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                <title>युवाओं के पुरूषार्थ से ही बनेगा भविष्य का समाज : नायडू</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की दी शुभकामनाएं नई दिल्ली (एजेंसी)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ने और समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है। नायडू ने वीरवार को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यहां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/future-society-will-be-formed-by-the-efforts-of-youth-naidu/article-25982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/naidu.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की दी शुभकामनाएं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ने और समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है। नायडू ने वीरवार को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यहां कहा कि भविष्य का समाज युवाओं के पुरूषार्थ से ही बनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं! नया समाज, भविष्य के लिए आपके नई दृष्टि और आपके असीम पुरुषार्थ से ही बनेगा। जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ें, समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आएं।’ उन्होंने कहा, ‘खेल और अध्ययन दोनों क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करें, स्वस्थ रहें, जीवन में योग अपनाएं, ‘सेवा और सद्भाव’ भारत के उदार सनातन जीवन दर्शन को अपनाएं, जीवन के हर क्षेत्र में भारतीयता को अपनाएं, राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करें, पर्यावरण की प्रदूषण से रक्षा करें।’</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Aug 2021 11:36:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बिना दान-दहेज के हुई शादियां बनी चर्चा का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[मिसाल। बिश्नोई समाज में बिना दहेज व बिना घूंघट के शादी करते हुए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/example-in-society-marry-without-dowry-and-without-veil/article-13708"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/marry.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">Marry without Dowry | एक नारियल व एक रुपया देकर विवाह संपन्न करवाया</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>डबवाली(सच कहूँ/राजमीत इन्सां)।</strong> हिंदु रीति-रिवाज में शादी को सात जन्मों का बंधन माना जाता है, कहा जाता है कि शादी दो लोगों की नहीं बल्कि दो परिवारों के बीच होती है। बीते दिवस बिना दान-दहेज एवं बिना घूंघट के बिश्नोई समाज में संपन्न हुई दो शादियां क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लघु सचिवालय के सामने स्थित वार्ड नंबर 6 निवासी मास्टर अमर सिंह बिश्नोई ने अपनी बेटी शालिना और बेटे पवन की शादी बिना दान-दहजे व बिना घूंघट के संपन्न करवाकर समाज को एक नया पैगाम दिया है। अमर सिंह बिश्नोई की बेटी शालिना का विवाह मेहराणा धौरा निवासी राम कुमार के बेटे सुशील कुमार से संपन्न हुआ जबकि एक ही दिन बाद ही उनके बेटे पवन का विवाह फतेहाबाद निवासी एएसआई राम सिंह की बेटी किरणा से संपन्न हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों ही शादियों में अमर सिंह बिश्नोई ने एक नारियल व एक रुपया देकर व लेकर बिना घूंघट के विवाह संपन्न करवाकर एक मिसाल कायम की। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी इन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता का विवाह फतेहाबाद निवासी कानूनगो सुशील के बेटे सौरभ से एक नारियल व एक रुपए के शगुन से संपन्न करवाकर एक नई परंपरा का आगाज किया था, जिसे इन्होंने फिर दोहराया है। मास्टर अमर सिंह बिश्नोई ने बताया कि वह गांव शेरगढ़ के एक राजकीय विद्यालय में कार्यरत हैं और अब आगामी दिनों में अपनी दोनों बेटियों व दामादों से तथा बेटे व बहू से विवाह की खुशी में गांव शेरगढ़ के दो प्राइमरी व एक मिडल स्कूल को 5100-5100 रुपयों की सहयोग राशि दिलवाएंगे तथा 21-21 छायादार व त्रिवेणी के पौधे तीनों स्कूलों के प्रांगण में लगवाएंगे ताकि ग्रामवासी व अन्य समाज के लोग इससे प्रेरणा ले सकें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2020 13:43:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रियंका का आरोप :  समाज के लोगों की आवाज उठाने पर भाजपा कर रही है हार्दिक को परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[किसान आंदोलन किया। भाजपा इसको ‘देशद्रोह’ बोल रही है। हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी पर सहायक पुलिस आयुक्त राजदीप झाला ने यूनीवार्ता को बताया था कि अहमदाबाद जिले के वीरमगाम तालुका, जो उनका गृह क्षेत्र भी हैं, के हांसलपुर चौराहे के पास से पकड़ा गया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/priyankas-allegation-bjp-is-harassing-hardik-for-raising-the-voice-of-the-people-of-the-society/article-12606"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/priyanka-gandhi-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पूर्व सयोजक हार्दिक पटेल को शनिवार को पुलिस ने किया था गिरफ्तार  (Priyanka Gandhi)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka) वाड्रा ने पार्टी नेता हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी पर रविवार को भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अपने समाज के लोगों की आवाज उठाने के लिए उन्हें (हार्दिक) को परेशान किया जा रहा है। गुजरात में अहमदाबाद की एक अदालत से राजद्रोह के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद कांग्रेस में शामिल हो चुके पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के पूर्व सयोजक हार्दिक पटेल को शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रविवार को जज के आवास पर पेश किया जायेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">सुश्री वाड्रा ने रविवार को ट्वीट कर कहा,‘ युवाओं के रोजगार और किसानों के हक की लड़ाई लड़ने वाले युवा हार्दिक पटेल जी को भाजपा बार-बार परेशान कर रही है। हार्दिक ने अपने समाज के लोगों की आवाज उठाई,उनके लिए नौकरियां मांगी, छात्रवृत्ति मांगी। किसान आंदोलन किया। भाजपा इसको ‘देशद्रोह’ बोल रही है। हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी पर सहायक पुलिस आयुक्त राजदीप झाला ने यूनीवार्ता को बताया था कि अहमदाबाद जिले के वीरमगाम तालुका, जो उनका गृह क्षेत्र भी हैं, के हांसलपुर चौराहे के पास से पकड़ा गया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हार्दिक को शनिवार रात अपराध शाखा के लॉक अप में रखा गया ।</li>
<li style="text-align:justify;">छुट्टी का दिन होने के कारण उन्हें रविवार को जज के आवास पर पेश किया जायेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">ज्ञातव्य है कि अदालत ने सुनवाई के दौरान हार्दिक बारंबार अनुपस्थिति नहीं होने पर वारंट जारी किया था।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jan 2020 16:24:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कन्याओं को समाज में जीने का हक</title>
                                    <description><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर आयोजित सेमीनार में बोले वक्ता कोटा। अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर कोटा ब्लॉक की साध-संगत ने छत्रपति शिवाजी स्कुल शीवपुरा में गुरूवार को एक सेमिनार का आयोजन किया। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के तत्वावधान में आयोजित इस सेमीनार के दौरान वक्ताओं ने लड़कियों को अपने अधिकारों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-right-to-live-in-society/article-6229"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/the-right-to-live-in-society.jpg" alt=""></a><br /><h1>अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर आयोजित सेमीनार में बोले वक्ता</h1>
<p><strong>कोटा।</strong></p>
<p>अन्तर्राष्ट्रीय गर्ल्ज चाईल्ड दिवस पर कोटा ब्लॉक की साध-संगत ने छत्रपति शिवाजी स्कुल शीवपुरा में गुरूवार को एक सेमिनार का आयोजन किया। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के तत्वावधान में आयोजित इस सेमीनार के दौरान वक्ताओं ने लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, स्वयं सक्षम, तथा कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने आदि के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि कन्याओं को भी समाज में जीने का हक है ऐसे में उन्हें भ्रूण में ही मरवा देना हैवानियत का कार्य है। इस अवसर पर अजय सिंह इन्सां, हरीओम इन्सां, राम बिलास इन्सां, प्रभु दयाल इन्सां, मदन मोहन सिंह इन्सां, बलभद्र इन्सां, डॉ दौलत इन्सां, जोरावर सिंह इन्सां, दिनेश इन्सां, श्याम शर्मा इन्सां, विजय चोपड़ा इन्सां, रितेश इन्सां, मनमोहन इन्सां आदि सेवादार उपस्थित रहे।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-right-to-live-in-society/article-6229</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Oct 2018 17:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाज में नफरत नहीं प्यार के बीज बोएं सुनील जाखड़</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ राजनीतिक नेता समाज को बांटने की नीति अपना रहे हैं। उन्हें जरा सा भी दर्द नहीं आता कि पंजाब ने एक दशक तक हिंसा के काले दौर को देखा था। हालांकि उन्होंने आतंकवाद के घावों को भी देखा व खुद को आतंकवाद के कट्टर विरोधी व शांति का मसीहा समझते हैं। फिर भी राजनीति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/do-not-hate-in-society-sow-seeds-of-love-sunil-jakhar/article-5856"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/sunil-jakad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ राजनीतिक नेता समाज को बांटने की नीति अपना रहे हैं। उन्हें जरा सा भी दर्द नहीं आता कि पंजाब ने एक दशक तक हिंसा के काले दौर को देखा था। हालांकि उन्होंने आतंकवाद के घावों को भी देखा व खुद को आतंकवाद के कट्टर विरोधी व शांति का मसीहा समझते हैं। फिर भी राजनीति में पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपनी आदतों के अनुसार समाज को बांटने की कोशिश में जुटे रहते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों पंजाब के नेता सुनील जाखड़ कर रहे हैं। वह उस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हैं जो धर्म निरपेक्षता व भाईचारे को कायम रखने को अपना सिद्धांत मानती है लेकिन सुनील जाखड़ पंजाब में गुमराहकुण व झूठा प्रचार कर कुछ संगठनों के दिलों में डेरा सच्चा सौदा व डेरा श्रद्धालुओं के प्रति गलतफहमी फैलाने के हथकंडे अपना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ पहले तो मीडिया में खूब शोर मचा रहे थे कि एसएसजी फिल्म को चलाने के लिए डेरा सच्चा सौदा व अकाली दल के बीच डील हुई थी। यह बात सुनील जाखड़ जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर कहते थे कि मुंबई में अभिनेता अक्षय कुमार के घर सुखबीर बादल व डेरा सच्चा सौदा में एमएसजी फिल्म चलाने संंबंधी डील हुई थी। लेकिन यह रिपोर्ट आने से पहले ही अक्षय कुमार ने मीडिया में स्पष्ट किया कि उसके घर कोई मीटिंग नहीं हुई व न ही सुखबीर बादल उसे कभी निजी तौर पर मिले है। सुनील जाखड़ अक्षय कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देने की बजाए लगातार विरोधी राग अलाप रहे है। क्या जाखड़ यह बताएंगे कि अक्षय कुमार झूठ बोल रहा है या सच?</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ को जब यह पता लगा कि डील होने का झूठ नहीं चला उसके बाद अब वह यह बोल रहे हैं कि एमएसजी फिल्म चलाने के लिए पुलिस ने बहबल कलां में गोली चलाई। आयोग की रिपोर्ट पढ़ने पर यह पता चलता है कि बहबल कलां में मारे गए दो व्यक्तियों के परिवारिक सदस्यों ने किसी भी थाने में यह शिकायत नहीं दी कि उनके सदस्यों की मौत फिल्म के कारण हुई है। जाखड़ का इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है कि वह बहबल कलां के इक्ट्ठ को फिल्म से जोड़ रहे हैं। कोटकपूरा व बहबल कलां में धरना श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ लगाया था, उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की थी लेकिन जाखड़ समाज की अमन-शांति को भंग व जनता को भड़काने के लिए कह रहे हैं कि यह सब कुछ फिल्म के कारण हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">जाखड़ 2015 में न तो धरने में गए और न ही धरनाकारियों को मिले लेकिन वह घर बैठे-बिठाए कहानी बनाने में मशगूल रहे। दरअसल जाखड़ 2017 में हुई अपनी हार से बौखलाए हुए हैं। डेरा प्रेमियों ने इन चुनावों में अकाली-भाजपा को समर्थन दिया था। लेकिन जाखड़ को यह बात भूलनी नहीं चाहिए कि 2007 में डेरा श्रद्धालुओं ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। साध-संगत ने उनको हलका अबोहर से वोट देकर जिताया था। क्या जाखड़ बताएंगे कि उस वक्त उनकी वोट संबंधी डील हुई थी? बहस तथ्यों व सबूतों पर ही हो सकती है लेकिन झूठ-प्रचार करने के लिए किसी तथ्य की जरूरत नहीं होती। जाखड़ पार्टी के जिम्मेवार नेता होने के साथ-साथ गुरदासपुर से सांसद भी हैं। राजनीति चलाने के लिए अमन-शांति को दांव पर न लगाएं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Sep 2018 11:12:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;समाज का सबसे ज्यादा भला करने वाला प्राणी है गाय</title>
                                    <description><![CDATA[गाय को सड़कों पर छोड़ने से नही बल्कि घर में रखने से मिलते हंै ढ़ेरों फायदे गऊ के फायदे इतने कि इसे कहा जा सकता है सोने का अंड़ा देने वाली मुर्गी सच कहूँ स्पेशल/देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। बेशक हिंदू धर्म में गाय को माता का नाम दिया गया है, लेकिन गाय ही वह पशु है जिसकी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-best-benefit-creature-of-society-is-the-cow/article-5131"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/cow.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">गाय को सड़कों पर छोड़ने से नही बल्कि घर में<br />
रखने से मिलते हंै ढ़ेरों फायदे</h1>
<ul>
<li><strong>गऊ के फायदे इतने कि इसे कहा जा सकता है सोने का अंड़ा देने वाली मुर्गी </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ स्पेशल/देवीलाल बारना/</strong><strong>कुरुक्षेत्र।</strong> बेशक हिंदू धर्म में गाय को माता का नाम दिया गया है, लेकिन गाय ही वह पशु है जिसकी सबसे ज्यादा बेकद्री देखी जा सकती है। आए दिन गऊएं सड़कों पर वाहनों के नीचे मरती देखी जा सकती हैं। यह भी कहना गलत न होगा कि आज गाय राजनैतिक शतरंज का मोहरा बन गई है। राजनैतिक दलों ने गाय को राजनैतिक पशु बना दिया है जिसके बल पर विभिन्न राजनैतिक दल वोटों का दोहन करने का काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आमजन के लिए गाय के फायदे समझना सबसे ज्यादा आवश्यक है क्योंकि गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो मरते दम तक समाज की भलाई का काम निष्काम भाव से करती है और जिसका मलमूत्र भी उपयोगी माना जाता है। शायद इसलिए वेदों में गाय को कामधेनू कहा गया है। वैज्ञानिक रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि गाय के दूध में प्रोटीन, काबोर्हाईडे्रट, मिनरल्स और विटामिन डी होता है, जोकि रोग प्रतिरोधक क्षमता और मनुष्य के मानसिक विकास में सहायक होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इसके बावजूद आज की स्थिति की ओर यदि नजर दौडाई जाए तो सड़कों से गायों को दूर हटाने के लिए प्रशासन के पास गऊशलाएं कम पड़ रही हैं। जिन गऊओं को आज गऊशालाओं में भेजा जा रहा है, उन गऊओं को आमजन के बाड़े में रहना आवश्यक है।</p>
<h1 style="text-align:center;">ब्लड प्रैसर कंट्रोल करने में कारगर है गाय</h1>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार गाय के शरीर पर प्रतिदिन 15-20 मिनट हाथ फेरने से ब्लड प्रैसर जैसी बीमारी ठीक हो जाती है। गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो आक्सीजन लेती है और आक्सीजन का ही विसर्जन करती है। गाय के दूध में रेडियो विकिरण से रक्षा करने की सबसे ज्यादा शक्ति होती है। गाय का दूध दिल की बिमारियों से बचाता है। वहीं गाय के गोबर में हैजे के कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति होती है। क्षय रोगियों को गाय के नजदीक रखने से गोबर की गंध से क्षय रोग के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">खेतों के लिए अमृत का काम करता है गौमूत्र व गोबर</h1>
<p style="text-align:justify;">कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. हरिओम का कहना है कि जीरो बजट कृषि पूर्ण रूप से गाय के गोबर व गौमूत्र पर आधारित है। यानि कि फसल उगाने के बाद गौमूत्र व गोबर के दम पर कटाई तक पहुंचाया जा सकता है। गौमूत्र व गोबर के प्रयोग से खेतों में जीवाणु तैयार होते हैं। जिससे खेतों में नाईट्रोजन की मात्रा व अन्य पोषक तत्व बढ़ जाते हैं, केचूंओं की संख्या बढ़ जाती है। वहीं लगातार खेतों में गौमूत्र व गोबर का प्रयोग करने से खेतों में नमी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे फसलें सूखा पडने से कम प्रभावित होती हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">गाय का दूध है सर्वगुण सम्पन्न : डा. सुरेंद्र गोयल</h1>
<p style="text-align:justify;">गुरुकुल कुरुक्षेत्र के गौ चिकित्सक डा. सुरेंद्र गोयल का कहना है कि गाय का दूध सर्वगुण सम्पन्न आहार है। यह तो हो सकता है कि विदेशी गाय देसी गाय से ज्यादा दूध दे दें। लेकिन जो पोषक तत्व देसी गाय के दूध में हैं, वे विदेशी गायों या भैंस के दुध में कभी नही हो सकते। एक अच्छी नस्ल की देसी गाय एक दिन में 25 लीटर तक दूध दे सकती है। गाय का घी आयुर्वेद में अनेक दवाओं में प्रयोग किया जाता है। कहा जाता है कि गाय के मूत्र में सोने के कण पाए जाते हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">गऊ के फायदे इतने कि कहा जा सकता है सोने का अंड़ा देने वाली मुर्गी</h2>
<p style="text-align:justify;">गाय समाज को इतना कृछ देती है जिसके बल पर गऊ को सोने का अंड़ा देने वाली मुर्गी कहना भी गलत न होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका हर साल भारत से गाय का मूत्र आयात करता है जिससे अमेरिका कैंसर की दवा बनाता हैं। वहीं हमारे शास्त्रों मे करोड़ो वर्षों पहले से इसका महत्व बताया गया है। गौमूत्र में नाइट्रोजन, ताम्र, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड, पोटाशियम, सल्फेट, फास्फेट, क्लोराइड और सोडियम की विभिन्न मात्राएं पायी जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौमूत्र न केवल रक्त के सभी तरह के विकारों को दूर करने वाला बल्कि कफ, वात व पित्त संबंधी तीनं दोषों का नाशक, हृदय रोगों व विष प्रभाव को खत्म करने वाला, बल बुद्धि देने वाला बताया गया है। इसके अलावा भी अनेकों बिमारियां ऐसी हैं जिसे गाय का दूध, मूत्र व गोबर दूर कर देता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Aug 2018 07:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाज में उजालें क्यों हो रहे हैं कम?</title>
                                    <description><![CDATA[व्यक्ति परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से भी जुड़ा है Why Society Heading Towards darkness? स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयों को आमंत्रण है। क्योंकि व्यक्ति सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से जुड़ा है। अपने लिए जीने का अर्थ है अपने सुख की तलाश और इसी सुख की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-society-heading-towards-darkness/article-4840"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/society-heading-darkness.jpg" alt=""></a><br /><h1>व्यक्ति परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से भी जुड़ा है Why Society Heading Towards darkness?</h1>
<p>स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयों को आमंत्रण है। क्योंकि व्यक्ति सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से जुड़ा है। अपने लिए जीने का अर्थ है अपने सुख की तलाश और इसी सुख की तलाश ने अनेक समस्याएं पैदा की हैं। सामाजिक जीवन का एक आधारभूत सूत्र है सापेक्षता। निरपेक्ष व्यक्तियों का समूह भीड़ हो सकती है, समाज नहीं। जहां समाज होगा वहां सापेक्षता होगी। और जहां सापेक्षता होगी वहां सहानुभूति, संवेदनशीलता और आत्मीयता होगी। किसी भी संस्था, समाज, देश या राष्ट्र की शक्ति एवं सफलता का आधार है सापेक्ष सहयोग, आपसी प्रतिबद्धताएं। जिस समाज से जुड़े हुए व्यक्ति समूह के हितों के दीयों में अपनी जिंदगी का तेल अर्पित करने की क्षमता रखते हों वही समाज संचेतन, प्रगतिशील, संवेदनशील और संजिदा होता है। स्वस्थ एवं उन्नत समाज वह है जिसमें सामाजिक चेतना एवं संवेदनाओं की अनुभूति प्रखर हो और उसकी क्रियान्विति के प्रति जागरूकता बरती जाती हो। अनेक संगठनों ने सेवा, सहयोग एवं संवेदना की दृष्टि से एक स्वतंत्र पहचान बनाई है।</p>
<h1>स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयों को आमंत्रण है। Why Society Heading Towards darkness?</h1>
<p>डेरा सच्चा सौदा, स्वामिनारायण वाले हो या इस्कान वाले, कोई अणुव्रत का मिशन हो या सुखी परिवार अभियान-इनकी विभिन्न संस्थाएं सेवामूलक जनकल्याणकारी प्रवृतियों से जन-जन को अभिप्रेरित कर रही है। रोग या बुढ़ापे की स्थिति में हमारा क्या होगा, इस चिंता से ये संस्थाएं और उनसे जुडे़ लोग निश्चिंत करते हैं। वे पूरी जागरूकता से इस दायित्व को निभाते हैं। हमें भी सेवा का दर्शन अपनाते हुए अपने जीवन के साथ इसे जोड़ना है। इसे जोड़ने का अर्थ है कि हम खुद के लिए जीते हुए औरों के लिए भी जीने का प्रयत्न करें। व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर समूहगत भावना से जहां, जब, जो भी हो उसमें हिस्सेदार बनें। इस भावना के विकास का अर्थ होगा कि हमारी संवेदनशीलता जीवंत होगी। सड़क पर पड़े आदमी की सिसकन, भूखे-प्यासे-बीमार की आहेंं, बेरोजगार की बेबसी, अन्याय और शोषण से प्रताड़ित आदमी की पीड़ा-ये सब स्थितियां हमारे मन में करुणा और संवेदना को जगांएगी। और यह जागी हुई करुणा और संवेदना हमें सेवा और सहयोग के लिए तत्पर करेंगी। इस तरह की भावना जब हर व्यक्ति में उत्पन्न होगी तो समाज उन्नत बनेगा, सुखी बनेगा और सुरक्षित बनेगा। न असुरक्षा की आशंका होगी, न अविश्वास, न हिंसा, न संग्रह, न शत्रुता का भाव। एक तरह से सारे निषेधत्मक भावों को विराम मिलेगा और एक नया पथ प्रशस्त होगा।</p>
<h2>पुनरावर्तन के अभाव में पढ़ा हुआ, सीखा हुआ ज्ञान भी विस्मृत हो सकता है Why Society Heading Towards darkness?</h2>
<p>हम अपनी महत्वाकांक्षाओं से इतने बंध गए कि इस स्वार्थ में हमारी संवेदना भी खो गई। आज दूषित राजनीति में सिर्फ अपने को सुरक्षित रखने के सिवाय राजनेताओं का कोई चरित्र नहीं है। यही वजह है कि राष्ट्रीय समस्याओं, फैलती बुराइयों, अंधविश्वासों और अर्थशून्य परंपराओं के सामूहिक विरोध की ताकत निस्तेज पड़ती जा रही है फिर सेवा और सहयोग के आयाम कैसे पनपे? जरूरत है दिशा बदलने की। परार्थ और परमार्थ चेतना जगाने की। दोनों हाथ एक साथ उठेंगे तो एकता, संगठन, सहयोग, समन्वय और सौहार्द की स्वीकृति होगी। कदम-से-कदम मिलाकर चलेंगे तो क्रांतिपथ का कारवां बनेगा। यही शक्ति है समाज में व्याप्त असंतुलन एवं अभाव को समाप्त करने की। व्यक्ति प्रमाद या जड़ता से चरित्र भ्रष्ट हो सकता है, पुनरावर्तन के अभाव में पढ़ा हुआ, सीखा हुआ ज्ञान भी विस्मृत हो सकता है, किंतु सेवा कभी नष्ट नहीं होती। सेवाजनित लाभ कभी कहीं नहीं जाता। राजस्थानी कहावत है-ह्यकरें सेवा मिलें मेवा। समाज स्तर पर सेवा के लाभ की मीमांसा करते हुए स्थानांग सूत्र के टीकाकार लिखते हैं-सेवा के व्यावहारिक लाभ हैं, शारीरिक या मानसिक दृष्टि से रुग्ण तथा वृद्ध व्यक्तियों के चित्त में समाधि पैदा करना, उन्हें भविष्य के प्रति आश्वस्त करना, ग्लानि का निवारण करना, वात्सल्य प्रकट करना, रोगी या वृद्ध को नि:सहायता अनाथता का अनुभव न होने देना।</p>
<h2>प्राचीनकाल में स्वार्थ कम तथा स्नेह व सौहार्द ज्यादा था, आज उसमें आई कमी  Why Society Heading Towards darkness?</h2>
<p>निशीथ भाष्यकार लिखते हैं-समाज के सदस्यों की सेवा करने वाला धर्म-वृक्ष की सुरक्षा करता है। सबकी प्रियता प्राप्त करता है और महान निर्जरा, चित्त शुद्धि का भागी बनता है। मेरी दृष्टि में यही सच्ची धार्मिकता है।<br />
समाज में उजालों की जरूरत आज ज्यादा महसूस की जा रही है, क्योंकि वास्तविक उजाला जीवन को खूबसूरती प्रदान करता है, वस्तुओं को आकार देता है, शिल्प देता है, रौनक एवं रंगत प्रदान करता है। उजाला इंसान के भीतर ज्ञान का संचार करता है और अंधकार को खत्म कर जीवन को सही मार्ग दिखाता है। नकारात्मक दृष्टिकोण दूर कर सकारात्मक दृष्टि और सोच प्रदान करता है। खुली आंखों से सही-सही देख न पाएं तो समझना चाहिए कि यह अंधेरा बाहर नहीं, हमारे भीतर ही कहीं घुसपैठ किये बैठा है और इसीलिये हम अंधेरों का ही रोना रोते हैं। जबकि जीवन में उजालों की कमी नहीं हैं। महावीर का त्याग, राम का राजवैभव छोड़ वनवासी बनना और गांधी का अहिंसक जीवन -ये उजालों के प्रतीक हैं जो भटकाव से बचाते रहे हैं।</p>
<h2>उजाला इंसान के भीतर ज्ञान का संचार करता है Why Society Heading Towards darkness?</h2>
<p>महान दार्शनिक आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने सेवा की प्रवृतियों को प्रोत्साहन दिया है। उन्होंने कहा है प्राचीनकाल में स्वार्थ कम तथा स्नेह व सौहार्द ज्यादा था। आज उसमें कमी आई है। इसका एक कारण है धन के प्रति आकर्षण और नकारात्मक चिंतन। जहां सकारात्मक चिंतन का विकास होता है वहां संबंधों में सौहार्द बढ़ता है। इसके लिए जरूरी है व्यक्ति अपने भीतर झांके। अंतर्दृष्टि को जागृत कर नया प्रकाश प्राप्त करें। अपेक्षा है कि समाज का हर अंग सेवा की विभिन्न प्रवृतियों के साथ जुड़कर उसी नये प्रकाश को प्राप्त कर सकते हैं, वह ईश्वरत्व का बीज है, स्वयं से स्वयं के साक्षात्कार का मार्ग है।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 07:42:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>असुरक्षा की तरफ बढ़ रहा समाज</title>
                                    <description><![CDATA[महानगर दिल्ली में आदमियों की भीड़ है इसके बावजूद मनुष्य अकेला और असुरक्षित है। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक घर में परिवार के 11 मैंबरों की फंदे से लटकती लाशें मिली हैं। दस व्यक्तियों की आँखों पर पट्टी बँधी हुई थीं। पुलिस के लिए बड़ी उलझन यह है कि यह मामला कत्ल का है […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/society-moving-towards-insecurity/article-4611"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/society-moving-towards.-insecurity.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महानगर दिल्ली में आदमियों की भीड़ है इसके बावजूद मनुष्य अकेला और असुरक्षित है। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक घर में परिवार के 11 मैंबरों की फंदे से लटकती लाशें मिली हैं। दस व्यक्तियों की आँखों पर पट्टी बँधी हुई थीं। पुलिस के लिए बड़ी उलझन यह है कि यह मामला कत्ल का है या खुदकुशी। हो सकता है आने वाले दिनों में यह गुत्थी सुलझ जाएगी पर यह घटना समाज की जिस भयानक तस्वीर को पेश कर रही है वह आधुनिकता, सुरक्षा तथा विकास जैसे शब्दों को सवालों के घेरे में लाती है। दरअसल ‘कानून व्यवस्था’ शब्द कहने को कुछ तथा देखने में कुछ है। अपराध शुरु होने का कारण कोई भी हो इसके बढ़ने का कारण कानून व्यवस्था का कमजोर होना है। अपराधियों को यही लगता है कि वह कानून की पकड़ में नहीं आएंगे, यदि पकड़े भी गए तो कैसे ना कैसे निकल जाएंगे। पुलिस प्रबंध इतना ढीला व लापरवाह तीजा है। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ घटना होने पर ही दोषियों को ढूंढने और सजा दिलवाने की नहीं, बल्कि ऐसा माहौल बनाने की होती है कि अपराधी अपराध करने की हिम्मत ना कर सके। उनके दिल में कानून का भय हो। दिल्ली तथा अन्य महानगरों में पता नहीं कितनी ही घटनाएं हो चुकी हैं जब मकान में एक दो सदस्यों को लुटेरों ने मार दिया। दु:ख कीहै कि आम आदमी के नुकसान की किसी को कोई फिक्र नहीं। चोर गुंडों को कोई रोकने वाला नहीं। आम इंसान लूटा जाए तो उसकी रिपोर्ट भी जल्दी से कोई नहीं लिखता। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ताधारी पार्टियों की रैलियां या मंत्रियों के दौरों को सुरक्षा देने तक सीमित हो गई है। झपटमारों के गिरोह दिल्ली से चलकर छोटे शहरों कस्बों तक पहुंच गए हैं। कभी गलियों, खुलें आंगनों में लोग बेखौफ होकर सोते थे अब दिल्ली के घरों में डबल दरवाजे लग गए हैं। लोगों द्वारा अपनी सुरक्षा के प्रबंध खुद करना पुलिस प्रबंध की कमियों का ही न बात है कि ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए कोई मुद्दा नहीं होती। ना तो इस बात की संसद में चर्चा होती है तथा ना ही कोई पार्टी धरना प्रदर्शन करती है क्योंकि ऐसी घटना में वोट का मतलब हल नहीं होता। सरकार के लिए देश तरक्की कर रहा है पर समाज पतन की ओर जा रहा है। विकास का अर्थ भौतिक तरक्की नहीं बल्कि मुनष्य के निर्भय होकर जिंदगी गुजारनें में है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 11:47:16 +0530</pubDate>
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                <title>समाज के लिए घातक है नशे की लत</title>
                                    <description><![CDATA[योगेश कुमार गोयल नशा चाहे किसी भी चीज का हो, जानलेवा होता है लेकिन मादक पदार्थों का नशा तो लोगों को बुरी तरह पंगु बना देता है। नशीले पदार्थों के दुरूपयोग की समस्या विश्वव्यापी समस्या बन चुकी है। मादक पदार्थों का सेवन अब मानवता के प्रति सबसे बड़े अपराध का रूप धारण कर चुका है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/fatal-addiction-to-society/article-4503"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/nasaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
नशा चाहे किसी भी चीज का हो, जानलेवा होता है लेकिन मादक पदार्थों का नशा तो लोगों को बुरी तरह पंगु बना देता है। नशीले पदार्थों के दुरूपयोग की समस्या विश्वव्यापी समस्या बन चुकी है। मादक पदार्थों का सेवन अब मानवता के प्रति सबसे बड़े अपराध का रूप धारण कर चुका है। भारत में भी मादक पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो चिन्ता का विषय है। यह प्रवृत्ति अब केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम, चरस, गांजा, हेरोइन आदि के अलावा इंजैक्शन के जरिये लिए जाने वाले मादक पदार्थों का इस्तेमाल भी होने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
भारत में नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों में लगभग 40 प्रतिशत कालेज छात्र हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या भी काफी है और देश के विभिन्न कालेजों में स्थिति यह है कि कालेजों के अंदर ही बड़ी आसानी से नशीले पदार्थ उपलब्ध हो जाते हैं। स्कूल-कालेजों के छात्र अक्सर अपने साथियों के कहने या दबाव डालने पर या फिर मॉडर्न दिखने की चाहत में इनका सेवन आरंभ करते हैं। कुछ युवक मादक पदार्थों से होने वाली अनुभूति को अनुभव करने के लिए, कुछ रोमांचक अनुभवों के लिए तो कुछ मानसिक तौर पर परेशानी अथवा हताशा की स्थिति में इनका सेवन शुरू करते हैं। मानव जीवन की रक्षा के लिए बनाई जाने वाली कुछ दवाओं का उपयोग भी लोग अब नशा करने के लिए करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
कोई व्यक्ति इन मादक पदार्थों की गिरफ्त में एक बार फंस जाए तो उसका इससे बाहर निकल पाना बेहद कठिन हो जाता है। मादक पदार्थ मानव शरीर की सुन्दरता को नष्ट कर मानव शरीर को खोखला बनाते हैं। इनका उपयोग युवा पीढ़ी की क्षमताओं को नष्ट कर उनकी सृजनशीलता को मिटा रहा है तथा देश के सामाजिक और आर्थिक ढ़ांचे को पंगु बना रहा है। एक बार मादक पदार्थों की लत लग जाए तो व्यक्ति इनके बिना रह नहीं पाता। यही नहीं, उसे पहले जैसा नशे का प्रभाव पैदा करने के लिए और अधिक मात्रा में मादक पदार्थ लेने पड़ते हैं। इस तरह व्यक्ति इनका गुलाम बनकर रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकांश लोगों में गलत धारणाएं विद्यमान हैं कि मादक पदार्थों के सेवन से व्यक्ति की सृजनशीलता बढ़ती है और इससे व्यक्ति में सोच-विचार की क्षमता, एकाग्रता तथा यौन सुख बढ़ता है लेकिन वास्तविकता यही है कि नशे के शिकार लोगों की सोच-विचार की क्षमता और इसकी स्पष्टता खत्म हो जाती है तथा उनके कार्यों में भी कोई तालमेल नहीं रहता। इनके सेवन से कुछ समय के लिए संकोच की भावना जरूर मिट जाती है लेकिन अंतत: इससे शरीर की सामान्य कार्यक्षमता में गिरावट आती है।<br />
नशीली दवाओं का बढ़ता दुरूपयोग</p>
<p style="text-align:justify;">
नशीली दवाएं ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं, जो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को बदल देते हैं। कोई भी रसायन, जो किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक कार्यप्रणाली में बदलाव लाए, मादक पदार्थ कहलाता है और जब इन मादक पदार्थों का उपयोग किसी बीमारी के इलाज या बेहतर स्वास्थ्य के लिए दवा के तौर पर किया जाए तो यह मादक पदार्थों का सही उपयोग कहलाता है लेकिन जब इनका उपयोग दवा के रूप में न होकर इस प्रकार किया जाए कि इनसे व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचे तो इसे ‘नशीली दवाओं का दुरूपयोग’ कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे पांच भागों में बांटा गया है:- 1. उत्तेजक:- ये वे मादक पदार्थ हैं, जो मस्तिष्क के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्रों की सक्रियता बढ़ा देते हैं। जैसे, बैंजोड्रिन, डैक्सेड्रिन, मैथेड्रिन, कोकीन, निकोटीन आदि।<br />
2. उपशामक (डिप्रेसेंट):- ये मादक पदार्थ मस्तिष्क की सक्रियता कम कर देते हैं। ये पदार्थ हैं, अल्कोहल, सिकोनाल, नेमब्यूटाल, गाडेर्नाल, वैलियम, लिबियम, मैन्ड्रेक्स, डोरिडेन आदि।<br />
3. निश्चेतक और दर्दनाशक:- अफीम, मॉर्फीन, कोकीन, हेरोइन, ब्राउन शूगर, मेथाजेन, पेथीडीन, मेप्राडीन आदि।<br />
4. भांग से बने पदार्थ – गांजा, हशीश, चरस आदि।<br />
5. मतिभ्रम पैदा करने वाले पदार्थ: – ये पदार्थ हमारे देखने, सुनने और महसूस करने की क्षमता पर बुरा प्रभाव डालते हैं।<br />
मादक पदार्थों के सेवन के लक्षण</p>
<p style="text-align:justify;">
मादक पदार्थों के सेवन का आदी हो जाने पर व्यक्ति में प्राय: निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते हैं:-<br />
खेलकूद और रोजमर्रा के कार्यों में दिलचस्पी न रहना, भूख कम लगना, वजन कम हो जाना, शरीर में कंपकंपी छूटना, आंखें लाल, सूजी हुई रहना, दिखाई कम देना, चक्कर आना, उल्टी आना, अत्यधिक पसीना आना, शरीर में दर्द, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, आलस्य, निराशा, गहरी चिन्ता आदि। सुई के जरिये मादक पदार्थ लेने वालों को एड्स का खतरा भी रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
मादक पदार्थों की तस्करी: मादक पदार्थों की तस्करी नशे के सौदागरों के लिए सोने का अंडे देने वाली मुर्गी साबित हो रही है। यह अवैध व्यापार निरन्तर फल-फूल रहा है, जिसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का 15 फीसदी हिस्सा यही व्यापार रखता है। भारत से मादक पदार्थों की तस्करी अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, बर्मा, ईरान आदि देशों के जरिये होती है और मौका मिलते ही ये मादक पदार्थ तस्करी के जरिये पश्चिमी देशों में पहुंचा दिए जाते हैं। हालांकि भारत इस अवैध व्यापार में तस्करों के लिए केवल एक पड़ाव का काम करता है लेकिन इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि इस अवैध व्यापार का तस्करी, आतंकवाद, शहरी क्षेत्र के संगठित अपराध तथा आर्थिक एवं व्यावसायिक अपराधों से काफी करीबी रिश्ता है। इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भौगोलिक स्थिति के कारण भारत नशीली दवाओं की तस्करी के लिए सबसे अच्छा रास्ता बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मादक पदार्थों के अवैध व्यापार से संबंधित कानूनआरंभ में भारत में नशीली दवाओं से संबंधित कानून बहुत पुराने थे, जिनमें अवैध व्यापार के लिए बहुत कम सजा का प्रावधान था, इसलिए स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 बनाया गया, जो 14 नवम्बर 1985 से लागू हुआ। 1961 में भारत ने नशीली दवाओं के बारे में अंतर्राष्ट्रीय करार पर और 1988 में नशीली दवाओं तथा मदहोशी पैदा करने वाले पदार्थों के अवैध व्यापार पर रोक संबंधी संयुक्त राष्ट्र के करार पर हस्ताक्षर किए, इसलिए 1988 में भारत में एक और अधिनियम बनाया गया जिसे ‘स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियमझ् नाम दिया गया। इसमें जेल की कड़ी सजा और जुमार्ने के साथ नशीली दवाओं का अवैध धंधा करने वालों को मौत की सजा देने तथा उनकी सम्पत्ति जब्त करने का प्रावधान भी किया गया। 1989 में अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के तहत कुछ जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए इसमें कुछ और संशोधन किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">
हालांकि हमारे यहां के कानून अन्य देशों के मुकाबले बहुत कड़े हैं, फिर भी अपराधी अक्सर कानून की कुछ खामियों की वजह से बच निकलते हैं और यही कारण है कि मादक पदार्थों का अवैध व्यापार भारत में निरन्तर फल-फूल रहा है। आज हमारी युवा पीढ़ी जिस कदर मादक पदार्थों की शिकंजे में फंस रही है, उसके मद्देनजर समाज का यह कत्र्तव्य है कि वह युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हुए उसे उचित मार्ग दिखलाए और यदि उसके कदम भटक रहे हों तो उसे गलत मार्ग पर चलने से रोके। इसे अपना उत्तरदायित्व समझकर समाज को इस दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए। यह कार्य सिर्फ सरकार के ही भरोसे छोड़ देना उचित नहीं है।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jun 2018 07:48:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नवाचार से 2022 तक बनायें समावेशी एवं खुशहाल समाज : कोविंद</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि हमारा लक्ष्य स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ पर 2022 तक समावेशी एवं खुशहाल समाज बनाने का होना चाहिये तथा यह लक्ष्य हासिल करने में नवाचार की संस्कृति मददगार होगी। श्री कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में ‘नवाचार एवं उद्यमिता मेले’ के उद्घाटन के मौके पर ‘गाँधियन यंग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/innovative-and-prosperous-society-by-2022-to-innovate-kovind/article-3613"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/kovind.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता) </strong>राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि हमारा लक्ष्य स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ पर 2022 तक समावेशी एवं खुशहाल समाज बनाने का होना चाहिये तथा यह लक्ष्य हासिल करने में नवाचार की संस्कृति मददगार होगी। श्री कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में ‘नवाचार एवं उद्यमिता मेले’ के उद्घाटन के मौके पर ‘गाँधियन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन’ पुरस्कार देने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही। तीन हजार से ज्यादा प्रविष्टियों में से चयनित 23 नवाचारों को राष्ट्रपति ने पुरस्कार प्रदान किये।</p>
<p style="text-align:justify;">पुरस्कृत नवाचारों में प्रोटीन नैनो सेंसर के डिजाइन का अध्ययन, कोर्निया की बनावट को मजबूती देने वाले इंजेक्टेबल हाइड्रोजेल, किफायती इंफ्रारेड वेन डिटेक्टर, मलेरिया को फैलने से रोकने के लिए नयी रणनीति, मलेरिया की जाँच के लिए किफायती डिस्पोजेबल माइक्रोफ्लुइड बायोचिप, असुरक्षित यौन संबंध के दौरान एचआईवी संक्रमण तथा अवांछित गर्भ रोकने के लिए नैनोस्पर्मवाइरिसाइड, मिट्टी के लिए नैनो तकनीक आधारित कंडीशनर, बिना बैटरी के काम करने वाला आईओटी सेंसिंग नोड, रोलिंग वाटर प्यूरीफायर रोल प्योर, ऊर्ध्व तथा क्षैतिज सतहों पर छेद करने के दौरान नैनो फिनिशिंग के लिए मैगनेटिक उपकरण का विकास, विंडो सोलर कूकर की डिजाइनिंग तथा सोशल सर्च इंजन ओरिगॉन का निर्माण शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री कोविंद ने सभी पुरस्कार विजेताओं और ऐसे नवाचारियों को भी जिन्हें पुरस्कार नहीं मिल पाया, उनके आविष्कारों के लिए बधाई दी तथा विश्वास जताया कि उनका योगदान देश को विकसित और सहयोग की भावना से पूर्ण समाज बनायेगा।सिर्फ नवाचार को अपने-आप में अपर्याप्त बताते हुये राष्ट्रपति ने नवाचारियों को वित्तीय तथा नीतिगत मदद प्रदान करने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा, “जरूरत है कि स्कूलों में बच्चे रट्टामारी की जगह प्रयोग करें और सरकार उनके लिए सुविधाजनक माहौल तैयार करे। नवाचाार अपने-आप में काफी नहीं है। इसे उद्यम में बदलना होगा जिसके लिए वित्तीय एवं नीतिगत मदद तथा मार्गदर्शन की जरूरत है।”</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Mar 2018 04:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वच्छ पर्यावरण से दूर होता मानव समाज</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा जगत की चर्चित पत्रिका ‘द लांसेट’ ने हाल ही में प्रदूषण से संबंधित हैरान करने वाले दो तरह के आंकड़े जारी किये हैं। पत्रिका की पहली रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साल 2015 में प्रदूषण से हुई मौतों के मामले में 188 देशों की सूची में पांचवें स्थान पर रहा। इस तरह, 2015 में दुनियाभर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/human-society-that-is-away-from-clean-environment/article-3481"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/fogg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चिकित्सा जगत की चर्चित पत्रिका ‘द लांसेट’ ने हाल ही में प्रदूषण से संबंधित हैरान करने वाले दो तरह के आंकड़े जारी किये हैं। पत्रिका की पहली रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साल 2015 में प्रदूषण से हुई मौतों के मामले में 188 देशों की सूची में पांचवें स्थान पर रहा। इस तरह, 2015 में दुनियाभर में प्रदूषण की वजह से हुई नब्बे लाख मौतों में से 25 लाख लोगों की मौत केवल भारत में ही हुई। प्रदूषण की वजह से हुई मौत के ये आंकड़े साल भर में युद्ध, धूम्रपान, भुखमरी, प्राकृतिक आपदा, एड्स, टीबी और मलेरिया से हुई कुल मौतों से कहीं अधिक हैं। वहीं, पत्रिका की दूसरी रिपोर्ट बताती है कि 2015 में 1.24 लाख भारतीयों की असामयिक मौत की वजह, बाह्य नहीं अपितु घरों के भीतर होने वाला प्रदूषण रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">‘द लांसेट काउंटडाउन:ट्रैकिंग प्रोग्रेस आॅन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट ने निम्न आय वर्गीय भारतीय परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिनकी निर्भरता आज भी जलावन के लिए ईंधन के परंपरागत साधनों, मसलन लकड़ी और कोयले पर है। जीवाश्म ईंधन, सिगरेट का धुआं और धूल लोगों को धीमी मौत मार रहा है या उन्हें बीमार कर रहा है।वायु में विद्यमान कार्बन मोनोक्साइड, कार्बन डाई-आॅक्साइड, मिथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, सल्फर व नाइट्स आॅक्साइट, ओजोन और विशेषकर पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) जैसे प्रदूषकों की बढ़ती मात्रा ने वातावरण को जहरीला बना दिया है। इस वजह से लोगों में कैंसर, अस्थमा तथा सांस संबंधी अन्य शिकायतें भी बढ़ती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते प्रदूषण की वजह से लाखों लोगों के जान गंवाने के बाद हम पर्यावरण सजगता के प्रति गंभीर नहीं हैं। आलम यह है कि, राष्ट्रीय राजधानी से लेकर देश के छोटे-बड़े अन्य शहरों की आबोहवा दूषित होती जा रही है। देश के अधिकांश शहर ‘गैस चैंबर’ बनकर मौत लोगों को खुलेआम मौत बांट रहे हैं। देश के अन्य छोटे-बड़े शहरों में शुद्ध जल और स्वच्छ वायु की प्राप्ति किसी चुनौती से कम नहीं है। शहरीकरण की वजह से जन्मे शहरों में आधुनिक जीवन का चकाचौंध तो है, लेकिन इंसानी जीवनशैली नरक के समान होती जा रही है। पर्यावरण में चमत्कारिक रुप से विद्यमान वायु का प्रदूषित होकर मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित होना, पर्यावरणीय सजगता के प्रति हमारी बेफिक्री को बयां करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि पर्यावरण से निरंतर छेड़छाड़ तथा विकास की अनियंत्रित भूख ने आज इंसान को शुद्ध व स्वच्छ पर्यावरण से भी दूर कर दिया है। इस वजह से लोगों की जीवन-प्रत्याशा लगातार घटती ही जा रही है। वर्तमान समय में पर्यावरण विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है। हरित-गृह प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत क्षय व सभी प्रकार के प्रदूषणों (जल, वायु, भूमि और ध्वनि) ने पर्यावरण को मैला कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सब नतीजा है, प्राकृतिक नियमों को धता बताते हुए हठधर्मी औद्योगिक विकास का। विगत कुछ वर्षों में सततपोषणीय विकास से इतर, एकाधिकारवादी औद्योगिक समाज की स्थापना की तरफ बढ़ते मानव समुदाय के कदमों ने पर्यावरणीय तत्वों को गहरा आघात पहुंचाया है। प्राकृतिक नियमों को अनदेखा कर, लूट की बुनियाद पर औद्योगिक विकास, विनाश के जनन को उत्तरदायी होता है। दुर्भाग्य है कि सबकुछ जानने-समझने के बाद ही हम नादान बने हैं और अपनी गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों, दिल्ली में प्रदूषण के छाये घने आवरण की खबरों ने सार्वजनिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, दिल्ली की आबोहवा में जहर घुलने के पीछे कई कारण उत्तरदायी रहे हैं। अलबत्ता, इसकी शुरूआत तब से ही हो गई थी, जब दिल्ली से सटे कुछ राज्यों में प्रशासनिक आदेशों के बावजूद पराली जलाने की शुरूआत हुई थी। ऐसे में, सवाल उठता है कि धरती पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियों के लिए आखिर हमने छोड़ा क्या? हमारे स्वार्थी कर्मों का ही नतीजा है कि हवा, जल, भूमि तथा भोजन, सभी प्रदूषित हो रहे हैं। पौधे हम लगाना नहीं चाहते और जो लगे हैं, उसे कथित विकास के नाम पर काटे जा रहे हैं। ऐसे में हमें धरती पर जीने का कोई नैतिक हक ही नहीं बनता।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल, अक्टूबर और नवंबर माह में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा, विशेषकर धान की फसल की कटाई के बाद उसके अवशेषों (पराली) को जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। नयी फसल की जल्द बुआई करने के चक्कर में किसान पराली को अपने खेतों में ही जला देते हैं। यह क्रम साल दर साल यों ही चलता रहता है। हमारे किसान इस बात से अंजान रहते हैं कि इस आग से, एक ओर जहां पर्यावरण में जहर घुल रहा होता है, वहीं खेतों में मौजूद भूमिगत कृषि-मित्र कीट तथा सूक्ष्म जीवों के मरने से मृदा की उर्वरता घटती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे अनाजोत्पादन भी प्रभावित होता है। अमरीकी कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो भारत में अन्नो त्पादन में कमी का एक बड़ा कारण वायु प्रदूषण है।वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यदि भारत वायु प्रदूषण का शिकार न हो, तो अन्न उत्पादन में वर्तमान से 50 प्रतिशत अधिक तक की वृद्धि हो सकती है। पराली जलाने से वायुमंडल में कार्बन डाईआॅक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और मिथेन आदि विषैली गैसों की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती हैं। पराली का बहुतायत में जलाया जाना, दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, एक तरह से देखा जाए, तो देश में पर्यावरण प्रदूषण की चिंता सबको है। पर, ना तो कोई इसके लिए पौधे लगाना चाहता है, ना ही अपनी धुआं उत्सर्जन करने वाली गाड़ी की जगह सार्वजनिक बसों का प्रयोग करना और ना ही उसके स्थान पर साइकिल की सवारी को महत्व देना चाहता है। हमारे यहां प्राय: छठी कक्षा से ही भूगोल की पाठ्यपुस्तकों में पर्यावरण संरक्षण को एक महत्वपूर्ण विषय के रुप में शामिल किया गया है। बावजूद इसके, पर्यावरणीय सजगता की बातें केवल किताबों, अखबारों और सोशल मीडिया तक ही सिमट कर रह गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, लोगों का एक-दूसरे को उपदेश देने और स्वयं उसके पालन न करने की पारंपरिक आदतों ने आज पर्यावरण को उपेक्षा के गहरे गर्त में धकेल दिया है। पर्यावरण प्रदूषण पर रोकथाम के लिए सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) जैसी संस्थाएं जितनी गंभीर है, उतनी सरकारें नहीं। शुद्ध पेयजल वायु व स्वच्छ पर्यावरण को चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए देश में अनेक स्तरों पर मुहिम चलाए जाने की जरुरत है, अन्यथा ‘औद्योगिक आतंकवाद’ का यह स्वरुप धीरे-धीरे पूरी मानव जाति को ही लील लेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुधीर कुमार</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2017 00:03:18 +0530</pubDate>
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                <title>कन्या भ्रूण हत्या-समाज का अभिशाप</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/female-feticide-curse-of-society/article-3432"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/bhrun-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मां के गर्भ में पल रही कन्या की जब हत्या की जाती है तब वह बचने के कितने जतन करती होगी, यह माँ से अच्छी तरह कोई नही जानता। नन्हा जीव जो माँ के गर्भ में पल रहा है, जिसकी हत्या की जा रही है, उनमें कोई कल्पना चावला, पी टी उषा, लता मंगेशकर तो कोई मदर टेरेसा भी हो सकती थी। हाल ही में अमेरिका में पोट्रेट एजुकेशन प्रजेंटेशन की द साइलेंट स्कीम फिल्म में गर्भपात की कहानी को दर्शाया गया है। इस अमेरिकी फिल्म में बताया है किस तरह गर्भपात के समय भ्रूण अपने आप को बचाने का प्रयास करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्भ में विचलित अजन्मे बालक की दशा माँ अच्छी तरह से जानती है। अजन्मा बच्चा हमारी तरह ही सामान्य इंसान है। ऐसे में भ्रूण की हत्या महापाप है। देश में लिंगानुपात की स्थिति निरंतर बिगड़ रही है। इस समस्या को लेकर केंद्र एवम् राज्य सरकारें भी चिन्तित है। इस गंभीर समस्या के हल हेतु अनेक प्रयास किये जा रहे है। निरंतर हो रहे प्रयासों के बावजूद इस दिशा में आशाजनक सफलता नही मिल रही है। भारत में लिंगानुपात में कमी का क्रम सन्1961 से चल रहा है। सन् 1991 में 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 945 थी, जो सन 2001 में घटकर 927 और 2011 में 918 हो गई। इस अनुपात में निरंतर गिरावट समाज के लिये चिन्ता का विषय है। लिगांनुपात में निरंतर गिरावट समाज की भेदभाव पूर्ण मानसिकता के कारण आई है। समाज में यह भेदभाव महिलाओं एवम् लड़कियों के प्रति समाज की दूषित मानसिकता का ही परिचायक है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर जहाँ समाज में लड़कियों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार हो रहा है दूसरी ओर आधुनिक तकनीकी चिकित्सा पद्धति का व्यापक रूप से दुरुपयोग कर कन्या भ्रूण हत्या का कारोबार जोर शोर से जारी है। सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या अवैध घोषित है मगर यह अवैध कारोबार सारे देश में चल रहा है। इस प्रकार लिंगानुपात में अंतर स्वाभाविक है। भारतीय संस्कृति में यह मान्यता है अनेक जटिल समस्याओं के निदान के लिये देवी पूजा की जाती है। देवी की पूजा करने बाले भी कन्या के जन्म को अभिशाप मानते है। इस संकीर्ण मानसिकता के लिये प्रेरित करने के लिए दहेज प्रथा भी एक मुख्य कारण है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत दिनों हरियाणा के पानीपत नगर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) अभियान का शुभारम्भ किया है। भारत सरकार ने यह अभियान पानीपत सहित देश के 100 जिलों में शुरू किया है, जहाँ लड़कों लड़कियों के लिंगानुपात में काफी अंतर है। इस अभियान में हरियाणा के पानीपत सहित 12 जिले सम्मिलित है । सन् 2011 की जनगणना के अनुसार देश के अन्य राज्यों के मुकाबले हरियाणा में एक हजार लड़कों के मुकाबले 879 लड़कियां है। जबकि लड़कियों का राष्ट्रीय औसत 941 है। भारत सरकार द्वारा घोषित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना निश्चित रूप से देश मे बेटी को बचाने के साथ साथ बेटी को खोया स्थान दिलाने का प्रयास है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार की इस अनूठी योजना की सराहना होना चाहिये। इस योजना के लागू होने से लड़कियों को सम्मान जनक स्थान मिलेगा। मगर आज सबसे बड़ी चुनौती समाज में बेटा एवं बेटी को समान नही मानना है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार कन्या भ्रूण हत्या भारत में काफी अधिक है। भारत में एक हजार पुरुषों के मुकाबले मात्र 918 महिलाएं है। एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भारत में पिछले 30 वर्षो में 1.20 करोड़ लड़कियों की गर्भ में ही हत्या होने का अनुमान बताया है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज की भेदभावपूर्ण मानसिकता बदलने के साथ साथ कानून से भी कठोर कदम उठाने की वर्तमान परिपेक्ष्य में आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-विजय कुमार जैन</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Oct 2017 04:13:54 +0530</pubDate>
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