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                <title>Health News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Health News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Good Sleep Benefits: ''नींद से समझौता यानी अपनी जिंदगी से खिलवाड़''! हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं</title>
                                    <description><![CDATA[आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम और तनाव के बीच अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं। कई लोग कम नींद को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ता है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव, मोटापा और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/good-sleep-benefits-compromising-sleep-means-playing-with-your-life/article-85593"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/good-sleep-benifits.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम और तनाव के बीच अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं। कई लोग कम नींद को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ता है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव, मोटापा और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। Good Sleep Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी और पूरी नींद स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेना उतना ही जरूरी है, जितना सही खानपान और व्यायाम। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, लगातार कम नींद लेना कम तन मन दोनों की सेहत पर बुरा असर डालता है। सवाल है कि पर्याप्त नींद क्यों जरूरी है? तो हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं, नींद सिर्फ आराम नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ जीवन का आधार है।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी नींद से शरीर की कोशिकाएं रिपेयर होती हैं, इम्युनिटी मजबूत होती है, दिमाग तरोताजा रहता है और पूरे दिन एनर्जी बनी रहती है। रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। नींद की कमी सेहत पर सीधा असर डालती है। सबसे पहले तो दिनभर थकान और सुस्ती बनी रहती है। इससे काम करने की क्षमता घटती है और तनाव बढ़ता है। लंबे समय तक कम नींद लेने से वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ सकता है क्योंकि इससे भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं। Good Sleep Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">एनएचएम के अनुसार, कम नींद हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है और दिल की धड़कन प्रभावित होती है। डायबिटीज का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। कम नींद से त्वचा पर भी असर पड़ता है, चेहरे पर झुर्रियां, कालापन और सुस्ती नजर आने लगती है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, चिंता और याददाश्त कमजोर होना जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। अच्छी नींद के लिए रोजाना तय समय पर सोएं और उठें, रात को स्क्रीन (मोबाइल, टीवी) से दूर रहें। हल्का व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले नहीं, रात का भोजन हल्का रखें, शांत और अंधेरे वाले कमरे में सोएं। अगर आपको लगातार नींद न आने या थकान महसूस हो रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Good Sleep Benefits</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Benefits of Stair Climbing: बेहतर फिटनेस चाहिए तो बनाएं रोज सीढ़ियां चढ़ने की आदत</title>
                                    <description><![CDATA[आज के दौर को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन ने लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों के इस्तेमाल की सलाह दी है। नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने से हृदय स्वस्थ रहता है, वजन नियंत्रित होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/benefits-of-stair-climbing-if-you-want-better-fitness-then/article-85416"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/stair-climbing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Benefits of Stair Climbing: नई दिल्ली। आज के दौर में इंसानों की निर्भरता मशीनों पर बढ़ती जा रही है। ये सुविधा भले देते हों मगर शारीरिक गतिविधियों को धीरे-धीरे खत्म भी करते जा रहे हैं। लिफ्ट या एस्केलेटर को ही ले लें तो इनकी वजह से लोग सीढ़ियां चढ़ने से कतराने लगे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट इसे सेहत के लिए सही नहीं मानते हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने सीढ़ियों को बेहतर फिटनेस और एनर्जी का जरिया बताते हुए बताया कि छोटी-छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए रोजमर्रा की छोटी गतिविधियों को सकारात्मक तरीके से बदलना बेहद जरूरी है। इसी क्रम में एनएचएम ने सलाह दी है कि दिन की शुरुआत स्वस्थ तरीके से करने के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चुनें। हर कदम आपको बेहतर फिटनेस, नई ऊर्जा और स्वस्थ जीवन की ओर ले जाता है। एनएचएम के अनुसार, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। अगर हम थोड़ा प्रयास करें और सीढ़ियां चढ़ने की आदत डालें तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। यह छोटी आदत न सिर्फ शरीर को सक्रिय बनाती है बल्कि लंबे समय में गंभीर बीमारियों से भी बचाव करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीढ़ियां चढ़ने के एक नहीं कई फायदे हैं। सीढ़ियां चढ़ना एक बेहतरीन व्यायाम है, जो बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, वजन नियंत्रण में रहता है और शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है। नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने से हृदय स्वस्थ रहता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी संतुलित रहता है। इसके अलावा यह आदत पूरे दिन ऊर्जा से भर देती है। सुबह ऑफिस या घर में सीढ़ियां चढ़कर शुरू किया गया दिन ज्यादा सक्रिय और तरोताजा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि “एक्टिव बॉडी” बनाए रखने के लिए ऐसी छोटी आदतें बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस छोटी सी आदत से बेहतर हार्ट हेल्थ होती है, ज्यादा एनर्जी और स्फूर्ति मिलती है, पैर और हड्डियां मजबूत होती हैं। वजन नियंत्रण में रहता है, सांस संंबंधित समस्याएं दूर होती हैं और तनाव कम व मूड बेहतर होता है। एनएचएम ने लोगों से अपील की है कि जहां भी संभव हो, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। अगर ऑफिस की मंजिल ज्यादा ऊंची है तो कम से कम कुछ मंजिलें सीढ़ियों से चढ़कर शुरू करें। धीरे-धीरे इस आदत को बढ़ाया जा सकता है। Health News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:55:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: उम्र बढ़ने के साथ पेशाब संबंधी समस्याओं को हल्के में न लें: डॉ. प्रदीप जैन</title>
                                    <description><![CDATA[नगर के अक्षय नर्सिंग होम के प्रबंध निदेशक एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में होने वाली पेशाब संबंधी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/dr-pradeep-jain-should-not-take-urinary-problems-lightly-with/article-85138"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/health-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बड़ौत (सच कहूँ/डॉ संदीप कुमार दहिया)।</strong> Health News: नगर के अक्षय नर्सिंग होम के प्रबंध निदेशक एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में होने वाली पेशाब संबंधी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार पेशाब आना, पेशाब शुरू करने में दिक्कत होना, पेशाब की धार कमजोर पड़ना या रात में कई बार टॉयलेट जाना प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के संकेत हो सकते हैं। डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि 50 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) की समस्या काफी सामान्य हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और झिझक के कारण अधिकांश लोग समय पर चिकित्सकीय सलाह नहीं लेते, जिससे बाद में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रोस्टेट पुरुषों में मूत्राशय के नीचे स्थित एक छोटी ग्रंथि होती है, जिसका आकार उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है। इसके कारण पेशाब की नली पर दबाव पड़ता है और मूत्र का सामान्य प्रवाह प्रभावित होने लगता है। ऐसे में मरीज को बार-बार पेशाब आना, अचानक तेज पेशाब लगना, पेशाब करते समय जोर लगाना, मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास तथा पेशाब रुक-रुक कर आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. जैन ने बताया कि यदि समय रहते उपचार न कराया जाए तो स्थिति गंभीर होकर पेशाब पूरी तरह बंद होने, बार-बार संक्रमण होने, मूत्राशय संबंधी रोग तथा किडनी पर दबाव जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। हालांकि शुरुआती अवस्था में दवाओं और उचित परामर्श से कई मरीजों को बिना सर्जरी के भी राहत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में प्रोस्टेट बढ़ने के इलाज के लिए कई आधुनिक और कम जोखिम वाली उपचार तकनीकें उपलब्ध हैं। इनमें रिज़म तकनीक के माध्यम से भाप चिकित्सा द्वारा बढ़े हुए प्रोस्टेट ऊतक को छोटा किया जाता है। वहीं यूरोलिफ्ट प्रक्रिया में प्रोस्टेट ऊतक को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि पेशाब की नली पर दबाव कम हो सके। इसके अलावा आईटिंड तकनीक के माध्यम से बिना बड़ी सर्जरी के यूरिन फ्लो को बेहतर बनाया जाता है। डॉ. प्रदीप जैन ने पुरुषों से अपील की कि पेशाब संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या होने पर झिझक छोड़कर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं, ताकि समय रहते उचित उपचार लेकर स्वस्थ जीवन जिया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/health-news1.jpg" alt="Health News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/dr-pradeep-jain-should-not-take-urinary-problems-lightly-with/article-85138</link>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Health News: क्या आपका बच्चा भी पीता है चाय? आज ही बंद कर दें वरना होंगे ये भयानक नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ Health News: जानिए बच्चों को किस उम्र में चाय पिलाना सुरक्षित माना जाता है, चाय के फायदे और नुकसान क्या हैं। साथ ही घनी और खूबसूरत आईब्रो के लिए आसान घरेलू नुस्खे भी जानें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/health-news/article-84828"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/health-news.jpg" alt=""></a><br /><p> Health News: चाय भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले पेय पदार्थों में से एक है। सुबह की शुरुआत से लेकर दिनभर की थकान मिटाने तक, हर उम्र के लोग चाय पीना पसंद करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या बच्चों को चाय देना सुरक्षित है? विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य दूध वाली चाय में कैफीन और चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए छोटे बच्चों को नियमित चाय पिलाने से बचना चाहिए।</p>
<h4>बच्चों को किस उम्र में चाय दे सकते हैं?  Health News</h4>
<p>विशेषज्ञों और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">American Academy of Pediatrics</span></span> के अनुसार:</p>
<ul>
<li>12 साल से कम उम्र के बच्चों को चाय नहीं देनी चाहिए</li>
<li>12 से 18 साल के बच्चे सीमित मात्रा में 1-2 कप चाय पी सकते हैं</li>
<li>एक दिन में लगभग 100 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए</li>
</ul>
<h4>बच्चों को चाय पिलाने के नुकसान</h4>
<ul>
<li>नींद और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है</li>
<li>दांतों में कैविटी और सड़न का खतरा बढ़ सकता है</li>
<li>बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है</li>
<li>मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है</li>
<li>हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है</li>
</ul>
<h4>क्या बच्चों के लिए चाय के फायदे भी हैं?</h4>
<p>कुछ घरेलू हर्बल चाय सीमित मात्रा में राहत दे सकती हैं:</p>
<ul>
<li>सर्दी-जुकाम में आराम</li>
<li>पेट दर्द और गैस में राहत</li>
<li>शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद</li>
<li>हल्के बुखार में आराम</li>
</ul>
<h4>बच्चों के लिए बेहतर विकल्प</h4>
<h4>कैमोमाइल चाय</h4>
<p>हल्के बुखार, एलर्जी और पेट दर्द में मददगार मानी जाती है।</p>
<h4>अदरक की चाय</h4>
<p>उल्टी, जी मिचलाने और सर्दी-जुकाम में राहत दे सकती है।</p>
<h4>सौंफ की चाय</h4>
<p>पेट से जुड़ी परेशानियों में फायदेमंद मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/health/health-news/article-84828</link>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:35:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>India News: अब ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ पर ही मिलेंगी सभी सेवाएं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लॉन्च किया पोर्टल</title>
                                    <description><![CDATA[ ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने  ‘भारत के स्वास्थ्य भविष्य को सुदृढ़ बनाने वाली श्रेष्ठ कार्यप्रणालियाँ’ को एक समेकित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/now-all-services-will-be-available-on-swasth-bharat-portal/article-84312"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/health-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से अधिक सुदृढ़ और संगठित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ का शुभारंभ किया है। इस पहल का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया। ‘भारत के स्वास्थ्य भविष्य को सुदृढ़ बनाने वाली श्रेष्ठ कार्यप्रणालियाँ’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में इस पोर्टल को एक समेकित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। India News</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित यह मंच विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का कार्य करेगा। अब तक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी एवं रिपोर्टिंग अलग-अलग डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से की जाती थी, जिससे सूचनाओं के विखंडन, दोहराव तथा संसाधनों के अनावश्यक उपयोग जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं। ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हुए एक एकीकृत ‘वन-स्टॉप’ प्रणाली के रूप में कार्य करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पोर्टल आधुनिक एपीआई-आधारित संरचना पर विकसित किया गया है, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय स्थापित होगा और डेटा का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को बार-बार अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कार्य करने की आवश्यकता नहीं रहेगी, जिससे समय की बचत और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। इस पहल से देश के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता—जैसे आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं चिकित्सा अधिकारी—प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। India News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें एक ही मंच पर डेटा प्रविष्टि, निगरानी और रिपोर्टिंग की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही, पोर्टल में उन्नत डेटा विश्लेषण एवं दृश्यांकन उपकरण भी जोड़े गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना निर्माण और त्वरित निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे। ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप विकसित किया गया है और इसमें आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता के साथ एकीकरण की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके माध्यम से नागरिकों के स्वास्थ्य अभिलेखों का सुरक्षित एवं सहज आदान-प्रदान संभव होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भविष्य में इसे स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री और स्वास्थ्य संस्थान रजिस्ट्री से भी जोड़ा जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस पोर्टल के माध्यम से डिजिटल ढांचे पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी, साथ ही डेटा प्रविष्टि और मानव संसाधनों से जुड़ी दोहराव वाली प्रक्रियाएँ भी घटेंगी। इसके अतिरिक्त, नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भी तीव्रता आएगी। यह पहल देश में पारदर्शी, समेकित और डेटा-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम सिद्ध हो सकती है। India News</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/swasth-bharat.jpg" alt="Swasth-Bharat" width="940" height="524"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 12:48:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Child Health News: बाल स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत को केंद्र सरकार का बड़ा कदम! </title>
                                    <description><![CDATA[आरबीएसके 2.0 में पारंपरिक चार प्रमुख श्रेणियों—जन्मजात विकार, बीमारियां, पोषण संबंधी कमियां और विकासात्मक देरी—को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। इसके साथ ही आधुनिक समय की चुनौतियों जैसे गैर-संक्रामक रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और व्यवहारगत विकारों को भी शामिल किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/central-governments-big-step-to-strengthen-child-health-services-guidelines/article-84173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/child-health-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Central Government Scheme: नई दिल्ली। देश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के संशोधित संस्करण 2.0 के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह नया ढांचा पिछले वर्षों के अनुभवों पर आधारित है और बच्चों की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। Child Health News</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीएसके 2.0 में पारंपरिक चार प्रमुख श्रेणियों—जन्मजात विकार, बीमारियां, पोषण संबंधी कमियां और विकासात्मक देरी—को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। इसके साथ ही आधुनिक समय की चुनौतियों जैसे गैर-संक्रामक रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और व्यवहारगत विकारों को भी शामिल किया गया है। इस संशोधित कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसमें रोकथाम, जागरूकता और उपचार—तीनों स्तरों पर सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत बच्चों की स्वास्थ्य जांच का दायरा और विस्तृत किया गया है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के माध्यम से मोबाइल स्वास्थ्य टीमों द्वारा नियमित स्क्रीनिंग की जाएगी, जिससे विभिन्न बीमारियों और समस्याओं की समय रहते पहचान हो सके। दिशा-निर्देशों में रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की पहचान के बाद बच्चे को तुरंत उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही, उपचार के दौरान निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की गई है। Child Health News</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की डिजिटल स्वास्थ्य पहल के अनुरूप, इस कार्यक्रम में डिजिटल हेल्थ कार्ड और रीयल-टाइम डेटा प्रबंधन प्रणाली को शामिल किया गया है। इससे न केवल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि निर्णय प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित बनेगी। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बच्चों को एकीकृत और समग्र सेवाएं मिल सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीएसके 2.0 के लागू होने से बच्चों में रोगों की समय पर पहचान संभव होगी, उपचार में सुधार आएगा और देश में बाल स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। यह पहल प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। Child Health News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:33:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Heart Attack Warning: हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है चेतावनी! 24–48 घंटे पहले दिखते हैं ये संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज</title>
                                    <description><![CDATA[हार्ट अटैक से पहले शरीर 24–48 घंटे पहले चेतावनी संकेत देता है। जानें सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, थकान जैसे लक्षण और समय पर बचाव के जरूरी उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-body-gives-warning-before-a-heart-attack-these-signs/article-84128"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/heart-attack-warning.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव और खराब लाइफस्टाइल ने दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। जिस <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Heart Attack</span></span> को कभी बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था, वह अब 30–40 साल के युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है।</p>
<p>चौंकाने वाली बात यह है कि हार्ट अटैक अचानक नहीं आता—शरीर 24 से 48 घंटे पहले ही संकेत देने लगता है। लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।</p>
<h3>1. सीने में दर्द या दबाव</h3>
<p>हार्ट अटैक का सबसे आम संकेत है सीने में दर्द, जकड़न या दबाव महसूस होना।</p>
<ul>
<li>यह दर्द हल्का भारीपन या जलन जैसा भी हो सकता है</li>
<li>कुछ मिनटों तक रहता है या बार-बार आता है<br />👉 इसे अक्सर गैस या एसिडिटी समझ लिया जाता है, जो खतरनाक हो सकता है।</li>
</ul>
<h3> सांस लेने में तकलीफ</h3>
<p>अगर बिना मेहनत के ही सांस फूलने लगे या हल्के काम में भी थकान हो, तो यह चेतावनी हो सकती है।<br />👉 खासकर महिलाओं में यह लक्षण बिना सीने के दर्द के भी दिखाई देता है।</p>
<h3>3. असामान्य थकान</h3>
<ul>
<li>बिना वजह अत्यधिक थकान</li>
<li>छोटे कामों में भी कमजोरी महसूस होना<br />👉 जब दिल सही से खून पंप नहीं करता, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती।</li>
</ul>
<hr />
<h3>4. दर्द का फैलना</h3>
<p>दिल का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता:</p>
<ul>
<li>बाएं या दोनों हाथों में</li>
<li>गर्दन, जबड़े, कंधे या पीठ में<br />👉 अगर बिना कारण ऐसा दर्द बढ़ रहा हो, तो सावधान हो जाएं।</li>
</ul>
<h3>5. ठंडा पसीना और बेचैनी</h3>
<p>अचानक ठंडा पसीना आना, घबराहट या अजीब सा डर महसूस होना भी गंभीर संकेत हो सकता है।</p>
<h3>6. मतली, उल्टी और अपच</h3>
<p>कई बार हार्ट अटैक से पहले:</p>
<ul>
<li>पेट में जलन</li>
<li>उल्टी जैसा महसूस होना<br />👉 खासकर महिलाएं इसे गैस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।</li>
</ul>
<h3> 7. चक्कर या बेहोशी</h3>
<p>अचानक चक्कर आना या बेहोशी जैसा लगना इस बात का संकेत हो सकता है कि दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही।</p>
<h3>⚡ किन लोगों को ज्यादा खतरा?</h3>
<p>इन लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक होता है:</p>
<ul>
<li>हाई ब्लड प्रेशर</li>
<li>डायबिटीज</li>
<li>हाई कोलेस्ट्रॉल</li>
<li>मोटापा</li>
<li>धूम्रपान</li>
<li>पारिवारिक इतिहास</li>
</ul>
<p>👉 साथ ही तनाव, खराब नींद और जंक फूड भी खतरा बढ़ाते हैं।</p>
<h3>🚑 लक्षण दिखें तो क्या करें?</h3>
<ul>
<li>तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें</li>
<li>लक्षण हल्के हों तब भी जांच कराएं</li>
<li>आपात स्थिति में एम्बुलेंस बुलाएं<br />👉 देरी जानलेवा हो सकती है</li>
</ul>
<h3>बचाव ही सबसे बेहतर उपाय</h3>
<ul>
<li>रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम</li>
<li>संतुलित और पौष्टिक आहार</li>
<li>धूम्रपान और शराब से दूरी</li>
<li>नियमित हेल्थ चेकअप</li>
<li>योग और ध्यान से तनाव कम करें</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-body-gives-warning-before-a-heart-attack-these-signs/article-84128</link>
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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: 30 की उम्र के बाद इन बीमारियों को पहचानना है अनिवार्य, शरीर देता है समय रहते संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/identifying-these-diseases-after-age-30-is-essential-the-body-gives-timely-warning-signs/article-83275"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/health-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि यही वह उम्र होती है, जब शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की ओर बढ़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">हाई ब्लड प्रेशर: 30 की उम्र के बाद तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। अगर इसे लंबे समय तक कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर चेक करना और नमक की मात्रा कम रखना इससे बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज: 30 के बाद शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। अगर व्यक्ति ज्यादा मीठा, जंक फूड या प्रोसेस्ड खाना खाता है और शारीरिक गतिविधि कम करता है तो यह खतरा और बढ़ जाता है। डायबिटीज का असर आंखों, किडनी और नर्व्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए नियमित ब्लड शुगर टेस्ट और संतुलित डाइट बहुत जरूरी है। Health News</p>
<h3>लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">हाई कोलेस्ट्रॉल: ज्यादा तला-भुना और फैटी फूड, शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इससे खून की नलियों में रुकावट बनने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचते रहना और हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, बीज और हरी सब्जियों का सेवन करना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्टियोपोरोसिस: उम्र बढ़ने के साथ-साथ बोन डेंसिटी कम होने लगती है, खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना धूप में समय बिताना, दूध और कैल्शियम युक्त आहार लेना इस समस्या से बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैटी लिवर: लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है। जो न लोग ज्यादा तैलीय खाना खाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है। उनमें किडनी से जुड़ी समस्याएं भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं, जिनका शुरुआती चरण में पता नहीं चलता। इसलिए डॉक्टर समय-समय पर लिवर फंक्शन और किडनी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही रोका जा सके। Health News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/identifying-these-diseases-after-age-30-is-essential-the-body-gives-timely-warning-signs/article-83275</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:33:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाथूसरी चौपटा के बीमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को इलाज की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। राजस्थान की सीमा से सटे ऐलनाबाद हल्के के नाथूसरी चौपटा क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Nathusari Chopta Community Health center) में चिकित्सकों की कमी से करीब 50 गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सा सेवाओं की कमी के चलते कोई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-ailing-community-health-center-in-nathusari-chopta-needs-treatment/article-81121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/nathusari-chopta-health-center.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। राजस्थान की सीमा से सटे ऐलनाबाद हल्के के नाथूसरी चौपटा क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Nathusari Chopta Community Health center) में चिकित्सकों की कमी से करीब 50 गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सा सेवाओं की कमी के चलते कोई दुर्घटना या गंभीर चोट का मामला हो तो मरीज को सिरसा रेफर करना पड़ता है। यहां के लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को रेफर केंद्र के नाम से पुकारने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चोपटा क्षेत्र का अस्पताल खुद बीमार है और इसको इलाज की दरकार है। Sirsa News</p>
<p>गौरतलब है कि आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। चौपटा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दड़बा कला, रंधावा, डिंग, जमाल, कागदाना आते हैं और इन केंद्रों पर वर्तमान की सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का दावा कर रही हैं, लेकिन इन स्वास्थ्य केंद्रो पर चिकित्सकों के साथ, फार्मासिस्ट, दंत चिकित्सक सहित कई पद रिक्त पड़े  हुए है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह दावा तहसील मुख्यालय पर दम तोड़ता नजर आ रहा है।</p>
<h3>चौपटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद में चिकित्सा अधिकारी का पद  रिक्त</h3>
<p>चौपटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद में चिकित्सा अधिकारी का पद  रिक्त  है। विडंबना की बात तो यह है कि सीएचसी व पीएचसी में फार्मासिस्ट की सभी पोस्ट खाली हैं। चौपटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 18 चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां सिर्फ 5 चिकित्सक ही सेवाए दे रहे हैं, ऐसे में लोगों को सीएचसी व पीएचसी में कहां से बेहतर सुविधा मिलेगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न रोगों का उपचार कराने के लिए प्रतिदिन सैंकड़ों मरीज आते हैं।</p>
<p>इस संबध में सीएचसी प्रभारी डॉ. सिद्धांत कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि चौपटा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दड़बा कला, रंधावा, डिंग, जमाल, कागदाना आते हैं, इनमें 18 चिकत्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन इस समय 5 चिकित्सक हैं।  सीएचसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कोई कठिनाई न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है। Sirsa News</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 10:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: दो मिनट का नाश्ता, बच्चों की सेहत पर पड़ रहा भारी — डॉ अभिनव तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[मैगी, नूडल्स, पास्ता और मैक्रोनी से बढ़ रही बच्चों में बीमारियां, बाल रोग विशेषज्ञ ने जताई गंभीर चिंता बड़ौत (सच कहूँ/डॉ संदीप कुमार)। Health News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह के समय मम्मियों के लिए बच्चों का नाश्ता तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल की जल्दी, ऑफिस की भागदौड़ और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/maggi-noodles-pasta-and-macaroni-are-increasing-diseases-in-children/article-80714"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/baraut.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मैगी, नूडल्स, पास्ता और मैक्रोनी से बढ़ रही बच्चों में बीमारियां, बाल रोग विशेषज्ञ ने जताई गंभीर चिंता</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बड़ौत (सच कहूँ/डॉ संदीप कुमार)।</strong> Health News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह के समय मम्मियों के लिए बच्चों का नाश्ता तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल की जल्दी, ऑफिस की भागदौड़ और समय की कमी के चलते अधिकतर घरों में बच्चों को झटपट तैयार होने वाला “दो मिनट का नाश्ता” परोसा जा रहा है। इसमें मैगी, नूडल्स, पास्ता और अन्य इंस्टेंट फूड प्रमुख रूप से शामिल हैं। लेकिन यह सुविधा बच्चों की सेहत के लिए धीरे-धीरे गंभीर खतरा बनती जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अभिनव तोमर के अनुसार, झटपट तैयार होने वाले अनहेल्दी नाश्ते बच्चों के शरीर को आवश्यक पोषण नहीं दे पाते। लगातार इंस्टेंट और प्रोसेस्ड फूड खाने से बच्चों में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नाश्ते के नाम पर बच्चो की सेहत के साथ खिलवाड़ | Health News</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि ऐसे खाद्य पदार्थों में पोषण बहुत कम और नमक, रिफाइंड आटा, प्रिज़रवेटिव्स व हानिकारक केमिकल्स की मात्रा अधिक होती है और विटामिन, प्रोटीन, आयरन और फाइबर की भारी कमी रहती है।जो बच्चों के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। डॉ तोमर के अनुसार, रोजाना मैगी, नूडल्स, पास्ता और मैक्रोनी जैसे नाश्ते से बच्चों में पेट दर्द, गैस, कब्ज, एसिडिटी, उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके साथ ही बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे बार-बार सर्दी, खांसी, बुखार और संक्रमण होने लगता है। लंबे समय तक ऐसे भोजन से मोटापा, एनीमिया, ध्यान की कमी और थकान जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि सुबह का नाश्ता बच्चों के पूरे दिन की ऊर्जा और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि नाश्ता पोषण से भरपूर न हो तो बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और शारीरिक विकास पर सीधा असर पड़ता है। दुर्भाग्यवश, दो मिनट में बनने वाला नाश्ता बच्चों के पेट तो भर देता है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं दे पाता। डॉ अभिनव तोमर ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की सेहत के साथ समझौता न करें और समय की कमी के बावजूद हेल्दी विकल्प अपनाएं। उन्होंने कहा कि घर पर बना साधारण और ताजा भोजन ही बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और फायदेमंद है। Health News</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों के लिए हेल्दी नाश्ते और खाने के सुझाव</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ तोमर के अनुसार, बच्चों के नाश्ते में दलिया, ओट्स, दूध, फल, उबले अंडे, पराठा-सब्जी, पोहा, उपमा, सैंडविच (घर की बनी सब्जियों के साथ) और दही जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। अंकुरित अनाज, मूंग दाल चीला, इडली या घर पर बने पैनकेक भी पौष्टिक नाश्ते के अच्छे विकल्प हैं। बच्चों को दिनभर पर्याप्त पानी पीने और जंक फूड से दूरी बनाने की आदत डालना भी जरूरी है। डॉ अभिनव तोमर ने कहा कि बच्चों की सेहत की नींव बचपन में ही रखी जाती है। थोड़ी सी योजना और जागरूकता से मम्मियां बच्चों को स्वाद के साथ-साथ सेहतमंद नाश्ता दे सकती हैं। दो मिनट की सुविधा के बजाय बच्चों का स्वस्थ भविष्य चुनना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-police-officers-and-employees-will-be-honored-dgp-yadav-congratulated/">Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/maggi-noodles-pasta-and-macaroni-are-increasing-diseases-in-children/article-80714</link>
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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 09:28:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Daily Workout Limit: कहीं वजन कम करने के चक्कर में सेहत से समझौता तो नहीं कर रहे?</title>
                                    <description><![CDATA[Daily Workout Limit: अनु सैनी। आज के समय में फिटनेस का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और हेल्दी लाइफस्टाइल की चाह में लोग रोज घंटों जिम या एक्सरसाइज करने लगते हैं। खासकर वजन कम करने की चाहत में कई लोग अपनी क्षमता से ज्यादा वर्कआउट कर डालते हैं। लेकिन सवाल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/are-you-compromising-your-health-in-the-pursuit-of-losing-weight/article-76656"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/daily-workout-limit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Daily Workout Limit: अनु सैनी।</strong> आज के समय में फिटनेस का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और हेल्दी लाइफस्टाइल की चाह में लोग रोज घंटों जिम या एक्सरसाइज करने लगते हैं। खासकर वजन कम करने की चाहत में कई लोग अपनी क्षमता से ज्यादा वर्कआउट कर डालते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ज्यादा वर्कआउट करना हमेशा अच्छा होता है? या फिर इसका उल्टा असर भी हो सकता है?<br />
आइए जानते हैं कि एक दिन में कितना वर्कआउट सही है, और कब यह आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/say-goodbye-to-gas-and-stomach-pain-the-miraculous-effect-of-leaf-water/">Healthy Tips For Stomach: गैस और पेट दर्द को कहें अलविदा, पत्तों के पानी का चमत्कारी असर</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">1. वर्कआउट का मतलब सिर्फ जिम नहीं | Daily Workout Limit</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्कआउट का मतलब केवल वेट ट्रेनिंग या मशीनों पर पसीना बहाना नहीं है। इसमें वॉकिंग, रनिंग, योगा, डांस, साइकिलिंग, स्ट्रेचिंग, स्विमिंग और घर के हल्के-फुल्के काम भी शामिल हैं।<br />
हल्की गतिविधियां (Light Activity) – जैसे टहलना, सीढ़ियां चढ़ना। मध्यम गतिविधियां (Moderate Activity) – जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना। तीव्र गतिविधियां (Vigorous Activity) – जैसे रनिंग, हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. WHO और विशेषज्ञ क्या कहते हैं?</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार:-<br />
बड़ों के लिए: सप्ताह में कम से कम 150–300 मिनट मध्यम स्तर की एक्टिविटी या 75–150 मिनट तीव्र एक्टिविटी ज़रूरी है।<br />
अगर आप इसे दिनों में बांटें, तो रोज़ लगभग 30–45 मिनट का वर्कआउट पर्याप्त है। फिटनेस ट्रेनर और डॉक्टर भी मानते हैं कि ज्यादा वर्कआउट करने से मांसपेशियों, हड्डियों और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. अलग-अलग लक्ष्य के हिसाब से वर्कआउट</h4>
<p style="text-align:justify;">वर्कआउट की अवधि और तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका लक्ष्य क्या है।<br />
(A) वजन कम करने के लिए<br />
कार्डियो + स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मिश्रण बेहतर रहता है।<br />
रोज़ाना 45–60 मिनट का वर्कआउट, जिसमें 3–4 दिन कार्डियो और 2–3 दिन स्ट्रेंथ शामिल हो।<br />
(B) फिटनेस बनाए रखने के लिए<br />
रोज़ 30–40 मिनट की हल्की से मध्यम गतिविधि, जैसे तेज चलना, योगा या साइकलिंग।<br />
(C) मसल्स बनाने के लिए<br />
4–5 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (45–60 मिनट) और बाकी दिन हल्की एक्सरसाइज या रेस्ट।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. ज्यादा वर्कआउट करने के नुकसान</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप अपनी क्षमता से ज्यादा वर्कआउट करते हैं, तो शरीर पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है।<br />
(1) मांसपेशियों में चोट<br />
बहुत ज्यादा वेट लिफ्टिंग या रिपीटेड एक्सरसाइज करने से मसल्स में स्ट्रेन या चोट लग सकती है।<br />
(2) हार्मोनल असंतुलन<br />
ओवर-ट्रेनिंग से कोर्टिसोल (Stress Hormone) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे थकान और मूड स्विंग हो सकते हैं।<br />
(3) इम्यून सिस्टम कमजोर होना<br />
शरीर को रिकवरी का समय न देने पर रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट सकती है, जिससे आप जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।<br />
(4) नींद की समस्या<br />
ज्यादा थकान के बावजूद कई लोगों को नींद आने में परेशानी होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">(5) वजन घटने की बजाय बढ़ना</h3>
<p style="text-align:justify;">अत्यधिक वर्कआउट से शरीर में स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे फैट बर्न होने की बजाय बढ़ सकता है।<br />
5. सही वर्कआउट प्लान कैसे बनाएं?<br />
(A) अपने लेवल को पहचानें<br />
अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो 15–20 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे समय और इंटेंसिटी बढ़ाएं।<br />
(B) रेस्ट डे जरूरी है<br />
सप्ताह में कम से कम 1–2 दिन शरीर को आराम दें, ताकि मसल्स रिकवर हो सकें।<br />
(C) वार्म-अप और कूल-डाउन<br />
वर्कआउट से पहले हल्की स्ट्रेचिंग और बाद में रिलैक्सेशन एक्सरसाइज ज़रूरी है।<br />
(D) बैलेंस्ड डाइट लें<br />
वर्कआउट के साथ पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, मिनरल और पानी लें, ताकि शरीर को ऊर्जा मिलती रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">6. वजन कम करने में सिर्फ वर्कआउट काफी नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">कई लोग सोचते हैं कि जितना ज्यादा वर्कआउट करेंगे, उतनी जल्दी वजन घटेगा। लेकिन यह सोच गलत है।<br />
80% वजन डाइट से और 20% एक्सरसाइज से नियंत्रित होता है।<br />
अगर आप वर्कआउट करते हुए भी ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं, तो वजन कम नहीं होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">7. संकेत कि आप ज्यादा वर्कआउट कर रहे हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर ये लक्षण दिखें, तो वर्कआउट कम करें:-<br />
हमेशा थकान महसूस होना<br />
नींद न आना या बेचैनी<br />
भूख कम होना<br />
मांसपेशियों में लगातार दर्द<br />
बार-बार सर्दी-जुकाम होना</p>
<h3 style="text-align:justify;">8. सही संतुलन ही कुंजी है</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्कआउट का उद्देश्य शरीर को स्वस्थ, लचीला और एक्टिव रखना है — न कि उसे थकाकर बीमार कर देना।<br />
रोज़ाना 30–60 मिनट की गतिविधि पर्याप्त है।<br />
शरीर की सुनें, थकान होने पर ब्रेक लें।<br />
फिटनेस के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें।<br />
वर्कआउट जरूरी है, लेकिन उसकी एक सीमा है। वजन कम करने की जल्दी में ओवर-ट्रेनिंग सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। बेहतर होगा कि आप अपने लक्ष्य, उम्र, स्वास्थ्य और क्षमता के हिसाब से वर्कआउट प्लान बनाएं। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित लेकिन सीमित एक्सरसाइज ही आपको फिट और हेल्दी बनाए रखेगी।</p>
<p>नोट:-इस आर्टिकल में बताई गई विधि, तरीकों और दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, सच कहूं इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह की किसी भी उपचार दवा या डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले अपने किसी संबंधी एक्सपर्ट या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 10:58:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Stomach Stone: पेट में पथरी होने पर कौन सा फल खाना चाहिए और कौन सा नहीं? जानें पूरी जानकारी..</title>
                                    <description><![CDATA[Stomach Stone: (सच कहूं/अनु सैनी) आजकल के खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से पेट में पथरी वाले मरीजों की संख्या देश में लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पथरी का सीधा कनेक्शन आपकी लाइफस्टाइल और गलत खानपान से होता है। बता दें कि पेट में जब पथरी की शुरूआत होती है, तो इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/which-fruit-should-be-eaten-and-which-should-not-be-eaten-when-there-is-stone-in-the-stomach-know-complete-information/article-74402"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/stomach-stone.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Stomach Stone: (सच कहूं/अनु सैनी) आजकल के खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से पेट में पथरी वाले मरीजों की संख्या देश में लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पथरी का सीधा कनेक्शन आपकी लाइफस्टाइल और गलत खानपान से होता है। बता दें कि पेट में जब पथरी की शुरूआत होती है, तो इस दौरान पेशाब करते समय पेट में तेज दर्द और इंफेक्शन हो जाता है, पथरी में होने वाला दर्द काफी तेज होता है, इस दर्द को ना तो नौजवान बर्दाश्त कर पाते है और ना ही बुजुर्ग। ऐसे में आपको ये जानना आवश्यक है कि अगर आपके पेट में पथरी है तो आपको किन फलों का सेवन करना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पथरी में कौन से फल खाने चाहिए? Stomach Stone</h3>
<p style="text-align:justify;">पानी वाले फल: पथरी के मरीज को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए, इसके अलावा पथरी के मरीज को पानी वाले फल ज्यादा खाने चाहिए, जैसे तरबूज, खरबूजा, नारियल पानी, खीरा और हाई वॉटर युक्त फल खाना चाहिए, इससे शरीर में पानी की कमी नहीं रेहती है, और यह पेट में पथरी की समस्या को कम करते है।</p>
<p style="text-align:justify;">खट्टे फल: पथरी के मरीज को खट्टे फल या सिट्रिक फल खाने चाहिए, अगर आप पथरी से जूझ रहे हैं तो आपको खट्टे फलों का सेवन जरूर करना चाहिए, जैसे आप अपनी डाइट में संतरा, नींबू, अंगूर जैसे फलों को जरूर शामिल करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कैल्शियम से भरपूर फल: पथरी वाले मरीज को हमेश कैल्शियम से भरपूर फल खाने चाहिए, जैसे अंगूर, जामुन, कीवी जो कि सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पथरी के मरीज को कौन सा फल नहीं खाना चाहिए? Stomach Stone</h4>
<p style="text-align:justify;">पथरी की समस्या होने पर कौन सा फल और कौन सी सब्जी नहीं खानी चाहिए, ये बात बहुत ही कम लोग जानते होंगे। हम आपको बताते हैं, दरअसल पथरी होने पर अनार, अमरूद जैसे फल नहीं खाना चहिए। इसके अलाव सब्जियों में बेंगन, टमाटर और शकरकंद कम खाएं, ड्राई फ्रूट्स न खाएं, यह दिक्कत और अधिक बढ़ा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली और उसके आसपास के एरिया में भीषण गर्मी पड़ रही है, इस कारण किडनी स्टोन की गंभीर समस्या वहां बढ़ती ही जा रही है, इस का कारण शरीर में पानी की कमी बताई जा रही है, पिछले महीने से 30-40 प्रतिशत युवाओं में किडनी स्टोन की गंभीर बीमारी फैलती जा रही है।</p>
<p>नोट: किसी आर्टिकल में दी गई टिप्स और सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं, इस पर अमल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
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                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 12:02:13 +0530</pubDate>
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