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                <title>Agriculture News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Agriculture News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>White Gold News: भारत का 'सफेद सोना' बना अर्थव्यवस्था की ताकत, ग्लोबल फाइबर उत्पादन में करीब 19% रही हिस्सेदारी </title>
                                    <description><![CDATA[भारत कपास के रकबे में दुनिया में पहले और उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। सरकार उत्पादकता बढ़ाने, निर्यात मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/white-gold-news-indias-white-gold-becomes-the-strength-of/article-88422"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/white-gold.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India's Cotton Production: नई दिल्ली। कपास उत्पादन और खेती के क्षेत्रफल के मामले में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश दुनिया में कपास के सर्वाधिक रकबे वाला देश है, जबकि उत्पादन और घरेलू खपत के मामले में दूसरा स्थान रखता है। कृषि और वस्त्र क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में कपास की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।  White Gold News</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में लगभग 290.91 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ, जबकि घरेलू उद्योगों की मांग 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। वैश्विक फाइबर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत आंकी गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने कपास क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनका उद्देश्य किसानों की उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्ता में सुधार करना, बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना तथा मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। बाजार में कीमतों में गिरावट आने पर किसानों को राहत देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीद अभियान भी संचालित किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के माध्यम से वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन को लगभग 498 लाख गांठ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, डिजिटल खरीद व्यवस्था और उत्पाद की स्रोत-आधारित पहचान (ट्रेसबिलिटी) जैसी पहल भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता को और मजबूत बना रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में कपास की खेती लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती है। इस फसल से करीब 60 लाख किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। वहीं कपास की प्रसंस्करण इकाइयों, वस्त्र उद्योग, व्यापार और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में 4 से 5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। यही कारण है कि कपास को देश की अर्थव्यवस्था में 'सफेद सोना' कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्यात के क्षेत्र में भी भारतीय कपास ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने लगभग 18 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जिससे वैश्विक कपास व्यापार में देश की महत्वपूर्ण भागीदारी बनी रही। कपास और उससे तैयार वस्त्रों के निर्यात से देश को 11.49 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कपास से निर्मित वस्त्रों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा। इसके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात भी प्रमुख आयातक देशों में शामिल रहे। यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय कपास और उससे तैयार उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में कपास का उत्पादन मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में होता है। इसके अतिरिक्त ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है, जिससे यह फसल देश के कृषि एवं औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 17:25:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Groundnut Farming: वैज्ञानिक तरीके से करें मूंगफली की खेती, बढ़ाएं मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[मूंगफली देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है, जिसकी खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है। यदि इसकी बुवाई उचित समय और वैज्ञानिक विधि से की जाए, तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ मौसम में मूंगफली की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/groundnut-farming-cultivate-groundnut-scientifically-and-increase-profits/article-88089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/nut-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मूंगफली देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है, जिसकी खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है। यदि इसकी बुवाई उचित समय और वैज्ञानिक विधि से की जाए, तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ मौसम में मूंगफली की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त रहता है। इस अवधि में भूमि में पर्याप्त नमी उपलब्ध होने के कारण बीजों का अंकुरण समान रूप से होता है और पौधों का विकास भी तेजी से होता है। Groundnut Farming</p>
<p style="text-align:justify;">उन्नत उत्पादन के लिए किसानों को प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना चाहिए। एमएच-4 तथा पंजाब मूंगफली नंबर-1 जैसी उन्नत किस्में अधिक उपज देने के साथ रोगों के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील मानी जाती हैं। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखना लाभदायक होता है। वहीं पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने से उन्हें पर्याप्त पोषण, धूप और वायु मिलती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छे उत्पादन के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन भी अत्यंत आवश्यक है। खेत की तैयारी के दौरान मृदा परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा जिंक जैसे पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए। साथ ही जिप्सम का प्रयोग फली बनने की अवस्था में करने से दानों का विकास बेहतर होता है तथा कैल्शियम और सल्फर की कमी भी पूरी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">खरपतवार नियंत्रण, समय-समय पर सिंचाई (जहां आवश्यकता हो), रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन अपनाकर किसान मूंगफली की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उचित तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों का पालन करने से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। Groundnut Farming</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 16:27:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Vegetable Farming: हांसी में सिमट रही सब्जी की खेती, बाहरी सब्जियों ने छीना बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[एक समय पूरे क्षेत्र में सब्जी उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला हांसी अब धीरे-धीरे अपनी यह पहचान खोता जा रहा है। कभी यहां की मंडी में भिंडी, गोभी, मिर्च, बैंगन, टिंडा, तोरी और कद्दू जैसी स्थानीय सब्जियों की भरमार रहती थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/vegetable-farming-vegetable-farming-is-shrinking-in-hansi-outside-vegetables/article-88032"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/vegetable-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हांसी, (सच कहूँ/मुकेश)। एक समय पूरे क्षेत्र में सब्जी उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला हांसी अब धीरे-धीरे अपनी यह पहचान खोता जा रहा है। कभी यहां की मंडी में भिंडी, गोभी, मिर्च, बैंगन, टिंडा, तोरी और कद्दू जैसी स्थानीय सब्जियों की भरमार रहती थी। छोटे व्यापारी किसानों से ताजा सब्जियां खरीदकर सीधे दिल्ली समेत कई शहरों की मंडियों तक पहुंचाते थे। इससे किसानों को अच्छा भाव मिलता था और सब्जी की खेती लाभ का सौदा मानी जाती थी। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। Vegetable Farming</p>
<p style="text-align:justify;">हांसी की मंडियों में दिल्ली और दूसरे राज्यों से आने वाली सस्ती तथा देखने में आकर्षक सब्जियों की आवक लगातार बढ़ गई है। अधिक मुनाफे के कारण व्यापारी भी स्थानीय किसानों की बजाय बाहरी माल खरीदने लगे हैं। इसका सीधा असर हांसी के सब्जी उत्पादकों पर पड़ रहा है और हर साल सब्जियों का रकबा सिमटता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंडी में इन दिनों टिंडा 15 से 20 रुपये, कद्दू 5 से 10 रुपये, तोरी 10 से 15 रुपये और भिंडी 15 से 20 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बिक रही है। किसानों का कहना है कि इन कीमतों में बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई, मजदूरी और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में सब्जी की खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। हांसी के हाजमपुर, पुठ्ठी मंगल खां, रोहनात और आसपास के गांव कभी पूरे हरियाणा में सब्जी उत्पादन और नर्सरी तैयार करने के लिए प्रसिद्ध थे। यहां से तैयार पौधे लेने के लिए दूर-दूर से किसान पहुंचते थे। Vegetable Farming</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय सब्जियां अपनी ताजगी और स्वाद के लिए भी जानी जाती थीं, क्योंकि इन्हें खेत से तोड़कर कुछ ही घंटों में मंडी तक पहुंचा दिया जाता था। इसके विपरीत बाहर से आने वाली सब्जियां लंबी दूरी तय करके बाजार तक पहुंचती हैं। इसके बावजूद कम कीमत और अधिक मुनाफे के कारण व्यापारी बाहरी सब्जियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का भी मानना है कि स्थानीय खेतों की ताजा सब्जियों का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है, लेकिन बाजार में अब बाहरी सब्जियों की उपलब्धता अधिक होने से उनके पास विकल्प सीमित रह गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती में मेहनत और जोखिम दोनों अधिक हैं। मौसम की मार के साथ-साथ लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि मंडी में उचित भाव नहीं मिल रहा। ऐसे में किसान धीरे-धीरे धान, कपास और अन्य पारंपरिक फसलों की ओर लौट रहे हैं। इसका असर केवल किसानों की आय पर ही नहीं, बल्कि खेतिहर मजदूरों, नर्सरी संचालकों और सब्जी व्यापार से जुड़े लोगों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि स्थिति यही रही तो आने वाले वर्षों में हांसी की सब्जी उत्पादक क्षेत्र के रूप में पहचान पूरी तरह समाप्त हो सकती है। Vegetable Farming</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिहायशी कॉलोनियों ने भी घटाया सब्जियों का रकबा</h3>
<p style="text-align:justify;">हांसी के आसपास जिन क्षेत्रों में कभी बड़े पैमाने पर भिंडी, गोभी, बैंगन और अन्य सब्जियों की खेती होती थी, वहां अब तेजी से रिहायशी कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। खेती योग्य जमीन लगातार कम होने से सब्जी उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। किसानों का कहना है कि उपजाऊ कृषि भूमि के सिकुड़ने का असर सीधे सब्जी उत्पादन पर पड़ रहा है। Vegetable Farming</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्यों घट रही है सब्जी की खेती</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">थोक मंडियों में लगातार गिर रहे भाव।</li>
<li style="text-align:justify;">बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत।</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली व अन्य राज्यों से सस्ती सब्जियों की बढ़ती आवक।</li>
<li style="text-align:justify;">खेती योग्य जमीन पर तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियां।</li>
<li style="text-align:justify;">मौसम की अनिश्चितता और फसल खराब होने का बढ़ता जोखिम।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 15:22:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Digital Agriculture: 3 करोड़ के करीब किसान सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े डिजिटल कृषि परामर्श सेवाओं का उठा रहे लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म के साथ 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/digital-agriculture-nearly-3-crore-farmers-are-taking-advantage-of/article-87330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/all-farmers-will-get-tubewell-connection-by-november-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Digital Agriculture: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म के साथ 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जुलाई 2021 में शुरू किए गए इस एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार मंच पर अब तक 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है। इसके अलावा, किसानों के लिए 351 कृषि उत्पादों से संबंधित 21,900 कृषि सलाह भी जारी की गई हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाकर इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया। इनमें से 5.35 लाख किसान कॉल सेंटर के माध्यम से, 21,517 मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए, 2,416 वेब पोर्टल के माध्यम से और 39,193 कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए पंजीकरण हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बताया कि किसान सारथी की सेवाएं देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और 6.63 लाख गांवों तक पहुंच चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) का उपयोग करता है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद संभव हो पाता है। साथ ही, कृषि अनुसंधान से जुड़ी जानकारी सीधे खेतों तक पहुंचाने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को समय पर, विश्वसनीय और कई भाषाओं में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, मौसम से जुड़े अपडेट और विशेषज्ञों से सीधे परामर्श की सुविधा भी मिलती है। यह प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने विकसित और लागू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि इन सभी संस्थानों के एक साथ जुड़ने से देश भर में कृषि सलाह का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार हुआ है, जिससे किसानों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार भरोसेमंद और उपयोगी सलाह मिल रही है। यह प्लेटफॉर्म किसान कॉल सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, मायस्कीम और भाषिनी जैसी प्रमुख राष्ट्रीय सेवाओं से भी जुड़ा हुआ है, जिसके जरिए किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिनमें 102 योजनाएं केंद्र सरकार की हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्लेटफॉर्म पर सभी प्रमुख अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी फसलों, बागान फसलों और चारा फसलों से संबंधित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी भी किसानों को दी जाती है। किसान अपनी स्थानीय भाषा में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सवाल पूछ सकते हैं और उसी भाषा में सलाह प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान सारथी प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से लाइव बातचीत की सुविधा भी देता है। साथ ही, किसानों के लिए एक ज्ञान भंडार भी उपलब्ध कराता है। इससे कृषि अनुसंधान संस्थानों की पहुंच बढ़ी है और वैज्ञानिक सलाह अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच रही है।सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के साथ-साथ कृषि अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। Agriculture News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:11:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: जलसंभर प्रबंधन पर राष्ट्रीय बैठक, नए तकनीकी दिशा-निर्देशों पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग और 'राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण' ने यहां एक दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/a-meeting-was-organized-on-watershed-guidelines-to-strengthen-the/article-86511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/krishi-today-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Agriculture News: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग और 'राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण' ने यहां एक दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्व बैंक के सहयोग से चल रहे 'रिवार्ड' कार्यक्रम के तहत देश में जलसंभर (पानी और मिट्टी के संरक्षण) के बेहतर प्रबंधन के लिए नए राष्ट्रीय तकनीकी दिशा-निर्देशों के मसौदे पर चर्चा करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां के पूसा परिसर में चली दो दिवसीय (17 -18 जून) बैठक में राष्ट्रीय तकनीकी दिशा-निर्देशों के मसौदे पर विचार-विमर्श किया गया और देश भर में जलसंभर नियोजन, कार्यान्वयन, निगरानी और स्थिरता को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों के सुझावों पर विचार किया गया। बैठक से हुए विचार-विमर्श वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलसंभर शासन में सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में इस बात पर बल दिया कि जलसंभर प्रबंधन विज्ञान, सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सरलता पर आधारित होना चाहिए, जिसमें किसानों और स्थानीय जलसंभर संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए। दिशा-निर्देश तैयार करते समय वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास, कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल सघनता बढ़ाने, जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन विकसित करने और जलसंभर संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चर्चा में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, डेटा-आधारित दृष्टिकोण, समन्वय, पीआरआई की भागीदारी और परियोजना के बाद की स्थिरता जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने चैटबॉट के साथ सक्षम अनुप्रयोगों के एकीकरण, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों के उपयोग, मजबूत डीएसएस के विकास और राष्ट्रीय वेब पोर्टल प्रणालियों पर बल दिया गया ताकि भविष्य के जलसंभर कार्यक्रमों के लिए सार्थक परिणाम मिल सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में जलसंभरण पर योजना बनाने के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजरी प्राप्त करने हेतु ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग, एलआरआई और हाइड्रोलॉजी-लाइट दृष्टिकोणों को अपनाने, प्रभावी जलसंभर कार्यान्वयन के लिए राज्यों में संस्थागत और कार्यान्वयन तंत्रों में सुधार करने और तकनीकी सेवा प्रदाताओं, संस्थानों/एनजीओ की भागीदारी के माध्यम से जलसंभर संपत्तियों के परियोजना-पश्चात रखरखाव और स्थिरता के लिए तंत्रों का पता लगाने पर विचार-विमर्श करने का सुझाव भी सामने आया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बैठक में भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण और राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में विश्व बैंक, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, और 'रिवार्ड' कार्यक्रम से जुड़े राज्यों के लगभग 100 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/krishi-today-news.jpg" alt="Krishi-Today-News" width="1435" height="723"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/a-meeting-was-organized-on-watershed-guidelines-to-strengthen-the/article-86511</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:11:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: इस ठंड से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को लाभ होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[रतिया (सच कहूँ/तरसेम सैनी/शामवीर)। Agriculture News: क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड ने आमजन का जीवन प्रभावित कर दिया है। रविवार को सुबह धुंध तो जल्दी छंट गई, लेकिन धूप नहीं निकलने से ठंड का प्रकोप पूरे दिन बना रहा। ठंड इतनी अधिक है कि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-cold-is-expected-to-benefit-wheat-and-other-rabi-crops/article-79502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रतिया (सच कहूँ/तरसेम सैनी/शामवीर)।</strong> Agriculture News: क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड ने आमजन का जीवन प्रभावित कर दिया है। रविवार को सुबह धुंध तो जल्दी छंट गई, लेकिन धूप नहीं निकलने से ठंड का प्रकोप पूरे दिन बना रहा। ठंड इतनी अधिक है कि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं तथा जगह-जगह अलाव जलाकर आग सेंकते नजर आ रहे हैं। दीपक कुमार, हेमराज, विकास, प्रदीप और सुरेंद्र सहित कई नागरिकों ने बताया कि भले ही धुंध जल्दी छंट गई थी, लेकिन ठंड में कोई कमी नहीं आई। दोपहर में कुछ समय के लिए धूप जरूर खिली, परंतु उससे भी ठंड से राहत नहीं मिल सकी। हालांकि इस ठंड से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को लाभ होने की उम्मीद जताई जा रही है। Agriculture News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 17:11:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhaan Ki Ropai: धान की रोपाई शुरु, खेतों में जुटे श्रमिक और किसान</title>
                                    <description><![CDATA[कलायत सच कहूँ/अशोक राणा)। Agriculture News: बरसाती सीजन की शुरुआत होते ही कलायत क्षेत्र के किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं। खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे हैं। किसान पिछले कई दिनों से तैयारी कर बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब बिना मूसलाधार बारिश के ही खेतों में काम शुरु कर दिया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/workers-and-farmers-busy-in-rice-field-planting/article-72638"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/kalayat-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कलायत सच कहूँ/अशोक राणा)।</strong> Agriculture News: बरसाती सीजन की शुरुआत होते ही कलायत क्षेत्र के किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं। खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे हैं। किसान पिछले कई दिनों से तैयारी कर बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब बिना मूसलाधार बारिश के ही खेतों में काम शुरु कर दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई का सही समय 15 जून से 15 जुलाई तक है। पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हल्की बूंदाबांदी हो रही है। इससे खेतों में नमी आ गई है। इसी का फायदा उठाकर किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर उतार दिए हैं। Kalayat News</p>
<p style="text-align:justify;">कई किसानों ने पहले ही खेतों में ढैंचा और मूंग की बिजाई कर रखी थी। ऐसे खेतों को रोपाई से पहले तीन-चार दिन खुला छोड़ना पड़ता है। अब इन खेतों में पानी छोड़कर रोपाई शुरु कर दी गई है। धान की रोपाई शुरु होते ही ग्रामीण मजदूरों को भी काम मिल गया है। अगले डेढ़ महीने तक मजदूरों को लगातार काम मिलेगा। प्रवासी मजदूर भी कलायत पहुंचने लगे हैं। किसानों का कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र में रोपाई बिना प्रवासी मजदूरों के संभव नहीं है। Kalayat News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पाकिस्तान के खिलाफ तीन टी20 की मेजबानी करेगा बांग्लादेश" href="http://10.0.0.122:1245/bangladesh-to-host-three-t20-matches-against-pakistan/">पाकिस्तान के खिलाफ तीन टी20 की मेजबानी करेगा बांग्लादेश</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/workers-and-farmers-busy-in-rice-field-planting/article-72638</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 16:25:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: गोलेवाला के किसान निर्मल सिंह ने दिखाई नई राह</title>
                                    <description><![CDATA[7 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत 17 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत पानी और बिजली की बचत के साथ जमीन की उर्वरता में हुआ सुधार बठिंडा (सच कहूँ/सुखजीत मान)। Bathinda News: फसल विविधिकरण के क्षेत्र में जहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/nirmal-singh-has-been-cultivating-sathi-moong-for-seven-years/article-71991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/bathinda-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">7 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction">17 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत</li>
<li class="ai-optimize-7">पानी और बिजली की बचत के साथ जमीन की उर्वरता में हुआ सुधार</li>
</ul>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा (सच कहूँ/सुखजीत मान)।</strong> Bathinda News: फसल विविधिकरण के क्षेत्र में जहां पंजाब के किसान अब भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं बठिंडा जिले के गांव गोलेवाला निवासी प्रगतिशील किसान निर्मल सिंह ने साठी मूंग की खेती को अपनाकर खेतीबाड़ी का एक नया और लाभदायक रास्ता दिखाया है। पिछले 17 वर्षों से वह गेहूं की कटाई के तुरंत बाद साठी मूंग की बुआई करते हैं और फिर बासमती व पछेती धान की फसल लगाते हैं। इस वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल पद्धति से उन्हें न केवल अतिरिक्त आमदनी मिल रही है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। Bathinda News</p>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;">इस वर्ष भी उन्होंने 11 एकड़ क्षेत्र में साठी मूंग की बुआई की है। मूंग की फसल 65 से 70 दिन में तैयार हो जाती है, जिससे गेहूं और धान की फसलों के बीच खाली समय का उत्पादक उपयोग हो पाता है। साठी मूंग औसतन प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल उत्पादन देती है और इसका बीज मात्र 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपलब्ध हो जाता है।<br />
बॉक्स</p>
<h3 class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">अगली फसल को ऐसे मिलती है प्राकृतिक खाद | Bathinda News</h3>
<p class="ai-optimize-10" style="text-align:justify;">निर्मल सिंह बताते हैं कि मूंग की फसल ना केवल उन्हें अतिरिक्त आमदनी देती है, बल्कि यह मिट्टी में जैविक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर अगली फसल के लिए प्राकृतिक खाद का कार्य भी करती है। इससे बासमती या पछेती धान की फसल में रासायनिक खादों की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है और उपज की गुणवत्ता भी सुधरती है। उनका कहना है कि मूंग लगाने वाले खेतों में धान की बुआई वह 20 जुलाई के बाद करते हैं, जिससे पानी और बिजली की खपत में भारी बचत होती है, जबकि फसल समय पर तैयार होकर बाजार में अच्छा मूल्य दिलाती है।</p>
<p class="ai-optimize-11"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Ring Road: खुशखबरी, हरियाणा के इन गांवों से गुजरेगा ये नया रिंग रोड, जमीन को होगा अधिग्रहण" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-this-new-ring-road-will-pass-through-these-villages-of-haryana-land-will-be-acquired/">Haryana Ring Road: खुशखबरी, हरियाणा के इन गांवों से गुजरेगा ये नया रिंग रोड, जमीन को होगा अधिग्रहण</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/nirmal-singh-has-been-cultivating-sathi-moong-for-seven-years/article-71991</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 15:30:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: पांच एकड़ में बागवानी, दो लाख प्रति एकड़ कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)। Agriculture News: आधुनिक समय में मेहनत और सही तकनीक के साथ बागवानी से किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह कहना है यमुनानगर के खंड जगाधरी के गांव रतनगढ़ (नंदपूरा) के दसवीं पास प्रगतिशील किसान कमल काम्बोज का। सच कहूँ की टीम से विशेष बातचीत में कमल ने बताया कि उन्होंने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/gardening-in-five-acres-earning-two-lakhs-per-acre/article-69316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)।</strong> Agriculture News: आधुनिक समय में मेहनत और सही तकनीक के साथ बागवानी से किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह कहना है यमुनानगर के खंड जगाधरी के गांव रतनगढ़ (नंदपूरा) के दसवीं पास प्रगतिशील किसान कमल काम्बोज का। सच कहूँ की टीम से विशेष बातचीत में कमल ने बताया कि उन्होंने 2019 में पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की ओर कदम बढ़ाया। आज वह अपनी 10 एकड़ जमीन में से 5 एकड़ में बागवानी कर सभी खर्च निकालने के बाद 2 से ढाई लाख रुपये प्रति एकड़ सालाना कमा रहे हैं। इसके साथ ही, वह एक दर्जन से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उनके परिवारों के भरण-पोषण में भी योगदान दे रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विविधता और तकनीक का किया प्रयोग | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल काम्बोज ने बताया कि शुरूआत में उन्होंने 2 एकड़ में बेरी के बाग लगाए, लेकिन बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण फसल बदलनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने पिंक ताइवान किस्म के अमरूद का बाग लगाया, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलने लगा। वर्तमान में उनके 5 एकड़ के बाग में ढाई एकड़ में पिंक ताइवान अमरूद, आधा एकड़ में ड्रैगन फ्रूट, आधा एकड़ में नाशपाती, आधा एकड़ में आडू, एक एकड़ में लीची, 2 कनाल में अंजीर, 2 कनाल में बेरी और 2 कनाल में नींबू के पेड़ लगे हैं। बागवानी विभाग की तकनीकों का उपयोग कर वह कीटों से फसल को सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा, मौसमी फसलें जैसे लहसुन और सब्जियां लगाकर दोहरा लाभ कमाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ड्रैगन फ्रूट की खेती से बढ़ी उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल ने बताया कि बाजार में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती मांग को देखते हुए एक साल पहले आधा एकड़ में इसकी खेती शुरू की। यह विदेशी फल, जो सेंट्रल और साउथ अमेरिका के साथ मैक्सिको में मुख्य फसल है, डेढ़ साल में फल देना शुरू कर देगा। उनकी फसल अगले कुछ महीनों में पैदावार देगी। Agriculture News</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोजगार का साधन भी बनी बागवानी</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल के मुताबिक, बागवानी मेहनत और मैनपावर की खेती है। वह अपने खेतों में 10 से 15 महिला-पुरुषों को नियमित रोजगार देते हैं, जिससे उनके परिवारों का पोषण होता है। उनकी फसलें यमुनानगर की सब्जी मंडी में ही अच्छे दामों पर आसानी से बिक जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि सरकार बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। अमरूद की फसल पर प्रति एकड़ 43 हजार रुपये की सब्सिडी तीन साल में तीन किश्तों (पहले साल 23 हजार, दूसरे-तीसरे साल 10-10 हजार) में दी जाती है। इसके अलावा, 2025-26 में आवारा पशुओं से बागों की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल पर 300 रुपये प्रति रनिंग मीटर के हिसाब से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से फल छेदक मक्खी से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करने और अधिक जानकारी के लिए जिला बागवानी कार्यालय से संपर्क करने की अपील की। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Madrid: स्पेन में शक्तिशाली तूफान के कारण गोदाम ढहने से तीन मौत" href="http://10.0.0.122:1245/three-killed-in-spain-warehouse-collapse-due-to-powerful-storm/">Madrid: स्पेन में शक्तिशाली तूफान के कारण गोदाम ढहने से तीन मौत</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 15:28:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: परंपरागत खेती को छोड़ मशरूम उगाकर लखपति बना प्रहलाद सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prahlad-singh-earns-a-profit-of-twenty-lakh-rupees-annually-by-growing-mushrooms/article-69038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/agriculture-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)।</strong> Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान को सबके सामने ला रहे हैं, जो पारंपरिक खेती को त्यागकर मशरूम की खेती करके लखपति बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि मशरूम उत्पादन से गुरुग्राम के गांव डाबोदा के किसान प्रहलाद सिंह सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं। वे किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हुए हैं। किसान आधुनिक होगा और व्यवसायिक खेती की ओर अग्रसर होगा तो किसान की आय दोगुनी होने के साथ-साथ क्षेत्र में कृषि व बागवानी का चेहरा भी बदलेगा। यह बात गुरुग्राम के डाबोधा में रहने वाले किसान प्रहलाद सिंह ने सही साबित की है। प्रहलाद सिंह पहले परंपरागत खेती के रूप में बाजरा और गेहूं का उत्पादन कर रहे थे। जिसमें आमदनी ना के बराबर हो रही थी। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">खर्चा अधिक और उत्पादन कम होने से मुनाफा भी घटता जा रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आय दुगनी करने और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए व्यवसायिक खेती करने पर जोर देने के विचारों से प्रेरणा ली। तत्पश्चात जिला बागवानी अधिकारी नेहा यादव से जानकारी लेकर विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर मशरूम प्रोडक्शन यूनिट लगाने का प्लान किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">करीब 8 कनाल क्षेत्र में सेटअप किया तैयार | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रहलाद सिंह बताते हैं कि मशरूम उत्पादन के लिए उन्होंने करीब 8 कनाल क्षेत्र में पूरा सेटअप तैयार किया है। जिसमें मशरूम कपोस्ट व प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने में करीब 40 लाख रुपये की लागत आई है। जिला बागवानी विभाग द्वारा उसे 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी गयी है। बाकी राशि के लिए उसने बैंक से लोन लिया है। किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि उसने सरकारी मदद से कपोस्ट यूनिट व चार प्रोडक्शन यूनिट स्थापित की है। जिसमें प्रत्येक प्रोडक्शन यूनिट में 90 दिन का प्रोडक्शन सर्कल चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एक यूनिट से करीब 38 से 40 क्विंटल मशरूम उत्पादित किया जा रहा है। मार्किट में मशरूम का थोक भाव 140 से 150 रुपये किलो के करीब है। जिससे पूरे साल में चारों यूनिट से सभी खर्चों को घटाकर शुद्ध मुनाफे के रूप में 20 से 22 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। प्रहलाद सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश होलसेलर फार्म पर आकर ही मशरूम ले जा रहे हैं। इससे उन्हें बाजार में जाने की आवश्यकता भी नही है। उन्होंने बताया कि वे अभी गुरुग्राम व एनसीआर में अन्य बड़े फूड संस्थानों में डायरेक्ट डील के लिए प्रयासरत हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूनिट लगाने पर 40 से 85% तक की अनुदान राशि | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">किसानों को सिर्फ सकारात्मक प्रयास करने की जरूरत है। बागवानी विभाग उनकी हर संभव मदद को तैयार है। जिला में उद्यान विभाग हरियाणा द्वारा विभागीय स्कीम के तहत मशरूम कंपोस्ट व एक मशरूम प्रोडक्शन यूनिट की अधिकतम यूनिट कोस्ट 20 लाख निर्धारित की गई है। जिसमें जनरल कैटेगरी में 40 प्रतिशत व अनुसूचित जाति श्रेणी में 85 प्रतिशत राशि अनुदान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…" href="http://10.0.0.122:1245/arvind-kejriwals-problems-are-going-to-increase-after-losing-power-in-delhi/">Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 15:30:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: किचन गार्डनिंग से उगाई कई सब्जियां, बनाए 16 रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[खराब सब्जी खाने से तबियत बिगड़ती देखी तो किसान रणधीर सिंह ने अपनाई नई राह सवा 6 फुट की लौकी और 500 ग्राम की लहसून की गांठ उगा चुका है किसान कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Agriculture News: कृषि प्रधान भारत में कृषि विशेषज्ञ फल व सब्जियों सहित अन्य फसलों की नई-नई किस्में ईजाद कर रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/many-vegetables-grown-through-kitchen-gardening-created-sixteen-records/article-68186"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">खराब सब्जी खाने से तबियत बिगड़ती देखी तो किसान रणधीर सिंह ने अपनाई नई राह</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सवा 6 फुट की लौकी और 500 ग्राम की लहसून की गांठ उगा चुका है किसान</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Agriculture News: कृषि प्रधान भारत में कृषि विशेषज्ञ फल व सब्जियों सहित अन्य फसलों की नई-नई किस्में ईजाद कर रहे हैं। वहीं फसल की अच्छी पैदावार लेने के लिए किसान अंधाधुंध पेस्टिसाइड का प्रयोग करते जा रहे हैं। इससे पैदावार जरूर बढ़ती है लेकिन ये फल-सब्जियां और अन्य फसलें से इंसान बीमार करते जा रहे हैं। लेकिन कुछ लोग लीक से हटकर कुछ अलग कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं किसान रणधीर, जो पिछले करीब 30 साल से प्राकृतिक खेती के जरिए किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">रणधीर सिंह का किचन गार्डन में लगाई गई सब्जी और अन्य फसलों के लिए 16 बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि मैंने 6 फुट 2 इंच की घिया (लौकी) तैयार की थी। जिसके चलते उनका नाम चार बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने लहसुन में भी दो बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। उन्होंने लहसुन की एक गांठ 500 ग्राम और 700 ग्राम की तैयार की थी, जिसके चलते उनका लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड मिला था। 1992 से किया किचन गार्डन शुरू किसान रणधीर सिंह ने बताया कि पहले वह कैथल के एक गाँव जाजनपुर में रहते थे, वहां पर स्कूल समय में उनकी खेती करने में काफी दिलचस्पी थी। इसके चलते उसने थोड़ी पढ़ाई करने के बाद ही 1972 में अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करनी शुरू की। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन बच्चे बड़े होने के बाद जब वह नौकरी पर लग गए तब वह गाँव को छोड़कर कुरुक्षेत्र में रहने लगे और जैसे ही वह सब्जी उगाते हैं ये फल-सब्जियां व् ा फसलें किसान रणधीर सिंह ने कहा कि उसने किचन गार्डन छोटे स्तर से शुरू किया था लेकिन अब उसके पास एक समय में आलू, टमाटर, गोभी, घिया, मटर, बंदगोभी, ब्रोकली, लहसुन, प्याज, पालक, मेथी, नींबू, चुकंदर, मूली, गाजर, धनिया, तोरी सहित करीब 35 सब्जियां हैं। इसके साथ वह जड़ी बूटी भी लगा चुके हैं। इसमें भी उन्होंने पुरस्कार हासिल किया हुआ है। जो बिल्कुल आॅर्गेनिक तरीके से तैयार की जाती है। इतना ही नहीं उन्होंने सब्जियों के साथ-साथ गन्ना और कई प्रकार के फल भी लगाए हुए हैं। यह फल और अन्य फसलें भी उन्होंने आॅर्गेनिक तैयार किए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सवा तीन किलो की अरबी भी उगाई | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर सिंह ने बताया कि करेला और शलगम की बेहतरीन फसल के लिए दो-दो बार उनका नाम लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इनके अलावा अरबी के लिए भी उनका लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड दर्ज हुआ, क्योंकि उन्होंने एक अरबी की गांठ 3 किलो 250 ग्राम की तैयार की थी। एक सतावर और दो रतालू के लिए लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज है।</p>
<p style="text-align:justify;">किचन गार्डन में प्राकृतिक तरीके से सब्जी तैयार करने में कुल 16 बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज हुआ। इसके अलावा अपने सब्जियों को लेकर हरियाणा और पंजाब किसान मेलों में 200 से अधिक बार प्रथम और द्वितीय पुरस्कार मिल चुके हैं। हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार के द्वारा रणधीर सिंह को कृषि रतन और राय बहादुर जैसे बड़े पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृषि अधिकारी ने बताए किचन गार्डनिंग के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">डीएचओ सत्यनारायण का कहना है कि सरकार सब्जी लगाने के इच्छुक लोगों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर किट उपलब्ध कराती है, जिसमें विभिन्न सब्जियों के बीज होते हैं, जिसे किसान अपने खेत या घर के आसपास छोटे जमीन के हिस्से में लगा सकते हैं। उन्होंने किचन गार्डनिंग के फायदे बताते हुए कहा कि अगर किसी के पास जगह है वह अपने घर के लिए कम खाद, दवाई इस्तेमाल करते हुए सब्जी उगा सकता है। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="डॉ. माधवी बोरसे इन्सां को भारत की टॉप 10 गेम चेंजर महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया है!" href="http://10.0.0.122:1245/dr-madhavi-borse-insan-has-been-selected-as-one-of-the-top-10-game-changer-women-of-india/">डॉ. माधवी बोरसे इन्सां को भारत की टॉप 10 गेम चेंजर महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया है!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/many-vegetables-grown-through-kitchen-gardening-created-sixteen-records/article-68186</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:24:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शीतलहर बढ़ने से सब्जियों की फसलों में हो सकता है नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Agriculture News: जनवरी माह मे शीतलहर चलने से सब्जियों की फसलों में नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता है। वहीं 14 व 15 जनवरी को बरसात की भी संभावना बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. सी.बी. सिंह के अनुसार मौसम का प्रभाव आमजन के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/vegetable-crops-may-be-damaged-due-to-increasing-cold-wave/article-66284"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/tomato.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। </strong>Agriculture News: जनवरी माह मे शीतलहर चलने से सब्जियों की फसलों में नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता है। वहीं 14 व 15 जनवरी को बरसात की भी संभावना बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. सी.बी. सिंह के अनुसार मौसम का प्रभाव आमजन के साथ सब्जियों की फसलों पर भी पड़ेगा। सब्जियों की ग्रोथ कम होने के साथ आमद भी प्रभावित होगी। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। उस दिन पाला पड़ने की ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए ऐसे दिनों में आलू, मिर्च, बैंगन व टमाटर इत्यादि फसलों को पाले से बचाने के लिए शाम के समय से ही फसल के इर्द गिर्द सूखे घास को सुलगा दें ताकि पाले का असर सब्जी की फसल पर न पड़े। उन्होने कहा कि इस मौसम में खेत को सूखा न रहने दें बल्कि खेतों में नमी की मात्रा बनाकर रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गेहूँ के लिए लाभकारी है सर्दी | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">डा. सीबी सिंह ने बताया कि सर्दी का मौसम यूं तो गेहूँ की फसल के लिए लाभकारी है लेकिन कोहरे के समय में जब प्रकाशसंश्लेषण नहीं हो पाता तो गेहूँ की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। जोकि मौसम के अनुसार अपने आप ठीक हो जाएंगी। ज्यादा कीटनाशकों के छिडकाव से फसल व खेतों में नुकसान होगा। मौसम में सुधार होने पर पीली हुई पत्तियां अपने आप ठीक हो जाती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन जिलों में चलेगी कोल्ड वेव</h3>
<p style="text-align:justify;">डा. सी.बी. सिंह ने कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग से मिली जानकारी अनुसार बताया कि सर्दी को लेकर मौसम विभाग भी लगातार अलर्ट जारी कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड पहले से अधिक बढ़ने वाली है। उन्होंने बताया कि धुंध के साथ ही हरियाणा के 7 जिलों में कोहरे के साथ कोल्ड वेव भी चलने वाली है। इनमें कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, अंबाला, जींद, पानीपत और सोनीपत शामिल हैं। आने वाले कुछ दिनों में पहाड़ी हवाओं और धुंध के कारण तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Supreme Court: समलैंगिक विवाह, दोबारा सुनवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला" href="http://10.0.0.122:1245/supreme-courts-big-decision-on-gay-marriage-re-hearing/">Supreme Court: समलैंगिक विवाह, दोबारा सुनवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 14:55:22 +0530</pubDate>
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