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                <title>Mushroom Ki Kheti - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Mushroom Ki Kheti RSS Feed</description>
                
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                <title>Smart Farming: स्मार्ट खेती का नवीनतम रूप है बटन मशरूम की खेती</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. संदीप सिंहमार। Button Mushroom Cultivation: आज के जमाने में खेती को केवल खेत-खलिहान, धूप-पसीना और बारिश के इंतजार तक सीमित रखना एक गलत धारणा है। अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, खासकर छोटे किसानों और युवाओं के लिए। घर के एक छोटे से कमरे में, एसी या नियंत्रित वातावरण में बैठकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/button-mushroom-cultivation-is-the-latest-form-of-smart-farming/article-83041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/button-mushroom-ki-kheti.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> Button Mushroom Cultivation: आज के जमाने में खेती को केवल खेत-खलिहान, धूप-पसीना और बारिश के इंतजार तक सीमित रखना एक गलत धारणा है। अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, खासकर छोटे किसानों और युवाओं के लिए। घर के एक छोटे से कमरे में, एसी या नियंत्रित वातावरण में बैठकर भी खेती करके लाखों रुपये का व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। इसी नई स्मार्ट खेती का सबसे आकर्षक उदाहरण है—बटन मशरूम की खेती। Button Mushroom ki Kheti</p>
<p style="text-align:justify;">यह न केवल जमीन पर कम निर्भर है, बल्कि पारंपरिक फसलों की तुलना में तेजी से आय देने वाला और कम जोखिम वाला व्यवसाय भी है। पारंपरिक खेती में आमतौर पर ट्रैक्टर, खेत, बारिश या नहर, घंटों की मेहनत और फिर भी बाजार भाव की अनिश्चितता बनी रहती है। इसके विपरीत, बटन मशरूम की खेती एक इनडोर और नियंत्रित वातावरण (कंट्रोल्ड एन्वायरनमेंट फार्मिंग) का रूप है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें मुख्यत: एक खाली कमरा या बेसमेंट, नमी और तापमान को नियंत्रित करने के लिए साधारण उपकरण तथा थोड़ी बेसिक ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। इसके बाद लगभग 40-45 दिनों में पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है, और साल भर में 5-6 बार फसल ली जा सकती है। इतना तेज उत्पादन चक्र और कम जगह में अधिक आय इस खेती को आधुनिक किसानों के लिए अत्यंत आकर्षक बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तकनीक कैसे करती है काम | Button Mushroom ki Kheti</h3>
<p style="text-align:justify;">बटन मशरूम की खेती पारंपरिक खेती से बिल्कुल अलग है। इसके लिए उपजाऊ मिट्टी की जरूरत नहीं होती, बल्कि कंपोस्ट की आवश्यकता होती है, जो पराली, भूसे या अन्य कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कंपोस्ट में मशरूम के स्पॉन (बीज) मिलाए जाते हैं और इसे अंधेरे, ठंडे व नम कमरे में रखा जाता है। यहां मशरूम बिना सूर्य प्रकाश के विकसित होते हैं। केवल पर्याप्त नमी और सही तापमान बनाए रखना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल स्वचालित मिस्टिंग सिस्टम, थमार्मीटर और ह्यूमिडिटी मॉनिटर जैसे उपकरण इन परिस्थितियों को बनाए रखने में काफी सहायक होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वर्टिकल फार्मिंग, जगह की बचत</h3>
<p style="text-align:justify;">एक के ऊपर एक रैक लगाकर छोटी जगह में भी बड़ी मात्रा में मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। जो उत्पादन एक बीघा खेत में होता है, वह एक या दो कमरों में भी संभव हो जाता है। यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे बहुमंजिला इमारतों में ऊपर-नीचे फ्लैट बनाकर स्थान का अधिकतम उपयोग किया जाता है। इससे शहरों के आसपास या छोटे गांवों में रहने वाले लोग भी बिना अधिक जमीन के इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाजार और लगातार मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">बटन और आॅयस्टर मशरूम जैसी प्रजातियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बड़े शहरों में रेस्टोरेंट और बेकरी में इनका व्यापक उपयोग होता है। स्वस्थ आहार के बढ़ते चलन के कारण मशरूम अब घर-घर तक पहुंच चुके हैं, क्योंकि यह कम कैलोरी वाला, प्रोटीन युक्त और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी उपयुक्त खाद्य है। इसके कारण उत्पादकों को बाजार ढूंढने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती। आप स्थानीय रेस्टोरेंट, होटल या सब्जी विक्रेताओं से सीधा संपर्क करके नियमित आॅर्डर प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिक्री के नए रास्ते</h3>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल कनेक्टिविटी ने मशरूम की बिक्री को और आसान बना दिया है। आप अपनी सोसायटी के व्हाट्सऐप ग्रुप, स्थानीय फूड डिलीवरी ऐप्स या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ताजा मशरूम की आपूर्ति कर सकते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और उत्पादक को बेहतर मूल्य मिलता है। यदि पैकेजिंग आकर्षक, साफ-सुथरी और ब्रांडेड हो, तो सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट में भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है। Button Mushroom ki Kheti</p>
<h3 style="text-align:justify;">आॅर्गेनिक और वैल्यू-एडेड उत्पाद</h3>
<p style="text-align:justify;">आजकल उपभोक्ता केवल कीमत ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी ध्यान देते हैं। यदि आप बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के मशरूम तैयार करते हैं, तो इसे आॅर्गेनिक उत्पाद के रूप में बेचा जा सकता है। ऐसे उत्पादों पर आमतौर पर 20-30% तक अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, मशरूम की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इसे सुखाकर, पाउडर बनाकर या प्रोसेस करके मशरूम सॉस और मसाला जैसे वैल्यू-एडेड उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जोखिम कम और नियंत्रण अधिक</h3>
<p style="text-align:justify;">पारंपरिक खेती में कीट, रोग, अनिश्चित मौसम, सूखा या बाढ़ जैसे कारकों से भारी नुकसान हो सकता है। लेकिन मशरूम की स्मार्ट खेती में यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। इसमें तापमान, नमी, हवा और कच्चे माल की गुणवत्ता पर किसान का पूरा नियंत्रण होता है। कीटों का खतरा भी कम रहता है, क्योंकि यह नियंत्रित वातावरण में उगाई जाती है। इससे उत्पादन स्थिर रहता है और गुणवत्ता बनाए रखना भी आसान हो जाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पासपोर्ट सेवाएं अब आपके द्वार: पश्चिमी यूपी में विशेष मोबाइल वैन अभियान " href="http://10.0.0.122:1245/passport-office-ghaziabad-has-started-mobile-van-campaign/">पासपोर्ट सेवाएं अब आपके द्वार: पश्चिमी यूपी में विशेष मोबाइल वैन अभियान </a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dudhiya Mushroom: दो भाईयों द्वारा मिलकर मिल्की मशरूम प्रजाति को उगाने का किया जा रहा है कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में है यह मददगार फिरोजाबाद (सच कहूँ/विकास पालीवाल)। Milky Mushroom: सुहाग नगरी फिरोजाबाद के मोहल्ला हरीनगर रैपुरा रोड टापा खुर्द चौराहा निवासी युवा प्रवेंद्र कुमार ने अपने भाई कुलदीप के साथ मिलकर मिल्की मशरूम की प्रजाति को उगाने का अद्भुत कार्य किया है। इस प्रजाति की मशरूम की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/two-brothers-are-working-together-to-grow-the-milky-mushroom-species/article-77505"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/firozabad-news-5.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में है यह मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजाबाद (सच कहूँ/विकास पालीवाल)। </strong>Milky Mushroom: सुहाग नगरी फिरोजाबाद के मोहल्ला हरीनगर रैपुरा रोड टापा खुर्द चौराहा निवासी युवा प्रवेंद्र कुमार ने अपने भाई कुलदीप के साथ मिलकर मिल्की मशरूम की प्रजाति को उगाने का अद्भुत कार्य किया है। इस प्रजाति की मशरूम की विशेषता यह है कि यह ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियंत्रित करने में पूरी तरह से मददगार है। इस किस्म के मशरूम की विशेषता है कि यह 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी इसे उगाया जा सकता है, वहीं इसके लिए अलग से शीत परत यंत्र की आवश्यकता नहीं होती है। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि इसको उगाने के लिए किसी कृत्रिम खाद की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है तथा यह केवल भूसे में ही इसकी उगाया जा सकता है। Firozabad News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवेंद्र ने बताया कि इसको उगाने के लिए एक किलोग्राम भूसे को 12 घंटे पानी में भिगोकर रखा जाता है, फिर उसे थोड़ी नमी रहने तक सुखाते है। इसके बाद भाप से इसको शुद्ध किया जाता है। इसके बाद ठंडा होने पर इसमें मशरूम के लगभग दो मुट्ठी स्पान मिलकर 15 दिन तक इंक्रूवेशन के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तक छोड़ देते हैं। फिर यह लगभग 10 दिन बाद मशरूम देना शुरू कर देता है। एक बार में 500 ग्राम से 600 ग्राम तक मशरूम मिल सकते हैं। युवक प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि हम दो भाई यानी मैं तथा कुलदीप कुमार ने मिलकर मिल्की मशरूम के प्रजातियों को भी उगने का परीक्षण कर चुके हैं। प्रवीण कुमार ने बताया कि उन्होंने 2014 में आईआईटी रुड़की छोड़कर बीएससी की थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Trident Group: बरनाला में ट्राइडेंट ग्रुप का मुफ्त मेगा मेडिकल कैंप शुरू" href="http://10.0.0.122:1245/trident-group-free-mega-medical-camp-begins-in-barnala/">Trident Group: बरनाला में ट्राइडेंट ग्रुप का मुफ्त मेगा मेडिकल कैंप शुरू</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 19:45:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture News: परंपरागत खेती को छोड़ मशरूम उगाकर लखपति बना प्रहलाद सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prahlad-singh-earns-a-profit-of-twenty-lakh-rupees-annually-by-growing-mushrooms/article-69038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/agriculture-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं प्रहलाद सिंह</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हैं प्रहलाद सिंह</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)।</strong> Agriculture News: इन दिनों देश में लखपति दीदीयां ज्यादा चर्चा में हैं। उनके द्वारा आत्मनिर्भर बनने की कहानियों को खूब प्रचारित, प्रसारित किया जा रहा है। हम यहां उस किसान को सबके सामने ला रहे हैं, जो पारंपरिक खेती को त्यागकर मशरूम की खेती करके लखपति बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि मशरूम उत्पादन से गुरुग्राम के गांव डाबोदा के किसान प्रहलाद सिंह सालाना 20 लाख रुपये मुनाफा कमाते हैं। वे किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बने हुए हैं। किसान आधुनिक होगा और व्यवसायिक खेती की ओर अग्रसर होगा तो किसान की आय दोगुनी होने के साथ-साथ क्षेत्र में कृषि व बागवानी का चेहरा भी बदलेगा। यह बात गुरुग्राम के डाबोधा में रहने वाले किसान प्रहलाद सिंह ने सही साबित की है। प्रहलाद सिंह पहले परंपरागत खेती के रूप में बाजरा और गेहूं का उत्पादन कर रहे थे। जिसमें आमदनी ना के बराबर हो रही थी। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">खर्चा अधिक और उत्पादन कम होने से मुनाफा भी घटता जा रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आय दुगनी करने और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए व्यवसायिक खेती करने पर जोर देने के विचारों से प्रेरणा ली। तत्पश्चात जिला बागवानी अधिकारी नेहा यादव से जानकारी लेकर विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर मशरूम प्रोडक्शन यूनिट लगाने का प्लान किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">करीब 8 कनाल क्षेत्र में सेटअप किया तैयार | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रहलाद सिंह बताते हैं कि मशरूम उत्पादन के लिए उन्होंने करीब 8 कनाल क्षेत्र में पूरा सेटअप तैयार किया है। जिसमें मशरूम कपोस्ट व प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने में करीब 40 लाख रुपये की लागत आई है। जिला बागवानी विभाग द्वारा उसे 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी गयी है। बाकी राशि के लिए उसने बैंक से लोन लिया है। किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि उसने सरकारी मदद से कपोस्ट यूनिट व चार प्रोडक्शन यूनिट स्थापित की है। जिसमें प्रत्येक प्रोडक्शन यूनिट में 90 दिन का प्रोडक्शन सर्कल चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एक यूनिट से करीब 38 से 40 क्विंटल मशरूम उत्पादित किया जा रहा है। मार्किट में मशरूम का थोक भाव 140 से 150 रुपये किलो के करीब है। जिससे पूरे साल में चारों यूनिट से सभी खर्चों को घटाकर शुद्ध मुनाफे के रूप में 20 से 22 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। प्रहलाद सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश होलसेलर फार्म पर आकर ही मशरूम ले जा रहे हैं। इससे उन्हें बाजार में जाने की आवश्यकता भी नही है। उन्होंने बताया कि वे अभी गुरुग्राम व एनसीआर में अन्य बड़े फूड संस्थानों में डायरेक्ट डील के लिए प्रयासरत हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूनिट लगाने पर 40 से 85% तक की अनुदान राशि | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">किसानों को सिर्फ सकारात्मक प्रयास करने की जरूरत है। बागवानी विभाग उनकी हर संभव मदद को तैयार है। जिला में उद्यान विभाग हरियाणा द्वारा विभागीय स्कीम के तहत मशरूम कंपोस्ट व एक मशरूम प्रोडक्शन यूनिट की अधिकतम यूनिट कोस्ट 20 लाख निर्धारित की गई है। जिसमें जनरल कैटेगरी में 40 प्रतिशत व अनुसूचित जाति श्रेणी में 85 प्रतिशत राशि अनुदान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…" href="http://10.0.0.122:1245/arvind-kejriwals-problems-are-going-to-increase-after-losing-power-in-delhi/">Arvind Kejriwal News: दिल्ली की सत्ता जाने के बाद बढ़ने वाली है अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें, जानिये रिपोर्ट में क्या…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 15:30:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Mushroom Ki Kheti: मशरूम की खेती से प्रवीन ने सपनों को हकीकत में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (सच कहूँ/इंदवेश)। Mushroom Ki Kheti: कहते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि इंसान पूरी मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो उसे सफलता जरूर मिलती है। चरखी दादरी जिले के गांव मिर्च निवासी प्रवीन सांगवान ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। एक निजी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/praveen-turned-his-dreams-into-reality-through-mushroom-farming/article-68983"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/bhiwani-news-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इंदवेश)। </strong>Mushroom Ki Kheti: कहते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि इंसान पूरी मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो उसे सफलता जरूर मिलती है। चरखी दादरी जिले के गांव मिर्च निवासी प्रवीन सांगवान ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। एक निजी स्कूल में शिक्षक की नौकरी और लाखों रुपये के पैकेज को ठुकराकर प्रवीन ने मशरूम की खेती शुरू की और आज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। वे न सिर्फ अपने लिए एक मिसाल बने हैं, बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। Bhiwani News</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षा से खेती तक सफर | Bhiwani News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रवीन सांगवान ने बीएड और जेबीटी की पढ़ाई पूरी कर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उनके पढ़ाए सैकड़ों छात्र आज सरकारी नौकरियों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। कई बार एचटेट, सीटेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने के बावजूद उन्होंने सरकारी नौकरी को नहीं चुना। अपने व्यवसाय की शुरूआत करने की चाह ने उन्हें एक नया रास्ता दिखाया। गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में करीब 10 लाख रुपये के सालाना पैकेज को छोड़कर प्रवीन ने मशरूम की खेती में कदम रखा। इस नए क्षेत्र में सफलता पाने के लिए उन्होंने करनाल के अनुसंधान केंद्र से ट्रेनिंग ली और फिर पूरे जोश के साथ मशरूम की खेती शुरू की। आज वे इस काम से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। Bhiwani News</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुनाफे के साथ रोजगार का सृजन:</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रवीन न सिर्फ मशरूम की खेती से सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं, बल्कि बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ रहे हैं। उनका मानना है कि अगर किसान परंपरागत खेती को छोड़कर आॅर्गेनिक खेती की ओर बढ़ें, तो वे भी लाखों रुपये कमा सकते हैं। प्रवीन बताते हैं कि मशरूम की खेती के साथ-साथ वे मशरूम का अचार और सूप बनाकर बेचने की योजना बना रहे हैं, जिससे उनकी आय और बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>छोटे शेड से बड़ा सपना:</strong> प्रवीन ने अपनी शुरूआत 30 बाय 60 फीट के एक छोटे शेड से की थी, जिसमें उन्होंने लाखों रुपये का मुनाफा कमाया। अब वे शेड की संख्या बढ़ाकर बड़े स्तर पर आॅर्गेनिक खेती करने की तैयारी में हैं। उनका सपना है कि अपने उत्पादों को विदेशों में एक्सपोर्ट कर करोड़ों रुपये का टर्नओवर हासिल करें। इसके लिए वे लगातार मेहनत कर रहे हैं और अपने आसपास के किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रवीन सांगवान का कहना है कि सरकार की सब्सिडी और योजनाओं का सही उपयोग कर किसान अपनी स्थिति बदल सकते हैं। वे गांव के अन्य किसानों को इन योजनाओं के बारे में जागरूक कर रहे हैं और उन्हें आॅर्गेनिक खेती के फायदे बता रहे हैं। उनका मानना है कि मेहनत और सही दिशा में प्रयास से कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 62 करोड़ लोग कवर: नड्डा" href="http://10.0.0.122:1245/sixty-two-crore-people-covered-under-pradhan-mantri-jan-arogya-yojana-nadda/">Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 62 करोड़ लोग कवर: नड्डा</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 15:08:19 +0530</pubDate>
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