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                <title>रोजगार और अर्थशास्त्र</title>
                                    <description><![CDATA[Employment And Economics: चीन की खस्ताहाल इकोनॉमी, अमेरिका से तनाव और कारोबार में चीनी सरकार के दखल के चलते एप्पल ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का फैसला किया है। एप्पल का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। चीन के मुकाबले एप्पल भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारीa कर रहा है। इस फैसले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/employment-and-economics/article-61625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/apple-flagship-store.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Employment And Economics: चीन की खस्ताहाल इकोनॉमी, अमेरिका से तनाव और कारोबार में चीनी सरकार के दखल के चलते एप्पल ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का फैसला किया है। एप्पल का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। चीन के मुकाबले एप्पल भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारीa कर रहा है। इस फैसले से करीब छह लाख भारतीयों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। Employment And Economics</p>
<p style="text-align:justify;">जिन देशों में बड़ी कंपनियां निवेश बढ़ाएंगी, वहां रोजगार बढ़ना भी तय है। बेशक देश में रोजगार की अपार संभावनाएं होती हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आर्थिक सिद्धांत और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। फिलहाल राजनीति और अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। राजनीतिक स्तर पर कई ऐसे फैसले लिए जाते हैं जो अस्थायी राजनीतिक लाभ देते हैं लेकिन लंबे समय में अर्थव्यवस्था की जड़ें कमजोर कर जाते हैं। Employment And Economics</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के बजाय आर्थिक नीतियों के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। मुफ्त बिजली की सुविधा जैसे फैसले कई राज्यों ने लिए हैं जो उनकी अर्थव्यवस्था के लिए समस्या बन गए हैं। कल्याणकारी योजनाएं और मुफ्त की रेवड़ियों में अंतर होता है। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो दुनिया भर की कंपनियां निवेश करेंगी। आर्थिक फैसलों को आर्थिक दृष्टि से ही देखा जाना चाहिए। Employment And Economics</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rivers: नदियों की जान निकाल रहे रेत माफिया" href="http://10.0.0.122:1245/sand-mafia-is-taking-the-life-out-of-rivers/">Rivers: नदियों की जान निकाल रहे रेत माफिया</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 15:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>फ्री की घोषणाओं के लिए बने नियम</title>
                                    <description><![CDATA[यूं देखा जाए तो श्रीलंका भी भारत के एक राज्य जितना बड़ा है। यदि श्रीलंका को भारत में मिलाया जाये तो वह भारत के किसी भी एक राज्य के समान ही रहेगा। आज भारत के कुछ राज्यों की आर्थिक स्थिति भी एक तरह से श्रीलंका की राह पर जाती दिख रही है। भारतीय रिजर्व बैंक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-financial-of-states-is-very-bad-due-to-excessive-subsidies/article-35576"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/economic-experts.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यूं देखा जाए तो श्रीलंका भी भारत के एक राज्य जितना बड़ा है। यदि श्रीलंका को भारत में मिलाया जाये तो वह भारत के किसी भी एक राज्य के समान ही रहेगा। आज भारत के कुछ राज्यों की आर्थिक स्थिति भी एक तरह से श्रीलंका की राह पर जाती दिख रही है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय राज्यों की वित्तीय स्थिति के सम्बंध में अभी हाल ही में जारी किए गए एक प्रतिवेदन में इन राज्यों को चेताया गया है क्योंकि भारत के समस्त राज्यों का संयुक्त ऋण-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात 31 प्रतिशत से अधिक हो गया है। जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 तक इसके 20 प्रतिशत रहने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और केंद्र सरकार का ऋण-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात नियंत्रण में रहकर 19 प्रतिशत ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ राज्यों की हालत तो दयनीय स्थिति में पहुंच गई है। यदि समय पर ये राज्य नहीं चेते एवं इन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं किया तो ये राज्य अपने भारी भरकम ऋणों पर ब्याज अदा करने में चूक करने की ओर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जाहिर तौर पर जब राज्यों की आर्थिक स्थिति की चर्चा होती है तो इसका असर राज्यों के विकास और इन राज्यों में निवास कर रहे नागरिकों के जीवन पर भी पड़ता है। लोकलुभावन राजनीति इन राज्यों की वित्तीय स्थिति को बहुत बुरे तरीके से प्रभावित कर रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के उक्त वार्षिक प्रतिवेदन में राज्यों की वित्तीय स्थिति को लेकर कई गंभीर पहलु और सवाल खड़े किए गए हैं। विशेष रूप से पंजाब, केरल, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल आदि राज्य बढ़ते कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं और इन राज्यों की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। हाल ही के समय में पंजाब, केरल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल एवं बिहार की वित्तीय सेहत बहुत बिगड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी राज्यों की वित्तीय सेहत का विस्तार से आकलन करने पर ध्यान जाता है कि कई राज्यों द्वारा अनियंत्रित रूप से चलाई जा रही मुफ्त योजनाओं, लोकलुभावन घोषणाओं, अत्यधिक सब्सिडी देने से इन राज्यों की वित्तीय सेहत बहुत बुरी तरह से बिगड़ रही है। सभी राज्यों की आर्थिक स्थिति खराब है ऐसा नहीं है। देश में कुछ राज्यों में बहुत अच्छा विकास हो रहा है और इनकी आय भी तेजी से बढ़ रही है जिससे इनकी आर्थिक स्थिति नियंत्रण में है। इन राज्यों में शामिल हैं गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिसा एवं दिल्ली। दरअसल राज्यों द्वारा गरीब से गरीब व्यक्तियों की आय बढ़ाए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए एवं सहायता की राशि उनके खातों में सीधे ही हस्तांतरित की जानी चाहिए। यदि इन राज्यों की वित्तीय स्थिति लोक लुभावन घोषणाओं को पूरा करने की नहीं है तो, इस प्रकार की घोषणाएं चिन्हित राज्यों द्वारा नहीं की जानी चाहिए, ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Sun, 17 Jul 2022 10:09:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तान के आर्थिक हालात बद से बदतर</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान: शहबाज ने ईंधन की कीमतों में कमी को लेकर मंत्रालय से मांगा ब्यौरा इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हुई गिरावट के मद्देनजर पंजाब उपचुनाव से कुछ दिन पहले पेट्रोलियम की कीमतों में कमी पर सुझाव देने के लिए वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालयों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/pakistan-economic-condition-so-bad/article-35437"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/shehbaz-sharif.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पाकिस्तान: शहबाज ने ईंधन की कीमतों में कमी को लेकर मंत्रालय से मांगा ब्यौरा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हुई गिरावट के मद्देनजर पंजाब उपचुनाव से कुछ दिन पहले पेट्रोलियम की कीमतों में कमी पर सुझाव देने के लिए वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालयों से ब्यौरा मांगा है। शहबाज ने कहा, ”मैंने पेट्रोलियम और वित्त मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पीओएल (पेट्रोलियम, तेल और स्नेहक) उत्पादों की कीमतों में हुई कमी का लाभ यहां के लोगों तक भी पहुंचाए, जो पहले से ही जबरदस्त आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और राहत मिलना उनका अधिकार है।” पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने कहा कि इस पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में तेल और गैस नियामक प्राधिकरण और अन्य मंत्रालयों व विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान एक तेल विपणन कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 15 रुपये और 30 रुपये प्रति लीटर की कमी की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ”अगर सरकार पेट्रोलियम लेवी फीस नहीं बढ़ाती है या इन ईंधनों पर जीएसटी नहीं लगाती है, तो कीमतों में कमी आ सकती है।” अधिकारी ने यह भी कहा कि अस्थायी रूप से होगा और कीमतें बुधवार शाम तक स्पष्ट हो जाएंगी। इस बीच, वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने भी मंगलवार को कहा कि पेट्रोलियम की कीमतों को कम करने संबंधी ब्यौरा आवश्यक कार्रवाई के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री शरीफ को भेजा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार ने बेलआउट पैकेज के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सिफारिशों का स्वीकार कर लिया है। इस बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की दो प्रमुख शर्तों में से एक पेट्रोल-डीजल पर दी जाने वाली सब्सिडी को कम करना है। यहां 26 मई से पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल, मिट्टी के तेल और हल्के डीजल तेल की कीमतें 66 फीसदी (या 99 रुपये), 92 फीसदी (132.39 रुपये), 95 फीसदी (111.95 रुपये) और 80 फीसदी (100.59 रुपये) पर आसमान छू रही हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 12:04:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अर्जेंटीना में आर्थिक संकट, वित्त मंत्री ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[ब्यूनस आयर्स। अर्जेंटीना में गहराते आर्थिक संकट के बीच वित्त मंत्री मार्टिन गुजमैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है जिससे देश के भविष्य की आर्थिक भविष्य की नीति पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। बीबीसी ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। । वर्ष 2019 से वित्त मंत्री का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/economic-crisis-in-argentina-finance-minister-resigns/article-35141"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/martin-guzman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूनस आयर्स।</strong> अर्जेंटीना में गहराते आर्थिक संकट के बीच वित्त मंत्री मार्टिन गुजमैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है जिससे देश के भविष्य की आर्थिक भविष्य की नीति पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। बीबीसी ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। । वर्ष 2019 से वित्त मंत्री का दायित्व संभालने वाले गुजमैन अर्जेंटीना के ऋण के पुनर्गठन पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत में अपने देश का नेतृत्व कर रहे थे। राष्ट्रपति अल्बर्टो फर्नांडीज को लिखे एक पत्र में उन्होंने सरकार के भीतर आंतरिक विभाजन पर संकेत दिया और अपने उत्तराधिकारी को चुनने के लिए शासी गठबंधन के भीतर एक राजनीतिक समझौता करने का आह्वान किया। वैश्विक खाद्य और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के बीच अर्जेंटीना 60 प्रतिशत मुद्रास्फीति और कमजोर मुद्रा से जूझ रहा है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jul 2022 10:00:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>दिवंगत जेल वार्डर की पत्नी को 50 लाख की मदद</title>
                                    <description><![CDATA[पंचकूला। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक-कारागार, मोहम्मद अकील ने आज यहां अपने कार्यालय में सोनीपत के नहरी गांव निवासी दिवंगत जेल वार्डर राजेंद्र की पत्नी कविता को 50 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। यह आर्थिक सहायता राशि बीमा के रूप में एचडीएफसी बैंक के साथ किए एक समझौते के तहत प्रदान की गई। इस अवसर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/50-lakh-help-to-the-wife-of-the-late-jail-warder/article-34970"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/untitled-13-9.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पंचकूला।</strong> हरियाणा के पुलिस महानिदेशक-कारागार, मोहम्मद अकील ने आज यहां अपने कार्यालय में सोनीपत के नहरी गांव निवासी दिवंगत जेल वार्डर राजेंद्र की पत्नी कविता को 50 लाख रुपये का चेक प्रदान किया।</p>
<p>यह आर्थिक सहायता राशि बीमा के रूप में एचडीएफसी बैंक के साथ किए एक समझौते के तहत प्रदान की गई। इस अवसर पर अकील ने कहा कि जेल विभाग अपनी कल्याणकारी योजनाओं के तहत पीड़ित परिवार को हरसम्भव सहायता प्रदान करेगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/50-lakh-help-to-the-wife-of-the-late-jail-warder/article-34970</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 15:55:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में एक-तिहाई आबादी को हर माह दो हजार रुपए सहायता राशि : शहबाज</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में आर्थिक संकट के बीच करीब एक तिहाई आबादी, 1.4 करोड़ परिवारों को प्रति माह दो हजार रुपए की सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है। डॉन अखबार ने यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देर रात करीब 11 बजे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/two-thousand-rupees-every-month-to-one-third-of-the-population-in-pakistan-shahbaz/article-33986"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/shehbaz-sharif.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में आर्थिक संकट के बीच करीब एक तिहाई आबादी, 1.4 करोड़ परिवारों को प्रति माह दो हजार रुपए की सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है। डॉन अखबार ने यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देर रात करीब 11 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए 28 अरब रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस राहत पैकेज के तहत करीब एक-तिहाई आबादी यानि 1.4 करोड़ परिवारों को प्रत्येक महीने सहायता के रूप में दो हजार रुपए दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने संबोधन में एक दिन पहले पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में की गई वृद्धि को जायज बताते हुए कहा कि देश को आर्थिक दिवालियापन से बचाने के लिए यह वृद्धि की गई है। उल्लेखनीय है कि इस घोषणा के एक दिन पहले ही पाकिस्तान में पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल पर मिलने वाली सब्सिडी हटा दी, और र्इंधन के दामों में 30 रुपए की वृद्धि की गई थी।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 May 2022 10:54:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जल रहा श्रीलंका, महिंदा राजपक्षे के घर में लगाई आग, 5 की मौत, 12 मंत्रियों के घर फूंके</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो (एजेंसी)। श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के मद्देनजर आक्रोशित सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों महिंदा राजपक्षे के पुश्तैनी मकान को आग के हवाले कर दिया। घटना के वायरल वीडियो फुटेज में पूरे घर को आग की लपटों से घिरा हुआ दिखाया गया है और इसमें लोगों को सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भी देखा जा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/anti-government-protest-in-sri-lanka-due-to-economic-crisis/article-33187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mahinda-rajapaksa-house-burnt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो (एजेंसी)।</strong> श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के मद्देनजर आक्रोशित सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों महिंदा राजपक्षे के पुश्तैनी मकान को आग के हवाले कर दिया। घटना के वायरल वीडियो फुटेज में पूरे घर को आग की लपटों से घिरा हुआ दिखाया गया है और इसमें लोगों को सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। देश में मौजूदा सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच प्रधानमंत्री के पद से महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद यह घटना सामने आई है। वहीं इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई है और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए है। इस हिंसा में एक सांसद की भी मौत हो गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>श्रीलंका में हालात बेकाबू</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के हंबनटोटा में महिंदा राजपक्षे के पैतृक घर में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इस घटना के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के घरों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे पहले श्रीलंका में भड़की हिंसा के बाद प्रधानमंत्री राजपक्षे ने अपना इस्तीफा दे दिया। इस हिंसा में श्रीलंका के एक सांसद समेत पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका में आर्थिक हालात बिगड़ने को लेकर पिछले कई हफ्तों से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, लेकिन जब सरकार के पास आयात के लिए भी फंड खत्म हो गया तो लोग सड़कों पर उतर आए और हिंसा फैलने लगी। लोगों का गुस्सा पीएम राजपक्षे और उनके समर्थक नेताओं पर उतर रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के तमाम शहरों में पूरी तरह से कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस हिंसा को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस और बल का प्रयोग कर रही है। लेकिन फिलहाल हालात काबू से बाहर नजर आ रहे हैं और प्रदर्शन करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के घटनाक्रम पर भारत करीब से नजर बनाए हुए है। इस बीच कोलंबो में भारतीय उच्चयोग ने संकट की स्थिति में भारतीयों की मदद के लिए आपात मोबाइल नंबर +94-773727832 जारी किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">पुलिस ने बताया है कि, आक्रोशित भीड़ ने पूर्व मंत्री जॉनसन फर्नांडो के कुरुनेगाला और कोलंबों स्थित कार्यालयों पर हमला किया है। उनके बार में भी आग लगाये जाने की खबर है। पूर्व मंत्री नीमल लांजा के आवास पर भी हमला किया गया है जबकि महापौर समन लाल फर्नांडो के आवास में आग लगा दी गई।</li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 11:41:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आरबीआई का महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास पर फोकस, नीतिगत दरें रखीं यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आसमान छूती महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास दर को तेज बनाए रखने के उद्देश्य से रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपनी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/rbi-focus-on-inflation-control-and-economic-growth-kept-policy-rates-unchanged/article-32201"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/rbi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आसमान छूती महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास दर को तेज बनाए रखने के उद्देश्य से रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपनी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की चालू वित्त वर्ष की आज समाप्त पहली द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद कहा, यूरोप में युद्ध की शुरूआत के साथ हम नई और विशाल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यूरोप में संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है। ऐसे परिदृश्य में महंगाई को नियंत्रित करने और विकास दर में तेजी बनाए रखने के लिए एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तरलता सुनिश्चित करने के लिए हालांकि रिवर्स रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा अन्य दरों को पूर्व के स्तर पर यथावत रखा गया है। आरबीआई ने प्रमुख मौद्रिक नीतिगत दर रेपो रेट को चार प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है। गर्वनर ने कहा कि आरबीआई के लिए कोरोना महामारी के दौरान लंबे समय से आपूर्ति का बाधित होना चिंताजनक रहा है। इसने जिंस और वित्तीय बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। रिवर्स रेपो दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 फीसदी कर दिया गया है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई अनुमान फरवरी की मौद्रिक नीति समीक्षा के 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत और विकास दर अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि एमपीसी ने कच्चे तेल की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 16.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत और चौथी एवं अंतिम तिमाही में चार प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। खाद्य तेल की कीमतें निकट अवधि में ऊंची रहने की संभावना है। फरवरी के अंत से कच्चे तेल में तेजी महंगाई के बढ़ने का एक प्रमुख कारक रही है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022-23 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर के 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 6.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.0 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.1 प्रतिशत रह सकती है।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 12:49:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत: आर्थिक सर्वेक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2021-22 पेश करते हुए कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्?पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। समीक्षा में इस बात का भी उल्?लेख किया गया है कि चालू वित्?त वर्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/service-sector-contributes-50-percent-to-gdp-economic-survey/article-30399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2021-22 पेश करते हुए कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्?पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। समीक्षा में इस बात का भी उल्?लेख किया गया है कि चालू वित्?त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में क्रमबद्ध सुधार भी दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि 2021-22 की प्रथम छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर 10.8 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हुई। वर्ष 2021-22 में समग्र सेवा क्षेत्र का जीवीए 8.2 प्रतिशत बढ़ने की आशा है। हालांकि, आर्थिक समीक्षा में इस बात पर विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि कोरोना के ओमि?क्रॉन वैरिएंट के फैलने के कारण विशेषकर उन क्षेत्रों में निकट भविष्य में कुछ हद तक अनिश्चितता रहने की संभावना है जिनमें मानव संपर्क आवश्यक होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विश्व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में भागीदारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में सेवा क्षेत्र एफडीआई प्रवाह का सबसे बड़ा प्राप्?तकर्ता रहा है। वर्ष 2021-22 की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र को 16.73 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ है। वित्?तीय, व्?यापार, आउटसोर्सिंग, अनुसंधान एवं विकास, कुरियर, शिक्षा उप-क्षेत्र के साथ प्रौद्योगिकी परीक्षण एवं विश्?लेषण में एफडीआई अधिक रहा है। आर्थिक समीक्षा में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वैश्विक सेवा निर्यात में भारत का प्रमुख स्?थान रहा। वर्ष 2020 में वह शीर्ष 10 सेवा निर्यातक देशों में बना रहा। विश्?व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में इसकी भागीदारी वर्ष 2019 में 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 4.1 प्रतिशत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया कि व्?यापारिक निर्यात की तुलना में भारत के सेवाओं के निर्यात पर कोविड-19 प्रेरित वैश्विक लॉकडाउन का प्रभाव कम गंभीर था। परिवहन सेवा के निर्यात पर कोविड-19 के प्रभाव के बावजूद सॉफ्टवेयर निर्यात, व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं की सहायता की बदौलत सेवाओं के सकल निर्यात में दहाई आंकड़े में वृद्धि दर्ज की गई जिसके परिणामस्वरूप वित्?त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में सेवाओं के शुद्ध निर्यात में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">विकास एवं नवाचार के अगले स्तर तक पहुंचाएगा।</h4>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक समीक्षा में आईटी-बीपीएम सेवा को भारत के सेवा क्षेत्र के प्रमुख खंड के रूप में वर्णित किया गया है। नेस्?कॉम के अनुमान के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान आईटी-बीपीएम राजस्व (ई-कॉमर्स के अतिरिक्त) वार्षिक 2.26 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख कर्मचारियों को जोड़ते हुए 194 अरब डॉलर तक पहुंच गया। समीक्षा में कहा गया है कि आईटी-बीपीएम क्षेत्र के अंतर्गत आईटी सेवाओं की हिस्?सेदारी अधिक है। पिछले साल के दौरान अन्य सेवा प्रदाता विनियमों, दूरसंचार क्षेत्र के सुधारों और उपभोक्?ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 सहित क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए कई नीतिगत पहल की गई। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि इससे प्रतिभा तक अभिगम का विस्?तार होगा, रोजगार सृजन बढ़ेगा और इस क्षेत्र को विकास एवं नवाचार के अगले स्?तर तक पहुंचाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में बताया गया है कि भारत में पिछले 6 वर्षों में स्टार्ट-अप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकांश स्?टार्ट-अप सेवा क्षेत्र से संबंधित हैं। 10 जनवरी 2022 तक 61,400 से ज्?यादा स्टार्ट-अप को मान्?यता दिया जा चुका है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भारत में 2021 में रिकॉर्ड 44 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न स्थिति तक पहुंचे। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि बौद्धिक संपदा विशेषकर पेटेंट आधारित अर्थव्यवस्था की कुंजी है। भारत में दायर पेटेंट की संख्या 2010-11 में 39,400 से बढ़कर 2020-21 में 58,502 हो गई है और इसी अवधि के दौरान भारत में दिये गये पेटेंट 7,509 से बढ़कर 28,391 हो गए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया है कि सामान्यत</h4>
<p style="text-align:justify;">जीडीपी वृद्धि, विदेशी मुद्रा आय और रोजगार में पर्यटन क्षेत्र का प्रमुख योगदान रहता है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण भारत सहित सभी जगहों पर वैश्विक यात्रा तथा पर्यटन को कमजोर करने वाला प्रभाव पड़ा है। आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का पुन: आरंभ होना काफी हद तक यात्रा प्रतिबंधों, सामंजस्यपूर्ण सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा उपभोक्ताओं के विश्वास को बहाल करने में सहायता करने के लिए प्रभावी संचार के संदर्भ में देशों के बीच एक समन्वित प्रतिक्रिया पर निर्भर करता रहेगा। वंदे भारत मिशन के तहत विशेष अंतर्राष्?ट्रीय उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जो वर्तमान में अपने 15वें चरण में है और 63.55 लाख यात्रियों को ले जा चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा में कहा गया है कि बंदरगाहों का विकास अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। बंदरगाह आयात-निर्यात कार्गो का लगभग 90 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 70 प्रतिशत संभालते हैं। मार्च 2021 तक सभी बंदरगाहों की कुल कार्गो क्षमता बढ़कर 1,246.86 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) हो गई, जबकि मार्च 2014 में 1052.23 एमटीपीए थी। वर्ष 2020-21 में कोविड-19 के कारण उत्पन्न बाधाओं से प्रभावित होने के बाद अप्रैल-नवम्?बर 2021 के दौरान 10.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किये जाने के साथ वर्ष 2021-22 में बंदरगाह यातायात में भी वृद्धि हुई है। देश में बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देने के प्रति लक्षित सागरमाला कार्यक्रम का भी समीक्षा में उल्लेख किया गया है। वर्तमान में 5.53 लाख करोड़ रुपये की कुल 802 परियोजनाएं इस कार्यक्रम का अंग हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 16:58:20 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ी कंपनियों का मुनाफा आर्थिक समृद्धि नहीं : सोनिया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि सरकार के प्रवक्ता लगातार अर्थव्यवस्था में सुधार की बात कर रहे हैं लेकिन इसका असर जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा है और कुछ ही चुनिंदा पूजी पतियों को इसका लाभ मिल रहा है। श्रीमती गांधी ने बुधवार को यहां संसद के केंद्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/profit-of-big-companies-is-not-economic-prosperity/article-28977"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/minister-of-the-modi-government-met-sonia-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि सरकार के प्रवक्ता लगातार अर्थव्यवस्था में सुधार की बात कर रहे हैं लेकिन इसका असर जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा है और कुछ ही चुनिंदा पूजी पतियों को इसका लाभ मिल रहा है। श्रीमती गांधी ने बुधवार को यहां संसद के केंद्रीय कक्ष में कांग्रेस संसदीय पार्टी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ शेयरों के दाम बढ़ना और चंद कंपनियों को फायदा होना ना अर्थवयवस्था में सुधार है और ना ही यह किसी तरह की आर्थिक प्रगति नहीं है। उनका कहना था कि आम आदमी को विकास का लाभ नहीं मिल रहा है, बेरोजगारी चरम पर है और लोगों का काम धंधा चौपट पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं कर रही है बल्कि बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, रेल, एयरपोर्ट आदि को बेच रही है और उससे पैसा जुटा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले सात दशकों के दौरान मेहनत से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को खड़ा किया गया है लेकिन मोदी सरकार इन्हें ध्वस्त करने में लगी हुई है और सरकारी कंपनियों को अनान फानन में बेचा जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोट बंदी लागू की थी तो उसी समय से देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त होना शुरू हो गई थी और वह अब तक नहीं समझ पाई है। अर्थ्यवस्था में तेजी से सुधार के सरकार के दावे निरर्थक हैं । उन्होंने सवाल किया कि यह जानना जरूरी है कि यह सुधार किसके लिए हो रहा है। उन्होंने महंगाई को आम लोगो कि कमर तोड़ने वाला बताया और कहा कि सरकार इस रोकने मै असफल हो रही है। उन्होंने हाल में तेल के दम घटाने को अपर्याप्त बताया और कहा कि कीमतें आम आदमी की पहुंच में होना आवश्यक है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 12:46:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विदेश मंत्री जयशंकर ने किया मेक्सिको और भारत के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मेक्सिको और भारत के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने का आग्रह करते हुए मेक्सिको के कारोबारियों को भारत में निवेश करने के लिए कहा है। जयशंकर ने मंगलवार को मेक्सिको सिटी में दोनों देशों के कारोबारियों के साथ एक बैठक के बाद ट्वीट कर कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मेक्सिको और भारत के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने का आग्रह करते हुए मेक्सिको के कारोबारियों को भारत में निवेश करने के लिए कहा है। जयशंकर ने मंगलवार को मेक्सिको सिटी में दोनों देशों के कारोबारियों के साथ एक बैठक के बाद ट्वीट कर कहा कि मेक्सिको के व्यापार प्रतिनिधियों और मेक्सिको में काम कर रही भारतीय कंपनियों के साथ सार्थक बातचीत की। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच विशेषाधिकार प्राप्त साझीदारी भी आगे बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री ने बैठक के दौरान आईसीटी और फार्मा क्षेत्र सहित मेक्सिको में काम कर रही भारतीय कंपनियों के सामने आने वाले कुछ मुद्दों को भी हल किया। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के मुताबिक मेक्सिको को कारोबारियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया गया है और भारतीय व्यापारियों को निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">A productive engagement with Mexican business representatives and Indian companies operating in Mexico.</p>
<p>Made a case to Mexican business on the attractions of investing in India.</p>
<p>Encouraged Indian business to enhance our exports, in line with PM <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a>’s directive. <a href="https://t.co/b7CtSXqlqj">pic.twitter.com/b7CtSXqlqj</a></p>
<p>— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) <a href="https://twitter.com/DrSJaishankar/status/1442901968129720325?ref_src=twsrc%5Etfw">September 28, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;">विदेश मंत्री की यात्रा 26-28 सितंबर तक</h4>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, उन्होंने मेक्सिको सिटी से 50 किमी उत्तर पूर्व में स्थित प्राचीन मेसोअमेरिकन शहर तियोतिहुआकान का दौरा किया। यह शहर यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। उन्होंने कहा, ‘एक और प्राचीन सभ्यता की विरासत का सम्मान कर रहा हूं। तेओतिहुआकान में सूर्य और चंद्रमा के पिरामिड में हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">जयशंकर मेक्सिको की स्वतंत्रता की 200वीं वर्षगांठ के समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने गये हैं। इस वर्ष, मेक्सिको 1821 में स्पेन से आजादी मिलने की 200वीं वर्षगांठ मना रहा है। विदेश मंत्री की यात्रा 26-28 सितंबर तक है। वह मेक्सिको के विदेश मंत्री मासेर्लो एब्रार्ड कैसाबोन के निमंत्रण पर यहां आये हैं। विदेश मंत्री के रूप में यह उनकी पहली मेक्सिको यात्रा है। विश्व के अन्य देशों के नेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि भारत और मेक्सिको ने 2007 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को विशेषाधिकार प्राप्त साझीदारी में तब्दील किया था। अगस्त 2020 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनायी गयी थी। मेक्सिको 1950 में भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला लैटिन अमेरिका का पहला देश था। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, हेक्सावेयर, टेक महिंद्रा, एनआईआईटी आदि जैसी कई भारतीय कंपनियों ने पहले से ही मेक्सिको में सफलता का परचम फहराया हुआ है। साथ ही सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, रैनबैक्सी, वॉकहार्ट आदि जैसी बड़ी फार्मा कंपनियों और आॅटो कंपोनेंट निमार्ताओं जैसे पीएमपी आॅटो, जेके टायर ने भी मेक्सिको में सुविधाएं और संयंत्र स्थापित कर रखे हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/external-affairs-minister-jaishankar-urged-to-increase-economic-cooperation-between-mexico-and-india/article-27294</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Sep 2021 09:48:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत को पड़ोसी देशों की मदद करनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीलंका एक कठिन आर्थिक संकट से जूझ रहा है। श्रीलंका ने खाद्य संकट को लेकर आपातकाल का ऐलान किया है, क्योंकि प्राइवेट बैंकों के पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी है। राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे ने चीनी, चावल और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की जमाखोरी रोकने के लिए आपातकालीन नियम-कायदों को लागू करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/india-should-help-neighboring-countries/article-26733"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/india-flag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">श्रीलंका एक कठिन आर्थिक संकट से जूझ रहा है। श्रीलंका ने खाद्य संकट को लेकर आपातकाल का ऐलान किया है, क्योंकि प्राइवेट बैंकों के पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी है। राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे ने चीनी, चावल और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की जमाखोरी रोकने के लिए आपातकालीन नियम-कायदों को लागू करने के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल खाने का संकट नहीं है, बल्कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी मुसीबत का संकेत है और यह वास्तव में आर्थिक आपातकाल का एलान है। यहां सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों के लिए है जो कोरोना की चेतावनी को हल्के में ले रहे हैं। कोरोना काल में श्रीलंका का पर्यटन उद्योग करीब-करीब ठप हो चुका है और वह जिन वस्तुओं के निर्यात पर निर्भर था, उसमें भी बहुत गिरावट आई।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेश न केवल कम हुआ, बल्कि विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से भी बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। इन दोनों का असर था कि विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये की कीमत में तेज गिरावट आई है। इस वर्ष अभी तक श्रीलंका में अमेरिकी डॉलर 7.5 फीसदी से ज्यादा महंगा हो चुका है। उधर केवल अगस्त के महीने में ही श्रीलंका में महंगाई दर में छह प्रतिशत का उछाल आया है। बाजार में दाम का जायजा लेने से पहले यह जानना आवश्यक है कि एक भारतीय रुपये में 2.75 श्रीलंकाई रुपये आते हैं और एक डॉलर की कीमत श्रीलंका में दो सौ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। कोलंबो की एक वेबसाइट ने महंगाई का आलम दिखाने के लिए कुछ चीजों के अगस्त 2020 और अगस्त 2021 के दाम बताए हैं। वहां एक किलो हरी मूंग 341 रुपये से 828 रुपये पर पहुंच गई है, जबकि प्याज 219 से 322 रुपये, मलका की दाल 167 से 250 रुपये, चीनी 135 से 220 रुपये, काबुली चने की दाल 240 से 314 रुपये पर पहुंच चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है, ज्यादातर चीजों के दाम 30 से 200 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। दाम बढ़ने के साथ ही खाने पीने की वस्तुओं की किल्लत भी होने लगी है और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने खबरें दी हैं कि दुकानों के बाहर लंबी लाइनें दिखाई पड़ रही हैं। देश के निजी बैंकों ने कह दिया कि आयातकों को देने के लिए अब उनके पास डॉलर नहीं बचे हैं। और अब पिछले दो हफ्तों से तो सरकारी अफसर अनाज और चीनी के गोदामों पर छापे मारकर उनके स्टॉक भी जब्त करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खबर है कि अब तक हजार से ज्यादा छापे मारे जा चुके हैं। साथ ही राशन के दाम भी तय किए जा रहे हैं। इतिहास में पहली बार बांग्लादेश ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से उसे करेंसी देकर श्रीलंका की आर्थिक मदद की है। इस वक्त श्रीलंका बड़ी मुसीबत में है और किसी भी अच्छे पड़ोसी की तरह भारत को इस वक्त उसकी मदद करनी ही चाहिए। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यदि भारत ने कोई मदद की पेशकश की तो चीन मौके का फायदा उठाने के लिए बिल्कुल तैयार बैठा है। साथ ही यह भी ध्यान रहे कि जल्द ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान से भी इसी तरह के खाद्य संकट की खबरें आ सकती हैं। तब क्या करना होगा, इसकी तैयारी वक्त रहते की जाए, तो बेहतर रहेगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Sep 2021 09:50:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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