<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/sco/tag-2310" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>sco - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/2310/rss</link>
                <description>sco RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>India-Pakistan: पाकिस्तान को भारत की खरी-खरी</title>
                                    <description><![CDATA[India-Pakistan: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत सरकार ने आतंकवाद के मुद्दा को मुखरता से उठाया। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी भाग ले रहे हैं। चीन और पाकिस्तान के शासक वर्चुअल रूप में भाग ले रहे हैं। इन दोनों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/indias-reprimand-to-pakistan/article-49623"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/sco.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-Pakistan: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत सरकार ने आतंकवाद के मुद्दा को मुखरता से उठाया। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी भाग ले रहे हैं। चीन और पाकिस्तान के शासक वर्चुअल रूप में भाग ले रहे हैं। इन दोनों देशों की उपस्थिति में भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा उठाना अहम है। भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिया बिना उसे स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब तक वो (पाकिस्तान) अपनी धरती पर और अपनी विदेश नीति में आतंकवाद का समर्थन करता रहेगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के आरोपों का सामना करना पड़ेगा। India-Pakistan</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री बन गया है, जिससे भारत के साथ-साथ खुद पाकिस्तान को भी नुकसान हो रहा है। आतंकवाद के कारण पाक आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहा है। पाक के कुछ नेता भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि आतंकवाद और सेना की तानाशाही के चलते देश बर्बाद हो रहा है। पाक को अतीत में झांक कर देखना चाहिए कि भारत ने आतंकवाद के मामले में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नरम रुख नहीं अपनाया है। विगत वर्षों में दो सर्जिकल स्ट्राइकलों ने पाक को स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी कीमत पर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। India-Pakistan</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही भारत विश्व के शक्तिशाली देशों के बिना दबाव में एक समान शक्ति के रूप में उभर रहा है। आर्थिक दृष्टि से रूस और अमेरिका जैसे देश भी भारत से मित्रता को अपने हित में समझ रहे हैं। इसी तरह चीन को भी यह संदेश दिया गया है कि आतंक को पालने वाले देश से संबंध बनाकर वह अपनी प्रतिष्ठा को मजबूत नहीं कर सकता। यदि पाकिस्तान भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित कर चलता तो दोनों देशों को व्यापार में लाभ पहुंचता। वहीं पाकिस्तान को महंगाई का सामना भी नहीं करना पड़ता। पाक को यह समझना चाहिए कि मित्र बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। India-Pakistan</p>
<p style="text-align:justify;">पाक शासकों को चाहिए कि वे आतंकवाद को पनाह देने की बजाए बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं। सीमाओं पर शांति बहाल के बिना बातचीत असंभव है। एससीओ, सार्क जैसे सम्मेलनों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब सदस्य देशों में वास्तविकताओं को स्वीकार कर बेहतरी के लिए उचित कदम उठाने का साहस दिखाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/indias-reprimand-to-pakistan/article-49623</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/indias-reprimand-to-pakistan/article-49623</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 16:46:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-07/sco.jpg"                         length="23073"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससीओ में बढ़ेगा भारत का दबदबा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों भारत के तटीय प्रदेश गोवा में शंघाई सहयोेग संघ (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। हालांकि, इस बैठक का घोषित उद्देश्य जुलाई में भारत में होने वाली राष्ट्राध्यक्षों की प्रस्तावित बैठक का एजेंडा तैयार करना था, लेकिन जिस तरह से यह बैठक पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के दौरे के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/indias-dominance-will-increase-in-sco/article-47999"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/india-sco.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले दिनों भारत के तटीय प्रदेश गोवा में शंघाई सहयोेग संघ (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। हालांकि, इस बैठक का घोषित उद्देश्य जुलाई में भारत में होने वाली राष्ट्राध्यक्षों की प्रस्तावित बैठक का एजेंडा तैयार करना था, लेकिन जिस तरह से यह बैठक पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के दौरे के कारण चर्चित हुई, उससे बैठक के अहम निष्कर्ष नेपथ्य में चले गए हैं। बिलावल भुट्टो की उपस्थिति वाले पक्ष को छोड़कर यदि बैठक के निष्कर्षों का आंकलन करें, तो साफ तौर पर कहा जा सकता है कि गोवा बैठक के निष्कर्ष समूह की सार्थकता के लिए लाभकारी रहने वाले हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जलवायु संकट रोकने के लिए एकजुट प्रयासों की जरुरत" href="http://10.0.0.122:1245/united-efforts-needed-to-stop-the-climate-crisis/">जलवायु संकट रोकने के लिए एकजुट प्रयासों की जरुरत</a></p>
<p style="text-align:justify;">पहला लाभकारी काम तो यह हुआ कि ईरान और बेलारूस (Belarus) को समूह में शामिल किए जाने पर सहमति बनी है। उम्मीद है, अगली बैठक में ईरान और बेलारूस भी शंघाई सहयोग का हिस्सा बन जाएंगे। इससे पहले दोनों देश पर्यवेक्षक राष्ट्र के तौर पर एससीओ से जुड़े हुए थे। साल 2001 में जिस वक्त एससीओ अस्तित्व में आया उस वक्त इसके सदस्यों की संख्या पांच थी। हाल-फिलहाल इसमे आठ सदस्य है। भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान। ईरान और बेलारूस को पूर्ण सदस्यता का दर्जा मिल जाने के बाद इसकी सदस्य संख्या बढ़कर दस हो जाएगी और एससीओ बहुधु्रवीय दुनिया का महत्वपूर्ण मंच बन जाएगा। रूसी और मंदारिन के अलावा अंग्रेजी को समूह की अधिकारिक भाषा बनाए जाने पर भी गोवा बैठक में सहमति बनी है।</p>
<h3>आतंकवाद रहा प्रमुख मुद्दा</h3>
<p style="text-align:justify;">बैनौलिम (गोवा) में समुद्र के किनारे ताज एक्सोटिका रिसॉर्ट में आयोजित बैठक में भारत और रूस के बीच ताजा तेल विवाद का मामला भी उठा। रूसी विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के साथ तेल व्यपार को लेकर निराशा जाहिर की। अफगानिस्तान, आतंकवाद, कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और वैश्विक समस्याओं से जुड़े मसलों पर भी चर्चा हुई। बैठक के उद्धाटन सत्र से लेकर समापन सत्र तक आतंकवाद प्रमुख मुद्दे के तौर पर छाया रहा। बैठक के दौरान जिस तरह से भारत ने आतंकवाद को लेकर अपना रुख जाहिर किया उससे वैश्विक पटल पर भारत की ताकत का एहसास होता है। सवाल यह है कि बैठक से भारत को क्या हासिल हुआ। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के उद्धाटन सत्र के भाषण व बैठक के समापन के बाद प्रैस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के प्रश्नों के जवाबों का आंकलन करें तो कहा जा सकता है कि भारत के नजरिए से यह बैठक काफी अहम रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि बैठक का सबसे अधिक चर्चित पक्ष पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश मंत्री का भारत आना रहा। करीब 12 वर्षों के बाद पाकिस्तान का कोई विदेश मंत्री भारत के दौर पर आया है। बिलावल भुट्टो जरदारी ने एससीओ की बैठक से पहले जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमान जनक शब्दों का प्रयोग किया था उसे देखते हुए यह तय था कि भारत में भुट्टो के दौरे को कोई खास तवज्जो मिलने वाली नहीं है। हुआ भी ऐसा ही। मीडिया की उत्सुकता को छोड़ दे तो भारत का विदेश मंत्रालय जरदारी के दौरे पर केवल औपचारिकताओं को निभाता हुआ दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद पाक विदेश मंत्री के साथ उस तरह की कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई जैसी की चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ जयशंकर ने की थी। विदेश मंत्रियों की बैठक में एस. जयशंकर ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि हमें अपने कूटनीतिक हितों को साधने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। भुट्टोे की प्रतिक्रिया से जाहिर है कि आंतरिक स्तर पर भीषण चुनौतियों का सामना करने और विश्व मंच पर लगातार अलग-थलग पड़ने के बावजूद पाकिस्तान आतंकवाद के मामले में अपना रवैया बदलने वाला नहीं है। बाद में पत्रकार वार्ता में जयशंकर ने भुट्टोे को आतंकवाद का प्रवक्ता और पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन देने वाला देश कहा।</p>
<h3>भारत की विचार शक्ति का महत्व बढ़ा | SCO</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, विदेश मंत्रियों की इस बैठक का अहम लक्ष्य जुलाई में होने वाली राष्ट्राध्यक्षों की शिखर बैठक का एजेंडा तय किया जाना था लेकिन बैठक के दौरान जिस तरह से भारत निर्मित ‘सिक्योर’ (एसईसीयूआरई) फ्रेमवर्क पर सहमति हुई है, उससे एससीओ के भीतर भारत की विचार शक्ति का महत्व बढ़ा है। सिक्योर का अर्थ है- सिक्योरिटी, इकॉनोमिक कॉपरेशन, कनेक्टिविटी, यूनिटी, रिस्पेक्ट फॉर सॉवर्निटी एंड इंटीग्रिटी और एनवायामेंट प्रोटेक्शन। भारत ने यह विचार वर्ष 2018 में एससीओ को दिया था। अहम बात यह है कि भारत ने एससीओ को जो फ्रेमवर्क प्रदान किया है, वह मात्र वैचारिक अवदान भर नहीं है, बल्कि उसे व्यवहारिकता के धरातल पर उतारने के लिए तेज कदम भी बढ़ाए हैं। भारत द्वारा ईरान में विकसित चाबहार बंदरगाह इसका बड़ा उदाहरण है। चाबहार को विकसित कर भारत ने अपने मध्य एशियाई साथियों को कनेक्टिविटी की नई उम्मीद दी है। वाराणसी को एससीओ की पहली सांस्कृतिक एवं पर्यटन राजधानी घोषित किया जाना भारत की इस विचार शक्ति का ही उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">एससीओ के सदस्य देशों में भारत के दो पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान भी शामिल हैं, और मौजूदा वक्त में इन दोनों देशों के साथ भारत के संबंध अपने सबसे खराब दौर में है। दूसरी ओर रूस-यूके्रन युद्ध के चलते विश्व परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। चीन और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ा है। रूस और चीन के बीच सामरिक निकटता बढ़ी हैं। भारत एससीओ में भी शामिल है, और क्वाड में भी। दोनों संगठनों में भारत आज सकारात्मक भूमिका में हैं। इसलिए एससीओ में शामिल मध्य एशियाई देशों को लगता है कि भारत उनकी आवाज बन सकता है। भौगोलिक निकटता के अलावा मध्य एशियाई देशों के इस विश्वास का एक आधार यह भी है कि भारत मध्य एशियाई देशों के विदेशमंत्रियो के साथ एक अन्य प्लेटफार्म पर भी काम कर रहा है। इस प्लेटफार्म के जरिए वह मध्य एशिया की आर्थिक उन्नति व कनेक्टिविटी में अपना योगदान दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस बात की आशंका थी कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टोे जरदारी की उपस्थिति के चलते गोवा बैठक तनाव का शिकार हो सकती है, लेकिन भारत ने जिस कूटनीतिक कुशलता से इसे मुकाम तक पहुंचाया है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान एससीओ के एजेंडे में उन्नत प्रौद्योगिकी और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने का जो आहवान किया है, वह एससीओ के भीतर भारत के बढ़ते हुए प्रभाव का ही द्योतक है। उम्मीद है जुलाई में प्रस्तावित शिखर बैठक के बाद एससीओ को आगे बढ़ाने में चीन व रूस के साथ भारत की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एनके सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/indias-dominance-will-increase-in-sco/article-47999</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/indias-dominance-will-increase-in-sco/article-47999</guid>
                <pubDate>Wed, 24 May 2023 09:50:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-05/india-sco.jpg"                         length="25562"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शंघाई सहयोग संगठन शिखर बैठक: निरर्थक कवायद</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तन का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन के एजेंडा में द्विपक्षीय विवादों को लाने का प्रयास किया जा रहा है जो संगठन के चार्टर के विरुद्ध है। उन्होंने इस क्षेत्र में भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों पर बल देते हुए कहा कि भारत शांति, रक्षा और समृद्धि में विश्वास […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sco-summit-meaningless-exercise/article-19931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/sco-summit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>पाकिस्तन का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन के एजेंडा में द्विपक्षीय विवादों को लाने का प्रयास किया जा रहा है जो संगठन के चार्टर के विरुद्ध है। उन्होंने इस क्षेत्र में भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों पर बल देते हुए कहा कि भारत शांति, रक्षा और समृद्धि में विश्वास करता है और उसने हमेशा से आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, मादक द्रव्यों की तस्करी और मनी लांडरिंग का विरोध किया है। शंघाई सहयोग संगठन का यह शिखर सम्मेलन अपने उद्देश्य पूरे करने में विफल रहा क्योंकि इसकी बैठकें अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक कवायद के रूप में केवल औपचारिक बैठकें रह गयी हैं।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">शंघाई सहयोग संगठन का 20वां शिखर सम्मेलन 10 नवंबर को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। आठ सदस्यीय इस संगठन के राष्ट्राध्यक्षों विशेषकर चीन, भारत और पाकिस्तान के नेताओं द्वारा कूटनयिक बातें की गयी। भारत और पाकिस्तान तथा भारत और चीन तथा भारत और चीन तथा पाकिस्तान के बीच चल रही प्रतिद्वंदिता के कारण लगता है शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन प्रेरणादायी नहीं रहा। बहुपक्षीयता और क्षेत्रीय संगठन के नाम पर विभिन्न देश शंघाई सहयोग संगठन जैसे समूहों में शामिल होते हैं और स्वयं शंघाई सहयोग संगठन संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्रमंडल, आसियान आदि जैसे बहुपक्षीय निकायों का सदस्य बनता है किंतु क्या ऐसे क्षेत्रीय संगठनों में राष्ट्रीय हित के प्रयोजन पूरे होते हैं? यह एक बड़ा प्रश्न है। उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान की प्रतिद्वंदिता के कारण सार्क अप्रसांगिक सा बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना एक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन के रूप में 15 जून 2001 को की गयी थी। इसमें चीन सहित मध्य एशिया के छह देश शामिल थे। भारत और पाकिस्तान रूस तथा चीन के कहने पर 2017 में इसमें शामिल हुए। रूस चाहता था कि भारत इस संगठन का सदस्य बने ताकि उसमें चीन का वर्चस्व स्थापित न हो। तो चीन ने पाकिस्तान को इसका सदस्य बनाकर संतुलन बनाने का प्रयास किया और दोनों देशों ने अस्ताना, कजाख्स्तान शिखर सम्मेलन में इस संगठन की सदस्यता ली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार शिखर सम्मेलन में दिए गए भाषण इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह संगठन वास्तविकता को ध्यान में नहीं रख रहा है अपितु केवल बातें कर रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, ‘‘शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों को पारस्परिक विश्वास बढ़ाना चाहिए और विवादों तथा मतभेदों को वार्ता तथा परामर्श से हल करना चाहिए। साथ ही आतंकवादी, अतिवादी और अलगाववादी शक्तियों का दृढ़ता से सामना करना चाहिए।’’ यह चीन की चाल है। वह धीेरे-धीरे भारत जैसे अपने पड़ोसी देशों की भूमि पर कब्जा करता है और फिर वार्ता करता है। वर्तमान में नियंत्रण रेखा पर गतिरोध के बारे में दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो गयी है किंतु चीन अपना कब्जा छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मोदी के बाद अपना भाषण दिया और बिना किसी देश का नाम लिए भारत की आलोचना की और चीन से मिल रही सहायता के कारण उसकी प्रशंसा की। कश्मीर का उल्लेख करते हुए इमरान खान ने कहा, ‘‘शंघाई सहयोग संगठन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों जैसे समानता, राष्ट्रों की संप्रभुता और लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का पालन करता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि विवादास्पद भूभागों में स्थिति को बदलने के लिए एकपक्षीय और अवैध उपायों का विरोध किया जाना चाहिए। इमरान खान ने यह टिप्पणी शंघाई सहयोग संगठन के सिद्धान्तों का उल्लंघन करते हुए की।</p>
<p style="text-align:justify;">संगठन का मूल सिद्धान्त आम सहमति और सहयोग है जिसे शंघाई भावना भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है किंतु हमें एक दूसरे की संप्रभुता और प्रादेशिक अख्ांडता का सम्मान करना चाहिए। उनका सीधा इशारा चीन द्वारा लद्दाख में अतिक्रमण की ओर था। यदि सदस्य देश इसमें एकजुटता और सहयोग की भावना बढ़ा सकते तो उनके बीच द्विपक्षीय टकराव नहीं होता। शंघाई सहयोग संगठन जैसे समूहों के भविष्य के बारे में प्रश्न चिह्न लग रहा है क्योंकि भारत और चीन दोनों नेताओं के बीच पारस्परिक गलतफहमी और अविश्वास रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशिया की नई भूराजनीति में चीन और भारत के बारे में जर्मन प्रोगेसिव फाउंडेशन द्वारा आयोजित राउंड टेबल में इस बात पर प्रकाश डाला गया है। इसमें दो मुख्य वक्ता इंस्टिट्यूट आॅफ साउथ एशियन स्टडी, चाइना इंस्टिट्यूट आॅफ कंटेपरेरी इंटरनेशनल रिलेशन के डॉ. हू शिसेंग और इंस्टिट्यूट आॅफ चाइनीज स्टडीज, दिल्ली के पूर्व निर्देशक तथा चीन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक कंठ थे। हू ने सीमा पर तनाव बढ़ाने के लिए भारत को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि सीमा पर भारत की गतिविधियां दुस्साहस, अवसरवाद और राजनीतिक भूल सुधार पर आधारित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अमरीका के साथ अपने संबंध सुधार रहा है और दोनों ही चीन पर अंकुश लगाने की चाह के कारण निकट आ रहे हैं। इसके प्रत्युत्तर में अशोक कंठ ने उन्हें स्मरण कराया कि किस तरह एक आर्थिक शक्ति के रूप में चीन के उदय से सारी दुनिया त्रस्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विचार को जर्मनी के संसद सदस्य तथा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता डॉ. नील ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि चीन और पश्चिमी देशों के बीच सुनियोजित प्रतिद्वंदिता बढ रही है। यूरोपीय संघ और अमरीका के बारे में बात करते हुए डॉ. नील ने कहा कि पश्चिमी देशों की अपेक्षा है कि चीन की अर्थव्यवस्था के विस्तार और व्यापार तथा निवेश के बढने के साथ पश्चिमी देश चाहते हैं कि वह राजनीतिक क्षेत्र में भी उदारीकरण करे। किंतु शी के नेतृत्व में चीन ने अलग राह अपनायी और यही नहीं उसने एक ऐसे मॉडल को थोपने का प्रयास किया जो मानव अधिकारों, स्वतंत्रता, कानून के शासन और लोकतंत्र की अवधारणा के विपरीत है। यूरोप ने यह विकल्प 70 वर्ष पूर्व चुन लिया था जब उसने अमरीका के साथ सहयोग किया क्योंकि अमरीका लोकतंत्र के प्रति वचनबद्ध है। वर्तमान में अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा प्रस्तावित समिट आॅफ डेमोक्रेसीज में भारत को आमंत्रित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत निश्चित रूप से ऐसी बैठकों में भाग लेगा। बशर्तें कि बाइडेन जनवरी तक अमरीकी राष्ट्रपति बन जाएं। तथापि शंघाई सहयोग संगठन नैतिक अभिव्यक्तियों और कूटनयिक विचार-विमर्श का मंच बना रहेगा। हो सकता है यह अपने उद्देश्यों को पूरा न करे। हो सकता है भारत को कुछ समय बाद ऐसा लगे कि वह इस समूह में अजनबी है क्योंकि इस समूह के प्रमुख सदस्य चीन और रूस हैं। शी जिनपिंग ने स्वयं को आजीवन चीन का राष्ट्रपति निर्वाचित करा दिया है और पुतिन 2036 तक रूस के राष्ट्रपति रहेंगे। भारत को अपने लोकतंत्र पर गर्व है इसलिए स्वाभाविक है कि उसे लगेगा कि वह गलत संगठन का सदस्य बन गया है। समय आ गया है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sco-summit-meaningless-exercise/article-19931</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sco-summit-meaningless-exercise/article-19931</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Nov 2020 11:01:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-11/sco-summit.jpg"                         length="63836"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तानी पीएम इमरान को &amp;#8220;एससीओ&amp;#8221; का न्यौता देगा भारत!</title>
                                    <description><![CDATA[एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि प्रोटोकॉल और सम्मेलन के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत आने का निमंत्रण दिया जाएगा। यह पाकिस्तान पर निर्भर करेगा कि वह इस समिट में हिस्सा लेना चाहता है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-will-invite-pakistan-pm-imran-for-sco/article-12499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/pakistan-pm.jpg" alt=""></a><br /><h2>भारत 8 देशों के इस वैश्विक संगठन की करेगा मेजबानी | Pakistan PM</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (Pakistan PM) इमरान खान (Imran Khan) इस साल जुलाई में भारत का दौरा कर सकते हैं। भारत इस साल शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक बैठक में पाकिस्तान के उन्हें निमंत्रण देगा। बता दें कि यह पहला मौका है जब भारत 8 देशों के इस वैश्विक संगठन की मेजबानी करेगा। पाकिस्तान के अखबार ‘द न्यूज’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अभी पाक पीएम के ‘एससीओ’ शामिल होने पर फैसला नहीं हुआ है। वहीं एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि प्रोटोकॉल और सम्मेलन के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत आने का निमंत्रण दिया जाएगा। यह पाकिस्तान पर निर्भर करेगा कि वह इस समिट में हिस्सा लेना चाहता है या नहीं। उन्होंने साथ ही कहा कि अभी इस सम्मेलन में काफी वक्त है। बता दें कि एससीओ की बैठक जुलाई में प्रस्तावित है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये देश हैं एससीओ के सदस्य  | Pakistan PM</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">शंघाई सहयोग संगठन के महासचिव व्लादिमीर नोरोव ने कहा, ‘शंघाई सहयोग संगठन की वार्षिक बैठक भारत में आयोजित कराई जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">यह पहला मौका होगा जब भारत इस बैठक की मेजबानी करेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">बता दें कि भारत के अलावा पाकिस्तान, रूस, कजाखकिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के सदस्य हैं।</li>
</ul>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>किर्गिस्तान में हुई थी पिछली बैठक</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सभी देशों से अपील की थी कि वे आतंकवाद पर रोक लगाने की हर मुमकिन कोशिश करें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पाकिस्तानी पीएम इमरान खाने ने भी की थी शिरकत</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/india-will-invite-pakistan-pm-imran-for-sco/article-12499</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/india-will-invite-pakistan-pm-imran-for-sco/article-12499</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 12:03:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/pakistan-pm.jpg"                         length="9673"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससीओ में भारत की कूटनीतिक सफलता के मायने!</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के साथ-साथ भारत भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का पूर्णकालिक सदस्य बन गया। इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस प्रकार भारत अब एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अहम् भूमिका निभाने जा रहा है। पिछले दिनों भारत और पाकिस्तान को एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/meaning-of-indias-diplomatic-success-in-sco/article-1269"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के साथ-साथ भारत भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का पूर्णकालिक सदस्य बन गया। इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस प्रकार भारत अब एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अहम् भूमिका निभाने जा रहा है। पिछले दिनों भारत और पाकिस्तान को एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की थी। दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के मुद्दे पर बढ़ते मतभेदों के दौरान हुई इस मुलाकात को संबंध सुधारने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं के बीच की यह मुलाकात इस लिहाज से खास है कि यह इनके बीच की इस साल की पहली मुलाकात है और यह भारत द्वारा बेल्ट एंड रोड फोरम का बहिष्कार किए जाने के बाद हुई। पीएम मोदी करीब 8 महीने बाद चीन के राष्ट्रपति से मिले। एससीओ में भारत की पूर्ण सदस्यता का समर्थन करने पर भारत ने चीन का धन्यवाद किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच इस औपचारिक बैठक को काफी अहम् माना जा रहा है, क्योंकि चीन के सीपीईसी और एनएसजी में भारत की नो एंट्री पर दोनों देशों के रिश्तों में खटास रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब उम्मीद है कि इस बैठक के बाद कुछ सकारात्मक कदम सामने आ सकते हैं। इससे पहले पीएम मोदी ने करीब 17 महीने बाद इस सम्मेलन में पाकिस्तान पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात की। भारत-पाक रिश्तों में तनाव व दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात की अटकलों के बीच एक कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एक दूसरे का अभिवादन किया और एक दूसरे का हालचाल पूछा।</p>
<p style="text-align:justify;">एससीओ की स्थापना अप्रैल 1996 में चीन के शंघाई में हुई थी। उस समय चीन और रूस के अलावा मध्य एशिया के तीन देश कजाखस्तान, किर्गिस्तान और तजीकिस्तान इसके संस्थापक सदस्य थे, इसलिए तब इसका नाम शंघाई-5 रखा गया था। 2001 में उज्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब यह 8 देशों वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का मंच बन गया है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर आपसी सहयोग बढ़ाना है। एससीओ की सदस्यता मिलने से भारत का मध्य एशियाई देशों से रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। वहां के बाजारों में भारत का प्रवेश आसान हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य एशिया के देशों के पास गैस का बड़ा भंडार है। चूंकि चीन पहले ही रूस से बड़े पैमाने पर अपनी जरूरत की गैस ले रहा है, ऐसे में कजाखस्तान, तजीकिस्तान, उज्बेकिस्तान जैसे देश अपनी गैस की बिक्री के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। रूस और कजाखस्तान जैसे सदस्यों के साथ प्राकृतिक गैस खरीद को लेकर भारत की बातचीत पहले से हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस से भारत तक गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना पर भी बातचीत चल रही है। इसी तरह भारत, किर्गिस्तान के साथ भी ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करना चाहता है। विभिन्न देशों की ऊर्जा जरूरतों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए एक समिति भी बनी है। भारत मध्य एशियाई देशों में बड़ा निवेश कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही ऊर्जा संरक्षण से जुड़ी आधुनिक टेक्नॉलजी भी इन मुल्कों को उपलब्ध करा सकता है। एससीओ की सदस्यता कूटनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। बताते हैं कि भारत के शामिल होने से इसमें चीन का प्रभुत्व कम होगा। अब चीन, पाकिस्तान के हर कदम का आंख मूंदकर समर्थन करने से भी हिचकिचाएगा। लेकिन चीन ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना को लेकर भारत पर कूटनीतिक दबाव बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एससीओ की सदस्यता हासिल करने में पाकिस्तान ने भले ही सफलता हासिल कर ली हो, पर उसके साथ बहुत अच्छा नहीं हुआ। एससीओ की पूर्ण सदस्यता मिलते ही जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ के ही मंच से पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर लपेटा, वहीं दूसरी ओर उसके सदाबहार दोस्त चीन के राष्ट्रपति शी ने भी ब्लूचिस्तान में दो चीनी शिक्षकों की हत्या से खफा होकर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से रस्मी मुलाकात तक नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">कह सकते हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत को एससीओ के रूप में एक ऐसा कारगर मंच मिल चुका है, जहां आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को आसानी से घेरा जा सकता है। एससीओ के मंच पर द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकती। यह बात एससीओ के सभी सदस्य देश अच्छी तरह से जानते हैं। भारत सभी मंचों पर जहां पाक द्वारा आतंकवाद को प्रायोजित करने का मुद्दा जोर-शोर से उठाता रहता है वहीं पाकिस्तान जवाब में कश्मीर का मुद्दा जोर-शोर से उठाने का प्रयास करता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि आतंकवाद आज एक विश्वव्यापी समस्या बन चुका है ऐसे में एससीओ के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाने में भारत को कोई समस्या नहीं आएगी जबकि पाकिस्तान को इस मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि पूरी दुनिया कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा मान चुकी है और उसे अकसर इसे द्विपक्षीय रूप से सुलझाने की सलाह भी मिलती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान लाख चाहकर भी एससीओ का हाल सार्क जैसा नहीं कर सकता। सार्क में तो पाकिस्तान जब तब भारत का रास्ता काटने का प्रयास करता रहता था लेकिन एससीओ में पाकिस्तान के लिए ऐसा करना असंभव है। इस संगठन में चीन और रूस जैसी बड़ी ताकतें और मजबूत अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं जो अपने आर्थिक हितों की खातिर पाकिस्तान को संगठन के एजेंडे से इतर कुछ भी करने की इजाजत नहीं देंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही रूस द्वारा भारत को सदस्यता दिलाने के जवाब में चीन ने पाकिस्तान के लिए भी एससीओ के दरवाजे खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। ऐसे में जब एससीओ में शामिल देश आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भारत की चिन्ताओं पर ध्यान देंगे तो पाकिस्तान पर निश्चित ही दबाव पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, यह कह सकते हैं कि भारत आतंकवाद के मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान को एक्सपोज कर सकता है क्योंकि यह एक ऐसा बहुपक्षीय मसला है जिससे सभी देश पीड़ित हैं। आतंकवाद से लड़ने के लिए सभी सदस्य देशों ने प्रस्ताव पास किया था, जिससे एससीओ के ऐंटी टेरर चार्टर को मजबूती मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">माना जा रहा है कि आतंकवाद के मसले पर रूस के लिए भारत का सहयोग करना और भी आसान हो जाएगा। अन्य मामलों में भी दोनों में सहयोग बढ़ेगा। उम्मीद है भारत की उपस्थिति से इस संगठन को एक नया तेवर मिलेगा। देखना है कि भारत इसका कितना लाभ उठा पाता है?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-राजीव रंजन तिवारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/meaning-of-indias-diplomatic-success-in-sco/article-1269</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/meaning-of-indias-diplomatic-success-in-sco/article-1269</guid>
                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 22:35:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/india-2.jpg"                         length="53713"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन आतंकवाद: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[अस्‍ताना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को SCO की पूर्णकालिक सदस्यता दी गई। साल 2001 के बाद पहली बार चीन के प्रभुत्व वाले SCO का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही इसकी सदस्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/narendera-modi-thanks-china-supporting-india-become-sco-member/article-1055"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/narendera-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अस्‍ताना:</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को SCO की पूर्णकालिक सदस्यता दी गई। साल 2001 के बाद पहली बार चीन के प्रभुत्व वाले SCO का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही इसकी सदस्य संख्या छह से बढ़कर आठ हो गई। अस्ताना में SCO समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानव मूल्यों का सबसे बड़ा दुश्मन है। लिहाजा सभी देशों को मिलकर इसके खिलाफ लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों के साथ हमारे संबंध ऐतिहासिक हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">प्रमुख बातें:-</h1>
<ul>
<li>SCO देशों से हमारी सहभागिता के कई आयाम हैं। परस्पर विश्वास और सद्भावना हमारे राजनैतिक व आर्थिक सहयोग की मुख्य आधारशिला है।</li>
<li>SCO देशो के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता है और हम इसका भरपूर समर्थन करते हैं।</li>
<li>पूरा विश्वास है कि भारत-SCO सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक नई दिशा तथा शक्ति प्रदान करेगा।</li>
<li>क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में अफगानिस्तान में शांति तथा स्थिरता भी SCO के प्रयासों से लाभ उठा सकती है।</li>
<li>आज SCO के सफर में एक ऐतिहासिक मोड़ है। भारत SCO के साथ एक सक्रिय तथा सकारात्मक सहभागिता की रचना के लिए तैयार तथा कटिबद्ध है।</li>
<li>INSTC व एग्रीमेंट से हमारा जुड़ना और अश्काबाद एग्रीमेंट को ज्‍वाइन करने का निर्णय, भारत को इस क्षेत्र से और घनिष्ठ रूप से जोड़ेगा।</li>
<li>आतंकवाद मानव अधिकारों &amp; मूल्यों के सबसे बड़े उल्लंघनकारियों में से एक है। अतः आतंकवाद व अतिवाद के खिलाफ संघर्ष SCO के सहयोग का अहम हिस्‍सा है।</li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/narendera-modi-thanks-china-supporting-india-become-sco-member/article-1055</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/other-news/narendera-modi-thanks-china-supporting-india-become-sco-member/article-1055</guid>
                <pubDate>Fri, 09 Jun 2017 03:51:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/narendera-modi.jpg"                         length="64415"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        