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                <title>प्रदूषण के खिलाफ एनजीटी का कड़ा निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  (NGT strong decision against pollution) ने बढ़ रहे प्रदूषण के पीछे दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका है। नई बात यह है कि जुर्माना सरकार की बजाय अधिकारियों को अपनी जेब से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/ngt-strong-decision-against-pollution/article-6804"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/77.jpg" alt=""></a><br /><h2>दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका</h2>
<p style="text-align:justify;">नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  <strong>(NGT strong decision against pollution)</strong> ने बढ़ रहे प्रदूषण के पीछे दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका है। नई बात यह है कि जुर्माना सरकार की बजाय अधिकारियों को अपनी जेब से भरना होगा। नि:संदेह ट्रिब्यूनल की यह कार्रवाई उचित है, क्योंकि सरकारी खजाने से पैसा जा रहा था जिसकी अधिकारियों को रत्ती भर भी सिरदर्दी नहीं थी। आम तौर पर अधिकारी कानून की उल्लंघना करने वाले फैक्ट्री मालिकों के साथ मिलकर प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते।</p>
<h2>अधिकारी चाहकर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे रिश्वतखोरी का धंधा बढ-फूल रहा है। अधिकारी वेतन के अलावा कई गुणा ज्यादा पैसा रिश्वत के रूप में वसूलकर अपनी जेब भर रहे थे। इस निर्णय का मजबूत पक्ष यह है कि अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी लेकिन निर्णय का एक कमजोर पक्ष यह भी है कि जो फैक्ट्री मालिक अधिकारियों की परवाह न करते हुए सीधा राजनेताओं के साथ सांठगांठ कर लेते हैं, अधिकारी चाहकर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते, यह उन अधिकारियों के साथ अन्याय भी होगा। दरअसल एनजीटी का निर्णय अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ केवल सजा जुर्माने तक ही सीमित है।</p>
<h2>राजनेता अधिकारियां के हाथ बांधकर रखते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का प्रशासनिक व्यवस्था से सबंधित पक्ष गायब है। यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रशासनिक व्यवस्था को ऐसा बनाएं कि गैर-कानूनी कार्य करने वालों की राजनैतिक पहुंच खत्म हो। मंत्रियों व विधायकों की भी जिम्मेदारी तय की जाए। आम तौर पर मंत्री/ विधायक अपनी नाकामी अधिकारियों के सिर मढ़ देते हैं। एक तरफ राजनेता अधिकारियां के हाथ बांधकर रखते हैं दूसरी तरफ किसी नुकसान के लिए अधिकारियों को आगे कर देते हैं। ऐसे में यदि कोई उपलब्धि हो तो श्रेय मंत्री या सरकार को मिलता है।</p>
<h2>बड़े-बड़े घोटालों में मंत्री बरी हो रहे हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">देश की समस्याएं जवाबदेही व इमानदारी की कमी के कारण बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े घोटालों में मंत्री बरी हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जरूर दायर हो जाती है। यहां प्रश्न यह उठता है कि यदि अधिकारी चालाक हैं तो फिर मंत्री किस मर्ज की दवा हैं जो भ्रष्ट अधिकारियों की निगरानी करने में नाकाम रहते हैं। मंत्रियों को पद केवल वेतन और भत्तों के लिए ही नहीं दिए जाते। एनजीटी मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता लेकिन यह तो मुख्यमंत्री ने देखना है कि उसके मंत्री सरकार की नीतियों के अनुसार काम कर भी रहे हैं या नहीं।</p>
<h2>एनजीटी का अधिकारियों के खिलाफ सख्ती का निर्णय सही</h2>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी का अधिकारियों के खिलाफ सख्ती का निर्णय सही है, लेकिन बीमारी की जड़ को हाथ डालने के लिए सरकारों को अपनी व्यवस्था में भी सुधार करना होगा। ‘राइट टू रीकाल’ की चर्चा भी हमारे देश में चल चुकी है लेकिन यह काम सरकारों ने करना है। अपने ही मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कौन बहादुरी दिखाता है? कौन नियम बनाता है? भ्रष्टाचार या राजनीति में बढ़ रहे अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ही फैसले सुना रही है। राजनेता भी अपनी आत्मा की आवाज सुनें और कानून कायदों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाएं।</p>
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<p>NGT, Strong, Decision, Against, Pollution</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 10:25:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश का ढांचा मजबूत, चुनौतियों से निपटने में सक्षम: अरुण जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का ढांचा मजबूत है और सरकार चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। जेटली एक पत्रकारवार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जेटली ने कहा कि अर्थव्?यवस्?था की स्थिति को लेकर पीएम के साथ कई बैठकें हुर्इं हैं। अतंरराष्?ट्रीय संस्?थाओं ने लगातार भारत की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-structure-of-the-country-is-strong/article-3445"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/jetli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का ढांचा मजबूत है और सरकार चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। जेटली एक पत्रकारवार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जेटली ने कहा कि अर्थव्?यवस्?था की स्थिति को लेकर पीएम के साथ कई बैठकें हुर्इं हैं। अतंरराष्?ट्रीय संस्?थाओं ने लगातार भारत की वृद्धि दर के अनुमान में कटौती की है। आईएमएफ और विश्?व बैंक समेत कई संस्?थाओं ने घटती वृद्धि? दर के लिए जीएसटी और नोटबंदी को जिम्?मेदार ठहराया है। जेटली ने कहा कि जहां तेजी से जरूरत होगी, वहां तेजी से काम होगा। तीन साल में महंगाई में कमी आई है। तीन साल में देश का विकास तेजी से हुआ। वित्?त मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल के दौरान जीडीपी की औसत दर 7.5 फीसदी रही। उन्?होंने कहा कि वैश्विक स्?तर पर भारत में विश्?वास बढ़ा है। अर्थव्?यवस्?था का बुनियादी ढांचा काफी मजबूत है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मोदी सरकार ने रखा तीन साल का रिपोर्ट कार्ड</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>विदेशी पूंजी निवेश बढ़ कर 400 बिलियन डॉलर हुआ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीएसटी सबसे बड़ा सुधार। इसके अलावा नोटबंदी, काले धन पर नकेल भी कसने में रहे कामयाब।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीएसटी से भ्रष्?टाचार में कमी आई है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 06:20:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में 50 साल की सूखी गर्मी के बाद मानसून हुआ मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[एमआईटी के अध्ययन में सामने आए तथ्य बोस्टन। मान्चेस्टर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालजीज (एमआईटी) ने एक अध्ययन में पाया है कि पिछले 50 सालों की शुष्क अवधि के दौर में बदलाव, जिसमे उत्तर और मध्य भारत में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई, लाते हुए विगत 15 साल में भारत में गर्मियों का मानसून मजबूत हुआ है। भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">एमआईटी के अध्ययन में सामने आए तथ्य</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बोस्टन।</strong> मान्चेस्टर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालजीज (एमआईटी) ने एक अध्ययन में पाया है कि पिछले 50 सालों की शुष्क अवधि के दौर में बदलाव, जिसमे उत्तर और मध्य भारत में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई, लाते हुए विगत 15 साल में भारत में गर्मियों का मानसून मजबूत हुआ है। भारत में हर साल गर्मियों का मानसून जून और सितंबर के बीच बारिश लाता है। शोधार्थियों ने पाया कि 2002 के बाद से देश में शुष्क मौसम में बारिश होने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसके साथ ही मजबूत मानसून के कारण ज्यादा बारिश होती है और यह देश की बहुतायत जनसंख्या वाले मध्य भारत में शक्तिशाली एवं हानिकारक बाढ़ लाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधार्थियों ने अपने शोध में पाया कि 2002 से लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत अधिक गर्मी का अनुभव किया गया और इस दौरान यहां का तापमान 0.1 से बढ़कर एक डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। इसी बीच, हिन्द महासागर के तापमान में काफी धीमी बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मान्चेस्टर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालजीज के वरिष्ठ शोधार्थी चेन वांग के मुताबिक भूमि पर अधिक और आसपास के पानी के उपर कम गर्मी ही मजबूत मानसून का प्रमुख कारण है। वांग ने कहा कि भारत में अचानक बहुत भयंकर गर्मी पड़ने लगी, जबकि हिन्द महासागर, जो हमेशा गर्म रहता था, की गर्मी धीमे-धीमे कम हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2017 06:38:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगले 2 सालों में और मजबूत होगी भारतीय सेना</title>
                                    <description><![CDATA[ अत्याधुनिक हथियार होंगे शामिल नई दिल्ली। संसद में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने एक रिपोर्ट पेश कर यह खुलासा किया गया है कि अगर भारत को युद्ध लड़ना पड़ता है, तो भारत के पास युद्ध करने के लिए पर्याप्त गोला बारूद नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बेशक भारत के पास 15 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;"> अत्याधुनिक हथियार होंगे शामिल</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने एक रिपोर्ट पेश कर यह खुलासा किया गया है कि अगर भारत को युद्ध लड़ना पड़ता है, तो भारत के पास युद्ध करने के लिए पर्याप्त गोला बारूद नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बेशक भारत के पास 15 लाख जवानों का मजबूत सशस्त्र बल हो, लेकिन पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार होने में अभी उसे 2 साल और लगेंगे। इसके पीछे की वजह भारत ने जो रक्षा उपकरणों से संबंधित जो सौदे किए हैं, उन्हें आने में तकरीबन 2 साल का समय लगेगा। संसद में पेश हुई कैग की रिपोर्ट से हथियारों के मामले में भारतीय सेना की बदहाली का खुलासा हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2013 से सेना में हथियारों की गुणवत्ता और उपलब्धता को बढ़ाने के लिए कोई भी मजबूत कदम नहीं उठाया गया है। अभी भी भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना जरूरत पड़ने पर मौजूदा समय में लड़ सकती हैं। लेकिन भारत के पास केवल 10 दिन लड़ने के लिए ही गोला बारूद होगा। इतना कह सकते हैं कि बिना हथियारों के भारत किसी दुश्मन से प्रभावी तरीके से नहीं लड़ सकता। 2013 में जहां 10 दिन की अवधि के लिए 170 के मुकाबले 85 गोला-बारूद ही (50 फीसदी) उपलब्ध था, अब भी यह 152 के मुकाबले 61 (40 फीसदी) ही उपलब्ध है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2019 तक होंगे भारत के पास सक्षम हथियार</h3>
<p style="text-align:justify;">अगले दो सालों में भारतीय सेना को रूस और इजरायल की तरफ से साल 2019 की पहली तिमाही में रॉकेट, ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और अन्य कई महत्वपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाले हथियार मिलेंगे। इसके अलावा भारतीय वायुसेना को 2019 से 2022 के बीच में फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे। इसका समझौता बीते साल सितंबर में हुआ था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कांग्रेस ने मांगा जवाब</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने सेना के पास गोला बारूद की कमी संबंधी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पर कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी सरकार को देश की जनता को इसका जवाब देना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि देश की उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर तनाव का माहौल है। इस स्थिति में देश के पास गोला बारूद कम होना चिंता का विषय है और मोदी तथा उनकी सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। सरकार को सेना की सभी जरूरतों को हर हाल में पूरा करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2017 09:39:31 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित होंगे पुलिस थाने व अग्रिशमन केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[आईएमटी रोहतक, फरीदाबाद, मानेसर और बड़ी में बनेंगे चार नए पुलिस स्टेशन चण्डीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)। प्रदेश में औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा आईएमटी रोहतक, फरीदाबाद, मानेसर और बड़ी में चार नये पुलिस स्टेशन और बहादुरगढ़ एवं बरवाला में दो पुलिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/police-stations-to-be-set-up-in-industrial-areas/article-1026"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/station.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">आईएमटी रोहतक, फरीदाबाद, मानेसर और बड़ी में बनेंगे चार नए पुलिस स्टेशन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चण्डीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> प्रदेश में औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा आईएमटी रोहतक, फरीदाबाद, मानेसर और बड़ी में चार नये पुलिस स्टेशन और बहादुरगढ़ एवं बरवाला में दो पुलिस पोस्ट स्थापित किए जाएंगे। इन सेवाओं पर 18.34 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निगम के प्रबन्ध निदेशक डॉ.राजा शेखर वुडरू ने बताया कि निगम द्वारा 10 नये अग्रिशमन केन्द्रों का निर्माण भी किया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मानेसर, बावल, रोहतक और फरीदाबाद में स्थापित होंगे अग्रिशमन केंद्र</h2>
<p style="text-align:justify;">चार नये अग्रिशमन केन्द्र मानेसर, बावल, रोहतक और फरीदाबाद में स्थापित किए जाएंगे, जिसमें कार्यालय कक्ष, आवासीय सुविधाओं, पम्प, भूमिगत जल भण्डारण और डीजल जनरेटर सैटों के साथ चार बेज के प्रावधान होंगे। इन अग्रिशमन केन्द्रों के निर्माण पर 18 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अन्य छ: अग्रिशमन केन्द्रों का निर्माण राई, बड़ी, मानकपुर, साहा, बहादुरगढ़ और बरवाला में दूसरे चरण में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निगम द्वारा इन अग्रिशमन केन्द्रों के लिए अग्रिशमन वाहनों के साथ-साथ अन्य उपकरणों एवं विशेषज्ञ स्टाफ की व्यवस्था करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग को पहले ही आग्रह किया जा चुका है ताकि इन केन्द्रों को संचालित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2017 09:27:11 +0530</pubDate>
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