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                <title>world news - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>US-Iran Conflict Impact on Japan: अमेरिका-ईरान संघर्ष से जापान ने क्या सीखा? जापान में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने औद्योगिक क्षेत्र पर दबाव बढ़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 110 दिनों तक चला तनाव और संघर्ष जून 2026 में समाप्त हो गया। 18 जून को शांति समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद युद्धविराम लागू हुआ और मध्य पूर्व में स्थिरता लौटने की उम्मीद मजबूत हुई। हालांकि संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन इस दौरान दुनिया की अनेक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़े प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाते रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-did-japan-learn-from-the-us-iran-conflict-rising-energy/article-86555"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/us-iran-conflit-impact.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US-Iran Conflict Impact on Japan: अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 110 दिनों तक चला तनाव और संघर्ष जून 2026 में समाप्त हो गया। 18 जून को शांति समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद युद्धविराम लागू हुआ और मध्य पूर्व में स्थिरता लौटने की उम्मीद मजबूत हुई। हालांकि संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन इस दौरान दुनिया की अनेक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़े प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाते रहे। जापान उन देशों में शामिल है जिसने इस संकट के आर्थिक, सामरिक और राजनीतिक प्रभावों को सबसे अधिक गंभीरता से महसूस किया।</p>
<p style="text-align:justify;">जापान लंबे समय से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहा है। उसकी तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी जरूरत मध्य पूर्व से पूरी होती रही है। यही कारण है कि संघर्ष शुरू होते ही टोक्यो में चिंता बढ़ गई थी। समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई, जिसका सीधा असर जापान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने जापान के औद्योगिक क्षेत्र पर दबाव बढ़ाया। इस्पात, रसायन, परिवहन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ गई। महंगाई में वृद्धि के कारण आम नागरिकों का जीवन भी प्रभावित हुआ। सरकार को राहत योजनाओं और आर्थिक सहायता उपायों पर विचार करना पड़ा ताकि बढ़ती जीवन-यापन लागत का बोझ कम किया जा सके। इस पूरे दौर ने जापान को यह एहसास कराया कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संघर्ष का असर वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। जापानी वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों ने कच्चे माल और आवश्यक पुर्जों की उपलब्धता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती। कई कंपनियों ने वैकल्पिक आपूर्तिकतार्ओं की तलाश शुरू की और आवश्यक वस्तुओं का अतिरिक्त भंडारण किया। इस अनुभव ने जापान को यह सिखाया कि वैश्विक संकटों के समय विविध स्रोतों पर आधारित आपूर्ति व्यवस्था कितनी आवश्यक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस युद्ध का एक महत्वपूर्ण परिणाम ऊर्जा नीति में बदलाव के रूप में सामने आया। जापान ने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार की दिशा में अपने प्रयास तेज किए। साथ ही परमाणु ऊर्जा को लेकर भी नया दृष्टिकोण विकसित हुआ। जिन परमाणु संयंत्रों को पहले विवादों के कारण सीमित किया गया था, उनके पुन: उपयोग पर गंभीर चर्चा हुई। नीति निमार्ताओं का मानना था कि ऊर्जा के अधिक विविध स्रोत भविष्य में ऐसे संकटों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनयिक स्तर पर भी यह संघर्ष जापान के लिए एक परीक्षा साबित हुआ। लंबे समय से जापान ने मध्य पूर्व के देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे थे। उसने किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय संवाद और शांति की नीति को प्राथमिकता दी। संघर्ष के दौरान भी जापानी नेतृत्व ने संयमित रुख अपनाया और अपने नागरिकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा आपूर्ति को सर्वोच्च महत्व दिया। यही कारण रहा कि जापान क्षेत्रीय तनाव के बीच भी अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति बनाए रखने में सफल रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संकट ने जापान और अमेरिका के संबंधों को लेकर भी नई चचार्ओं को जन्म दिया। यद्यपि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत रहा, फिर भी जापान में यह विचार अधिक प्रमुख हुआ कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसे अपनी रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करना चाहिए। क्षेत्रीय सहयोग, आत्मनिर्भर रक्षा तैयारी और नई तकनीकी क्षमताओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। सुरक्षा नीति के क्षेत्र में भी इस संघर्ष ने महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की बढ़ती सक्रियता, उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम और अन्य क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच जापान पहले ही अपनी रक्षा क्षमताओं के विस्तार पर विचार कर रहा था। मध्य पूर्व के संकट ने इस सोच को और बल दिया। जापानी नीति निमार्ताओं ने माना कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में देश को अधिक सक्षम और तैयार रहना होगा।सामाजिक स्तर पर भी इस संघर्ष ने बहस को नई दिशा दी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित हुई जापान की शांतिवादी पहचान और बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रश्न फिर चर्चा के केंद्र में आया। नागरिकों और विशेषज्ञों के बीच यह विचार प्रमुख रहा कि शांति और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलने वाली नीति ही भविष्य के लिए सबसे उपयुक्त होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जबकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो चुका है और संघर्ष समाप्त हो गया है, तब भी उसके प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इस संकट ने जापान को ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक लचीलेपन, आपूर्ति व्यवस्था और सामरिक तैयारी के महत्व का नया अनुभव दिया। यही कारण है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी जापान अपनी नीतियों में सुधार और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। यह संघर्ष जापान के लिए एक महत्वपूर्ण सबक बनकर उभरा, जिसने उसे बदलती वैश्विक परिस्थितियों को अधिक गहराई से समझने का अवसर दिया।(यह लेखक के अपने विचार हैं) <strong>-बीटा बोचोरोडिज, विशेषज्ञ, सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस, पोलैंड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:38:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Treasure: धरती के नीचे है बेशकीमती कीमती खज़ाना, जानकर रह जाएंगे हैरान&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: डॉ. संदीप सिंहमार। जिस प्रकार हमारा बृह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है, कुछ ऐसे ही धरती का पटल भी। धरती के गर्भ में ऐसे बेशकीमती खनिज छिपे हुए हैं,जिनके बारे में आम इंसान जानता नहीं है। सोने सहित कुछ धातुओं के बारे में तो सभी जानते है कि यह धरती की खानों से मिलता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-is-a-priceless-treasure-beneath-the-earth-you-will-be-surprised-to-know/article-56769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/treasure.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: डॉ. संदीप सिंहमार। जिस प्रकार हमारा बृह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है, कुछ ऐसे ही धरती का पटल भी। धरती के गर्भ में ऐसे बेशकीमती खनिज छिपे हुए हैं,जिनके बारे में आम इंसान जानता नहीं है। सोने सहित कुछ धातुओं के बारे में तो सभी जानते है कि यह धरती की खानों से मिलता है। पर बसे कीमती खजाने के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। आज इस लेख में हम धरती की परतों के बारे में विस्तृत रूप से बताते हुए इन परतों के नीचे छिपे बेसकीमती खजाने के बारे में भी बताने जा रहे हैं। भूगोल विषय के विद्यार्थी अक्सर वायुमंडल में भूगर्भ के बारे में पढ़ते रहते हैं,लेकिन अन्य सभी को भी उनकी जानकारी होनी चाहिए। Treasure</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-ration-card-holders/#google_vignette">Ration Card: राशन कार्ड धारकों के लिए खुशखबरी, अब राशन कार्ड की दुकानों पर मिलेंगी 46 वस्तुएं? देंखे लिस्ट</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">चार परतों में किया जाता है धरती का अध्ययन | Treasure</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले हम धरती की परतों का जिक्र करते हैं। भू वैज्ञानिकों ने धरती की परतों को चार भागों में बांटा है, जिनका अलग-अलग अध्ययन किया जाता है। धरती की इन परतों के नीचे नीचे असंख्य रहस्य छिपे हैं। धरती के नीचे ऐसी चीजें पाई जाती हैं जो ना केवल दुर्लभ तो हैं,बल्कि बेशकीमती भी हैं। हमारी धरती की पहली है, पपड़ी जिसे अंग्रेजों में Crust कहा जाता है। यह धरती की सबसे ऊपरी परत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे धरती की सबसे पतली परत भी कहा जाता है। यह परत भूगर्भीय चट्टानों, मिट्टी और विभिन्न प्रकार के खनिजों से बनी होती है। इसी प्रकार दूसरी परत है मैन्टल (Mantle)। यह पपड़ी के नीचे की परत न नाम है,जो गर्म और ठोस चट्टानों से बनी हुई होती है। इस परत को मोटाई 2,900 किलोमीटर है। तीसरी परत है बाहरी कोर जिसे अंग्रेजी में Outer Core के नाम से जाना जाता है। यह मैन्टल के नीचे की परत होती है। यह तरल लोहे और निकेल से बनी होती है। इसकी मोटाई लगभग 2,300 किलोमीटर है। धरती की सबसे मोटी परत मेंटल होती है। धरती की चौथी परत आंतरिक कोर यह हमारी पृथ्वी का सबसे नीचे का भाग है। यह ठोस लोहे और निकेल से बनी होती है। यह परत बहुत गर्म होती है, जिसकी मोटाई लगभग 1,200 किलोमीटर होती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/health-insurance/">Health Insurance : हेल्थ इंश्योरेंस: मुश्किल समय का सहारा</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">धरती से ये मिलते हैं बेशकीमती खनिज</h3>
<p style="text-align:justify;">विज्ञान के विद्यार्थी यूरेनियम का नाम सुनते आए हैं। जिसे अपनी प्रयोगशाला में अप्रत्यक्ष रूप से देखते भी है। यह यूरेनियम धरती के नीचे ही पाया जाता है। जो अपने आप में एक दुर्लभ और रेडियोएक्टिव तत्व है। इसी का प्रयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। हमारी धरती के नीचे ही रेडियम भी मिलता है, जो रेडियोएक्टिव तत्व है।<br />
हीरा जिसे डायमंड कहा जाता है ,वह भी धरती के गर्भ से ही मिलता है। यह दुर्लभ होने के साथ-साथ मूल्यवान भी है। हीरा पृथ्वी के भीतर उच्च दबाव और उच्च तापमान की स्थितियों में बनता है। जिसे उच्च तकनीक द्वारा बाहर निकाल कर शोधित किया जाता है। इसी तरह पृथ्वी के नीचे दुर्लभ रत्न पन्ना भी पाया जाता है। जो धरती में खास परिस्थितियों में बनता है। इसके अलावा प्लैटिनम अथवा सफेद सोना भी धरती के नीचे पाया जाता है। यह भी अपने आप भी बहुत दुर्लभ ओर और कीमती धातु है। यह पृथ्वी के कुछ इलाकों में ही मिलता है। रूबिक (Rubellite) या रूबी भी पृथ्वी के नीचे पाया जाने वाला एक अनुपम रत्न है। यह देखने मे बहुत सुंदर और लाल रंग का होता है। यह सब प्रकार की जानकारी विद्यार्थी काल में विज्ञान व भूगोल की पुस्तकों में हमारे सामने आती है,लेकिन ऐसे बारीक तरीकों से हमने इन जानकारी को कभी भी नहीं पढ़ा होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Apr 2024 11:53:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Schengen Visa: अब शेंगेन वीजा से यूरोप यात्रा होगी आसान, जानें, यूरोपीय संघ के नए नियम!</title>
                                    <description><![CDATA[World News: नई दिल्ली। यूरोपीय संघ ने हाल ही में भारतीय नागरिकों के लिए विशेष रूप से एक संशोधित वीजा प्रणाली शुरू की है। यह नई प्रणाली भारतीय नागरिकों को पर्याप्त लाभ प्रदान करती है, जिससे उन्हें दीर्घकालिक, बहु-प्रवेश शेंगेन वीजा तक पहुंच मिलती है, जो यात्रा योजनाओं को महत्वपूर्ण रूप से सुव्यवस्थित कर सकती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/now-traveling-to-europe-will-be-easier-with-schengen-visa/article-56730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/schengen-visa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>World News: नई दिल्ली।</strong> यूरोपीय संघ ने हाल ही में भारतीय नागरिकों के लिए विशेष रूप से एक संशोधित वीजा प्रणाली शुरू की है। यह नई प्रणाली भारतीय नागरिकों को पर्याप्त लाभ प्रदान करती है, जिससे उन्हें दीर्घकालिक, बहु-प्रवेश शेंगेन वीजा तक पहुंच मिलती है, जो यात्रा योजनाओं को महत्वपूर्ण रूप से सुव्यवस्थित कर सकती है और शेंगेन क्षेत्र में उद्यम करने वालों के लिए समग्र अनुभव को बढ़ा सकती है।  Schengen Visa</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/now-cotton-cultivation-has-become-easier/">Agriculture: आसान हुई अब कपास की खेती, ऐसे लगाएं और लाभदायक फसल पाएं</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">जानें, क्या है शेंगेन वीजा? Schengen Visa</h3>
<p style="text-align:justify;">शेंगेन क्षेत्र में आयरलैंड गणराज्य और साइप्रस को छोड़कर 27 यूरोपीय संघ के देशों में से 25 देश शामिल हैं। इसमें बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन के साथ-साथ आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे देश शामिल हैं। यह विस्तृत क्षेत्र न केवल विविध सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है बल्कि वीजा धारकों के लिए सीमाओं के पार निर्बाध यात्रा की सुविधा भी प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शेंगेन वीजा 180 दिन की समय सीमा के भीतर 90 दिनों तक के संक्षिप्त प्रवास की अनुमति देता है। यह वीजा या तो एकल-प्रवेश के रूप में जारी किया जा सकता है, जो शेंगेन क्षेत्र में एक प्रवेश को सक्षम बनाता है, या बहु-प्रवेश के रूप में जारी किया जा सकता है, जो इसकी वैधता की अवधि के लिए कई यात्राओं की अनुमति देता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/summer-vacation-will-start-from-this-day-in-all-schools-of-haryana/">Haryana School Holidays: हरियाणा के सभी स्कूलों में इस दिन से शुरू होगा ग्रीष्मकालीन अवकाश</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">जानें नए नियम |Schengen Visa</h3>
<p style="text-align:justify;">नए नियमों के तहत, भारतीय यात्री अब दो साल का शेंगेन वीजा प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले उपलब्ध कम वैधता अवधि से एक उल्लेखनीय सुधार है। इस विस्तारित दो-वर्षीय वीजा के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए, आवेदकों को पिछले तीन वर्षों के भीतर दो शेंगेन वीजा प्राप्त करने और उचित रूप से उपयोग करने की आवश्यकता होगी। दो साल के वीजा के सफल उपयोग पर, यात्री आम तौर पर पांच साल के शेंगेन वीजा के लिए पात्र होने की उम्मीद कर सकते हैं, बशर्ते उनका पासपोर्ट पर्याप्त वैधता बनाए रखता हो।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/prepare-matka-kulfi-at-home-to-cool-your-body-in-summers/">Kulfi For Summer: गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए घऱ पर ही तैयार करें मटका कुल्फी, स्वाद भी है लाजवाब</a></p>
<p style="text-align:justify;">नए नियम के अनुसार भारतीय यात्री अतिरिक्त परमिट या प्राधिकरण की आवश्यकता के बिना, किसी भी 180-दिन की अवधि के भीतर 90 दिनों तक के छोटे प्रवास के लिए शेंगेन सदस्य देशों के भीतर स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं। इस प्रणाली के तहत, यात्रा के सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड वाले पात्र यात्रियों को विस्तारित वैधता के साथ वीजा तक पहुंच आसान हो जाएगी, बशर्ते उनके पासपोर्ट की वैधता परमिट हो।</p>
<p style="text-align:justify;">‘कैस्केड’ प्रणाली, जैसा कि इसे कहा जाता है, लगातार यात्रियों को उत्तरोत्तर लंबी वीजा अवधि के साथ पुरस्कृत करने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी शुरूआत दो साल के वीजा से होती है, और सफल उपयोग पर, यात्री संभावित रूप से पांच साल के वीजा के लिए अर्हता प्राप्त कर सकते हैं। हालाँकि ये वीजा यात्रा के उद्देश्य को प्रतिबंधित नहीं करते हैं, लेकिन वे शेंगेन क्षेत्र के भीतर काम करने के अधिकार की अनुमति नहीं देते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/now-traveling-to-europe-will-be-easier-with-schengen-visa/article-56730</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Apr 2024 13:05:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Putin Suffered a heart attack: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आया हार्ट अटैक! फर्श पर गिरे मिले&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Putin Suffered a heart attack: रूस से बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूस के राष्टÑपति व्लादिमीर पुतिन को दिल का दौरा पड़ा है। यह जानकारी टेलीग्राम ग्रुप जनरल एसवीआर ने साझा की है। इसका कहना है कि यह रूस में रिटायर खुफिया अधिकारियों व क्रेमिलन के अधिकारियों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/putin-suffered-a-heart-attack/article-54065"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/putin-suffered-a-heart-attack.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Putin Suffered a heart attack: रूस से बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूस के राष्टÑपति व्लादिमीर पुतिन को दिल का दौरा पड़ा है। यह जानकारी टेलीग्राम ग्रुप जनरल एसवीआर ने साझा की है। इसका कहना है कि यह रूस में रिटायर खुफिया अधिकारियों व क्रेमिलन के अधिकारियों से जानकारी निकालते हैं। आपको बता दें कि टेलीग्राम ग्रुप की खबर को ब्रितानी न्यूज आउटलेट्स द मिरर, जीबी न्यूज और द एक्सप्रेस ने छापा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब राष्ट्रपति पुतिन गिरे तो मेज पर रखे बर्तनों पर हाथ लगा और उसका शोर सुनकर सुरक्षा अधिकारी कमरे में आये। टेलीग्राम ग्रुप ने कहा कि जब पुति फर्श पर गिरे हुए थे उनकी आंखें पलटी हुई थी। जनरवल एसवीआर के अनुसार, बगल के कमरे से राष्ट्रपति पुतिन के डॉक्टर को बुलाया तत्काल उपचार मिलने के बाद पुतिन होश में आये फिर इसके बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन को एक दूसरे कमरे में ले जाया गया जहां स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध थीं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2023 12:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Donut Rocks: मंगल पर अमंगल की आशंका से वैज्ञानिक हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[Donut rocks: ह्यूस्टन। मंगल ग्रह (Planet Mars) पर एक विचित्र पत्थर (Donut rocks) देखकर नासा (NASA) के वैज्ञानिक हैरान हैं। यह पत्थर डोनट के आकार का विचित्र पत्थर है। वैज्ञानिक भी ये सोचकर हैरान हैं कि ये पत्थर बीच में गोलाकार आकार का कैसे काटा गया है और आया कहां से है। नासा ने इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/planet-mars-news-donut-rocks/article-49618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/donut-rocks.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Donut rocks: ह्यूस्टन। मंगल ग्रह (Planet Mars) पर एक विचित्र पत्थर (Donut rocks) देखकर नासा (NASA) के वैज्ञानिक हैरान हैं। यह पत्थर डोनट के आकार का विचित्र पत्थर है। वैज्ञानिक भी ये सोचकर हैरान हैं कि ये पत्थर बीच में गोलाकार आकार का कैसे काटा गया है और आया कहां से है। नासा ने इस चट्टान को देखकर कहा कि इस चट्टान के आस पास कई और छोटे-छोटे पत्थर हैं, जिसे देख कर लगता है कि ये एक तरह का उल्कापिंड  भी हो सकता है। Donut Rocks</p>
<p style="text-align:justify;">इसको लेकर मंगल ग्रह पर इंसान लगातार खोज कर रहे हैं। पृथ्वी के वैज्ञानिक ये भी अनुमान लगा रहे हैं कि वे मंगल ग्रह पर इंसानों को बसा सकते हैं। लेकिन हाल ही में मंगल ग्रह पर ऐसा पत्थर देखकर उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि मंगल पर ऐसा पत्थर मिला है जिसे देख सभी इंसान आश्चर्यचकित हैं। दरअसल, इस पत्थर की आकृति बच्चों की उस मनपसंद चीज से मिलती है जो इंसानों द्वारा भी बेहद पसंद किया जाता है। भारत के बड़े शहरों समेत दुनिया भर में लोग इस चीज के दीवाने हैं। बच्चों में तो इस चीज का इतना क्रेच है कि उन्हें हर रोज ये खाना होता है। आपको बता दें कि हम जिस चीज की बात कर रहे हैं, वो डोनट है। मंगल ग्रह पर जो पत्थर मिला है वो बिल्कुल डोनट के आकार का है। Donut Rocks</p>
<p style="text-align:justify;">नासा के अनुसार नासा का एक प्रिसर्वेंस रोवर इस वक्त मंगल ग्रह पर घूम रहा है और वहां की तस्वीरें पृथ्वी तक पहुंचा रहा है। उसी रोवर ने हाल ही में एक ऐसी तस्वीर खींची जिसकी चर्चा दुनियाभर में है। ये तस्वीर मंगल ग्रह पर पड़े एक पत्थर जैसी है। ये पत्थर बिल्कुल एक डोनट के आकार का है। दिखने में थोड़ा गोल और इसके बीच में बना सुराख इस पत्थर को हुबहू एक डोनट की शक्ल देता है, जो अमेरिका समेत पूरे यूरोप में लोकप्रिय है। इस तस्वीर को रिमोट माइक्रोस्कोपिक इमेजर की मदद से लिया गया है। वहीं तस्वीर को खींचते वक्त रोवर इस पत्थर से करीब 100 मीटर की दूरी पर था। नासा के अनुसार ये तस्वीर 22 जून 2023 को ली गई थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नासा ने इस तस्वीर को लेकर क्या कहा? Donut Rocks</h4>
<p style="text-align:justify;">नासा ने इस चट्टान को देखकर यह कहा कि यह चट्टान जहां है, उसके आस पास कई और छोटे छोटे पत्थर हैं, नासा ये अनुमान लगा रहा है कि ये एक तरह का उल्कापिंड है, जिसे देखकर नासा का कहना है कि ये चट्टान मंगल ग्रह का नहीं बल्कि किसी और ग्रह का है जो उल्कापिंड के रूप में मंगल ग्रह पर गिरा है। दरअसल, इससे पहले भी मंगल ग्रह पर कई इस तरह के चट्टान पाए गए थे, जो बाद में उल्कापिंड निकले। ये पत्थर इतने वर्षों तक इसलिए संरक्षित हैं क्योंकि मंगलग्रह पर वर्षा बेहद कम होती है। फिलहाल वैज्ञानिक इसके नमूने इकट्ठा करने में जुटे हैं और इससे वो ये तस्दीक करना चाहते हैं कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 14:19:08 +0530</pubDate>
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                <title>Fraud Visa: Australia की 5 यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों के दाखिले पर लगा बैन, जानिए क्या है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। नकली आवेदनों में वृद्धि के कारण Australia में कम से कम पांच विश्वविद्यालयों ने कुछ भारतीय राज्यों के छात्रों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस साल Australia में भारतीय छात्रों की संख्या 2019 में 75,000 का आंकड़ा पार कर सकती है। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड अखबार ने मंगलवार को बताया कि सांसदों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ban-on-admission-of-indian-students-in-5-universities-of-australia-know-what-is-the-matter/article-46357"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/fireworks-in-australia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> नकली आवेदनों में वृद्धि के कारण Australia में कम से कम पांच विश्वविद्यालयों ने कुछ भारतीय राज्यों के छात्रों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस साल Australia में भारतीय छात्रों की संख्या 2019 में 75,000 का आंकड़ा पार कर सकती है। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड अखबार ने मंगलवार को बताया कि सांसदों और शिक्षा क्षेत्र ने Australia की आव्रजन प्रणाली और देश के आकर्षक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा बाजार पर छात्रों की संख्या में मौजूदा उछाल के संभावित दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में चिंता जताई है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैश्विक शिक्षा फर्म नवितास के जॉन च्यू ने कहा, “आने वाले छात्रों की (Fraud Visa) संख्या उम्मीद से कहीं अधिक है।” उन्होंने कहा, ‘हम जानते थे कि संख्या में भारी इजाफा होगा, लेकिन इसके साथ ही फर्जी छात्रों की संख्या भी बढ़ी है.’ रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अब कई यूनिवर्सिटी प्रतिबंध लगा रही हैं। द ऐज और सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड अखबारों के मुताबिक, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी, वोलोंगोंग यूनिवर्सिटी, टॉरेंस यूनिवर्सिटी और साउथ क्रॉस यूनिवर्सिटी ने भारतीय छात्रों के आवेदन पर रोक लगा दी है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Apr 2023 10:48:32 +0530</pubDate>
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