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                <title>Anger - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Anger RSS Feed</description>
                
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                <title>पीआरटीसी चालकों व कंडक्टरों का जीएम के खिलाफ फूटा गुस्सा, की रोड जाम</title>
                                    <description><![CDATA[मामला। पीआरटीसी बठिंडा डीपू के जरनल मैनेजर द्वारा कर्मचारी नेताओं के साथ की कथित बदसलूकी और सुनवाई न करने का | Protest जिला प्रशासन के दखल उपरांत जीएम के साथ सहमति बनने पर कर्मचारियों ने हटाई बसें बठिंडा(सच कहूँ/अशोक वर्मा)। पीआरटीसी बठिंडा डीपू के जरनल मैनेजर की ओर से कर्मचारी (Protest) नेताओं के साथ की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/prtc-drivers-and-conductors-anger-against-gm/article-10806"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/protest-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">मामला। पीआरटीसी बठिंडा डीपू के जरनल मैनेजर द्वारा कर्मचारी नेताओं के साथ की कथित बदसलूकी और सुनवाई न करने का | Protest</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिला प्रशासन के दखल उपरांत जीएम के साथ सहमति बनने पर कर्मचारियों ने हटाई बसें</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(सच कहूँ/अशोक वर्मा)।</strong> पीआरटीसी बठिंडा डीपू के जरनल मैनेजर की ओर से कर्मचारी <strong>(Protest)</strong> नेताओं के साथ की कथित बदसलूकी और सुनवाई न करने के विरोध में पीआरटीसी के चालकों और कंडक्टरों ने आज बस स्टैंड के मुख्य गेट व राष्ट्रीय सड़क मार्ग पर टेढ़ी बसें खड़ी कर दी, जिसके निष्कर्ष के तौर पर राष्ट्रीय सड़क मार्ग पर यातायात प्रबंध तहस-नहस हो गए हालांकि जिला प्रशासन के दखल उपरांत जीएम के साथ सहमति बनने पर कर्मचारियों ने बसें हटा ली और यातायात बहाल कर दिया परंतु लम्बे समय पड़ी रही रुकावट कारण मुसाफिर भारी मुश्किलों का सामना करते रहे खास तौर पर छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्र्गाे व मरीजों के लिए तो जाम मुसीबतें लेकर आया। बस स्टैंड में फंसें सरकारी और प्राईवेट बसें के भी काफी टाईम मिस हो गए, जिस कारण उनको आर्थिक नुक्सान बर्दाश्त करना पड़ा।</p>
<h2><strong>मुसाफिरों को करना पड़ा भारी परेशानियों का सामना | </strong>Protest</h2>
<p style="text-align:justify;">ट्रैफिक पुलिस ने चौंक में से वाहनों को परिवर्तनीे रास्तों के द्वारा निकाला। इस संघर्ष का नेतृत्व कर रहे पीआरटीसी वर्करज यूनियन के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बताया कि जरनल मैनेजर की तरफ से बीते दिनों कुछ फैसले लिए गए हैं। इसी तरह ही कुछ कंडक्टरों को बिना किसी जांच के नौकरियों से निकाल दिया गया है। इन मसलों को लेकर आज यूनियन का करीब 10 सदस्यता वफद जीएम परवीन कुमार के साथ बातचीत के लिए गया था। उन्होंने बताया कि वफद प्रति जीऐम का व्यवहार काफी रूखा व कथित तानशाह जैसा था जिसे लेकर हड़ताल करने की नौबत आई है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने सिर्फ दो तीन नेताओं के साथ बात करने संबंधी कहा परन्तु संगठन की तरफ से लिए सख़्त स्टैंड कारण जीऐम को वफद के साथ मीटिंग करनी माननी पड़ी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यह था मामला | Protest</h2>
<p style="text-align:justify;">पीआरटीसी वर्कर यूनियन (एटक) के अध्यक्ष प्रतीम सिंह का कहना था कि सोमवार को जीएम ने कुछ आदेश जारी किए थे, जिनका संगठन विरोध कर रही थी । इसी तरह ही बठिंडा डीपू के करीब एक दर्जन कंडक्टरों को फ्रॉड के शक में नौकरियों से निकाल दिया गया है जबकि कुछ मसले मुख्य कार्यालय के साथ सम्बन्धित थे उन्होने बताया कि इन मसलों को लेकर यूनियन का वफद जीएम को मिलने गया था, जिनका व्यवहार सही नहीं था। उन्होंने बताया कि संगठन ने मांगें न माने जाने की सूरत में सख़्त एक्शन की चेतावनी दी थी परंतु जीऐम की तरफ से अनदेखा करने पर जाम लगाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों और जीऐम के साथ मीटिंग में मांगों मान ली गई तो यातायात को शुरू करवा दिया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सहमति बनने पर कर्मचारियों ने उठाया धरना : जीएम | Protest</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पीआरटीसी बठिंडा डीपू के जरनल मैनेजर परवीन कुमार का कहना था </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यूनियन नेताओं के साथ मीटिंग दौरान सहमति बनने पर मसला निपटा लिया गया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मुख्य दफ़्तर के साथ सम्बन्धित मांगों संबंधी उच्च आधिकारियों पत्र लिखा जाएगा,</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जबकि स्थानीय स्तर की मांगें स्वीकृत कर ली गई हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यूनियन की ओर से व्यवहार सम्बन्धित लगाए आरोप सही नहीं हैं।</strong></li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2019 09:47:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर बीच चौराहे इतना जानलेवा गुस्सा क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[जानलेवा मारपीट होती जा रही है आम दिसबंर के पहले पखवाड़े की नई दिल्ली के पांडव नगर और मयूर विहार में दो युवकों की रोडरेज (Why The Intersection Between This Is So Fierce Anger?) में हत्या अब कोई नई बात नहीं रही है। यह कोई अकेली दिल्ली की घटना भी नहीं है। इस तरह की रोडरेज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>जानलेवा मारपीट होती जा रही है आम</h1>
<p>दिसबंर के पहले पखवाड़े की नई दिल्ली के पांडव नगर और मयूर विहार में दो युवकों की रोडरेज (Why The Intersection Between This Is So Fierce Anger?) में हत्या अब कोई नई बात नहीं रही है। यह कोई अकेली दिल्ली की घटना भी नहीं है। इस तरह की रोडरेज की घटनाएं देश के किसी भी कोने में होना अब आमबात होती जा रही है। देश में जिस तरह से महंगाई की दर बढ़ रही है लगभग उसी तरह से रोडरेज की घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करें तो आम राह मारपीट और जान लेने की घटनाओं में औसतन प्रतिदिन तीन लोगों की जान जा रही है। केंन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों पर ही एक नजर डालें तो रोडरेज के मामलों की संख्या 5 लाख के करीब पहुंच गई है। हांलाकि यह आंकड़े 2016 के हैं पर यह भी साफ हो रहा है कि देश में इस तरह की घटनाओं की विकास दर सबसे उंची यानी की दस फीसदी तक पहुंच रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडू, महाराष्टÑ, मध्यप्रदेश, केरल और उत्तरप्रदेश रोडरेज की घटनाओं में अग्रणी प्रदेश हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अपने आप में गंभीर और चिंतनीय है कि सामान्य सी बात पर बीच राह सड़क पर हंगामा हो जाता है और एक दूसरे की जान (Why The Intersection Between This Is So Fierce Anger?) लेने में कोई देरी नहीं होती। जानलेवा मारपीट आम होती जा रही है। लगता है जैसे देश में अब संवेदनशीलता और सहनशक्ति जवाब देती जा रही है और गुस्सा और केवल गुस्सा ही रह गया है। मजे की बात यह है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कोई बड़ा कारण या आपसी रंजिश नहीं होती। लगभग मरने और मारने वाले दोनों का ही इरादा भी इस तरह का नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">अपितु होता है तो केवल और केवल मात्र छोटी सी बात पर इस कदर गुस्से का हावी होना होता है कि दूसरे की जान तक लेने में देरी नहीं लगती। मजे की बात यहां तक है कि यह सब होता है केवल देरी से बचने के लिए। यानी की आगे वाले ने साइड नहीं दी, अचानक ब्रेक लगे और एक के बाद एक गाड़ियों का आपस में भिड़ते जाना, आगे जाम होने के कारण लगातार हार्न बजाते जाना या किसी कारण से हल्की सी टच हो जाना जैसी घटनाएं बीच चैराहे आपस में गाली-गलौच, गुत्थम गुत्थ और यहां तक कि गोली चलाकर या चाकू या अन्य हथियारों से या अन्य तरह से पीट पीट कर जान लेना सामान्य होता जा रहा है। आखिर इतना आक्रोश या यों कहें कि इतना गुस्सा या इतना उबाल क्यों? यह अपने आप में विचारणीय है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अधिक मजे की बात यह है कि आज हम अपने आपको सबसे अधिक शिक्षित, समझदार, आधुनिकतम, दयाभावी कहने में नहीं हिचकते। जीव-जंतुओं तक के जीवन को बचाने के लिए आगे आने लगे हैं। सोशियल मीडिया पर तो जैैसे ज्ञान के भण्डारी ही बन गए हैं। एक से बढ़कर एक प्रवचन सूक्तियां सोशियल मीडिया पर पोस्ट होना आम होती जा रही है। यह सब होने के बाद भी बीच चौराहे जरा सी बात पर जानलेवा लड़ाई आम होती जा रही है। यहां यह साफ हो जाना चाहिए कि माव लिंचिंग या लिंचिंग तरह की घटनाओं को इससे अलग करके देखना होगा। यह तो सीधे-सीधे वह आक्रोश है जो बिना किसी सोच समझ के बीच सडक में छोटी सी बात पर विफर जाता है। आखिर इतना आक्रोश समाज में आ कैसे रहा है? लोगों की सामाजिकता कहां जाती जा रही है। मजे की बात यह कि इस तरह की घटनाओं के चश्मदीद लोग समझाइश के स्थान पर मूक दर्शक बने रह जाते हैं या फिर अब तो वीडियो बनाने में जुट जाते हैं, यह नहीं देखते कि समझा बुझाकर लड़ते हुए लोगों को अलग कर दें।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल आज हम दोहरी जिंदगी जीने लगे हैं। हमारी कथनी और करनी में अधिक अंतर आ गया है। आज हर व्यक्ति ज्ञानी होता जा रहा है। दुनिया में दूसरा कोई उससे अधिक ज्ञानवान हो ही नहीं सकता। सारी संवेदनाएं उसी में समाहित है। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि आज के लोगों की, लोग इसलिए कह रहा हूं कि यह कमोबेस पूरे समाज की तस्वीर है और इसके लिए केवल युवाओं को ही दोष नहीं दिया जा सकता, सहनशक्ति जवाब दे गई है। गुस्से में आग बबूला होने में क्षण भर भी नहीं लगता। प्रतिस्पर्धा और मेरी कमीज दूसरे की कमीज से कम उजली क्यों की उदेड़बुन में केवल पैसा और पैसा की दौड़ में मानवीय संवेदना खोती जा रही हैं। प्रतिस्पर्धा और केवल प्रतिस्पर्धा की दौड़ में व्यक्ति आपा खोता जा रहा है। फिर संयुक्त परिवार का विघटन, एकल परिवार और उसमें भी पति पत्नी दोनों के नौकरीपेशा होने की स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। देखा जाए तो सामाजिक ताना-बाना टूटने का ही परिणाम है कि रोडरेज की घटनाएं आम होती जा रही है। व्यक्ति की अपनी कुंठाएं और आए दिन की दौड़भाग अंदर की आग को आक्रोश में बदल देती है और लोग जरा सी बात पर मरने मारने को उतारु हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना आगा-पीछा सोचे एक दूसरे की जान लेने में क्षण भर भी नहीं सोचते। आखिर समाज जा किस दिशा में रहा है। केवल और केवल मात्र सुख सुविधाओं की दौड़ में लगे रहे और मानवीय संवेदनाएं इसी तरह से प्रभावित होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब समाज तेजी से विघटन की और बढ़ने लगेगा। एक बात साफ हो जानी चाहिए कि समाज विज्ञानियों को अभी से गंभीरता से इस तरह की मानसिकता में बदलाव की दिशा में काम करना होगा, नहीं तो आने वाली पीढ़ी हमें किसी हालत में माफ करने वाली नहीं हैं। युवाओं के दिल में बसे आक्रोश को सही व सकारात्मक दिशा देनी होगी। समाज विज्ञानियों व बुद्धिजीवियों के चेतने का समय आ गया है और उन्हें इन स्थितियों का निराकरण आज की परिस्थितियों में ही खोजना होगा।      <strong><em>राजेन्द्र शर्मा</em></strong></p>
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                <pubDate>Thu, 10 Jan 2019 19:42:53 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूषित पेयजल सप्लाई से गुस्साएं मौहल्लावासी</title>
                                    <description><![CDATA[ जलदाय विभाग के एईएन का किया घेराव सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)। स्थानीय वार्ड 14 की महिलाओं व पुरुषों ने जलदाय विभाग द्वारा दूषित पेयजल की सप्लाई को लेकर जलदाय विभाग के एईइन का घेराव किया। एक ज्ञापन पार्षद अशोक वधवा के नेतृत्व में एईएन को सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि वार्ड 14 में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/anger-for-contaminated-drinking-water-supply/article-1014"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sadulshar-02.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> जलदाय विभाग के एईएन का किया घेराव</h2>
<p><strong>सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्थानीय वार्ड 14 की महिलाओं व पुरुषों ने जलदाय विभाग द्वारा दूषित पेयजल की सप्लाई को लेकर जलदाय विभाग के एईइन का घेराव किया। एक ज्ञापन पार्षद अशोक वधवा के नेतृत्व में एईएन को सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि वार्ड 14 में कुछ दिनों से दूषित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इसके इलावा पानी की सप्लाई भी सुचारू रूप से नहीं है। पानी सप्लाई का समय निश्चित नहीं है।</p>
<p>अनेक घरों में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचती। जिससे इस गर्मी में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। विदित रहे कि वार्ड नम्बर 13 की कुछ महिलाओं ने भी गत दिनों जलदाय विभाग का घेराव कर इस समस्या से अवगत करवाया गया था। लेकिन समस्या जस की तस रही। ज्ञापन देते समय नपा उपाध्यक्ष रामावतार यादव,राज कुमार, मोहित, हरीश, मुनीष व सीमा अडवाणी, सुमन, सरोज, कमला, वीणा सहित काफी संख्या में वार्ड 13 व 14 वासी शामिल थे।</p>
<h3>इनका कहना है कि</h3>
<p>दूषित पेयजल की शिकायत वीरवार को प्राप्त हुई है। इसके समाधान के लिए जेईएन को अवगत करवा दिया है। पानी की कमी को दूर करने के लिए वार्ड 13 व 14 के लिए आज सायं 7.30 से 9.30 बजे तक विशेष सप्लाई दी जाएगी।</p>
<p><em>सतपाल, एईएन, सादुलशहर।</em></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2017 07:08:21 +0530</pubDate>
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