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                <title>supreme court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Punjab News: ईडब्ल्यूएस कोटा मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 का लगातार कार्यान्वयन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/notice-issued-to-punjab-government-in-ews-quota-case/article-86376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">EWS Quota Case: नई दिल्ली/चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 का लगातार कार्यान्वयन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। Punjab News</p>
<p style="text-align:justify;">सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केएस राजू लीगल ट्रस्ट द्वारा अपने प्रतिनिधि डॉ. जगमोहन सिंह राजू के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि पंजाब के कई निजी स्कूल आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(सी) के तहत अनिवार्यताओं का पालन करने में विफल रहे हैं, जिसके तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों को प्रवेश स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है, जिसके तहत कम से कम 50,000 छात्रों को प्रवेश दिया जाना चाहिए था, लेकिन सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के माध्यम से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि कुछ स्कूलों ने लगभग 15 वर्षों से इस योजना के तहत एक भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर, मुख्य न्यायाधीश कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करते हुए टिप्पणी की कि एक अध्ययन करें और पता लगाएं कि कितने स्कूलों ने प्रवेश देने से इनकार किया है। आरटीआई को बुद्धिमानी से तैयार किया जाना चाहिए। देखें कि कितने निजी स्कूल मान्यता प्राप्त हैं, कितने प्रवेश हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। Punjab News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:34:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Meenakshi Natarajan Petition: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, याचिका खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की बेंच में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इलेक्शन पिटीशन हाईकोर्ट मे दाखिल कर सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/meenakshi-natarajan-petition-congress-leader-meenakshi-natarajan-did-not-get/article-86240"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-23.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Meenakshi Natarajan's Petition dismissed: नई दिल्ली। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की बेंच में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इलेक्शन पिटीशन हाईकोर्ट मे दाखिल कर सकते हैं। Meenakshi Natarajan Petition </p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी नटराजन की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि एक प्राईवेट शिकायत पर नोटिस हुआ है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने प्रथमदृष्टया शिकायत में कुछ वजन देखने के बाद ही समन किया होगा।अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये एक निजी शिकायत है। जिसमें संज्ञान नहीं लिया गया है। आरपी एक्ट का कानून कहता है कि कम से कम आरोप तय होने चाहिए। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंघवी ने कहा कि अगर रिटर्निंग ऑफिसर मनमाने ढंग से काम करता जिससे किसी एक पार्टी को फायदा होता है, तो उसमें कोर्ट दखल दे सकता है। सिंघवी ने कहा कि कानून में साफ है जब तक आरोप तय न हो, तब तक नामांकन पत्र में घोषणा करना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस शिकायत में मीनाक्षी नटराजन का जिक्र है और घटना का जो समय बताया गया है, उस वक्त मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी नहीं थीं; ये उनके अप्वाइंट होने के 3 साल पहले की बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कोई आरोप तय नहीं हुआ है, तो इसकी जानकारी उन्हें क्यों देनी चाहिए? अगर कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग है, तो वह कैंडिडेट के तौर पर बताएंगी। हम लोग केंद्रीय चुनाव आयोग भी गए थे, एक घंटे तक बहस की और आयोग इस मामले पर चुप है, यह निंदनीय है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंघवी ने दलील में कहा कि कल मुझे अदालत में नहीं सुना गया। इसका नतीजा ये हुआ कि कोई चुनाव नहीं हुआ और दूसरा प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत गया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण में ये साफ हुआ था कि चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होना चाहिए। सिंघवी की ओर से कहा गया कि इस चुनाव में चुनावी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की जगह उसे खत्म किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हमें कोई ऐसा जजमेंट दिखाइए, जिसमे हमने आरओ द्वारा रिजेक्ट किए जाने के बाद नॉमिनेशन स्वीकार करके मामलों में दखल दिया है, जहां पार्लियामेंट्री या लेजिस्लेटिव इलेक्शन में नॉमिनेशन के बाद हमने आरओ के ऑर्डर को खारिज किया हो। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोर्ट बार-बार कहता रहा है कि अगर एक बार नॉमिनेशन रद्द हो जाए, सही या गलत, तो इलेक्शन पिटीशन ही एकमात्र रास्ता है। </p>
<p style="text-align:justify;">सिंघवी ने कहा कि यहां आरओ ने 2+2 को 6 बता दिया। कानून के खिलाफ जाकर रिटर्निंग ने फैसला लिया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव तक लड़ने नहीं दिया गया, लड़ कर हारती या जीतती उससे तय होता। इसपर चुनाव आयोग की चुप्पी हैरान कर देने वाली है। सिंघवी की ओर से कहा गया, "कल कोई चुनाव नहीं हुआ, बल्कि एकतरफा नतीजे घोषित कर दिए गए। आरओ की जिम्मेदारी कानून का पालन करना था। जो फैसला दिया गया, उसके हिसाब से आरओ का फैसला पलटना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसे पद से हटा देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता का कहना है कि आरओ ने ऑर्डर पास किया और हम चुनाव आयोग के पास गए और उन्होंने दखल नहीं दिया। आरपी एक्ट की धारा 100(1सी) में कहा गया है कि यह एक ऐसा मामला है, जिस पर हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटीशन के जरिए सुनवाई होनी चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि हमने समय से पहले रिजल्ट घोषित कर दिया है, लेकिन आरपी एक्ट का सेक्शन 53 (चुनाव लड़े और बिना लड़े चुनाव में प्रोसेस) सब-सेक्शन 3 में कहा गया है कि अगर ऐसे कैंडिडेट की संख्या सीटों से कम है, तो चुनाव आयोग तुरंत रिजल्ट घोषित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्याशी महेश केवट के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 2018 के संशोधन के बाद से ये साफ है कि हर तरह के पेंडिंग केस बताना जरूरी है, चाहे संज्ञान हुआ है या नहीं। रोहतगी ने कहा कि आर्टिकल 32 या 226 के तहत ये याचिका सुनवाई लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। चुनावी याचिका लगाना मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि कानूनी अधिकार है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति बसु जजमेंट में साफ किया था। सिंघवी ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के दलीलें रखने पर विरोध किया। क्योंकि केंद्र सरकार इसमें पक्षकार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हम यह तय करेंगे कि याचिका मेंटेनेबल है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:22:57 +0530</pubDate>
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                <title>TET News: अब नौकरी व प्रमोशन के लिए टीईटी जरुरी, 3 साल में पास नहीं की तो जाएगी नौकरी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य कर दी है। 5 साल से ज्यादा जिनकी सेवा है, उन शिक्षकों को तीन साल में टीईटी पास करना जरुरी होगा, अन्यथा नौकरी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/tet-news-now-tet-is-necessary-for-job-and-promotion/article-85808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-23.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">TET Mandatory for Existing Teachers: श्रीगंगानगर (सच कहूँ/लखजीत सिंह)। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य होगी। केंद्र सरकार ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी है। जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच वर्ष से अधिक सेवा शेष है, उन्हें तीन साल के भीतर टीईटी पास करना होगा, अन्यथा नौकरी जा सकती है। वहीं जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है, वे बिना टीईटी सेवानिवृत्ति तक काम कर सकते हैं, लेकिन पदोन्नति के लिए परीक्षा अनिवार्य रहेगी। TET News</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि टीईटी अब केवल नई भर्ती के लिए ही नहीं, बल्कि सेवारत शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी जरूरी है। बिना टीईटी पास किए कोई भी शिक्षक पदोन्नति का पात्र नहीं होगा। मंत्रालय ने बताया कि आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 23 के तहत एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता तय की थी, जिसमें टीईटी अनिवार्य है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का अहम कदम</h3>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लेकिन पुराने शिक्षकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण है। शिक्षक संघ रेसटा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पुराने शिक्षकों को छूट देने की मांग की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि लंबे समय से सेवा में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि यह उनकी आजीविका पर सीधा असर डालता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टीईटी पास करने की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी पास करने की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। साथ ही सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा नियमित रूप से कम से कम हर छह माह में एक बार आयोजित करें, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें। हालांकि, 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पूर्ण छूट देने की मांग अदालत ने खारिज कर दी। TET News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:14:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court News: आवारा कुत्तों के आतंक पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, जल्द पढ़ें</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court News:vआवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने ABC Rules के पालन, एंटी-रेबीज व्यवस्था और खतरनाक कुत्तों पर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/supreme-court-news-big-action-of-supreme-court-on-terror/article-85070"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/supreme-court-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Supreme Court of India</span></span> ने आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि उसके 7 नवंबर 2025 के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसे अदालत अवमानना के रूप में देख सकती है। मंगलवार (19 मई 2026) को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों पर लगातार हो रहे डॉग बाइट के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर भी विचार करने की बात कही।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कोर्ट ने क्या कहा? Supreme Court News</h4>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को Animal Birth Control (ABC) Rules का सख्ती से पालन करना चाहिए था। अगर नियमों का सही पालन होता तो हालात इतने खराब नहीं होते। अदालत ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने Animal Welfare Board की SOP के खिलाफ दायर सभी आवेदनों को भी खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई राज्यों से सामने आए डॉग बाइट के आंकड़ों पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा से चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं। तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों से भी इसी तरह के मामले सामने आए हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi International Airport</span></span> में जनवरी 2026 से अब तक 31 डॉग बाइट की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। देशभर में रैबीज से मौत के कई मामले सामने आने पर भी अदालत ने चिंता जताई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ABC Framework का पालन करें</li>
<li>हर शहर में Animal Birth Control सेंटर बनाए जाएं</li>
<li>कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए</li>
<li>एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए</li>
<li><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">National Highways Authority of India</span></span> (NHAI) हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाए</li>
<li>गौशालाएं बनाई जाएं और मवेशियों को वहां भेजा जाए</li>
<li>गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार किया जाए</li>
<li>आदेशों का पालन कर रहे अधिकारियों के काम में अनावश्यक कानूनी बाधा न डाली जाए</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">अगली सुनवाई कब?</h4>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने फिलहाल मामले की नियमित सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन 17 नवंबर 2026 को सभी राज्यों की कंप्लायंस रिपोर्ट देखने की बात कही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/delhi/supreme-court-news-big-action-of-supreme-court-on-terror/article-85070</link>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:43:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSP: एमएसपी तय करने की मांग वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें सरकार को उचित तरीके से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है। महाराष्ट्र के किसान प्रकाश गोपालराव पोहरे, पुरुषोत्तम गावड़े और विशाल ओमप्रकाश रावत द्वारा संविधान के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-issued-a-notice-to-the-central-government-on-a-petition-seeking-fixation-of-msp/article-83417"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/new-delhi-1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें सरकार को उचित तरीके से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है। महाराष्ट्र के किसान प्रकाश गोपालराव पोहरे, पुरुषोत्तम गावड़े और विशाल ओमप्रकाश रावत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में मांग की गई है कि फसलों पर एमएसपी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक होना चाहिए। इसे तय करते समय संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तावित खेती की वास्तविक लागत (सी2) को प्रभावी महत्व देना चाहिए। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इन दलीलों पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह मुद्दा देश भर के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एमएसपी की कमी के कारण बड़ी संख्या में किसानों नेआत्महत्याएं की हैं। भूषण ने कहा कि एमएसपी अक्सर खेती की व्यापक लागत से भी कम दर पर तय किया जाता है और एमएसपी पर खरीद केवल गेहूं और चावल जैसी फसलों के लिए ही महत्वपूर्ण है, जिससे अन्य फसलें उगाने वाले किसान अत्यधिक संकट में हैं। याचिकाकतार्ओं ने कहा कि वर्तमान एमएसपी पद्धति मुख्य रूप से ए2 एफएल (लागत और पारिवारिक श्रम) पर आधारित है, जबकि इसमें भूमि की लागत और कार्यशील पूंजी पर ब्याज को छोड़ दिया जाता है। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जिला स्तरीय किकबॉक्सिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन" href="https://www.sachkahoon.com/successful-organization-of-district-level-kickboxing-competition/">जिला स्तरीय किकबॉक्सिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-issued-a-notice-to-the-central-government-on-a-petition-seeking-fixation-of-msp/article-83417</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:54:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Aadhaar Card News: &amp;#8221;अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई ये बड़ी जनहित याचिका Aadhaar Card Plea: नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/no-need-to-generate-aadhaar-for-adults-anymore/article-83293"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/aadhar-plea.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3>आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई ये बड़ी जनहित याचिका</h3>
<p>Aadhaar Card Plea: नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका कहना है कि अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में पहले ही 144 करोड़ यानी 99 प्रतिशत लोगों के आधार बन चुके हैं।  याचिका में यह भी बताया गया कि अब जो बड़ों का आधार बन रहा है, उसका फायदा कुछ विदेशी लोग उठा रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर पैसे देकर फर्जी आधार बनवा रहे हैं। इसके चलते देश में फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है और यह सुरक्षा व जनसंख्या संतुलन के लिए भी खतरा है। Aadhaar Card News</p>
<p>अश्विनी उपाध्याय ने यह भी कहा कि छह साल से ऊपर के लोगों के आधार के लिए अब तहसीलदार या एसडीएम के आॅफिस में ही आवेदन किया जाए। इससे सभी फर्जी आधार बनाने वालों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पहले भारत में आधार केवल तहसील पर बनता था, लेकिन अब सीएससी पर आधार बनवाने से इस प्रक्रिया में ढील और घुसपैठियों का फायदा हुआ है। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय व्यक्ति से एक अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को लिखित रूप से कहना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है और वह जानता है कि फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।</p>
<p>अश्विनी उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को कॉन्करेंट सजा नहीं, बल्कि लगातार सजा दी जाए। भारत में वर्तमान में कनकरेन्ट सजा होती है, मतलब एक साथ सभी धाराओं की सजा शुरू हो जाती है और कुल सजा कम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर पांच धाराएं हों, तो एक पूरी होने के बाद दूसरी शुरू हो, ताकि सजा का प्रभाव और डर लोगों में हो। याचिका में मांग की गई है कि सीएससी या तहसील में जहां भी आधार बनता है, वहां स्पष्ट रूप से डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि फर्जी आधार बनाना और बनवाना गंभीर अपराध है और पकड़े जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है। यह नियम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों पर भी लागू किया जाए। Aadhaar Card News</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:47:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध को अनुसूचित जाति का दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और उससे मिलने वाले कानूनी लाभों का हकदार नहीं रहेगा। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-courts-decision-to-grant-scheduled-caste-status-only-to-hindus-sikhs-and-buddhists/article-82673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/supreme-court.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और उससे मिलने वाले कानूनी लाभों का हकदार नहीं रहेगा। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या था पूरा मामला?</h3>
<p style="text-align:justify;">आंध्र प्रदेश के पित्तलवानीपालेम के निवासी चिंथदा आनंद ने खुद को अनुसूचित जाति का सदस्य बताते हुए कुछ लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई। उनका आरोप था कि उनके साथ मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, आरोपी पक्ष ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ईसाई धर्म अपना चुका है और पिछले 10 वर्षों से पादरी के रूप में कार्य कर रहा है। इस आधार पर वह अब अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">30 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया।<br />
सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया शामिल थे, ने संविधान (अनुसूचित जाति आदेश, 1950) का हवाला दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा | Supreme Court</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आदेश के खंड 3 के अनुसार, केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग ही SC श्रेणी में आते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">यदि कोई व्यक्ति अन्य धर्म (जैसे ईसाई या मुस्लिम) अपनाता है, तो वह तुरंत SC दर्जा खो देता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे व्यक्ति को आरक्षण, कानूनी सुरक्षा या अन्य संवैधानिक लाभ नहीं मिल सकते।</li>
<li style="text-align:justify;">जाति प्रमाण पत्र पर भी सख्त टिप्पणी</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता ने यह दलील दी कि उसके पास तहसीलदार द्वारा जारी SC प्रमाण पत्र है, जिसमें उसे ‘माडिगा’ जाति का सदस्य बताया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा:</h3>
<p style="text-align:justify;">यह प्रमाण पत्र पहले ही रद्द हो जाना चाहिए था।<br />
केवल प्रमाण पत्र के आधार पर SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मांगी जा सकती, यदि व्यक्ति की धार्मिक स्थिति बदल चुकी हो।<br />
फैसले का व्यापक असर</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि:</h3>
<p style="text-align:justify;">SC दर्जा केवल जन्म पर आधारित नहीं, बल्कि धर्म से भी जुड़ा हुआ है।<br />
धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति को SC से जुड़े अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं।<br />
सरकारी दस्तावेजों की वैधता भी व्यक्ति की वास्तविक सामाजिक और धार्मिक स्थिति पर निर्भर करेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-courts-decision-to-grant-scheduled-caste-status-only-to-hindus-sikhs-and-buddhists/article-82673</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 16:35:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इस शख्स को दी इच्छामृत्यु की मंजूरी, देश में हुआ पहली बार!</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court of India ने बुधवार (11 मार्च 2026) को पैसिव यूथेनेसिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा का मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दे दी। हरीश के परिवार ने याचिका दाखिल कर उनकी हालत को देखते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने और निष्क्रिय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-supreme-court-granted-euthanasia-to-this-man-a-first-in-the-country/article-82173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Supreme Court of India</span></span> ने बुधवार (11 मार्च 2026) को पैसिव यूथेनेसिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा का मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दे दी। हरीश के परिवार ने याचिका दाखिल कर उनकी हालत को देखते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने और निष्क्रिय इच्छामृत्यु की मंजूरी देने की अपील की थी। करीब 13 वर्षों से हरीश राणा बिस्तर पर हैं। कॉलेज के दौरान हुई एक दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिससे उनके मस्तिष्क को गहरा नुकसान पहुंचा। तब से उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और वे पूरी तरह से मेडिकल सपोर्ट पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Justice J. B. Pardiwala</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Justice K. V. Viswanathan</span></span> की बेंच ने सुनाया। अदालत ने कहा कि जिस तरह से हरीश को जीवित रखा जा रहा है, उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम के समान माना जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई मरीज स्वयं निर्णय लेने की स्थिति में न हो, तो उसके सबसे करीबी लोगों को उसके सर्वोच्च हित को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का अधिकार होता है।</p>
<h4>13 वर्षों में हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ</h4>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि पिछले 13 वर्षों में हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में मरीज को कृत्रिम तरीकों से जीवित रखना तभी उचित माना जा सकता है, जब उससे उपचार का कोई वास्तविक लाभ मिल रहा हो या उसके ठीक होने की संभावना हो।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरीश राणा को दिल्ली स्थित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">All India Institute of Medical Sciences</span></span> में भर्ती कराया जाए और वहां डॉक्टरों की देखरेख में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही अदालत ने इस मामले में 30 दिन की पुनर्विचार अवधि को भी हटा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस पारदीवाला ने अपने आदेश में कहा कि साल 2018 में आए <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Common Cause vs Union of India</span></span> फैसले के कुछ पहलुओं को और बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उस निर्णय में जीवन और मृत्यु के बीच मानव गरिमा के महत्व का विश्लेषण किया गया था और अन्य देशों की व्यवस्थाओं से भी इसकी तुलना की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने भविष्य में ऐसे मामलों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी तय किए हैं। अदालत ने कहा कि मरीज का मेडिकल ट्रीटमेंट मानवीय तरीके से और डॉक्टरों की देखरेख में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया केवल अस्पताल में ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर घर पर भी की जा सकती है। यह फैसला पैसिव यूथेनेसिया से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने मरीज की गरिमा और उसके सर्वोच्च हित को सर्वोपरि माना है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-supreme-court-granted-euthanasia-to-this-man-a-first-in-the-country/article-82173</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NCERT Book Controversy: एनसीईआरटी की किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आया ये बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[”न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं” NCERT Book Controversy: नई दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित कथित आपत्तिजनक उल्लेखों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कठोर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि किसी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-has-given-a-major-decision-regarding-the-ncert-book/article-81723"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-23.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">”न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं”</h3>
<p style="text-align:justify;">NCERT Book Controversy: नई दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित कथित आपत्तिजनक उल्लेखों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कठोर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि किसी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने वाली सामग्री अत्यंत गंभीर विषय है।न्यायालय ने संबंधित पुस्तक को बाजार से वापस लेने तथा विषयवस्तु की विस्तृत समीक्षा कराने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन और स्वतंत्रता की व्यवस्था सुनिश्चित की है। ऐसे में किसी भी संस्था के प्रति अविश्वास उत्पन्न करने वाली सामग्री को हल्के में नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की बातें विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में बैठ जाती हैं, तो न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास प्रभावित हो सकता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न भी उठा कि क्या पुस्तक की प्रतियां अभी बाजार या ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि प्रतियां उपलब्ध हैं तो उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विवादित अध्याय की समीक्षा की जा रही है</h3>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने बताया कि विवादित अध्याय की समीक्षा की जा रही है तथा संशोधित संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। साथ ही अध्याय तैयार करने से जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी भी दी गई। हालांकि, पीठ ने संकेत दिया कि केवल सीमित कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाएगी और संपूर्ण प्रक्रिया की जांच आवश्यक है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सामग्री के प्रकाशन की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी चिंता व्यक्त की कि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार संबंधी सामग्री पढ़ाया जाना संवेदनशील विषय है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकरण की गहन जांच कर संस्थागत उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाएगा। अदालत ने दोहराया कि न्यायपालिका की गरिमा और साख से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। Supreme Court</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 12:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court: “ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में शिव मंदिर दावे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला”</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। Dargah Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह याचिका दरगाह को मानने वाले दरवेश समुदाय के लोगों ने दायर की थी। कोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-dismisses-plea-seeking-stay-on-hearing-on-claim-of-shiva-temple-at-ajmer-dargah/article-81436"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Dargah Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका दरगाह को मानने वाले दरवेश समुदाय के लोगों ने दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अजमेर की निचली अदालत में चल रहे मुख्य मामले के पक्षकार नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी याचिका में उन मूल पक्षकारों को भी शामिल नहीं किया था, जिन्होंने यह दावा किया है कि दरगाह किसी प्राचीन शिव मंदिर के अवशेषों पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आधार पर याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में दावा किया गया था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप (एक्ट) 1991 की वैधता से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को अंतरिम आदेश दिया था। इस आदेश में कहा गया था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी नए मुकदमे को देश भर की कोई निचली अदालत स्वीकार न करे और ऐसे मामलों में कोई प्रभावी आदेश न पास करे। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस आदेश की अवहेलना करते हुए अजमेर की अदालत ने इस विवाद पर सुनवाई शुरू की है और नोटिस जारी किए हैं, इसलिए अजमेर कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता निचली अदालत के मूल केस में शामिल नहीं हैं, इसलिए वे सीधे सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की मांग नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि अजमेर शरीफ दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। अजमेर की निचली अदालत में यह मामला अभी भी लंबित है और आगे की सुनवाई जारी रहेगी। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मुजफ्फरपुर में विजिलेंस टीम की कार्रवाई, रिश्वत लेते पकड़ा गया दारोगा" href="http://10.0.0.122:1245/vigilance-team-takes-action-in-muzaffarpur-police-inspector-caught-taking-bribe/">मुजफ्फरपुर में विजिलेंस टीम की कार्रवाई, रिश्वत लेते पकड़ा गया दारोगा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-dismisses-plea-seeking-stay-on-hearing-on-claim-of-shiva-temple-at-ajmer-dargah/article-81436</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court News: आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की आई बड़ी अपडेट!</title>
                                    <description><![CDATA[Stray Dogs Case: नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में 7 नवंबर 2025 को पारित आदेश में संशोधन की मांग की गई है। Supreme Court News न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/major-update-from-the-supreme-court-regarding-stray-dogs/article-80808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/supreme-court-of-india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Stray Dogs Case: नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में 7 नवंबर 2025 को पारित आदेश में संशोधन की मांग की गई है। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने मामले में नियुक्त न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनीं। उन्होंने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पेश अधिवक्ता को भी सुना। कोर्ट ने पूर्व आदेश में एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने तथा सड़कों की घेराबंदी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।</p>
<h3>सर्वोच्च न्यायालय का पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय ने पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश दिया कि पशु आश्रय गृह अथवा पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों के आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। पीठ ने स्पष्ट कहा कि आवेदन या तो स्वीकृत किए जाएं अथवा अस्वीकृत, लेकिन अनावश्यक विलंब न हो। न्यायालय ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे इस मामले में अपने लिखित उत्तर शीघ्र दाखिल करें। सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकारों की निष्क्रियता पर चिंता जताते हुए कहा कि नसबंदी क्षमता बढ़ाने के निर्देशों का अपेक्षित पालन नहीं हो रहा है। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 7 नवंबर 2025 के उस आदेश से संबंधित है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर नसबंदी एवं टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि पकड़े गए कुत्तों को उनके मूल स्थान पर पुनः नहीं छोड़ा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, अदालत ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था। इससे पूर्व 13 जनवरी को अदालत ने संकेत दिया था कि कुत्ते के काटने की घटनाओं में राज्यों को पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देने और लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने पर विचार करना होगा। यह कार्यवाही उस स्वतः संज्ञान याचिका से जुड़ी है, जिसकी शुरुआत पिछले वर्ष 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज संक्रमण, विशेषकर बच्चों में, बढ़ने की चिंता जताई गई थी। Supreme Court News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 16:14:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Unnao Rape Case Update: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीड़िता ने जताई खुशी, कहा -कुलदीप सेंगर को फांसी दिलवाऊंगी</title>
                                    <description><![CDATA[Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/supreme-order.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर पीड़ित परिवार ने संतोष और खुशी व्यक्त की है। Unnao Rape Case Update</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से उन्हें न्याय की अनुभूति हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे भी न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी। पीड़िता का कहना है कि वह इस संघर्ष को अंतिम परिणाम तक जारी रखेंगी और जब तक दोषी को कठोरतम सजा नहीं मिलती, तब तक उनके परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन समय में उनका साथ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता की मां ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनके पति की हत्या की, उन्हें सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, न्याय तभी पूरा होगा जब दोषियों को उनके अपराध का उचित दंड मिलेगा।</p>
<h3>किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता हेमंत कुमार मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित परिवार को अब भी धमकियां मिल रही हैं, इसके बावजूद उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने को तैयार है। अब अदालत ने औपचारिक रूप से जमानत पर रोक का आदेश पारित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने पीड़िता को स्वयं भी हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अवसर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर तत्काल रोक लगा दी और आगे की सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:07:51 +0530</pubDate>
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