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                <title>Danger - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ग्रीन हाउस गैसों से विश्व को खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[वायुमंडल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई  कार्बन डाइआॅक्साइड, मीथेन और नाइट्रस  गैसों की मात्रा विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी ताजा रिपोर्ट से पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है ( green house gases danger the world) । संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्तर्गत जलवायु से संबंधित 191 देशों की सदस्यों वाली आधिकारिक संस्था विश्व मौसम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/green-house-gases-danger-the-world/article-6777"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/green-house.jpg" alt=""></a><br /><h2>वायुमंडल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई  कार्बन डाइआॅक्साइड, मीथेन और नाइट्रस  गैसों की मात्रा</h2>
<p style="text-align:justify;">विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी ताजा रिपोर्ट से पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है<strong> ( green house gases danger the world)</strong> । संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्तर्गत जलवायु से संबंधित 191 देशों की सदस्यों वाली आधिकारिक संस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने ग्रीन हाउस गैसों को लेकर ‘ग्रीन हाउस गैस बुलेटिन’ नाम से एक ताजा वार्षिक रिपोर्ट जारी की है जो वर्ष 2018 की प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय धरती के वायुमंडल में कार्बन डाइआॅक्साइड, मीथेन और नाइट्रस आॅक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।</p>
<h2>वायुमंडल में कार्बन डाइआॅक्साइड की मात्रा 2015 और 2016 की तुलना में 2017 में अधिक हुई है।</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">रिपोर्ट पर नजर डालने पर आंकड़े सामने आते है कि वायुमंडल में कार्बन डाइआॅक्साइड की मात्रा 2015 और 2016 की तुलना में 2017 में अधिक हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">जहां 2015 में कार्बन डाईआॅक्साइड का वायुमंडल में स्तर 400.1 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) था</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं साल 2016 में यह 403.3 पीपीएम था जबकि वर्ष 2017 में यह स्तर बढ़कर 405.5 पीपीएम के वैश्विक स्तर तक पहुंच गया है</li>
<li style="text-align:justify;">जो ओद्यौगिक क्रांति से पूर्व की वनस्पति ढाई गुणा अधिक है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी तरह मीथेन गैस की वर्ष 2017 में वायुमंडल में मात्रा 1859 पिपीबी (पार्ट्स पर बिलियन)के नए उच्च स्तर तक पहुंच गयी है।</li>
<li style="text-align:justify;">जोकि ओद्यौगिक क्रांति से पूर्व की तुलना में 257 फीसदी अधिक है व</li>
<li style="text-align:justify;">हीं वर्ष 2017 में नाइट्रस आॅक्साइड की वायुमंडल में मात्रा 329.9 पीपीबी (पार्ट्स पर बिलियन) दर्ज की गई</li>
<li style="text-align:justify;">जो पूर्ण ओद्यौगिक स्तर से 122 फीसदी ज्यादा है।</li>
</ul>
<h2>संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 टन से अधिक  प्रति वर्ष ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन किया जाता है</h2>
<p style="text-align:justify;">जहां तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जक देशों का सवाल है तो संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे ज्यादा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है जिसने ही क्योटो प्रोटोकॉल मानने से इन्कार कर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 टन से अधिक प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन किया जाता है इसके बाद रूस, जापान, यूरोपियन देशों और चीन का नंबर आता है। भारत में वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन मात्र 1.2 टन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है। फिर भी हमें भविष्य में पृथ्वी के वजूद के लिए सावधान रहने की जरुरत है। इस रिपोर्ट में यह चिंता जाहिर की गई है कि कार्बन डाइआॅक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों में कटौती किए बिना जलवायु परिवर्तन का खतरा बहुत तेजी के साथ बढ़ता जाएगा और धरती पर इसका अपरिवर्तनीय असर पड़ेगा जिससे पृथ्वी के जीवजगत पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।</p>
<h2>अन्यथा मानव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।</h2>
<p style="text-align:justify;">यह संगठन पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके सम्बन्ध, मौसम और इसके परिणास्वरूप जल संसाधनों के वितरण के बारे में जानकारी देने के लिए स्थापित किया गया लेकिन आज इसकी बातों के प्रति सदस्य देशों में प्रतिबद्धता की कमी है। अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए जरूरी है कि पूरे विश्व द्वारा नवीकरणीय और न्यून प्रदूषण वाली ऊर्जा स्रोतों का अधिक प्रयोग किया जाना चाहीए। टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर आदि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जक उपभोक्ता वस्तुओं का कम से कम उपयोग किया जाना चाहिए। र्इंधन वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण लगाकर इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भरता को बढ़ाना होगा। वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ ही ऊर्जा का विवेकपूर्ण एवं सतत प्रयोग किया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।अन्यथा मानव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>नरपत दान चारण</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Dec 2018 09:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>भारी बारिश, खतरे के निशान पर पहुंचा यमुना का जलस्तर</title>
                                    <description><![CDATA[कई जगहों पर भारी जलभराव नई दिल्ली (सच कहूँ)। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार रात से हो रही बारिश के चलते कई जगहों पर भारी जलभराव हो गया है। जिसकी वजह से आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का यह सिलसिला गुरूवार की रात से लेकर शुक्रवार की सुबह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/heavy-rain-water-level-of-yamuna-reached-danger-mark/article-5027"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/yamuna.jpg" alt=""></a><br /><h2>कई जगहों पर भारी जलभराव</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)।</strong> राजधानी दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार रात से हो रही बारिश के चलते कई जगहों पर भारी जलभराव हो गया है। जिसकी वजह से आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का यह सिलसिला गुरूवार की रात से लेकर शुक्रवार की सुबह तक जारी रहा। पानी की पर्याप्त निकासी नहीं होने के चलते कई जगहों पर काफी मात्रा में पानी जमा है।</p>
<h2>चेतावनी स्तर तक पहुंच सकता है यमुना का जलस्तर</h2>
<p>उधर पहाड़ों में हो रही भारी बारिश के चलते हथनीकुंड बैराज से गुरूवार की सुबह 1,15,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के चलते यमुना में दिल्ली के पानी का स्तर 203.83 मीटर हो गया है। यह खतरे के निशान 204 मीटर से मात्र 17 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।  अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के बाढ़ एवं सिंचाई विभाग को अंदेशा है कि छोड़ा गया पानी शुक्रवार तक तक राष्ट्रीय राजधानी पहुंच जाएगा जिसे लेकर एक अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारी ने बताया कि यमुना में आज जलस्तर 203.65 था जो इस मौसम में सामान्य माना जाता है। अधिकारी ने बताया, “ शुक्रवार को जलस्तर के 204 पर पहुंचने का अंदेशा है जो चेतावनी का स्तर है।”</p>
<h2>कई राज्यों में बारिश का अलर्ट</h2>
<p>देश के कई राज्यों में या तो बारिश हो रही है या बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने अपनी भविष्यवाणी में यह बताया कि अगले 24 घंटों में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होगी। ये बारिश दो-तीन दिन तक होती रहेगी। जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में बारिश थमती नजर आई है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 04:03:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कूल में अध्यापकों की कमी, खतरे में बच्चों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[गांववासियों ने सरकार से की स्कूलों में अध्यापक पूरे करने की मांग मानसा(सुखजीत मान)। बेशक जिला मानसा इस बार के बोर्ड के परिणामों में अच्छी कार्यशैली के कारण पहले स्थान पर आने में कामयाब हुआ है परन्तु बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल अध्यापकों की कमी के साथ जूझ रहे हैं किसान संघर्षों में अग्रणी रहने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/lack-of-teachers-in-school-future-of-children-in-danger/article-4931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/school-teachers-news.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">गांववासियों ने सरकार से की स्कूलों में अध्यापक पूरे करने की मांग</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसा(सुखजीत मान)।</strong> बेशक जिला मानसा इस बार के बोर्ड के परिणामों में अच्छी कार्यशैली के कारण पहले स्थान पर आने में कामयाब हुआ है परन्तु बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल अध्यापकों की कमी के साथ जूझ रहे हैं किसान संघर्षों में अग्रणी रहने वाले गांव भैनी बाघा के सरकारी सीनियर सेकैंडरी स्कूल में भी ऐसे ही हालात हैं। गांववासियों ने सरकार से अध्यापक पूरे करने की मांग की है और ऐसा न होने पर संघर्ष का बिगुल बजाने की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">गांववासियों ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में उच्च शिक्षा देने के दावे कर रही है व निजी स्कूलों के मुकाबले बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाने के लिए रैलियां की जाती हैं परन्तु दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के में जरूरी विषयों के अध्यापकों की बड़ी कमी देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि गांव भैनी बाघा के सरकारी सीनियार सेकैंडरी स्कूल में लम्बे समय से कुल 53 पोस्टों में से 38 पोस्टों ही भरी हैं व 15 रिक्त हैं। रिक्त पड़े अध्यापकों की पदों में से मुख्य तौर पर अंग्रेजी, इतिहास,रसायनिक विज्ञान ,हिसाब, जीव विज्ञान व ड्राइंग के लैक्चरर और वोकेशनल विषय व एसएस आदि शामिल हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">सरकारी स्कूलों के में जरूरी विषयों के अध्यापकों की बड़ी कमी</h2>
<p style="text-align:justify;">भैनी बाघा के इस स्कूल में पास के गांव ठूठ्यांवाली, भाई देसा, बुर्ज राठी और मानसा कैंची आदि से विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं। विद्यार्थियों के माता पिता ने कहा कि विद्यार्थी का पढ़ाई का लंबे समय से नुक्सान हो रहा है। कई बच्चों के माता-पिता ने अपने बच्चों के भविष्य को देखते भारी फीसें भर कर ट्यूशन रखवाए हुए हैं जिससे वह अपना सिलेबस पूरा कर सकें। गांववासियों ने बताया कि स्कूल पसवक समिति ने कई बार सबंधित विभाग को रिक्त पद पूरे करने के लिए लिखित तौर पर मांग की है परन्तु किसी दे भी कान पर जूं नहीं सरकी।</p>
<h2 style="text-align:center;">परीक्षा परिणाम अच्छा, अंग्रेजी से कमजोर हैं बच्चे : प्रिंसीपल</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रिंसीपल गुरसेवक सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग की तरफ से इस बार घोषित किए गए दसवीं व बारहवीं के परिणामों में से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी में कमजोर रहे हैं परन्तु फिर भी अध्यापकों की सख़्त मेहनत से परिणाम अच्छा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:center;">पता कर डैपूटेशन पर लगा देंगे अध्यापक: अधिकारी</h2>
<p style="text-align:justify;">जिला शिक्षा अधिकारी (सै.) सुरेश चंद्र का कहना है कि कैमिस्ट्री का अध्यापक नियुक्त कर दिया है उन्होंने कहा कि वहां अध्यापकों की कोई कमी नहीं परन्तु फिर भी यदि ऐसी बात है तो पता कर डैपूटेशन पर अध्यापक वहां नियुक्त कर दिए जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:center;">स्कूल कम हो रहे व शराब के ठेके बढ़ रहे : किसान नेता</h2>
<p style="text-align:justify;">पंजाब किसान यूनियन के राज्य सीनियर उप अध्यक्ष गोरा सिंह भैनी बाघा ने बताया कि पंजाब में आज स्कूलों की संख्या कम हो रही है और शराब के ठेके बढ़ रहे हैं। स्कूलों में अध्यापकों की कमी कारण देश का भविष्य अंधेरे की तरफ जा रहा है। उन्होंने अपने गांव के स्कूल में रिक्त पड़े पदों को तुरंत भरने की मांग की किसान नेता ने पद जल्द पुरे न होने पर संघर्ष शुरू करने की चेतावनी भी दी है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jul 2018 04:21:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का सबसे ऊंचा मंदिर बना तो पर्यावरण खतरा, एनजीटी का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर निर्माण को रोकने की मांग । Environmental Danger नई दिल्‍ली (एजेंसी)। एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indias-highest-temple-built-environmental-danger-ngt-notice/article-4812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/environmental-danger.jpg" alt=""></a><br /><h2>मंदिर निर्माण को रोकने की मांग <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p><strong>नई दिल्‍ली (एजेंसी)।</strong> एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस्‍कॉन द्वारा बनाए जाने वाले वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के निर्माण से यमुना के आसपास का पर्यावरण प्रभावित <strong>(  Environmental Danger )</strong> होगा और क्षेत्र का भूजल स्‍तर पर भी असर पड़ेगा।</p>
<p>एनजीटी के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने इंटरनेशनल सोसाइटी फार कंससनेस (इस्‍कॉन) और सीजीडब्‍लूए से 31 जुलाई से पहले जवाब मांगा है।</p>
<h2>इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा  मथुरा में किया जाएगा निर्माण <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p>पर्यावरण कार्यकर्ता मणिकेश चतुर्वेदी ने दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के निर्माण को रोकने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्‍तावित मंदिर की बाउंड्री के चारों ओर कृत्रिम तालाब होगा। इसके लिए जमीन से बड़े पैमाने का पानी का दोहन किया जाएगा। इससे यमुना नदी की अस्तित्‍व की सीमा तक पानी में कमी आ सकती है।</p>
<h2>सबसे बड़े मंदिर की क्‍या है खासियत<strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<ul>
<li>मंदिर के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।</li>
<li> इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा दुनिया के सबसे महंगे मंदिर का निर्माण मथुरा में किया जाएगा।</li>
<li> मंदिर की ऊंचाई 7 सौ फीट होगी और इसका निर्माण 5,40,000 वर्ग फीट में किया जाएगा।</li>
<li> शानदार मंदिर के लिए सशक्‍त जंगल का पुनर्निर्माण किया जाएगा।</li>
<li>यह मंदिर 26 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा।  इसमें ब्रज के 12 जंगलाेें का निर्माण होगा, जिसमें सुंदर वनस्‍पतियां, झीलें और झरने शामिल होंगे।</li>
<li>मंदिर का कुल क्षेत्रफल 62 एकड़ होगा, जिसमें 12 एकड़ पार्किंग और हेलीपैड के लिए होगा।</li>
</ul>
<h2> मंदिर की नींव होगी बुर्ज खलीफा से भी गहरी <strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<p>चंद्रोदय मंदिर दो सौ मीटर से अधिक ऊंचा होगा। साढ़े पांच एकड़ के इलाक़े में बनने वाले इस मंदिर में 70 मंजिलें होंगी। अभी दुनिया की सबसे ऊंची धार्मिक इमारत मिस्र के पिरामिड हैं, जो कि 128.8 मीटर ऊंचा है। वहीं वेटिकन का सेंट पीटर बैसेलिका 128.6 मीटर ऊंचा है। रॉकेट के आकार का चंद्रोदय मंदिर भूकंप प्रतिरोधी होगा।इसके निर्माण में 45 लाख घन फीट कंक्रीट और करीब साढ़े 25 हज़ार टन लोहे का इस्तेमाल होगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 03:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरे में लाखों दलित विद्यार्थियों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र ने बंद की स्कॉलरशिप योजना चंडीगढ़(अशवनी चावला)। पंजाब के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में है, क्योंकि जिस स्कॉलशिप योजना के तहत एससी बीसी विद्यार्थी नि:शुल्क अब तक पढ़ाई करते आ रहे हैं। वह स्कॉलरशिप जना को केंद्र सरकार ने कई तरह की शर्तें जारी करते बंद करने की कगार तक पहुंचा दी है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/future-of-danger-pupils-in-danger/article-4312"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/scolar.jpg" alt=""></a><br /><h1>केंद्र ने बंद की स्कॉलरशिप योजना</h1>
<h2><strong>चंडीगढ़(अशवनी चावला)।</strong></h2>
<p><span style="text-align:justify;">पंजाब के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में है, क्योंकि जिस स्कॉलशिप योजना के तहत एससी बीसी विद्यार्थी नि:शुल्क अब तक पढ़ाई करते आ रहे हैं। वह स्कॉलरशिप जना को केंद्र सरकार ने कई तरह की शर्तें जारी करते बंद करने की कगार तक पहुंचा दी है। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई नयी शर्तों अनुसार अब पंजाब सरकार को स्कॉलरशिप योजना अपने हिस्से 60 करोड़ रुपये की जगह पर 750 करोड़ रुपये तक देने पड़ेंगे, जिस कारण पंजाब सरकार ने केंद्र की सहायता से बिना इस योजना को चलाने से साफ इन्कार कर दिया है। नकारी अनुसार केंद्र सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप योजना नीचे देश भर के दलित विद्यार्थियों को 12वीं पास करने के बाद हर तरह की टैक्निकल व नॉन टैक्निकल डिग्री के लिए स्कॉलरशिप दी जाती थी।</span></p>
<p style="text-align:justify;">इस स्कॉलरशिप में एससी बीसी विद्यार्थियों को दाखिला से लेकर मासिक फीस व परीक्षा के पैसे भी नहीं देने पड़ते थे व सारा खर्च केंद्र व पंजाब सरकार मिलकर अपने जेब में से भरते थे। इस योजना के तहत पंजाब सरकार 60 करोड़ रुपये हर वर्ष अपना हिस्सा देती थी, जबकि शेष रहती राशि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती थी।अब तक हर साल दलित विद्यार्थियों की पढ़ाई पर लगभग 750 करोड़ रुपये खर्च आ रहा है, जिसमें केंद्र सरकार 690 करोड़ रुपये अपना हिस्सा देती है। केंद्र सरकार द्वारा नये आदेश के द्वारा अब 750 करोड़ रुपये तक के खर्च तक कुछ भी देने से साफ इन्कार कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि दलित विद्यार्थियों की पढ़ाई पर 750 करोड़ से पर का खर्च आएगा तो उससे ऊपर का खर्च ही केंद्र सरकार देगी। पंजाब में 750 करोड़ रुपये पिछले वर्षांे में सबसे अधिक एक  ल में खर्च होने वाली रकम है, इसलिए पंजाब सरकार को लगता है कि शायद ही भविष्य में 750 करोड़ रुपये से ऊपर खर्च होगा व इतनी अधिक रकम पंजाब सरकार खर्च नहीं कर सकती है। इस लिए केंद्र सरकार द्वारा पैसा नहीं देने की सूरत में योजना बंद होने किनारे है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> 30 दिनों में नहीं हुआ कुछ तो नहीं मिलेगा दाखिला</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के सरकारी व प्राईवेट कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले 3 लाख के लगभग विद्यार्थियों के भविष्य के लिए 30 दिनों में कोई फैसला नहीं हुआ तो 1अगस्त से शुरू होने वाले नये सैशन में किसी भी दलित विद्यार्थी को बिना फीस मुफ़्त में दाखिला नहीं मिलेगा, इस लिए पंजाब सरकार के पास सिर्फ 30 दिन का ही समय है। इसी 30 दिनों में ही सरकार को कुछ न कुछ करना होगा।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 09:25:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खतरे में 9 आप विधायकों की जिदंगी, खतरनाक घोषित वाहनों पर कर रहे सफर </title>
                                    <description><![CDATA[10 इनोवा कारें कर चुकी हैं अपनी निर्धारित नार्म पूरी, स्पीकर राणा सरकार को लगा चुके हैं कई बार विधायक गुहार परन्तु नहीं हो रही सुनवाई ट्रांसपोर्ट विभाग ने 10 विधायकों के वाहनों को घोषित किया है कंडम व खतरनाक चंडीगढ़ (अशवनी चावला)। पंजाब की मुख्य विपक्ष आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों में से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/9-lives-in-the-life-of-the-legislators-in-dange/article-4175"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/dangers-innova.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">10 इनोवा कारें कर चुकी हैं अपनी निर्धारित नार्म पूरी, स्पीकर राणा</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:left;">सरकार को लगा चुके हैं कई बार विधायक गुहार परन्तु नहीं हो रही सुनवाई</li>
<li>ट्रांसपोर्ट विभाग ने 10 विधायकों के वाहनों को घोषित किया है कंडम व खतरनाक</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अशवनी चावला)।</strong> पंजाब की मुख्य विपक्ष आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों में से 9 की जिंदगी खतरे में है, क्योंकि इन 9विधायकों को सरकार द्वारा सफर करने के लिए जो कोई इनोवा गाड़ियां अलॉट की गई हैं, उन सभी इनोवा गाड़ियों को खुद सरकार कंडम व सफर के लिए खतरनाक घोषित कर चुकी है परंतु फिर भी इन विधायकों की जिंदगी खतरे में डालते हुए, इन विधायकों को सफर करने के लिए यह इनोवा अलॉट की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन 9विधायकों के अलावा एक भाजपा के सीनियर में सोम प्रकाश भी शामिल हैं, जिनको इसी तरह की खतरे वाली इनोवा गाड़ी सफर के लिए अलॉट की हुई है। जानकारी अनुसार पंजाब के ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा हर विधायक को इनोवा या फिर जिप्सी अलॉट की जाती है, जिससे विधायक व उनके स्टाफ को सड़कीय सफर करने मौके किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा 94 इनोवा व जिप्सी इस समय विधायकों को अलॉट की गई हैं व इन 94 में से 10 इनोवा ऐसी हैं, जो कि अपने निर्धारित नार्म पूरे करते हुए कंडम तक घोषित की चुकी हैं। इन 10 इनोवा पर गाड़ियों पर सफर करना किसी भी खतरे से खाली नहीं होगा परंतु इन 10 कंडम इनोवा को कबाड़ में बेचने की जगह पर 10 विधायकों को अलॉट कर दिया गया है, जिससे इन 10 विधायकों की जिदंगी को खतरा है, क्योंकि सरकारी रिकार्ड अनुसार इन 10 इनोवा गाड़ियों पर सफर करना किसी भी बड़े खतरे से खाली नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सड़क हादसे में बाल-बाल हुई मेरी बचत: रुपिन्दर कौर</h4>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी की विधायक रुपिन्दर कौर रूबी ने बताया कि उनको जो इनोवा अलॉट की हुई है, वह पूरी तरह कंडम है व उनका इसी खटारा इनोवा के कारण सड़क हादसा भी हो चुका है, <span style="text-align:justify;">जिसमें परमात्मा के कारण उनकी बचत हुई है। उन्होंने बताया कि वह कई बार स्पीकर राणा केपी सिंह को भी शिकायत कर चुके हैं परन्तु सुनवाई नहीं हो पा रही है। </span>इसमें सबसे अधिक हैरानीजनक बात तो यह है कि खतरनाक घोषित 10 इनोवा में से 9 इनोवा सिर्फ आम आदमी पार्टी के विधायकों को अलॉट की गई हैं, जबकि एक इनोवा भाजपा के विधायक सोम प्रकाश को अलॉट की हुई है, जिसके साथ 20 में से आम आदमी पार्टी के 9विधायकों की जिंदंगी हर समय खतरे में है, क्योंकि वह इन इनोवा द्वारा ही सफर करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/9-lives-in-the-life-of-the-legislators-in-dange/article-4175</link>
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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 08:21:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 राज्यों में तूफान का खतरा, हरियाणा समेत उत्तर भारत में चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (Varta)। देश के कई हिस्से में आंधी-तूफान के बीच कई तटीय राज्यों को चक्रवाती तूफान सागर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अदन की खाड़ी में यह चक्रवात उठा है। वहीं हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गुरुवार को भी धूल भरी आंधी आई और बारिश की संभावना है। हरियाणा में शुक्रवार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/5-states-danger-to-storm/article-3693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/storm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (Varta)। </strong>देश के कई हिस्से में आंधी-तूफान के बीच कई तटीय राज्यों को चक्रवाती तूफान सागर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अदन की खाड़ी में यह चक्रवात उठा है। वहीं हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गुरुवार को भी धूल भरी आंधी आई और बारिश की संभावना है। हरियाणा में शुक्रवार सुबह से ही बारिश का मौसम बना हुई है। मौसम विभाग ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और लक्षद्वीप में चक्रवाती तूफान ‘सागर’ की चेतावनी दी है। मछुआरों को समुद्र से लौटने की सलाह दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग के मुताबिक अदन की खाड़ी में समुद्री चक्रवात ‘सागर’ उठा है। अगले 12 घंटों में यह भारत की ओर बढ़ेगा। इससे शुक्रवार, शनिवार और रविवार को पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा है कि इस पश्चिमी चक्रवात के कारण अगले तीन दिनों के दौरान देश के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश होगी। हालांकि इससे गुजरात का तटीय हिस्सा ज्यादा प्रभावित नहीं होगा। चक्रवात को देखते हुए एेहतियातन राज्य के सभी बंदरगाहों पर नंबर दो सिग्नल की चेतावनी जारी की गई है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/5-states-danger-to-storm/article-3693</link>
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                <pubDate>Fri, 18 May 2018 03:07:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में स्पेस जंक का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[एक रूसी उपग्रह के मलवे और एक पुराने भारतीय रॉकेट के अवशेषों ने एक बार फिर अंतर्राष्टÑीय स्पेस स्टेशन की जान सांसत में डाल दी थी। अंतरिक्ष में छाया कचरा इससे पहले भी नासा और शेष विश्व के वैज्ञानिकों की नींदे उड़ाता रहा है। इस बात का अंदेशा बराबर जताया जाता रहा है कि अगर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/danger-of-junk-in-the-space/article-3395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/junk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक रूसी उपग्रह के मलवे और एक पुराने भारतीय रॉकेट के अवशेषों ने एक बार फिर अंतर्राष्टÑीय स्पेस स्टेशन की जान सांसत में डाल दी थी। अंतरिक्ष में छाया कचरा इससे पहले भी नासा और शेष विश्व के वैज्ञानिकों की नींदे उड़ाता रहा है। इस बात का अंदेशा बराबर जताया जाता रहा है कि अगर अंतरिक्ष के इस कचरे का निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में अंतरिक्ष मलवे का ढेर बन जाएगा। नासा ने मलवे के ऐसे 20 हजार से भी ज्यादा टुकड़ों की सूची बना रखी है, जिनका आकार एक सॉफ्ट बॉल से भी बड़ा है और यह तेजी से अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक मलवे के 5 लाख से अधिक टुकड़े या ‘स्पेस जंक’ पृथ्वी के कक्ष में 17500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। यह वह मलवा है जिसका छोटा-सा टुकड़ा भी किसी सैटेलाइट, अंतरिक्ष यान को क्षतिग्रस्त करने के लिए पर्याप्त है। यहां तक कि 100 अरब डॉलर की लागत से बने अंतर्राष्टÑीय स्पेस स्टेशन को भी इस मलवे से बच कर निकलना होता है। अंतरिक्ष वैज्ञानिक चेतावनी देते आए हैं कि अंतरिक्ष में मलवा खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और अगर इसे हटाया नहीं गया तो इससे भविष्य में अंतरिक्ष यान और उपयोगी उपग्रह नष्ट हो सकते हैं और अंतरिक्ष अभियान पर रोक लग सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अमरीकी जियोलॉजिकल सर्वे के विशेषज्ञों का दावा है कि अंतरिक्ष से हर वर्ष एक हजार टन जंक पृथ्वी पर गिरता है, जिसकी ठीक से पहचान नहीं हो पा रही है। अंतरिक्ष का यह कचरा प्राकृतिक भी हो सकता है और मानव निर्मित भी। बेकार अंतरिक्ष यान, नष्ट हो चुके उपग्रह, कलपुर्जे अंतरिक्ष मिशन से संबंधित छोड़ी गई मानव निर्मित वस्तुएं ही कचरे के रूप में अंतरिक्ष में मंडराती है। अंतरिक्ष में मलवा बढ़ने की छोटी-मोटी घटनाओं से परे कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिन्होंने अंतरिक्ष के कचरे का अंबार लगा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">2007 में चीन ने एक साथ बड़ी संख्या में अंतरिक्ष में कबाड़ जमा कर दिया था। चीन ने एंटी सेटेलाइट हथियारों के टेस्ट के दौरान एक मिसाइल के जरिए एक पुराने पड़ चुके मौसम के उपग्रह को डेढ़ लाख टुकड़ों में तोड़ दिया था जिनमें से हर टुकड़ा एक सेंटीमीटर के बराबर है। इसके बाद 2009 में 10 फरवरी को एक बेकार रूसी उपग्रह की सक्रिय अमरीकी इरीडियम कॉमर्शियल सेटेलाइट से हुई भिड़ंत ने दो हजार टुकड़ों का नया कचरा पैदा कर दिया जबकि इनसे पहले 1996 में भी एक फ्रांसीसी उपग्रह की अपने ही एक पुराने रॉकेट के अवशेषों से हुई टक्कर ने भी काफी मलवा जमा कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष के कचरे से न केवल अंतरिक्ष अभियान मुसीबत में है, बल्कि धरती पर यह कचरा आफत ला सकता है। अंतरिक्ष में मलवा बन चुके सेटेलाइट धरती पर आकर गिर सकते हैं। पिछले वर्ष 6 टन वजनी यूआरए सैटेलाइट पृथ्वी पर गिरा था जबकि इससे पहले 1989 में 100 टन वजनी सेटेलाइट ‘स्काइलैब’ हिंद महासागर में और 2001 में रूस का स्पेस स्टेशन ‘मीर’ दक्षिणी महासागर में आ गिरा था। हालांकि अंतरिक्ष अभियान के इतिहास में अब तक इस कचरे से कोई मानवीय क्षति होने के समाचार नहीं मिले हैं और अधिकांश कचरा धरती पर पहुंचने से पहले ही जल जाता है लेकिन जान-माल की हानि की आशंकाआेंं से इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल में स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के चारों ओर चक्कर काट रहे अंतरिक्ष कबाड़ के टुकड़ों को पकड़कर उन्हें पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से फेंकने के लिए ‘क्लीनस्पेस वन’ नामक उपग्रह के निर्माण की भी घोषणा की है। इसका निर्माण स्विस स्पेस सेंटर द्वारा किया जा रहा है जिस पर करीब 1.1 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। इसे 3 से 5 साल के अंदर लांच किया जाएगा। ईपीएफएल के अनुसार 10 सेंटीमीटर से बड़े आकार के 16 हजार और इससे छोटे लाखों अवशेष पृथ्वी के आसपास चक्कर लगा रहे हैं। इनकी गति कई सौ किलोमीटर प्रति सेकंड है। इस सफाई उपग्रह को सबसे पहले दो स्विस उपग्रहों को पकड़ने के लिए भेजा जाएगा जो 2009 और 2010 में छोड़े गए थे और अब निष्क्रिय हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक नरेंद्र देवांगन</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2017 04:55:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कैसे बचेंगे सिकुड़ते ग्लेशियर</title>
                                    <description><![CDATA[आप्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल नेचर का यह खुलासा चिंतित करने वाला है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते एशियाई ग्लेशियरों के सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है और अगर इसे बचाने की कोशिश नहीं हुई, तो सदी के अंत तक एशियाई ग्लेशियर अपने कुल भाग का एक तिहाई खत्म हो जाएंगे। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में यह भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/how-to-avoid-shrinking-glaciers/article-3355"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आप्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल नेचर का यह खुलासा चिंतित करने वाला है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते एशियाई ग्लेशियरों के सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है और अगर इसे बचाने की कोशिश नहीं हुई, तो सदी के अंत तक एशियाई ग्लेशियर अपने कुल भाग का एक तिहाई खत्म हो जाएंगे। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में यह भी पाया है कि अगर वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम रखने में सफलता मिलती है तो फिर पर्वतों से 36 प्रतिशत बर्फ भी कम हो जाएगी। और अगर तापमान वृद्धि इससे कहीं अधिक हुई, तो कई गुना बर्फ पिघल जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">याद होगा अभी गत वर्ष ही र्केब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि आने वाले एक-दो वर्षों में आर्कटिक समुद्र की बर्फ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसका आधार वैज्ञानिकों द्वारा अमेरिका के नेशनल स्रो एंड आइस डाटा सेंटर की ओर से ली गयी सैटेलाइट तस्वीरे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक आर्कटिक समुद्र के केवल 11.1 मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर क्षेत्र में ही बर्फ बची है जो कि पिछले तीस साल के औसत 12.7 मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर से कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका दावा है कि तेजी से बर्फ पिघलने से समुद्र भी गर्म होने लगा है। गौर करें तो यह स्वाभाविक भी है कि जब बर्फ की मोटी परत नहीं होगी तो पानी सूर्य की किरणों को ज्यादा मात्रा में सोखेगी ही। फिर ग्लोबल वार्मिंग के खतरनाक होने से कैसे रोका जा सकता है। गत जुलाई में जर्नल नेचर क्लाइमेट में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री से कम रखने की सिर्फ 5 प्रतिशत ही संभावना है। पृथ्वी का वातावरण पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में तकरीबन एक डिग्री गर्म हो चुका है। इससे सदी के अंत तक तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस वृद्धि हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञाानिकों का अनुमान है कि ग्लेशियर के पिघलने में तेजी आयी तो बाढ़ का खतरा उत्पन होगा और समुद्र के जल में भारी इजाफा होगा। इससे समुद्रतटीय शहरों के डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। 2016 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले सौ साल में समुद्र का पानी बढ़ने की रफ्तार पिछली 27 सदियों से ज्यादा है। वैज्ञानिकों की मानें तो अगर धरती का बढ़ता तापमान रोकने की कोशिश न हुई तो दुनिया भर में समुद्र का स्तर 50 से 130 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। गौरतलब है कि आर्कटिक क्षेत्र में आर्कटिक महासागर, कनाडा का कुछ हिस्सा, ग्रीनलैंड (डेनमार्क का एक क्षेत्र) रुस का कुछ हिस्सा, संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का) आइसलैंड, नार्वे, स्वीडन और फिनलैंड में भी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पृथ्वी के तापमान में मात्र 3.6 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होती है तो आर्कटिक के साथ-साथ अण्टाकर्टिका के विशाल हिमखण्ड भी पिघल जाएंगे और समुद्र के जल स्तर में 10 इंच से 5 फुट तक वृद्धि हो जाएगी। इसका परिणाम यह होगा कि समुद्रतटीय नगर समुद्र में डूब जाएंगे। ऐसा हुआ तो फिर न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, पेरिस और लंदन, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पणजी, विशाखापट्टनम कोचीन और त्रिवेंद्रम नगर समुद्र में होंगे। वर्ष 2007 की इंटरगवर्नमेंटल पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के करीब 30 पर्वतीय ग्लेशियरों की मोटाई अब आधे मीटर से भी कम रह गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का कहना है कि तेजी से बर्फ पिघलने के लिए मुख्यत: ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन ही जिम्मेदार है। एक आंकड़ें के मुताबिक अब तक वायुमण्डल में 36 लाख टन कार्बन डाइआक्साइड की वृद्धि हो चुकी है और वायुमण्डल से 24 लाख टन आक्सीजन समाप्त हो चुका है। अगर यही स्थिति रही तो 2050 तक पृथ्वी के तापक्रम में लगभग 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होगी जिससे दुनिया खतरे में पड़ जाएगी। उचित होगा की वैश्विक समुदाय तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों को बचाने के लिए ठोस पहल करे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अभिजीत मोहन</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Sep 2017 03:16:35 +0530</pubDate>
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                <title>शरद यादव की खिसकती सियासी जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के कंस्टीटयूशन क्लब में आयोजित जन अदालत में शरद यादव की पाखंड वाली आदर्शवाद राजनीति की पोल खुलते हुए सबने देख लिया। दरअसल किसी आदर्शवाद से प्रेरित होकर नि:स्वार्थ भाव की राजनीति करने का चलन अब राजनेताओं में नहीं बचा। वह किसी भी सूरत में सत्तासुख से वंचित नहीं रह सकते। निहित स्वार्थ सियासी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/political-land-of-sharad-yadav-in-danger/article-3270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sharad-yadav-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली के कंस्टीटयूशन क्लब में आयोजित जन अदालत में शरद यादव की पाखंड वाली आदर्शवाद राजनीति की पोल खुलते हुए सबने देख लिया। दरअसल किसी आदर्शवाद से प्रेरित होकर नि:स्वार्थ भाव की राजनीति करने का चलन अब राजनेताओं में नहीं बचा। वह किसी भी सूरत में सत्तासुख से वंचित नहीं रह सकते। निहित स्वार्थ सियासी गलियारों में इस तरह की आवाजें आना आजकल आम बात हो गई है। मौजूदा नीतीश-शरद में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई उसी का परिचायक मात्र है। सियासत की वैसाखी छिनने के बाद लंगड़े हो चुके शरद यादव अपनी सियासी जमीन को बचाने के लिए पिछले सप्ताह दिल्ली के कंस्टीटयूशन क्लब में करीब 14 विपक्षी दलों के नेताओं को एकत्र करके साझा मंच सजाया। जन अदालत का नाम दिए गए उस आयोजन में राहुल गांधी के अलावा कई बड़े नेता शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी नेताओं ने शरद यादव के पक्ष में कसीदे पढ़े और उन्हें जननेता बताया। आयोजन में जितने भी नेता शामिल हुए सभी ने मोदी को बारी-बारी से कोसा। उन्होंने कहा कि शरद और नीतीश में तलाक कराकर मोदी-शाह की जोड़ी ने ठीक नहीं किया। राहुल गांधी ने जिस तरह से अपने तल्ख तेवरों में न्यायपालिका और शासन से लेकर सेना तक आरएसएस से जुड़े लोगों को नियुक्त किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनके उन तल्ख तेवरों से एक बात साफ हो जाती है कि विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस अपनी मुख्य या नेतृत्वकारी भूमिका सुनिश्चित करने की कोशिश में है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाने के नीतीश कुमार के फैसले के बाद शरद यादव पूरी तरह से पैदल हो चुके हैं। वह किसी भी सूरत में अपनी सियासी जमीन बचाना चाहते हैं। इसलिए दिल्ली में वह अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। आयोजन में जितने भी नेता शामिल किए गए उनको बुलाने के लिए शरद यादव की टीम पिछले कई दिनों से पसीना बहा रही थी। नीतीश ने जबसे पासा पलटा है, तभी से जदयू पार्टी में दो फाड़ हो गए थे। पार्टी लगातार टूट की ओर बढ़ रही है। पार्टी दो खेमो में बंट गई एक नीतीश खेमा और शरद खेमा। दिल्ली में जन अदालत आयोजित कर शरद यादव नीतीश कुमार को सिर्फ यह दिखाना चाह रहे थे कि उनके साथ पूरा विपक्ष खड़ा है। पार्टी पर सबसे ज्यादा प्रभाव आज भी उनका ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनेताओं की स्वार्थ की राजनीति लगातार एक्सपोज होती जा रही है। नेताओं के आपसी झगड़ों को देखकर पूरा देश हर रोज राजनीतिक पतनशीलता के दर्शन करता है। देखा जाए तो राजनीति में अब नैतिकता की बात करना रेगिस्तान के बीच नखलिस्तान की तरह माना जाने लगा है। मौजूदा समय में राजनीतिक पतनशीलता जिस कदर गिरी है उससे अब किसी पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। शरद यादव खेमे के कार्यकर्ता दिल्ली में नीतीश पर जमकर हमलावर हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सांसद अली अनवर से मैंने पूरे मसले पर बात की तो अंसारी ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री का जो विरोध कर रहे हैं वो ही ‘असली जदयू’ कार्यकर्ता हैं। अंसारी ने कहा कि नीतीश कुमार का जनाधार न के बराबर है। शरद यादव ने पार्टी को सींचा है। मैंने उनसे पूछा बिहार छोड़कर आखिर दिल्ली में ही क्यों इतना रायता फैला रहे हो। क्योंकि शरद यादव का जनाधार तो बिहार में है। बिहार की जनता के बीच जाओ। तो अंसारी ने कहा कि नीतीश के आका तो दिल्ली में ही बैठे है न! उनका इशारा भी पीएम मोदी और अमित शाह की तरफ था। शरद यादव का राज्यसभा से नेता पद से हटाया जाना जदयू कार्यकतार्ओं को सदमे की तरह लगा है इस बात को लेकर उनमें भारी नाराजगी है। मलतब साफ है कि कोई भी नेता बिना पद और सुविधा के नहीं रह सकता। बिना पद के उनका रूतबा कम जो हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शरद-नीतीश की तरह पासा पलटने की एक और बड़ी सियासी खबर दिल्ली से बाहर निकलने को आतुर है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के भाजपा में शामिल होने के चर्चे गरमा रहे हैं। पिछले सप्ताह लगातार दो बार भूपिंदर हुड्डा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने कांग्रेस के भीतर खलबली मचा दी है। हुड््डा-मोदी को मिलाने की मध्यस्थता वित्तमंत्री अरूण जेटली और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने की है। दरअसल भूपिंदर सिंह हुड्डा पिछले कुछ समय से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से खासे नाराज हैं। उनकी नारजगी प्रदेश में कांग्रेस की कमान उनके खेमे को न देने को लेकर है। भाजपा किसी भी सूरत में हुड्डा को शामिल कराना चाहती है। उसकी भी वजह है। हरियाणा में जाट समुदाय के नेता का अभाव पार्टी में है। उनके जुड़ने से इस कमी की भरपाई हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भूपिंदर सिंह पूरे हरियाणा प्रदेश में करीब पंद्रह से ज्यादा विधानसभाओं पर सीधा प्रभाव रखते हैं। कांग्रेस की कुछ सालों से बुरी गति हुई है। बावजूद इसके उनके खेमे का एक भी विधायक नहीं टूटा। खैर, अरूण जेटली और नीतीश कुमार ने हुड्डा को भाजपा में लाने के लिए बड़ा सियासी दांव फिलहाल खेल दिया है। मेल-मुलाकात को लेकर मेरी उनके कुछ करीबी विधायकों से बातचीत हुई। मैंने उनसे पूछा अगर भूपिंदर हुड्डा भाजपा में शामिल होते हैं तो किस शर्त पर आएंगे। तो उन्होंने बताया कि उनके आने से सरकार में बड़ा फेरबदल होगा। प्रदेश में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए भाजपा शायद उनका प्रस्ताव स्वीकार भी कर सकती है। बात भी ठीक है बिना स्वार्थ के तो आजकल के नेता एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में आने से रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं को कभी-कभार ही तो ऐसा अवसर प्राप्त होता है जब खुद की बोली लगाने का मौका मिलता है। नेताओं में अब जनहित की राजनीति लुप्त हो गई है। वह सिर्फ खुद का भला चाहते हैं। जहां उनको सुख-सुविधा ज्यादा दिखाई देती है, वहीं भाग पड़ते हैं। जनभावनाओं का उन्हें जरा भी ख्याल नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-रमेश ठाकुर</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2017 03:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हाफिज सईद की नजरबंदी 2 महीने बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[पाक ने कहा- वो अब भी बड़ा खतरा लाहौर/नई दिल्ली। जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद का हाउस अरेस्ट पाक सरकार ने दो महीने के लिए बढ़ा दिया है। वह 31 जनवरी से घर में नजरबंद है। इसके पहले पंजाब प्रांत की सरकार ने तीन महीने के लिए उसका हाउस अरेस्ट बढ़ाया था। सईद मुंबई हमलों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/hafiz-saeed-detained-for-two-months/article-2778"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/hafiz.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पाक ने कहा- वो अब भी बड़ा खतरा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>लाहौर/नई दिल्ली।</strong> जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद का हाउस अरेस्ट पाक सरकार ने दो महीने के लिए बढ़ा दिया है। वह 31 जनवरी से घर में नजरबंद है। इसके पहले पंजाब प्रांत की सरकार ने तीन महीने के लिए उसका हाउस अरेस्ट बढ़ाया था। सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। सोमवार को जारी नोटिफिकेशन में सरकार ने कहा- ये पब्लिक आॅर्डर मेंटेन करने के लिए उठाया गया कदम है। वो मुल्क की शांति के लिए अब भी बड़ा खतरा है।अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के प्रेसिडेंट बनने के फौरन बाद पाकिस्तान ने हाफिज सईद को नजरबंद किया था। हाफिज आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का भी चीफ है।</p>
<p style="text-align:justify;"> उसे 31 जनवरी को पहली बार नजरबंद किया गया था। इसके बाद ये मियाद 90 दिन बढ़ाई गई। हाफिज ने इसके खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में अर्जी भी दायर की थी लेकिन पंजाब सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि वो लॉ एंड ऑर्डर के लिए खतरा साबित हो सकता है। इसके बाद अर्जी खारिज कर दी गई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश की शांति के लिए खतरा है सईद</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन के मुताबिक- सईद की आजादी देश की शांति के लिए खतरा साबित हो सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">पुलिस का भी मानना है कि अगर उसे रिहा किया गया तो वो लॉ एंड ऑर्डर के लिए बड़ी दिक्कतें खड़ी कर सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">पंजाब प्रांत के होम सेक्रेटरी आजम सुलेमान ने कहा- पब्लिक ऑर्डर मेंटेन करने के लिए उसका नजरबंदी में रहना ही ठीक है।</li>
</ul>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/hafiz-saeed-detained-for-two-months/article-2778</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2017 08:04:24 +0530</pubDate>
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                <title>हमें पाकिस्तान नहीं, चीन से खतरा: मुलायम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दावा किया कि यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और भारत पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस विषय पर उनकी बात […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/danger-from-china-mulayam/article-2443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mulayam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दावा किया कि यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और भारत पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस विषय पर उनकी बात नहीं सुन रही और उठाए जाने वाले कदमों पर राय नहीं ले रही। यादव ने लोकसभा में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा कि मैं बीस साल से सावधान करता आ रहा हूं और हर साल इस बारे में इस सदन में बोलता हूं कि चीन से भारत को बहुत खतरा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> नेपाल पर भी चीन की नजर</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन भारत के खिलाफ षड्यंत्र कर रहा है और हिंदुस्तान पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान से नहीं चीन से खतरा है। उसने पाकिस्तान को भी अपने साथ मिला लिया है। नेपाल पर भी चीन की नजर है। यादव ने सरकार को आगाह करते हुए यह दावा भी किया सूचना मिली है कि चीन ने पाकिस्तान की जमीन में एटम बम गाड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा नेता ने कहा कि तत्कालीन सरकारों की सबसे बड़ी भूल रही कि तिब्बत पर चीन का कब्जा होने दिया। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा पूरी तरह भारत के साथ रहे और आज भी भारत के साथ हैं, लेकिन हम उन्हें संरक्षण नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि हमें अब भी तिब्बत की आजादी का समर्थन करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2017 06:44:47 +0530</pubDate>
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