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                <title>Organic Agriculture - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Organic Agriculture RSS Feed</description>
                
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                <title>अपनाएँ खेती में पटड़ा विधि, अच्छे मुनाफे के साथ बढ़ाएँ निधि</title>
                                    <description><![CDATA[ऑर्गेनिक खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहा ओमप्रकाश | Organic Farming सवा एकड़ में पटड़ा विधि से धान के साथ लगाया धनिया  उन्नत विधि से 80 फीसदी तक बच रहा पानी कम बीज की बिजाई करके ले रहा अच्छी पैदावार यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)। ‘काली रात सिर्फ उन लोगों के लिए होती है, जिन्हें मेहनत वाली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/omprakash-is-making-good-profits-from-organic-farming/article-48353"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/patda-technech-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ऑर्गेनिक खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहा ओमप्रकाश | Organic Farming</h3>
<ul>
<li style="text-align:left;"><strong>सवा एकड़ में पटड़ा विधि से धान के साथ लगाया धनिया</strong><strong> </strong></li>
<li style="text-align:left;"><strong>उन्नत विधि से 80 फीसदी तक बच रहा पानी</strong></li>
<li style="text-align:left;"><strong>कम बीज की बिजाई करके ले रहा अच्छी पैदावार</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)।</strong> ‘काली रात सिर्फ उन लोगों के लिए होती है, जिन्हें मेहनत वाली मोमबत्ती जलानी नहीं आती। जो मेहनत करते हैं उनको विजयी बनाने में तो कायनात खुद काम करती है।’ ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जिला यमुनानगर के गाँव खेड़कीब्राह्मणान के प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश ने। सवा एकड़ भूमि पर 80 फीसदी तक पानी बचाने के साथ ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) को अपनाकर कड़ी मेहनत के बल पर ये किसान पिछले चार सालों से कम लागत में भरपूर पैदावार लेकर अच्छा मुनाफा कमा रहा है। ओमप्रकाश का कहना है कि अगर किसान उन्नत विधियों का इस्तेमाल करके खेती करें तो पानी की बचत के साथ-साथ भारी भरकम लागत से भी बचा जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कम लागत में अच्छा मुनाफा</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश ने बताया कि उसके पास सवा एकड़ जमीन है, जिसमें उसने पटड़ा विधि अपनाकर धनिया व धान की बिजाई की हुई है। पटड़ों पर धनिया व नालियों में धान की सीधी बिजाई की गई है, जो कि बहुत ही अच्छे से तैयार खड़ी है। किसान ने बताया कि धनिया की फसल डेढ़ माह में काटकर बेच दी जाएगी। उसके बाद धान तेजी से ग्रोथ करेगी। उन्होंने बताया कि इस तरह से एक समय में वह दो फसल लेकर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर रहा है। वहीं धान की बिजाई में 8 किलो बीज के स्थान पर छ: किलो बीज लगता है और सबसे ज्यादा लाभ धान की फसल में पैडी मेथड़ से लगाई धान की अपेक्षा इस विधि में पानी की भी 80 फीसदी तक बचत होती है। जिसको लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेती से जुड़ें युवा | Organic Farming</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश ने बताया कि अगर किसान इन विधियों का इस्तेमाल कर दोहरी खेती करेंगे तो अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे। इसके साथ ही अन्य लोगों के लिए भी खेती में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि देश के युवा कमाई के चक्कर में विदेशों में जाने को तवज्जों दे रहे हैं, जबकि यदि वे अपने देश में उन्नत तकनीकों का प्रयोग करके खेती करें तो यहां भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पटड़ा विधि बहुत ही कारगर विधि है, यदि सभी किसान इस विधि को अपनाए तो कम बीज लगेगा, कम पानी की खपत होगी व खेत की कम जुताई होगी और पैदावार ज्यादा होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घर पर ही तैयार करते हैं तरल खाद | Organic Farming</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश ने बताया कि वह घर के कचरे से आॅर्गेनिक विधि से तरल खाद तैयार करता है। उसके बाद इस तरल खाद को पानी के साथ मिलाकर फसलों में डालता है, जिसका सीधा असर पौधों पर पड़ता हैं और अच्छा उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि पटड़ों की दूरी अढ़ाई फुट, गहराई 9 इंच रखी जाती है। खेत जुताई के बाद बीज फैलाना भी विशेष महत्व रखता है। इस विधि से सिर्फ किलो बीज की जरूरत पड़ी जबकि परंपरागत विधि से 8 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। किसान ने बताया कि इस विधि से अच्छा मुनाफा होता है। एक एकड़ में लगभग 18 से 20 हजार रुपये लागत आती है जबकि दो फसलों में से एक फसल तो पूरी बचत में रहती है। यानि एक फसल की बिक्री की आमदन बचत रहती है।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 15:23:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>ऑर्गेनिक कृषि ही समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[देश भर में कृषि के लागत खर्चों में अथाह वृद्धि, बढ़ती बीमारियां, अशुद्ध वातावरण इत्यादि सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान ऑर्गेनिक कृषि ही है। विशेष रूप से पंजाब प्रांत के किसान खाद व कीटनाशकों पर इतने ज्यादा निर्भर हो गए हैं कि यह बात आम ही सुनने को मिल जाती है कि कौन सा कीटनाशक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/organic-agriculture-is-the-only-solution-to-all-the-problems-like-impure-environment-etc/article-43518"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/organic-agriculture.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश भर में कृषि के लागत खर्चों में अथाह वृद्धि, बढ़ती बीमारियां, अशुद्ध वातावरण इत्यादि सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान ऑर्गेनिक कृषि ही है। विशेष रूप से पंजाब प्रांत के किसान खाद व कीटनाशकों पर इतने ज्यादा निर्भर हो गए हैं कि यह बात आम ही सुनने को मिल जाती है कि कौन सा कीटनाशक ज्यादा असरदार है। प्रत्येक किसान ऐसे कीटनाशक खरीदने में दिलचस्पी रखता है, जो ज्यादा से ज्यादा तीव्रता से असर दिखाए। इस चलन ने फसलों को जहरीला बना दिया और लोग सब्जियां अनाज के रूप में जहर ही खा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="तेज हवाओं व मौसम की उठापटक ने बढ़ाई किसानों की चिंता" href="http://10.0.0.122:1245/the-upheaval-of-strong-winds-and-weather-increased-the-concern-of-the-farmers/">तेज हवाओं व मौसम की उठापटक ने बढ़ाई किसानों की चिंता</a></p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ कीटनाशक व खादों के दाम महंगे होने के कारण लागत खर्च भी बढ़ रहे हैं। किसान कर्जदार होता जा रहा है और रसायनों का पीछा छोड़े बिना लागत खर्च कम होते नजर नहीं आ रहे। आज से 40-50 वर्ष पूर्व फसलों का उत्पादन कम था, लेकिन किसान खुश रहते थे। खर्च कम थे, वातावरण शुद्ध था और किसान भी शुद्ध खाना खाता था। यही नहीं दूसरों के लिए भी अच्छी व शुद्ध उपज उगाता था। नि:संदेह आॅर्गेनिक के लिए मंडीकरण आसान नहीं परंतु शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी। यदि किसान अपने परिवार के लिए ही आॅर्गेनिक कृषि की शुरुआत करेंगे तब बदलाव अवश्य आएगा। कोई रास्ता तलाशता है और कोई दूसरों के लिए राह बनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेहनती व अलग से कुछ करने वाले किसानों ने ऑर्गेनिक खेती के लिए अपना ही मंडी-प्रबंध किए हुए हैं। उनकी सब्जियां, फल, दूध, घी खरीदने वाले पक्के ग्राहक हैं। सूचना तकनीक के माध्यम से उन्होंने अपने कृषि उत्पादों का प्रचार किया है व फसलों के दाम आम फसलों से तीन गुणा मिल रहे हैं। जागरूकता बढ़ने से उपभोक्ता आॅर्गेनिक कृषि करने वालों को ढूंढने लगे हैं। यह भी वास्तविक्ता है कि आॅर्गेनिक कृषि करने वाले किसान भले ही कम हैं, लेकिन ऐसा भी देखा जा रहा है कि जागरूक उपभोक्ता आॅर्गेनिक सब्जियां खरीदने के लिए रोजाना ही कई-कई किलोमीटर तक पहुंच रहे हैं। यह भी नहीं कोई भी जागरूक नहीं, बल्कि लोगों को अभी ऑर्गेनिक वस्तुएं उतनी मुहैया भी नहीं हो पा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि ऑर्गेनिक उत्पाद आम मिलने लगेंगे तब उपभोक्ताओं में खरीदने के लिए दिलचस्पी भी बढ़ेगी। सफल किसान और कृषि तकनीक विशेषज्ञ पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने किसानों के साथ-साथ भूमिहीन लोगों को भी अपने घरों में आॅर्गेनिक सब्जियों के लिए ऐसी तकनीक व विधि बताई है, जिसके लिए मिट्टी की भी आवश्यकता नहीं। केंद्र सरकार ने आॅर्गेनिक कृषि पर बल दिया है। यदि किसान सरकारें व उपभोक्ता आॅर्गेनिक मिलकर आगे बढ़े, तब मनुष्य के साथ-साथ भूमि की सेहत स्वस्थ व खुशहाल हो सकती है।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Feb 2023 16:00:32 +0530</pubDate>
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