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                <title>प्रेरणास्त्रोत : हिंसा पर विजय</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजा अग्रसेन एक सफल राजा थे। वे न्याय करने में कुशल और प्रजा का पालन ईमानदारी से करते थे। एक बार उन्होेंने अनेक राजाओं को युद्ध में पराजित किया। उन्होंने राज्य की सम्पन्नता के लिए यज्ञ का आयोजन किया। उन दिनों यज्ञ में पशु बलि का रिवाज था। अचानक महाराज की नजर यज्ञ की वेदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/victory-over-violence/article-12941"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/victory-on-violence.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">महाराजा अग्रसेन एक सफल राजा थे। वे न्याय करने में कुशल और प्रजा का पालन ईमानदारी से करते थे। एक बार उन्होेंने अनेक राजाओं को युद्ध में पराजित किया। उन्होंने राज्य की सम्पन्नता के लिए यज्ञ का आयोजन किया। उन दिनों यज्ञ में पशु बलि का रिवाज था। अचानक महाराज की नजर यज्ञ की वेदी के निकट बंधे हुए पशु पर पड़ी, जो बलि से बचने के लिए छूटने की कोशिश कर रहा था। उसे छटपटाता देख महाराज के ह्रदय पर वज्रपात हुआ। उन्होंने आदेश दिया कि रस्सी खोल दें। आदेश सुनते ही चारों तरफ खलबली मच गई। पंडितों ने अनिष्ट की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पशु बलि नहीं दी गई तो यज्ञ अधूरा रह जाएगा। महाराज ने उत्तर दिया कि जिस ईश्वर की आराधना के लिए हम यह कार्य कर रहे है, यह मूक पशु भी उसी ईश्वर का पैदा किया हुआ है। भला पिता अपने पुत्र की बलि कैसे मांग सकता है। महाराज ने घोषणा की कि आज के बाद किसी भी यज्ञ में कोई पशु नहीं मारा जाएगा। उन्होंने कहा आज से अहिंसा ही हमारे राज्य का मूल मंत्र होगा। मंत्रियों ने तर्क दिया कि इस बात के प्रचार से पड़ोसी राज्य हमें कायर समझने लगेंगे। महाराजा अग्रसेन ने कहा-‘‘यदि मूक और निरीह पशु की हत्या वीरता है तो हमें ऐसी वीरता नहीं चाहिए।’’</h4>
<h2 style="text-align:justify;">आत्मा का प्रकाश</h2>
<h4 style="text-align:justify;">आत्मा के प्रकाश को भारतीय दर्शन में बहुत महत्त्व दिया गया है। इसे मनुष्य की मुक्ति का उपाय भी माना गया है। एक दिन गुरु से शिक्षा प्राप्त करते-करते एक शिष्य को काफी समय हो गया। देखा तो अँधेरा घिर आया था। शिष्य ने गुरु से कहा कि अँधेरे के कारण रास्ता नहीं सूझ रहा है, मंदिर की सीढ़ियाँ कैसे उतरूँगा। गुरु ने उसके हाथ पर एक दीया रख दिया। लेकिन जैसे ही शिष्य ने पहली सीढ़ी पर पांव रखा, गुरु ने दीया बुझा दिया। शिष्य हतप्रभ रह गया और बोला, ‘यह क्या किया गुरुदेव, गहरा अँधेरा है, सीढ़ियाँ कैसे उतरूँगा?’ इस पर गुरु ने समझाया कि जब एक सीढ़ी पर पैर रख ही दिया तो आगे भी सीढ़ियाँ मिलती चली जाएँगी। दूसरे के दीपक के सहारे जो प्रकाश मिलता है, उससे अपना अँधेरा अधिक बेहतर है। अँधेरे में ही रास्ता खोजा। ऐसा करते-करते तुम्हारे भीतर एक नया दीपक जल उठेगा। अँधेरे में टकराने से, गिरने से , इस असुविधा के बीच से ही तुम्हारी आत्मा निर्मित होगी और प्रकाशित होगी। इस दीपक के सहारे तुम गिरोगे तो नहीं, तुम्हारी आत्मा खो जाएगी। इसीलिए मैंने तुम्हारे हाथ में रखा दीपक बुझा दिया है।</h4>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2020 20:40:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत के भारत के लिए मायने</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने रविवार को हुए 11वें संसदीय चुनाव में लगातार तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की। इस चुनाव में विपक्ष का लगभग सफाया हो गया। हसीना की पार्टी ने 300 में से 276 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं आवामी लीग की सहयोग जातीय पार्टी को 21 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने रविवार को हुए 11वें संसदीय चुनाव में लगातार तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की। इस चुनाव में विपक्ष का लगभग सफाया हो गया। हसीना की पार्टी ने 300 में से 276 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं आवामी लीग की सहयोग जातीय पार्टी को 21 सीटें मिली है। इस तरह सत्तारूढ़ आवामी लीग गठबंधन को 300 में से 288 सीटें मिली, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी(बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन नेशनल यूनिटी फ्रंट के खाते में महज 7 सीटें आई। शेख हसीना की जीत अत्यंत प्रचंड स्तर की रही,यही कारण है कि स्वयं गोपालगंज सीट पर शेख हसीना को 2,29,539 वोट प्राप्त हुए, जबकि विपक्षी बीएनपी के उम्मीदवार को केवल 123 मत प्राप्त हुए। बांग्लादेश में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 151 सीटें चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश की संसद की संरचना: बांग्लादेश की संसद को जातीय संसद कहते हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश की जातीय संसद की सदस्य संख्या 350 है,जिनमें 300 सीटों के लिए मतदान होता है, शेष 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित है। इन 50 सीटों के लिए निर्वाचित 300 प्रतिनिधि एकल समानुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर वोट डालते हैं। अभी एक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव स्थगित होने के कारण 299 सीटों पर मतदान हुआ। इस बीच विपक्ष ने एक बार फिर चुनाव में जबरदस्त धांधली के आरोप लगाए हैं। बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह इसकी जाँच करेगा। बांग्लादेश की राजनीति एक लंबे अर्से से शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूम रही है। उसने 2014 में हुए आम चुनाव का बहिष्कार किया था।बीएनपी अध्यक्ष बेगम खालिद जिया भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में सजा काट रही हंै। उनके बेटे तारिक रहमान को शेख हसीना को जान से मारने के षडयंत्र में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और वे लंदन में निर्वासन में रह रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शेख हसीना और बांग्लादेश का आर्थिक विकास:  बांग्लादेश के चुनाव में शेख हसीना के रिकॉर्ड जीत के बाद विपक्षी दल भले ही धांधली के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आवामी लीग के नेतृत्व में बांग्लादेश ने आर्थिक रूप से अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2008 में हसीना के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है। कपड़ा उद्योग अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ के तौर पर उभरा है। अमेरिका और यूरोप में माँग में भारी कमी के बावजूद वित्त वर्ष 2017-18 के वस्त्र निर्यात के राजस्व में बांग्लादेश ने उल्लेखनीय 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।शेख हसीना की जीत और भारत: भारत की इस चुनाव पर पैनी नजर थी। हालांकि,इस बार इन चुनावों में भारत की सक्रियता नहीं थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम चुनाव 2018 में भारत विरोधी रूख नहीं देखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिहाज से यह बेहद सकारात्मक बदलाव था। वरना बांग्लादेश में कई बार इस्लामिक कट्टरता के पक्षपोषक भारत विरोधी हवा को तूल देते हैं।इस तरह इन चुनावों को भारत-बांग्लादेश के बीच रिश्तों के लिए सुखद संकेत कहा जा सकता है।भारत-बांग्लादेश करीब 4,100 किमी का बॉर्डर साझा करते हैं। भारत की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी में बांग्लादेश प्रमुख देश है। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में भारत का निवेश भी बढ़ा है। तीस्ता नदी को लेकर भी दोनों देशों में बात आगे बढ़ रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा? शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को भारत समर्थक के तौर पर देखा जाता है,जबकि विरोधी खालिदा जिया की पार्टी को इस्लामिक चरमपंथियों को बढ़ावा देने वाला माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश को भारतीय सहयोग: शेख हसीना के अगले कार्यकाल के दौरान भारत के तरफ से न सिर्फ बांग्लादेश को दिये जाने वाले आर्थिक सहयोग में वृद्धि होगी, अपितु जापान के साथ मिलकर भारत हिंद महासागर में जो ढाँचागत परियोजना लगाने की योजना बना रहा है,उसमें बांग्लादेश भी भागीदार होगा। भारत,जापान और बांग्लादेश के बीच दक्षिणी बांग्लादेश में पायरा (बंदरगाह) पोर्ट बनाने की बात काफी आगे बढ़ चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि चीन भी लगातार एक पोर्ट के निर्माण का ठेका हासिल करने के लिए प्रयत्नशील है।वैसे पायरा पोर्ट की एक प्रमुख विशेषता यह है कि भारतीय समुद्र तट से इसकी दूरी काफी कम है और पूर्वोत्तर क्षेत्र को शेष भारत से जोड़ने में यह काफी महत्वपूर्ण रहेगा। पायरा पोर्ट का निर्माण भारत और जापान की तरफ से घोषित एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर(एएजीसी) के तहत किया जाएगा,जिसकी घोषणा दो वर्ष पूर्व दोनों देशों ने की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">एएजीसी को चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट रोड इनीशिएटिव(बीआरआई)परियोजना का जवाब माना जाता है। इस तरह बांग्लादेश में पिछले कुछ वर्षों से कई औद्योगिक परियोजनाओं में मदद के बाद अब भारत बांग्लादेश में पोर्ट विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। इससे भारत की सिलीगुड़ी रूट पर निर्भरता घटेगी। भारत पूर्वोत्तर राज्यों में सामान और अन्य चीजों के लिए सिलीगुड़ी रूट पर निर्भरता घटाना चाहता है। चीन के साथ डोकलाम विवाद का मुख्य कारण सिलीगुड़ी रूट ही रहा है। इसके अतिरिक्त भारत बांग्लादेश तक डीजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम कर रहा है, जो 2020 तक पूरा हो जाएगा। भारत,बांग्लादेश को परमाणु तकनीक में भी सहयोग कर रहा है। स्पष्ट है कि हसीना की वापसी से भारत-बांग्लादेश संबंध के तीन मूल भूत तत्व समेकित आतंकवादी पहल,व्यापार वाणिज्य तथा आत्मविश्वास निर्माण प्रयास के आधार और भी मजबूत होंगे।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:40:34 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इमरान की जीत के मायने</title>
                                    <description><![CDATA[पाक में सेना पर कई सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान में हुए आम चुनावों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। देश में आया बड़ा राजनीतिक बदलाव लोक लहर नहीं बल्कि पाक में सेना पर कई सवाल उठ रहे हैं। चुनावों से पहले जिस तरह बड़ी घटनाएं घटित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/imran-victory-sense/article-5026"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/imran-1.jpg" alt=""></a><br /><h2>पाक में सेना पर कई सवाल उठ रहे हैं।</h2>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान में हुए आम चुनावों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। देश में आया बड़ा राजनीतिक बदलाव लोक लहर नहीं बल्कि पाक में सेना पर कई सवाल उठ रहे हैं। चुनावों से पहले जिस तरह बड़ी घटनाएं घटित हुई इन घटनाओं का राजनीतिक बदलावों से सीधा संबंध है। पूर्व प्रधान मंत्री व मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज शरीफ का जेल जाना, उनके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने जैसी तेजी से घटित हुई घटनाओं से यह साफ नजर आ रहा था कि सेना किस पार्टी को सत्ता की तरफ ले जा रही है।</p>
<h2>इमरान सहित सेना को डर था कि कहीं शरीफ की पार्टी फिर से सत्ता पर काबिज न हो जाए</h2>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इमरान खान सहित सेना को इस बात का डर था कि कहीं शरीफ की पार्टी फिर से सत्ता पर काबिज न हो जाए। यह बात सही भी साबित हुई शरीफ की पार्टी दूसरी बड़ी पार्टी बनी है। मुस्लिम लीग ने वोटो की गिनती में धांधली के आरोप भी लगाए हैं। दूसरी तरफ इमरान लगातार 22 वर्षाें से सत्ता के लिए जूझ रहे थे। इसलिए इमरान ने आतंकवादियों व तालिबानों सहित सभी का समर्थन हासिल किया। इमरान तालिबानों को पख्तून नेता करार देते रहे हैं जबकि नवाज शरीफ की पार्टी व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी बाहरी तौर पर आतंकवाद का विरोध करते रहे हैं, भले ही वो भी अंदरखाते आतंकवाद आगे झुके हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इमरान ने अच्छी राजनीतिक चालें चली हैं। उन्होंने भारत के साथ दोस्ती की बात वोटों से सिर्फ एक दिन पहले की थी तब तक कट्टरपंथियों व आतंकवादियों के समर्थन का लाभ इमरान को चुका था व आतंकवादी अब पीछे हटने लायक भी नहीं थे। नि:संदेह इमरान तेज तर्रार नेता साबित हुए हैं, लेकिन अब यह वक्त ही बताएगा कि उनके तालिबानों के साथ नरमदिली के पैंतरे सिर्फ सत्ता हासिल करने तक सीमित हैं या फिर इन संबंधों का असर सरकार (अगर वह सरकार बनाते हैं) के कार्याें में भी नजर आएगा। नि:संदेह पाकिस्तान के लिए नया राजनीतिक बदलाव एक भविष्य के नए चौराहे के समान है। भारत संबंधी इमरान का स्टैंड पुरानी सरकारों वाला ही है लेकिन अगर आतंकवादी व सेना इमरान पर भारी पड़ते हैं तो यह पाकिस्तान की जनता के लिए विध्वंसकारी व भारत के लिए चिंताजनक होगा।</p>
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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 03:50:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने के बाद भाजपा नेता प्रफुल्लित, तेदेपा ने नैतिक विजय का दावा किया</title>
                                    <description><![CDATA[यह काफी हताशाजनक है कि प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं और भावनाओं को हल्के में ले रहे हैं : नायडू नयी दिल्ली (वार्ता): तेलुगू देशम पार्टी(तेदेपा) की ओर से कल लाेेेकसभा में केन्द्र सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के गिर जाने से जहां भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रफुल्लित मुद्रा में हैं वहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">यह काफी हताशाजनक है कि प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं और भावनाओं को हल्के में ले रहे हैं : नायडू</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेलुगू देशम पार्टी(तेदेपा) की ओर से कल लाेेेकसभा में केन्द्र सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के गिर जाने से जहां भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रफुल्लित मुद्रा में हैं वहीं तेदेपा ने इसे अपनी “नैतिक विजय” बताया है। तेदेपा के लोकसभा में पार्टी नेता टी नरासिम्हम ने शुक्रवार देर रात कहा कि अंतत: लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए एक नैतिक विजय के रूप में रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में इस प्रस्ताव पर मतदान होने के तुरंत बाद तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करते हुए एक ट्वीट में कहा“ यह काफी हताशाजनक है कि प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं और भावनाओं को हल्के में ले रहे हैं। हमारी मांगों को सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया जाना कि हमारे पास बहुमत नहीं है ,उनकी राज्य के प्रति असंवेदनशीलता का दर्शाता है। जब केन्द्र सरकार से सहायता संबंधी सभी प्रयास विफल रहे तो हम केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने बार बार हमारी मांगों को खाारिज कर दिया अौर लाेगाें की भावनाओं की अनदेखी की है । इसके बावजूद हम अपने संघर्ष को जारी रखेंगे।”</p>
<h1 style="text-align:center;">हम उन सभी पार्टियों और सांसदों के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमें समर्थन दिया है: शाह</h1>
<p style="text-align:justify;">उधर इस प्रस्ताव के गिर जाने के बाद भाजपा के नेताओं और केन्द्रीय मंत्रियों में अलग ही उत्साह नजर अाया और उन्होंने अपने विचार ट्वीटर के जरिए व्यक्त किए। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने एक ट्वीट में कहा“ परिवार अाधारित राजनीति की नकारात्मकता की पराजय हुई है। हम उन सभी पार्टियों और सांसदों के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमें समर्थन दिया है।”केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि लोकसभा में शुक्रवार रात मतदान के जो नतीजे आए हैं वे 2019 में होने वाले आम चुनावों के पूर्ववर्ती परिणाम हैं। केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने ट्वीट करते हुए कहा है“ सत्य हमारे पक्ष में रहा और यह एक संकेत है कि 2019 में होने वाले चुनाव झूठे द्रष्प्रचार पर नहीं बल्कि वास्तविक प्रगति पर आधारित होंगे।”</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/tdp-claims-moral-victory-bjp-leaders-in-jubilant-mood/article-4938</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Jul 2018 07:24:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एर्दोगन ने की संसदीय चुनावों में विजय की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की के विकास में अब कोई बाधा नहीं इस्तांबुल  तुर्की में राष्ट्रपति तय्यिप एर्दोगन ने रविवार को संसदीय चुनावों में विजयी होने की घोषणा की। श्री एर्दोगन ने कहा कि जनमत उनके और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी एकेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिला है। तुर्की के हाल के इतिहास में सबसे लोकप्रिय और विभाजनकारी नेता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/announcement-of-victory-in-elections/article-4475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/turki.jpg" alt=""></a><br /><h1>तुर्की के विकास में अब कोई बाधा नहीं</h1>
<p><strong>इस्तांबुल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">तुर्की में राष्ट्रपति तय्यिप एर्दोगन ने रविवार को संसदीय चुनावों में विजयी होने की घोषणा की। श्री एर्दोगन ने कहा कि जनमत उनके और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी एकेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">तुर्की के हाल के इतिहास में सबसे लोकप्रिय और विभाजनकारी नेता एर्दोगन ने कहा कि तुर्की के विकास में अब कोई बाधा नहीं आएगी। वह तथा उनकी इस्लामवादी एकेपी जहां अर्थव्यवस्था को लेकर आई थी वही से विकास की रफ्तार शुरू होगी। इस्तांबुल से एक संक्षिप्त संबोधन में उन्होंने कहा, “हमारे लोगों ने हमें राष्ट्रपति और कार्यकारी भूमिकाओं को निभाने की जिम्मेदारी दी है। मुझे उम्मीद है कि कोई भी अपनी विफलता को छिपाने के लिए चुनाव नतीजों को लेकर तनाव उत्पन्न करने और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करेगा।”</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 02:41:04 +0530</pubDate>
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                <title>सर्बिया पर स्विटजरलैंड की जीत से ग्रुप ई हुआ रोमांचक</title>
                                    <description><![CDATA[कोस्टा रिका मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर केलिनिनग्राद (वार्ता) जेरदान शकीरी के 90 वें मिनट के निर्णायक गोल की बदौलत स्विट्जरलैंड ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी करते हुए सर्बिया को शुक्रवार को 2-1 से पराजित करते हुए फुटबाल विश्वकप के ग्रुप ई को रोमांचक बना दिया। ग्रुप ई में अब बड़ी दिलचस्प स्थिति बन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/switzerlands-victory/article-4396"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sw.jpg" alt=""></a><br /><h1>कोस्टा रिका मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>केलिनिनग्राद (वार्ता) </strong></p>
<p style="text-align:justify;">जेरदान शकीरी के 90 वें मिनट के निर्णायक गोल की बदौलत स्विट्जरलैंड ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी करते हुए सर्बिया को शुक्रवार को 2-1 से पराजित करते हुए फुटबाल विश्वकप के ग्रुप ई को रोमांचक बना दिया।<br />
ग्रुप ई में अब बड़ी दिलचस्प स्थिति बन गयी है जिसमें पांच बार का विश्व चैंपियन ब्राजील मौजूद है। ब्राजील दो मैचों में चार अंकों के साथ शीर्ष पर है जबकि इस जीत के बाद स्विट्जरलैंड के भी चार अंक हैं और वह दूसरे स्थान पर है। सर्बिया तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। कोस्टा रिका दोनों मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 05:12:15 +0530</pubDate>
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                <title>स्कॉटलैंड की नंबर वन इंग्लैंड पर ऐतिहासिक जीत</title>
                                    <description><![CDATA[एडिनबर्ग (एजेंसी)। कैलम मैकलियोड (नाबाद 140) रन की शानदार शतकीय पारी और गेंदबाज़ों के संतोषजनक प्रदर्शन की बदौलत मेजबान स्कॉटलैंड ने एडिनबर्ग के छोटे से ग्राउंड पर वनडे की नंबर एक टीम इंग्लैंड के खिलाफ छह रन की नज़दीकी लेकिन रोमांचक जीत के साथ इतिहास रच दिया है। ग्रैंग ग्राउंड पर खेले गए एकमात्र एकदिवसीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/scotlands-number-one-victory-over-england/article-4098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/oney.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>एडिनबर्ग (एजेंसी)। </strong>कैलम मैकलियोड (नाबाद 140) रन की शानदार शतकीय पारी और गेंदबाज़ों के संतोषजनक प्रदर्शन की बदौलत मेजबान स्कॉटलैंड ने एडिनबर्ग के छोटे से ग्राउंड पर वनडे की नंबर एक टीम इंग्लैंड के खिलाफ छह रन की नज़दीकी लेकिन रोमांचक जीत के साथ इतिहास रच दिया है। ग्रैंग ग्राउंड पर खेले गए एकमात्र एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतने के बाद पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया। मेजबान स्काटिश टीम के बल्लेबाज़ों ने लेकिन इंंग्लिश गेंदबाज़ों की बखिया उधेड़ते हुए निर्धारित 50 ओवरों में पांच विकेट पर 371 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कॉटलैंड के लिए मैकलियोड ने 94 गेंदों में 16 चौके और तीन छक्के लगाकर नाबाद 140 रन की पारी खेली और मैन आॅफ द् मैच रहे। इंग्लैंड हालांकि वनडे के दूसरे सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुंचा लेकिन उसकी पारी 48.5 ओवर में 365 रन पर सिमट गई और छह रन के नज़दीकी अंतर से स्कॉटलैंड ने इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली जीत दर्ज कर ली। इंग्लिश पारी में जॉनी बेयरस्टो ने 105 रन की शतकीय पारी खेली जबकि आखिरी समय में लियाम प्लेंकेट ने नाबाद 47 रन की अह्म पारी खेली। लेकिन दूसरे छोर पर विकेट पतन होता रहा, मार्क वुड एक रन बनाकर आखिरी बल्लेबाज़ के रुप में आउट हुए जिन्हें 49वें ओवर में स्कॉटलैंड के साफियान शरीफ ने आउट किया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/scotlands-number-one-victory-over-england/article-4098</link>
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                <pubDate>Mon, 11 Jun 2018 16:46:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आतंकवाद पर भारत की कूटनीतिक जीत</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान को आतंकवादी फंडिंग के कारण अंतर्राष्ट्रीय मंच पर झटका लगा है। आतंकी संगठनों को फंड उपलब्ध कराने वाले देशों पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को “ग्रे लिस्ट” में डाल दिया है और जून में होने वाली बैठक में इसकी आधिकारिक पुष्टि हो जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब पड़ोसी देश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/indias-diplomatic-victory-over-terrorism/article-3569"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/pakistan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान को आतंकवादी फंडिंग के कारण अंतर्राष्ट्रीय मंच पर झटका लगा है। आतंकी संगठनों को फंड उपलब्ध कराने वाले देशों पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को “ग्रे लिस्ट” में डाल दिया है और जून में होने वाली बैठक में इसकी आधिकारिक पुष्टि हो जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब पड़ोसी देश पाकिस्तान पर कड़ी निगाह रखेगा। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान के सदाबहार मित्र चीन ने भी आतंकी फंडिंग के मामले में पाकिस्तान का अंततोगत्वा समर्थन नहीं किया। जबकि चीन का सीपीईसी अर्थात चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर के आधारभूत संरचना प्रोजेक्ट में करीब 60 बिलियन डॉलर का निवेश पाकिस्तान में है। ऐसे में चीन के इस निर्णय के विशेष महत्व को समझा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एफएटीएफ के पेरिस बैठक में यह निर्णय लगभग सर्वसहमति से लिया गया। पाकिस्तान को मनी लॉंन्ड्रिग के मामले में वर्ष 2012 से 2015 तक के लिए वॉच लिस्ट में डाल दिया गया था। लेकिन इस बार यह कार्यवाई आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराने के मामले में की गई है, जो पूर्व से काफी कड़ी है। एफएटीएफ एक अंतरसरकारी संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1989 में की गई थी। इसका मुख्य उदेश्य मनी लॉंन्ड्रिग (धन शोधन), आतंकियों को धन मुहैया कराना और अंतर्राष्ट्रीय वित्त व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले अन्य खतरों के प्रति ठोस कार्यवाई करना है। संगठन द्वारा लिया गया फैसला सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एफएटीएफ के पेरिस बैठक में इसके 37 सदस्यों में केवल तुर्की को छोड़कर इसके सभी 36 सदस्यों का समर्थन मिला है। ज्ञात हो एफएटीएफ में किसी भी नए कदम को रोकने के लिए कम से कम 3 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए।एफएटीएफ के पूर्ण सत्र की कार्यवाई पूरी निजी होती है। पाकिस्तान को वॉच लिस्ट में वापस भेजने की अमेरिकी और ब्रिटिश प्रस्ताव पर सऊदी अरब, तुर्की, रूस और चीन ने असहमति जताई। इस पर वाशिंगटन ने अभूतपूर्व रूप से पाकिस्तान पर दूसरा प्रस्ताव रखा। ट्रंप प्रशासन ने शुरू से इस मुद्दे पर दबाव डालना प्रारंभ कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए सर्वप्रथम गल्फ कॉपरेशन कांउसिल को विरोध छोड़ने के लिए तैयार कर लिया। सऊदी अरब द्वारा लगातार पाकिस्तान को समर्थन दिया जा रहा था। हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब को अपना सैन्य सहयोग प्रदान किया था। ऐसे में सऊदी अरब तथा पाकिस्तान के रिश्ते को समझा जा सकता है। अमेरिका ने सऊदी अरब प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए उन्हें याद दिलाया कि दोनों देशों की व्यापक साझेदारी है। ज्ञात हो सऊदी अरब एफएटीएफ का पूर्ण सदस्य नहीं है। अमेरिका ने सऊदी अरब को फुल मेंबरशिप का लालच दिया। फलत: सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया। इस संपूर्ण प्रकरण में रूस भी पाकिस्तान के तरफ झुका हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु भारत और रूस के ऐतिहासिक मजबूत रिश्तों के आधार पर भारत ने रूस को अपने प्रभाव में ले लिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि आखिर पाकिस्तान का समर्थन करने से चीन कैसे पीछे हटा? दरअसल, रूस और सऊदी अरब के पाकिस्तान से किनारा करने के बाद चीन पर भी पीछे हटने के दबाव में लगातार वृद्धि हो रही थी। पाकिस्तान एवं चीन के अति घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए, इस मामले में चीन का समर्थन प्राप्त करना काफी कठिन था। चीन एफएटीएफ में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए पैरवी कर रहा था और इसके लिए उसे प्रायोजक देशों के समर्थन की आवश्यकता होती।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान पर चीन की तटस्थता के बदले भारत और अमेरिका ने चीन को समर्थन देने की बात कही। जब अमेरिका सऊदी अरब और तुर्की से बात कर रहा था, तब भारत चीनी प्रतिनिधिमंडल से मोर्चा संभाल रहा था। अंतत:भारतीय प्रतिनिधिमंडल जो नई दिल्ली से निरंतर संपर्क में था, उसने अमेरिका के साथ मिलकर चीनी टीम के साथ समझौता किया जो कि भविष्य में बीजिंग के लिए एफएटीएफ में बड़ी भूमिका निभाने के समर्थन से संबंधित है। इसके अतिरिक्त चीन अपने इस निर्णय के द्वारा पाकिस्तानी नीति निर्माताओं पर आतंकवाद को लेकर कुछ दबाव भी डालना चाह रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का इस समय पाकिस्तान में भारी निवेश है और कई बार चीन को भी आतंकवादियों के कारण सीपीईसी प्रोजेक्ट में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त चीन वैश्विक तौर पर भी एक जिम्मेदार महाशक्ति के रुप में संकेत देने का प्रयास कर रहा है कि वह भी आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में विश्व समुदाय के साथ है। ज्ञात हो चीन पूर्व में पाकिस्तानी आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर को बार-बार वीटो के प्रयोग कर बचाने के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हो चुका है। सितंबर 2017 में चीन में संपन्न ब्रिक्स बैठक में भारतीय प्रयास से ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन ने पाकिस्तान केंद्रित आतंकवादी संगठनों को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन में चीन द्वारा किए दावों को पूरा करने का अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी चीन पर था। एक सप्ताह पहले भी चीन ने सीपीईसी के लिए बलूच नेताओं से सीधी वार्ता कर पाकिस्तान को बलूचिस्तान में भी मानवाधिकार हनन रोकने व बलूचिस्तान में शांति स्थापित करने का संकेत दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह अपने सदाबहार मित्र चीन का सहयोग नहीं मिलने से पाकिस्तान को भी स्पष्ट संदेश पहुँच गया कि अगर वह आतंकवाद के मामले पर निष्क्रिय रवैया अपनाता है, तो न केवल पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय विरोध का सामना करना पड़ेगा, अपितु चीन के भी विरोध का सामना करना पड़ेगा। साथ ही चीन पाकिस्तान का विरोध कर यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर चीन के आर्थिक एवं सुरक्षा हितों का पाकिस्तान ध्यान नहीं रखेगा, तो चीन का पूर्ण समर्थन भी समाप्त हो सकता है। भारत के आक्रामक कूटनीतिक पहल के लिए इससे बेहतर वक्त नहीं हो सकता था, क्योंकि ट्रंप की अगुवाई वाला अमेरिका आतंक फैलाने को लेकर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की लगातार मांग करता रहा है। हालांकि भारत को सावधानी से इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि चीन और सऊदी अरब जून के बाद अपने मौजूद रूख में कोई बदलाव न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर जून तक पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग को खत्म करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना नहीं तैयार की तो उसका नाम ब्लैक लिस्ट देशों में शुमार कर लिया जाएगा। टास्क फोर्स के इस कदम के बाद पाकिस्तान के सामने अन्य एजेंसियों की ओर से भी डाउनग्रेड किए जाने का खतरा मंडरा रहा है। स्वयं पाकिस्तानी विशेषज्ञ भी स्वीकार कर रहे हैं कि आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक समेत मूडीज, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स और फिच जैसी एजेंसियाँ पाकिस्तान को डाउनग्रेड कर सकती है। ऐसा होने पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों के लिए पाकिस्तान में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। इस्लामाबाद पर 300 अरब डॉलर का संप्रभुता कर्ज है, ऐसे में देनदारी चुकता नहीं करने पर स्थिति और भी विकट होगी। ऐसे स्थिति में पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में गिरावट एक ऐसा चक्र शुरू हो सकता है, जिसे पुन: मुक्त होना पाकिस्तान के लिए मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>राहुल लाल</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/indias-diplomatic-victory-over-terrorism/article-3569</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Mar 2018 02:55:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एंजेला मर्केल की जीत : यूरोप तथा भारत के लिए मायने</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मनी यूरोपीय यूनियन अर्थव्यवस्था का केवल प्रमुख इंजन ही नहीं है, अपितु तकनीकी क्षमताओं से युक्त ऐसा देश है, जो एंजिला मर्केल के नेतृत्व में यूरोपीय एकीकरण और वैश्वीकरण का समर्थक भी है। जर्मनी में एंजेला मर्केल लगातार चौथी बार जीत के बाद एक बार फिर कमान संभालने के लिए तैयार हैं। अब जब मतगणना खत्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/angela-merkels-victory/article-3348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/angela.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जर्मनी यूरोपीय यूनियन अर्थव्यवस्था का केवल प्रमुख इंजन ही नहीं है, अपितु तकनीकी क्षमताओं से युक्त ऐसा देश है, जो एंजिला मर्केल के नेतृत्व में यूरोपीय एकीकरण और वैश्वीकरण का समर्थक भी है। जर्मनी में एंजेला मर्केल लगातार चौथी बार जीत के बाद एक बार फिर कमान संभालने के लिए तैयार हैं। अब जब मतगणना खत्म हो गई है, तो चांसलर मर्केल की सीडीयू अर्थात् क्रिश्चियन डेमेक्रेटिक यूनियन पार्टी के लिए यह तय कर पाना मुश्किल होगा कि इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनने की खुशी मनाए या जर्मन राजनीति में अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन पर पार्टी चिंतन करें। जो समीकरण दिखाई दे रहे हैं, उनमें सत्ता के शीर्ष पर काबिज होने के लिए मर्केल को उन दलों के साथ गठजोड़ करना पड़ेगा जिससे उनकी विचारधारा अलग है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीडीयू (क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन) तथा सीएसयू (क्रिश्चियन सोशल यूनियन) के गठबंधन को बेशक इन चुनावों में 32.9 फीसदी मत मिले हैं, लेकिन यह 1949 में गठन के बाद से पार्टी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। ये नतीजे न सिर्फ मर्केल को प्रभावित करेंगे बल्कि इसका असर फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल माक्रो के उस विचार पर भी पड़ेगा जिसका मकसद यूरोप के मौजूदा स्वरुप को बदलना है। सीडीयू-सीएसयू गठबंधन को पिछले बार की तुलना में 8.5 फीसदी कम मत मिले हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूरोपीय सुधारों के लिए चुनौती:</h3>
<p style="text-align:justify;">फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने जर्मनी के साथ मिलकर यूरोप का पुनर्गठन करने का वायदा किया था ताकि न सिर्फ आर्थिक संकट से उबरा जा सके बल्कि यूरोपीय संघ को ब्रिटेन से बाहर हो जाने के बाद जो नुकसान हुआ है, उसकी भी भरपाई की जा सके। अपने एक भाषण में माक्रों ने इन विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने एकल मुद्रा ब्लॉक के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इस विचार को अब तक मर्केल का सहयोग भी मिलता रहा है। लेकिन नई सरकार की संभावित पार्टी एफडीपी के साथ और विपक्षी दल एएफडी की मौजूदगी में इस तरह का यूरोपीय एकीकरण बेहद ही चुनौती भरा साबित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने चुनाव अभियान में उदारवादी एफडीपी ने यूरोप के ईएसएम बेलआउट फंड को खत्म करने के साथ उन संधियों की वकालत की थी जो यूरोपीय देशों को यूरोपीय संघ छोड़ने की इजाजत देते हैं। यूरोप में एफडीपी भी एएफडी से अलग नहीं है। अगर एफडीपी के विचारों पर अमल किया जाए तो यूरोपीय संकट खड़ा हो जाएगा। गठबंधन में सिर्फ एफडीपी ही एंजेला मर्केल की मुश्किल नहीं होगी बल्कि सीडीयू की सहोदर पार्टी सीएसयू भी नए गठबंधन रच-बस पाएगी कि नहीं ये भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।</p>
<p style="text-align:justify;">एएफडी का शानदार प्रदर्शन बवेरिया में सीएसयू के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अगले साल राज्य में होने वाले चुनाव में इससे सीधे सीएसयू को सीधे नुकसान पहुंचा सकते हैं। अपने नए कार्यकाल में चांसलर मर्केल और सीडीयू के रूढ़िवादी खेमे के लिए उन मतदाताओं को अपनी ओर वापस लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी, जिन्होंने इन चुनावों में एएफडी पर भरोसा जताया है। इससे साफ है कि भविष्य में भी शरणार्थी नीति में बदलाव के लिए एंजेला मर्केल पर भारी दबाव होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जर्मन चुनाव का भारत के लिए महत्व</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत-जर्मनी के बीच पिछले वर्ष 1344 अरब का व्यापार हुआ था। जर्मनी, ब्राजील, भारत और जापान जी-4 समूह बनाकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संयुक्त रुप से सुधार की मांग करते हैं। सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के लिए एंजेला मर्केल ने भारत को 7700 करोड़ रुपये की सहायता देने का वादा किया है। इससे भारत-जर्मनी सबंधों को मर्केल के पुन: निर्वाचित होने के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। जर्मनी एक राजनीतिक भूकंप से बच गया है, जिसका न केवल भारत-जर्मन संबंध अपितु भारत-यूरोप के संबंधों पर भी सकारात्मक असर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एंजेला मर्केल के वैश्वीकरण एवं एकीकृत यूरोप की अवधारणा से भारत के हित भी जुड़े हैं। कमजोर यूरोप भारतीय हितों के भी अनुरूप नहीं था। अगर दक्षिणपंथ एंजिला मर्केल को भी हरा देता तो यूरोपीय यूनियन को गंभीर धक्का लगता, जो एकीकृत मजबूत यूरोप के लिए खतरनाक होता। यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और भारत के कुल निर्यात में उसका हिस्सा 24% से भी अधिक है। यूरोपीय यूनियन भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का भी सबसे बड़ा स्रोत है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त जर्मनी एनएसजी तथा निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत की सदस्यता का स्वागत करता है। मर्केल एनएसजी के अतिरिक्त आस्ट्रेलिया ग्रुप तथा वासेनार व्यवस्था में भारत का स्वागत करती हैं। जर्मनी और भारत वर्ष 2000 से रणनीतिक भागीदार हैं। भारत दुनिया के उन चंद देशों में है, जिसके साथ जर्मनी अंतर सरकारी परामर्श बैठक करता है। इस तरह मर्केल के नेतृत्व में जर्मनी और भारत के संबंध काफी घनिष्ठ हैं। ऐसे में एंजेला मर्केल का पुन: निर्वाचित होना भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चुनाव परिणाम से मर्केल के सामने कई कठिन चुनौतियां उपस्थित हुई हैं। जर्मनी की आयरन लेडी एंजला मर्केल अपने बूते पर बदलाव लाने का माद्दा रखती हैं। एंजेला के व्यक्तित्व को करीब से समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें दो बार विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली शख्स का तमगा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि जनाधार घटने पर भी एंजेला का जादू फिए एक बार चला है। एंजेला मार्केल राजनीति में आने से पहले वैज्ञानिक थीं। इसलिए कहा जा रहा है कि वैज्ञानिक होने के इसी गुण की वजह से वह हर मुद्दे की तह जाकर समाधान खोज ही लेती है। इस तरह मर्केल नवीन राजनीतिक स्थिति का भी समाधान भी अवश्य खोज लेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-राहुल लाल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2017 05:18:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>शरद ने अहमद पटेल को दी जीत की बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[गांधीनगर। गुजरात से राज्यसभा इलेक्शन जीतकर 5वीं बार संसद पहुंचे अहमद पटेल को जेडीयू के सीनियर लीडर शरद यादव ने बधाई दी। उन्होंने बुधवार को पटेल के साथ एक फोटो ट्वीट करते हुए लिखा- ”मुश्किल घड़ी में जीत के लिए दिल से बधाई। आशा करता हूं कि आपको करियर में हमेशा कामयाबी मिले।” इसके पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sharad-congratulate-to-ahmed-for-victory/article-2999"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sharad-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गांधीनगर।</strong> गुजरात से राज्यसभा इलेक्शन जीतकर 5वीं बार संसद पहुंचे अहमद पटेल को जेडीयू के सीनियर लीडर शरद यादव ने बधाई दी। उन्होंने बुधवार को पटेल के साथ एक फोटो ट्वीट करते हुए लिखा- ”मुश्किल घड़ी में जीत के लिए दिल से बधाई। आशा करता हूं कि आपको करियर में हमेशा कामयाबी मिले।”</p>
<p style="text-align:justify;">इसके पहले पटेल ने ट्वीट किया, ”सत्यमेव जयते। यह सिर्फ मेरी जीत नहीं, बल्कि पैसा की ताकत और सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल की हार है। कांग्रेस इस जीत से मजबूत होगी और 2017 के असेंबली इलेक्शन में भी बीजेपी को हराएंगे।”</p>
<h3 style="text-align:justify;">शाह-स्मृति को मिली जीत</h3>
<p style="text-align:justify;">हाईवोल्टेज ड्रामे के बीच मंगलवार रात राज्यसभा की तीन सीटों के लिए वोटों की गिनती हुई। इसमें पटेल को 44 और उनके खिलाफ मैदान में उतरे बीजेपी कैंडिडेट बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले। अमित शाह और स्मृति ईरानी ने 46-46 वोट के साथ जीत दर्ज की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महागठबंधन तोड़ने से नाराज हैं शरद</h3>
<p style="text-align:justify;">बिहार में महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के नीतीश के फैसले को लेकर शरद यावद नाराज चल रहे हैं। शरद कह चुके हैं कि नीतीश ने आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन से अलग होने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली। महागठबंधन के लिए सबने मिलकर कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2017 04:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>प्रो-बॉक्सिंग: विजेंदर ने चीन के बॉक्सर को हराया</title>
                                    <description><![CDATA[बॉर्डर पर शांति के लिए चीनी मुक्केबाज को वापस दी जीत की बेल्ट मुंबई: भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह Vijender Singh ने प्रो-बॉक्सिंग के बड़े मुकाबले में चीन के बॉक्सर जुल्पिकार मैमाताली को हरा दिया। शनिवार रात मुंबई में हुए इस मुकाबले को जीतकर विजेन्दर ने दो टाइटल अपने नाम किए। उन्होंने WBO एशिया पेसिफिक सुपर मिडलवेट का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/vijender-singh-china-zulfiqar-meimetiyali/article-2927"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/vijender-isngh.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="secArticleTitle">बॉर्डर पर शांति के लिए चीनी मुक्केबाज को वापस दी जीत की बेल्ट</h1>
<p><strong>मुंबई: </strong>भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह <strong>Vijender Singh</strong> ने प्रो-बॉक्सिंग के बड़े मुकाबले में चीन के बॉक्सर जुल्पिकार मैमाताली को हरा दिया। शनिवार रात मुंबई में हुए इस मुकाबले को जीतकर विजेन्दर ने दो टाइटल अपने नाम किए। उन्होंने WBO एशिया पेसिफिक सुपर मिडलवेट का अपना टाइटल तो बरकरार रखा, साथ ही चीनी बॉक्सर से WBO ओरिएंटल सुपर मिडलवेट का टाइटल भी छीन लिया। प्रोफेशनल बॉक्सिंग में आने के बाद विजेंदर की ये लगातार नौवीं जीत है।</p>
<p> </p>
<p>https://twitter.com/Gurmeetramrahim/status/894047568748978177</p>
<h1>मैं सीमा पर शांति की उम्मीद करता हूं | Vijender Singh</h1>
<p style="text-align:justify;">ओलंपिक में कांस्य पद जीतने वाले विजेंदर ने मुकाबले के बाद कहा कि मैं यह बेल्ट जुल्फिकार को वापस देना चाहता हूं। मैं सीमा पर शांति की उम्मीद करता हूं और शांति का संदेश सबसे महत्वपूर्ण है। भारत एवं चीन के बीच पिछले कुछ सप्ताह से सिक्किम सेक्टर में सीमा पर गतिरोध की स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">विजेंदर ने मुकाबले से पहले कहा था, चीनी उत्पाद अधिक देर नहीं चलते लेकिन मुकाबला समाप्त होने के बाद अपने प्रतिद्वंद्वी से प्रभावित भारतीय मुक्केबाज ने कहा, मुझो ऐसा लगता था कि चीनी मुक्केबाज बहुत देर तक नहीं टिक पाएंगे लेकिन जिस तरह वह खेले, उन्होंने मुझे हैरान कर दिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">देर तक नहीं टिकता चाइनीज माल | Vijender Singh</h1>
<p style="text-align:justify;">फाइट से पहले विजेंदर ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कहा था कि वे अपना नौवां मुकाबला जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विजेंदर ने कहा था कि चाइनीज माल ज्यादा देर नहीं चलता और वे मैमाताली को निपटाने में ज्यादा समय नहीं लगाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मैच से पहले विजेंदर ने प्रो-बॉक्सिंग में अपने आठ मुकाबलों में से सात नॉकआउट से जीते थे।  विजेंदर के मुकाबले जुल्पिकार नौ साल छोटे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ‘इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे मुझसे उम्र में 9 साल कम हैं। जब आप रिंग में उतरते हैं तो मुकाबले में आपका अनुभव काम आता है। वो कितना युवा है इसका मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं उसे पीटने के लिये तैयार हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 23:40:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>म्यूलर ने मैराथन संघर्ष में नडाल को दी मात</title>
                                    <description><![CDATA[ म्यूलर के सामने मारिन सिलिच की होगी चुनौती लंदन (एजेंसी)। स्पेन के राफेल नडाल की जबरदस्त लय और तीसरे विम्बलडन खिताब की ओर बढ़ते कदमों को लग्जम्बर्ग के जाइल्स म्यूलर ने लगभग पांच घंटे तक चले मैराथन संघर्ष में अपने अद्भुत प्रदर्शन की बदौलत थामते हुए उन्हें ग्रैंड स्लेम से बाहर कर दिया है। पुरुष […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/gilles-muller-beat-to-nadal-in-wimbledon-marathon/article-2236"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gilles-müller.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> म्यूलर के सामने मारिन सिलिच की होगी चुनौती</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>लंदन (एजेंसी)।</strong> स्पेन के राफेल नडाल की जबरदस्त लय और तीसरे विम्बलडन खिताब की ओर बढ़ते कदमों को लग्जम्बर्ग के जाइल्स म्यूलर ने लगभग पांच घंटे तक चले मैराथन संघर्ष में अपने अद्भुत प्रदर्शन की बदौलत थामते हुए उन्हें ग्रैंड स्लेम से बाहर कर दिया है। पुरुष एकल के चौथे दौर का मैच नडाल और म्यूलर के बीच विम्बलडन चैंपियनशिप का एक यादगार मैच बन गया जिसमें पांचवां और निर्णायक सेट ही दो घंटे 15 मिनट तक चला और करीब पांच घंटे तक खेले गए पांच सेटों के सांस रोक देने वाले मैच में 16वीं सीड खिलाड़ी ने 6-3, 6-4, 3-6, 4-6, 15-13 से जीत अपने नाम करते हुए स्टार खिलाड़ी नडाल को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> म्युलर की दूसरी बड़ी जीत</h3>
<p style="text-align:justify;">आॅल इंग्लैंड क्लब लॉन में खेले गए इस क्लासिक मैच में चौथी सीड नडाल ने भी काफी बेहतरीन सर्विस की लेकिन 34 वर्षीय म्यूलर ने अपने सर्व और वॉली से 15 बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन को 14-13 से हराकर बाहर कर दिया। नडाल के फोरहैंड से चूकने पर म्युलर को दो अतिरिक्त मैच अंक भी मिले और फिर से उनकी बेसलाइन पर भूल ने विपक्षी खिलाड़ी को बढ़त दिला दी। म्युलर ने मैच में और खासकर करीब ढाई घंटे के निर्णायक सेट में जिस तरह का प्रदर्शन किया उसके बाद प्रशंसकों ने भी उनके जीतने के साथ ही खड़े होकर उनका अभिवादन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले 16वीं सीड खिलाड़ी ने नडाल को पहले दो सेटों में हराया और फिर स्पेनिश खिलाड़ी ने वापसी कर 6-3, 6-4 से बाकी के दोनों सेटों को जीत कर मैच बराबरी पर पहुंचा दिया था जिसके बाद निर्णायक सेट खेला गया। लग्जम्बर्ग के खिलाड़ी ने मैच में 30 एस और 95 विनर्स लगाकर क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है जहां उनके सामने मारिन सिलिच की चुनौती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">म्युलर के लिए यह दूसरी बड़ी जीत है। वह इससे पहले 2008 में यूएस ओपन के क्वार्टरफाइनल में पहुंचे थे। म्युलर का यह मैच देखने के लिए स्टैंड में लग्जम्बर्ग के प्रिंस फेलिक्स भी मौजूद थे। महिला एकल में दूसरी सीड रोमानिया की सिमोना हालेप ने पूर्व नंबर एक बेलारुस की विक्टोरिया अजारेंका को 7-6, 6-2 से हराया तो छठी सीड ब्रिटेन की जोहाना कोंटा ने घरेलू मैदान पर लय जारी रखते हुए 21वीं सीड कैरोलीन गार्सिया को 7-6, 4-6, 6-4 से मात दी। अमेरिका की 24वीं वरीय कोको वेंडेवेगे ने पांचवीं सीड डेनमार्क की कैरोलीन वोज्नियाकी को उलटफेर का शिकार बनाते हुए 7-6, 6-4 से हराकर बाहर कर दिया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">फेडरर-मुर्रे ने क्वार्टरफाइनल में बनाई जगह</h2>
<p style="text-align:justify;">स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर ने भी बिना किसी ड्रामे के चौथे दौर की बाधा को पार कर लिया और 13वीं सीड बुल्गारिया के ग्रिगोर दिमित्रोव को 6-4, 6-2, 6-4 से लगातार सेटों में हराया। अब क्वार्टरफाइनल में कनाडा के मिलोस राओनिक से भिड़ेंगे। छठी सीड राओनिक ने एक अन्य मैच में 10वीं सीड एलेक्सांद्र ज्वेरेव को 4-6, 7-5, 4-6, 7-5, 6-1 से पांच सेटों में हराया। विश्व के नंबर एक खिलाड़ी ब्रिटेन के एंडी मुर्रे ने भी कुछ मेहनत करने के बाद फ्रांस के बेनोएट पेयर को 7-6, 6-4, 6-4 से हराया। इसके अलावा 11वीं सीड चेक खिलाड़ी टॉमस बेर्दिच ने आठवीं वरीय आस्ट्रिया के डॉमिनिक थिएम को 6-3, 6-7, 6-3, 3-6, 6-3 के साथ संघर्ष कर जीत अपने नाम की। 24वीं सीड अमेरिका के सैम क्वेरी ने केविन एंडरसन को 5-7, 7-6, 6-3, 6-7, 6-3 से एक अन्य पांच सेट वाले मुकाबले में हराया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 09:09:43 +0530</pubDate>
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