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                <title>Cotton Crop - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Cotton Crop RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Agriculture News: गुलाबी सुंडी के खतरे को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को किया अलर्ट, जारी की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में नरमा की फसल फूलों की अवस्था में पहुंचने के साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को गुलाबी सुंडी के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय रहते कीट की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण अपनाकर फसल को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agriculture-news-agriculture-department-alerts-farmers-regarding-the-threat-of/article-87772"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/pink-bollworm-alert.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Pink Bollworm Alert: फतेहाबाद। जिले में नरमा की फसल फूलों की अवस्था में पहुंचने के साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को गुलाबी सुंडी के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय रहते कीट की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण अपनाकर फसल को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है। सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. जागीर सिंह और कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों ने बताया कि किसान नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करें। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी सुंडी से प्रभावित फूल फिरकीनुमा या गुलाबनुमा दिखाई देते हैं, जो इसके शुरूआती प्रकोप का संकेत हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत के अलग-अलग हिस्सों से 100 फूलों की जांच करें। यदि इनमें 5 से 10 फूल प्रभावित मिलें तो तुरंत अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। इसके लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी की 100 ग्राम प्रति एकड़ या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 600 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कृषि अधिकारियों ने कहा कि पिछले वर्ष की नरमा फसल की बनछटियों को खेतों के आसपास खुला न छोड़ें। उन्हें अच्छी तरह ढक दें तथा अधखिले या सुंडी से प्रभावित टिंडों को एकत्र कर नष्ट कर दें, ताकि कीट का जीवन चक्र टूट सके और इसका फैलाव रोका जा सके। Agriculture News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>सावधानी बरतें किसान: बरसात के बाद नरमा-कपास में हो सकता है बीमारियों का प्रकोप</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे करें गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, जड़ गलन व हरा चेपा बीमारी की रोकथाम ओढां/सरसा (सच कहूँ/राजू)। Kisan News: मॉनसून ने दस्तक दे दी है। बरसात के बाद नरमा-कपास की फसल में सुंडी, सफेद मक्खी, जड़ गलन व हरा चेपा की शिकायतें सामने आने लगी हैं, जिनमें मुख्यत: जड़ गलन व सफेद मक्खी की समस्या […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/there-may-be-an-outbreak-of-diseases-in-cotton-after-the-rain/article-59439"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/odhan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ऐसे करें गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, जड़ गलन व हरा चेपा बीमारी की रोकथाम</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां/सरसा (सच कहूँ/राजू)। </strong>Kisan News: मॉनसून ने दस्तक दे दी है। बरसात के बाद नरमा-कपास की फसल में सुंडी, सफेद मक्खी, जड़ गलन व हरा चेपा की शिकायतें सामने आने लगी हैं, जिनमें मुख्यत: जड़ गलन व सफेद मक्खी की समस्या अधिक है। इनकी रोकथाम के लिए किसान क्या-क्या कदम उठाएं और क्या सावधानियां बरतें इस बारे कृषि विभाग ओढां के सहायक तकनीक अधिकारी पवन कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी सांझा की। विभागीय आंकड़े के मुताबिक, इस बार ओढां खंड में 36 हजार एकड़ में नरमा, 300 एकड़ में कपास, 29 हजार एकड़ में ग्वार व 2 हजार एकड़ में समर मूंग की बिजाई हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन कुमार ने बताया कि बरसात के बाद नरमा-कपास की फसल में सफेद मक्खी व जड़ गलन की समस्या काफी बढ़ जाती है। इसकी रोकथाम के लिए सबसे पहले तो किसान को उचित जानकारी व सही मार्गदर्शन की जरूरत है। देखा जाता है कि किसान दुकानदार पर आश्रित होकर महंगे कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान तो होता ही है, साथ ही बीमारी भी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो पातीं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जड़ गलन में करें कार्बेडाइजिम का प्रयोग | Kisan News</h3>
<p style="text-align:justify;">बरसात के बाद नरमे-कपास में जड़ गलन की समस्या सामने आती है। ऐसा अधिक नमी की वजह से होता है। खेत से बरसाती पानी की निकासी का प्रबंध करें। जड़ गलन रोग से ग्रस्त पौधे को उखाड़कर जमीन में दबा दें। जो उसके नजदीक स्वस्थ पौधे हैं, उनमें एक मीटर तक कार्बेडाइजिम (50 प्रतिशत) 400 ग्राम 200 लीटर पानी में डालकर पौधे की जड़ों में डालें। छिड़काव के समय स्प्रै पंप के मोटे फव्वारे का प्रयोग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जड़ गलन के मामले में मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं। वहीं उन्होंने पत्ता मरोड़ रोग के बारे में बताया कि या रोग विषाणुओं द्वारा फैलता है। सफेद मक्खी इस रोग को फैलाने में सहायक का रोल अदा करती है। इसलिए सफेद मक्खी पर नियंत्रण करना जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सफेद मक्खी पर ऐसे करें नियंत्रण</h3>
<p style="text-align:justify;">जुलाई माह में नरमा-कपास की फसल में सफेद मक्खी व हरा तेला का प्रकोप भी शुरू हो जाता है। सफेद मक्खी यदि 6-8 प्रौढ़ प्रति पत्ता एवं हरा तेला यदि 2 शिशु प्रति पत्ता मिलते हैं तो फ्लॉनिकामिड़ उलाला 50 डब्लूजी दवा 60 ग्राम 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। पहले किसान निम्बीसिडीन या अचुक दवा की 5 मि.ली मात्रा प्रति लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। Kisan News</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेतों में फेरोमॉन ट्रेप का प्रयोग करें</h3>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी सुंडी के प्रकोप की निगरानी फसल के 40-45 दिन होने के बाद लगातार करें। जहां पर नरमे की फसल के आसपास पिछले वर्ष के नरमे की बनछटियां रखी हुई हैं या उनके नजदीक कहीं कपास की जीनिंग व बिनौलो से तेल निकालने वाली मिल लगती है, उन खेतों के किसानों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इन खेतों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप पहले से ही अधिक होता है। क्योंकि गुलाबी सुंडी</p>
<p style="text-align:justify;">अधखिले टिंडों में नरमे के बिनौलो एवं भंडारित बनछटियों में निवास करती है। इसलिए बनछटियों का भंडारण नरमे की फसल से दूर करें। बनछटियों से टिंडे एवं पत्ते झाड़कर नष्ट कर दें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पानी निकासी का प्रबंध करें | Kisan News</h3>
<p style="text-align:justify;">अधिक बरसात या कई दिनों तक बारिश के कारण कई बार फसलों में पानी लंबे समय तक खड़ा रहता है। किसान पहले तो पानी की निकासी का प्रबंध करें। अगर संभव न हो पाए तो 10 किलोग्राम दानेदार सल्फर मिट्टी में मिलाकर छिड़क दें। जिससे भूमि के रोम (छिद्र) खुल जाएंगे और भूमि पानी को सोखने में सक्षम हो जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Protest against Drug Trade : नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ किया पुलिस चौकी में प्रदर्शन" href="http://10.0.0.122:1245/protest-against-drug-trade/">Protest against Drug Trade : नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ किया पुलिस चौकी में प्रदर्शन</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/there-may-be-an-outbreak-of-diseases-in-cotton-after-the-rain/article-59439</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 17:11:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Gulabi Sundi: कपास की फसल मे गुलाबी सुंडी की जांच करने ढुकड़ा पहुंची कृषि विभाग की टीम, नहीं दिखा गुलाबी सूँडी का प्रकोप</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फ़रीदाबाद की टीम ने किया निरीक्षण चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। Sirsa News: क्षेत्र के गाँव ढुकड़ा मे पिछले दिनों किसानों ने कपास की फसल पर गुलाबी सूँडी का प्रकोप बताकर फसल को नष्ट कर दिया था। इसको लेकर कृषि विभाग की टीम ने ढुकड़ा के खेतों में निरीक्षण किया। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-team-of-agriculture-department-reached-dhukda-to-check-the-pink-caterpillar-in-the-cotton-crop/article-59366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/chopta-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फ़रीदाबाद की टीम ने किया निरीक्षण</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> Sirsa News: क्षेत्र के गाँव ढुकड़ा मे पिछले दिनों किसानों ने कपास की फसल पर गुलाबी सूँडी का प्रकोप बताकर फसल को नष्ट कर दिया था। इसको लेकर कृषि विभाग की टीम ने ढुकड़ा के खेतों में निरीक्षण किया। यह जानकारी देते हुए कृषि विकास अधिकारी शैलेंद्र सहारण ने बताया कि कृषि मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फ़रीदाबाद से आई हुई टीम सुनील चंद्रा, सहायक निदेशक, लक्ष्मी चंद, वनस्पति संरक्षण अधिकारी और सूरज बरनवाल, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी व कृषि विभाग नाथूसरी चोपटा कृषि विकास अधिकारी शैलेंद्र सहारण पौध संरक्षण अधिकारी सन्त लाल बेनीवाल, मदन लाल, सुरेंद्र</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीवाइजर द्वारा गाँव-दुकड़ा, के किसान नरसी पुत्र टोडर मल, दलबीर पुत्र मुंशी राम व राजकुमार के खेत में “कपास के खेत मे गुलाबी सूँडी का हमला और 40 फीसदी तक फसल बर्बाद” सर्वेक्षण करा गया और पाया गया कि गुलाबी सूँडी का प्रकोप अभी कपास पर बिल्कुल भी नहीं है। और इस पर कपास की खेती करने वाले किसानों को यह सलाह भी दी गई की जिन किसानों ने अपने खेत मे नरमे की लकड़ियों को भंडारित कर रखा है, उन किसानों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इन किसानों के खेतों मे गुलाबी सूँडी का प्रभाव अधिक होता है इसके अलावा उन्हे सुझाव दिया जाता है कि नरमे की लकड़ियों को खेत मे इकट्ठा ना करे और अगर करते है तो उन्हे प्लास्टिक की शीट से ढक कर रखे साथ ही फसल की शुरुवाती अवस्था मे गुलाबी सूँडी से प्रभावित नीचे गिरे रोसेट फूल, फूल डोडी व टिंडों आदि को एकत्रित कर</p>
<p style="text-align:justify;">जला दे। किसानों को ये भी सलाह दी जाती है कि लगातार अपनी फसल की निगरानी करे तथा फसल के 60 दिन के हो जाने पर एन.एस.के.ई 5% का छिड़काव करे। फसल की बिजाई के 40-50 दिनों के बाद दो फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाए तथा रोजाना खेत मे जाकर ट्रैप को देखे कि उसमे कीटों की कितनी संख्या रहती है। इनमे 5-8 कीट प्रति ट्रैप लगातार तीन दिन तक आने पर ही कीट का आर्थिक हानि स्तर माना जाता है और ऐसी स्थिति होने पर किसान तुरंत केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति द्वारा गुलाबी सूँडी के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का अनुशंसित मात्रा पर छिड़काव करे और अपनी फसल बचाए। इसके अलावा टीम के सदस्यों द्वारा मित्र कीटों जैसे कि ट्राईकोग्रामा, लेडी बर्ड बीटल एवं क्राइसोपर्ला आदि का संरक्षण करे ये भी बताया गया। Sirsa News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Family ID: फैमिली आईडी को लेकर प्रदेश की जनता परेशान: राठी" href="http://10.0.0.122:1245/people-of-the-state-are-worried-about-family-id-jagdish-rathi/">Family ID: फैमिली आईडी को लेकर प्रदेश की जनता परेशान: राठी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-team-of-agriculture-department-reached-dhukda-to-check-the-pink-caterpillar-in-the-cotton-crop/article-59366</link>
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                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 21:41:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News : किसान पूर्व से पश्चिम दिशा में करें नरमे की बिजाई, अनुमोदित किस्मों को दें प्राथमिकता</title>
                                    <description><![CDATA[अहम: गुलाबी सुंडी के प्रति बीटी कपास का प्रतिरोधक बीज नहीं हुआ तैयार वैज्ञानिकों ने 3जी, 4जी व 5जी बीटी बीजों का झांसा देने वालों से सावधान रहने की दी सलाह सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। Agriculture News: खरीफ फसलों में सफेद सोना के रूप में विख्यात कपास (नरमा) फसल की बिजाई का कार्य प्रगति पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmers-should-sow-narma-from-east-to-west-give-priority-to-approved-varieties/article-57332"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/kisan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">अहम: गुलाबी सुंडी के प्रति बीटी कपास का प्रतिरोधक बीज नहीं हुआ तैयार</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>वैज्ञानिकों ने 3जी, 4जी व 5जी बीटी बीजों का झांसा देने वालों से सावधान रहने की दी सलाह</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)।</strong> Agriculture News: खरीफ फसलों में सफेद सोना के रूप में विख्यात कपास (नरमा) फसल की बिजाई का कार्य प्रगति पर है। खेत की तैयारी से लेकर बुवाई तक को लेकर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से एडवाइजरी जारी करते हुए बीटी कपास की बिजाई मध्य मई यानी 15 मई तक पूरी करने की सलाह दी गई है। वहीं बिजाई से खेत में पलेवा गहरा लगाने और बिजाई सुबह या शाम के समय करने का आह्वान किया। साथ ही पूर्व से पश्चिम की दिशा में कपास की बिजाई लाभकारी बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक, कृषि विभाग डॉ. सुखदेव कंबोज ने बताया कि किसानों को अब देसी कपास की बिजाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उसका समय निकल चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गुलाबी सुंडी के प्रति बीटी कपास का प्रतिरोधक बीज उपलब्ध नहीं है। अंत: 3 जी, 4जी व 5जी के नाम से आने वाले बीजों से सावधान रहें। विश्वविद्यालय की ओर से खरीफ 2024 के लिए बीटी कपास के विभिन्न कंपनी की 78 किस्मों की अनुशंसा की है, जिनमें अजीत सीड्स, अमर बायोटेक, अंकुर सीड्स, बायो सीड्स श्रीराम, ग्रीन गोल्ड सीड्स, कावेरी सीड्स, कोहिनूर सीड्स, महिको सीड्स,</p>
<p style="text-align:justify;">कृषिधन सीड्स, नवकार हाइब्रिड सीड्स, नुजिवीडू सीड्स, प्रभात एग्री बायोटेक, प्रवर्धन सीड्स, रैलिस इंडिया, रासी सीड्स, सीड वर्क्स इंटरनेशनल, सेंथिल सीड्स, सोलर एग्रो व सुपर सीड्स कपंनी के बीज शामिल है। पिछले साल में सरसा जिले में सवा तीन लाख हेक्टेयर में कपास की फसल की बिजाई की गई थी। जबकि इस बार करीब 3 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. कंबोज ने पिछले साल के मुकाबले इस फसल पर गुलाबी सुंडी के हमले के चलते कपास का रकबा घटने की संभावना जताई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिजाई के समय बरतें सावधानियां | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक खेत की तैयारी सुबह या शाम को ही करें। खरपतवार के लिए स्टोंप 2 लीटर प्रति एकड़ का छिड़काव बिजाई के बाद व जमाव से पहले करें। बीटी कपास दो खूडों के बीच में मूंग (एमएच 421) के दो खुड लगा सकते है। इसके अलावा जो किसान टपका विधि से बीटी कपास की बिजाई करना चाहते हैं वह जब तक जमाव नहीं होता तब तक रोज 10 से 15 मिनट सुबह-शाम ड्रिप अवश्य चलाएं व जमाव के बाद हर चौथे दिन 30 से 35 मिनट ड्रिप चलाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यह रखें सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि अधिकारियों का मानना है कि गुलाबी सुंडी बीटी नरमे के दो बीजों (बिनौले) को जोड़कर भंडारित लकड़ियों में रहती है, इसलिए लकड़ी व बिनौलों का भंडारण किसान सावधानीपूर्वक करें। साथ में किसान अपने खेत में या आस-पास रखी गई पिछले साल की नरमा की लकड़ियों के टिंडे एंव पत्तों को झटका कर अलग कर दें एवं इक्कठे हुए कचरे को नष्ट कर दें। जिन किसानों ने अपने खेत में बीटी नरमा की लकड़ियों को भंडारित करके रखा है या उनके खेत के आस-पास कपास की जिनिंग व बिनौले से तेल निकालने वाली मिल है, उन किसानों को अपने खेतों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि इन किसानों के खेतों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप अधिक होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शुरूआत में ज्यादा कीटनाशकों का न करें प्रयोग | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास की शुरूआती अवस्था में ज्यादा जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग ना करें। ऐसा करने से मित्र कीटों की संख्या भी कम हो जाती है। विश्वविद्यालय की ओर से कपास की खेती के लिए हर 15 दिन में वैज्ञानिक सलाह जारी की जाती है। अत: उसके अनुसार ही सस्य क्रियाएं एवं कीटनाशकों का प्रयोग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर कोऑर्डिनेटर डा. देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि कपास बुवाई के दौरान किसान कृषि विश्वविद्यालय की एडवाइजरी का पालन करें। गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए किसान खेत में पहले से पड़ी बीटी नरमे की वनछटियों को खेत से हटा दें। शुरूआत में ही ज्यादा कीटनाशकों का प्रयोग ना करें। Kisan News</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘गुलाबी सुंडी’ से ‘सफेद सोना’ बचाना किसानों के लिए चुनौती</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुखजीत मान (बठिंडा)।</strong> पंजाब-हरियाणा के किसानों का अब कपास की खेती की तरफ रुझान घट रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अथाह प्रयासों के बावजूद भी कपास पर गुलाबी सूंडी का प्रकोप जारी है। कपास अधीन रकबे में वृद्धि करना सरकार के लिए एक चुनौती बन गया है। इस समस्या से निपटने के लिए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तीन राज्यों के कृषि विशेषज्ञ कई बैठकें कर चुके हैं, ताकि भूमिगत जल को बचाने के लिए कपास के रकबे को बढ़ाया जा सके।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि कपास की बिजाई 15 मई तक निपटा देनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा देर होने पर फसलों की पैदावार कम होती है और रोग भी अधिक लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फसल को बचाने के लिए न केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि कृषि विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि स्प्रे का इस्तेमाल करना चाहिए। कपास की बिजाई नहरी पानी से की जाए तो सबसे बेहतर है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि चिट्टी मक्खी के फैलाव को रोकने के लिए बिजाई से पहले खाली स्थान, सड़कों के किनारों व नालों के किनारों इत्यादि से चिट्टी मक्खी व पत्ता मरोड़ बीमारी का फैलाव करने वाले नदीन जैसे कंघी घास, पीली घास, पुथाकंडा आदि को नष्ट कर दें। वहीं बैंगन की फसल पकने के बाद खेत से उखाड़कर नष्ट कर दें और कपास में खीरा, चप्पन कद्दू और तर इत्यादि की बिजाई न करें, क्योंकि इन पर पैदा होने वाली मक्खी कपास की फसल में फैल जाती है। Agriculture News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="केंद्रीय मंत्री जनरल डॉ वी के सिंह को सिख समाज ने दी जन्मदिन की बधाई" href="http://10.0.0.122:1245/sikh-community-congratulated-general-dr-vk-singh-on-his-birthday/">केंद्रीय मंत्री जनरल डॉ वी के सिंह को सिख समाज ने दी जन्मदिन की बधाई</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmers-should-sow-narma-from-east-to-west-give-priority-to-approved-varieties/article-57332</link>
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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 16:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>In Cotton Pink Bollworm Control: बीटी कपास में गुलाबी सुंडी से हैं परेशान तो जानें ये समाधान!</title>
                                    <description><![CDATA[In Cotton Pink Bollworm Control: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। बीटी कपास में गुलाबी सुंडी नियंत्रण एवं प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित आत्मा सभागार में शुरू हुई। कार्यशाला के उद्घाटन मौके पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कलक्टर कानाराम ने की। कार्यशाला में संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. राजेंद्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/if-you-are-troubled-by-pink-bollworm-in-bt-cotton-then-know-this-solution/article-57030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/cotten-cropp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>In Cotton Pink Bollworm Control: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बीटी कपास में गुलाबी सुंडी नियंत्रण एवं प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित आत्मा सभागार में शुरू हुई। कार्यशाला के उद्घाटन मौके पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कलक्टर कानाराम ने की। कार्यशाला में संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. राजेंद्र खीचड़, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार योगेश कुमार वर्मा, पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रो. बीएस यादव, हरबंस सिंह, अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुआलाल जाट, ईश्वर लाल यादव, डॉ. ऋषि कुमार, डॉ. सतीश शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर मिलन सिंह, सहायक निदेशक बीआर बाकोलिया, रामप्रताप गोदरा के अलावा खण्ड स्तर के प्रगतिशील किसान, तीनों जिलों के कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हुए। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने गुलाबी सुंडी प्रबंधन के विभिन्न तरीके बताए। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी के प्रभावी प्रबंधन के लिए किसान बनछटियों को खेत के आस-पास एकत्रित नहीं करें तथा भंडारित कपास को ढक कर रखें, जिससे गुलाबी सुंडी के पतंगे खेतों में फसल पर अंडे नहीं दे पाएंगे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर कानाराम ने कहा कि वे दस दिन पहले अनाज मण्डी से किसानों से मिले थे। तब हुई चर्चा में हरेक किसान आशंकित था। किसानों का कहना था कि पिछली बार गुलाबी सुंडी की वजह से काफी नुकसान हुआ था। लेकिन यह निश्चित है कि किसान कपास की बिजाई अवश्य करेगा।</p>
<h3>कार्यशालाएं कर किसानों को जागरूक करें</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल जो नुकसान हुआ है। अगले साल भी उसी तरह का नुकसान होता है तो यह कृषि विभाग, कृषि विज्ञान और प्रशासन सबका फेलियर है कि अधिकारी यह सब जानते हुए भी किसानों को जागरूक नहीं कर पाए और बीटी कॉटन में फिर से इतना बड़ा नुकसान हो गया। जिला कलक्टर ने कहा कि सही समय पर यह कार्यशाला हो रही है। हम सबकी पहली जिम्मेदारी है कि पिछली बार जो गलतियां हुईं उसकी पुनर्रावृत्ति न हो। विभिन्न तरह की कार्यशालाएं कर किसानों को जागरूक करें ताकि गुलाबी सुंडी का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार योगेश कुमार वर्मा ने बताया कि कपास इस क्षेत्र की खरीफ की बड़ी फसल है। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दो सालों में 2 लाख 12 हजार हैक्टेयर में कपास में किसानों को लगभग 9 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ। विभाग इस बार पूर्णतया सजग है कि किसानों की मदद की जा सके। इसलिए विभिन्न विभागों के समन्वय से कृषि विभाग ने काम किया। सबसे पहले अवशेषों को मनरेगा से जोड़ा। जो जिनिंग फैक्ट्री में कॉटन पड़ी हुई थी उसके बिनौले को नष्ट करने का काम किया। उद्योग विभाग से सम्पर्क किया। खासतौर पर बुवाई समय से काफी पहले हो रही थी। इसकी वजह से प्रकोप बढ़ रहा था। सरकार से व्यवस्था कर विभाग ने सही समय पर बुवाई करवाई। अब पिछले दस दिनों पहले सरकार ने बीज विक्रय की अनुमति जारी कर दी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कार्यशाला से लाइव भी जुड़े किसान | Hanumangarh News</h3>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार योगेश कुमार वर्मा ने बताया कि गांव-गांव स्तर पर किसानों को यह सिखाने का काम किया जा रहा है कि बुवाई से पूर्व, बुवाई के बाद पोषक तत्वों के प्रबंधन का ख्याल रखें। चूंकि यह नेशनल अलार्म है। खासतौर पर इस इलाके के कई लोगों की कृषि इसी पर आधारित है। विभाग ने राजस्थान के स्तर पर जयपुर की टीम की मदद लेते हुए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की है। इसमें कृषि खण्ड श्रीगंगानगर के कार्यालयों के अधिकारियों को बुलाया गया है। उन्हें रोडमैप दिया जा रहा है कि कैसे वे कीट की मॉनिटरिंग करें। किस लेवल पर क्या सुझाव दें।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सहायक कृषि अधिकारी, कृषि पर्यवेक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से यूट्यूब पर कार्यशाला का लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से भी करीब 20 से 25 हजार किसानों को जोडऩे का प्रयास किया है। जयपुर में कृषि विभाग के चैनल पर भी इस कार्यशाला का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके अलावा राजस्थान के अन्य संभाग जहां भी खेती में गुलाबी सुंडी का प्रकोप है, वे लोग भी इसका फायदा उठा रहे हैं। कुल मिलाकर प्रयास यह है कि कपास की इस गुलाबी सुंडी से मॉनिटरिंग करते हुए सही समय पर सही राय किसानों तक पहुंचाई जाए। इसी प्रयास के साथ यह दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। Hanumangarh News</p>
<p><a title="Lok Sabha Election 2024: कौन है ये शख्स, जिसने सरेआम दे डाली पीएम मोदी को चुनौती!" href="http://10.0.0.122:1245/varanasi-shyam-rangeela-is-standing-against-pm-modi-who-makes-us-laugh-a-lot/">Lok Sabha Election 2024: कौन है ये शख्स, जिसने सरेआम दे डाली पीएम मोदी को चुनौती!</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/if-you-are-troubled-by-pink-bollworm-in-bt-cotton-then-know-this-solution/article-57030</link>
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                <pubDate>Thu, 02 May 2024 14:55:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाजार में सफेद सोने की आवक तेज</title>
                                    <description><![CDATA[फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। जिले की मंडियों में सफेद सोने (कपास) की आवक कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर अच्छे संकेत दे रही है। इस वर्ष मंडी में पिछले वर्ष की तुलना में उसी दिन काफी अधिक फसल की आवक हुई, जिससे साबित होता है कि उपज पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/cotton-crop-is-showing-good-signs-in-the-market/article-53337"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/fazilka-news-1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)।</strong> जिले की मंडियों में सफेद सोने (कपास) की आवक कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर अच्छे संकेत दे रही है। इस वर्ष मंडी में पिछले वर्ष की तुलना में उसी दिन काफी अधिक फसल की आवक हुई, जिससे साबित होता है कि उपज पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगी। Fazilka News</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में, यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने किसानों और कृषि विशेषज्ञों की मांग के अनुसार समय से पहले ही अप्रैल महीने में किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई का पानी उपलब्ध करा दिया, जिसके कारण बुआई जल्दी हो गई। पंजाब के इस दक्षिण पश्चिमी जिले में किया गया था। शुरुआती वानस्पतिक विकास के साथ फसल सफेद मक्खी और अन्य कीड़ों के हमले का विरोध करने में सक्षम थी और जब पिंक बॉल वर्म का हमला हुआ तो पौधे के निचले और मध्य भागों में पहले से ही अच्छी संख्या में बॉल्स विकसित हो गए थे, जिससे किसानों के लिए अच्छी कपास की पैदावार हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जिले में 91500 हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई थी, जबकि चालू वर्ष में यह रकबा 92800 हेक्टेयर है। हालांकि कपास के रकबे में बढ़ोतरी मामूली रही, लेकिन मंडियों में अब तक आई फसल के आंकड़े किसानों के लिए राहत देने वाले हैं। पिछले साल फाजिल्का की मंडी में कुल 38000 क्विंटल कपास की आवक हुई थी, जबकि इस साल अब तक 15200 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। Fazilka News</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार कपास की मुख्य मंडी अबोहर में पिछले वर्ष अब तक 38300 क्विंटल की आवक हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 65160 क्विंटल की आवक हो चुकी है। जबकि अभी कपास विपणन सीजन के शुरुआती दिन हैं। दूसरी ओर, कपास अभी भी आम तौर पर सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बेचा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में कपास बेचने आए किसानों का भी मानना है कि सरकार द्वारा समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के कारण ही फसल की अच्छी पैदावार हुई और अगर सरकार पहले से पानी की व्यवस्था नहीं करती तो कपास की फसल की कोई उम्मीद नहीं थी। इस साल वहीं, किसानों का यह भी कहना है कि फसल की बुआई जल्दी होने से अब कपास की फसल भी जल्दी तैयार हो जाएगी और समय पर खेत खाली होने से वे अब गेहूं की बुआई भी समय पर करेंगे जबकि पिछले वर्षों में कपास की कटाई देर से होने के कारण उनकी गेहूं की बुआई भी देर से होती थी। Fazilka News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Old Pension Scheme: लागू हो सकती है ओल्ड पेंशन स्कीम?" href="http://10.0.0.122:1245/can-old-pension-scheme-be-implemented/">Old Pension Scheme: लागू हो सकती है ओल्ड पेंशन स्कीम?</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/cotton-crop-is-showing-good-signs-in-the-market/article-53337</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 19:16:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुलाबी सुंडी व टिंडा ग्लन की बीमारी से गांव नांगल के किसानों की 80 से 100 प्रतिशत फसल खराब</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों की मांग: कपास की बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर प्रति एकड़ मुआवजा दिलवाए प्रशासन गांव के 700 से 800 एकड़ कपास की फसल हुई है बर्बाद : नांगल सरपंच | Gulabi Sundi भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। भिवानी जिला के गांव नांगल के ग्रामीणों ने आज बड़ी संख्या में अपनी बर्बाद हुई कपास की फसल (Cotton […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/crops-of-farmers-of-village-nangal-spoiled-due-to-pink-bollworm/article-52620"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/bhiwani-news.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">ग्रामीणों की मांग: कपास की बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर प्रति एकड़ मुआवजा दिलवाए प्रशासन</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">गांव के 700 से 800 एकड़ कपास की फसल हुई है बर्बाद : नांगल सरपंच | Gulabi Sundi</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> भिवानी जिला के गांव नांगल के ग्रामीणों ने आज बड़ी संख्या में अपनी बर्बाद हुई कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंच बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर मुआवजा दिए जाने की मांग की। गांव के सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हाथों में कपास की बर्बाद फसल व कीड़ा लगे कपास के टिंडों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा तथा उन्हे अपनी खराब फसल की भरपाई की मांग की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बर्बाद फसलों के साथ उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीण | Gulabi Sundi</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव के सरपंच कुलदीप, बुजुर्ग राजमल व युवा किसान मोहित ने बताया कि उनके गांव की लगभग 700 से 800 एकड़ कपास की फसल गुलाबी सुंडी व बीमारी के लगने से 80 से 100 प्रतिशत के लगभग खराब हो गई। गांव के सभी कपास उत्पादक किसानों पर इन बीमारियों का प्रभाव पड़ा। इससे गांव में कपास की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भिवानी जिला प्रशासन जल्द से जल्द गांव नांगल की बर्बाद हुई कपास की फसल का कृषि विभाग के माध्यम से सर्वे करवाकर मुआवजे की व्यवस्था करें। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रति एकड़ कपास की बिजाई, खाद, दवाई व सिंचाई खर्च को देखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द सर्वे करवा किसानों को 40 से 45 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिलवााएं। Gulabi Sundi</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि गांव के किसानों को सर्वे करवाने के बाद बीमा कंपनियों के माध्यम से क्लेम दिलवाने का कार्य जिला प्रशासन करवाएं, ताकि किसान कपास की बीामरी की मार आर्थिक रूप से सहन करने में सक्षम हो पाएं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने बीमा नहीं करवाया है, उनके लिए भी प्रशासन अन्य माध्यमों से मुआवजे की व्यवस्था करें, ताकि 80 से 100 प्रतिशत तक कपास के खराबे की भरपाई की जा सकें। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन गांव की बर्बाद फसलों के मुआवजे की व्यवस्था नहीं करता है तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन पर उतरना होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="महिलाओं ने ‘नारी अधिनियम’ को बताया क्रांतिकारी कदम" href="http://10.0.0.122:1245/women-called-womens-act-a-revolutionary-step/">महिलाओं ने ‘नारी अधिनियम’ को बताया क्रांतिकारी कदम</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/crops-of-farmers-of-village-nangal-spoiled-due-to-pink-bollworm/article-52620</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 17:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नरमें की फसल पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप, किसान चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[40 हजार हेक्टेयर में फसल पर मंडराया खतरा | Cotton Crop नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। सरसा जिले के चौपटा क्षेत्र में नरमें की फसल (Cotton Crop) में गुलाबी सुंडी का प्रकोप शुरू हो गया है। अचानक से गुलाबी सुंडी के हमले से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। क्षेत्र के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/outbreak-of-gulabi-sundi-on-softwood-crop/article-49513"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/cotton-crop.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">40 हजार हेक्टेयर में फसल पर मंडराया खतरा | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> सरसा जिले के चौपटा क्षेत्र में नरमें की फसल (Cotton Crop) में गुलाबी सुंडी का प्रकोप शुरू हो गया है। अचानक से गुलाबी सुंडी के हमले से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। क्षेत्र के डिंग मंडी, जोधंका, रूपावास, रायपुर, बकरियांवाली, गुडिया खेड़ा, गिगोरानी, रामपूरा ढ़िल्लों, कुम्हारिया, कागदाना, खेड़ी, जसानिया, हंजीरा, नाथूसरी, शाहपूरिया, चाहरवाला, शक्करमन्दोरी, रामपूरा नवाबाद सहित कई गांवों में इस बार करीब 39000 हेक्टेयर में नरमें व 800 हेक्टेयर में कपास की फसल की बिजाई की गई है। गुलाबी सुंडी के प्रकोप को रोकने के लिए किसानों को अभी से ही कपास की फसल में कीटनाशक दवाई का प्रयोग करना पड़ेगा। उधर कृषि अधिकारियों ने भी खेतों में जाकर निरीक्षण शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिंग मंडी के किसान ज्ञान धारी पचार, विकाश, रामस्वरूप, भरत सिंह, धर्मपाल ने बताया सुंडी के प्रकोप से फसल खराब होने लगी है। किसान प्रमोद बिरड़ा, देवीलाल मंडा ने बताया कि नरमें कपास की फसल में शुरूआती दौर में गुलाबी सुंडी का हमला शुरू हो गया है। अभी पकाने में काफी समय है। ऐसे में फसल को बचाना काफी मुश्किल हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसान यह बरतें सावधानियां | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;">कीटनाशक का छिड़काव दोपहर 12 बजे से पहले या फिर शाम के समय ही करना चाहिए। एक ही कीटनाशक का छिड़काव बार-बार नहीं करना चाहिए। कीटनाशक के छिड़काव के बाद 24 घण्टों के भीतर अगर वर्षा आ जाती है तो, कीटनाशक का छिड़काव दोबारा करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानी रखें जैसे छिड़काव करते समय शरीर, चेहरे और आँखों का ढकना, हवा के विपरीत छिड़काव नहीं करना इत्यादि। कपास की बिजाई के 90-120 दिन के बीच में अण्डा परजीवी ट्राईकोग्रामा बेक्टीरिया के 60000 अण्डे प्रति एकड़ के हिसाब से छोडेÞं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुंडी की रोकथाम | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास की फसल में गुलाबी सुंडी (Gulabi Sundi) की निगरानी फूलों व टिंडो पर करें। फलिय भागों पर 10 प्रतिशत से अधिक प्रकोप इसका आर्थिक कगार है। खेत के विभिन्न हिसों से 60 फूलों की जांच करने पर अगर इन में से रॉजेटेड फूल तथा सुंडी के द्वारा नुकसान किये गए 6 फूल मिलते हैं तो गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए स्प्रे करें। खेत में अलग-अलग पौधों से 20 हरे टिंडे तोड़ कर उसमें घुसी गुलाबी सुंडी को गिनो अगर इनमें दो या दो से ज्यादा सुंडियां मिलती हैं तो गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए स्प्रे करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार चौपटा खंड में देसी कपास लगभग 700 हेक्टयर, बीटी कॉटन 39000 हेक्टयर, ग्वार लगभग 15000 हेक्टयर, मूंग 250 हेक्टयर, मूंगफली 1200 हेक्टयर, अरंड की 400 हेक्टयर में बिजाई की गई है। कई खेतों में निरीक्षण भी किया है। नरमे की फसल में कई स्थानों पर सुंडी का प्रभाव देखा गया है, सुंडी की पहचान व रोकथाम के लिए किसानों को कई प्रकार की सावधानियां रखनी चाहिए।<br />
<strong>                                                                                    – शलेन्द्र सहारण, कृषि विकास अधिकारी।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी" href="http://10.0.0.122:1245/water-crisis-in-india/">Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 15:39:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही 1509 धान और कपास</title>
                                    <description><![CDATA[जींद (सच कहूँ/जसविंद्र)। इस बार धान 1509 किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है। इन दिनों जो भाव किसानों को मिल रहे हैं वो बीते साल से काफी अधिक है। मार्केट कमेटी में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 28 सितंबर को सबसे अधिक भाव धान 1509 का 3740 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। बीते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/1509-paddy-and-cotton-becoming-profitable-deal-for-farmers/article-38395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/paddy-and-cotton.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जींद (सच कहूँ/जसविंद्र)।</strong> इस बार धान 1509 किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है। इन दिनों जो भाव किसानों को मिल रहे हैं वो बीते साल से काफी अधिक है। मार्केट कमेटी में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 28 सितंबर को सबसे अधिक भाव धान 1509 का 3740 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। बीते साल सबसे अधिक भाव इन दिनों 2043 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा था। इस बार बीते साल से अधिक भाव किसानों को प्राइवेट बोली पर मिल रहे हैं। धान 1509 के साथ-साथ कपास के भाव भी बीते साल से अधिक किसानों को इन दिनों मिल रहे है। इस बार हालांकि कपास की आवक कम होने की संभावना है क्योंकि कपास की बिजाई कम होने के साथ-साथ कपास की फसल भी बारिश का पानी खेतों में भरने से खराब हुई है। कपास का भाव 8812 रुपये प्रति क्विंटल सबसे अधिक रहा। बीते साल इन दिनों भाव 6905 रुपये प्रति क्विंटल कपास के किसानों को मिल रहे थे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/twinkle-vij-made-her-parents-name-roshan-by-becoming-a-doctor/">ट्विंकल विज ने डॉक्टर बन किया अपने माता पिता और कस्बे का नाम रोशन</a></p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 20:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश के मौसम में कपास की फसल में जल प्रबंधन जरूरी, नहीं तो खराब हो सकती है फसल</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/संदीप सिंहमार हिसार। मॉनसून के समय बारिश के चलते कपास की फसल में जल प्रबंधन बहुत जरूरी है, नहीं तो फसल खराब होने का अंदेशा है। अधिक बारिश के बाद फसल से पानी की निकासी अवश्य करनी चाहिए। अगस्त माह में जिन किसानों ने फसल में खाद नहीं डाली है, वे जमीन के बत्तर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/water-management-is-necessary-in-the-cotton-crop-during-the-rainy-season-otherwise-the-crop-may-get-spoiled/article-25953"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/cotton-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संदीप सिंहमार</strong><br />
<strong>हिसार।</strong> मॉनसून के समय बारिश के चलते कपास की फसल में जल प्रबंधन बहुत जरूरी है, नहीं तो फसल खराब होने का अंदेशा है। अधिक बारिश के बाद फसल से पानी की निकासी अवश्य करनी चाहिए। अगस्त माह में जिन किसानों ने फसल में खाद नहीं डाली है, वे जमीन के बत्तर आने पर एक बैग डीएपी, एक बैग यूरिया, आधाध् बैग पोटाश व 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत वाली प्रति एकड़ के हिसाब से डाल दें ताकि फसल अच्छी खड़ी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने प्रदेश के किसानों को सलाह देते हुए कहा कि रेतीली मिट्टी में खाद की मात्रा दो बार डालें। ड्रिप विधि से लगाई गई फसल में हर सप्ताह ड्रिप के माध्यम से घुनलशील खाद्य जिसमें दो पैैकेट 12:6:0, तीन पैकेट 13:0: 45 के, 6 किलो यूरिया व सौ ग्राम जिंक प्रति एकड़ के हिसाब से 10 हफ्तों में अवश्य डालें। अगर रेतीली मिट्टी में मैगनीशियम में लक्षण हों तो आधा प्रतिशत मैगनीशियम सल्फेट का छिड़काव अवश्य करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सिफारिश किए गए कीटनाशकों व उर्वरकों का ही प्रयोग करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फसल में विश्वविद्यालय की ओर से सिफारिश किए गए कीटनाशकों व उर्वरकों का ही प्रयोग करें ताकि फसल पर विपरीत प्रभाव न पड़े। रेतीली जमीन में नमी एवं पोषक तत्वों पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। गत वर्ष किसानों द्वारा बिना कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिश के फसल पर कीटनाशकों के मिश्रणों का प्रयोग किया गया, जिससे कपास की फसल में नमी एवं पौषण के चलते समस्या उत्पन हुई थी। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही कीटनाशकों व फफूंदनाशकों का प्रयोग करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>साप्ताहिक अंतराल पर करें फसल की निगरानी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के. सहरावत ने सलाह देते हुए कहा कि फसल में रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 प्रतिशत पौधों की तीन पत्तियों (एक ऊपर, एक मध्यम एवं एक निचले भाग से) पर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स(चूरड़ा) की गिनती साप्ताहिक अंतराल पर करते रहें। अगर फसल में सफेद मक्खी, हरा तेला व थ्रिप्स आर्थिक कगार से ऊपर हैं तो विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश किए गए कीटनाशकों का ही प्रयोग करें। फसल में थ्रिप्स का प्रकोप होने पर 250 से 350 मिलीलीटर डाईमाथेएट (रोगोर) 30 ई.सी. या 300 से 400 मिलीलीटर आॅक्सीडेमेटोन मिथाइल (मेटासिस्टोक्स) 25 ई.सी. को 150 से 175 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिडकÞाव करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवाणु अंगमारी रोग के लिए 6 से 8 स्ट्रेप्टोसाइक्लीन और 600 से 800 ग्रामीण कॉपर आॅक्सिक्लोराइड को 150 से 200 लीटर पानी में मिलकार प्रति एकड़ 15 से 20 दिन के अंतराल पर दो से तीन छिडकÞाव करें। जड़ गलन बीमारी से सूखे हुए पौधों को खेत से उखाड़ कर जमीन में दबा दें। इसके अलावा रोग प्रभावित पौधों के आसपास स्वस्थ पौधों में एक मीटर तक कार्बेडाजिम दो ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर 100 से 200 मिलीलीटर प्रति पौधा जड़ों में डालें।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 15:05:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुलासा: कपास खरीद में कटौती के नाम पर लाखों का गबन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रति क्विंटल पर की जा रही थी दो किलोग्राम की कटौती (Embezzlement of Lakhs) खरीद एजेंसी सीसीआई के सेल्स मैनेजर पर 47 लाख की धोखाधड़ी का आरोप मार्केट कमेटी सचिव ने केस दर्ज करने के लिए एसपी को लिखा पत्र चरखी दादरी(सच कहूँ न्यूज)। कपास की एमएसपी रेट पर खरीद के दौरान खरीद एजेंसी द्वारा वजन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/revealed-embezzlement-of-lakhs-in-the-name-of-cuts-in-cotton-purchases/article-19580"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/revealed-embezzlement-of-lakhs-in-the-name-of-cuts-in-cotton-purchases.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>प्रति क्विंटल पर की जा रही थी दो किलोग्राम की कटौती (Embezzlement of Lakhs)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>खरीद एजेंसी सीसीआई के सेल्स मैनेजर पर 47 लाख की धोखाधड़ी का आरोप</h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4>मार्केट कमेटी सचिव ने केस दर्ज करने के लिए एसपी को लिखा पत्र</h4>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी(सच कहूँ न्यूज)</strong>। कपास की एमएसपी रेट पर खरीद के दौरान खरीद एजेंसी द्वारा वजन में कटौती करते हुए करीब 47 लाख रुपए का (Embezzlement of Lakhs) गबन किया गया है। इसका खुलासा किसानों द्वारा मिलों के कांटों पर वजन करने की शिकायत पर हुआ है। मार्केट कमेटी के अधिकृत कांटों की बजाए बाहर से वजन करने व नमी के नाम पर कटौती की जा रही थी। ऐसे में मार्केट कमेटी अधिकारियों ने खरीद एजेंसी मैनेजर पर केस दर्ज करने व सीआईए द्वारा जांच करवाने बारे एसपी को लेटर लिखा है। बता दें कि चरखी दादरी जिले में 10 अक्तूबर से कपास की एमएसपी रेट पर खरीद शुरू की गई थी। जो कॉटन कारपोरेश ऑफ़ इंडिया (सीसीआई) द्वारा खरीद की जा रही है। खरीद के दौरान कपास की वजन करने के लिए मार्केट कमेटी द्वारा मंडी में स्थित कांटों को ही अधिकृत किया गया था। बावजूद इसके खरीद एजेंसी अधिकारियों द्वारा कपास का वजन मिल मालिकों से मिलकर बाहर मिलों में करवाया गया। जहां वजन के दौरान किसानों से प्रति क्विंटल दो किलोग्राम की कटौती की गई।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं जिला कार्यकारी अधिकारी श्याम सुंदर</h4>
<h6 style="text-align:justify;">मार्केट कमेटी के जिला कार्यकारी अधिकारी श्याम सुंदर ने बताया कि कपास खरीद के दौरान अधिकृत कांटों की बजाए बाहर के काटों से वजन करवाते हुए प्रति क्विंटल दो किलोग्राम की कटौती की है। ऐसे में मैनेजर द्वारा धोखाधड़ी करते हुए 47 लाख 5 हजार 905 रुपए का नुकसान सरकार व किसानों को पहुंचाया है। इस मामले में कार्रवाई करने के लिए एसपी को लेटर लिखा है। साथ ही मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Oct 2020 20:54:09 +0530</pubDate>
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                <title>नरमा पट्टी पर सफेद मक्खी ने बरपाया कहर</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fake-seeds-and-medicines-to-farmers/article-2080"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/cotton.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">समस्या: किसानों को मिल रहे नकली बीज व दवाएं : शिंगारा सिंह मान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नथाना (गुरजीवन सिद्धू)।</strong> चाहे सरकार व कृषि विभाग किसानों को अच्छी कीड़ेमार दवाएं, बीज, खादें आदि मुहैया करवाने का लाख दावा करें, परंतु सच्चाई यह है कि किसानों की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। क्षेत्र में नरमे के नीचे क्षेत्रफल को पहले बरसात के पानी ने बर्बाद कर दिया व अब पड़ी सफेद मक्खी ने किसानों को पूरी तरह से परेशान कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर रोज किसी न किसी गांव में किसानों द्वारा बेबसी की हालत में पुत्रों की तरह पाली नरमे की फसल को नष्ट करने का दुखदायी समाचार सुनने को मिल रहा है। नथाना के एक किसान जगमीत सिंह पुत्र गुरजंट सिंह ने सफेद मक्खी की मार नीचे आई अपनी तीन एकड़ नरमे की फसल नष्ट कर दी है।</p>
<h2>किसानों ने सफेद मक्खी से परेशान होकर नष्ट किया नरमा</h2>
<p>इसी तरह गांव नाथपुरा के किसान गुरमीत सिंह पुत्र लछमण सिंह ने सफेद मक्खी के हमले के कारण दो एकड़ नरमे की फसल नष्ट कर दी है। जगमीत सिंह ने बताया कि उसने अपनी फसल को बचाने के लिए खेती विशेषज्ञों की शिफारिश अनुसार कई किस्म की कीटनाशक दवाओं का छिड़काव फसल पर किया परंतु किसी भी दवा ने कोई प्रभाव नहीं दिखाया,</p>
<p style="text-align:justify;">जिस कारण मजबूरन उसको अपनी फसल नष्ट करनी पड़ी। बरसात की मार झेल रहे गांव बज्जोआना के किसान निर्मल सिंह पुत्र बिक्कर सिंह, मेजर सिंह पुत्र जोगिन्द्र सिंह, सुखदीप सिंह पुत्र सुखदेव सिंह ने अपनी 6-6 एकड़ क्षेत्रफल में बीजी नरमे की फसल नष्ट कर दी है। इस तरह हजारों रुपए की फसल पालन पर हुआ खर्च उनके सिर चढ़ गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नरमा नष्ट करने की नौबत नहीं आई: डॉ. बराड़</h2>
<p style="text-align:justify;">जब सफेद तेले संबंधी डॉ. जतिन्दर सिंह बराड़ से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा केस उनके ध्यान में नहीं आया परन्तु उन्होंने किसानों से अपील की है कि नरमे को नष्ट न किया जाए। थोड़ा-बहुत तेला तो आसपास धान में ठहरे पानी कारण ही हो जाता है और पिछले सीजन दौरान सफेद तेले का प्रकोप अधिक था।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी चीज को एकदम खत्म नहीं किया जा सकता, परंतु अभी तक नरमा नष्ट की नौबत नहीं आई। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि नरमा नष्ट करने से पहले कृषि विभाग के स्काउट या संबंध्ति खेती विकास अधिकारी से जरूर सम्पर्क करें, जिससे जो भी समस्या हो उसको हल किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>अकाली-भाजपा सरकार समय भी किसानों को कीटनाशक, खादें और बीज नकली दिया जा रहा था परंतु चुनावों के समय किसान हितैषी होने का ढिंडोरा पीटने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार अब क्यों हाथ पर हाथ रखकर बैठी है, क्यों नहीं कीटनाशक सफेद मक्खी का खात्मा कर रही। बाजारों में शरेआम किसानों को यह सब कुछ नकली दिया जा रहा है, जिस कारण पिछले समय दौरान भी नरमे की फसल पर सफेद मच्छर का हमला नहीं रुका था, उसी तरह ही अब भी जारी है।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-किसान यूनियन जिला प्रधान शिंगारा सिंह मान</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 00:43:23 +0530</pubDate>
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