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                <title>Abohar:- फैक्ट्री में नरमा जलने से लाखों का नुक्सान</title>
                                    <description><![CDATA[अबोहर (सच कहूँ न्यूज)। आलमगढ़-धर्मपुरा रोड़ पर स्थित एक कॉटन इंडस्ट्री में शार्ट सर्किट के कारण भयंकर आग लग गई। मौके पर पहुंची दमकल गाड़ी व फैक्ट्री (Cotton Factory) कर्मचारियों ने देर रात आग पर काबू पाया। इस बारे में जानकारी देते हुए मोहन कॉटन इंडस्ट्री के मालिक सुधीर सिंगला ने बताया कि अधिक नरमा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/loss-of-lakhs-due-to-burning-of-cotton-in-the-factory/article-47878"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/cotton-factory.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आलमगढ़-धर्मपुरा रोड़ पर स्थित एक कॉटन इंडस्ट्री में शार्ट सर्किट के कारण भयंकर आग लग गई। मौके पर पहुंची दमकल गाड़ी व फैक्ट्री (Cotton Factory) कर्मचारियों ने देर रात आग पर काबू पाया। इस बारे में जानकारी देते हुए मोहन कॉटन इंडस्ट्री के मालिक सुधीर सिंगला ने बताया कि अधिक नरमा उनकी फैक्ट्री में बने बैरगों में पड़ा था कि अचानक किसी मशीनरी में शार्ट सर्किट होने के कारण आग नरमे तक पहुंच गई और देखते ही देखते नरमा धू-धू कर जलने लगा। उन्होंने इस बात की सूचना दमकल विभाग कर्मचारियों को दी और फैैक्ट्री कर्मचारियों की मदद से पानी व आग बुझाऊ यंत्रों से देर रात्रि काबू पाया। इस आगजनी मेंं उनका लाखों रुपए का नुकसान हो गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 19:15:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इंडस्ट्री के लिए सीएम मान का बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[एक ही स्टांप पेपर सारे क्लीयरेंस होंगे। हरे रंग के स्टांप पेपर में सभी एनओसी मिल जाएगी: सीएम मान इंडस्ट्री के लिए स्टांप पेपर की कलर कोडिंग की शुरूआत: मान एक ही स्टांप पेपर सारे क्लीयरेंस होंगे: मान चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने उद्योग क्षेत्र को बड़ा तोहफा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/cm-bhagwant-mann-announcement-for-the-industry/article-47525"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/bhagwant-mann-41.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">एक ही स्टांप पेपर सारे क्लीयरेंस होंगे।</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>हरे रंग के स्टांप पेपर में सभी एनओसी मिल जाएगी: सीएम मान</li>
<li>इंडस्ट्री के लिए स्टांप पेपर की कलर कोडिंग की शुरूआत: मान</li>
<li>एक ही स्टांप पेपर सारे क्लीयरेंस होंगे: मान</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने उद्योग क्षेत्र को बड़ा तोहफा दिया है। इसकी घोषणा आज खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने की। उन्होंने दावा किया कि हम एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहे हैं और ऐसा करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य होगा, जिससे अन्य लोगों को प्रेरणा मिलेगी। सीएम मान ने कहा कि अब पंजाब में एक ही स्टांप पेपर सारे क्लीयरेंस होंगे। उन्होंने कहा कि हरे रंग के स्टांप पेपर में सभी एनओसी मिल जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 May 2023 14:59:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किसान आंदोलन की आड़ में पंजाब में उद्योग निशाने पर : विश्लेषक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों की आड़ में पंजाब में उद्योगों को निशाना बनाने को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि इसके राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर दूरगामी विपरीत परिणाम हो सकते हैं। किसान आंदोलन को लेकर पंजाब में मोबाइल टावरों की बिजली जबरन काटने और दूरसंचार कंपनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/industry-under-target-in-punjab-under-the-guise-of-farmers-movement-analyst/article-20847"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/cheating-of-1-lakh-18-thousand-rupees-in-the-name-of-applying-a-tower-of-a-mobile-company.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों की आड़ में पंजाब में उद्योगों को निशाना बनाने को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि इसके राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर दूरगामी विपरीत परिणाम हो सकते हैं। किसान आंदोलन को लेकर पंजाब में मोबाइल टावरों की बिजली जबरन काटने और दूरसंचार कंपनी के मुलाजिमों से हाथापाई की रिपोर्टों के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से ऐसा नहीं करने की अपील की है। वहीं विश्लेषक भी मान रहे हैं कि ऐसी हरकतों से आंदोलन तो भटक ही रहा है इस प्रकार की गतिविधियां राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर उल्टा असर डाल सकती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लोगों को असुविधा होती है और किसानों को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए, हालांकि उन्होंने किसानों के आंदोलन के समर्थन की घोषणा भी कर डाली।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों की राय है कि मुख्यमंत्री को तोड़फोड़ करने वालों से सख्ती से निपटने की जरुरत है नहीं तो कानून और व्यवस्था पर उगली उठना लाजिमी है और यदि यह सवाल गहराया तो फिर औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं जिसके उदाहरण पहले भी कई राज्यों में सामने आ चुके हैं। टॉवर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर एसोसिएशन (टीएआईपीए) ने सरकार से अनुरोध किया था कि राज्य सरकार उन्हें तथाकथित किसानों की गुंडागर्दी से बचाए। इसके बाद ही सरकार की तरफ से यह अपील की गई है। किसान आंदोलन की आड़ में मनसा, बरनाला, फिरोजपुर और मोगा समेत पंजाब के विभिन्न हिस्सों में बीते कुछ दिन से एक विशेष दूरसंचार आॅपरेटर के मोबाइल टावरों को की जा रही बिजली आपूर्ति को काट रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान आंदोलन पर नजर रखने वालों का कहना है कि पहले रेलें रोकी गई जिससे बिजली घरों तक कोयला नहीं पहुंच सका और राज्य में विद्युत संकट का संकट पैदा हो गया । गेहूं की सिंचाई का समय है और देश के सर्वाधिक गेहूं उत्पादक राज्य में बिजली संकट का असर रबी की इस मुख्य फसल के लिये घाटे का सौदा भी हो सकता है। सरकार को इस मामले में तुरंत एस्मा लगा कर कार्यवाही करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कोरोना के वैश्विक संकट में दूरसंचार का माध्यम आजीविका का सबसे बड़ा साधन बना था और पंजाब में अब संचार सेवाओं को तहस नहस किया जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि राज्य के हित में सरकार को ऐसी गतिविधियों को तुरंत को रोकना होगा और जरुरत पड़ने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। राज्य सरकार आवश्यक सेवाओं को चालू रखने में अक्षम साबित हुई है। दूरसंचार सेवाओं के बारे में उच्चतम न्यायालय भी साफ कर चुका है कि यह आवश्यक सेवाओं का अंग है, फिर भी मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पंजाब में जारी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक नफे नुकसान से इतर सरकारी संपत्ति के नुकसान से किसी को कोई फायदा नही पहुंचता। मोबाइल टावरों की विद्युत आपूर्ति काटना सूबे की जीवन रेखा को शिथिल करने जैसा है। बच्चे आॅनलाइन क्लासेस से महरूम हैं, कोविड में जो लोग घर से काम कर रहे थे यानी वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। उन्हें भी खतरे में धकेल दिया गया है। आॅनलाइन बिजनेस से जुड़े युवाओं के धंधे मंदे हो गए हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Dec 2020 16:46:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक को उप्र में दिया जायेगा उद्योग का दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों को उद्योग का दर्जा दिये जाने की तैयारी में जुटा है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यहां बताया कि रोजगार की संभावनाओं को देखते हुये उत्तर प्रदेश सरकार वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों काे उद्योग का दर्जा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिये मुख्यमंत्री सहमति दे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/warehousing-and-logistics-will-be-given-industry-status-in-up/article-15263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/industry.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश सरकार वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों को उद्योग का दर्जा दिये जाने की तैयारी में जुटा है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यहां बताया कि रोजगार की संभावनाओं को देखते हुये उत्तर प्रदेश सरकार वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों काे उद्योग का दर्जा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिये मुख्यमंत्री सहमति दे दी है। अब वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को औद्योगिक गतिविधि के लिए आरक्षित क्षेत्रों के आवंटन और भूमि उपयोग के लिए औद्योगिक दर का 1.5 गुना भुगतान करेंगी, जो भूमि की लागत के रूप में इस सेक्टर में इकाइयों की स्थापना की मौजूदा लागत की तुलना में लगभग एक तिहाई हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योंगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने यहां बताया कि वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों में रोजगार की अपार संभावनाये है। इन्हें उद्योग का दर्जा देने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सहमति दे दी है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को अपने मास्टर प्लान व नियमों में संशोधन करके इस प्राविधान को शीघ्र लागू करने के लिए निर्देश दिया है।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2020 12:02:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सरकार की गलत नीतियों से हरियाणा के उद्योग संकट में: गर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच-कहूँ न्यूज)। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंगदास गर्ग ने कहा कि हरियाणा सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में लगातार व्यापार व उद्योग पिछड़ता जा रहा है। हरियाणा में गांव स्तर पर हजारों छोटे-छोटे उद्योग थे जिसके कारण लाखों बेरोजगार युवाओं को और महिलाओं को रोजगार मिला हुआ था मगर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/in-the-industry-crisis-of-haryana-with-wrong-policies-of-the-government-garg/article-4198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/polticles.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सरसा (सच-कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंगदास गर्ग ने कहा कि हरियाणा सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में लगातार व्यापार व उद्योग पिछड़ता जा रहा है। हरियाणा में गांव स्तर पर हजारों छोटे-छोटे उद्योग थे जिसके कारण लाखों बेरोजगार युवाओं को और महिलाओं को रोजगार मिला हुआ था मगर सरकार की उद्योगों के प्रति उदासीनता के चलते ये उद्योग अब बंद हो गए जिससे बेरोजगारी बढ़ी है। वे शुक्रवार को सुरखाब में पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।</p>
<h1 style="text-align:center;">सरकार की गलत नीतियों के कारण कृषि उपज<br />
मिल्ज लगभग नुकसान में: गर्ग</h1>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हरियाणा में जितनी भी कृषि उपज मिल्ज हैं, सरकार की गलत नीतियों के कारण लगभग नुकसान में हैं। गर्ग ने कहा कि प्रदेश में लगातार व्यापार व उद्योग पिछड?े का मुख्य कारण हरियाणा में बिजली की दरें महंगी होना व सरकार की तरफ से उद्योगों को कम रेटों पर जमीन उपलब्ध न करवाना व प्रदूषण, सैल टैक्स, मार्केट बोर्ड, श्रम विभाग व बिजली निगम के अधिकारियों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए उद्योगपतियों को नाजायज तंग करने के कारण भी प्रदेश में व्यापार व उद्योग पर बड़ा बुरा असर पड़ा है जबकि लगातार व्यापार व उद्योग पिछड?े के कारण प्रदेश में लाखों लोग बेरोजगार घूम रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश में 70 प्रतिशत बेरोजगारों को रोजगार व्यापारी देता है, यहां तक कि सरकार के खजानों में 57 प्रतिशत राजस्व टैक्स के रूप में जमा करवाकर देश व प्रदेश के विकास में अपना पूरा योगदान दे रहा है, मगर अफसोस की बात है जो व्यापारी व उद्योगपति देश के विकास व तरक्की में अपना पूरा योगदान दे रहा है, सरकार उनकी तरफ किसी प्रकार का ध्यान न देकर उनसे सिर्फ धन इक_ा करने में लगी है, जो देश के हित में नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:center;">व्यापारी व उद्योगपतियों के हित में बिजली की दरों<br />
में 30 प्रतिशत सबसिडी देनी चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">गर्ग ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार को व्यापारी व उद्योगपतियों के हित में बिजली की दरों में 30 प्रतिशत सबसिडी देनी चाहिए और जो व्यापारी टैक्स भरता है उसका 5 प्रतिशत कमीश्न प्रोत्साहन के रूप में देना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारी व उद्योगपतियों को कम ब्याज पर लोन देने के साथ-साथ किसी भी व्यापारी व उद्योगपति के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने, दुकान व फैक्ट्री में आग लगने पर माल के हुए नुकसान का पूरा-पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए। उद्योग लगाने के लिए व्यापारियों को सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध करवाने का काम सरकार को करना चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;">ताकि देश व प्रदेश में पिछड़े हुए व्यापार को बढ़ावा मिल सके। इस मौके पर व्यापार मंडल प्रदेश महासचिव व जिला प्रधान हीरालाल शर्मा, प्रदेश उपप्रधान मा. रोशनलाल, राजकरण भाटिया, शहरी प्रधान केदार पाहवा, जिला उपप्रधान अंजनी कनोडिया, देवेंद्र सोनी, संरक्षक कृष्ण गुप्ता, सुभाष गोयल, नवनीत गोयल, अनिल बांगा, कालूराम शर्मा, चन्द्र यश जैन, सतीश शर्मा आदि व्यापारी नेता मौजूद थे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/in-the-industry-crisis-of-haryana-with-wrong-policies-of-the-government-garg/article-4198</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 08:55:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>श्रमिकों का वेतन दोगुना करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक छोटे उद्योगों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें नई दिल्ली। भारतीय कामगारों के लिए एक अच्छी खबर है। केन्द्र सरकार नया कानून लाने जा रही है, जिससे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन करीब दोगुने बढ़ोतरी के साथ 18,000 रुपये प्रति महीना हो जाएगा। यह लघु समयवधि के लिए अनुबंधित मजदूरी पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/preparation-doubling-the-salary-of-workers/article-2923"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/parliament.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>छोटे उद्योगों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय कामगारों के लिए एक अच्छी खबर है। केन्द्र सरकार नया कानून लाने जा रही है, जिससे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन करीब दोगुने बढ़ोतरी के साथ 18,000 रुपये प्रति महीना हो जाएगा। यह लघु समयवधि के लिए अनुबंधित मजदूरी पर भी लागू होगा, जिन्हें वेतन के मामले में सबसे अधिक शोषणकारी स्थिति में काम करना पड़ता है। लेकिन असल में यह अच्छी खबर श्रमिकों के लिए बुरी भी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नया कानून संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। यह कम वेतन पा रहे श्रमिकों को उनका हक दिलाने के लिए लाया जा रहा है तो फिर यह उनके लिए खराब कैसे? दरअसल, न्यूनतम मजदूरी दोगुनी किए जाने से लघु उद्योग क्षेत्र को झटका लग सकता है, जो कि सबसे ज्यादा ‘सस्ते श्रमिकों’ को रोजगार उपलब्ध कराता है। बहुत सी लघु उद्योग इकाइयां नए कानून के मुताबिक मजदूरी देने में असमर्थ होंगी, क्योंकि उन्हें पहले से ही कई समस्याओं से संघर्ष करना पड़ रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">श्रमिकों पर छंटनी का बढ़ेगा खतरा</h2>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी के बाद नकदी की कमी ने छोटे स्तर के उद्योगों को सबसे अधिक प्रभावित किया, क्योंकि उनके दैनिक परिचालन के लिए नकदी बहुत जरूरी है। इसके बाद जीएसटी लागू होने से भी कारोबार बाधित हुआ। कम ही संभावना है कि इस सेक्टर की समस्याएं जल्द दूर हो जाएंगी। मुश्किलों से घिरा सेक्टर इस नए कानून पर कैसी प्रतिक्रिया देगा? अधिक वेतन देने में असमर्थ होने पर इन इकाइयों में श्रमिकों की ‘छुट्टी’ की जा सकती है और मशीनों को काम पर लगाया जा सकता है। बड़े पैमाने पर छंटनी हुई तो यह गरीब श्रमिकों के लिए काफी बुरा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">78 फीसदी फर्में लघु उद्योग इकाइयां हैं, जिनमें 50 से कम कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे समय में जबकि सरकार के लिए रोजगार का सृजन बड़ी चुनौती है, न्यूनतम वेतन को दोगुना किए जाने से समस्या गहरा सकती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर महीने करीब 10 लाख नई नौकरियों की जरूरत है, लेकिन 2015 में आए सरकारी आंकड़ों के ने बताया था कि हर महीने केवल 10,000 नौकरियां ही सृजित हो रही हैं। हालांकि वेतन बढ़ने से कम पैसों पर काम कर रहे लाखों श्रमिकों को लाभ मिलेगा, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नया कानून लघु उद्योग क्षेत्र को नुकसान ना पहुंचाए। सरकार कुछ छूट के सहारे इस सेक्टर को राहत प्रदान कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/preparation-doubling-the-salary-of-workers/article-2923</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 09:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गंगा के पास ‘नो डेवलपमेंट जोन’, कचरा फैलाया तो 50 हजार रुपये का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने वीरवार को गंगा नदी और इसके आस-पास होने वाले प्रदूषण को लेकिर सख्ती बरतते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच आने वाला गंगा नदी के पास 100 मीटर की परिधि का क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के तौर पर घोषित कर दिया है साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rs-50-thousand-fined-for-spread-of-garbage-near-ganga/article-2270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/ganga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने वीरवार को गंगा नदी और इसके आस-पास होने वाले प्रदूषण को लेकिर सख्ती बरतते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच आने वाला गंगा नदी के पास 100 मीटर की परिधि का क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के तौर पर घोषित कर दिया है साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाने का निर्देश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राधिकरण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हरिद्वार से उन्नाव के बीच गंगा नदी के तट से 500 मीटर की दूरी तक किसी तरह का कचरा नहीं होना चाहिए और गंगा नदी के किनारे कचरा फैलाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। एनजीटी के अनुसार, करीब 7,304 करोड़ रुपये इन क्षेत्रों पर खर्च किया गया है लेकिन यह भी व्यर्थ चला गया। एनजीटी ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि नियोजन व नियमन में मौलिक त्रुटियां रहीं, जिसके कारण गंगा की सफाई नहीं हो पाई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इंटस्ट्री के बंद करने का आदेश</h2>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष के शुरूआत में ट्रिब्यूनल ने निर्णय लिया था कि गंगा के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों उत्तराखंड के हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के कानपुर के बीच की जांच की जाएगी ताकि स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आए। सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए 32 वर्ष पुराने नदी प्रदूषण के एक मामले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल में 6 फरवरी से सुनवाई की जा रही है। अप्रैल में एनजीटी ने नदी किनारे स्थित 13 प्रदूषण फैलाने वाले इंटस्ट्री के बंद करने का आदेश दिया था व कई अन्यइंडस्ट्री पर जुर्माना भी लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 05:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>GST काउंसिल दूर करेगी इंडस्ट्री की दिक्कतें</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: इंडस्ट्री की जीएसटी से संबंधित दिक्कतें दूर करने के लिए काउंसिल ने 18 टीम बनाई है। यह टीम अलग-अलग सेक्टर के लिए काम करेगी। हर टीम में केंद्र और राज्य के सीनियर ऑफिशियल्स होंगे। वे इंडस्ट्री बॉडी से मिलकर सेक्टर की प्रॉब्लम्स पहचानेंगे और ड्राफ्ट गाइडेंस तैयार करेंगे। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/gst-council-will-solve-industry-problems/article-1091"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/gst4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> इंडस्ट्री की जीएसटी से संबंधित दिक्कतें दूर करने के लिए काउंसिल ने 18 टीम बनाई है। यह टीम अलग-अलग सेक्टर के लिए काम करेगी। हर टीम में केंद्र और राज्य के सीनियर ऑफिशियल्स होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वे इंडस्ट्री बॉडी से मिलकर सेक्टर की प्रॉब्लम्स पहचानेंगे और ड्राफ्ट गाइडेंस तैयार करेंगे। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में यह जानकारी दी है। इसमें जिन खास सेक्टर्स पर ध्यान देने की बात है, उनमें टेलिकॉम, बैंकिंग, एक्सपोर्ट, आईटी, टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वैलरी, फूड प्रोसेसिंग, ईकॉमर्स, फार्मा और एमएसएमई प्रमुख हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">उन जगहों पर डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर खोलेगी, जहां बिक्री ज्यादा</h2>
<p style="text-align:justify;">फ्यूचर रिटेल उन जगहों पर डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर खोलेगी, जहां बिक्री ज्यादा है। कंपनी के ज्वाइंट एमडी राकेश बियानी ने बताया कि जीएसटी में सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होगा, क्रेडिट का भी नुकसान नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए हम ज्यादा स्टोर खोलना चाहते हैं। अभी कपड़ों और होम प्रोडक्टस के लिए इसके देशभर में सिर्फ दो डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर हैं- नागपुर और बर्दवान (पश्चिम बंगाल) में। बियानी ने कहा कि जीएसटी रिटेल सेक्टर के लिए बड़े मौके की तरह है। इससे दाम कम होंगे और डिमांड बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/gst-council-will-solve-industry-problems/article-1091</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Jun 2017 21:52:39 +0530</pubDate>
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