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                <title>Agricultur - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Mustard cultivation: सरसों की इन दो किस्मों की करें बिजाई, 40% ज्यादा होगी आपकी कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[Mustard cultivation: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Ch.CSHA University, Hisar) के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। अमूमन देश में सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/sow-these-two-varieties-of-mustard-your-income-will-be-forty-more/article-52367"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/mustard-cultivation.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mustard cultivation: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Ch.CSHA University, Hisar) के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। अमूमन देश में सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों ने सरसों की नई किस्म ईजाद कर देश भर के किसानों को सही समय पर फायदा देने का काम किया है। इन नई किस्मों में आरएच 1424 व आरएच 1706 शामिल हैं। Mustard cultivation</p>
<p style="text-align:justify;">हकृवि कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने बताया कि सरसों की नई किस्मों से बिजाई करने से किसानों को पहले से बेहतर लाभ मिलेगा। इनकी बिजाई से जहां खेतों में सरसों की पैदावार में बढ़ोतरी होगी, वहीं तेल की मात्रा भी पहले से अधिक मिलेगी। तिलहन वैज्ञानिकों का मानना है कि औसतन रूप से सरसों की फसल के कुल उत्पादन का 40 फीसदी तेल निकलता है, लेकिन इन किस्म के बिजाई करने से 40 प्रतिशत से अधिक तेल की मात्रा मिलेगी। हकृवि द्वारा सरसों की इन दोनों नई किस्मों के अलावा पहले से विकसित सभी प्रकार की किस्मों के बीज विश्वविद्यालय के बिक्री केंद्र के साथ-साथ देशभर के सभी सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध हैं। Mustard cultivation</p>
<h3 style="text-align:justify;">5 वर्ष पूर्व विकसित आरएच 725 किस्म आज भी लोकप्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के.पाहुजा ने बताया कि सरसों अनुभाग के वैज्ञानिकों की टीम अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर 21 किस्में विकसित कर चुकी हैं। वर्ष 2018 में विकसित की गई किस्म आरएच 725 हरियाणा के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली व बिहार राज्यों में बहुत लोकप्रिय है, जिसकी किसान 25 से 30 मण प्रति एकड़ आसानी से उपज प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर सरसों उत्पादन में तीसरे नंबर पर है भारत</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों, राया/राई व तारामीरा रबी फसल की प्रमुख तिलहनी फसल है। इस फसल का एक तरफ जहां भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है, वहीं सरसों के उत्पादन से मिलने वाले तेल से रसोई में भी तड़का लगता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में सरसों का तेल प्रमुखता से सब्जियां चटपटे पकवान बनाने के काम में लिया जाता है। सरसों उत्पादन और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में चीन और कनाडा के बाद भारत का तीसरा स्थान है। CCSHAU Hisar</p>
<h3 style="text-align:justify;">मैदानी क्षेत्रों में होता है उत्पादन, पर राजस्थान सबसे आगे</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे है। यहां की जलवायु और मिट्टी सरसों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग आंकड़ों के अनुसार देश में कुल उत्पादित होने वाले सरसों में राजस्थान में अकेले 46.7 प्रतिशत का उत्पादन होता है। राजस्थान सहित मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारत का 88 फीसदी उत्पादन होता है। सरसों के उत्पादन में मध्य प्रदेश की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस फसल की खेती कम सिंचाई और कम लागत में आसानी से हो जाती है। HAU HISAR</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुसंधान के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड</h3>
<p style="text-align:justify;">हकृवि को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से भी नवाजा गया है। कुलपति प्रो. काम्बोज ने बताया कि यह अवार्ड राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा जम्मू में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहायक महानिदेशक तिलहन व दाल डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया। प्रो. कंबोज ने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक टीम ने हाल ही में सरसों की दो नई उन्नत किस्में विकसित कर एक नया आयाम स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार सहित उनकी टीम को बधाई दी। Mustard Cultivation</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-डॉ संदीप सिंहमार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tea Cultivation: चाय की खेती से इस तरह दोगुना मुनाफा ले सकते है, जानिए उचित तकनीक" href="http://10.0.0.122:1245/tea-cultivation/">Tea Cultivation: चाय की खेती से इस तरह दोगुना मुनाफा ले सकते है, जानिए उचित तकनीक</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 14:37:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>PM Fasal Bima Yojana: किसानों की हुई मौज, एक हफ्ते में मिलेगी खराब फसल के मुआवजे की डोज !</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। PM Fasal Bima Yojana आजकल आए दिन बदलते मौसम के रंग-ढंग के चलते खेती करना आसान नहीं रह गया है। इसी बदलते मौसम से ज्यादातर फसलें खेतों में ही बर्बाद हो जाती हैं, जिसके नुकसान का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। इन अनचाही आपदाओं से किसानों और फसलों को सुरक्षा कवच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/pm-fasal-bima-yojana-became-the-protection-shield-of-the-farmers/article-48559"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/pm-fasal-bima-yojana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> PM Fasal Bima Yojana आजकल आए दिन बदलते मौसम के रंग-ढंग के चलते खेती करना आसान नहीं रह गया है। इसी बदलते मौसम से ज्यादातर फसलें खेतों में ही बर्बाद हो जाती हैं, जिसके नुकसान का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। इन अनचाही आपदाओं से किसानों और फसलों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए पीएम फसल बीमा योजना चलाई गई है। कई राज्यों में फसल बीमा योजना के सहारे ही बहुत से किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई हो सकी है। PM Fasal Bima Yojana</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/chawal-ki-kheti/">Chawal ki Kheti: कैसे करें चावल की खेती ? और ये कैसे बन सकता है कमाई का जरिया, पूरी जानकारी</a></p>
<p style="text-align:justify;">अबकी बार खरीफ सीजन देश के किसानों के लिए अच्छा नहीं रहा। इस साल बाढ़, बारिश और सूखे से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बार किसानों की करोड़ों रुपए की फसल बर्बाद हो गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों में किसान फसल खराब होने से कराहते रहे। जब भी किसी आपदा की वजह से फसलें खराब होती हैं तो किसानों की उम्मीदें केंद्र सरकार से ही होती है। केंद्र सरकार ने भी किसानों की मदद हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की हुई है। देश में लाखों किसान हर साल इस योजना का लाभ उठाते हैं। PM Fasal Bima Yojana</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार किसानों की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दे रही है। बता दें कि वर्तमान में किसानों के दावे और सरकार से नुकसान के आंकड़े मिलने के बाद ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पैसा किसानों को दिया जाता है। इसके लिए सर्वे में काफी समय लगता है और करीब डेढ़ से दो महीने बाद किसानों को भुगतान किया जाता है। PM Fasal Bima Yojana</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार के किसानों के लिए चलाई जा रही कृषि इनपुट सब्सिडी योजना के तहत सिंचित क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों को प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होने पर 13,500 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं बिना सिंचाई के खेतों में फसल खराब होने पर 6800 रुपये का राहत अनुदान देने का प्रावधान केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आता है। बिहार राज्य के कई इलाके आज भी बंजर हैं, जहां 4 इंच तक बालू जमा है। ऐसे क्षेत्रों में जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें 12,200 रुपये अनुदान राशि देने का प्रावधान है। PM Fasal Bima Yojana</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना 2016 में शुरू की गई थी। अब तक 37 करोड़ से ज्यादा किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 8.31 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिला था। इसके साथ कई जगहों पर धन की कमी, राज्य सरकारों के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, बीमा कंपनियों एवं किसानों के बीच समन्वय भी एक बड़ी समस्या है। PM Fasal Bima Yojana</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 13:17:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Arjun ki Chhal: इस पेड़ की छाल, किसानों को करेगी मालामाल, विदेशों में बढ़ी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[विज्ञान ने भी माना, इसकी छाल पीने से खुलते हैं ब्लाकेज हमारे भारत देश में कुछ ऐसे पेड़ हैं, जिनमें अत्याधिक (Arjun ki Chhal) औषधीय गुण हंै। अर्जुन भी एक ऐसा ही पेड़ है। इस पेड़ की छाल का उपयोग काढ़ा बनाने के लिए किया जाता है। साथ ही बैड कोलेस्ट्रॉल समेत कई अन्य बीमारियों में भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/arjun-ki-chhal-the-bark-of-this-tree-will-make-farmers-rich-increased-demand-abroad/article-46874"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/arjun-ki-chhal.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">विज्ञान ने भी माना, इसकी छाल पीने से खुलते हैं ब्लाकेज</h3>
<p style="text-align:justify;">हमारे भारत देश में कुछ ऐसे पेड़ हैं, जिनमें अत्याधिक (Arjun ki Chhal) औषधीय गुण हंै। अर्जुन भी एक ऐसा ही पेड़ है। इस पेड़ की छाल का उपयोग काढ़ा बनाने के लिए किया जाता है। साथ ही बैड कोलेस्ट्रॉल समेत कई अन्य बीमारियों में भी इसके सेवन की सलाह दी जाती है। फर्नीचर बनाने में भी इस पेड़ का उपयोग करके बढ़िया मुनाफा कमाया जा सकता है। अर्जुन का पेड़ 47 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में अच्छा विकास करता है। गर्मियों में इसकी खेती अति उपयुक्त मानी जाती है। इसे किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। बाजार में इसकी लकड़ियों और छाल की अच्छी डिमांड है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसी भी मिट्टी में उगा सकते हैं | Arjun ki Chhal</h3>
<p style="text-align:justify;">अर्जुन का पेड़ किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। क्योंकि यह 47 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में अच्छा विकास करता है। हालांकि, इसका पौधा, उपजाऊ जलोढ़-कछारी, बलुई दोमट मिट्टी में काफी तेजी से विकास करता है। बुवाई से पहले उबलते हुए पानी में इसके बीजों को भिगोकर उपचार जरूर कर लें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बुवाई के समय बरतें सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके बीजों को पानी में 3 से 4 दिन तक भिगोए रखना है। 8 से 9 दिन में ये अंकुरित होते हैं। इसके बाद ही इसकी बुवाई खेतों में करनी चाहिए। अर्जुन पेड़ सही तरीके से विकास करे, इसके लिए खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। अतिरिक्त जलजमाव से पौधे सड़ सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ध्यान देने योग्य बातें | Arjun ki Chhal</h3>
<p style="text-align:justify;">इस पेड़ को उसी जगह लगाएं, जहां सीधी धूप आती हो। छांव वाली जगहों पर इस पौधों को लगाने से उसका विकास रूक जाएगा। बगीचे में इसे उगाते समय ऐसी जगह चुनें जहां कम से कम 4-6 घंटे की सीधी धूप मिले। उसे जितनी ज्यादा रोशनी मिलेगी, उसकी ग्रोथ के लिए उतना ही अच्छा होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अर्जुन छाल की अच्छी है डिमांड | Arjun ki Chhal</h3>
<p style="text-align:justify;">अर्जुन का पेड़ 15- 16 साल में तैयार होता है। इस दौरान इसकी लम्बाई 11-12 मीटर और मोटाई 59-89 सेमी तक हो जाती है। बाजार में इसकी छाल काफी मंहगी बिकती है। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर इसकी कीमत हजारों में पहुंच रही है। इसके अलावा इस पेड़ की लकड़ियों के फर्नीचर की भी मार्केट में काफी डिमांड है। किसान अर्जुन के पेड़ से लाखों का अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Apr 2023 10:08:58 +0530</pubDate>
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                <title>साची-साच बोलूं सूं 10 करोड़ का घोलू- 2: लग्जरी कार और आलीशान बंगलों को भी मात | 10 Crore Buffalo</title>
                                    <description><![CDATA[नहाने के लिए एक स्विमिंग पुल मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में चल रहे कृषि (10 Crore Buffalo) एवं पशु मेले में घोलू -2 नामक एक भैंसा चर्चा का विषय बना हुआ है। 5 फुट 7 इंच का यह भैंसा 16 कुंतल वजनी है। कीमत में यह भैंसा लग्जरी कार एवं आलीशान बंगलों को भी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/10-crore-buffalo/article-45974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/10-crore-buffalo.jpg" alt=""></a><br /><h3>नहाने के लिए एक स्विमिंग पुल</h3>
<p><strong>मुजफ्फरनगर।</strong> उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में चल रहे कृषि (10 Crore Buffalo) एवं पशु मेले में घोलू -2 नामक एक भैंसा चर्चा का विषय बना हुआ है। 5 फुट 7 इंच का यह भैंसा 16 कुंतल वजनी है। कीमत में यह भैंसा लग्जरी कार एवं आलीशान बंगलों को भी मात दे रहा है।<br />
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किसी भैंसे की कीमत कितनी हो सकती है। आप लोगों में से कईयों ने करोड़ों की कार या फिर बंगले के बारे में सुना होगा लेकिन देश के एक शख्स के पास एक ऐसा भैंसा है जिसकी कीमत करोंड़ों में आंकी गई है। 10 करोड़ के भैंसे के बारे में सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा सकते हैं। इस भैंसे की कीमत के अलावा इसके डील-डौल देखभर भी लोग हैरान हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">11 बार नेशनल चैंपियन रह चुके है घोलू-2 के दादा | 10 Crore Buffalo</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के पानीपत निवासी घोलू-2 के मालिक नरेंद्र सिंह घोलू-2 के साथ मुजफ्फरनगर में आयोजित कृषि एवं पशु मेले में पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि घोलू-2 की मां का नाम रानी और पिता का नाम पीसी 483 और दादा का नाम घोलू है। घोलू 11 साल तक नेशनल चैंपियन रह चुके हैं और घोलू-2 भी 6 बार नेशनल चैंपियनशिप का खिताब जीत चुका है। अभी हाल में घोलू-2 दादरी में हुए स्टेट शो में 5 लाख रूपये का बेस्ट एनिमल आॅफ द शो का खिताब जीतकर आया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घोलू-2 का नहाना भी लग्जरी है | 10 Crore Buffalo</h3>
<p style="text-align:justify;">भैंसे के मालिक नरेंद्र का कहना है कि घोलू-2 दिन भर में 30 किलो चने खाता है। यह हर महीने 30 हजार रुपये का खाना खाता है। लेकिन घोलू-2 अपने मालिक को 30 से 40 करोड़ रुपये भी साल में कमा कर देता है। बता दें कि घोलू-2 के नहाने के लिए एक स्विमिंग पुल भी है।</p>
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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 20:49:09 +0530</pubDate>
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