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                <title>Health News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर में जीवनशैली विकारों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर “जीवनशैली गत विकारों में आयुर्वेद की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्विद्यालय), जयपुर के सभागार में हुआ। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एवं विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-day-national-workshop-on-lifestyle-disorders-launched-at-national-institute/article-91271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/ayurveda-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>11th Ayurveda Day: जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर “जीवनशैली गत विकारों में आयुर्वेद की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्विद्यालय), जयपुर के सभागार में हुआ। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एवं विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं ने जीवनशैली से उत्पन्न विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्विद्यालय जयपुर के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ला ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सह आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुमन शर्मा, विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय सचिव डॉ. किशोरी लाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रदेश महासचिव डॉ पवन सिंह शेखावत एवं चिकित्सक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी डॉ. जे.एस. राजावत ने भगवान धन्वंतरि प्रतिमा समक्ष दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. संजीव शर्मा, कुलपति, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्विद्यालय), जयपुर ने कहा कि “आज की बदलती जीवनशैली ने अनेक ऐसे विकारों को जन्म दिया है, जो लंबे समय तक व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद केवल रोग के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण, रोग की रोकथाम और व्यक्ति की समग्र जीवनशैली में सुधार का विज्ञान है। इसलिए जीवनशैली विकारों के स्थायी एवं समग्र समाधान की दिशा में आयुर्वेद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. गोविंद सहाय शुक्ला, कुलगुरु, आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर ने कहा कि “आयुर्वेद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह रोग के साथ-साथ रोगी को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। वर्तमान समय में जीवनशैली विकारों की बढ़ती चुनौती के बीच आयुर्वेद के सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर जनस्वास्थ्य के लिए प्रभावी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">सह आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुमन शर्मा ने कहा कि “महिलाओं में पीसीओडी, बंध्यत्व तथा अन्य हार्मोनल एवं जीवनशैली संबंधी विकार तेजी से सामने आ रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेद की आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं पंचकर्म आधारित दृष्टि रोग के मूल कारणों पर कार्य करने का व्यापक अवसर प्रदान करती है।”</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय सचिव डॉ. किशोरी लाल शर्मा ने कहा कि “आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए उसके पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। इस प्रकार की राष्ट्रीय कार्यशालाएं चिकित्सकों के अनुभव, शोध और व्यावहारिक ज्ञान को एक साझा मंच प्रदान करती हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि “जीवनशैली विकारों की चुनौती केवल चिकित्सा क्षेत्र की चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक एवं जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। आयुर्वेद की जीवनशैली आधारित अवधारणाओं को जन-जन तक पहुंचाकर इन विकारों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।”</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के प्रदेश महासचिव डॉ. पवन सिंह शेखावत ने बताया कि “इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं को जीवनशैली विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव, नवीन शोध एवं उपचार पद्धतियों से परिचित कराना है। कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञ अपने चिकित्सकीय अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो रहा है।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि कार्यशाला के प्रथम दिवस देश के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. नारायण साहने एवं प्रो. के. भारती ने पीसीओडी, बंध्यत्व तथा मूत्रजनित विकारों सहित विभिन्न जीवनशैली संबंधी विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विशेष व्याख्यान दिए। विशेषज्ञों ने आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, पंचकर्म तथा अन्य आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से ऐसे विकारों के समग्र प्रबंधन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के प्रदेश प्रभारी चिकित्सक प्रकोष्ठ डॉ. जे.एस. राजावत ने कहा कि “चिकित्सकों के लिए यह आवश्यक है कि वे जीवनशैली विकारों के उपचार के साथ रोगियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करें। आयुर्वेद का निवारक एवं स्वास्थ्यवर्धक दृष्टिकोण इस दिशा में अत्यंत उपयोगी है।”</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक जीवनशैली में अनियमित खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, अनियमित दिनचर्या एवं प्राकृतिक जीवनचर्या से दूरी जीवनशैली विकारों के प्रमुख कारकों में शामिल हैं। आयुर्वेद इन विकारों के प्रबंधन में व्यक्ति की प्रकृति, आहार, दिनचर्या और जीवनशैली को केंद्र में रखते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाता है। कार्यशाला में चिकित्सकों, आयुर्वेद विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन भी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, चिकित्सकीय अनुभवों का आदान-प्रदान एवं वैज्ञानिक विमर्श जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:39:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>खून की एक जांच बताएगी शरीर के अंग कितने जवान या बूढ़े हैं, स्टैनफोर्ड की रिसर्च में सामने आई बड़ी खोज</title>
                                    <description><![CDATA[खून की एक जांच बताएगी शरीर के अंग कितने जवान या बूढ़े हैं, स्टैनफोर्ड की रिसर्च में सामने आई बड़ी खोज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-blood-test-will-reveal-how-young-or-old-the-body-s-organs-are--a-major-discovery-from-stanford-research/article-90213"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/health-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> हमारी उम्र सिर्फ जन्मतिथि से तय नहीं होती। शरीर के अंदर मौजूद अलग-अलग अंग अपनी उम्र से तेज या धीमी गति से बूढ़े हो सकते हैं। किसी व्यक्ति की उम्र भले ही 50 साल हो, लेकिन उसका दिमाग जैविक रूप से उससे कहीं ज्यादा उम्र का हो सकता है। इसी <strong>'ऑर्गन एज' यानी अंगों की जैविक उम्र</strong> को समझने की दिशा में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट <strong>टोनी वायस-कोरे</strong> और उनकी टीम ने एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति विकसित की है, जिसमें खून में मौजूद हजारों प्रोटीन का विश्लेषण करके शरीर के अलग-अलग अंगों की जैविक उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है। यह शोध जुलाई 2025 में <em>Nature Medicine</em> में प्रकाशित हुआ था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">11 अंगों की जैविक उम्र का लगाया गया अनुमान</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के <strong>44,498 लोगों</strong> के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन प्रतिभागियों की उम्र 40 से 70 वर्ष के बीच थी। वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद करीब <strong>2,916 प्रोटीन</strong> का इस्तेमाल करते हुए 11 अलग-अलग अंगों की जैविक उम्र का अनुमान लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तकनीक का मकसद यह देखना है कि किसी व्यक्ति का कोई अंग उसकी वास्तविक उम्र के मुकाबले जैविक रूप से कितना 'युवा' या 'बूढ़ा' दिखाई देता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने ऑर्गन से जुड़े प्रोटीन के स्तर और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यानी भविष्य में केवल यह जानना ही जरूरी नहीं होगा कि <strong>'आपकी उम्र कितनी है?'</strong>, बल्कि यह भी समझने में मदद मिल सकती है कि <strong>'आपके शरीर के अलग-अलग अंगों की उम्र कितनी है?'</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">दिमाग की उम्र और अल्जाइमर का कनेक्शन</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दिमाग से जुड़ा रहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का दिमाग उनकी वास्तविक उम्र की तुलना में अधिक बूढ़ा दिखाई दिया, उनमें आगे चलकर <strong>अल्जाइमर रोग का खतरा काफी अधिक</strong> था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक उम्रदराज दिमाग वाले लोगों में अल्जाइमर का जोखिम करीब <strong>3.1 गुना</strong> था। इसके विपरीत, जैविक रूप से युवा दिमाग वाले लोगों में यह जोखिम काफी कम पाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की स्वास्थ्य स्थिति को लंबे समय तक ट्रैक किया। फॉलो-अप अवधि <strong>17 साल तक</strong> रही। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि शुरुआत में दिखाई देने वाली ऑर्गन एज और भविष्य में होने वाली बीमारियों के बीच किस तरह का संबंध हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिर्फ दिमाग ही नहीं, दूसरे अंगों की उम्र भी महत्वपूर्ण</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिसर्च में यह भी सामने आया कि शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग गति से बूढ़े होते हैं। किसी व्यक्ति का एक अंग जैविक रूप से उम्रदराज हो सकता है, जबकि दूसरा अंग उसी व्यक्ति की उम्र के मुकाबले अपेक्षाकृत युवा रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक उम्र वाले अंगों का संबंध भविष्य में कई बीमारियों के जोखिम से था। उदाहरण के लिए, अधिक उम्र वाले हृदय का संबंध हार्ट फेलियर और एट्रियल फिब्रिलेशन से, किडनी और पैंक्रियाज की उम्र का संबंध क्रॉनिक किडनी डिजीज से और फेफड़ों की उम्र का संबंध COPD से पाया गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जैविक उम्र और मौत के जोखिम का भी संबंध</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। जिन लोगों के कई अंग जैविक रूप से ज्यादा उम्रदराज पाए गए, उनमें आगे चलकर मृत्यु का जोखिम भी बढ़ता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अध्ययन में <strong>2 से 4 उम्रदराज अंगों</strong> वाले लोगों में मृत्यु जोखिम का हेजर्ड रेशियो 2.3, <strong>5 से 7 अंगों</strong> वाले लोगों में 4.5 और <strong>8 या उससे ज्यादा अंगों</strong> के उम्रदराज होने पर 8.3 पाया गया। वहीं युवा दिमाग और युवा इम्यून सिस्टम दोनों का होना बेहतर दीर्घायु से जुड़ा था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जीवनशैली का भी पड़ता है असर</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस शोध की खास बात यह है कि ऑर्गन एज केवल उम्र या जीन से तय होती हुई नहीं दिखाई दी। वहीं नियमित जोरदार व्यायाम और कुछ बेहतर आहार संबंधी आदतें अपेक्षाकृत युवा अंगों से जुड़ी थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे संकेत मिलता है कि शरीर की जैविक उम्र को समझना भविष्य में केवल बीमारी की पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार के प्रभाव को समझने के लिए भी उपयोगी हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या यह टेस्ट अभी अस्पतालों में उपलब्ध है?</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यहां एक जरूरी बात समझना महत्वपूर्ण है। यह शोध <strong>ऑर्गन की जैविक उम्र का अनुमान लगाने की वैज्ञानिक क्षमता</strong> को दिखाता है, लेकिन इसे अभी सामान्य अस्पतालों में होने वाली कोई साधारण, नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अध्ययन में अत्याधुनिक प्रोटिओमिक्स तकनीक और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए आम व्यक्ति के लिए इसे अभी 'एक बार खून देने पर 11 अंगों की उम्र की पक्की रिपोर्ट' के रूप में समझना सही नहीं होगा। शोधकर्ताओं ने भी इसे भविष्य में ऑर्गन हेल्थ और बीमारी के जोखिम को समझने की संभावित दिशा के रूप में पेश किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भविष्य में बदल सकता है बीमारी की पहचान का तरीका</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर इस तरह की तकनीक आगे चलकर क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए पर्याप्त रूप से मान्य और सुलभ होती है, तो डॉक्टरों के पास बीमारी सामने आने से पहले जोखिम को समझने का एक नया तरीका हो सकता है। किसी व्यक्ति का दिमाग, हृदय, किडनी या इम्यून सिस्टम उसकी उम्र के मुकाबले तेजी से बूढ़ा हो रहा है या नहीं—इस तरह की जानकारी भविष्य में व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, अभी इसे बीमारी की भविष्यवाणी करने वाला अंतिम या निश्चित टेस्ट नहीं माना जा सकता। <strong>रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शरीर की उम्र एक जैसी गति से नहीं बढ़ती और खून में मौजूद प्रोटीन इस प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 11:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>FDC Medicine Ban India: 4 साल से कम उम्र के बच्चों की दवाओं को लेकर आया केंद्र सरकार का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले Fixed Dose Combination पर रोक लगा दी है। जानें सरकार का नया फैसला और बच्चों की दवाओं पर इसका असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/fdc-medicine-ban-india-central-governments-big-decision-regarding-medicines/article-90028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/fdc-ban.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">FDC Medicine Ban India: नई दिल्ली। छोटे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले 'फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन' (एफडीसी) के निर्माण, बिक्री और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि अब इन दो सामग्रियों वाले किसी भी फॉर्मूलेशन का उत्पादन या बिक्री नहीं की जा सकेगी। साथ ही, कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे इन दवाओं के लेबल पर स्पष्ट चेतावनी लिखें कि इनका इस्तेमाल चार साल से कम उम्र के बच्चों पर नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस फैसले के पीछे बच्चों की सुरक्षा को सबसे बड़ा कारण बताया है। दरअसल, यह फैसला एक एक्सपर्ट कमेटी और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन का कॉम्बिनेशन चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस उम्र के बच्चों में इसके दुष्प्रभाव अधिक देखे जा सकते हैं, जबकि इसके सुरक्षित विकल्प बाजार में मौजूद हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इससे पहले 15 अप्रैल 2025 को जारी की गई अधिसूचना के जरिए सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले कुछ खास एफडीसी पर ही रोक लगाई थी, जिसमें उम्र से जुड़ी चेतावनी शामिल थी। लेकिन ताजा अधिसूचना के साथ सरकार ने इस नियम का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह रोक इन दोनों सामग्रियों वाले सभी तरह के फॉर्मूलेशन पर लागू होगी, चाहे वह किसी भी ब्रांड या डोज में हो। </p>
<p style="text-align:justify;">नई अधिसूचना के अनुसार, सभी मैन्युफैक्चरर्स को निर्देश दिया गया है कि वे इन फॉर्मूलेशन से जुड़े लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर स्पष्ट रूप से यह चेतावनी अनिवार्य रूप से लिखें - "फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल चार साल से कम उम्र के बच्चों पर नहीं किया जाना चाहिए।" यह अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जनहित में जारी की गई है और यह ऑफिशियल गजट में इसके प्रकाशन की तारीख से लागू हो जाएगी। इस फैसले के बाद अब बाजार में बिक रही सर्दी-जुकाम की कई लोकप्रिय सिरप और दवाओं पर असर पड़ने की संभावना है, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर छोटे बच्चों के लिए किया जाता था। Health News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Kidney Health Tips: किडनी के स्वास्थ्य के लिए छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी बीमारी की वजह</title>
                                    <description><![CDATA[किडनी को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें। जानिए किडनी की देखभाल के आसान और प्रभावी उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kidney-health-tips-small-negligence-towards-kidney-health-can-become/article-89225"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/kidney-health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। शरीर को स्वस्थ रखने की बात आती है तो ज्यादातर लोग दिल, फेफड़ों और वजन पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन किडनी की सेहत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जबकि किडनी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है, जो बिना रुके हर दिन अपना काम करती रहती है। यह खून को साफ करने, शरीर में मौजूद बेकार पदार्थों को बाहर निकालने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। किडनी में परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में कई बार इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते, लेकिन कुछ सामान्य आदतों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाकर किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।  Kidney Health Tips</p>
<p style="text-align:justify;">किडनी की सेहत के लिए सबसे जरूरी आदतों में से एक है शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखना। पानी की कमी होने पर किडनी को खून से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब के जरिए शरीर से अनावश्यक तत्व निकलते रहते हैं और किडनी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग हो सकती है, क्योंकि यह उम्र, मौसम, काम की प्रकृति और शरीर की स्थिति पर निर्भर करती है। गर्मी में ज्यादा पसीना निकलने वाले लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि कुछ बीमारियों में डॉक्टर पानी की मात्रा सीमित करने की सलाह भी देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किडनी को सुरक्षित रखने के लिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उनकी काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारी का संबंध दोनों तरफ से होता है। खराब किडनी भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर जांचना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। Kidney Health Tips</p>
<p style="text-align:justify;">खाने की आदतों का सीधा असर किडनी पर पड़ता है। ज्यादा नमक वाला भोजन, पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, ज्यादा तला हुआ खाना और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और किडनी दोनों पर दबाव बढ़ता है, इसलिए विशेषज्ञ संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं, जिसमें ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और जरूरत के अनुसार प्रोटीन शामिल हो। स्वस्थ भोजन सिर्फ किडनी को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर रखने में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी किडनी के लिए फायदेमंद माना जाता है। नियमित हल्की एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, योग, साइकिल चलाना या तैराकी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना एक तरह से किडनी की सुरक्षा करना है। Kidney Health Tips</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 16:23:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Health News: बिना खोपड़ी खोले ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन! भारतीय-अमेरिकी सर्जन ने विकसित की नई ब्रेन ट्यूमर सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर जगतकुमार पटेल ने बिना खोपड़ी खोले नाक के रास्ते ब्रेन ट्यूमर हटाने की नई सर्जरी तकनीक विकसित की। जानिए यह मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया कैसे मरीजों की रिकवरी को तेज बनाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/health-news-successful-operation-of-brain-tumor-without-opening-the/article-88965"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/indian-american-surgeon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">New Technology of Brain Tumor Surgery: न्यूयॉर्क। भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर जगतकुमार पटेल को बिना खोपड़ी खोले ब्रेन ट्यूमर हटाने की एक नई सर्जरी विकसित करने का श्रेय दिया गया है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं। पेंटागन के अनुसार, उन्होंने और एक आर्मी न्यूरोसर्जन ने नाक के जरिए खोपड़ी के निचले हिस्से में मौजूद ट्यूमर का ऑपरेशन करने का एक तरीका निकाला। पटेल ने कहा, "पहले, इनमें से ज्यादातर सर्जरी 'ओपन' तरीके से की जाती थीं, जो मरीज के लिए बहुत मुश्किल प्रक्रिया होती थी।" Health News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "आज अगर ट्यूमर सही साइज और जगह पर हो तो ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। नाक के जरिए हमें सबसे अच्छी पहुंच मिलती है और ट्यूमर को पूरी तरह से हटाने में आसानी होगी है।" हाल ही में, पटेल और लेफ्टिनेंट कर्नल चार्ल्स मिलर ने मरीन स्टाफ सार्जेंट एंडी आर्चर पर यह नई प्रक्रिया सफलतापूर्वक की, जिन्हें 15 साल से गंभीर सिरदर्द की समस्या थी। जब उन्हें हाल ही में देखने में दिक्कत होने लगी तो डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें पिट्यूटरी ग्लैंड के सामने गोल्फ बॉल के साइज (4.4 सेंटीमीटर) का एक ट्यूमर मिला, जो ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल रहा था। उन्हें बेथेस्डा में सेना के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र, वाल्टर रीड आर्मी नेशनल मेडिकल सेंटर लाया गया। पटेल और मिलर ने नाक के जरिए ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने के लिए इस नई, कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया को चुना।</p>
<p style="text-align:justify;">पेंटागन ने बताया कि पटेल ने नाक की जटिल बनावट से गुजरने और सर्जरी के लिए साफ रास्ता बनाने की योजना बनाई। पटेल ने एंडोस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल करके सर्जिकल मॉनिटर पर ट्यूमर की हाई-डेफिनिशन, क्लोज-अप तस्वीर दिखाई, जिससे मिलर सुरक्षित रूप से ट्यूमर को काटकर निकाल सके। पटेल ने कहा, "अगर उन्हें जरूरी हिस्सों तक पहुंचना हो तो मैं कैमरे को और पास ले जा सकता हूं, ताकि उन्हें सब कुछ साफ-साफ दिखे।" उन्होंने कहा, "नाक के रास्ते जाने में मेरी कुशलता तभी काम की है जब वे (मिलर) इतने कुशल हों कि वहां पहुंचने के बाद ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल सकें।"</p>
<p style="text-align:justify;">सर्जरी के दो दिन बाद, आर्चर में ऐसा कोई लक्षण नहीं दिख रहा था कि उनकी अभी-अभी दिमाग की बड़ी सर्जरी हुई हो। वे सर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट में बैठे हुए थे और उनकी नजर भी साफ होने लगी थी। पटेल ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि डिफेंस हेल्थ एजेंसी में किसी और के पास ऐसी टीम है जो खोपड़ी के निचले हिस्से की इतनी मुश्किल सर्जरी करती हो।" उन्होंने आगे कहा, "नाक के रास्ते से कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी (मिनिमली इनवेसिव अप्रोच) करना ज्यादा मुश्किल होता है और हमें इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि नाक के रास्ते सर्जरी करने के लिए (ट्यूमर) का एक खास जगह पर होना जरूरी है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rajasthan News: मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद आंखों में संक्रमण, पांच लोग जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के कुचामन सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद पांच मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण हुआ। सभी को एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, मेडिकल बोर्ड जांच में जुटा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-news-eye-infection-after-cataract-surgery-five-people-admitted/article-88911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/sms-govt-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kuchaman Hospital Cataract Surgery Case: जयपुर। राजस्थान के कुचामन सिटी स्थित सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद पांच मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण की घटना सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ऑपरेशन के बाद मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार जारी है। Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, सभी मरीजों की मोतियाबिंद की सर्जरी एक ही दिन की गई थी। सर्जरी के कुछ घंटों बाद ही उनकी आंखों में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे। स्थिति गंभीर होने पर स्थानीय अस्पताल ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक उच्चस्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित किया है। यह टीम मरीजों के उपचार की लगातार निगरानी कर रही है और संक्रमण के कारणों की भी जांच कर रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी मरीजों का उपचार निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, मरीजों की दृष्टि सुरक्षित रखने के लिए हर संभव चिकित्सीय प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही संक्रमण की वास्तविक वजह जानने के लिए आवश्यक मेडिकल जांच और नमूनों की परीक्षण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रभावित मरीजों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। सभी की आयु 65 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं ताकि संक्रमण की वजह स्पष्ट हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारियों पर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी। Rajasthan News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:43:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: मोटापा कम करने में मददगार है चिया सीड्स, जानिए इसे खाने के 5 आसान और हेल्दी तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा तेजी से बढ़ती समस्या बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/chia-seeds-are-helpful-in-reducing-obesity-know-5-easy/article-88641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/health-news.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा तेजी से बढ़ती समस्या बन गया है। बढ़ा हुआ वजन न केवल शरीर की फिटनेस को प्रभावित करता है, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। ऐसे में कई लोग वजन कम करने के लिए प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्प तलाशते हैं। इन्हीं में से एक है चिया सीड्स, जिसे सुपरफूड भी कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिया सीड्स में फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है और वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, केवल चिया सीड्स खाने से वजन कम नहीं होता। इसके साथ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चिया सीड्स खाने के आसान तरीके</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">1. चिया सीड्स को पानी में भिगोकर पिएं</h4>
<p style="text-align:justify;">एक से दो चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में 20-30 मिनट या रातभर भिगो दें। बीज फूलकर जेल जैसी बनावट में आ जाएंगे। इसे ऐसे ही पिया जा सकता है या स्वाद के लिए इसमें नींबू या संतरे का रस मिलाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. सलाद में मिलाकर खाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आप रोजाना सलाद खाते हैं, तो उसके ऊपर एक चम्मच चिया सीड्स छिड़क दें। इससे सलाद की पौष्टिकता बढ़ जाती है और पेट लंबे समय तक भरा रहने में मदद मिलती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. चिया सीड्स का पाउडर बनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">चिया सीड्स को हल्का पीसकर पाउडर तैयार किया जा सकता है। इस पाउडर को दही, स्मूदी, दलिया या अन्य हेल्दी व्यंजनों में मिलाकर खाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">4. चावल या क्विनोआ के साथ करें इस्तेमाल</h4>
<p style="text-align:justify;">आप चिया सीड्स को चावल, क्विनोआ या अन्य अनाज के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं। इससे भोजन का पोषण मूल्य बढ़ जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5. दलिया या ओट्स में मिलाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">नाश्ते में बनने वाले दलिया या ओट्स में एक चम्मच चिया सीड्स मिलाकर खाएं। यह फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का आसान तरीका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चिया सीड्स खाते समय रखें ये बातें</h4>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में कम मात्रा (1-2 चम्मच प्रतिदिन) से सेवन करें।<br />चिया सीड्स के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।<br />यदि आपको किसी प्रकार की एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या है या आप कोई दवा ले रहे हैं, तो नियमित सेवन से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।<br />केवल चिया सीड्स के भरोसे वजन कम होने की उम्मीद न करें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी उतने ही जरूरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोट:</strong> यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। किसी भी डाइट या उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।</p>
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Health News: मोटापा कम करने में मददगार है चिया सीड्स, जानिए इसे खाने के 5 आसान और हेल्दी तरीके
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:22:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Knee Pain Relief: घुटनों के दर्द व जकड़न से छुटकारे को आयुष मंत्रालय ने बताए आसान टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[घुटनों में दर्द, जकड़न और कमजोरी से राहत पाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए आसान 'नी मूवमेंट' योगाभ्यास का सही तरीका, फायदे और जरूरी सावधानियां जानें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/knee-pain-relief-ayush-ministry-gives-easy-tips-to-get/article-88453"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/knee-pain-releaf.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। घुटनों में दर्द, अकड़न या सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय होने वाली असुविधा आजकल हर आयु वर्ग के लोगों में सामान्य समस्या बनती जा रही है। यदि लंबे समय तक बैठने के बाद खड़े होने में कठिनाई महसूस होती है या चलते समय घुटनों में जकड़न रहती है, तो नियमित योगाभ्यास इस परेशानी को कम करने में सहायक हो सकता है। आयुष मंत्रालय ने लोगों को घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए एक सरल 'नी मूवमेंट' (Knee Movement Exercise) अपनाने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास को सही श्वास प्रक्रिया और संतुलित शारीरिक मुद्रा के साथ करने पर घुटनों के जोड़ों की कार्यक्षमता में सुधार आता है तथा पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। Knee Pain Relief</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे करें 'नी मूवमेंट' अभ्यास</h3>
<p style="text-align:justify;">इस अभ्यास की शुरुआत सीधे खड़े होकर करें और शरीर को सहज स्थिति में रखें। इसके बाद गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर कंधों की ऊंचाई तक उठाएं। हथेलियों का रुख नीचे की ओर रखें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और शरीर को आधी कुर्सी जैसी मुद्रा (सेमी-स्क्वाट) में ले जाएं। ध्यान रखें कि हाथ और जांघें लगभग जमीन के समानांतर रहें। कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें, फिर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं। इसे एक चक्र माना जाता है। इसी प्रकार तीन बार अभ्यास करने के बाद कुछ समय सामान्य अवस्था में खड़े होकर शरीर को विश्राम दें। Knee Pain Relief</p>
<h3 style="text-align:justify;">नियमित अभ्यास से मिल सकते हैं ये लाभ</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, इस योगाभ्यास से घुटनों के जोड़ों की गतिशीलता बेहतर होती है। आसपास की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, जिससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव कम पड़ता है। इसके अलावा शरीर का संतुलन सुधरता है, लचीलापन बढ़ता है और पैरों की शक्ति में भी वृद्धि होती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह अभ्यास विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन बातों का रखें विशेष ध्यान</h3>
<p style="text-align:justify;">योगाभ्यास करते समय किसी प्रकार की जल्दबाजी न करें और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही घुटनों को मोड़ें। अभ्यास के दौरान श्वास की गति सामान्य और नियंत्रित रखें। यदि घुटनों में अत्यधिक दर्द, हाल ही में लगी चोट, ऑपरेशन या गंभीर गठिया जैसी समस्या हो, तो इस अभ्यास को शुरू करने से पहले चिकित्सक अथवा प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। Knee Pain Relief</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:47:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sri Gurusar Modia News: शाह सतनाम जी अस्पताल का 32वां स्थापना दिवस विशाल चिकित्सा जांच शिविर लगाकर मनाया</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण अंचल श्रीगुरुसर मोडिया सन् 1995 से लगातार चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी बेहतरीन सेवाएं दे रहे शाह सतनाम जी जनरल अस्पताल के 32वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों के तहत विशाल नि:शुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sri-gurusar-modia-news-shah-satnam-ji-hospitals-32nd-foundation/article-88302"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/32th-foundation-day..jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Free Medical Check-up Camp: गोलूवाला/राजस्थान, (सच कहूँ/सुरेन्द्र गुम्बर)। ग्रामीण अंचल श्रीगुरुसर मोडिया सन् 1995 से लगातार चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी बेहतरीन सेवाएं दे रहे शाह सतनाम जी जनरल अस्पताल के 32वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों के तहत विशाल नि:शुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन शुक्रवार 17 जुलाई को अस्पताल परिसर श्रीगुरुसर मोडिया में अरदास का भजन लगाकर किया गया। Sri Gurusar Modia News</p>
<p style="text-align:justify;">इस चेक-अप कैम्प में 146 पुरूषों व 93 महिलाओं सहित कुल 239 मरीजों को नि:शुल्क परामर्श दिया गया। जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित सचदेवा ने 111 मरीजों को नेत्र रोगों से सम्बन्धित परामर्श नि:शुल्क दिया। वहीं 18 चयनित मरीजों के सफेद मोतिया के आॅप्रेशन श्रीगुरुसर मोडिया अस्पताल में नि:शुल्क किए जाएँगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं फेको विधि द्वारा 5 मरीजों को विदेशी लैंस डलवाने पर विशेष छूट दी जाएगी। वहीं जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुभाष गडवाल व डॉ. घनश्याम बिश्नोई के द्वारा हार्ट, शुगर, बीपी, लीवर, पेट, किडनी, गठिया, मलेरिया, डेंगू अन्य रोगों से सम्बन्धित 98 मरीजों को परामर्श नि:शुल्क दिया गया। इधर दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र गल्हौत्रा व रामपरवेश द्वारा 30 मरीजों को दंत रोगों से सम्बन्धित परामर्श नि:शुल्क दिया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान खून जांचों, दांतों के प्रोसीजर व अल्ट्रासाउंड पर भी मरीज को 20 प्रतिशत की छूट दी गयी। कुल 36 प्रकार की पेशाब व खून जांचों का विशेष पैकेज 21 मरीजों को 4500 की बजाय मात्र 1500 रुपए में दिये गया। इस शिविर को लेकर मरीजों में काफी उत्साह देखा गया। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के द्वारा भी इस शिविर में अपनी बेहतरीन सेवाएं दी गयी। Sri Gurusar Modia News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sri-gurusar-modia-news-shah-satnam-ji-hospitals-32nd-foundation/article-88302</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 14:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ex-servicemen News: रक्षा मंत्रालय की पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी सौगात!</title>
                                    <description><![CDATA[देश के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस कदम के तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना को पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत सूचीबद्ध कर लिया गया है। यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णय था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/ex-servicemen-news-defense-ministrys-big-gift-for-ex-servicemen/article-88088"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/ex-servicemen.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ministry of Defence: नई दिल्ली। देश के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस कदम के तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना को पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत सूचीबद्ध कर लिया गया है। यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णय था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय बिहार तथा पड़ोसी राज्यों में रहने वाले लाखों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। Ex-servicemen News</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एम्स पटना का ईसीएचएस नेटवर्क में शामिल होना उन पूर्व सैनिकों के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिन्होंने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया। इस कदम से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को अब अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, विशेषज्ञ उपचार और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेंगी। वर्ष 2012 में स्थापित एम्स पटना को ईसीएचएस से जुड़ने में 12 वर्ष का समय लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबे इंतजार के बाद हुए इस फैसले से बिहार के साथ-साथ झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के पूर्व सैनिकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें जटिल और विशेष चिकित्सा उपचार के लिए राज्य से बाहर स्थित बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार एम्स पटना अपनी उत्कृष्ट चिकित्सीय सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी, उच्च स्तरीय विशेषज्ञ डॉक्टरों और विश्वस्तरीय रोगी देखभाल के लिए जाना जाता है। Ex-servicemen News</p>
<p style="text-align:justify;">इसके ईसीएचएस नेटवर्क में शामिल होने से पूर्व सैनिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समय पर उपचार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से गंभीर बीमारियों, हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोलॉजी, आर्थोपेडिक्स तथा अन्य जटिल चिकित्सा मामलों में पूर्व सैनिकों को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा। साथ ही इलाज पर होने वाले अतिरिक्त खर्च और लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता भी कम होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्रालय ने इसे पूर्व सैनिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह कदम देश के उन वीर सैनिकों के सम्मान और कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। गौरतलब है कि एम्स पटना के ईसीएचएस से जुड़ने के साथ ही बिहार और आसपास के क्षेत्रों के पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। इसके बाद उन्हें लंबे सफर तय कर दिल्ली या अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। पूर्व सैनिकों को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। Ex-servicemen News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 15:57:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Type-2 Diabetes: नई रिसर्च में खुलासा! इस वजह से भी रहता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[टाइप-2 डायबिटीज का खतरा केवल शरीर के बढ़े हुए वजन या मोटापे से ही जुड़ा नहीं है बल्कि मांसपेशियों का स्वास्थ्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में शरीर की अतिरिक्त चर्बी के साथ मांसपेशियों की कमजोरी होती है, उनमें डायबिटीज का खतरा काफी अधिक होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/type-2-diabetes-new-research-reveals-that-there-is-a-risk/article-88070"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/type-2-diabetes.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। टाइप-2 डायबिटीज का खतरा केवल शरीर के बढ़े हुए वजन या मोटापे से ही जुड़ा नहीं है बल्कि मांसपेशियों का स्वास्थ्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में शरीर की अतिरिक्त चर्बी के साथ मांसपेशियों की कमजोरी होती है, उनमें डायबिटीज का खतरा काफी अधिक होता है। यह शोध दुनिया की प्रमुख डायबिटीज पत्रिकाओं में शामिल 'डायबिटीज केयर' में प्रकाशित हुआ है। Type-2 Diabetes</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में कर्टिन स्कूल ऑफ पॉपुलेशन हेल्थ और कर्टिन एनेबल इंस्टीट्यूट के डिमेंशिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शोधकर्ताओं ने करीब 4.8 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य आंकड़ों का 14 वर्षों तक विश्लेषण किया। अध्ययन में शामिल सभी लोग शोध की शुरुआत में डायबिटीज से मुक्त थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में मोटापा और मांसपेशियों की कमजोरी दोनों मौजूद थीं, उन्हें 'सार्कोपेनिक ओबेसिटी' की स्थिति कहा जाता है। ऐसे लोगों में स्वस्थ शरीर संरचना वाले लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा साढ़े तीन गुना से भी अधिक पाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन के अनुसार, सार्कोपेनिक ओबेसिटी से पीड़ित लोगों में केवल मोटापे से ग्रस्त लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 19 प्रतिशत अधिक था। वहीं, केवल कम मांसपेशी द्रव्यमान या कमजोरी (सार्कोपेनिक) वाले लोगों की तुलना में यह जोखिम 91 प्रतिशत अधिक पाया गया। अध्ययन के प्रमुख लेखक और पीएचडी शोधार्थी झोंगयांग गुआन ने कहा कि ये निष्कर्ष इस धारणा को चुनौती देते हैं कि डायबिटीज का खतरा मुख्य रूप से शरीर के वजन से ही तय होता है। Type-2 Diabetes</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वजन डायबिटीज का एक बड़ा कारण जरूर है, लेकिन मांसपेशियों का स्वास्थ्य भी जोखिम को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने बताया कि जिन लोगों में अधिक वसा और कम मांसपेशियां दोनों होती हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा केवल मोटापे वाले लोगों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसलिए डायबिटीज के खतरे का आकलन करते समय केवल वजन या बॉडी मास इंडेक्स देखने के बजाय मांसपेशियों की ताकत और मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोध में यह भी सामने आया कि सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले करीब 15 प्रतिशत लोगों में 10 वर्षों के भीतर टाइप-2 डायबिटीज विकसित हुई, जबकि मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह आंकड़ा लगभग 11 प्रतिशत और स्वस्थ शरीर संरचना वाले लोगों में करीब 3 प्रतिशत रहा। अध्ययन में यह संबंध महिलाओं और 60 वर्ष से कम उम्र के वयस्कों में अधिक मजबूत पाया गया। शोध के वरिष्ठ प्रमुख प्रोफेसर मारियो सिएर्वो ने कहा कि डायबिटीज की रोकथाम के लिए शरीर के वजन के साथ-साथ मांसपेशियों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र और मोटापे की बढ़ती दरों के बीच नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। Type-2 Diabetes</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 12:00:22 +0530</pubDate>
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                <title>Coffee Benefits: कॉफी पीने वालों के लिए अच्छी खबर! नए अध्ययन में सामने आई बड़ी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[कॉफी पीना पसंद करने वालों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से कॉफी पीने वाले लोगों में गंभीर लिवर बीमारी का खतरा कम होता है। इनमें लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी शामिल हैं। यह अध्ययन अमेरिका के सीडर्स-सिनाई के शोधकर्ताओं ने किया है, जिसे मेडिकल जर्नल क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/coffee-benefits-good-news-for-coffee-drinkers-big-information-revealed/article-88014"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/coffee-benefits.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। कॉफी पीना पसंद करने वालों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से कॉफी पीने वाले लोगों में गंभीर लिवर बीमारी का खतरा कम होता है। इनमें लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी शामिल हैं। यह अध्ययन अमेरिका के सीडर्स-सिनाई के शोधकर्ताओं ने किया है, जिसे मेडिकल जर्नल क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। शोध में ब्रिटेन के यूके बायोबैंक में शामिल करीब 3.55 लाख लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इन लोगों को अध्ययन की शुरुआत में न तो सिरोसिस था और न ही लिवर कैंसर। शोधकर्ताओं ने करीब 13 साल तक इन लोगों की सेहत पर नजर रखी। Coffee Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में सामने आया कि जो लोग रोजाना पांच या उससे ज्यादा कप कॉफी पीते थे, उनमें कॉफी न पीने वालों की तुलना में सिरोसिस का खतरा 32 प्रतिशत तक कम था। वहीं, ऐसे लोगों में लिवर कैंसर होने का खतरा 47 प्रतिशत कम और लिवर से जुड़ी बीमारी के कारण मौत का खतरा 42 प्रतिशत तक कम पाया गया। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को अब पांच या उससे ज्यादा कप कॉफी पीनी शुरू कर देनी चाहिए। अध्ययन में यह भी देखा गया कि कॉफी के फायदे एक-दो कप रोजाना पीने वालों में भी दिखाई दिए। वहीं, तीन से चार कप प्रतिदिन पीने वालों में इसका संबंध सबसे मजबूत नजर आया।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन के प्रमुख लेखक और सीडर्स-सिनाई के लिवर कैंसर प्रोग्राम के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. जू डोंग यांग ने कहा कि जो लोग कॉफी पीते हैं और उसे आसानी से सहन कर पाते हैं, उनके लिए सामान्य मात्रा में कॉफी पीना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन केवल लिवर की सुरक्षा के लिए किसी को कॉफी पीना शुरू करने की सलाह नहीं दी जा सकती। Coffee Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश भी की कि आखिर कॉफी का लिवर पर असर कैसे हो सकता है। इसके लिए उन्होंने लोगों के लिवर एमआरआई स्कैन और खून में मौजूद प्रोटीन की जांच की। इसमें पाया गया कि कॉफी पीने वालों में लिवर में जमा फैट, सूजन और फाइब्रोसिस यानी लिवर में निशान बनने से जुड़े संकेत कम थे। उनके लिवर से जुड़े प्रोटीन प्रोफाइल भी ज्यादा स्वस्थ पाए गए। एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि कैफीन वाली और बिना कैफीन वाली दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लिवर से जुड़े समान फायदे देखे गए। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद दूसरे तत्व भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. ह्यूनसेक किम, जो इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं में शामिल हैं, के अनुसार कॉफी में सैकड़ों जैविक तत्व पाए जाते हैं। इनमें क्लोरोजेनिक एसिड, पॉलीफेनॉल और डाइटरपीन जैसे तत्व शामिल हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। ये तत्व लिवर पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकते हैं। Coffee Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि कॉफी एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह लिवर को स्वस्थ रखने का अकेला तरीका नहीं है। इसके लिए संतुलित आहार लेना भी जरूरी है। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, मेवे, जैतून का तेल और मछली से भरपूर मेडिटेरेनियन डाइट लिवर के लिए अच्छी मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करना, हेपेटाइटिस जैसी संक्रमण वाली बीमारियों से बचाव करना और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।इस रिसर्च में केवल लोगों की कॉफी पीने की आदत और उनकी सेहत के बीच संबंध देखा गया। वैज्ञानिक इसे कारण और परिणाम के रूप में साबित नहीं कर पाए हैं। यानी यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कॉफी पीने की वजह से ही लिवर बेहतर रहता है। Coffee Benefits</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 11:19:50 +0530</pubDate>
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