<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/agriculture-news/tag-22694" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Agriculture News - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/22694/rss</link>
                <description>Agriculture News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Agriculture News: इस ठंड से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को लाभ होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[रतिया (सच कहूँ/तरसेम सैनी/शामवीर)। Agriculture News: क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड ने आमजन का जीवन प्रभावित कर दिया है। रविवार को सुबह धुंध तो जल्दी छंट गई, लेकिन धूप नहीं निकलने से ठंड का प्रकोप पूरे दिन बना रहा। ठंड इतनी अधिक है कि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-cold-is-expected-to-benefit-wheat-and-other-rabi-crops/article-79502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रतिया (सच कहूँ/तरसेम सैनी/शामवीर)।</strong> Agriculture News: क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड ने आमजन का जीवन प्रभावित कर दिया है। रविवार को सुबह धुंध तो जल्दी छंट गई, लेकिन धूप नहीं निकलने से ठंड का प्रकोप पूरे दिन बना रहा। ठंड इतनी अधिक है कि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं तथा जगह-जगह अलाव जलाकर आग सेंकते नजर आ रहे हैं। दीपक कुमार, हेमराज, विकास, प्रदीप और सुरेंद्र सहित कई नागरिकों ने बताया कि भले ही धुंध जल्दी छंट गई थी, लेकिन ठंड में कोई कमी नहीं आई। दोपहर में कुछ समय के लिए धूप जरूर खिली, परंतु उससे भी ठंड से राहत नहीं मिल सकी। हालांकि इस ठंड से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को लाभ होने की उम्मीद जताई जा रही है। Agriculture News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-cold-is-expected-to-benefit-wheat-and-other-rabi-crops/article-79502</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-cold-is-expected-to-benefit-wheat-and-other-rabi-crops/article-79502</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 17:11:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-12/agriculture-news.jpg"                         length="35712"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhaan Ki Ropai: धान की रोपाई शुरु, खेतों में जुटे श्रमिक और किसान</title>
                                    <description><![CDATA[कलायत सच कहूँ/अशोक राणा)। Agriculture News: बरसाती सीजन की शुरुआत होते ही कलायत क्षेत्र के किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं। खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे हैं। किसान पिछले कई दिनों से तैयारी कर बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब बिना मूसलाधार बारिश के ही खेतों में काम शुरु कर दिया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/workers-and-farmers-busy-in-rice-field-planting/article-72638"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/kalayat-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कलायत सच कहूँ/अशोक राणा)।</strong> Agriculture News: बरसाती सीजन की शुरुआत होते ही कलायत क्षेत्र के किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं। खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे हैं। किसान पिछले कई दिनों से तैयारी कर बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब बिना मूसलाधार बारिश के ही खेतों में काम शुरु कर दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई का सही समय 15 जून से 15 जुलाई तक है। पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हल्की बूंदाबांदी हो रही है। इससे खेतों में नमी आ गई है। इसी का फायदा उठाकर किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर उतार दिए हैं। Kalayat News</p>
<p style="text-align:justify;">कई किसानों ने पहले ही खेतों में ढैंचा और मूंग की बिजाई कर रखी थी। ऐसे खेतों को रोपाई से पहले तीन-चार दिन खुला छोड़ना पड़ता है। अब इन खेतों में पानी छोड़कर रोपाई शुरु कर दी गई है। धान की रोपाई शुरु होते ही ग्रामीण मजदूरों को भी काम मिल गया है। अगले डेढ़ महीने तक मजदूरों को लगातार काम मिलेगा। प्रवासी मजदूर भी कलायत पहुंचने लगे हैं। किसानों का कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र में रोपाई बिना प्रवासी मजदूरों के संभव नहीं है। Kalayat News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पाकिस्तान के खिलाफ तीन टी20 की मेजबानी करेगा बांग्लादेश" href="http://10.0.0.122:1245/bangladesh-to-host-three-t20-matches-against-pakistan/">पाकिस्तान के खिलाफ तीन टी20 की मेजबानी करेगा बांग्लादेश</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/workers-and-farmers-busy-in-rice-field-planting/article-72638</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/workers-and-farmers-busy-in-rice-field-planting/article-72638</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 16:25:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-06/kalayat-news-1.jpg"                         length="78506"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: गोलेवाला के किसान निर्मल सिंह ने दिखाई नई राह</title>
                                    <description><![CDATA[7 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत 17 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत पानी और बिजली की बचत के साथ जमीन की उर्वरता में हुआ सुधार बठिंडा (सच कहूँ/सुखजीत मान)। Bathinda News: फसल विविधिकरण के क्षेत्र में जहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/nirmal-singh-has-been-cultivating-sathi-moong-for-seven-years/article-71991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/bathinda-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">7 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction">17 वर्षों से कर रहे हैं साठी मूंग की खेती, किसानों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत</li>
<li class="ai-optimize-7">पानी और बिजली की बचत के साथ जमीन की उर्वरता में हुआ सुधार</li>
</ul>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा (सच कहूँ/सुखजीत मान)।</strong> Bathinda News: फसल विविधिकरण के क्षेत्र में जहां पंजाब के किसान अब भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं बठिंडा जिले के गांव गोलेवाला निवासी प्रगतिशील किसान निर्मल सिंह ने साठी मूंग की खेती को अपनाकर खेतीबाड़ी का एक नया और लाभदायक रास्ता दिखाया है। पिछले 17 वर्षों से वह गेहूं की कटाई के तुरंत बाद साठी मूंग की बुआई करते हैं और फिर बासमती व पछेती धान की फसल लगाते हैं। इस वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल पद्धति से उन्हें न केवल अतिरिक्त आमदनी मिल रही है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। Bathinda News</p>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;">इस वर्ष भी उन्होंने 11 एकड़ क्षेत्र में साठी मूंग की बुआई की है। मूंग की फसल 65 से 70 दिन में तैयार हो जाती है, जिससे गेहूं और धान की फसलों के बीच खाली समय का उत्पादक उपयोग हो पाता है। साठी मूंग औसतन प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल उत्पादन देती है और इसका बीज मात्र 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपलब्ध हो जाता है।<br />
बॉक्स</p>
<h3 class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">अगली फसल को ऐसे मिलती है प्राकृतिक खाद | Bathinda News</h3>
<p class="ai-optimize-10" style="text-align:justify;">निर्मल सिंह बताते हैं कि मूंग की फसल ना केवल उन्हें अतिरिक्त आमदनी देती है, बल्कि यह मिट्टी में जैविक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर अगली फसल के लिए प्राकृतिक खाद का कार्य भी करती है। इससे बासमती या पछेती धान की फसल में रासायनिक खादों की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है और उपज की गुणवत्ता भी सुधरती है। उनका कहना है कि मूंग लगाने वाले खेतों में धान की बुआई वह 20 जुलाई के बाद करते हैं, जिससे पानी और बिजली की खपत में भारी बचत होती है, जबकि फसल समय पर तैयार होकर बाजार में अच्छा मूल्य दिलाती है।</p>
<p class="ai-optimize-11"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Ring Road: खुशखबरी, हरियाणा के इन गांवों से गुजरेगा ये नया रिंग रोड, जमीन को होगा अधिग्रहण" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-this-new-ring-road-will-pass-through-these-villages-of-haryana-land-will-be-acquired/">Haryana Ring Road: खुशखबरी, हरियाणा के इन गांवों से गुजरेगा ये नया रिंग रोड, जमीन को होगा अधिग्रहण</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/nirmal-singh-has-been-cultivating-sathi-moong-for-seven-years/article-71991</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/nirmal-singh-has-been-cultivating-sathi-moong-for-seven-years/article-71991</guid>
                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 15:30:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-06/bathinda-news.jpg"                         length="106166"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: पांच एकड़ में बागवानी, दो लाख प्रति एकड़ कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)। Agriculture News: आधुनिक समय में मेहनत और सही तकनीक के साथ बागवानी से किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह कहना है यमुनानगर के खंड जगाधरी के गांव रतनगढ़ (नंदपूरा) के दसवीं पास प्रगतिशील किसान कमल काम्बोज का। सच कहूँ की टीम से विशेष बातचीत में कमल ने बताया कि उन्होंने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/gardening-in-five-acres-earning-two-lakhs-per-acre/article-69316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)।</strong> Agriculture News: आधुनिक समय में मेहनत और सही तकनीक के साथ बागवानी से किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह कहना है यमुनानगर के खंड जगाधरी के गांव रतनगढ़ (नंदपूरा) के दसवीं पास प्रगतिशील किसान कमल काम्बोज का। सच कहूँ की टीम से विशेष बातचीत में कमल ने बताया कि उन्होंने 2019 में पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की ओर कदम बढ़ाया। आज वह अपनी 10 एकड़ जमीन में से 5 एकड़ में बागवानी कर सभी खर्च निकालने के बाद 2 से ढाई लाख रुपये प्रति एकड़ सालाना कमा रहे हैं। इसके साथ ही, वह एक दर्जन से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उनके परिवारों के भरण-पोषण में भी योगदान दे रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विविधता और तकनीक का किया प्रयोग | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल काम्बोज ने बताया कि शुरूआत में उन्होंने 2 एकड़ में बेरी के बाग लगाए, लेकिन बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण फसल बदलनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने पिंक ताइवान किस्म के अमरूद का बाग लगाया, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलने लगा। वर्तमान में उनके 5 एकड़ के बाग में ढाई एकड़ में पिंक ताइवान अमरूद, आधा एकड़ में ड्रैगन फ्रूट, आधा एकड़ में नाशपाती, आधा एकड़ में आडू, एक एकड़ में लीची, 2 कनाल में अंजीर, 2 कनाल में बेरी और 2 कनाल में नींबू के पेड़ लगे हैं। बागवानी विभाग की तकनीकों का उपयोग कर वह कीटों से फसल को सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा, मौसमी फसलें जैसे लहसुन और सब्जियां लगाकर दोहरा लाभ कमाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ड्रैगन फ्रूट की खेती से बढ़ी उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल ने बताया कि बाजार में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती मांग को देखते हुए एक साल पहले आधा एकड़ में इसकी खेती शुरू की। यह विदेशी फल, जो सेंट्रल और साउथ अमेरिका के साथ मैक्सिको में मुख्य फसल है, डेढ़ साल में फल देना शुरू कर देगा। उनकी फसल अगले कुछ महीनों में पैदावार देगी। Agriculture News</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोजगार का साधन भी बनी बागवानी</h3>
<p style="text-align:justify;">कमल के मुताबिक, बागवानी मेहनत और मैनपावर की खेती है। वह अपने खेतों में 10 से 15 महिला-पुरुषों को नियमित रोजगार देते हैं, जिससे उनके परिवारों का पोषण होता है। उनकी फसलें यमुनानगर की सब्जी मंडी में ही अच्छे दामों पर आसानी से बिक जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि सरकार बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। अमरूद की फसल पर प्रति एकड़ 43 हजार रुपये की सब्सिडी तीन साल में तीन किश्तों (पहले साल 23 हजार, दूसरे-तीसरे साल 10-10 हजार) में दी जाती है। इसके अलावा, 2025-26 में आवारा पशुओं से बागों की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल पर 300 रुपये प्रति रनिंग मीटर के हिसाब से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से फल छेदक मक्खी से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करने और अधिक जानकारी के लिए जिला बागवानी कार्यालय से संपर्क करने की अपील की। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Madrid: स्पेन में शक्तिशाली तूफान के कारण गोदाम ढहने से तीन मौत" href="http://10.0.0.122:1245/three-killed-in-spain-warehouse-collapse-due-to-powerful-storm/">Madrid: स्पेन में शक्तिशाली तूफान के कारण गोदाम ढहने से तीन मौत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/gardening-in-five-acres-earning-two-lakhs-per-acre/article-69316</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/gardening-in-five-acres-earning-two-lakhs-per-acre/article-69316</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 15:28:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-04/agriculture-news.jpg"                         length="149164"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: परंपरागत खेती को छोड़ मशरूम उगाकर लखपति बना प्रहलाद सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prahlad-singh-earns-a-profit-of-twenty-lakh-rupees-annually-by-growing-mushrooms/article-69038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/agriculture-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)।</strong> Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान को सबके सामने ला रहे हैं, जो पारंपरिक खेती को त्यागकर मशरूम की खेती करके लखपति बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि मशरूम उत्पादन से गुरुग्राम के गांव डाबोदा के किसान प्रहलाद सिंह सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं। वे किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हुए हैं। किसान आधुनिक होगा और व्यवसायिक खेती की ओर अग्रसर होगा तो किसान की आय दोगुनी होने के साथ-साथ क्षेत्र में कृषि व बागवानी का चेहरा भी बदलेगा। यह बात गुरुग्राम के डाबोधा में रहने वाले किसान प्रहलाद सिंह ने सही साबित की है। प्रहलाद सिंह पहले परंपरागत खेती के रूप में बाजरा और गेहूं का उत्पादन कर रहे थे। जिसमें आमदनी ना के बराबर हो रही थी। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">खर्चा अधिक और उत्पादन कम होने से मुनाफा भी घटता जा रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आय दुगनी करने और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए व्यवसायिक खेती करने पर जोर देने के विचारों से प्रेरणा ली। तत्पश्चात जिला बागवानी अधिकारी नेहा यादव से जानकारी लेकर विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर मशरूम प्रोडक्शन यूनिट लगाने का प्लान किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">करीब 8 कनाल क्षेत्र में सेटअप किया तैयार | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रहलाद सिंह बताते हैं कि मशरूम उत्पादन के लिए उन्होंने करीब 8 कनाल क्षेत्र में पूरा सेटअप तैयार किया है। जिसमें मशरूम कपोस्ट व प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने में करीब 40 लाख रुपये की लागत आई है। जिला बागवानी विभाग द्वारा उसे 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी गयी है। बाकी राशि के लिए उसने बैंक से लोन लिया है। किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि उसने सरकारी मदद से कपोस्ट यूनिट व चार प्रोडक्शन यूनिट स्थापित की है। जिसमें प्रत्येक प्रोडक्शन यूनिट में 90 दिन का प्रोडक्शन सर्कल चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एक यूनिट से करीब 38 से 40 क्विंटल मशरूम उत्पादित किया जा रहा है। मार्किट में मशरूम का थोक भाव 140 से 150 रुपये किलो के करीब है। जिससे पूरे साल में चारों यूनिट से सभी खर्चों को घटाकर शुद्ध मुनाफे के रूप में 20 से 22 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। प्रहलाद सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश होलसेलर फार्म पर आकर ही मशरूम ले जा रहे हैं। इससे उन्हें बाजार में जाने की आवश्यकता भी नही है। उन्होंने बताया कि वे अभी गुरुग्राम व एनसीआर में अन्य बड़े फूड संस्थानों में डायरेक्ट डील के लिए प्रयासरत हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूनिट लगाने पर 40 से 85% तक की अनुदान राशि | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">किसानों को सिर्फ सकारात्मक प्रयास करने की जरूरत है। बागवानी विभाग उनकी हर संभव मदद को तैयार है। जिला में उद्यान विभाग हरियाणा द्वारा विभागीय स्कीम के तहत मशरूम कंपोस्ट व एक मशरूम प्रोडक्शन यूनिट की अधिकतम यूनिट कोस्ट 20 लाख निर्धारित की गई है। जिसमें जनरल कैटेगरी में 40 प्रतिशत व अनुसूचित जाति श्रेणी में 85 प्रतिशत राशि अनुदान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…" href="http://10.0.0.122:1245/arvind-kejriwals-problems-are-going-to-increase-after-losing-power-in-delhi/">Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prahlad-singh-earns-a-profit-of-twenty-lakh-rupees-annually-by-growing-mushrooms/article-69038</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prahlad-singh-earns-a-profit-of-twenty-lakh-rupees-annually-by-growing-mushrooms/article-69038</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 15:30:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-03/agriculture-news-1.jpg"                         length="110249"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: किचन गार्डनिंग से उगाई कई सब्जियां, बनाए 16 रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[खराब सब्जी खाने से तबियत बिगड़ती देखी तो किसान रणधीर सिंह ने अपनाई नई राह सवा 6 फुट की लौकी और 500 ग्राम की लहसून की गांठ उगा चुका है किसान कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Agriculture News: कृषि प्रधान भारत में कृषि विशेषज्ञ फल व सब्जियों सहित अन्य फसलों की नई-नई किस्में ईजाद कर रहे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/many-vegetables-grown-through-kitchen-gardening-created-sixteen-records/article-68186"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/agriculture-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">खराब सब्जी खाने से तबियत बिगड़ती देखी तो किसान रणधीर सिंह ने अपनाई नई राह</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सवा 6 फुट की लौकी और 500 ग्राम की लहसून की गांठ उगा चुका है किसान</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Agriculture News: कृषि प्रधान भारत में कृषि विशेषज्ञ फल व सब्जियों सहित अन्य फसलों की नई-नई किस्में ईजाद कर रहे हैं। वहीं फसल की अच्छी पैदावार लेने के लिए किसान अंधाधुंध पेस्टिसाइड का प्रयोग करते जा रहे हैं। इससे पैदावार जरूर बढ़ती है लेकिन ये फल-सब्जियां और अन्य फसलें से इंसान बीमार करते जा रहे हैं। लेकिन कुछ लोग लीक से हटकर कुछ अलग कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं किसान रणधीर, जो पिछले करीब 30 साल से प्राकृतिक खेती के जरिए किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">रणधीर सिंह का किचन गार्डन में लगाई गई सब्जी और अन्य फसलों के लिए 16 बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि मैंने 6 फुट 2 इंच की घिया (लौकी) तैयार की थी। जिसके चलते उनका नाम चार बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने लहसुन में भी दो बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। उन्होंने लहसुन की एक गांठ 500 ग्राम और 700 ग्राम की तैयार की थी, जिसके चलते उनका लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड मिला था। 1992 से किया किचन गार्डन शुरू किसान रणधीर सिंह ने बताया कि पहले वह कैथल के एक गाँव जाजनपुर में रहते थे, वहां पर स्कूल समय में उनकी खेती करने में काफी दिलचस्पी थी। इसके चलते उसने थोड़ी पढ़ाई करने के बाद ही 1972 में अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करनी शुरू की। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन बच्चे बड़े होने के बाद जब वह नौकरी पर लग गए तब वह गाँव को छोड़कर कुरुक्षेत्र में रहने लगे और जैसे ही वह सब्जी उगाते हैं ये फल-सब्जियां व् ा फसलें किसान रणधीर सिंह ने कहा कि उसने किचन गार्डन छोटे स्तर से शुरू किया था लेकिन अब उसके पास एक समय में आलू, टमाटर, गोभी, घिया, मटर, बंदगोभी, ब्रोकली, लहसुन, प्याज, पालक, मेथी, नींबू, चुकंदर, मूली, गाजर, धनिया, तोरी सहित करीब 35 सब्जियां हैं। इसके साथ वह जड़ी बूटी भी लगा चुके हैं। इसमें भी उन्होंने पुरस्कार हासिल किया हुआ है। जो बिल्कुल आॅर्गेनिक तरीके से तैयार की जाती है। इतना ही नहीं उन्होंने सब्जियों के साथ-साथ गन्ना और कई प्रकार के फल भी लगाए हुए हैं। यह फल और अन्य फसलें भी उन्होंने आॅर्गेनिक तैयार किए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सवा तीन किलो की अरबी भी उगाई | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर सिंह ने बताया कि करेला और शलगम की बेहतरीन फसल के लिए दो-दो बार उनका नाम लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इनके अलावा अरबी के लिए भी उनका लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड दर्ज हुआ, क्योंकि उन्होंने एक अरबी की गांठ 3 किलो 250 ग्राम की तैयार की थी। एक सतावर और दो रतालू के लिए लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज है।</p>
<p style="text-align:justify;">किचन गार्डन में प्राकृतिक तरीके से सब्जी तैयार करने में कुल 16 बार लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज हुआ। इसके अलावा अपने सब्जियों को लेकर हरियाणा और पंजाब किसान मेलों में 200 से अधिक बार प्रथम और द्वितीय पुरस्कार मिल चुके हैं। हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार के द्वारा रणधीर सिंह को कृषि रतन और राय बहादुर जैसे बड़े पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृषि अधिकारी ने बताए किचन गार्डनिंग के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">डीएचओ सत्यनारायण का कहना है कि सरकार सब्जी लगाने के इच्छुक लोगों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर किट उपलब्ध कराती है, जिसमें विभिन्न सब्जियों के बीज होते हैं, जिसे किसान अपने खेत या घर के आसपास छोटे जमीन के हिस्से में लगा सकते हैं। उन्होंने किचन गार्डनिंग के फायदे बताते हुए कहा कि अगर किसी के पास जगह है वह अपने घर के लिए कम खाद, दवाई इस्तेमाल करते हुए सब्जी उगा सकता है। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="डॉ. माधवी बोरसे इन्सां को भारत की टॉप 10 गेम चेंजर महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया है!" href="http://10.0.0.122:1245/dr-madhavi-borse-insan-has-been-selected-as-one-of-the-top-10-game-changer-women-of-india/">डॉ. माधवी बोरसे इन्सां को भारत की टॉप 10 गेम चेंजर महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया है!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/many-vegetables-grown-through-kitchen-gardening-created-sixteen-records/article-68186</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/many-vegetables-grown-through-kitchen-gardening-created-sixteen-records/article-68186</guid>
                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:24:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-03/agriculture-news.jpg"                         length="104821"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शीतलहर बढ़ने से सब्जियों की फसलों में हो सकता है नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Agriculture News: जनवरी माह मे शीतलहर चलने से सब्जियों की फसलों में नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता है। वहीं 14 व 15 जनवरी को बरसात की भी संभावना बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. सी.बी. सिंह के अनुसार मौसम का प्रभाव आमजन के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/vegetable-crops-may-be-damaged-due-to-increasing-cold-wave/article-66284"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/tomato.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। </strong>Agriculture News: जनवरी माह मे शीतलहर चलने से सब्जियों की फसलों में नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता है। वहीं 14 व 15 जनवरी को बरसात की भी संभावना बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. सी.बी. सिंह के अनुसार मौसम का प्रभाव आमजन के साथ सब्जियों की फसलों पर भी पड़ेगा। सब्जियों की ग्रोथ कम होने के साथ आमद भी प्रभावित होगी। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। उस दिन पाला पड़ने की ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए ऐसे दिनों में आलू, मिर्च, बैंगन व टमाटर इत्यादि फसलों को पाले से बचाने के लिए शाम के समय से ही फसल के इर्द गिर्द सूखे घास को सुलगा दें ताकि पाले का असर सब्जी की फसल पर न पड़े। उन्होने कहा कि इस मौसम में खेत को सूखा न रहने दें बल्कि खेतों में नमी की मात्रा बनाकर रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गेहूँ के लिए लाभकारी है सर्दी | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">डा. सीबी सिंह ने बताया कि सर्दी का मौसम यूं तो गेहूँ की फसल के लिए लाभकारी है लेकिन कोहरे के समय में जब प्रकाशसंश्लेषण नहीं हो पाता तो गेहूँ की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। जोकि मौसम के अनुसार अपने आप ठीक हो जाएंगी। ज्यादा कीटनाशकों के छिडकाव से फसल व खेतों में नुकसान होगा। मौसम में सुधार होने पर पीली हुई पत्तियां अपने आप ठीक हो जाती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन जिलों में चलेगी कोल्ड वेव</h3>
<p style="text-align:justify;">डा. सी.बी. सिंह ने कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग से मिली जानकारी अनुसार बताया कि सर्दी को लेकर मौसम विभाग भी लगातार अलर्ट जारी कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड पहले से अधिक बढ़ने वाली है। उन्होंने बताया कि धुंध के साथ ही हरियाणा के 7 जिलों में कोहरे के साथ कोल्ड वेव भी चलने वाली है। इनमें कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, अंबाला, जींद, पानीपत और सोनीपत शामिल हैं। आने वाले कुछ दिनों में पहाड़ी हवाओं और धुंध के कारण तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Supreme Court: समलैंगिक विवाह, दोबारा सुनवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला" href="http://10.0.0.122:1245/supreme-courts-big-decision-on-gay-marriage-re-hearing/">Supreme Court: समलैंगिक विवाह, दोबारा सुनवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/vegetable-crops-may-be-damaged-due-to-increasing-cold-wave/article-66284</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/vegetable-crops-may-be-damaged-due-to-increasing-cold-wave/article-66284</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 14:55:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-01/tomato.jpg"                         length="157186"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: परंपरागत खेती के साथ सब्जी उत्पादन करने वाले सफल किसान रविकांत</title>
                                    <description><![CDATA[पराली में आग नहीं लगाते,  हमेशा कृषि विभाग से जुड़े रहते हैं फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। Fazilka News: फाजिल्का जिले के गांव निहाल खेड़ा के किसान रवि कांत एक सफल किसान हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करते हैं। कृषि, उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में हमेशा रहने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ravikant-is-cultivating-vegetables-along-with-wheat-and-paddy-cultivation/article-65170"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/ghiya.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पराली में आग नहीं लगाते,  हमेशा कृषि विभाग से जुड़े रहते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। </strong>Fazilka News: फाजिल्का जिले के गांव निहाल खेड़ा के किसान रवि कांत एक सफल किसान हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करते हैं। कृषि, उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में हमेशा रहने वाले रविकांत गेहूं और धान की खेती के साथ सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">रवि कांत का कहना है कि परंपरागत फसलों से छह माह बाद आय होती है, जबकि सब्जी की खेती से प्रतिदिन आय होती है। उन्होंने अपने खेत में कई तरह की सब्जियां लगाई हैं. वह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा खोजे गए उन्नत किस्मों के बीज और पौध भी  पैदा करते हैं, जिन्हें वह अन्य किसानों को आपूर्ति करते हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">रविकांत कहते हैं कि उन्होंने अपने खेत में नए प्रयोग भी शुरू किए हैं. वह बिना जुताई के सब्जियों की खेती कर रहे हैं। वह बताते हैं कि अगर किसान को प्रगति करनी है तो उसे एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई विकल्प तैयार करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रवि कांत जहां सब्जियों की खेती करते हैं, वहीं वह गेहूं और धान की भी खेती करते हैं और वह कई सालों से पराली को बिना जलाए उसका रख-रखाव कर रहे हैं। रवि कांत का कहना है कि ऐसा करने से उनकी भूमि की उर्वरता बढ़ी है और मिट्टी में सुधार हुआ है। उनका कहना है कि किसानों को फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिए बल्कि उसे किसी तरह खेत में ही इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे सब्जियों और बगीचों में पुआल डालकर मल्चिंग की जा सकती है या उसे खेत में दबाने से मिट्टी में कार्बनिक मादा की मात्रा बढ़ती है और जमीन की ताकत बढ़ती है। उनकी सलाह है कि किसानों को कृषि और बागवानी विभाग के संपर्क में रहकर नई तकनीक सीखनी चाहिए और जरूरत के मुताबिक अपनी खेती में लगातार बदलाव करते रहना चाहिए। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab Winter Holidays: पंजाब वासियों के लिए बड़ी खबर, सर्दियों की छुट्टियों का हुआ ऐलान, जानें कब से कब तक रहेंगे बंद" href="http://10.0.0.122:1245/winter-holidays-declared-in-all-government-and-private-schools-of-punjab/">Punjab Winter Holidays: पंजाब वासियों के लिए बड़ी खबर, सर्दियों की छुट्टियों का हुआ ऐलान, जानें कब से…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ravikant-is-cultivating-vegetables-along-with-wheat-and-paddy-cultivation/article-65170</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ravikant-is-cultivating-vegetables-along-with-wheat-and-paddy-cultivation/article-65170</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 15:15:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-12/ghiya.jpg"                         length="77148"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: ठेके पर जमीन लेकर मौसमी सब्जियां लगाकर कमा रहा है 10 लाख सालाना</title>
                                    <description><![CDATA[नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। Agriculture News: आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो कमाई करने के लिए विपरीत परिस्थितियां भी सामने नहीं आती। गांव नाथुसरी कलां के किसान रामस्वरूप चौहान ने चार साल पहले ठेके पर 4 एकड़ जमीन लेकर सब्जियां लगाकर कमाई का जरिया खोजा। चार साल से ठेके पर जमीन लेकर उसमें […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/by-taking-land-on-contract-he-is-earning-ten-lakh-rupees-annually-by-planting-seasonal-vegetables/article-64500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/vegetable.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> Agriculture News: आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो कमाई करने के लिए विपरीत परिस्थितियां भी सामने नहीं आती। गांव नाथुसरी कलां के किसान रामस्वरूप चौहान ने चार साल पहले ठेके पर 4 एकड़ जमीन लेकर सब्जियां लगाकर कमाई का जरिया खोजा। चार साल से ठेके पर जमीन लेकर उसमें मौसमी सब्जी घीया, तोरी, तरकाकड़ी, मूली, खरबूजा, तरबूज, करेला, बैंगन आदि की बिजाई मौसम के अनुसार करते हैं और करीब 10 लाख रुपए सालाना कमाई कर रहे हैं। इस समय मूली, बैंगन की अच्छी पैदावार हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चार साल पहले शुरू की ठेके पर जमीन लेकर सब्जी की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">रामस्वरूप चौहान ने बताया कि पहले घर के खाली पड़े प्लाट में सब्जियां लगते थे उससे थोड़ी बहुत कमाई हो जाती थी। उन्हें सब्जियों के बारे में अच्छी जानकारी हो गई। फिर बड़े लेवल पर सब्जियां लगाने का विचार किया लेकिन खुद की जमीन नहीं होने के कारण जमीन ठेके पर लेकर सब्जी की खेती करने का मन बनाया। चार साल पहले चार एकड़ जमीन ठेके पर ली और तोरी, तरकाकड़ी, खरबूजा, तरबूज आदि लगाए उससे आमदनी शुरू हो गई। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने अपनों को गांव में एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने बताया कि वह 40 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर लेता हैं। उसमें पहली छमाही में तोरी, तरकाकड़ी, खरबूजा, तरबूज की बिजाई करते हैं और उसके बाद घीया, तोरी, मूली, बैंगन आदि की बिजाई कर कमाई हो जाती है। जिससे उन्हें पहले साल काफी अच्छा मुनाफा हुआ। अब हर साल करीब 2 लाख रुपए से ज्यादा प्रति एकड़ के हिसाब से कमाई होने लगी। जिससे उसके परिवार का पालन पोषण अच्छी तरह से हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि नाथूसरी कलां, तरकांवाली, चोपटा तथा निकटवर्ती गांवों के लोग उनके खेत की सब्जियां काफी पसंद करते हैं। आधुनिक तरीके से खेती करके किसान रामस्वरूप चौहान अन्य किसानों का प्रेरणा स्रोत बन गया है। ठेके पर जमीन लेने की कारण नही मिल पाता सरकारी योजनाओं का लाभ। किसान रामस्वरूप चौहान ने बताया कि उसके खुद की जमीन नहीं है और ठेके पर लेकर सब्जियां लगाता है। जिस कारण से उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। उसे ना तो डिग्गी की सब्सिडी मिल पाती और ना ही ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करने का अनुदान मिल पाता। इसके अलावा सब्जियां खराब होने पर मुआवजा भी नहीं मिलता। लेकिन अपनी मेहनत के बल पर भी वह अच्छी कमाई कर रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नजदीक विकसित हो सब्जी की मंडी | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">रामस्वरूप चौहान ने बताया कि उसके क्षेत्र के आस पास सब्जी व फ्रूट की मंडी न होने के कारण अन्य स्थानों पर ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। उन्होंने बताया कि अब तो आस पास के किसानों का रूझान भी सब्जी लगाने की ओर बढने लगा है। जिससे परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई होने लगी है। उसका कहना है कि अगर सब्जी की मंडी चोपटा या नजदीक में स्थापित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Winter Tips: सर्दी में बुखार, खासी व जुकाम ठीक करने के लिए प्रभावी घरेलू तरीके" href="http://10.0.0.122:1245/effective-home-remedies-to-cure-fever-cough-and-cold-in-winter/">Winter Tips: सर्दी में बुखार, खासी व जुकाम ठीक करने के लिए प्रभावी घरेलू तरीके</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/by-taking-land-on-contract-he-is-earning-ten-lakh-rupees-annually-by-planting-seasonal-vegetables/article-64500</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/by-taking-land-on-contract-he-is-earning-ten-lakh-rupees-annually-by-planting-seasonal-vegetables/article-64500</guid>
                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 16:55:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-11/vegetable.jpg"                         length="78634"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि से क्यों विमुख हो रहे हैं किसान?</title>
                                    <description><![CDATA[Farmers News: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ एवं बड़े स्तर पर लोगों को आजीविका देने का माध्यम कृषि दुरावस्था से ग्रसित है जिसके चलते सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत किसान इसे छोड़ना चाहते हैं, 27 प्रतिशत इसे लाभप्रद नहीं मानते और 8 प्रतिशत इसे खतरों भरा स्वीकारते हैं। इसी की चरमावस्था के चलते महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/why-are-farmers-turning-away-from-agriculture/article-60471"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/agriculture.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmers News: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ एवं बड़े स्तर पर लोगों को आजीविका देने का माध्यम कृषि दुरावस्था से ग्रसित है जिसके चलते सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत किसान इसे छोड़ना चाहते हैं, 27 प्रतिशत इसे लाभप्रद नहीं मानते और 8 प्रतिशत इसे खतरों भरा स्वीकारते हैं। इसी की चरमावस्था के चलते महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से लेकर पूरे भारत भर के किसान, साहूकारों के कर्ज तले दबकर मृत्यु को वरण कर रहे हैं। यह सबके लिए चिंताजनक है। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">भारत एक कृषि प्रधान देश है। आज से कई हजार वर्ष पूर्व से यही काम-धंधा इस देश में होता आ रहा है। पहले यह माना जाता था कि किसी भी प्रकार का खेती करने वाला किसान कभी भूखा मर नहीं सकता। तब यह कहावत थी-उत्तम खेती, मध्यम बान, नीच चाकरी, भीख निदान’ यह विडम्बना है कि पहले जो खेती उत्तम मानी जाती थी, अब ठीक विपरीत स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले संयुक्त परिवार का प्रचलन था इसलिए खेत बड़े-बड़े थे। जोत की भूमि अधिक थी। महंगाई नहीं थी। सस्ते का जमाना था। सस्ते में मजदूर मिल जाते थे। कृषि के साथ पशु पालन भी था जिसका दूध परिवार के व गोबर र्इंधन व खाद बन खेत के एवं बैल खेती के काम आते थे। कृषि उत्पाद परिवार एवं मजदूरों के तथा अवशिष्ट पालतू पशुओं एवं खाद के काम आता था। खेती की गांव की ओर से सामूहिक रखवाली होती थी, इसलिए अधिक बार एवं अधिक समय खेत से अधिक फसल उत्पादन लिया जाता था। पशुओं के लिए गांव-गांव में गोचर भूमि थी। इनके लिए गांव की ओर से चरवाहा हुआ करता था। तब कृषि के किसी कार्य के लिए भी किसान धन हेतु साहूकार के फेर में नहीं पड़ता था। ऐसी आवश्यकता भी नहीं पड़ती थी। कृषि उत्पाद परिवार के, मजदूर के, बीज के सब काम आ जाते थे। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">तब जैसी स्थिति अब नहीं रही। संयुक्त परिवार पुरानी बात हो गई। परिवार बंटते गए। खेत टुकड़ों में छोटे होते गए। खेती की जोत भूमि कम होने लगी। पशुपालन बीते दिनों की बात हो गई। यह भी विडंबना की बात है किसान खुद अपने खेत से सब्जियां नहीं ले रहे, वे भी आजकल शहरों की मंडियों से सब्जियां खरीद रहे हैं। घर में मनुष्य के रहने के लिए जगह कम पड़ने लगी। विवश किसान बीज, खाद एवं खेती के लिए धन हेतु दर-दर भटकने लगा। दिन-ब-दिन भू-जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। बीज उत्पादकों के लुभावने प्रचार विज्ञापन से प्रभावित किसान ठीक विपरीत उसके उत्पादन विपदा के आखेट होने लगे। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का युग, महंगे बीज, महंगी खाद व महंगी मजदूरी के चलते खेती महंगी हो गई। कृषि उत्पाद महंगा हुआ पर मूल्य उसके अनुसार नहीं रहा। यह विचित्र स्थिति है कि सभी उत्पादकों के उत्पादक अपने उत्पाद का मूल्य स्वयं निर्धारित करते हैं। भारत में किसान अपने कृषि उत्पाद व्यापारियों, दलाल, बिचौलिए, कोचिए तथा साहूकार के हाथों उनके मनमाफिक मूल्य अनुसार देकर, बेचकर घाटा उठाता है। पर्यावरणिक बदलाव के चलते कहीं अधिक वर्षा तो कहीं कम वर्षा से किसान की उपज, खेत, मेहनत, धन, श्रम सब बर्बाद हो रहा है। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ राज्यों में किसानों को मुफ्त बिजली मिलती है पर वह अव्यवस्था व लो वोल्टेज की शिकार है। सिंचाई अभाव से एक फसल ले पाना कठिन हो गया है। इससे वर्ष भर आजीविका चला पाना कठिन हो गया है। क्या किसानों को इस त्रासदी से मुक्ति मिल पायेगी? किसानों को भी चाहिए कि वे अब पारंपरिक फसलों की तरफ ध्यान हटाकर नई तकनीक से खेती करें। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह व मिट्टी की नियमित जांच करवाते रहें। अब जरूरत है कि केंद्र व राज्य सरकारों को तालमेल स्थापित कर नए सिरे से रणनीति बनानी होगी, ताकि कृषि एक बार फिर लाभदायक पेशा बन सके।<br />
<strong>                                                                 लेखक: डॉ. संतोष द्विवेदी (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PMFBY: खरीफ फसलो का 31 जुलाई से पहले करवा ले फसल बीमा" href="http://10.0.0.122:1245/get-crop-insurance-for-kharif-crops-done-before-thirty-first-july/">PMFBY: खरीफ फसलो का 31 जुलाई से पहले करवा ले फसल बीमा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/why-are-farmers-turning-away-from-agriculture/article-60471</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/why-are-farmers-turning-away-from-agriculture/article-60471</guid>
                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 16:31:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/agriculture.jpg"                         length="29124"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Transplantation of paddy: जिले में 1.55 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई होंने का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[धीरे धीरे करे धान की रोपाई: कृषि विशेषज्ञ, 3 शिफ्ट में होगी बिजली सप्लाई कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। जिले में किसानों ने धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया है। जिले में इस बार 1.55 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई होंने का अनुमान है। बारिश न होने से इस बार बिजली निगम की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-estimated-that-paddy-will-be-planted-in-1-55-lakh-hectares-in-the-district/article-58786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/kaithal-agriculture.jpg" alt=""></a><br /><h3>धीरे धीरे करे धान की रोपाई: कृषि विशेषज्ञ, 3 शिफ्ट में होगी बिजली सप्लाई</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> जिले में किसानों ने धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया है। जिले में इस बार 1.55 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई होंने का अनुमान है। बारिश न होने से इस बार बिजली निगम की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। क्योकि धान की रोपाई के लिए किसान अब पूरी तरह बिजली निगम पर ही निर्भर है। निगम द्वारा खेतों में रोपाई के लिए बिजली सप्लाई करने का शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसके तहत अब खेतों में धान रोपाई के लिए बिजली सप्लाई 3 चरणों में दी जाएगी, क्योंकि धान की रोपाई के लिए खेतों में पानी की भरने के लिए बिजली की आवश्यकता होगी। Kaithal News</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि विशेषज्ञों का कहना अभी बारिश नहीं हुई है और धान रोपाई शुरू हो गयी है। इस सीजन में पानी की अधिक खपत होती है। किसान बारिश होने तक थोड़ा-थोड़ा करके धान रोपाई करें ताकि जो धान लगाई जा रही है उसे पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे। किसान धान की पनीरी को भी सूखा न छोड़े। तेज धूप व गर्मी के कारण धान की पनीरी पर असर पड़ता है। पनीरी में शाम के समय ही पानी दे। वहीं किसानो का कहना है कि पिछले वर्ष 1121 किस्म की फसल 5000 रुपए प्रति क्विंटल व 1509 किस्म की फसल 4000 रुपए प्रति क्लिंटल में बिकी थी। इन किस्मों की फसलों के लिए किसानों ने पहले ही पनीरी की बिजाई कर रखी है। इस बार भी उन्हें अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">8-8 घंटे की तीन शिफ्ट में आएगी सप्लाई</h3>
<p style="text-align:justify;">धान रोपाई के लिए ग्रामीण क्षेत्र में खेतों के लिए 15 जून से बिजली सप्लाई के लिए निगम ने शेड्यूल बना दिया है। जोकि धान रोपाई के पूरे सीजन यानि लगभग सितंबर महीने तक चलने की संभावना है। यह कदम निगम ने किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए उठाया है। बिजली निगम से मिली जानकारी के अनुसार 8-8 घंटे के 3 ग्रुप बनाये गये है जिनमे किसानो को निरंतर बिजली सप्लाई दी जाएगी। Kaithal News</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिजली खपत पहुंची 1 करोड़ 29 लाख</h3>
<p style="text-align:justify;">धान का सीजन शुरू होते ही खेतो में लगातार ट्यूबवेल चलने से बिजली लोड बढ़ गया है । अब प्रतिदिन के हिसाब से बिजली की खपत रविवार को 1 करोड़ 29 लाख यूनिट पहुँच गयी है। पिछले साल 16 जून को बिजली खपत 1 करोड़ 5 लाख थी। पिछले साल से 24 लाख यूनिट प्रतिदिन के हिसाब से इस बार अधिक बिजली खपत हो रही है। इसका एक कारण यह भी है कि गर्मी से राहत पाने के लिए लोग 24 घंटे ए.सी. कूलर का लगातार प्रयोग कर रहे है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सप्लाई के लिए निगम की तैयारी पूरी: कुलदीप नैन</h3>
<p style="text-align:justify;">बिजली निगम कैथल के एसडीओ कुलदीप नैन का कहना है कि धान रोपाई के चलते सप्लाई को लेकर पूरी तैयारी की गई है। खेतों में पुरे 8 घंटे बिजली सप्लाई दी जाएगी। खेतों में धान की रोपाई शुरू हो गई है। किसानों को किसी प्रकार की पेरशानी नहीं आनी दी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1.55 लाख हेक्टेयर में धान का अनुमान</h3>
<p style="text-align:justify;">15 जून से धान की रोपाई किसान शुरू हो गयी हैं। इस बार 1.55 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई होंने का अनुमान है , जबकि धान की सीधी बिजाई का भी लक्ष्य रखा हुआ है। किसान रोपाई से पहले अपने खेतों को समतल कर लें। बारिश न होने के चलते और गर्मी ज्यादा होने के कारण खेतों में पानी का विशेष ध्यान रखें। Kaithal News</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-बलवंत सहारण, कृषि उपनिदेशक, कैथल ।</strong></p>
<p><a title="Heatwave Update Today: देश का पारा रिकॉर्ड उच्च स्तर पर, लद्दाख से झारखंड तक जान लेने वाली गर्मी!" href="http://10.0.0.122:1245/the-countrys-heatwave-is-at-a-record-high/">Heatwave Update Today: देश का पारा रिकॉर्ड उच्च स्तर पर, लद्दाख से झारखंड तक जान लेने वाली गर्मी!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-estimated-that-paddy-will-be-planted-in-1-55-lakh-hectares-in-the-district/article-58786</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-estimated-that-paddy-will-be-planted-in-1-55-lakh-hectares-in-the-district/article-58786</guid>
                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 18:03:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-06/kaithal-agriculture.jpg"                         length="72794"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरसा की बहू बनी किसानों के लिए रोल मॉडल</title>
                                    <description><![CDATA[खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। Agriculture News: ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’ के कथन को सार्थक कर दिखाया है रानियां क्षेत्र के गांव चक्कां निवासी प्रियंका धर्मपत्नी इन्द्रसेन बरावड़ ने। प्रियंका एक साधारण व मध्यम वर्गीय परिवार की सदस्य है, जो अपने पति इन्द्रसेन के साथ लम्बे समय से परम्परागत खेती कर रही थी। लेकिन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sirsa-daughter-in-law-became-a-role-model-for-farmers/article-57382"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/sirsa-news-7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। </strong>Agriculture News: ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’ के कथन को सार्थक कर दिखाया है रानियां क्षेत्र के गांव चक्कां निवासी प्रियंका धर्मपत्नी इन्द्रसेन बरावड़ ने। प्रियंका एक साधारण व मध्यम वर्गीय परिवार की सदस्य है, जो अपने पति इन्द्रसेन के साथ लम्बे समय से परम्परागत खेती कर रही थी। लेकिन हर साल कम बारिश और भूमिगत लवणीय पानी के चलते नरमा, कपास व ग्वार जैसी खेती से केवल जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति ही बड़ी मुश्किल से हो पा रही थीे, उधर परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा था। इससे परेशान होकर प्रियंका ने पति इन्द्रसेन की सहमति से परम्परागत खेती छोड़कर सब्जी उगाने की ठानी। वर्तमान में प्रियंका मात्र एक एकड़ में आॅर्गेनिक सब्जी लगाकर नरमा व कपास से ज्यादा मुनाफा कमा रहा है। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका ने बताया कि गांव के नजदीक उनके पास मात्र एक एकड़ जमीन है, जो पूर्णत: रेतीला टीला है, जहां पर भूमिगत पानी भी खारा व लवणीय है। पहले साल केवल भिंडी व कक्कड़ी की खेती की, जिससे तीन महीनों में 50 हजार रूपयों की बचत हुई। अच्छा मुनाफा देखकर उसका हौसला बढ़ गया और इस बार उन्होंने मिर्च, भिंडी, टिण्डी, कक्कड़ी, लोकी, तोरी व बंगा आदि सब्जी लगाई हुई है, जिनकी पैदावार शुरू हो चुकी है। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका का मानना है कि अगर इस बार मौसम ने साथ दिया तो उन्हें मात्र छह महीनों में ही करीब सवा से डेढ़ लाख रूपये तक की पैदावार होने की उम्मीद है। हालांकि नई खेती का अनुभव ना होने के चलते उन्हें थोड़ी दिक्कत आ रही है। उन्होंने बताया कि सब्जियों में लगने वाली बीमारियों, पौधों की बढ़वार व पैदावार और देखरेख के तरीकों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अगर समय रहते सही उपाय ना किया जाए तो बड़ा नुकसान का सामना भी करना पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऑर्गेनिक व जहरमुक्त सब्जियों का स्वाद ही अलग | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका के पति इन्द्रसेन ने बताया कि वे कृषि विभाग रानियां से समय-समय पर आॅर्गेनिक खेती की बढ़वार, पैदावार, देखरेख, बोने व काटने के नए तरीकों, समय परिवर्तन के साथ पड़ने वाली मौसमी बीमारियों व उनके रोकथाम के लिए की जानकारी लेते रहते हैं। जिसके लिए वह गौबर, गौमूत्र, नीम की पत्तियां, छाछ, हल्दी, गुड़ इत्यादि का मिश्रण बनाकर समय-समय पर छिड़काव करता है। जिससे सभी सब्जियां शुद्ध आॅर्गेनिक व विषमुक्त होती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेतों से ही खरीदने पहुंच जाते हैं ग्राहक</h3>
<p style="text-align:justify;">ऑर्गेनिक होने के कारण सब्जी थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन ज्यादातर ग्राहक सब्जियां खेत से ही लेकर जाते हैं। जिसके लिए ज्यादा पैसा व मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। कई बार सब्जी की लागत कम व पैदावार अच्छी होने पर उन्हें रानियां, जीवन नगर, ऐलनाबाद या सिरसा सब्जी मंडी में बेचनी पड़ती हंै। जिससे समय, मेहनत व यातायात खर्च बढ़ जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र के लिए योजनाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">यदि आपके पास खेती-बाड़ी करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो आप सरकार से सहायता ले सकते हैं। खेती के लिए सरकार कई योजनाओं के तहत किसानों को धन देती है। इन योजनाओं के तहत किसानों को लोन, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>किसान क्रेडिट कार्ड:</strong> किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होता है। यह किसानों को खेती उपकरण, बीज, खाद, सिंचाई आदि की खरीदी के लिए सहायता प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फसल बीमा योजना:</strong> यह योजना किसानों को फसल के नुकसान की स्थिति में मुआवजा प्रदान करती है. यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, अदृश्य कारणों, और अन्य अज्ञात स्थितियों से होने वाली फसल की हानि के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>राष्ट्रीय कृषि मिशन:</strong> राष्ट्रीय बागवानी मिशन ऐसी योजना है जिसके तहत किसानों को बागवानी फसलों की खेती करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन का लाभ लेने के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग में अप्लाई कर सकते हैं। Sirsa News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शिखर शिक्षा सदन के बच्चों ने मातृ दिवस पर बनाए सुन्दर कार्ड" href="http://10.0.0.122:1245/children-of-shikhar-shiksha-sadan-made-beautiful-cards-on-mothers-day/">शिखर शिक्षा सदन के बच्चों ने मातृ दिवस पर बनाए सुन्दर कार्ड</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sirsa-daughter-in-law-became-a-role-model-for-farmers/article-57382</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sirsa-daughter-in-law-became-a-role-model-for-farmers/article-57382</guid>
                <pubDate>Sat, 11 May 2024 17:54:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-05/sirsa-news-7.jpg"                         length="132932"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        