलाह का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार हुआ है, जिससे किसानों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार भरोसेमंद और उपयोगी सलाह मिल रही है। यह प्लेटफॉर्म किसान कॉल सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, मायस्कीम और भाषिनी जैसी प्रमुख राष्ट्रीय सेवाओं से भी जुड़ा हुआ है, जिसके जरिए किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिनमें 102 योजनाएं केंद्र सरकार की हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्लेटफॉर्म पर सभी प्रमुख अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी फसलों, बागान फसलों और चारा फसलों से संबंधित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी भी किसानों को दी जाती है। किसान अपनी स्थानीय भाषा में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सवाल पूछ सकते हैं और उसी भाषा में सलाह प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान सारथी प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से लाइव बातचीत की सुविधा भी देता है। साथ ही, किसानों के लिए एक ज्ञान भंडार भी उपलब्ध कराता है। इससे कृषि अनुसंधान संस्थानों की पहुंच बढ़ी है और वैज्ञानिक सलाह अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच रही है।सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के साथ-साथ कृषि अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। Agriculture News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:11:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>कृषि विज्ञान केंद्र उन्नत तकनीक किसानों तक पहुंचाने का सुदृढ़ माध्यम : कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर (Shri Karan Narendra Agricultural University, Jobner) के प्रसार शिक्षा निदेशालय के द्वारा प्रसार शिक्षा परिषद की तीसरी मीटिंग का आयोजन किया गया ’ उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति डॉ बलराज सिंह ने उद्घाटन भाषण में कहा कि इस परिषद के द्वारा किसानों के फीडबैक पर चर्चा करने तथा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/krishi-vigyan-kendra-is-a-strong-medium-to-deliver-advanced-technology-to-farmers/article-59724"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/krishi-vigyan-kendra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर (Shri Karan Narendra Agricultural University, Jobner) के प्रसार शिक्षा निदेशालय के द्वारा प्रसार शिक्षा परिषद की तीसरी मीटिंग का आयोजन किया गया ’ उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति डॉ बलराज सिंह ने उद्घाटन भाषण में कहा कि इस परिषद के द्वारा किसानों के फीडबैक पर चर्चा करने तथा भविष्य में तकनिकी हस्तान्तरण के लिए अनुसंधान में सुधार करने के उद्देश्य से इस प्रकार की मीटिंग आयोजित की जाती हैं ’ साथ ही बताया कि बाजार माँग, उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुसार ही अनुसंधान करने एवं कृषि विज्ञान केंद्रो के द्वारा किसानों तक नवीन तकनीकियों को पहुंचाना मुख्य उद्देश्य है ’ Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">माननीय कुलपति महोदय ने कहा कि केवीके अजमेर को मेरिगोल्ड और गुल्दावदी की नई किस्मों को बढ़ावा देने, घर की छत पर खेती, संरक्षित खेती को बढ़ावा देने’ केवीके, अलवर को खरीफ प्याज का जिले में एरिया बढ़ाने, ज्वार की मल्टीकट किस्मों मे दिव्उद्देश्य वाली किस्मों को बढ़ावा देने, सरसों वाले एरिया में खेत के चारों तरफ सौंफ की 3-4 लाइन उगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने का कहा केवीके फतेहपुर को ईद एवं रोजा के समय को ध्यान में रखकर तरबूज की बुवाई करने को प्रेरित करने, पान मेथी, कसूरी मेथी, काचरी तथा काकडी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कहा ’ केवीके, दौसा को जिले में सौंफ का एरिया बढ़ाने के साथ ही मधुमक्खी पालन करने के लिए कहा</p>
<h3>विभिन्न मुद्दों पर की गई कार्यवाही की प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया</h3>
<p style="text-align:justify;">निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुदेश कुमार ने प्रसार शिक्षा निदेशालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रो के द्वारा पिछली प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक के सुझावों एवं विभिन्न मुद्दों पर की गई कार्यवाही की प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया तथा कृषि विज्ञान केंद्र एवं निदेशालय द्वारा किए गए नवाचारों तथा विभिन्न संस्थानों के साथ किए गए समझौता हस्ताक्षर,</p>
<p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के गोद लिए गांव पचार तथा सुंदरपुरा में विगत तीन-तीन वर्षों में किये गए कार्यों की समीक्षा कृषि विज्ञान केंद्रों पर संचालित विभिन्न प्रोजेक्ट, सीड हब मे किसानों के खेतों पर सहभागिता के माध्यम से गुणवत्ता युक्त बीजों का उत्पादन करने, सेंजना की पतियों का पावडर पैकिंग करके किसान उत्पादक संघटन के सहयोग से मार्केटिंग करने, केवीके, अलवर द्वारा किये गए लाइट ट्रैप के नवाचार मे पकड़े गए बीटल का मुर्गियों के आहार में उपयोग मे लेना, सभी केवीके पर संचालित सफल कऋर मॉडल की रिपोर्ट भी सभी सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत की गई Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही इस वर्ष खरीफ से सभी केवीके पर शुरू किये गए संध्या कालीन चौपाल कार्यक्रमों की सफलता की जानकारी देते हुए भविष्य में इसके साथ बीज रथ चलाने, खरीफ तथा रबी मे बीज मेला के आयोजन करने की योजना के बारे में भी बताया ’ इसके पश्चात् सभी कृषि विज्ञान केंद्रो के वरिष्ठ वैज्ञानिक अध्यक्ष द्वारा अपने-अपने कृषि विज्ञान केंद्रो कि वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक आयोजित किए गए प्रशिक्षणों, प्रदर्शनों, तथा कृषि प्रसार के विभिन्न कार्यों की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया ’ Rajasthan News</p>
<h3>नये अनुसंधान और इनका अधिकाधिक प्रचार प्रसार करने के अपने सुझाव दिये</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद मीटिंग में मौजूद कृषि पंडित एवं पदम श्री अवार्ड प्राप्त प्रगतिशील कृषक सुंडा राम जी ने कनकोडा (बाड करेला), काचरी, काकड़ी की खेती को बढ़ावा देने, प्रगतिशील कृषक खेमा राम जी ने संरक्षित खेती पर प्रशिक्षण आयोजित करने हेतु सुझाव दिया तथा खीरा के गुणवतायुक्त सस्ते बीज की उपलब्धता के लिए सुझाव दिया, दौसा से आये प्रगतिशील कृषक श्याम सुंदर शर्मा ने भी किसानों के हित में खेती को लाभप्रद बनाने के लिए भविष्य में लवणीय पानी के उपयोग एवं उनसे उगायी जाने वाली फसलों के संबंध में नये अनुसंधान और इनका अधिकाधिक प्रचार प्रसार करने के अपने सुझाव दिये ’ Rajasthan News</p>
<h3>सभी कृषि विज्ञान केंद्र अच्छा कार्य कर रहे है | Rajasthan News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ जे.पी.एस. डबास ने अपने सुझाव मे कहा कि सभी कृषि विज्ञान केंद्र अच्छा कार्य कर रहे है लेकिन भविष्य में सुधार के लिए कृषक उत्पादक संघठन के साथ सफल किसानों को जोड़कर उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने, ऐसे किसानों द्वारा किसान मेले में स्टॉल लगाने, युवाओं को स्टार्ट-अप के लिए आगे लाये, सभी केवीके द्वारा सफल किसानों की सफलता की कहानियों को यू-ट्यूब चैनल पर दिखाये, प्रत्येक केवीके पर इन किसानों के उत्पादों का डिस्प्ले/ प्रदर्शनी लगाने, तथा बायो गैस संयंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया ’</p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम मे इफको के स्टेट हेड डॉ मान सहित विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशकगण, विभागाध्यक्ष एवं कृषि विज्ञान केंद्रो के वरिष्ट वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष तथा कृषक प्रतिनिधि सहित अन्य वैज्ञानिकों ने भाग लिया। अंत में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ सुदेश कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया ’ Rajasthan News</p>
<p><a title="Agnipath scheme : अग्निपथ योजना को लेकर सरकार की आई बड़ी अपडेट!" href="http://10.0.0.122:1245/agneepath-yojana-big-update-from-the-government-regarding-agneepath-yojana/">Agnipath scheme : अग्निपथ योजना को लेकर सरकार की आई बड़ी अपडेट!</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 15:24:51 +0530</pubDate>
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                <title>गेहूं में पीला रतुआ के लिए अनुकूल मौसम, किसान बरतें सावधानी</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों के लिए जारी की सलाह हनुमानगढ़। (सच कहूँ न्यूज) कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को गेहूं में पीला रतुआ के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम ईकाई कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के अनुसार हनुमानगढ़ जिले में 17 से 22 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/krishi-vigyan-kendra-issued-advisory-for-farmers/article-42773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/wheat-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों के लिए जारी की सलाह</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़। (सच कहूँ न्यूज)</strong> कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को गेहूं में पीला रतुआ के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम ईकाई कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के अनुसार हनुमानगढ़ जिले में 17 से 22 जनवरी के दौरान अधिकतम औसत तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 6.0 डिग्री सेल्सियस रहा। सप्ताह के दौरान आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ 20 जनवरी को हल्की बारिश दर्ज की गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आसमान में मौत का साया बन घूम रही ‘चाईना डोर’" href="http://10.0.0.122:1245/china-door-roaming-in-the-y-as-a-shadow-of-death/">आसमान में मौत का साया बन घूम रही ‘चाईना डोर’</a></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिनों से क्षेत्र में बादल छाए रहने और हवा में नमी की स्थिति पीला रतुआ के लिए अनुकूल है। जब अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान क्रमश: 16 से 20 डिग्री सेल्सियस और 3 से 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना होती है, तो ऐसे मौसम की स्थिति कवक रोग के लिए अत्यधिक अनुकूल होती है। कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के कीट वैज्ञानिक डॉ. उमेश कुमार ने किसानों से कहा है कि वे अपने खेतों में पीले रतुआ की नियमित निगरानी करें, जो ऐसे मौसम में फसलों को प्रभावित करने वाला एक कवक रोग है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान दिया जाए तो इस पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए खेतों की नियमित जांच जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि गेहूं की किस्में जो लंबे समय तक नहीं बदली जाती हैं, वे भी बीमारी के लिए अतिसंवेदनशील होती हैं। गेहूं की फसल में पीला रतुआ (येलो रस्ट) रोग के आने की संभावना है। पत्तों पर छोटे, चमकदार पीले, गोल धब्बे बनते हैं। इन पत्तियों को छूने पर पीला पाउडर हाथ पर लगना इसका मुख्य लक्षण है। रोग प्रभावित खेत में जाने पर कपड़े पीले हो जाते हैं। यह रोग खेत में प्रारंभ में 10-15 पौधों गोल दायरे में प्रारंभ होकर पूरे खेत में फैल सकता है। इसके प्रबंधन के लिए किसान लगातार खेत का निरीक्षण करते रहें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रोपीकोनाजोल 25 ईसी या टेब्यूकोनाजोल 25 ईसी का 1 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। रोग के प्रकोप एवं फैलाव को देखते हुए दूसरा छिड़काव 10-15 दिन के अंतर पर करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jan 2023 15:41:01 +0530</pubDate>
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