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                <title>सवारियों से भरी बस पुल से नीचे गिरी, चालक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[नैनीताल (सच कहूँ न्यूज)। उत्तराखंड के रामनगर में एक बड़ा सड़क हादसा होने से टल गया। सवारियों से भरी उत्तराखंड परिवहन (रोडवेज) (Uttarakhand Roadways) की बस वाहन को बचाने के चक्कर में पुल से नीचे गिरकर पलट गयी। इस हादसे में चालक की मौत हो गयी जबकि छह यात्री घायल हो गये। मिली जानकारी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bus-full-of-passengers-fell-down-from-the-bridge-driver-died/article-47248"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/nainital.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नैनीताल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तराखंड के रामनगर में एक बड़ा सड़क हादसा होने से टल गया। सवारियों से भरी उत्तराखंड परिवहन (रोडवेज) (Uttarakhand Roadways) की बस वाहन को बचाने के चक्कर में पुल से नीचे गिरकर पलट गयी। इस हादसे में चालक की मौत हो गयी जबकि छह यात्री घायल हो गये। मिली जानकारी के अनुसार बस संख्या यूके 07 पीए 2487 हल्द्वानी से रामनगर आ रही थी। जैसे ही बस रामनगर बाईपास पर बने नये पुल पर पहुंची, दूसरी तरफ से तेज गति से आ रहे टाटा 407 (छोटे हाथी) को बचाने के चक्कर में पुल से नीचे गिर गयी और पलट गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे हुआ हादसा | Uttarakhand Roadways</h3>
<p style="text-align:justify;">बस में 16 यात्री सवार थे। गनीमत रही कि इस हादसे में अधिक यात्रियों की जान नहीं गयी। चालक गुलबदन सिंह निवासी गांव कल्लूवाला, रेहड़, बिजनौर उप्र की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि पांच यात्री हो गये। इनमें दो महिला गंभीर घायल हैं। मौके पर चीख पुकार मच गयी। घटना की सूचना मिलते ही रामनगर पुलिस व आसपास के लोग मौके पर जुट गये। तत्काल राहत व बचाव कार्य चलाया गया। बस के शीशे तोड़ कर घायलों को बाहर निकाला गया और रामनगर अस्पताल पहुंचाया गया। बस को क्रेन की सहायता से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। दुर्घटनाग्रस्त टाटा 407 भी टकराने के बाद कुछ दूरी पर जाकर पलट गया। उसका चालक फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस जांच में जुट गयी है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 12:37:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हादसे रोकने के हों गंभीर प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बने 140 वर्ष पुराने केबल ब्रिज के टूट जाने से 140 से ज्यादा लोग काल के ग्रास हो गए। गुजरात के मोरबी शहर में यह पुल ऐतिहासिक और तकनीकी श्रेष्ठता का नमूना माना जाता रहा है। देश की आजादी से बहुत पहले 1887 के आसपास मोरबी के तत्कालीन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/morbi-bridge-collapse/article-39516"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/morbi-bridge-collapse.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बने 140 वर्ष पुराने केबल ब्रिज के टूट जाने से 140 से ज्यादा लोग काल के ग्रास हो गए। गुजरात के मोरबी शहर में यह पुल ऐतिहासिक और तकनीकी श्रेष्ठता का नमूना माना जाता रहा है। देश की आजादी से बहुत पहले 1887 के आसपास मोरबी के तत्कालीन राजा वाघजी रावाजी ठाकोर ने जब इस पुल की कल्पना करते हुए बनवाया था, तब यूरोप की आधुनिकतम तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया था। अचानक यह ‘झूलता पुल’ अनेक लोगों के लिए ‘काल’ साबित हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने मोरबी पुल हादसे के बारे में अपनी एफआईआर में कहा है कि मच्छु नदी पर बना मोरबी केबल पुल मरम्मत कार्य व रखरखाव में कमी, कुप्रबंधन या किन्हीं अन्य तकनीकी कारणों से ढह गया। इस मामले को लेकर राजनीति भी हो रही है। इस घटना से पूर्व भी कई ऐसे हादसे हुए हैं जिनमें प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के चलते लोग काल के ग्रास में समा गए। लेकिन हम हादसे से सबक नहीं लेते। फौरी कार्रवाई के बाद व्यवस्था पुरानी पटरी पर दौड़ने लगती है। ऐसे में अहम सवाल यह है कि ऐसे हादसों होते क्यों हैं? हादसे होने के बाद उनकी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए उचित उपाय क्यों नहीं किये जाते? वास्तव में कसूरवारों को सख्त सजा न हो पाना गलत कार्य करने वालों के हौसलों को आॅक्सीजन देता है, और फिर हमारे सामने कोई नया हादसा हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोरबी नगरपालिका के साथ ओरेवा के समझौते के मुताबिक मरम्मत पूरी होने के बाद पुल को खोला जाना था। जिस जगह दुर्घटना घटी वह पिकनिक स्थल है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना का कारण पुल पर क्षमता से ज्यादा लोगों का होना बताया जा रहा है। इसको बीते 6 महीने तक मरम्मत के लिए बंद रखने के बाद चार दिन पहले ही खोला गया था। दो करोड़ रुपये खर्च कर सुधारे गये पुल पर अधिकतम 100 लोगों के जाने की स्वीकृति है लेकिन घटना के समय 500 लोग पुल पर थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमानुसार, जब कोई सरकारी संपत्ति किसी निजी कंपनी को संचालन के लिए दी जाती है, तब उस पर मालिकाना हक सरकारी संस्था के पास ही रहता है। जैसे, हाईवे पर टोल वसूली निजी कंपनियां करती हैं, लेकिन रसीद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नाम से ही जारी की जाती है। लेकिन 765 फीट लम्बे इस पुल को सुधार के बाद खोलने के पूर्व न तो तकनीकी अनापत्ति या फिटनेस प्रमाणपत्र लिया गया और न ही उसकी भार क्षमता का प्रमाणीकरण हुआ। मोरबी के सस्पेंशन ब्रिज के मामले में ऐसा नहीं था। पुल और टिकट दोनों पर मोरबी नगर पालिका का जिक्र तक नहीं था। यदि मरम्मत करने वाली कंपनी ने ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ नहीं लिया था और पुल पर भार वहन करने वाले उपकरणों, मशीनरी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच नहीं की थी, तब यह निश्चित तौर पर सवालिया बिंदु है और ‘वास्वविक हत्यारिन’ कंपनी ही है। लापरवाही के दोषी सरकारी, गैर-सरकारी चेहरों और अनुबंध वाली कंपनी को तुरंत बर्खास्त कर, काली सूची में, डाल देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">झूलता पुल से जुड़ा यह हादसा पहला नहीं है। अगस्त 11, 1979 को इसी नदी पर बना मच्छु बांध ढह गया था। तब 2000 से ज्यादा मौतें हुई थीं। यह भी पुल से ही जुड़ा रास्ता था। यही नहीं, सितंबर, 2002 में बिहार में एक रेलवे पुल टूट गया था, जिसमें 130 मौतें हुईं। 29 अक्तूबर, 2005 को आंध्रप्रदेश में वेलिगोंडा रेलवे पुल टूटा था। उसमें भी 114 जिंदगियां समाप्त हो गई थीं। केरल में 21 जुलाई, 2001 को रिवर रेलवे ब्रिज टूटने से 57 लोग मर गए थे। बिहार, असम और बंगाल में नावों में ज्यादा सवारियां भर लेने के कारण डूबने की घटनाएं होती हैं। वहीं यात्री बसों में निर्धारित संख्या से अधिक लोगों के बिठाने के बाद दुर्घटनाग्रस्त होने पर बाहर नहीं निकल पाने की वजह से बहुत सी मौतें होती रहती हैं। इनमें से अधिकतर का कारण लापरवाही और अव्यवस्था ही होती है। यदि नियमों और अपेक्षित सावधानियों का पालन किया जाए तो इनसे काफी हद तक बचा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक हादसे के बाद सरकारी तंत्र धिसेपिटे कामों में जुट जाता है। मृतकों और घायलों को मुआवजा और सहायता राशि देने की घोषणा के साथ जांच समिति भी गठित कर दी गई है जिसकी रिपोर्ट आने तक लोग इस दुर्घटना को भूल चुके होंगे। मृतकों के परिजन मुआवजे के साथ यदि आश्रित को सरकारी नौकरी मिल गयी तो ठंडे होकर बैठ जायेंगे और जो घायल हैं वे मुफ्त इलाज के साथ मिलने वाली सहायता राशि के लालच में अपना दर्द उपेक्षित कर देंगे। स्थानीय प्रशासन जांच के दौरान तरह-तरह के दबाव झेलेगा। जिस ठेकेदार की लापरवाही के कारण हादसा हुआ उसे भी निश्चित तौर पर शासन और प्रशासन में बैठे बड़े लोगों का संरक्षण प्राप्त रहा होगा जिससे वह साफ बचकर निकल जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विचार योग्य बिंदु यह है कि ऐसे हादसे थोड़े-थोड़े अंतराल पर होते रहते हैं। कभी किसी मंदिर में धक्का मुक्की के कारण लोग मारे जाते हैं तो कभी अग्निशमन के इंतजाम न होने से बेशकीमती जानें चली जाती हैं। ऐसे दुखद मामलों पर भी राजनीति भी होने लगती है। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगा दिया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसने पुल को बिना पर्याप्त मरम्मत के ही खुलवा दिया। राहत कार्यों में भी श्रेय लेने की होड़ मचेगी। भ्रष्टाचार भी ऐसे मामलों में जरूरी तत्व होता ही है। यही वजह है कि दुर्घटना के कारणों पर पर्दा डालकर असली कसूरवारों को बचा लिया जाता है। जिस पुल पर दुर्घटना हुई उसका प्रबंधन भले ही किसी निजी कम्पनी के जिम्मे हो लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस का भी दायित्व था कि वह भीड़ का अनुमान लगाकर समुचित निगरानी रखते।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है ये गैर इरादतन हत्या का मामला है लेकिन ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोके जाने का तंत्र विकसित न होना भी आपराधिक उदासीनता है। जो हुआ वह बेहद दर्दनाक और दुखद ही कहा जाएगा। जिन परिवारों के लोगों की मौत हुई उनके दु:ख को मुआवजे या अन्य भौतिक लाभों से कम करना असंभव है। अनेक घायल लोग स्थायी रूप से दिव्यांग बनकर रह जाएं तो आश्चर्य न होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मोरबी का हादसा रोका जा सकता था यदि पुल पर क्षमता से ज्यादा बोझ न होता। फिलहाल तो सभी का ध्यान बचाव कार्य पर है। लेकिन बाद में इस बारे में समग्र सोच के साथ आगे बढना होगा। हादसे विकसित देशों में भी होते हैं। लेकिन वे उसकी पुनरावृत्ति रोकने के बारे में समुचित प्रबंध करने के साथ ही दोषियों को दण्डित करने में रहम नहीं करते। वास्तव में चिंता और सरोकार ऐसे पर्यटन स्थलों को लेकर है, जिनके जरिए हमारी सरकारें राजस्व भी कमाती हैं। यदि ऐसे स्थलों पर हादसे होते रहे या भगदड़ की घटनाएं हुईं अथवा निर्माण टूट गया या रोप-वे फंस गया अथवा हेलीकॉप्टर कै्रश हो गया, तो अंतत: पर्यटन की संभावनाएं भी क्षीण होती जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भीड़ हमारे देश की आम समस्या है। लेकिन उसका प्रबंधन ही समस्या का समाधान है। दशकों पहले प्रयागराज और हरिद्वार के कुम्भ में भगदड़ के कारण सैकड़ों लोग कुचलकर मर गये थे। उस हादसे से सबक लेकर कुम्भ का आयोजन बेहद प्रोफेशनल तरीके से किया जाने लगा। ऐसी ही जिम्मेदारी बाकी आयोजनों में भी प्रदर्शित की जानी चाहिए। बुद्धिमत्ता इसी में है कि ऐसे हादसों को रोके जाने के प्रति गंभीरता बरती जाए। क्योंकि प्रत्येक नागरिक की जान बेश्कीमती है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-राजेश माहेश्वरी, वरिष्ठ लेखक एवंस्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Nov 2022 09:40:59 +0530</pubDate>
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                <title>मेक्सिको में मेट्रो पुल ढहा, 13 मरे, 70 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मेक्सिको सिटी (एजेंसी)। मेक्सिको के मेक्सिको सिटी में एक मेट्रो पुल ढह जाने से 13 लोगों की मौत हो गई और करीब 70 अन्य घायल हो गये। सचिवालय (सचिवालय फॉर इंटीग्रल रिस्क मैनेजमेंट एंड सिविल प्रोटेक्शन) ने ट्विटर पर यह जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक ओलिवोस और टेजोनको स्टेशनों के बीच सोमवार देर रात हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/metro-bridge-collapses-in-mexico-13-dead-70-injured/article-23385"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/metro-bridge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मेक्सिको सिटी (एजेंसी)।</strong> मेक्सिको के मेक्सिको सिटी में एक मेट्रो पुल ढह जाने से 13 लोगों की मौत हो गई और करीब 70 अन्य घायल हो गये। सचिवालय (सचिवालय फॉर इंटीग्रल रिस्क मैनेजमेंट एंड सिविल प्रोटेक्शन) ने ट्विटर पर यह जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक ओलिवोस और टेजोनको स्टेशनों के बीच सोमवार देर रात हुए हादसे में 13 लोगों की मौत हो गयी और 70 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 May 2021 12:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केरल में निर्माणधीन पुल की चार शहतीरें गिरी, कोई हताहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कन्नूर। केरल में माहे-थालास्सेरी राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास परियोजना के तहत बन रहे निर्माणाधीन पुल की चार शहतीरें (बीम) गिर गयीं जिसका वर्ष 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख़्यमंत्री पिनाराई विजयन ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया था। सूत्रों ने बताया कि यह घटना बुधवार को करीब दो बजे घटी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/four-beams-of-bridge-under-construction-in-kerala-fell-no-casualties/article-17884"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/under-construction-bridge-fell.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कन्नूर।</strong> केरल में माहे-थालास्सेरी राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास परियोजना के तहत बन रहे निर्माणाधीन पुल की चार शहतीरें (बीम) गिर गयीं जिसका वर्ष 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख़्यमंत्री पिनाराई विजयन ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया था। सूत्रों ने बताया कि यह घटना बुधवार को करीब दो बजे घटी। इस दौरान कुछ दूर पर एक निर्माण स्थल पर मजूदर भी काम कर रहे थे और राहत की बात यह रही कि कोई भी व्यक्ति इस घटना में हताहत नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की एक टीम घटनास्थल का दौरा करेगी। वर्ष 2018 अक्टूबर में इस परियोजना के उद्घाटन समारोह के दौरान गडकरी ने घोषणा की थी कि 1811 करोड़ रुपये की लागत वाली माहे-थालास्सेरी राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास परियोजना वर्ष 2020 तक पूरी हो जाएगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2020 13:40:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लसाड़ा ड्रेन का पुल हादसे के इंतजार में</title>
                                    <description><![CDATA[शेरपुर(रवी गुरमा)। धूरी -रायकोट सड़क मार्ग पर गांव टिब्बा में लड़ासा ड्रेन पर बना पुल सड़क हादसे को न्योता दे रहा है। उल्लेखनीय है कि इस पुल का निर्माण देश की आजादी के समय हुआ था और अब इस पुल की हालत दयनीय हो चुकी है, जिस कारण इस पुल का बड़ा हिस्सा दब जाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>शेरपुर(रवी गुरमा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">धूरी -रायकोट सड़क मार्ग पर गांव टिब्बा में लड़ासा ड्रेन पर बना पुल सड़क हादसे को न्योता दे रहा है। उल्लेखनीय है कि इस पुल का निर्माण देश की आजादी के समय हुआ था और अब इस पुल की हालत दयनीय हो चुकी है, जिस कारण इस पुल का बड़ा हिस्सा दब जाने के कारण टूटने किनारे है। इस संबंधी बातचीत करते ब्लॉक समिति मैंबर सुरजीत सिंह सैनिक व युवा नेता हरबंस सिंह सहित गांववासियों ने मांग की कि तुरंत इस पुल का निर्माण किया जाये, जिससे कोई हादसा न घटित हो ।</p>
<p style="text-align:justify;">बसपा नेता व हलका महल कलां के इंचार्ज कुलवंत सिंह टिब्बा ने कहा कि यह सड़क मार्ग धुरी से वाया कातरों बड़ी, टिब्बा से मनाल होता हुआ रायकोट के साथ जोड़ता है व बस सर्विस भी इस रूट बहुत अधिक चलती हैं। उन्होंने बताया कि गांव टिब्बा के लसाड़ा ड्रेन का यह खस्ता हाल पुल की यदि तुरंत संभाल न की गई तो हलका महलां के शेरपुर ब्लॉक गांवों का संपर्क बिल्कुल टूट सकता है।</p>
<h2 style="text-align:center;">गांववासियों ने की तुरंत इस पुल का निर्माण किए जाने की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मौके लखवीर सिंह पंच, सुखविन्दर सिंह पंच, कांग्रेसी नेता करमजीत सिंह धालीवाल, बलवीर सिंह, कुलवंत सिंह नीला, जसवीर सिंह जस्सी, जगजीत सिंह सराय, समिन्दर सिंह जवन्दा आदि नेताओं ने कहा कि गांववासी जल्द ही इस संबंधी जिला प्रशासन तक पहुंचकर पुल के निर्माण के लिए अपील की जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:center;">मसले का हल जल्द ही करवाएंगे: विधायक</h2>
<p style="text-align:justify;">इस पुल संबंधी जब हलका महल कलां के विधायक कुलवंत सिंह पंडोरी के साथ बात की तो उन्होंने कहा कि वह इस पुल संबंधी डिप्टी कमिशनर संगरूर के साथ बात करेंगे व इस मसले का हल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि पंजाब में जितने भी ऐसे खस्ताहाल पुल हैं उनका फिर से निर्माण करवाए। हादसे घटने के बाद लोगों को मुआवजा देने की जगह सरकार समय रहते हादसों को रोके।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Feb 2019 13:28:45 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामगंगा पुल पर बस में लगी आग, मची चीख-पुकार</title>
                                    <description><![CDATA[बस में आग लगने से पुल पर दोनों तरफ जाम बरेली (एजेंसी)।मथुरा डिपो की एक बस बदायूं की तरफ जा रही थी। हर यात्री अपने-अपने में मशगूल था। कोई मोबाइल पर लगा था तो कोई सहयात्री से बातचीत में। किसी को जरा भी आहट नहीं थी आने वाले खतरे की। इसी बीच बस जैसे ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-fire-in-the-bus-at-ramganga-bridge/article-6526"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/fire-bas.jpg" alt=""></a><br /><h2>बस में आग लगने से पुल पर दोनों तरफ जाम</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरेली (एजेंसी)।</strong>मथुरा डिपो की एक बस बदायूं की तरफ जा रही थी। हर यात्री अपने-अपने में मशगूल था। कोई मोबाइल पर लगा था तो कोई सहयात्री से बातचीत में। किसी को जरा भी आहट नहीं थी आने वाले खतरे की। इसी बीच बस जैसे ही रामगंगा पुल पर पहुंची अचानक इंजन में आग लग गई। यात्री चीखने-चिल्लाने लगे। हर किसी के चेहरे पर दहशत का साया था। यात्री मदद की गुहार लगा रहे थे। इधर, धुआं उठता देख ड्राइवर ने बस को पुल पर ही रोका और आननफानन सवारियों को उतारा गया। थोड़ी देर बाद किसी तरह बस को धक्का देकर पुल से आगे ले जाया गया। बस में आग लगने से पुल पर दोनों तरफ ट्रैफिक जाम हो गया। करीब एक घंटे बाद यातायात सुचारु हो सका।</p>
<p style="text-align:justify;">मथुरा डिपो की एक बस बदायूं की तरफ जा रही थी। रामगंगा पुल से गुजरते समय एकाएक इंजन से धुआं निकला फिर हल्की आग लग गई। इंजन में आग लगते ही ड्राइवर लाखन सिंह ने तत्काल पुल पर ही बस रोक दी। इससे पहले कि आग विकराल रूप धारण करती, कंडक्टर सुनील व ड्राइवर लाखन सिंह ने सभी सवारियो को सुरक्षित उतारा। ड्राइवर और कंडक्टर ने जल्द ही पानी डालकर आग बुझा दी। बताया जा रहा है कि इंजन के वाय¨रग में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, बस के रामगंगा पुल के बीचोबीच खड़े होने से दोनों तरफ जाम लग गया। पुलिस ने लोगों की मदद से बस को धक्का देकर रामगंगा पुल से आगे ले जाकर सड़क किनारे खड़ा किया। इसके बाद रुहेलखंड डिपो की दूसरी बस बुलाकर यात्रियों को उसमें बैठाया गया। दहशतजदा यात्री दूसरी बस से गंतव्य के लिए रवाना हुए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Oct 2018 09:08:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सिलीगुड़ी में निर्माणधीन गिरा पुल</title>
                                    <description><![CDATA[कोई हताहत नहीं सिलीगुड़ी (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31डी पर करीब सौ मीटर लंबा निमार्णाधीन पुल शुक्रवार रात गिर गया। हादसे में हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है। अधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निम्न स्तर की निमार्ण सामग्री के इस्तेमाल के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-bridge-under-construction-in-siliguri-fall/article-5316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/pul-fall.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कोई हताहत नहीं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिलीगुड़ी (एजेंसी)।</strong> पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31डी पर करीब सौ मीटर लंबा निमार्णाधीन पुल शुक्रवार रात गिर गया। हादसे में हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है। अधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निम्न स्तर की निमार्ण सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुल टूटा। उन्होंने कहा कि अगर यह हादसा दिन में होता तो जनहानि निश्चित थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विरोध प्रदर्शन करके घंटों राजमार्ग पर जाम लगाया। स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी ( बीडीओ ) प्रणय मजूमदार ने घटनास्थल पर पहुँच कर प्रदर्शन कर रहे लोगों की शिकायतों को दूर करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन खत्म किया।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Aug 2018 17:14:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पुल से टकराई अनियंत्रित कार , 3 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ पति-पत्नी और बेटे की मौत कुरुक्षेत्र। नेशनल हाइवे नंबर-1 पर गांव खानपुर कोलिया और रामगढ़ के बीच एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर क्रास कर दूसरी दिशा में खंबे से जा टकराई। हादसे में एक दंपत्ति व उनके बेटे की मौत हो गई, जबकि एक बेटे की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे चंडीगढ़ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;"> पति-पत्नी और बेटे की मौत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र।</strong> नेशनल हाइवे नंबर-1 पर गांव खानपुर कोलिया और रामगढ़ के बीच एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर क्रास कर दूसरी दिशा में खंबे से जा टकराई। हादसे में एक दंपत्ति व उनके बेटे की मौत हो गई, जबकि एक बेटे की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ सीएच 04के 5118 अल्टो कार में सवार होकर नीरज सिंगला का पूरा परिवार दिल्ली की तरफ जा रहे था। नीरज एनआईसी में कार्यरत थे, वे शामली अपने चाचा से मिलकर दिल्ली अपने पिता के पास जा रहे थे। उनके बड़े बेटे नवल (20) ने दसवीं में 10 सीजीपीए स्कोर किया था। इसकी खुशी वे अपने पिता के साथ सेलिब्रेट करना चाहते थे। कार में नीरज, उनकी पत्नी तनू (45), बड़ा बेटा नवल और छोटा बेटा निपुण सवार थे। पुलिस ने तीनों के शवों को पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Fri, 09 Jun 2017 09:04:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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