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                <title>Nepal News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Nepal News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Tree Plantation: पूज्य गुरु जी के पावन अवतार दिवस पर नेपाल में गूंजा पौधारोपण का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार दिवस के शुभ अवसर पर नेपाल की साध-संगत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए पौधारोपण अभियान चलाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/message-of-tree-plantation-echoed-in-nepal-on-the-holy/article-89721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/nepal-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नेपाल।</strong> Tree Plantation: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार दिवस के शुभ अवसर पर नेपाल की साध-संगत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए पौधारोपण अभियान चलाया। इस अवसर पर गरुड़ा (रौतहट) और रायपुर मर्चवार (रूपनदेही) की साध-संगत ने उत्साहपूर्वक पौधे लगाए और उनकी देखभाल का संकल्प लिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/nepal-news-(3).jpg" alt="Nepal News (3)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान साध-संगत ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने में ही अहम भूमिका नहीं निभाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की नींव भी मजबूत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/nepal-news-(2).jpg" alt="Nepal News (2)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">पावन अवतार दिवस को समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए नेपाल की साध-संगत ने मानवता और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लेकर सभी ने हरियाली बढ़ाने और प्रकृति संरक्षण में योगदान देने का संदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/nepal-news-(1).jpg" alt="Nepal News (1)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर साध-संगत का उत्साह देखते ही बना। पौधारोपण के माध्यम से ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि खुशी के अवसरों को समाजहित और प्रकृति सेवा के कार्यों से जोड़कर उन्हें और भी सार्थक बनाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 14:59:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Nepal News: नेपाल की भारत सरकार से अपील!</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल ने भारत से अनुरोध किया है कि उसके National ID Card (NID) को सीमा पार यात्रा के लिए वैध पहचान दस्तावेज माना जाए, जिससे सुरक्षा और आवागमन दोनों बेहतर हो सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/nepal-news-nepals-appeal-to-the-indian-government/article-89174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/nepal-nid.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Nepal National ID: काठमांडू। </strong>एक सीनियर इमिग्रेशन अधिकारी ने कहा कि नेपाल ने औपचारिक तौर पर भारत से अपील की है कि वह बॉर्डर पार यात्रा के लिए उसके राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) को एक वैध ट्रैवल डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता दे। इसका मकसद पहचान वेरिफिकेशन और सुरक्षा को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनआईडी भारत के आधार कार्ड जैसा ही है और इसमें बायोमेट्रिक जानकारी होती है, जिसमें फिंगरप्रिंट, चेहरे की तस्वीरें और आईरिस स्कैन शामिल हैं। नेपाली सरकार ने पासपोर्ट आवेदन, जमीन का रजिस्ट्रेशन, बैंक अकाउंट खोलने और दूसरी सरकारी सेवाओं जैसी कई सरकारी सेवाओं के लिए एनआईडी को जरूरी कर दिया है। नेपाल की वर्तमान सरकार धीरे-धीरे पुराने नागरिकता सर्टिफिकेट को डिजिटली पढ़े जा सकने वाले पहचान पत्रों से बदलना चाहती है। इसलिए ये कदम उठाया गया है।Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल यह भी चाहता है कि भारत नेपाली नागरिकों के बॉर्डर पार आने-जाने के लिए एनआईडी को एक वैध डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता दे, क्योंकि भारत अभी नेपाल के पासपोर्ट और नागरिकता सर्टिफिकेट को आधिकारिक पहचान डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता देता है। नेपाल और भारत के नागरिकों को दोनों देशों के बीच यात्रा करने के लिए पासपोर्ट या वीजा रखने की जरूरत नहीं है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">डिपार्टमेंट ऑफ इमिग्रेशन के डायरेक्टर जनरल राम चंद्र तिवारी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया कि उनके ऑफिस ने जून के आखिर में भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें नेपाली नागरिकों के लिए एनआईडी को वैलिड ट्रैवल डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता देने की मांग की गई थी।<br />तिवारी ने कहा, "अभी, भारत मुख्य रूप से नेपाल के पासपोर्ट और नागरिकता सर्टिफिकेट को आधिकारिक पहचान डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमने आधिकारिक प्रस्ताव दिया है कि नेशनल आइडेंटिटी कार्ड को भी हवाई यात्रा और क्रॉस-बॉर्डर मूवमेंट के लिए वैलिड पहचान डॉक्यूमेंट के तौर पर स्वीकार किया जाए।" नेपाल की अपील के बाद, काठमांडू में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हाल ही में नेपाल के इमिग्रेशन अधिकारियों से एनआईडी के बारे में जानकारी मांगी। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">तिवारी ने कहा, "दूतावास के अधिकारियों ने कार्ड के तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं के बारे में अनौपचारिक पूछताछ की। यह कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं थी, बल्कि जानकारी का लेन-देन था।" उन्होंने कहा कि एनआईडी पारंपरिक नागरिकता सर्टिफिकेट से ज्यादा मजबूत सुरक्षा देता है। उन्होंने आगे कहा, "नागरिकता सर्टिफिकेट सिर्फ एक कागज का डॉक्यूमेंट है जिसमें बायोमेट्रिक जानकारी नहीं होती, जबकि एनआईडी पहचान का एक सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका देता है। इसकी पहचान से नेपाल और भारत दोनों के लिए सुरक्षा इंतजाम बेहतर होंगे।"</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल और भारत का बॉर्डर खुला है, जिससे दोनों देशों के नागरिक ज्यादातर तरह के बॉर्डर क्रॉस करने के लिए बिना पासपोर्ट या वीजा के यात्रा कर सकते हैं। हवाई जहाज से नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों को अभी पासपोर्ट, वोटर आइडेंटिटी कार्ड या भारत की केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए आइडेंटिटी कार्ड इस्तेमाल करने की इजाजत है। नेशनल आईडी और सिविल रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के अनुसार, 4.5 मिलियन से ज्यादा नेपाली नागरिकों को पहले ही राष्ट्रीय पहचान पत्र मिल चुका है, जबकि लगभग 20 मिलियन लोगों ने इसके लिए एनरोल किया है। Nepal News </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 16:17:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nepal Violence: नेपाल में कई जिलों में लगा कर्फ्यू, सांप्रदायिक तनाव गहराया, हिंसा के विरोध में लोगों का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के तराई क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा के बाद कई जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। सरकार ने जांच समिति गठित की है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/nepal-violence-curfew-imposed-in-many-districts-in-nepal-communal/article-88990"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/nepal-curfew.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सिराहा/काठमांडू। नेपाल के तराई क्षेत्र में हालिया सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। विभिन्न जिलों में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और हिंसा में जान गंवाने वालों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। Nepal Violence</p>
<p style="text-align:justify;">हिंसा के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में जान गंवाने वाले किशोर गणेश यादव के परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसी मांग को लेकर धनुषा जिले सहित कई स्थानों पर लोगों ने प्रदर्शन किए और प्रशासन के विरुद्ध नारे लगाए।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुनसरी जिले से शुरू हुआ तनाव धीरे-धीरे सिराहा, सप्तरी, धनुषा और अन्य तराई क्षेत्रों तक फैल गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने कई क्षेत्रों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना संयुक्त रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हैं। Nepal Violence</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, हिंसा में गंभीर रूप से घायल एक अन्य युवक की अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ गई। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा किसी भी नई घटना को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। जनकपुर सहित कई शहरों में बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए संयम बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने हिंसा में जान गंवाने वाले सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने जांच के लिए समिति गठित कर दी है और घायलों के समुचित उपचार के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा शांति बहाल होने तक संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी जारी रहेगी। Nepal Violence</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:44:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंदरों के आतंक से निपटने को एक दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[बंदरों ने नेपाल के कई पहाड़ी क्षेत्रों में इस कदर तबाही मचाई है कि स्थानीय सरकार को एक अजीबोगरीब फैसला करना पड़ा। बंदरों के आतंक से निपटने के लिए एक दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी गई है। ये लालिगुरास नगरपालिका ने लिया है। इस दिन इलाके के लोग सामूहिक तौर पर बंदरों को खेतों और बस्तियों से भगाने का काम करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-day-public-holiday-announced-to-deal-with-monkey-menace/article-84740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/monkey-control.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Public Holiday: काठमांडू। बंदरों ने नेपाल के कई पहाड़ी क्षेत्रों में इस कदर तबाही मचाई है कि स्थानीय सरकार को एक अजीबोगरीब फैसला करना पड़ा। बंदरों के आतंक से निपटने के लिए एक दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी गई है। ये लालिगुरास नगरपालिका ने लिया है। इस दिन इलाके के लोग सामूहिक तौर पर बंदरों को खेतों और बस्तियों से भगाने का काम करेंगे। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">लालिगुरास नगरपालिका तेहरथुम जिले की है। एक दिन की छुट्टी जेष्ठ (1), यानी 15 मई को, पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक अवकाश घोषित की गई है, ताकि स्थानीय भाषा में “रातो बांदर” कहलाने वाले "रीसस मकाक" बंदरों के विरुद्ध ऑपरेशन चलाया जा सके। ये बंदर फसलों और सब्जियों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। दरअसल, हुड़दंगी बंदरों का झुंड मक्का, आलू, कोदो, फल और सब्जियों को आए दिन नष्ट कर रहा है। बंदरों की इस हरकत से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि किसान रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, जबकि कई स्कूली बच्चे फसलों की सुरक्षा के लिए पढ़ाई छोड़ रहे हैं। मेयर अर्जुन माबुहांग के हस्ताक्षर से जारी सूचना में कहा गया कि बंदरों की समस्या को अक्सर मामूली समझा जाता है, लेकिन इसने ग्रामीण किसानों की आजीविका पर गंभीर असर डाला है। सूचना में कहा गया, "किसान अपनी कृषि उपज बचाने के लिए पूरी रात जागकर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">इसका असर न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ा है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और परिवारों के दैनिक जीवन पर भी पड़ा है।" नगरपालिका ने बताया कि 15 और 16 मई को दो दिवसीय अभियान चलाकर बंदरों को नगरपालिका की सीमा से बाहर खदेड़ा जाएगा। किसानों, जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों से वार्ड कार्यालयों की ओर से तय किए गए स्थानों और निश्चित समय पर भाग लेने का आग्रह किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेयर माबुहांग ने कहा, “यह समस्या सामान्य लग सकती है, लेकिन इसने किसानों की आजीविका पर नकारात्मक असर डाला है। बंदर ग्रामीणों के उगाए मक्का, आलू, कोदो, फल और सब्जियों को नष्ट कर रहे हैं।” नगरपालिका ने बंदरों से अधिक प्रभावित इलाकों में देखरेख करने वाले कर्मियों की तैनाती और अस्थायी चौकियां भी बनाई हैं। अधिकारियों के अनुसार, वार्ड-8 के मेघा, वार्ड-6 और 8 की सीमा पर स्थित नागेश्वरी और वार्ड-5 के सिंहाथाप में बंदर गश्ती दल तैनात किए गए हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल चार कर्मचारी बस्तियों और खेतों से बंदरों को भगाने का काम कर रहे हैं। माबुहांग ने कहा कि जब उनके कार्यकाल की शुरुआत में बंदरों को नियंत्रित करने के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई थी, तब कई लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा, “उस समय लोगों ने इसे सामान्य समस्या माना, लेकिन अब किसान निराश हैं।” उन्होंने संघीय सरकार से बंदरों की समस्या को "राष्ट्रीय मुद्दा मानते हुए दीर्घकालिक समाधान लागू करने" की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">माबुहांग ने कहा, “केवल स्थानीय सरकारों के लिए इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। कृषि उत्पादन की रक्षा और किसानों को राहत देने के लिए संघीय सरकार को ठोस नीतियां और कार्यक्रम लाने होंगे।” नगरपालिका सामुदायिक जंगलों में अमरूद और नाशपाती जैसे फलदार पेड़ लगाने की योजना भी बना रही है, ताकि जंगलों में ही बंदरों के लिए भोजन उपलब्ध हो सके और वे बस्तियों और खेतों में कम आएं। हाल के वर्षों में नेपाल के पहाड़ी जिलों में फसलों पर बंदरों के हमले बड़ी समस्या बन गए हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अधिकारियों और समुदायों ने पारंपरिक डराने के तरीकों से लेकर तकनीकी उपायों और नसबंदी अभियानों तक कई प्रयास किए, लेकिन सफलता सीमित रही। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, 2024 में दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढ़ी नगरपालिका के मेयर तीर्थ राज भट्टराई ने काठमांडू में भूख हड़ताल कर बंदरों और अन्य वन्यजीवों के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति की मांग की थी। इसके बावजूद सरकार अब तक बंदरों के आतंक को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय नहीं ढूंढ पाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गंडकी प्रांतीय उद्योग, पर्यटन, वन और पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से किए गए एक अध्ययन में सख्त उपायों की सिफारिश नहीं की गई, क्योंकि हिंदू धर्म में बंदरों का धार्मिक महत्व है और उन्हें भगवान हनुमान का रूप मानकर पूजा जाता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि नसबंदी और पकड़ने जैसे उपाय बंदरों की आबादी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। नेपाल में बंदरों की तीन प्रजातियां रीसस मकाक, असमिया बंदर और हनुमान लंगूर पाई जाती हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल वन्य जीव और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध लगाने वाले कन्वेंशन (सीआईटीईएस) का भी हिस्सा है। राष्ट्रीय कानूनों के तहत सरकार की अनुमति के बिना संरक्षित वन्यजीवों के निर्यात पर रोक है। दोषी पाए जाने पर 5 से 15 वर्ष तक की जेल या 5 लाख से 10 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में रीसस बंदर को संरक्षित पशुओं की सूची में शामिल किया गया है, इसलिए सरकारी अनुमति के बिना इसका निर्यात प्रतिबंधित है। हालांकि, अधिनियम में उन संरक्षित जानवरों को नियंत्रित करने के उपायों का जिक्र नहीं है जो लोगों और कृषि उत्पादन के लिए खतरा बनते हैं। अधिकारियों ने "मंकी पार्क" स्थापित करने का सुझाव भी दिया है। Nepal News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 13:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल में बालेन सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव, चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर तनातनी</title>
                                    <description><![CDATA[ नेपाल में कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य तनाव खुलकर सामने आने लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद पर वरिष्ठता क्रम की परंपरा से हटकर नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/clash-between-balen-government-and-judiciary-in-nepal-tension-over/article-84563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/nepal-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nepal Chief Justice Appointment Tensions: काठमांडू। नेपाल में कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य तनाव खुलकर सामने आने लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद पर वरिष्ठता क्रम की परंपरा से हटकर नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह (PM Balen Shah)  की अध्यक्षता वाली संवैधानिक परिषद ने 7 मई को न्यायमूर्ति मनोज शर्मा को नेपाल के प्रधान न्यायाधीश पद के लिए राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल  के समक्ष अनुशंसित किया। विशेष बात यह रही कि न्यायमूर्ति शर्मा सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर हैं। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में परंपरागत रूप से सर्वोच्च न्यायालय (Nepal Supreme Court) के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया जाता रहा है। ऐसे में इस निर्णय ने दशकों पुरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल तथा प्रतिनिधि सभा में विपक्ष के नेता भीष्म राज अंगदेम्बे ने परिषद के निर्णय पर असहमति प्रकट करते हुए लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्थापित परंपराओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला ने भी परिषद के निर्णय पर कड़ा प्रतिरोध व्यक्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;">74वें राष्ट्रीय विधि दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के पश्चात उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के प्रभाव में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय व्यवस्था को ऐसी संस्था में परिवर्तित करने का प्रयास हो रहा है, जो शासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दे। मल्ला ने कहा कि वरिष्ठता की स्थापित परंपरा को तोड़ना न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर संकेत है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि न्यायमूर्ति मनोज शर्मा ने अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों की तुलना में अधिक दक्षता और कार्यक्षमता प्रदर्शित की है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सपना प्रधान मल्ला ने कहा कि केवल मामलों की संख्या के आधार पर किसी न्यायाधीश की योग्यता का आकलन नहीं किया जा सकता। न्यायिक निर्णयों की गुणवत्ता और उनके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। विधि दिवस समारोह के दौरान मल्ला ने न्यायाधीशों से निर्भीक होकर न्याय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव, बहुमत की शक्ति अथवा महाभियोग की आशंका से न्याय की गरिमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखने के लिए निष्पक्ष एवं साहसपूर्ण निर्णय आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व प्रधान न्यायाधीश Sushila Karki ने भी परिषद के निर्णय की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अत्यंत योग्य महिला न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला को शीर्ष पद से वंचित करना निराशाजनक है। कार्की ने इसे देश की महिलाओं के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि न्यायपालिका में योग्यता और अनुभव को सर्वोच्च महत्व मिलना चाहिए। संवैधानिक विशेषज्ञ बिपिन अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि संविधान परिषद को कनिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करने से नहीं रोकता, किंतु वरिष्ठता की परंपरा टूटने से भविष्य में सरकारों को अपनी पसंद के उम्मीदवारों को शीर्ष पदों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">इससे न्यायपालिका की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल निर्णयों की संख्या से नहीं किया जा सकता। न्यायिक दृष्टांत स्थापित करने की क्षमता तथा फैसलों की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण होती है। नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार, जो न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय में कम से कम तीन वर्ष तक सेवा दे चुका हो, वह प्रधान न्यायाधीश पद के लिए पात्र माना जाता है। हालांकि, अब तक सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को यह दायित्व सौंपने की परंपरा कायम रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:10:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Earthquake News: फिर कांपी धरती! घरों से बाहर निकले लोग, प्रशासन अलर्ट मोड पर</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में एक बार फिर भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। रविवार को नेपाल के पर्वतीय जिला दार्चुला में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-trembled-again-people-came-out-of-their-homes-administration/article-84562"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/earthquake-news.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earthquake News: नेपाल में एक बार फिर भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। रविवार को नेपाल के पर्वतीय जिला दार्चुला में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुबह 11:55 बजे महसूस हुए झटके</h4>
<p style="text-align:justify;">भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार भूकंप रविवार पूर्वाह्न 11 बजकर 55 मिनट पर आया। इसका केंद्र दार्चुला जिले के तपोवन क्षेत्र में बताया गया है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.1 मापी गई। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। पहाड़ी इलाका होने के कारण प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया और हालात पर नजर रखी जाने लगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नुकसान की कोई खबर नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक अब तक किसी इमारत के गिरने, भूस्खलन या जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। राहत और निगरानी टीमें लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।<br />स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">उत्तराखंड सीमा से सटा है दार्चुला</h4>
<p style="text-align:justify;">दार्चुला जिला भारत के Uttarakhand राज्य से सटा हुआ है। यह पूरा हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल के कारण नेपाल और आसपास के क्षेत्रों में अक्सर भूकंप आते रहते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेपाल क्यों रहता है भूकंप के खतरे में?</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव की वजह से यहां बार-बार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं।<br />साल 2015 में नेपाल में आया विनाशकारी भूकंप आज भी लोगों के जहन में ताजा है। उस भीषण आपदा में हजारों लोगों की जान चली गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। इसी कारण नेपाल में छोटे भूकंपों को भी गंभीरता से लिया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रशासन ने जारी की सलाह</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि—किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें<br />आफ्टरशॉक की संभावना को देखते हुए सतर्क रहें<br />आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें<br />पुराने और कमजोर भवनों से दूरी बनाए रखें</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/earthquake-news.jpeg" alt="Earthquake News" width="784" height="433"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:50:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम बनते ही बालेंद्र शाह का बड़ा एक्शन! पूर्व पीएम व पूर्व गृह मंत्री पर सख्त कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[KP Sharma Arrested: काठमांडू में राजनीतिक हलचल के बीच नेपाल की नई सरकार के गठन के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर Balendra Shah के नेतृत्व में सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli तथा पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/immediately-after-becoming-pm-balendra-shah-takes-strict-action-against-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister/article-82818"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/nepal-former-pm-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">KP Sharma Arrested: काठमांडू में राजनीतिक हलचल के बीच नेपाल की नई सरकार के गठन के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर Balendra Shah के नेतृत्व में सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli तथा पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को हिरासत में लेने का निर्णय लागू किया। यह कार्रवाई पिछले वर्ष हुए तथाकथित “जेन-जी जनआंदोलन” से जुड़े घटनाक्रमों की जांच के संदर्भ में की गई है। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान गृह मंत्री Sudan Gurung ने इस विषय में सामाजिक माध्यम के जरिए जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता विधि-सम्मत कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि शासन-व्यवस्था में किसी भी पद पर आसीन व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में प्रारंभिक चरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में नेपाल में भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के मुद्दों को लेकर युवाओं के नेतृत्व में व्यापक विरोध-प्रदर्शन प्रारंभ हुए थे। प्रारंभ में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन बाद में कई स्थानों पर हिंसक हो गए, जिनमें अनेक लोगों की मृत्यु और संपत्ति की क्षति की घटनाएँ सामने आईं। उसी संदर्भ में तत्कालीन प्रशासनिक निर्णयों की भूमिका की जांच हेतु एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया गया था। Nepal News</p>
<h3>पुलिस ने शनिवार प्रातः गुंडू स्थित आवास से पूर्व प्रधानमंत्री ओली को हिरासत में लिया</h3>
<p style="text-align:justify;">नेपाली दैनिक The Himalayan Times की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने शनिवार प्रातः गुंडू स्थित आवास से पूर्व प्रधानमंत्री ओली को हिरासत में लिया। इसी क्रम में पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भक्तपुर क्षेत्र के कुटुंजे स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया। दोनों के विरुद्ध सितंबर 2025 की घटनाओं से संबंधित आरोपों की जांच जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच आयोग की हाल ही में सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया था कि उस समय के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर दंड संहिता 2017 की धारा 182 के अंतर्गत प्रारंभिक कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके पश्चात गृह मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जांच प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए। विधि सचिव स्तर पर भी पूरी रात रिपोर्ट के क्रियान्वयन से संबंधित प्रशासनिक प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम Nepal की समकालीन राजनीति में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। Nepal News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:54:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gagan Thapa Resignation: नेपाल कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा ने दिया इस्तीफा, नेपाल राजनीति में मचा बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Gagan Thapa Resignation: काठमांडू। गगन थापा ने चुनावी पराजय की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह निर्णय हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, थापा ने अपना त्यागपत्र पार्टी के उपाध्यक्ष बिश्वो प्रकाश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nepal-congress-president-gagan-thapa-resigns-creates-ruckus-in-nepal-politics/article-82484"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/thapa-regisn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gagan Thapa Resignation: काठमांडू। गगन थापा ने चुनावी पराजय की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह निर्णय हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, थापा ने अपना त्यागपत्र पार्टी के उपाध्यक्ष बिश्वो प्रकाश शर्मा को सौंपा है। बताया जा रहा है कि चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ गया था और नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ रही थी। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव परिणामों में थापा को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें अमरेश कुमार सिंह के मुकाबले कम मत प्राप्त हुए। इस हार ने पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर दिया, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता भी अपनी सीटें बचाने में असफल रहे। इस बार नेपाली कांग्रेस को प्रतिनिधि सभा में सीमित सफलता मिली, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी कम है। इसके विपरीत, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए बहुमत के करीब पहुंचकर राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया। पार्टी का नेतृत्व रबी लामिछाने और बालेंद्र शाह जैसे नेताओं के हाथों में रहा।</p>
<h3>अध्यक्ष के इस्तीफे को केंद्रीय कार्यसमिति की स्वीकृति आवश्यक होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">पार्टी के नियमों के अनुसार, अध्यक्ष के इस्तीफे को केंद्रीय कार्यसमिति की स्वीकृति आवश्यक होती है। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए शीघ्र ही बैठक आयोजित की जाएगी। यदि इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उपाध्यक्ष कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में दायित्व संभालेंगे और निर्धारित अवधि के भीतर नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि थापा को हाल ही में हुए विशेष अधिवेशन के माध्यम से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसे पार्टी में पीढ़ीगत परिवर्तन के रूप में देखा गया था, जिसमें युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण उनके नेतृत्व पर प्रश्नचिह्न लग गए। शेर बहादुर देउबा से जुड़े नेताओं ने भी चुनावी परिणामों को लेकर नेतृत्व की आलोचना की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से नेपाल की राजनीति में नई दिशा और समीकरण देखने को मिल सकते हैं। Nepal News</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:51:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Rescue Helicopter Crashes: नेपाल में रेस्क्यू हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश</title>
                                    <description><![CDATA[काठमांडू। नेपाल के खुम्बू क्षेत्र में स्थित एवरेस्ट बेस कैंप के निकट लोबुचे इलाके में बुधवार को एक बचाव हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया। यह हेलीकॉप्टर निजी विमानन सेवा एल्टीट्यूड एयर द्वारा संचालित था और एक आपातकालीन अभियान पर तैनात था। Nepal Rescue Helicopter News नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, 9एन–एएमएस पंजीकरण संख्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rescue-helicopter-crashes-in-nepal/article-77486"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/nepal-rescue-helicopter.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">काठमांडू। नेपाल के खुम्बू क्षेत्र में स्थित एवरेस्ट बेस कैंप के निकट लोबुचे इलाके में बुधवार को एक बचाव हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया। यह हेलीकॉप्टर निजी विमानन सेवा एल्टीट्यूड एयर द्वारा संचालित था और एक आपातकालीन अभियान पर तैनात था। Nepal Rescue Helicopter News</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, 9एन–एएमएस पंजीकरण संख्या वाला यह हेलीकॉप्टर लुक्ला से उड़ान भरकर लोबुचे में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने की तैयारी में था। अभियान के दौरान अचानक आए प्रतिकूल मौसम ने स्थिति को गंभीर बना दिया और हेलीकॉप्टर नियंत्रण खो बैठा।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के समय क्षेत्र में तेज़ बर्फबारी हो रही थी, जिसके कारण लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर फिसलकर क्षतिग्रस्त हो गया। विमान दो हिस्सों में टूट गया, हालांकि सौभाग्य से पायलट कैप्टन विवेक खड़का को गंभीर चोटें नहीं आईं। उन्हें प्राथमिक परीक्षण के लिए तुरंत लुक्ला ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दो दिनों से पर्वतीय क्षेत्रों—विशेषकर मस्तांग, अन्नपूर्णा और एवरेस्ट क्षेत्र—में भारी हिमपात के कारण कई पर्यटक और पर्वतारोही रास्तों में फंसे हुए हैं। नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग ने पर्वतीय इलाकों के लिए भारी बर्फबारी और वर्षा का चेतावनी संदेश जारी किया है। ट्रेकर्स और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में भी इसी क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम के चलते कई ट्रेकर्स को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, जिन्हें बड़े पैमाने पर चलाए गए राहत अभियान के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया। नेपाल में पिछले महीनों की भारी वर्षा से उत्पन्न बाढ़ और भूस्खलन ने 50 से अधिक लोगों की जान भी ले ली थी। Nepal Rescue Helicopter News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 14:54:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Nepal landslide: नेपाल में भूस्खलन व बाढ़ से 14 की मौत, चार पर्वतारोही भी हुए लापता</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 14 लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता हो गए हैं। नेपाली पुलिस ने 5 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इलम जिले में हुई भूस्खलन की कई घटनाओं में 14 लोग मारे गए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/landslides-and-floods-in-nepal-kill-14-with-four-climbers-missing/article-76553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/nepal-landslide.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीजिंग। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 14 लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता हो गए हैं। नेपाली पुलिस ने 5 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इलम जिले में हुई भूस्खलन की कई घटनाओं में 14 लोग मारे गए और चार लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, बाढ़ के कारण रसुवा जिले में चार पर्वतारोही भी अज्ञात अवस्था में हैं। Nepal landslide news</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल के अधिकांश हिस्सों में 3 अक्टूबर से लगातार बारिश जारी है, जिससे भूस्खलन और जलप्रलय जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गई हैं। आपदा से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने काठमांडू घाटी में 4 से 6 अक्टूबर तक वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन और राहत संगठन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वह सुरक्षित स्थानों पर रहें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। यह लगातार हो रही प्राकृतिक आपदा नेपाल में जनजीवन और सड़क एवं आवागमन के साधनों पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। Nepal landslide news</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Oct 2025 18:18:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल में पदभार संभालते ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने किया ये बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[काठमांडू। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने रविवार को औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने घोषणा की कि जेन-जी आंदोलन के दौरान मारे गए नागरिकों को “शहीद” का दर्जा दिया जाएगा और उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। Nepal News गौरतलब है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/as-soon-as-she-took-charge-in-nepal-prime-minister-sushila-karki-made-this-big-announcement/article-75720"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/nepal-pm-karki.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">काठमांडू। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने रविवार को औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने घोषणा की कि जेन-जी आंदोलन के दौरान मारे गए नागरिकों को “शहीद” का दर्जा दिया जाएगा और उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे निर्णयों के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। इन्हीं घटनाओं के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गत शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया और उन्हें शपथ दिलाई।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर सुशीला कार्की ने लैंचौर स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उसके पश्चात सिंहदरबार जाकर औपचारिक कार्य प्रारम्भ किया। चूँकि हाल ही में हुए प्रदर्शनों और आगजनी से प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्य भवन क्षतिग्रस्त हो गया था, इसलिए उन्होंने गृह मंत्रालय परिसर से अपने कर्तव्यों का निर्वहन शुरू किया। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री कार्की ने आंदोलन में प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत की घोषणा की। मुख्य सचिव एकनारायण आर्यल के अनुसार, मृतकों को शहीद घोषित कर उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, साथ ही घायल नागरिकों और पुलिसकर्मियों के उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मीडिया के अनुसार, हाल के प्रदर्शनों में अब तक 72 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें 59 आंदोलनकारी, 10 कैदी और 3 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 134 प्रदर्शनकारी तथा 57 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनके इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। मंत्रालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करें।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति पौडेल ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए सभी दलों और नागरिकों से आगामी 5 मार्च को प्रस्तावित प्रतिनिधि सभा चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद को भंग करना आवश्यक था, क्योंकि यह कदम संविधान, संसदीय परंपरा और नेपाल के संघीय लोकतांत्रिक ढाँचे की रक्षा के लिए उठाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जन-आंदोलनकारियों का मत है कि वर्तमान संसद भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी और सुधार लाने में अक्षम हो गई थी। कार्की की सिफारिश पर सदन को भंग किया जाना आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक को पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। Nepal News</p>
<p><a title="Ecuador shooting: इक्वाडोर में सैनिकों की वेशभूषा में आए हमलावरों ने की गोलीबारी, 7 की मौत" href="http://10.0.0.122:1245/assailants-dressed-as-soldiers-opened-fire-in-ecuador-7-killed/">Ecuador shooting: इक्वाडोर में सैनिकों की वेशभूषा में आए हमलावरों ने की गोलीबारी, 7 की मौत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 14:53:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nepal: नेपाल की नई पीढ़ी की डिमांड, &amp;#8216;हमें भी पीएम मोदी जैसा नेता चाहिए&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[Nepal new leadership demand: काठमांडू। नेपाल इस समय राजनीतिक अस्थिरता और जनता के आक्रोश का सामना कर रहा है। हालिया घटनाओं के बाद अंतरिम सरकार गठन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। कई नागरिकों का मानना है कि देश को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और विकास के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/demand-of-nepals-new-generation-we-also-want-a-leader-like-pm-modi/article-75618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/nepal-demand.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nepal new leadership demand: काठमांडू। नेपाल इस समय राजनीतिक अस्थिरता और जनता के आक्रोश का सामना कर रहा है। हालिया घटनाओं के बाद अंतरिम सरकार गठन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। कई नागरिकों का मानना है कि देश को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और विकास के लिए कार्य करे। Nepal News</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय निवासियों ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें एक ऐसे प्रधानमंत्री की आवश्यकता है, जो दृढ़ संकल्प और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ देश को आगे ले जा सके। उनका कहना है कि नेपाल की मौजूदा परिस्थितियों में जनता परिवर्तन चाहती है और अब नेतृत्व को नई दिशा देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी काठमांडू में एक युवा ने कहा, “हमारे लिए यह गर्व की बात है कि जनता की आवाज़ इतनी जल्दी असर दिखा रही है। हमें फिलहाल एक अंतरिम सरकार की ज़रूरत है, जो स्थिरता प्रदान करे और उसके बाद शीघ्र चुनाव कराए जाएँ। आने वाले समय में देश को ऐसा नेतृत्व चाहिए, जो जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे।”</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पुराने विवादित चेहरों के बजाय नई पीढ़ी से मजबूत और ईमानदार नेतृत्व की उम्मीद है। उनका मानना है कि देश के विकास और राष्ट्रीय एकता के लिए ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर जनता और राष्ट्र को प्राथमिकता दे। काठमांडू के ही एक अन्य नागरिक ने कहा कि नेपाल के लिए यह समय बहुत संवेदनशील है। देश को विभाजनकारी राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐसे नेतृत्व की तलाश करनी चाहिए, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चले और स्थायी विकास के रास्ते खोले। Nepal News</p>
<p><a title="Nepal jail escape prisoners: नेपाल हिंसा में जेल से भागे 30 कैदी, भारतीय सीमा से किये गए गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/30-prisoners-escaped-from-jail-in-nepal-violence-arrested-from-indian-border/">Nepal jail escape prisoners: नेपाल हिंसा में जेल से भागे 30 कैदी, भारतीय सीमा से किये गए गिरफ्तार</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 13:08:36 +0530</pubDate>
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