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                <title>Same-sex Marriage - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Same-sex Marriage RSS Feed</description>
                
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                <title>Same-Sex New Rule: समलैंगिकता पर हुआ नया कानून पास!</title>
                                    <description><![CDATA[Same-Sex New Rule in Iraq: इराक की संसद ने शनिवार को समलैंगिक संबंधों को लेकर एक विधेयक पारित किया, जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध माना गया और जिसकी सजा 15 साल तक की जेल निर्धारित की गई है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार समूहों ने इस विधेयक को “मानवाधिकारों पर हमला” बताया है। इराक की संसद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/same-sex-new-rule-in-iraq/article-56863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/same-sex.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Same-Sex New Rule in Iraq: इराक की संसद ने शनिवार को समलैंगिक संबंधों को लेकर एक विधेयक पारित किया, जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध माना गया और जिसकी सजा 15 साल तक की जेल निर्धारित की गई है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार समूहों ने इस विधेयक को “मानवाधिकारों पर हमला” बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इराक की संसद में 1988 के वेश्यावृत्ति विरोधी कानून में संशोधन किया गया है जिस के तहत ट्रांसजेंडरो को 3 साल जेल की सजा सुनाई जाएगी, जिसे एक सत्र के दौरान पहले अपनाया गया था और जिसमें 329 में से 170 सांसदों ने भाग लिया था। Same-Sex New Rule</p>
<p style="text-align:justify;">समलैंगिक संबंधों के लिए पिछले मसौदे में मृत्युदंड का प्रस्ताव था, जिसे प्रचारकों ने “खतरनाक” बताया था। दस्तावेज़ की मानें तो नया संशोधन विधेयक अदालतों को ये अधिकार देता है कि वो समलैंगिक संबंधों में शामिल लोगों को 10 से 15 साल की जेल की सजा दे सके। इराक में समलैंगिक और ट्रांसजेंडर लोगों को पहले से ही लगातार हमलों और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<h3>ट्रांसजेंडर लोगों और डॉक्टरों को 3 साल तक की जेल</h3>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि समलैंगिक संबंधों को “बढ़ावा देने” के लिए न्यूनतम 7 साल की जेल की सजा और “जानबूझकर” महिलाओं की तरह व्यवहार करने वाले पुरुषों के लिए एक से 3 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। नया संशोधित कानून “व्यक्तिगत इच्छा और झुकाव के आधार पर जैविक लिंग परिवर्तन” को अपराध बनाता है और लिंग-पुष्टि सर्जरी करने वाले ट्रांसजेंडर लोगों और डॉक्टरों को 3 साल तक की जेल की सजा निर्धारित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इराक के रूढ़िवादी समाज में समलैंगिकता अपराध है, पहले ऐसा नहीं था, पहले समान-लिंग संबंधों को सजा का प्रावधान नहीं था। इराक के एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों पर सोडोमी के लिए या इराक के दंड संहिता में अस्पष्ट नैतिकता और वेश्यावृत्ति विरोधी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के इराक शोधकर्ता रज़ाव सालिही कहते हैं कि “इराक ने एलजीबीटीआई समुदाय के सदस्यों के साथ वर्षों से किए जा रहे भेदभाव और हिंसा को प्रभावी ढंग से कानून में संहिताबद्ध कर दिया है।” Same-Sex New Rule</p>
<p><a title="WhatsApp’s Warning: व्हाट्सएप ने दी भारत छोड़ने की धमकी! बंद हो जाएगा आपका WhatsApp?" href="http://10.0.0.122:1245/whatsapps-warning-about-leaving-india/">WhatsApp’s Warning: व्हाट्सएप ने दी भारत छोड़ने की धमकी! बंद हो जाएगा आपका WhatsApp?</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Apr 2024 09:29:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>समलैंगिक विवाह: सुप्रीम कोर्ट समीक्षा याचिका पर 28 नवंबर को करेगा सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने वीरवार को कहा कि समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले अपने 17 अक्टूबर के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका पर वह 28 नवंबर को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/same-sex-marriage-supreme-court-will-hear-the-review-petition-on-november-twenty-eight/article-55172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने वीरवार को कहा कि समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले अपने 17 अक्टूबर के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका पर वह 28 नवंबर को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी के ‘विशेष उल्लेख’ पर समीक्षा याचिका पर विचार करने के लिए तारीख मुकर्रर की। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ के समक्ष रोहतगी ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए कहा कि फैसला सुनाने वाले सभी न्यायाधीश (पांच सदस्यीय संविधान पीठ के) इस बात पर सहमत थे कि भेदभाव है और यदि भेदभाव है तो उसका समाधान होना ही चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि बड़ी संख्या में लोगों का जीवन इस पर निर्भर है। इसलिए इस मामले में खुली अदालत में सुनवाई की इजाजत दी जाए। शीर्ष अदालत के नियमों के अनुसार, समीक्षा याचिकाओं पर न्यायाधीशों के कक्ष में विचार किया जाता है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं में से एक उदित सूद ने समलैंगिक जोड़ों के विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले पांच सदस्यीय संविधान पीठ के 17 अक्टूबर के फैसले की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने फैसले को त्रुटीपूर्ण, स्व-विरोधाभासी और स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण करार दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में समलैंगिक जोड़ों की शादी को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था, लेकिन इसने हिंसा और हस्तक्षेप के किसी भी खतरे के बिना सहवास के उनके अधिकार को बरकरार रखा। अदालत ने इस धारणा को भी खारिज करने की कोशिश की थी कि समलैंगिकता एक शहरी, कुलीन अवधारणा थी। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="श्रमिकों का जीवन स्तर उठाने में पीएम विश्वकर्मा योजना लाभकारी – उपायुक्त" href="http://10.0.0.122:1245/pm-vishwakarma-scheme-beneficial-in-raising-the-standard-of-living-of-workers-deputy-commissioner/">श्रमिकों का जीवन स्तर उठाने में पीएम विश्वकर्मा योजना लाभकारी – उपायुक्त</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Nov 2023 19:01:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Same Sex Marriage Update: समलैंगिकता एक विकार, सर्वोच्च न्यायालय ने किया साफ!</title>
                                    <description><![CDATA[Same Sex Marriage Update: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि न्यायालय में कानून नहीं बनाया जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव का अधिकार केवल संसद के पास है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह की मान्यता का विरोध करते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/homosexuality-is-a-disorder-supreme-court-made-it-clear/article-53836"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/supreem-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Same Sex Marriage Update: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि न्यायालय में कानून नहीं बनाया जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव का अधिकार केवल संसद के पास है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह की मान्यता का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय समाज में इस प्रकार के संबंध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाह एक सामाजिक मान्यता है, जिसका हल अदालत में नहीं किया जा सकता। Homosexuality</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग व संत समिति ने भी सर्वोच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा कि समलैंगिक विवाह की अवधारणा पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है। भारत की महान संस्कृति में किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं। भारत की संस्कृति में परिवार की व्यवस्था, जो समाज के सुख व खुशहाली का आधार है, जिसे किसी भी तरह से विकृत नहीं किया जा सकता। बेशक दुनिया के 33 देश ऐसे हैं, जिनमें समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता है लेकिन 71 ऐसे भी देश हैं जिनमें समलैंगिकता एक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके तहत कठोर दंड का प्रावधान है। धर्मों के अनुसार भी समलैंगिकता एक बुराई है, विकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">समलैंगिकता एक विकृत मानसिकता का परिणाम है, जिसका वैज्ञानिक व मनोवैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाना चाहिए। पुरूष का पुरूष के साथ, स्त्री का स्त्री के साथ प्रेम प्यार से रहना कोई बुराई नहीं बल्कि यह तो सभ्य समाज का अंग है लेकिन पुरूष का पुरूष के साथ या स्त्री का स्त्री के साथ वैवाहिक संबंध या लैंगिक संबंध न तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही है और न ही धार्मिंक व प्राकृतिक दृष्टि से। Homosexuality</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति ने (भगवान ने) सृष्टि की रचना के साथ इसके विकास के लिए नर और मादा बनाए। नर और मादा केवल मनुष्य जाति में ही नहीं बल्कि हर जीव-जन्तु में बनाए और इस तरह वंश वृद्धि की एक व्यवस्था कायम की। प्रकृति द्वारा स्थापित व्यवस्था में दखल देने पर अवश्य गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जिस प्रकार किसी समाज की व्यवस्था में दखल देना, किसी राष्ट्र की व्यवस्था में दखल देना उस समाज व राष्ट्र को स्वीकार्य नहीं होता तो प्रकृति की व्यवस्था में दखल देना प्रकृति को स्वीकार्य कैसे हो सकता है। प्रकृति की व्यवस्था में दखल का मतलब है प्रकृति का कोप भाजन बनना। अत: समलैंगिकता को एक मनोविकार की तरह लेना चाहिए और इलाज करवाना चाहिए। Homosexuality</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="MSP News: मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, गेहूं व मसूर की फसल पर हो गई चांदी, इतना बढ़ा एमएसपी" href="http://10.0.0.122:1245/modi-government-gave-good-news-to-farmers/">MSP News: मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, गेहूं व मसूर की फसल पर हो गई चांदी, इतना बढ़ा एमएसपी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 17:58:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Same Sex Marriage in India: समलैंगिक शादी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Same Sex Marriage in India: उच्चतम न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की गुहार मंगलवार को ठुकरा दी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग तीन-दो के बहुत से खारिज कर दी जबकि हिंसा, जबरदस्ती या हस्तक्षेप के किसी भी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/same-sex-marriage-in-india/article-53769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/same-sex-marriage-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Same Sex Marriage in India: उच्चतम न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की गुहार मंगलवार को ठुकरा दी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग तीन-दो के बहुत से खारिज कर दी जबकि हिंसा, जबरदस्ती या हस्तक्षेप के किसी भी खतरे के बिना सहवास के उनके अधिकार को बरकरार रखा। संविधान पीठ ने बहुमत के फैसले में कहा कि कानून समान लिंग वाले जोड़ों के विवाह के अधिकार को मान्यता नहीं देता है। इस पर कानून बनाना संसद पर निर्भर है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति कौल ने विवाह के अधिकार को पढ़ा और ऐसे समान लिंग वाले जोड़ों को परिणामी लाभ देने के अपने अधिकार को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर न्यायमूर्ति भट, न्यायमूर्ति कोहली और न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने समान लिंग वाले जोड़ों की शादी को मान्यता देने से इनकार कर दिया। संविधान पीठ के सदस्यों ने हालांकि एकमत से केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि वह समलैंगिक जोड़ों को दिए जाने वाले अधिकारों और लाभों को सुव्यवस्थित करने के लिए एक समिति का गठन करेगी। बच्चा गोद लेने के मामले में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति कौल ने समलैंगिक जोड़ों को अधिकार दिया, लेकिन अन्य तीन न्यायाधीशों इस दृष्टिकोण से असहमति जताई और समलैंगिक तथा अविवाहित जोड़ों को गोद लेने से बाहर रखने वाले सीएआरए नियमों की वैधता को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट, न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 11 मई 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में यह भी कहा गया कि शीर्ष अदालत को इस समुदाय की सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी लाभों तक पहुंच के लिए उचित निर्देश भी पारित करने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ताओं का पुरजोर विरोध किया था। सरकार ने दलील देते हुए कहा था कि याचिकाकतार्ओं की मांग को अनुमति देने से व्यक्तिगत कानूनों के मामले में बेहद खराब स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। शीर्ष अदालत में सरकार ने यह भी कहा था कि इस विषय को विधायिका द्वारा (केवल इसके व्यापक परिणामों के कारण) ही संभाला जा सकता है। केंद्र सरकार ने यह भी दावा किया था सिर्फ सात राज्यों ने समलैंगिक विवाह के मसले पर उसके सवाल का जवाब दिया है। इनमें राजस्थान, आंध्र प्रदेश और असम ने ऐसे विवाहों के लिए कानूनी मंजूरी की मांग करने वाले याचिकाकतार्ओं के तर्क का विरोध किया है। संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील, ए एम सिंघवी, राजू रामचंद्रन, के वी विश्वनाथन (अब उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत), आनंद ग्रोवर और सौरभ किरपाल ने 21 याचिकाकतार्ओं का पक्ष रखा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में यह भी कहा गया कि शीर्ष अदालत को इस समुदाय की सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी लाभों तक पहुंच के लिए उचित निर्देश भी पारित करने चाहिए। केंद्र सरकार ने याचिकाकतार्ओं का पुरजोर विरोध किया था। सरकार ने दलील देते हुए कहा था कि याचिकाकतार्ओं की मांग को अनुमति देने से व्यक्तिगत कानूनों के मामले में बेहद खराब स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत में सरकार ने यह भी कहा था कि इस विषय को विधायिका द्वारा (केवल इसके व्यापक परिणामों के कारण) ही संभाला जा सकता है। केंद्र सरकार ने यह भी दावा किया था सिर्फ सात राज्यों ने समलैंगिक विवाह के मसले पर उसके सवाल का जवाब दिया है। इनमें राजस्थान, आंध्र प्रदेश और असम ने ऐसे विवाहों के लिए कानूनी मंजूरी की मांग करने वाले याचिकाकतार्ओं के तर्क का विरोध किया है। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील, ए एम सिंघवी, राजू रामचंद्रन, के वी विश्वनाथन (अब उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत), आनंद ग्रोवर और सौरभ किरपाल ने 21 याचिकाकतार्ओं का पक्ष रखा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 12:33:38 +0530</pubDate>
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                <title>Same-sex marriage: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्यों से विमर्श के लिए मांगा समय</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने समलैंगिक जोड़ों की शादी को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ से बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस मामले में विचार-विमर्श करके उनकी राय उसके समक्ष रखने की अनुमति देने की गुहार लगाई। मुख्य न्यायाधीश डी. […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-will-be-an-important-hearing-in-the-supreme-court-today-in-the-matter-of-recognition-of-same-sex-marriage/article-46301"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/same-sex-marriage.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>केन्द्र सरकार ने समलैंगिक जोड़ों की शादी को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ से बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस मामले में विचार-विमर्श करके उनकी राय उसके समक्ष रखने की अनुमति देने की गुहार लगाई। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की संविधान पीठ के केंद्र सरकार ने एक और हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा गया है कि राज्यों को पक्षकार बनाए और उनकी राय लिए बिना वर्तमान मुद्दों पर कोई भी निर्णय मौजूदा विरोधात्मक कवायद को अधूरा और छोटा कर देगा ।इस तथ्य पर विचार करते हुए परामर्श प्रक्रिया आयोजित करने तथा केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों की राय रिकॉर्ड पर रखने के वास्ते समय देने की मांगा संविधान पीठ से की गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र जारी किया</h3>
<p style="text-align:justify;">नए हलफनामे में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को दिनांक 18 फरवरी 2023 को एक पत्र जारी किया है, जिसमें याचिकाओं में उठाए गए मौलिक मुद्दों पर टिप्पणियां और विचार आमंत्रित किए गए हैं। केंद्र सरकार के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि वर्तमान मामला और शीर्ष अदालत द्वारा परिभाषित मुद्दा, यहां तक ​​कि जब विशेष विवाह अधिनियम-1954 तक सीमित था, तो मौजूदा कानून के तहत विचार किए जाने की तुलना में एक अलग तरह के “विवाह” नामक एक सामाजिक संस्था के तथाकथित न्यायिक निर्माण की आवश्यकता थी। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वर्तमान अदालती कार्यवाही में एक पक्ष बनाया जाना चाहिए। पीठ ने 18 अप्रैल से सुनवाई शुरू की थी। पहले दिन केंद्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई की योग्यता सवाल उठाते हुए इस पर विचार करने का अनुरोध अदालत से किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने संविधान पीठ की सुनवाई शुरू करने से ठीक पहले शीर्ष अदालत के समक्ष एक नया आवेदन दाखिल किया था। इसके जरिए तर्क देते हुए कहा गया था,”समान लिंग विवाह के अधिकार को मान्यता देने में न्यायालय द्वारा एक निर्णय का अर्थ कानून की एक पूरी शाखा का एक आभासी न्यायिक पुनर्लेखन करने जैसा होगा। न्यायालय को इस तरह के सर्वव्यापी आदेश पारित करने से बचना चाहिए, क्योंकि उसके (कानून के लिए) लिए उचित विधायिका है।”</p>
<h3 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार समलैंगिक शादी के खिलाफ</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि केवल उपयुक्त विधायिका ही एक संस्था के रूप में विवाह की समझ के भारतीय संदर्भ में सामाजिक लोकाचार, सामाजिक मूल्यों और व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता के आधार पर मुद्दों पर निर्णय ले सकती है। सरकार का यह भी कहना है कि केवल शहरी अभिजात्य विचारों को दशार्ने वाली याचिकाओं की तुलना उपयुक्त विधायिका से नहीं की जा सकती है। विधायिका व्यापक परिदृश्य के विचारों और आवाजों को दशार्ती है तथा पूरे देश में फैली हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने 13 फरवरी को मामले में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष विचार के लिए भेजने का फैसला सुनाया था। केंद्र सरकार ने 12 मार्च को अपना पक्ष लिखित रूप से शीर्ष अदालत के समक्ष रखा था, जिसमें समलैंगिक जोड़े की शादी को कानूनी मान्यता देने की मांग का विरोध किया गया है। सरकार का कहना है कि यह सामाजिक नैतिकता और भारतीय लोकाचार के अनुरूप नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि विवाह/मिलन/संबंध तक सीमित विवाह की प्रकृति में विषमलैंगिक होने की वैधानिक मान्यता पूरे इतिहास में आदर्श है और राज्य के अस्तित्व और निरंतरता दोनों के लिए मूलभूत आधार है। सरकार का मानना है कि समलैंगिक जोड़े की शादी को मान्यता देना न केवल संहिताबद्ध कानूनों का उल्लंघन होगा, बल्कि देश में व्यक्तिगत कानूनों और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को भी पूरी तरह से नुकसान पहुंचेगा। सरकार का कहना है कि समान लैंगिक संबंधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत अपराध की परिधि से अलग रखने के बावजूद देश के कानूनों के तहत समलैंगिक जोड़े विवाह के लिए मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा, “शादी करने वाले पक्ष एक ऐसी संस्था का निर्माण करते हैं जिसका अपना सार्वजनिक महत्व होता है। विवाह के अनुष्ठान/पंजीकरण के लिए घोषणा की मांग करना साधारण कानूनी मान्यता की तुलना में अधिक प्रभावी है। समान लिंग के व्यक्तियों के बीच विवाह की मान्यता और पंजीकरण पारिवारिक मुद्दे मात्र से परे हैं। शीर्ष अदालत ने संविधान पीठ के समक्ष मामले को अंतिम सुनवाई के लिए भेजते हुए कहा था कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार सहित विभिन्न अधिकारों के परस्पर प्रभाव के मद्देनजर यह मुद्दा मौलिक महत्व का है। शीर्ष अदालत के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क देते हुए कहा था कि प्रेम, अभिव्यक्ति और पसंद की स्वतंत्रता के अधिकार को पहले ही उच्चतम न्यायालय द्वारा मान्यता दी जा चुकी है। कोई भी उन अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है, लेकिन जहां तक विवाह का अधिकार प्रदान करने का सवाल है यह तो विधायिका के ‘विशेष क्षेत्र’ में आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेहता ने हालांकि, कहा था कि यदि एक मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में विवाह समान लिंग के आडे़ आता है तो गोद लेने पर सवाल आएगा और इसलिए संसद को बच्चे के मनोविज्ञान के मुद्दे को देखना होगा। उन्होंने दलील देते हुए कहा था कि इसकी जांच की जानी चाहिए कि क्या इसे (समलैंगिक जोड़े की शादी का मामला) इस तरह से उठाया जा सकता है। याचिकाकतार्ओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी. विश्वनाथन ने भी कहा था कि यहां अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा था कि शादी के अधिकार से इनकार अभिव्यक्ति और गरिमा के अधिकार से इनकार करना है। ये वास्तव में व्यक्तियों के प्राकृतिक अधिकार हैं। याचिकाकतार्ओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा था कि विशेष विवाह अधिनियम दो व्यक्तियों के बीच विवाह को मान्यता देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने नवतेज जौहर (आईपीसी की धारा 377 को गैर-अपराधीकरण करने का मामला) मामले में भी कहा था कि शीर्ष अदालत ने कहा था कि जीवन के अधिकार में विवाह, संतानोत्पत्ति और यहां तक ​​कि यौन रुझान का अधिकार भी शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी ने कहा था कि विवाह के अधिकार को केवल उनके यौन रुझान के आधार पर व्यक्तियों के एक वर्ग से नहीं रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि इसके लिए प्रावधान करने के लिए व्यक्तिगत कानूनों को सामंजस्यपूर्ण ढंग से पढ़ा जा सकता है। इस पर मेहता ने दलील दी थी कि शीर्ष अदालत ने नवतेज जौहर के मामले में समलैंगिक जोड़े की शादी के मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि कलंक आदि के प्रश्न का पहले ही ध्यान रखा जा चुका है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 10:44:36 +0530</pubDate>
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                <title>समलैंगिक विवाह का केंद्र सरकार ने किया विरोध, पूज्य गुरु जी की मुहिम का असर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ नयूज)। केंद्र सरकार ने समलैंगिक जोड़े की शादी को कानूनी मान्यता देने की मांग का उच्चतम न्यायालय के समक्ष विरोध करते हुए कहा है कि यह सामाजिक नैतिकता और भारतीय लोकाचार के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने समान लिंग के विवाह पंजीकरण की अनुमति देने की उच्चतम न्यायालय से मांग करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-lgbtq/article-44467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/supreme-court-lgbtq.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ नयूज)।</strong> केंद्र सरकार ने समलैंगिक जोड़े की शादी को कानूनी मान्यता देने की मांग का उच्चतम न्यायालय के समक्ष विरोध करते हुए कहा है कि यह सामाजिक नैतिकता और भारतीय लोकाचार के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने समान लिंग के विवाह पंजीकरण की अनुमति देने की उच्चतम न्यायालय से मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए लिखित जवाब दाखिल कर अपना विरोध दर्ज कराया है। शीर्ष अदालत सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शतक के बाद कोहली और एमएसजी का ये वीडियो हो रहा तेजी से वायरल" href="http://10.0.0.122:1245/virat-kohli-test-century-after-40-months/">शतक के बाद कोहली और एमएसजी का ये वीडियो हो रहा तेजी से वायरल</a></p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि विवाह/मिलन/संबंध तक सीमित विवाह की प्रकृति में विषमलैंगिक होने की वैधानिक मान्यता पूरे इतिहास में आदर्श है और राज्य के अस्तित्व और निरंतरता दोनों के लिए मूलभूत आधार है। सरकार का मानना है कि समलैंगिक जोड़े की शादी को मान्यता देना न केवल संहिताबद्ध कानूनों का उल्लंघन होगा, बल्कि देश में व्यक्तिगत कानूनों और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को भी पूरी तरह से नुकसान पहुंचेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि समान लैंगिक संबंधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत अपराध की परिधि से अलग रखने के बावजूद देश के कानूनों के तहत समलैंगिक जोड़े विवाह के लिए मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा,‘शादी करने वाले पक्ष एक ऐसी संस्था का निर्माण करते हैं जिसका अपना सार्वजनिक महत्व होता है। विवाह के अनुष्ठान/पंजीकरण के लिए घोषणा की मांग करना साधारण कानूनी मान्यता की तुलना में अधिक प्रभावी है। समान लिंग के व्यक्तियों के बीच विवाह की मान्यता और पंजीकरण पारिवारिक मुद्दे मात्र से परे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समलैंगिक पर पहले ही कर दिए थे वचन</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ये जो समलैंगिकता की बीमारी चली है जिसे लड़को में गे और लड़कियों में लेस्बियन कहा जाता है। बड़ी ही भयानक बीमारी है। इसके रिजल्ट आने वाले टाइम में भयानक जरूर होंगे। क्योंकि कुदरत के उलट जब-जब भी इन्सान चला है तब-तब ही उसे लेने के देने पड़े ही पड़े हैं। पशुओं से रिलेशन बनाया तो एड्स बीमारी ने आके घेर लिया, काला पीलिया आके चिपट गया। अब यें लेस्बियन या गे जो है जैसे-जैसे ये बीमारी बढ़ती जा रही है यानि आदमी का आदमी से रिश्ता, औरत का औरत से रिश्ता क्योंकि कइयों को अनपढ़ बेचारे पता नहीं होता ये गे या लेस्बियन क्या है। तो ये जो रिश्ता बढ़ता जाए जो कामुकता बढ़ती जा रही है ये भी ऐसी बीमारियां सामने लाएंगी जो बताते हुए शर्म आएगी पर छुपाई नहीं जा पाएगी। एड्स को काई छुपा थोड़ा नहीं पाता है। कितनी भयानक बीमारी है। ऐसी बीमारियों को बुला रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिखने में भक्त नजर आते हैं। हाव भाव सारे भक्तों वाले है और कर्म सारे राक्षसों वाले हैं। कहां से घर परिवार में बाधा हो, कहां से खुद को भगवान के नूरी स्वरूप तो दूर साधारण स्वरूप के दर्शन कहां से हों। तो ये बीमारी भी हमारे समाज को खोखला कर रही है। कामवासना की आंधी है। इन्सान इतना गिर गया है पशु भी तब विषय विकार में पड़ते हैं जब उन्होंने बच्चा, औलाद लेना होता है। कुदरत के नियम को पूरा करना होता है। आदमी पशु से गिर गया है। इसको कोई लेना देना नहीं इन चीजों से। तो भाई ये एक बीमारी महाबीमारी बनती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं भी देख लो, किधर भी देख लो इस बीमारी से जब हम निगाह घुमाते हैं कोई-कोई बचा नजर आता है। वो भी जिसके अच्छे संस्कार हैं। सतगुरु, अल्लाह मालिक से बेहद प्यार है। वरना तो सतगुरु के वचनों की धज्जियां उड़ाते हुए ऐसे कर्म करते नजर आते हैं और पल-पल उनको भोगना होगा। अगर वो ना चेते, अगर वो ना जागे, तो फिर ऐसे चिल्लाएंगे कि दुनिया जागेगी उनको पता चलेगा कि ये बीमारी के घर हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 12 Mar 2023 18:28:50 +0530</pubDate>
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