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                <title>Conflict - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>इजराइल सीमा पर संघर्ष में घायल फिलिस्तीनी युवक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[गाज़ा (एजेंसी) इजराइल की सीमा से सटे पूर्वी गाजा सीमा पर 11 दिन पहले हुयी गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय फिलिस्तीनी युवक की रविवार को मौत हो गयी। सूत्रों के अनुसार गाजा में फिलिस्तीनी नागरिक संपर्क कार्यालय को इजरायल की ओर से सूचित किया गया कि दक्षिणी गाजा सीमा में रफाह शहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/palestinian-youth-dies-in-conflict-over-israel-border/article-8548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/gaza_1526335156_618x347.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गाज़ा (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इजराइल की सीमा से सटे पूर्वी गाजा सीमा पर 11 दिन पहले हुयी गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय फिलिस्तीनी युवक की रविवार को मौत हो गयी। सूत्रों के अनुसार गाजा में फिलिस्तीनी नागरिक संपर्क कार्यालय को इजरायल की ओर से सूचित किया गया कि दक्षिणी गाजा सीमा में रफाह शहर के निवासी इस्हात इश्तयावी को एक इजरायली अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसकी मृत्यु हो गयी। इजराइल की सेना ने 3 अप्रैल को बताया था कि दक्षिण-पूर्व गाजा सीमा पर तीन फिलिस्तीनी युवकों ने कथित रूप से इजराइल की सीमा में घुसने की कोशिश की थी जिसमें से एक युवक गोली लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था। पिछले साल 30 मार्च को शुरू हुए “द ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न” आंदोलन के बाद से इजराइल और फिलिस्तीनी की सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुयी है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Apr 2019 10:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायली सेना से संघर्ष में दो फिलिस्तीनी मरे, कई घायल</title>
                                    <description><![CDATA[गाजा 09 फरवरी (एजेंसी) विवादित गाजा पट्टी के पास इजरायली सीमा के निकट शुक्रवार को अपराह्न में इजरायली सेना की गोलीबारी में दो फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों की मौत हो गयी तथा कई अन्य घायल हो गये। गाजा स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल केद्रा ने शनिवार को बताया कि पूर्वी गाजा में इजरायली सेना की गोलीबारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>गाजा 09 फरवरी (एजेंसी) </strong></p>
<p style="text-align:justify;">विवादित गाजा पट्टी के पास इजरायली सीमा के निकट शुक्रवार को अपराह्न में इजरायली सेना की गोलीबारी में दो फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों की मौत हो गयी तथा कई अन्य घायल हो गये। गाजा स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल केद्रा ने शनिवार को बताया कि पूर्वी गाजा में इजरायली सेना की गोलीबारी में हमजा इश्तिवी (18) की मौत हो गई। इससे पहले सुबह में इजरायली सीमा के निकट दक्षिणी गाजा पट्टी के खान युनिस शहर के पूर्वी इलाके में इजरायली सेना की गोलीबारी में हसन शलाबी (14) की मृत्यु हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हाेंने बताया कि पूर्वी गाजा में झड़पों के दौरान इजरायली सेना की गोलीबारी में 17 लोगों से अधिक घायल हुए हैं। इनमें से अधिकांश घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ अन्य का मौके पर चिकित्साकर्मी इलाज करते देखे गये। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष मार्च से हरेक सप्ताह गाजापट्टी के विभिन्न इलाकों में ‘वापसी महामार्च’ नाम से इजरायल के खिलाफ विरोधी प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। इसी के तहत शुक्रवार को अपराह्न में 46वीं रैली का आयोजन किया गया था जिसके दौरान इजरायली सेना के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें हुयीं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पूर्वी गाजा पट्टी और इजरायल सीमा के बीच फिलिस्तीनी झंडे लहराए, इजरायल विरोधी नारे लगाए और सीमा पर तैनात सैनिकों पर पथराव किये। जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। सैनिकों ने सीमा के पास पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार गत मार्च के बाद से इजरायल के सैनिकों ने 250 से अधिक फिलिस्तीनियों की हत्या की है और 26,000 अन्य को घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/two-palestinians-die-in-conflict-with-israeli-army-many-injured/article-7597</link>
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                <pubDate>Sat, 09 Feb 2019 11:03:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिर्जापुर में लाठी-डण्डे से पीटकर महिला की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[कुत्ते का शव फैंकने को लेकर हुआ विवाद मिर्जापुर, एजेंसी। उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के पडरी क्षेत्र में लाठी-डण्डे से पीट पीटकर एक महिला की हत्या कर दी गयी।  पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि मुल्हवा गांव में राम प्रसाद के मकान के पीछे कुछ लोगों ने एक कुत्ते का शव फेंक दिया गया था। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>कुत्ते का शव फैंकने को लेकर हुआ विवाद</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मिर्जापुर, एजेंसी।</strong> उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के पडरी क्षेत्र में लाठी-डण्डे से पीट पीटकर एक महिला की हत्या कर दी गयी।  पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि मुल्हवा गांव में राम प्रसाद के मकान के पीछे कुछ लोगों ने एक कुत्ते का शव फेंक दिया गया था। इसको लेकर राम प्रसाद की पत्नी मुनरा(60) बुुधवार की रात गालीगलौज करने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकाे लेकर गांव के ही दो लोगों ने लाठी-डण्डे से पीटकर उसे गम्भीर रुप से घायल कर दिया। परिजन गम्भीर हालत में उसे अस्पताल ले गये जहां उसकी मृत्यु हो गयी।  परिजनों की तहरीर पर नामजद दो लाेगों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस तैनात कर दी गयी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अमेठी में वृद्ध की गला रेेतकर हत्या</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> उत्तर प्रदेश में अमेठी के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में धारदार हथियार से गला रेतकर एक वृद्ध की हत्या कर दिये जाने मामला प्रकाश में आया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अढ़नपुर गांव निवासी रामदेव(60) बुधवार की रात आम के बाग में रखवाली करने गया था। सुबह शौच के लिए निकले ग्रामीणों ने रामदेव का खून में लथपथ शव देखा। उसके गले और शरीर पर धारदार हथियार के निशान मिले।  ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि हत्या के कारणों की जांच की जा रही है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जायेगी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 14:51:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निकारागुआ संकट : हिंसा के बाद संघर्षविराम पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को देश में जांच करने की मंजूरी मानागुआ (वार्ता): मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ में पिछले कुछ सप्ताह से जारी हिंसा के बाद सरकार और विपक्षी समूहों के बीच संघर्षविराम को लेकर सहमति हो गई है। हिंसक घटनाओं में 170 लोग मारे जा चुके हैं। बीबीसी न्यूज ने शनिवार को यह जानकारी दी। हिंसक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/nicaragua-crisis-conflict-on-ceasefire-after-violence/article-4242"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/hinsa-2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को देश में जांच करने की मंजूरी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानागुआ (वार्ता):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ में पिछले कुछ सप्ताह से जारी हिंसा के बाद सरकार और विपक्षी समूहों के बीच संघर्षविराम को लेकर सहमति हो गई है। हिंसक घटनाओं में 170 लोग मारे जा चुके हैं। बीबीसी न्यूज ने शनिवार को यह जानकारी दी। हिंसक घटनाओं की जांच के लिए सच्चाई आयोग के गठन तथा अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को देश में जांच करने की मंजूरी भी सरकार ने दे दी है। राजधानी मानागुआ में हुई इस आशय की बातचीत की मध्यस्थता रोमन कैथोलिक चर्च ने की थी।</p>
<h1 style="text-align:center;">सभी पक्षों द्वारा हिंसा और धमकियों को तत्काल<br />
समाप्त किया जाना चाहिए</h1>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा की सरकार की ओर से पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में कटौती किये जाने के बाद गत 19 अप्रैल से सरकार के विरोध में प्रदर्शन शुरु हुए थे। इन कटौतियों के निर्णय को बाद में वापस ले लिया गया लेकिन ओर्टेगा सरकार के विरोध में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये। सरकारी अधिकारियों, विपक्षी नागरिक समाज समूहों और कैथोलिक पादरियों ने कहा कि सभी पक्षों द्वारा हिंसा और धमकियों को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई अायोग सभी मौताें और हिंसक गतिविधियों की जांच के साथ-साथ उसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान भी करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उच्चायुक्त, मानवाधिकारों पर अंतर-अमेरिकी आयोग (आईएसीएचआर) और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों को निकारागुआ में जांच में मदद के लिए आमंत्रित किया जाएगा। आईएसीएचआर ने गत माह निकारागुआ दौरे के दौरान यहां प्रदर्शनों में व्यापक पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायत की थी। वर्ष 2007 से सत्ता में आये श्री ओर्टेगा के लिए गत दो माह से जारी विरोध प्रदर्शन गंभीर चुनौती के रुप में उभर कर सामने आई है। उनके आलोचक उनपर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/nicaragua-crisis-conflict-on-ceasefire-after-violence/article-4242</link>
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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 09:07:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8220;अदालत से बाहर हो बाबरी मजिस्जद/राम मंदिर विवाद का हल&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु (एजेंसी)। आध्यात्मिक गुरु और ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग फॉउंडेशन’स्थापक श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि, बाबरी मस्जिद/राम जन्म भूमि के विवाद का हल अदालत के बजाए इसके बाहर निकाला जाना चाहिए ये। इस मुद्दे पर फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के ख़िलाफ़ चार सिविल सूट में दायर 13 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/outside-the-court-solved-the-babri-mazid-and-ram-mandir-conflict/article-3778"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)। </strong>आध्यात्मिक गुरु और ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग फॉउंडेशन’स्थापक श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि, बाबरी मस्जिद/राम जन्म भूमि के विवाद का हल अदालत के बजाए इसके बाहर निकाला जाना चाहिए ये। इस मुद्दे पर फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के ख़िलाफ़ चार सिविल सूट में दायर 13 अपीलों की सुनवाई चल रही है। इस मामले को तीन जजों की खंडपीठ सुन रही है जिसमें चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नाज़ीर शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुक़दमे की सुनवाई तेज़ी से हो रही है। समझा जाता है कि अक्टूबर में अपने रिटायरमेंट से पहले मुख्य जस्टिस दीपक मिश्रा इस पर फ़ैसला सुना सकते हैं। 62 वर्षीय योग गुरु अदालत के बाहर पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश के सिलसिले में हिन्दू और मुस्लिम नेताओं से मिलते रहे हैं। बेंगलुरु के पास ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के अपने आश्रम में बीबीसी से एक ख़ास मुलाक़ात में उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रंग ला रही हैं। उनका दावा है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के 500 मज़हबी नेताओं और बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात की है जो उनके सुझाव से सहमत हैं। लेकिन मुक़दमे के एक ख़ास पक्ष सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की हमेशा से ये दलील रही है कि वो केवल अदालत के फ़ैसले को ही स्वीकार करेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 12:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>साइबर यूनिट पर पीछे हटे डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप ने संघर्ष विराम समझौते पर किया ट्वीट वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के साथ एक साइबर सुरक्षा इकाई के गठन का सुझाव देने के बाद इससे पीछे हट गए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी वार्ता के बाद इसे बढ़ावा देने के बात करने के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/donald-trump-backfoot-on-cyber-unit/article-2158"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/trump.jpg" alt=""></a><br /><h2>ट्रंप ने संघर्ष विराम समझौते पर किया ट्वीट</h2>
<p><strong>वॉशिंगटन।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के साथ एक साइबर सुरक्षा इकाई के गठन का सुझाव देने के बाद इससे पीछे हट गए।</p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी वार्ता के बाद इसे बढ़ावा देने के बात करने के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दोनों देशों की साझा साइबर सुरक्षा यूनिट संभव है। ट्रंप ने कहा कि तथ्य यह है कि राष्ट्रपति पुतिन और</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने साइबर सुरक्षा इकाई पर चर्चा की, इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे लगता है कि यह हो सकता है। ऐसा नहीं हो सकता।  सीरिया में अमेरिका और रूस के बीच संघर्ष विराम समझौते पर किए गए एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि यह हो सकता था और इसे किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 00:22:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीमा विवाद के बहाने उन्माद में चीन</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक माह से सिक्किम की सीमा पर जारी तनाव से चीन लगातार उन्मादी तेवर दिखा रहा है। उसकी यह बौखलाहट इसलिए भी है, क्योंकि भारत भी पीछे हटने की बजाय सख्ती बरत रहा है। लिहाजा चीनी विदेश मंत्रालय में जहां पंचशील समझौता तोड़ने का आरोप भारत पर मढ़ा गया है, वहीं चीन का अंग्रेजी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/stress-on-the-border-of-sikkim/article-2074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/chaina-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले एक माह से सिक्किम की सीमा पर जारी तनाव से चीन लगातार उन्मादी तेवर दिखा रहा है। उसकी यह बौखलाहट इसलिए भी है, क्योंकि भारत भी पीछे हटने की बजाय सख्ती बरत रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा चीनी विदेश मंत्रालय में जहां पंचशील समझौता तोड़ने का आरोप भारत पर मढ़ा गया है, वहीं चीन का अंग्रेजी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ भारत को निरंतर गीदड़ भभकी देने में लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के भारत में स्थित राजदूत ने यहां तक कह दिया है कि भारत की सेना पीछे नहीं हटी, तो सीमा पर चल रहे विवाद के परिप्रेक्ष्य में चीन सैन्य विकल्प का रास्ता भी चुन सकता है, लेकिन यह भारत को तय करना है कि वह शांति चाहता है अथवा सैन्य विकल्प।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी संपादकीय में उन्मादी तेवर दिखाते हुए लिखा है कि भारत को इस बार 1962 के युद्ध से भी ज्यादा हानि उठानी पड़ सकती है। चीन के इस रुख से साफ है कि चीन बीच का रास्ता निकालने की बजाय केवल अपनी शर्त थोपने का इच्छुक है।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा विवाद चीन की तरफ से डोकलम क्षेत्र में सामरिक सड़क के निर्माण को लेकर है। डोकलम क्षेत्र को चीन ने चीनी नाम डोगलांग दिया है, जिससे यह क्षेत्र उसकी विरासत का हिस्सा लगे। इस क्षेत्र को लेकर चीन और भूटान के बीच कई दशकों से विवाद जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन इस पर अपना मालिकाना हक जताता है, जबकि वास्तव में यह भूटान के स्वामित्व का क्षेत्र है। चीन सड़क के बहाने इस क्षेत्र में स्थाई घुसपैठ की कोशिश में है। जबकि भूटान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन अर्से से इस कवायद में लगा है कि चुंबा घाटी, जोकि भूटान और सिक्किम के ठीक मध्य में सिलीगुड़ी की ओर 15 किलोमीटर की चौड़ाई के साथ बढ़ती है, उसका एक बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण के बहाने हथिया ले।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने इस मकसद की पूर्ति के लिए भूटान को यह लालच भी दिया था, कि वह डोकलम पठार का 269 वर्ग किलोमीटर भू-क्षेत्र चीन को दे दे और उसके बदले में भूटान के उत्तर पश्चिम इलाके में लगभग 500 वर्ग किलोमीटर भूमि ले ले।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन 2001 में जब यह प्रस्ताव चीन ने भूटान को दिया था, तभी वहां के शासक जिग्में सिग्ये वांगचूक ने भूटान की राष्ट्रीय विधानसभा में यह स्पष्ट कर दिया था कि भूटान को इस तरह का कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है। छोटे से देश की इस दृढ़ता से चीन आहत है। इसलिए घायल सांप की तरह वह अपनी फुंकार से भारत और भूटान को डस लेने की हरकत करता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और भूटान के बीच 1950 में हुई संधि के मुताबिक भारतीय सेना की एक टुकड़ी भूटान की सेना को प्रशिक्षण देने के लिए भूटान में हमेशा तैनात रहती है। इसी कारण जब चीन, भूटान और सिक्किम सीमा के त्रिकोण पर सड़क निर्माण को आगे बढ़ा रहा था, तब भूटान ने इसे अपनी भौगोलिक अखंडता एवं संप्रभुता पर हस्तक्षेप माना।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजतन संधि के अनुसार भारतीय सेना का दखल अनिवार्य हो गया। सेना ने भी सड़क निर्माण का कार्य रोकने में शक्ति का प्रयोग न करते हुए, मानव श्रृंखला बनाकर कार्य बाधित किया। किसी विवाद को तत्काल रोकने का शालीनता से भरा इससे अच्छा कोई और उपाय सीमा पर संभव ही नहीं था? बावजूद चीन का सरकारी अखबार और विशेषज्ञ इस उदार स्थिति को युद्ध की पूर्व भूमिका बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मई 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कुशल कूटनीति के चलते सिक्किम भारत का हिस्सा बना था। सिक्किम ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसकी चीन के साथ सीमा निर्धारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सीमा 1898 में चीन से हुई संधि के आधार पर सुनिश्चित की गई थी। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन और ब्रिटिश भारत के बीच हुई संधि को 1959 में एक पत्र के जरिए स्वीकार कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन में प्रधानमंत्री झोऊ एनलाई थे। इसके बाद भारत में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, जो नेहरू के पत्र की स्वीकरता को द्विपक्षीय संधि की तरह ढोती रही हैं। अब राजग की सरकार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जो अब कांग्रेस के ऐसे आश्वासनों को मानने को कतई तैयार नहीं हैं, जो वस्तुस्थिति को टालने वाले हों।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि 1998 में चीन और भूटान सीमा-संधि के अनुसार दोनों देश यह शर्त मानने को बाध्य है, जिसमें 1959 की स्थिति बहाल रखनी है। बावजूद चीन इस स्थिति को सड़क के बहाने बदलने को आतुर तो है ही, युद्ध के हालात भी उत्पन्न कर रहा है। भारत इस विवादित क्षेत्र डोकाला, भूटान डोकलम और चीन डोगलांग कहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ऐसा क्षेत्र है, जहां आबादी का घनत्व न्यूनतम है। पिछले एक दशक से यहांं पूरी तरह शांति कायम थी, लेकिन पड़ोसियों से हरकत की प्रवृत्ति रखने के आदी चीन ने सड़क का निर्माण कर इस शांत क्षेत्र में अशांति ला दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की जून-2016 में आई रिपोर्ट ने भारत को सचेत किया था कि चीन भारत से सटी हुई सीमाओं पर अपनी सैन्य शक्ति और सामरिक आवागमन के संसाधन बढ़ा रहा है। अमेरिका की इस रिपोर्ट को भारत ने तत्काल गंभीरता से लेकर आपत्ति जताई होती तो शायद मौजूदा हालात निर्मित नहीं होते।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन के बीच अक्साई चिन को लेकर करीब 4000 किमी और सिक्किम को लेकर 220 किमी सीमाई विवाद है। तिब्बत और अरुणाचल में भी सीमाई हस्तक्षेप कर चीन विवाद खड़ा करता रहता है। 2015 में उत्तरी लद्दाख की भारतीय सीमा में घुसकर चीन के सैनिकों ने अपने तंबू गाढ़कर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तब दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 5 दिन तक चली वार्ता के बाद चीनी सेना वापस लौटी थी। चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाकर पानी का विवाद भी खड़ा करता रहता है। दरअसल चीन विस्तारवादी तथा वर्चस्ववादी राष्ट्र की मानसिकता रखता है। इसी के चलते दक्षिण चीन सागर पर एकाधिकार को लेकर वियतनाम, फिलीपींस, ताइवान और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ उसकी ठनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला अंतरराष्ट्रीय पंचायत में भी लंबित है। बावजूद चीन अपने अड़ियल रवैये से बाज नहीं आता है। दरअसल उसकी मंशा दूसरे देशों के प्राकृतिक संसाधन हड़पना है। इसीलिए आज उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को छोड़ ऐसा कोई अन्य देश नहीं है, जिसे चीन अपना पक्का दोस्त मानता हो।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा चीन को यह समझाना जरूरी है कि अब अंतरराष्ट्रीय स्थितियां 1962 जैसी नहीं है और न ही भारत उन दिनों जैसी लाचार स्थिति में है। अब वह एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और नरेंद्र मोदी ने अनेक देशों से नए मजबूत राजनयिक संबंध बनाए हैं। बावजूद इस मोर्चे पर राजनयिक सक्रियता की और जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी का पहले यूरोप, फिर अमेरिका और अब इजराइल दौरा होने के साथ, भारत, जापान और अमेरिका की सेनाओं का बंगाल की खाड़ी में साझा मालाबार अभ्यास इसी रणनीति का हिस्सा कहा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस युद्धाभ्यास में तीनों देशों के श्रेष्ठतम जंगी बेड़े शामिल होंगे। चीन से फिलहाल दक्षिण-पश्चिम एशिया के भी कई देश खुश नहीं है। गोया, भारत इनसे अच्छे संबंध विकसित करके चीन की कुटिल रणनीति का जबाब दे सकता है। चीन के बरक्श भारत-अमेरिका-इजराइल गठबंधन को भी अस्तित्व में लाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन से जापान की नाराजगी जगजाहिर है, लिहाजा जापान भी यदि इस गठजोड़ का हिस्सा बन जाता है तो चीन को दिन में तारे दिखने लग जाएंगे। हालांकि मौजूदा समस्या का समाधान न तो युद्ध में है और न ही लगातार राष्ट्रीय संप्रभुता का झण्डा बुलंद किए रहने में है, गोया, दोनों देशों के बीच संतुलन और शांति बनी रहती है तो यह एशिया ही नहीं समूची दुनिया के लिए बेहतर स्थिति होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 23:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोंगलांग इलाके में तनाव खत्म करना है तो भारतीय सेना को पीछे हटना होगा: चीन</title>
                                    <description><![CDATA[चीन डोकलम इलाके में कर रहा सड़क निर्माण बीजिंग:  सिक्किम से सटे बॉर्डर पर भारत-चीन के सैनिकों के बीच करीब एक महीने से टकराव बरकरार है। मंगलवार को चीन ने इस मुद्दे पर भारत के साथ समझौते की गुंजाइश से साफ इनकार कर दिया। चीन ने इस विवाद को गंभीर बताते हुए सुलझाने की जिम्मेदारी भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/to-end-the-tension-in-the-dongang-area-the-indian-army-will-have-to-retreat-china/article-1941"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/china.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">चीन डोकलम इलाके में कर रहा सड़क निर्माण</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग: </strong> सिक्किम से सटे बॉर्डर पर भारत-चीन के सैनिकों के बीच करीब एक महीने से टकराव बरकरार है। मंगलवार को चीन ने इस मुद्दे पर भारत के साथ समझौते की गुंजाइश से साफ इनकार कर दिया। चीन ने इस विवाद को गंभीर बताते हुए सुलझाने की जिम्मेदारी भारत पर डाल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का मानना है कि अगर डोंगलांग इलाके में तनाव खत्म करना है तो भारतीय सेना को पीछे हटना होगा। वरना चीनी सैनिक कार्रवाई करेंगे। चीन उलटे ही भारतीय सेना पर घुसपैठ का आरोप लगा रहा है। चीनी अखबार की प्रतिक्रिया से एक बात तो साफ है कि चीन भारत के साथ जंग के मूड में है। चीन डोकलम इलाके में सड़क निर्माण कर रहा है, जिसका विरोध करने के लिए भारत भूटान को उकसा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारत भूटान को चीन के खिलाफ विरोध के लिए उकसा रहा</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत का मकसद चीन के डोंगलांग इलाके को विवादित क्षेत्र में तब्दील करना है और चीनी निर्माण कार्य को रोकना है। चीनी अखबार ने कहा कि भारत को पहले आइना देखना चाहिए। उसके पास चीनी सैनिकों के घुसपैठ के सबूत नहीं हैं। इसके अलावा चीन के यांग सिलिंग अखबार ने कहा कि भारत भूटान को चीन के खिलाफ विरोध के लिए उकसा रहा है। मालूम हो कि चीनी सेना ने डोकलम इलाके में घुसपैठ की थी और दो बंकर तैनात कर दिए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> इस विवाद से अगर सही तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे ‘जंग’ छिड़ सकती है</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत में चीन के एम्बेसडर लू झाओहुई ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा गेंद भारत के पाले में है और भारत को यह तय करना है कि किन ऑप्शंस को अपनाकर इस टकराव को खत्म किया जा सकता है। ऑफिशियल चीनी मीडिया और थिंक टैंक के जंग को लेकर दिए स्टेटमेंट पर उन्होंने कहा कई ऑप्शंस पर बात हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आपकी सरकार की पॉलिसी (सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करना है या नहीं) पर डिपेंड करता है।इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया और थिंक टैंक ने कहा था कि इस विवाद से अगर सही तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे ‘जंग’ छिड़ सकती है। चीन सरकार इस बात को लेकर बेहद साफ है कि वह इस टकराव का शांतिपूर्ण हल चाहती है और इसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी एक शर्त है। चीन और भारत के बीच इस शर्त को पूरा करने के बाद ही बातचीत हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/to-end-the-tension-in-the-dongang-area-the-indian-army-will-have-to-retreat-china/article-1941</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 23:01:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन के सामने कमजोर नहीं भारत</title>
                                    <description><![CDATA[सिक्किम में चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन के उस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, जिसमें वह भारत को इतिहास से सबक लेने की बात कह रहा है। बेशक भारत चीन के साथ एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और प्रगाड़ आर्थिक संबंधों के मद्देनजर सैनिक संघर्ष अक्सर को नेपथ्य में रख दिया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-is-not-weak-against-china/article-1890"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/chaina.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सिक्किम में चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन के उस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, जिसमें वह भारत को इतिहास से सबक लेने की बात कह रहा है। बेशक भारत चीन के साथ एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और प्रगाड़ आर्थिक संबंधों के मद्देनजर सैनिक संघर्ष अक्सर को नेपथ्य में रख दिया जाता है, लेकिन चीन की सीमा विस्तार की नीति एवं अविश्वास के इतिहास को देखते हुए भारत को हमेशा अपने पड़ोसी ड्रेगन से सतर्क रहने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भारत चीन के बीच हालिया विवाद की शुरूआत तब होती है, जब चीन यह दावा करता है कि भारत ने डोकलाम सेक्टर के जोम्पलरी इलाके में 4 जून को सड़क निर्माण कर रहे उसके सैनिकों को रोक दिया और उनके साथ हाथापाई भी की। इसके बाद अगले दिन चीनी सैनिकों ने भूटान की सीमा में स्थित भारत के दो अस्थाई बंकर गिरा दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के चलते हालात इस वक्त इतने तनावपूर्ण हैं कि दोनों देशों के करीब 1000-1000 सैनिकों ने इस इलाके में डेरा डाल लिया है। भारत इस तथ्य को भी नजर अंदाज नहीं कर सकता कि इस पूरे घटना क्रम को चीन की मीडिया बहुत आक्रामक रूप से प्रस्तुत कर रही है। वहां के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने तो चीनी सरकार को भारत को सबक सिखाने तक की सलाह दे डाली है। किसी भी सैनिक टकराव की सम्भावना के चलते भारतीय सेना की 17वीं डिवीजन के जनरल आॅफिसर कमांडिंग खुद इस मामले को देख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भूटान के साथ भारत का समझौता होने के कारण उसकी संप्रभुता की जिम्मेदारी भारत की ही है और डोकलाम पठार का क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह वही क्षेत्र है जहां पर भारत, चीन और भूटान की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं आपस में मिलती हैं और भूटान की चुम्बी घाटी भी यहीं स्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुम्बी घाटी ही वह इलाका है, जहां से पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले इलाके के रूप में सिलीगुड़ी ही एक मात्र संकरी पट्टी है। यानी अगर इस इलाके पर चीन का कब्जा हो गया, तो वह बड़ी आसानी से पूर्वोत्तर को शेष भारत से काट सकता है। चुम्बी घाटी से भारत की यह दुखती रग महज 50-60 किलोमीटर ही दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत नहीं चाहता है कि चीन डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण के जरिये अपनी स्थिति मजबूत करे, क्योंकि डोकलाम के पठार पर चीन की मजबूत स्थिति भूटान और भारत दोनों ही देशों की संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। यही वजह है कि भारतीय सेना इस घटना पर पूरा एहतियात और चौकसी बरत रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन की आक्रामकता थोड़ा परेशान जरूर कर रही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत चीन के सामने कमजोर पड़ता दिख रहा है। चीन जिस 1962 के परिणामों की बात कर रहा है, भारत अब वो नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के रक्षामंत्री अरुण जेटली भी इसी बात की तस्दीक कर रहे हैं कि भारत अब 2017 का भारत है। जहां एक ओर भारत सामरिक दृष्टि से मजबूत है, वहीं भारत के आर्थिक सम्बन्ध चीन के साथ इतने प्रगाढ़ हो गए हैं कि चीन भारत के साथ सैनिक संघर्ष करके अपनी आर्थिक कमर नहीं तोड़ सकता। चीन भारत का सबसे बड़ा आयातक देश है और भारत का सबसे ज्यादा व्यापार घाटा भी चीन के साथ ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को अपने सस्ते और घटिया उत्पाद बेचने के लिए भारत से अच्छा बाजार भी नहीं मिलेगा। भारत के कुल निर्यात में चीन का हिस्सा सिर्फ साढ़े तीन प्रतिशत ही होता है, जबकि आयात में यह हिस्सा 15 प्रतिशत से भी अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत विश्व व्यापार संगठन का सदस्य होने के नाते चीनी उत्पाद के आयात पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकता, लेकिन युद्ध जैसी किसी भी टकराव की स्थिति में भारत चीन पर प्रतिबन्ध लगा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए चीन को सिर्फ इसलिए नहीं इतराना चाहिए कि उसकी सैन्य संख्या भारत से अधिक है।यह सच है कि भारत एक परमाणु संपन्न देश है और मिसाइल टेक्नोलॉजी में भी भारत अब बहुत आगे बढ़ चुका है। हमारे पास उच्च तकनीकि इंटर बैलिस्टिक मिसाइल भी हैं जोकि किसी भी आपात स्थिति में भारत की रक्षा करने में समर्थ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अगर भारत के पड़ोस में पाकिस्तान और चीन है, तो चीन के पड़ोस में भी भारत के दो मित्र राष्ट्र रूस और जापान हैं जिनके साथ चीन के सम्बन्ध बेहतर नहीं हैं। भले ही चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोककर भारत को सख्त सन्देश दिया हो, लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह की बचकाना हरकतों से चीन का पर्यटन ही प्रभावित होगा</p>
<p style="text-align:justify;">और भारत में भी बुद्धा सर्किट के चलते बढ़ी संख्या में चीनी पर्यटक धार्मिक दृष्टिकोण से भारत आते हैं। हांलाकि भारत चीन के प्रति किसी भी विवाद को सांझा वार्ता के मंच पर सुलझाने का प्रयास करता है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रूस यात्रा में कहा था कि दुनिया पहले के मुकाबले कहीं अधिक नजदीक आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक-दूसरे पर निर्भरता और बढ़ गई है तथा इस बदलाव ने सीमा विवाद के बावजूद भारत और चीन के लिए यह आवश्यक बना दिया है कि वे व्यापार एवं निवेश में सहयोग करें। प्रधानमंत्री ने जिक्र किया था कि यह सच है कि चीन के साथ हमारा सीमा विवाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन पिछले 40 साल में सीमा विवाद में एक भी गोली नहीं चली है। भारत की शांतिपूर्ण विवाद निपटारे की इस पहल को चीन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यद्यपि भारत विवाद को शांति पूर्ण तरीके से ही निपटाना चाहता है, परन्तु वह किसी भी स्थिति से निपटने में पूर्ण समर्थ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-पार्थ उपाध्याय</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 22:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की धमकी पर भारत ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत अब 1962 जैसा कमजोर नहीं विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण से प्रभावित होगी भारत की सुरक्षा नई दिल्ली/बीजिंग। भारत सरकार ने सिक्किम के समीप विवादित दोकलम क्षेत्र में चीन द्वारा सड़क का निर्माण किए जाने पर शुक्रवार को गहरी चिंता जताई और चीन को यह बता दिया है कि ऐसी कार्रवाई से मौजूदा स्थिति […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-warns-on-threat-of-china/article-1803"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/india-5.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">भारत अब 1962 जैसा कमजोर नहीं</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण से प्रभावित होगी भारत की सुरक्षा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/बीजिंग।</strong> भारत सरकार ने सिक्किम के समीप विवादित दोकलम क्षेत्र में चीन द्वारा सड़क का निर्माण किए जाने पर शुक्रवार को गहरी चिंता जताई और चीन को यह बता दिया है कि ऐसी कार्रवाई से मौजूदा स्थिति में पर्याप्त बदलाव आएगा जिसका भारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के जवाब के बीच वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भी चीन को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चीन दूसरे देश की जमीन पर कब्जा कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और भूटान के बीच सुरक्षा का समझौता है, इसलिए भारत का चिंतित होना स्वभाविक है। चीन द्वारा भारत को 1962 का युद्ध याद दिलाए जाने पर जेटली ने दो टूक कहा कि 1962 और 2017 में काफी फर्क है। भारत की यह प्रतिक्रिया इलाके में भारतीय और चीनी बलों के बीच उत्पन्न गतिरोध के बाद आया है। चीन ने सार्थक बातचीत करने से पहले सिक्किम क्षेत्र से भारतीय जवानों को वापस बुलाने की शर्त रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने जवाब में कहा कि यह जरूरी है कि संबंधित सभी पक्ष अत्यंत संयम बरतें और यथास्थिति में एक तरफा तौर पर बदलाव नहीं करने की द्विपक्षीय सहमति का पालन करें। मंत्रालय ने कहा कि यह भी महत्वपूर्ण है कि विशेष प्रतिनिधि प्रक्रिया के जरिये भारत और चीन के बीच बनी सहमति का दोनों पक्ष ईमानदारी से पालन करें। विदेश मंत्रालय ने 16 जून से क्रमबद्ध तरीके से उन घटनाक्रमों का भी जिक्र किया है, जब पीएलए का निर्माण दल दोकलम क्षेत्र में घुसा और उसने सड़क बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2017 07:57:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की धमकी- बॉर्डर से तुरंत सेना हटाए भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सिक्किम बॉर्डर पर भारत और चीन की सेना आमने सामने खड़ी हैं। इसके चलते हालात की समीक्षा करने आर्मी चीफ बिपिन रावत गुरुवार को सिक्किम पहुंचे। इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने भारत से अपनी सेना को तुरंत वापस बुलाने की मांग की है। कांग ने कहा कि हम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-threatens-to-india-for-removing-army-from-border/article-1755"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सिक्किम बॉर्डर पर भारत और चीन की सेना आमने सामने खड़ी हैं। इसके चलते हालात की समीक्षा करने आर्मी चीफ बिपिन रावत गुरुवार को सिक्किम पहुंचे। इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने भारत से अपनी सेना को तुरंत वापस बुलाने की मांग की है। कांग ने कहा कि हम भारत से अपनी सेना को तुरंत वापस बुलाने की मांग करते हैं। दोनों पक्षों के बीच समझौते और बातचीत के लिए यह पूर्व शर्त है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कुछ दिनों पहले शुरू हुआ था विवाद</h2>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों सिक्किम सेक्टर के डोंगलांग में चीन की ओर से सड़क बनाने का भारतीय सैनिकों ने विरोध किया। इसके बाद चीनी सैनिकों ने सिक्किम सेक्टर में भारत के दो बंकरों को तोड़ दिया। चीन इसे अपनी सीमा में बता रहा है। भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना की इस कार्रवाई का विरोध किया। तब से अबतक दोनों देशों के हजारों सैनिक आमने-सामने खड़े हैं। चीन बॉर्डर पर भारत ने अपनी तैयारियां मजबूत की हैं और पुराने बंकरों की जगह नए बंकरों की इंडियन आर्मी के निर्माण कार्यों को चीन पचा नहीं पा रहा है और इसे उकसाऊ कार्रवाई बता रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा- उम्मीद है कि देश अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करें। चीन-भूटान सीमा निरूपित नहीं है, किसी तीसरे पक्ष को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी या कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। चीन ने भारत पर गुप्त एजेंडे का आरोप लगाया और कहा कि अगर कोई तीसरा पक्ष, गुप्त एजेंडे से, हस्तक्षेप करता है तो यह भूटान की संप्रभुता का अपमान है। हम ऐसा नहीं देखना चाहते क्योंकि भूटान अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा संप्रभुता का हकदार है। चीन ने सिक्किम सेक्टर में सड़क निर्माण को वैध बताया और जोर दिया कि यह चीनी क्षेत्र में बनाया जा रहा है जो न तो भारत का और न ही भूटान का है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चीन बौखलाया</h3>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से भी चीन काफी बौखलाया हुआ है। ट्रंप-मोदी की दोस्ती की तस्वीरों के बाद चीन की प्रतिक्रिया आई थी कि भारत गुटनिरपेक्षता की अपनी नीति छोड़कर अमेरिका के साथ चीन के खिलाफ खड़ा हो रहा है ये भारत के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2017 04:55:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन की दोगली नीति , बॉर्डर पर फिर दिखाई दादागिरी</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग/नई दिल्ली। चीन की आर्मी ने हाल ही में सिक्किम सेक्टर में घुसने की कोशिश की और भारतीय जवानों से हाथापाई की। इस दौरान चीन के सैनिकों ने हमारे 2 बंकर भी तोड़ दिए। चीनी सैनिकों को रोकने के लिए भारतीय सैनिकाें को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने लाइन आॅफ एक्चुअल कंट्रोल के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/stress-on-border-india-china-face-to-face/article-1677"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/border-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग/नई दिल्ली।</strong> चीन की आर्मी ने हाल ही में सिक्किम सेक्टर में घुसने की कोशिश की और भारतीय जवानों से हाथापाई की। इस दौरान चीन के सैनिकों ने हमारे 2 बंकर भी तोड़ दिए। चीनी सैनिकों को रोकने के लिए भारतीय सैनिकाें को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने लाइन आॅफ एक्चुअल कंट्रोल के पास ह्यूमन चेन बनाकर चीनियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे धक्का-मुक्की करते रहे। लेकिन चीन ने सोमवार देर रात उलटा भारतीय सैनिकों पर ही बॉर्डर क्रॉस करने का आरोप लगा दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मानसरोवर यात्रा को किया बंद</h3>
<p style="text-align:justify;">चीन ने मानसरोवर यात्रा को बंद कर दिया है। चीन की ओर से नाथुला दर्रे रास्ते को बंद कर दिया गया है। अभी इस पर भारत के विदेश मंत्रालय का कोई बयान नहीं आया है। इससे पहले खबर थी कि इस मुद्दे पर अभी दोनों देशों में बात चल रही है। चीन ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक भारत सिक्किम बॉर्डर से अपनी सेना नहीं हटाएगा तब तक वह इस मार्ग को नहीं खोलेगा। बता दें कि अभी भी लगभग 6 गुटों को यात्रा करनी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है विवाद</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का कहना है कि सीमा विवाद वाला क्षेत्र महज 2000 किलोमीटर का है। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है। चीन के साथ भारत का विवाद 64 साल पुराना है। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेशनल बॉर्डर का क्लियर न होना है। भारत मानता आ रहा है कि चीन जानबूझकर इस विवाद का हल नहीं कर रहा है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/stress-on-border-india-china-face-to-face/article-1677</link>
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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2017 05:07:42 +0530</pubDate>
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