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                <title>Saint Ram Rahim - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Saint Ram Rahim RSS Feed</description>
                
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                <title>हिसार के डेरा श्रद्धालु के साथ हुआ चमत्कार, सुनिए उन्हीं की जुबानी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी सज्जन कुमार इन्सां सुपुत्र श्री जयकरण आठ मरला कॉलोनी, पटेल नगर, हिसार, जिला हिसार से पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने पर हुई रहमत का वर्णन इस प्रकार करता है:- लगभग सन् 2008 की बात है, मुझे हल्का सा बुखार हुआ। मैंने रहेजा अस्पताल में डॉ. रहेजा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/a-miracle-happened-with-a-dera-devotee-from-hisar-listen-to-it-from-his-own-words/article-76029"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/saint-ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी सज्जन कुमार इन्सां सुपुत्र श्री जयकरण आठ मरला कॉलोनी, पटेल नगर, हिसार, जिला हिसार से पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने पर हुई रहमत का वर्णन इस प्रकार करता है:-<br />
लगभग सन् 2008 की बात है, मुझे हल्का सा बुखार हुआ। मैंने रहेजा अस्पताल में डॉ. रहेजा से दवाई ली। दो दिन तक आराम नहीं हुआ तो डॉक्टर के अनुसार मैंने सी.बी.सी. टैस्ट करवाया, जिसमें प्लेटलेट्स करीब पचास हजार मिले। डॉक्टर साहिब ने मुझे दो-तीन दिन की दवाई दी और फिर सी.बी.सी. टैस्ट करवाया। प्लेटलेट्स में कुछ सुधार हुआ, परंतु जितना सुधार होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ। इस तरह कई बार सी.बी.सी. टैस्ट करवाया, परंतु पूरी तरह सुधार नहीं हुआ। डॉक्टर के अनुसार फिर मैंने बोन मैरो का टैस्ट करवाया ताकि पता चल सके कि प्लेटलेट्स कम क्यों हो रहे हैं। रिपोर्ट देखने पर डॉक्टर ने बताया कि जहां से प्लेटलेट्स बनते हैं, वहां पूरे बन रहे हैं, लेकिन खून में मिलकर उनकी संख्या कम हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर डॉ. रहेजा के अनुसार, मैंने डॉ. लवनीश गोयल को दिखाया जो जिंदल अस्पताल हिसार में कैंसर डिपार्टमेंट में बैठते हैं। डॉक्टर ने मेरी सभी रिपोर्ट्स देखकर मुझे दोबारा लाल पैथलैब जिंदल अस्पताल में ही सी.बी.सी. करवाने को कहा, तो रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम मिले। तब डॉक्टर ने मुझे दो-तीन दिन की दवाई दे दी। जब फिर से सी.बी.सी. टैस्ट करवाया तो प्लेटलेट्स में कुछ सुधार हुआ। डॉक्टर ने फिर दवाई दी और तीन दिन बाद यही टैस्ट फिर करवाने को कहा। इस प्रकार डॉक्टर मुझे 15-20 दिनों तक दवाई देता रहा और सी.बी.सी. टैस्ट करवाता रहा। हर बार सुधार होता। करीब 20 दिनों बाद प्लेटलेट्स पूरे हो गए अर्थात् डेढ़ लाख के लगभग। फिर डॉक्टर ने कहा कि अब आप एक सप्ताह के लिए दवाई बंद कर दें और सात दिन बाद फिर से टैस्ट करवाएं। सात दिन बाद टैस्ट करवाया तो प्लेटलेट्स कम हो गए। जब डॉ. लवनीश गोयल को रिपोर्ट दिखाई तो उसने कहा कि रिपोर्ट ठीक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने कहा कि डॉक्टर साहब और दवाई बदलकर देख लें। डॉक्टर ने कहा कि मैंने आपको अच्छी से अच्छी दवाई देकर देख लिया है। अब यह इन दवाईयों से ठीक नहीं होगा। डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि आप क्या काम करते हैं? मैंने कहा कि मैं शिक्षा विभाग में अध्यापक हूं। उसने कहा कि इसका एक ही इलाज है, प्लेटलेट्स पूरे करने के लिए कि आपको इंजेक्शन लगेंगे। मैंने कहा कि कोई बात नहीं, आप इंजेक्शन लगा दो, आप मेरे को ठीक कर दो बस! डॉक्टर ने कहा कि ये ऐसे इंजेक्शन नहीं हैं, यदि आप विदेशी इंजेक्शन लगवाएंगे तो 80 हजार रूपए का एक इंजेक्शन होगा और यहां का इंजेक्शन लगवाओगे तो चालीस हजार रूपए का एक इंजेक्शन होगा। मैंने कहा कि डॉक्टर साहिब ऐसी क्या बीमारी है जो इतने महंगे इंजेक्शन लगेंगे! उन्होंने स्पष्ट न बताते हुए बात घुमाकर ब्लड कैंसर की ओर इशारा किया। मैं अचानक यह सुनकर सुन्न-सा हो गया और आगे बात करने की एक बार तो हिम्मत नहीं हुई। लेकिन कुछ देर बाद फिर से हिम्मत करके पूछा कि डॉक्टर साहब, एक इंजेक्शन से मैं ठीक हो जाऊंगा? डॉक्टर ने कहा कि आप एक इंजेक्शन से भी ठीक हो सकते हैं और दो-तीन या चार इंजेक्शन भी लग सकते हैं। अगर दोबारा प्लेटलेट्स कम नहीं हुए तो आगे इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं है और यह इंजेक्शन छह महीने तक लगभग प्लेटलेट्स ठीक रखेगा। यदि आपकी किस्मत अच्छी हो तो हो सकता है कि आगे कभी और इंजेक्शन की जरूरत न पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं डरा हुआ था, मैंने एक सवाल और पूछा कि अगर इन इंजेक्शनों से भी ठीक नहीं हुआ तो फिर क्या होगा? डॉक्टर ने मुझे बताया कि इसके बाद एक और इलाज है जिसमें आपकी पित्ते की थैली निकालनी पड़ेगी। डॉक्टर के इतना कहने पर मैंने हिम्मत करके डॉक्टर से पूछा कि मैं घर वालों से सलाह करके आपको बताऊंगा। डॉक्टर ने कहा कि ठीक है, आप सलाह कर लें।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं मन ही मन रोता हुआ हिम्मत जुटाकर किसी न किसी तरह अपने घर पहुंचा, तो घरवालों ने मेरा उदास-सा चेहरा देखकर पूछा कि क्या बात है, आप ठीक तो हैं! मेरी घरवालों को बताने की हिम्मत नहीं हुई। लेकिन बार-बार पूछने पर मैंने घरवालों को सारी बात बता दी, जिसके बाद घरवाले भी यह सुनकर गुमसुम-से हो गए। मैं घर पर दो-तीन घंटे तक लेटा रहा, इसी दरमियान मुझे ख्याल आया कि क्यों ना गंगवा डेरा में जाकर वहां सेवादार भाई हरनेक सिंह इन्सां से मिलूं। क्योंकि मैंने पन्द्रह साल पहले डेरा सच्चा सौदा में पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से नामदान लिया था। मैं डेरा में मेहंदागढ़ी (हांसी) में कैंटीन पर सेवा किया करता था। वहां सेवादार भाई हरनेक सिंह जी सेवा किया व करवाया करते थे। मेरा उनसे बहुत प्रेम था। मैं भाई हरनेक सिंह जी के पास पहुंच गया और अपनी बीमारी के बारे में उसे बताया। उसने मुझे हौंसला देते हुए कहा कि मास्टर जी, तुम्हें कोई बीमारी नहीं है, तुम्हें कुछ नहीं होगा। आप चिंता न करें। हम दोनों कल ही सुबह पूज्य गुरु जी से मिलने सरसा दरबार चलेंगे और पूज्य पिता जी से तुम्हारी बीमारी के बारे में अर्ज करेंगे। पूज्य पिता जी की पावन दया-दृष्टि व वचनों से आप बिलकुल ठीक हो जाओगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं भाई जी की यह बातें सुनकर बड़ा खुश हुआ और अगले दिन सुबह मैं, सेवादार भाई हरनेक सिंह जी व मेरे जीजा जी, हम तीनों सरसा दरबार शाह सतनाम शाह मस्तान जी धाम व मानवता भलाई केन्द्र डेरा सच्चा सौदा सरसा (परमपिता शाह सतनाम जी धाम) में पहुंच गए। मजलिस के बारे में पता किया तो मालूम पड़ा कि आज सुबह मजलिस नहीं होगी और शाम की मजलिस है। इसलिए हम शाम तक रुक गए। शाम को मजलिस में रू-ब-रू प्रोग्राम था। मजलिस शुरू हुई तो हम भी वहां बैठ गए। जब पूज्य हजूर पिता जी स्टेज पर विराजमान हुए तो मैंने जी-भरकर पूज्य पिता जी के दर्शन किए। पूज्य हजूर पिता जी ने वचन फरमाए, ‘जो लोग बीमार हैं, वो रू-ब-रू प्रोग्राम में बात न करें, वे किसी अच्छे डॉक्टर से दवाई लें या यहां डेरा सच्चा सौदा में जो अस्पताल है (शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल), यहां से दवाई लेकर जाएं और दवाई लेने से पहले पांच मिनट सुमिरन करेंं और जो लंबे समय से बीमार हैं वो यहां से प्रसाद लेकर जाएं, मालिक उन पर जरूर रहमत करेंगे।’ मैं हैरान हो गया कि पिता जी ने तो बात करने से मना कर दिया। रू-ब-रू प्रोग्राम में बातें करने वाली संगत खड़ी हो गई। प्रेमी बारी-बारी पूज्य पिता जी से बातें कर रहे थे तो हिम्मत करके मैं भी खड़ा हो गया। एक सेवादार भाई जिसके हाथ में माईक था, वह मेरे पास आया और पूछा कि आपने किस के बारे में बात करनी है? मैंने कहा कि बीमारी के बारे में। वह कहने लगा कि अभी पिता जी ने बीमारी के बारे में वचन किए हैं कि आप अस्पताल से दवाई ले लें। आप वचनों को मानें। दवाई ले लो, ठीक हो जाओगे। बीमारी के बारे बात नहीं हो सकती। मैं यह सुनकर उदास होकर बैठ गया कि बात नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मजलिस के बाद पूज्य पिता जी के वचनानुसार मैं शाह सतनाम जी स्पैशलिटी हॉस्पिटल में दवाई लेने चला गया। मैंने पर्ची कटवाई और डॉक्टर से मिलने पहुंच गया। मैंने अपनी बीमारी के बारे उन्हें पूरा विस्तारपूर्वक बताया। डॉक्टर साहब ने लैब से खून टैस्ट करवाने के लिए लिख दिया। रिपोर्ट नॉर्मल आई यानि प्लेटलेट्स भी ठीक आए। मैं हैरान रह गया और बहुत खुश भी हुआ। डॉक्टर ने बताया कि आपको कोई बीमारी नहीं है, आप बिलकुल स्वस्थ हैं। मैं घर आ गया, परंतु मुझे विश्वास नहीं आया कि मैं लगातार तीन महीने से दवाई खा रहा हूं, तब रिपोर्ट ठीक क्यों नहीं आई और आज रिपोर्ट ठीक कैसे आ गई। कुछ दिनों के बाद मैं अपनी पिछली सारी रिपोर्टें साथ लेकर फिर से डेरे के अस्पताल में गया और डॉक्टर साहिब को सारी रिपोर्टस दिखाई। डॉक्टर कहने लगा कि आप फिर दोबारा आ गए! आपको कोई बीमारी नहीं है। मेरे बार-बार कहने पर कि डॉक्टर साहब, मेरा खून एक बार फिर टैस्ट करवा दो, तो उन्होंने फिर से टैस्ट लिख दिया। परंतु रिपोर्ट फिर नॉर्मल आई। डॉक्टर साहब कहने लगे कि अपनी पुरानी रिपोर्टों को फाड़कर फेंक दो। उन्होंने मजाकिया अंदाज में आगे कहा कि यदि आपको डॉक्टर को ज्यादा फीस देने का शौंक है तो मैं जब अपना अलग से अस्पताल खोलूंगा तब मेरे पास आ जाना, तब मैं फीस ले लूंगा। तब से लेकर आज तक पूज्य सतगुरु पिता जी की रहमत से मैं करीब सोलह साल से बिलकुल ठीक हूं। पूज्य गुरु जी की कृपा-दृष्टि व वचनों से ही मेरा पहाड़ जैसा कर्म पलों में कट गया। मैं पूज्य गुरु जी से विनती करता हूं कि हे मेरे सतगुरु जी, आप हमारे ऊपर हमेशा ऐसे ही अपनी दया-मेहर बनाए रखना जी, हमें सभी बुराईयों से बचाए रखना जी और अपना दृढ़-विश्वास बख्शना जी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 12:02:51 +0530</pubDate>
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                <title>पूज्य गुरु के ये वचन आपके जीवन को बदल देंगे&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में अपने कर्मों की वजह से दु:खी, परेशान रहता है। खुद के पाप-कर्म, खुद की बुराइयां बढ़ती जाती हैं तो इन्सान के दु:ख-परेशानियों में बढ़ोत्तरी होती चली जाती है। खुद की वो बुरी आदतें, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/these-words-of-pujya-guru-will-change-your-life/article-64528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/saint-ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में अपने कर्मों की वजह से दु:खी, परेशान रहता है। खुद के पाप-कर्म, खुद की बुराइयां बढ़ती जाती हैं तो इन्सान के दु:ख-परेशानियों में बढ़ोत्तरी होती चली जाती है। खुद की वो बुरी आदतें, परेशानियां इस जन्म की हो सकती हैं, जन्म-जन्म के पाप-कर्म की हो सकती हैं। इन परेशानियों से अगर इन्सान बचना चाहे तो वह अपने आत्म-विश्वास को बुलंद करे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आत्मविश्वास अगर आपके अंदर है तो आप अपने अंदर की तमाम बुरी आदतों, परेशानियों को पल में दूर कर सकते हैं। आत्मविश्वास सबसे जल्दी अगर बढ़ता है तो उसका एकमात्र उपाय सुमिरन है, भक्ति-इबादत है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब आप सुमिरन करेंगे तो आपके अदंर सहनशक्ति बढ़ेगी। अगर सहनशक्ति बढ़ेगी तो आप अंदर की बुराइयों पर जीत हासिल कर सकेंगे। कोई आपको बुरा कहता है, गाली देता है तो सहनशक्ति बढ़ने से ही आप पर उसका असर नहीं होगा। वरना तो यूं लगता है जैसे नंगी तारों को छू लिया हो। जरा-सी बात किसी को कह दो तो वह तमतमा जाता है। गुस्से में बुरा हाल हो जाता है क्योंकि आज आत्म-विश्वास किसी के अंदर है ही नहीं। उनके अंदर जरूर है, जिनको अपने सतगुरु, मौला पर दृढ़ विश्वास है। सुमिरन करते हैं, मां-बाप के अच्छे संस्कार हैं। उनके अंदर यह भावना रहती है कि वो अपने अल्लाह-मौला के हुकमानुसार मालिक की भक्ति-इबादत करते हुए सबका भला मांगते रहते हैं। जब आप सबका भला मांगते हैं तो मालिक आपका भला जरूर करता है क्योंकि जैसी आपकी भावना है, वैसा आपको फल जरूर मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Nov 2024 10:55:06 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशों में भी दिखा Saint Dr. MSG का जलवा, सतगुरू के प्रति प्रेम और अटूट विश्वास की मर्यादा की पेश</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा (सच कहूँ न्यूज़)। कहते हैं वो भगवान, अल्लाह, वाहेगुरू, राम कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। (Canada Naamcharcha) वो पूरे विश्व में विद्यमान है। डेरा सच्चा सौदा के संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी की पावन प्रेरणा अनुसार विदेशों में बैठी साध-संगत ने राम नाम पर दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का प्रण लिया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ram-rahims-power-was-visible-even-in-foreign-countries/article-48388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/canada-naamcharcha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कनाडा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> कहते हैं वो भगवान, अल्लाह, वाहेगुरू, राम कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। (Canada Naamcharcha) वो पूरे विश्व में विद्यमान है। डेरा सच्चा सौदा के संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी की पावन प्रेरणा अनुसार विदेशों में बैठी साध-संगत ने राम नाम पर दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का प्रण लिया। इसी के तहत बीसी कनाडा की साध-संगत ने केलोना शहर में नामचर्चा का आयोजन किया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Odisha Train Accident: 42 साल का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा, वजह का हुआ खुलासा" href="http://10.0.0.122:1245/odisha-train-accident-news/">Odisha Train Accident: 42 साल का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा, वजह का हुआ खुलासा</a></p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि कैनेडा (Canada Naamcharcha) में बहुत बड़ी तादाद में साध-संगत रह रही है और कैनेडा के अलग-अलग शहरों में डेरा सच्चा सौदा की मर्यादा अनुसार नामचर्चाएँ की जाती हैं। केलोना शहर में भी साध-संगत द्वारा उन्हीं मर्यादाओं का पालन करते हुए नामचर्चा का आयोजन कर गुरू यश गाया गया। नामचर्चा का शुभारंभ इलाही नारा ‘धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ नारा लगाकर किया गया। नामचर्चा में सतगुरु के प्रति प्रेम, दृढ़ विश्वास से परिपूर्ण शब्दवाणी से साध-संगत ने मंत्रमुग्ध होकर राम नाम की चर्चा सुनीं।</p>
<p style="text-align:justify;">पवित्र शब्दवाणी के बाद पूज्य गुरु जी का शाही पत्र भी पढ़ कर सुनाया गया जिसे सुन साध-संगत भावुक हो उठी। इस नामचर्चा में वैन्कोवर, टोरंटो, आओर यूएसए तक की साध-संगत ने पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। अपने शहर में साप्ताहिक नामचर्चा की शुरूआत को लेकर केलोना की साध-संगत का खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। इस नामचर्चा को लेकर साध-संगत में भारी उत्साह देखने को मिला।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 11:57:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>खबरदार! हो जाएं होशियार !! कहीं जाती रहे आपकी सुनने की शक्ति!</title>
                                    <description><![CDATA[अजी सुनते हो! जल्दी से एक माचिस की तीली देना, कान में खुजली हो रही है, कान साफ करूंगी। शायद कान (Ear) में मैल जमा हो गया है। खबरदार! अगर आप भी कान (Ear) का मैल साफ करने या खुजली करने के लिए ऐसा करते हैं तो ये आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/ear-care-tips/article-48049"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/pita-ji-ear-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अजी सुनते हो! जल्दी से एक माचिस की तीली देना, कान में खुजली हो रही है, कान साफ करूंगी। शायद कान (Ear) में मैल जमा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खबरदार! अगर आप भी कान (Ear) का मैल साफ करने या खुजली करने के लिए ऐसा करते हैं तो ये आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसा करने से आपके कान का पर्दा फट सकता है, आपके कान से खून निकल सकता है, जिससे आपके सुनने की शक्ति भी जा सकती है। इसलिए सावधान हो जाइये, ऐसी लापरवाही से बचिए। आपके लिए क्या बेहतर तरीका हो सकता है कान साफ करने के लिए, या कैसे पता चलेगा कि आपके कान में मैल जमा हो गया है इन सभी के बारे में आपको आज बताने जा रहे हैं जिसके नियमित उपयोग से आप अपने कानों को सुरक्षित तरीके से साफ कर सकेंगे और कोई नुकसान भी नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कहते हैं साफ-सफाई करना एक अच्छी आदत है जिसे रोज करना चाहिए लेकिन कान की सफाई…इसे रोज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कान जो है, यह शरीर का एक बहुत ही संवेदनशील हिस्सा है। इसकी साफ सफाई को लेकर हमें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि इसकी समय पर सफाई नहीं की जाए तो इनमें मैल जमा हो सकता है जिसे ‘ईयर वैक्स’ का नाम दिया गया है। जो कभी कभार इतना कठोर हो जाता है कि इसकी सफाई करना असंभव सा हो जाता है जिसके कारण कानों में खुजली शुरू हो जाती है और जिससे हमारे सुनने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में ये जरूरी नहीं है कि कानों की साफ सफाई करने के लिए गलत तरीके का इस्तेमाल किया जाए। कोई भी माचिस की तीली या हेयरपिन लेकर कान की सफाई करने लग जाएं। ऐसा करने से आपको गलत परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए आज आप जानेंगे कि कान की सफाई करने का आसान और सबसे सुरक्षित तरीका क्या है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये जानें:-</h3>
<p style="text-align:justify;">पहले तो आपको ये पता होना चाहिए कि कान में ज्यादा मैल होने के लक्षण क्या हैं-<br />
अगर आपके कान में ज्यादा मैल जमा हो जाता है तो आपको सुनाई कम देने लगेगा। दूसरा आपके कानों में सांय-सांय की आवाज आनी शुरू हो जाएगी या हल्की रिंगिंग होने लगेगी। ज्यादा मैल होने से कानों में खुजली शुरू हो सकती है और इरिटेशन हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अब ये भी जानें, जो हैं बहुत ही जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा यूपी से रूहानी सत्संग के दौरान साध-संगत द्वारा पूछे गए के सवालों के जवाब देते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने स्वास्थ्य संबंधी अनमोल टिप्स दिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : कान में अगर खाज होती है या कान साफ करना है तो क्या करें?</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी का जवाब : वैसे नेचर है कि जब आप नहाकर हटोगे तो कोई भी रूमाल या कपड़ा लेकर कान पर ऐसे मार कर देखना जितनी भी फालतू की चीज है वो बाहर आ जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पर आपको आदत बनी हुई हैं, खासकर बहनों को तो सिर की सुई निकाली और कान में मारने लग जाएंगी। हमने देखा है बेटियों को ऐसे करते हुए और भाई तिनका सा ले लेते हैं, आजकल बने बनाए भी आते हैं, उसका ये नहीं पता कि कहां तक चला गया। कई पर्दे में मार बैठते हैं, क्योंकि वो पतला सा होता है उसका कोई मुंह, सिर तो है नहीं और अंदर कान में खाज मची तो कईयों को मीठी-मीठी भी लगने लगती है और आगे पर्दे पर मार देते हैं और फिर सुनने वाले काम की छुट्टी। कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए।</p>
<h3>कान के बिल्कुल अंदर जो मैल होती है वो फायदेमंद होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्यादा ही हो तो खुद साफ रुई लो, जो डॉक्टरों के पास होती है, हल्का सा तिनके पर लगाकर कान की बाहर की तरफ जो मैल होती है वो निकल जाती है। कान के बिल्कुल अंदर जो मैल होती है वो फायदेमंद होती है। आपके कानों में कीट-पतंगा कुछ भी नहीं घुसता, क्योंकि ये जहरीली चीज होती है। वो इसकी बदबू से, आपको बदबू नहीं आती, पड़ोसी को भी नहीं आती, लेकिन सिर्फ उन कीट-पतंगों को आती है, जो कान में घुसने को तैयार रहते हैं। तो अंदर वो अगर थोड़ी सी वैक्स पड़ी है तो फायदेमंद है। उसकी बदबू से और उसको टच करने से वो जीव भाग जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे नाक में हैं वैसे ही कान के अंदर भी छोटे-छोटे बाल होते हैं और वो भी फिल्टर का काम करते हैं ताकि कानों पर पर्दें पर कोई और चीज जाकर जम ना जाए, कलियर सुने। जैसे प्याज की झिल्ली होती है, उससे भी पतला पर्दा होता है कान का और आप सुईयां, पता नहीं क्या-क्या मारते हैं। पहले तो आया करते थे कड़छी सी लेकर कि आजा तेरा कान साफ करूं। तो कई बहरे हुए हैं उस पंगे में, क्योंकि आगे कान का पर्दा फट जाता है। तो आप आराम से कान को साफ करें। कान में पानी न जाए तो ज्यादा अच्छा रहता है। तो कान में ज्यादा कलाकारी मत किया करो।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शूगर की बीमारी वाले करे ये उपाय | Ram Rahim" href="http://10.0.0.122:1245/sugar-ko-kaise-control-kare/">शूगर की बीमारी वाले करे ये उपाय | Ram Rahim</a></p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/ear-care-tips/article-48049</link>
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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 15:01:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8216;World Family Day&amp;#8217;&amp;#8230;गुरू जी की शिक्षा सटीक-उपयुक्त, परिवार रहें सदा संयुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिकों ने भी की है स्टडी, संयुक्त परिवार होता ‘रीढ की हड्डी’ ‘परिवार’ एक सुदृढ़ संगठन। कहते हैं एकता में बल होता है। (World Family Day) जैसे हाथ की पांचों अंगुलियोें को इकट्ठा करके बंद कर लें तो एक मुट्ठी बनती है और बंद मुट्ठी लाख की होती है अगर वही मुट्ठी खोल दी जाए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/gurujis-teachings-are-accurate-and-appropriate-families-should-always-remain-united/article-47650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/world-faimly-day.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों ने भी की है स्टडी, संयुक्त परिवार होता ‘रीढ की हड्डी’</h3>
<p style="text-align:justify;">‘परिवार’ एक सुदृढ़ संगठन। कहते हैं एकता में बल होता है। (World Family Day) जैसे हाथ की पांचों अंगुलियोें को इकट्ठा करके बंद कर लें तो एक मुट्ठी बनती है और बंद मुट्ठी लाख की होती है अगर वही मुट्ठी खोल दी जाए तो सब अंगुलियां अलग-थलग पड़ जाएंगी, जिनकी ताकत भी बहुत ही कम हो जाएगी। उसी प्रकार एक परिवार होता है, जो एक सुदृढ़ संगठन की भांति होता है। ‘संयुक्त परिवार’ एक ही छत के नीचे, एक ही घर में चार पीढ़ियों के लोगों के समूह को कहते हैं, जिनकी रसोई, पूजा-पाठ, संपत्ति भी सामूहिक, सांझी होती है। परिवार चाहे कितने भी जटिल और विविध क्यों ना हों, वो बहुत महत्व रखते हैं। हर वर्ष 15 मई को ‘विश्व परिवार दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जोकि समाज की बुनियादी इकाई के रूप में परिवारों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">(World Family Day) के अवसर पर डेरा सच्चा सौदा के संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां परिवार का महत्व सदा समझाते हैं। पूज्य गुरू जी ने डिजीटल दुनिया में टूटते रिश्तों को मजबूत करने के लिए SEED अभियान और सभी परिवार के सदस्य एक साथ खाना खाएं, इसके लिए TEAM अभियान शुरू किए हैं। इसके साथ ही गुरू जी बुजुर्गों की देखभाल पर ध्यान देने पर जोर देते हैं। पूज्य गुरू जी के वचनानुसार अब वैज्ञानिक भी मानते हैं, उनके रिसर्च में बहुत बड़ा खुलासा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडा के शोधाकतार्ओं द्वारा दिए गए रिव्यू के अनुसार, रोज परिवार के साथ डिनर करने से ईटिंग डिस्आॅर्डर से जुड़ी समस्याएं, शराब और अन्य पदार्थ की लत से बचा जा सकता है। ये किशोरों में आक्रामक व्यवहार, डिप्रेशन और आत्महत्या के खतरे को काफी कम करता है।यंग फीमेल प्रतिभागियों को परिवार के साथ खाने से अधिक लाभ मिलते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चलोगे गुरू जी की शिक्षानुसार, तो नहीं टूटेंगे कभी परिवार</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने शुरू करवाया, पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाए। परिवार में खुशहाली बनी रहे, इसके लिए प्रतिदिन नहीं तो कम से कम सप्ताह में एक दिन जरूर पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाए। आज पूज्य गुरु जी के वचनों अनुसार देश के विभिन्न राज्यों हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्टÑ समेत देश विदेश की साध-संगत परिवार के संगत भोजन ग्रहण करती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">परिवार के साथ खाना खाने के फायदे | World Family Day</h3>
<p style="text-align:justify;">जेएएमए नेटवर्क ओपन की एक स्टडी में सामने आया है कि परिवार के साथ खाने से खासतौर पर किशोर अच्छी डाइट लेते हैं। जो टीनएज बच्चे अपने परिवार के साथ खाते हैं, उनके फास्ट फूड और मीठे बेवरेज खाने की तुलना में फल और सब्जियां खाने की संभावना अधिक होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गंभीर मानसिक समस्याओं से बचाव</h3>
<p style="text-align:justify;">कनाडा के शोधाकर्ताओ द्वारा दिए गए रिव्यू के अनुसार, रोज परिवार के साथ डिनर करने से ईटिंग डिस्आॅर्डर से जुड़ी समस्याएं, शराब और अन्य पदार्थ की लत से बचा जा सकता है। ये किशोरों में आक्रामक व्यवहार, डिप्रेशन और आत्महत्या के खतरे को काफी कम करता है।यंग फीमेल प्रतिभागियों को परिवार के साथ खाने से अधिक लाभ मिलते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मोटापा नहीं होता</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको जानकर हैरानी होगी कि परिवार के साथ खाना खाने से बच्चों एवं किशोंरों में मोटापे और वजन से संबंधित समस्याओं का खतरा कम रहता है। जरनल आॅफ पीडियाट्रिक्स में प्रकाशिक अध्ययन में किशोरों के परिवार के साथ खाने और मोटापे या वजन से जुड़ी समस्याएं 10 साल देरी से आती हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि परिवार को हफ्ते में कम से कम एक या दो बार साथ बैठकर डिनर करना चाहिए। इससे बच्चों को आगे चलकर मोटापे का खतरा कम रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों में बढ़ता है आत्मसम्मान</h3>
<p style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड चिल्ड्रन हैल्थ के विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार के साथ खाना खाने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ने में मदद मिल सकती है। खाने की टेबल पर बच्चों से उनके दिन के बारे में पूछें और उनकी बात सुनें। इससे बच्चों को एहसास होगा कि उनके विचार भी महत्व रखते हैं जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">​कम्युनिकेशन स्किल बेहतर होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">2018 में कनाडा की स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे छोटी उम्र से ही परिवार के साथ खाना खाते हैं, उनमें साल की उम्र से 10 साल की उम्र तक सकारात्मक लाभ देखे गए। परिवार के साथ बातें साझा करने से बच्चों के बीच बेहतर कम्युनिकेशन हो पाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोज 150 ग्राम दाल, बींस का सेवन करें</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि पीएलओएस मेडिसिन का शोध कहता है कि जिन लोगों के भोजन में बींस, दालें और फलियां जैसी चीजें शामिल होती है उन्हें कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और हार्टअटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज का खतरा भी कम रहता है।</p>
<h3 class="entry-title td-module-title"><a title="मरकर भी इन्सानियत की मिसाल बन गई अमनजोत कौर इन्सां" href="http://10.0.0.122:1245/doctors-had-declared-brain-dead-after-being-injured-in-a-road-accident/">मरकर भी इन्सानियत की मिसाल बन गई अमनजोत कौर इन्सां</a></h3>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/gurujis-teachings-are-accurate-and-appropriate-families-should-always-remain-united/article-47650</link>
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                <pubDate>Mon, 15 May 2023 15:00:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>संतों का दिल दुखता है जब कोई झूठ बोलता है और बुरा कर्म करता है</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) से अपने फेसबुक पेज पर आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अमृतमयी रूहानी वचनों की वर्षा की। पूज्य गुरु जी ने आमजन से आह्वान किया कि वो दिखावा छोड़कर सच्ची भावना से भगवान और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/saints-heart-hurts-when-someone-tells-lies-and-does-bad-deeds/article-43302"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/msg-8-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा।</strong> सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) से अपने फेसबुक पेज पर आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अमृतमयी रूहानी वचनों की वर्षा की। पूज्य गुरु जी ने आमजन से आह्वान किया कि वो दिखावा छोड़कर सच्ची भावना से भगवान और उसकी सृष्टि से प्रेम करे।<br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि बड़ा मुश्किल है इन्सान का पहचान पाना कि वो जो कह रहा है, वो ही उसके अंदर है। वो जो दिखा रहा है क्या वो उसके अंदर है। जी नहीं, पुराने समय में एक गाना आया था, बड़ा सुना करते थे, आप लोगों ने भी शायद वो लाइनें सुनी हों, ‘रब्ब नाल ठग्गियां क्यों मारे बंदेया, दिन-रात पापां च’ गुजारे बंदेया’ आज वो बिल्कुल सही समय है इन लाइनों के लिए। आज का इन्सान ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि भगवान सब जानता है। कहता ना…ना… मैं चतुर-चालाक, मेरे में अकल, मैं ऐसा, मैं भगवान को क्या समझता हूँ।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आपको कई बार एक बात सुनाई है कि एक संत थे और उनके पास कोई गुरुमंत्र लेने आया। दो लोग थे। एक काबिल था और एक नाकाबिल था। उस समय में संत, पीर-फकीर परीक्षा लिया करते थे। आज के दौर में तो बिना परीक्षा के राम-नाम दिया जाता है और परीक्षा लेने लग जाओ तो कोई-कोई ही निकलेगा। उस समय की बात, एक लायक था और एक राम-नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, ख़ुदा, रब्ब के काबिल नहीं था। संतों ने उन दोनों को दो बटेर दिए कि इनकी परीक्षा लेते हैं। ये समझकर कि इनमें से एक ही लायक है, वैसे जवाब नहीं दे सकते। तो उनको बटेर दिए और बोले कि जाओ और थोड़ा सा इसे बेहोश करके वापिस ले आओ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब दोनों चल दिए। एक, जो आज के समय में भी हैं चतुर-चालाक, भगवान को कुछ दिखाना, बोलना कुछ और, अंदर जलवे कुछ और, पर्दे में जलवे कुछ और। तो वो गया, उसने झाड़ियों की तरफ देखा, कोई भी नहीं, इधर-उधर देखा कोई भी नहीं, गर्दन थोड़ी सी दबाई बटेर बेहोश हो गया। तो वो वापिस आया और संतों को कहने लगा कि लो जी आपका बटेर, ये बेहोश हो लिया है। तो संत-पीर, फकीर कहने लगे कि वो दूसरा अभी तक नहीं आया, पता नहीं क्या बात हो गई, क्यों नहीं आया। पहले वाला कहने लगा कि जी, वो कहीं दूर निकल गया होगा, क्या पता उसका? कौन सा पता चलता है किधर है? काफी समय बाद दूसरे सज्जन भी आ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">संतों ने पूछा कि भई बटेर को ऐसे ही ले आया, ये होता है भक्त, भक्त की श्रेणी, जैसा अंदर वैसा बाहर। तो संतों को आकर कहने लगा कि जी आपने बोला था कि जहां कोई भी न देख रहा हो वहां बेहोश करना। संत कहते, हाँ, बिल्कुल कहा था। वो कहता कि जी, मैं झाड़ियों में गया, सोचा यहां कोई नहीं देख रहा। जैसे ही मैंने इसको (बटेर को) मेरी तरफ किया तो ये मुझे देख रहा था और ये मुझे देख रहा था। कहता मैंने उसका उधर घुमाया, अब जैसे गला दबाने लगा कि बेहोश हो जाए तो अचानक ख्याल आया कि ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड तो कण-कण में, जर्रे-जर्रे में रहता है और हर किसी को देखता रहता है। कहता कि जैसे ही ये विचार आए मैं कुछ नहीं कर पाया। तो संत जी मुझे माफ करना, ये लो आपका बटेर, मैं बेहोश नहीं कर पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">तो संत मुस्कुराए, जो पहले गला दबाकर बेहोश करके लाया था उसे कहते बेटा! तू काबिल नहीं है। जो यह नहीं जानता कि मालिक हर जगह है, जानते हुए भी अन्जान बनता है, उससे बड़ा दूसरा पापी नहीं हो सकता। और ये इसको पता है कि भगवान हर जगह है और देख रहा है तो असल राम-नाम के लायक ये है, इसको गुरुमंत्र हम देते हैं। तो इस तरह से भाई आज के युग में बटेर का गला दबाकर वापिस लाने वाले बहुत हैं। भगवान को तो मजाक समझते हैं, बात ही कुछ नहीं। अपनी इगो, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मान-बड़ाई के भूखे, नंबरों का चक्कर, और कुछ नहीं। समाज में ज्यादातर लोगों का सारा साजोसामान इसी पर टिका हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अच्छे लोग भी बहुत हैं, जो परहित, परमार्थ करते हैं, नेकी करते हैं। जो उनके दिलोदिमाग में होता है, वो ही जुबान पर होता है। पर हमें बड़ा दर्द होता है कि जब कोई सज्जन झूठ बोल रहा होता है। दिखावा कुछ और, कर्म उसके सामने दिख रहे होते हैं राम जी की कृपा से, कि भई कर्म बुरे कर रहा है या इसकी नीयत क्या है? पर ये दिखा क्या रहा है? चुगली खा जाता है उसका फेस, चुगली खा जाती हैं उसकी आँखें। वो आँख ही नहीं मिलाता, मिलाता है तो फिर उसको पता है कि सब पढ़ लिया जाएगा। और उसे ये नहीं पता कि ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु तो सबके अंदर है और फकीर उसके सेवादार होते हैं, फकीरों को भी भगवान इशारा कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर फकीर कभी किसी का पर्दा नहीं उठाते। अब सांझे में तो बात कर रहे हैं, अकेले में बोलेंगे तो कि भई तूं खड़ा हो जा, तूं ये है। तो उसी टाइम कपड़े-लत्ते से बाहर। मुझे कहा, तो कहा कैसे? इसलिए फकीरों का काम सच्ची बात तो जरूर कहना, पर सांझे कहना है, पर्सनल नहीं। समझ ले तो भी फायदा, ना समझे तो आने वाला टाइम उसको भोगना होगा। फिर कुछ नहीं बनता। मौका होता है, अवसर होता है कि आदमी तौबा कर ले, अपनी चतुर-चालाकी छोड़ दे, नंबरबाजी से बाज आ जाए, नहीं तो भाई रामजी के घर थोड़ी सी देर है, अंधेर नहीं है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Feb 2023 16:52:09 +0530</pubDate>
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