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                <title>Confidence - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मोदी का नया भारत बनाने का विश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[कहते हैं कि संकल्प में बहुत बड़ी ताकत होती है, संकल्प के साथ किए जाने वाले कार्य हमेशा सुफल परिणाम देने का संचार करते हैं। स्वतंत्रता के बाद लम्बे समय तक भारत में जिस संकल्प के साथ काम होना चाहिए था, उसमें कमी का अहसास देखा गया। इसी कारण से हमारा देश एक ऐसी राह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/modis-confidence-to-create-a-new-india/article-3196"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/modi-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कहते हैं कि संकल्प में बहुत बड़ी ताकत होती है, संकल्प के साथ किए जाने वाले कार्य हमेशा सुफल परिणाम देने का संचार करते हैं। स्वतंत्रता के बाद लम्बे समय तक भारत में जिस संकल्प के साथ काम होना चाहिए था, उसमें कमी का अहसास देखा गया। इसी कारण से हमारा देश एक ऐसी राह पर कदम बढ़ा चुका था, जो किसी न किसी रुप से भारत को कमजोर करने की ओर ले जा रहा थी। राजनीतिक सत्ता में गठबंधन के दौर के चलते कठोर निर्णय लेने की प्रक्रिया लगभग बंद सी हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके चलते सरकारों के पास संकल्प शक्ति का अभाव दिखाई दिया। लेकिन पिछले तीन वर्ष से देश में एक नई आशा का संचार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने साहसी निर्णयों के सहारे देश को एक नई दिशा का बोध कराया है। एक ऐसी दिशा जिसमें भ्रष्टाचार मुक्त भारत की कल्पना समाहित है, एक ऐसी दिशा जिसमें अमीर और गरीब में भेद नहीं हो। देश के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को फिर से भरोसा दिलाने का संकल्प किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली बार की तरह ही इस बार भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में एक विश्वास दिखाई दिया। मोदी के भाषण में जहां संवेदनाएं थीं, वहीं समस्याओं का समाधान भी था। उन्होंने कश्मीर समस्या का समाधान प्रस्तुत करते हुए कहा कि जहां गाली और गोली से समाधान नहीं निकलता, वहां गले लगाने से काम चलता है। यानी प्रधानमंत्री का साफ संदेश यही था कि वह अब कश्मीर को लेकर बेहद गंभीर हैं और समस्या का निदान करके ही मानेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में हमने देखा है कि मोदी के मन में जो बात आती है, उसे वे पूरा करने में जुट जाते हैं। वह कुछ दिनों की समस्या तो हो सकती है, लेकिन बाद में वही समाधान बन जाता है। यह सत्य है कि हर अच्छे काम में अनैतिक शक्तियां व्यवधान पैदा करती हैं। मोदी के हर काम में भी जबरदस्ती समस्या पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। नोटबंदी और जीएसटी भी मोदी सरकार के ऐसे ही कदम माने जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमने देखा कि इन कदमों को देश के विपक्षी राजनीतिक दलों ने जन विरोधी बताने का कार्य किया, इतना ही नहीं इसे देश के लिए घातक भी कहा गया, लेकिन जनता ने मोदी के इस कार्य पर अपनी मुहर लगाकर यह प्रमाणित कर दिया कि मोदी का यह कदम वास्तव में स्वच्छ भारत और सुव्यवस्थित भारत बनाने की दिशा में प्रभावी कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार का दंश भोगने वाली भारत की जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों में वह सब दिखाई दे रहा है, जो एक नया भारत बनाने के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कई बार स्पष्ट कहा है कि अच्छे कामों को करने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, देश की जनता सरकार के साथ कुछ दिनों की कठिनाइयों का सामना करे, फिर हम देखेंगे कि आने वाला समय भारत का होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम दिए अपने संबोधन में पिछले तीन साल के हिसाब का लेखा प्रस्तुत किया। जिसे पूरे देश की जनता ने सुना। विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण भले ही आलोचना का विषय रहा हो, लेकिन देश की जनता में मोदी की वाणी के प्रति अनुराग है। यह अनुराग इसलिए भी है कि प्रधानमंत्री मोदी आम जनता की भाषा बोलते हुए दिखाई देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जनता हो या शहर में निवास करने वाली जनता की बात हो, मोदी का भाषण सरल भाषा में ही होता है। इससे पहले की सरकारों, विशेषकर कांगे्रस की सरकारों की बात की जाए तो उन्होंने स्वाधीनता के अवसर पर अपने भाषण ज्यादातर अंगे्रजी भाषा में ही दिए। हम जानते हैं कि अंगे्रजी में दिया गया भाषण आम जनता के पास तक भी नहीं पहुंच पाता था। यानी वे सरकारें आम जनता की पहुंच से काफी दूर ही रहीं, लेकिन मोदी की सरकार आम जनता की सरकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके दिल में गरीब का दर्द है। वास्तव में मोदी की आवाज देश की आवाज बनकर वातावरण में गूंजती है। बचपन से लेकर पूरे जीवन भर मोदी ने जिस दर्द का स्वयं अहसास किया है, वही देश की जनता का भी दर्द है। मात्र इसी कारण मोदी भारत की जनता के हमदर्द बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘सबका साथ और सबका विकास’ वाली अवधारणा को आधार बनाकर ही अपने भाषण देते हैं। उनके भाषण में किसी के प्रति कोई पक्षपात नहीं, कोई विद्वेष का भाव नहीं। सबके लिए समान भाव को प्रकट करते हुए मोदी ने यह भी व्यक्त किया कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। प्रताड़ना की शिकार होने वाली मुस्लिम महिलाओं के बारे में मोदी ने समाधानकारक मंत्र दिया। यानी मोदी सबको अपना ही समझते हैं। इसी भाव के साथ काम करने से देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकेगा। किसी भी पक्ष को छोड़कर विकास की कल्पना करना निरर्थक ही कहा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में आज देश में कुछ राजनीतिक दल जिस प्रकार का वातावरण बनाने का कार्य कर रहे हैं, वह केवल राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित ही दिखाई देते हैं। वर्तमान में देश में जो अपवाद दिखाई देते हैं, वे सभी प्रशासनिक कार्यपद्धति का परिणाम मानी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सही है कि देश की सरकार परिवर्तित हो गई है, तो प्रशासन को भी अपने काम में उसी प्रकार का बदलाव लाना होगा। क्योंकि सरकार की योजनाओं को आम जनता के पास तक ले जाने का काम केवल प्रशासन का ही होता है। प्रशासन पूरी ईमानदारी से अपने कार्यों को अंजाम दे तो आम जनता को सरकार की नीतियों का लाभ मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से स्वराज के सपने को पूरा करने पर भी जोर दिया। वास्तव में आज देश में जो देखने में आ रहा है कि उसमें राज तो दिखाई देता है, लेकिन स्वराज का बोध कराने वाला अहसास नहीं है। हमारे महापुरुषों ने जिस प्रकार के भारत की कल्पना की थी, वैसा भारत बनाने के लिए मोदी ने अभियान चलाया है।इस अभियान को सार्थकता प्रदान करने के लिए सरकार तो सक्रिय है ही, साथ हमें भी सक्रियता दिखाना होगी, तभी हम अपने उद्देश्य में सफल हो सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 23:48:49 +0530</pubDate>
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                <title>फोर्ब्स रैंकिंगः सरकार पर जनता के भरोसे के मामले में भारत विश्व में नंबर वन</title>
                                    <description><![CDATA[73 प्रतिशत भारतीय अपनी सरकार पर भरोसा करते हैं नई दिल्ली: जब बात देश के विकास की हो तो सबसे जरूरी होता है देश के नागरिकों द्वारा अपनी सरकार पर भरोसा। क्योंकि कोई भी फैसला, चाहे वो किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो उसे तब तक धरातल पर नहीं लाया जा सकता जब तक सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/73-percent-indians-have-confidence-in-government-oecd-reports/article-2276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/narendra-modi-netherlands.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">73 प्रतिशत भारतीय अपनी सरकार पर भरोसा करते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> जब बात देश के विकास की हो तो सबसे जरूरी होता है देश के नागरिकों द्वारा अपनी सरकार पर भरोसा। क्योंकि कोई भी फैसला, चाहे वो किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो उसे तब तक धरातल पर नहीं लाया जा सकता जब तक सरकार पर देश के नागरिकों का भरोसा ना हो।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिकों के भरोसे की बदौलत ही सरकार प्रभावी ढंग से अपनी नीतियों को लागू करने में सफल हो पाती है। इसी भरोसे को लेकर प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रिका ‘फोर्ब्स’ में एक रिपोर्ट छपी है जिससे यह पता चलता है कि भारतीय अपनी सरकार पर कितना भरोसा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फोर्ब्स मैगजीन में छपे ओईसीडी के सर्वे के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा 75 प्रतिशत भारतीय अपनी सरकार और उसकी नीतियों पर भरोसा करते हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">The countries with the most and least confidence in their governments:<br /> <a href="https://t.co/JgJhOGsjNY">https://t.co/JgJhOGsjNY</a> <a href="https://t.co/vnClEJQ4tT">pic.twitter.com/vnClEJQ4tT</a></p>
<p>— Forbes (@Forbes) <a href="https://twitter.com/Forbes/status/885552158095138816?ref_src=twsrc%5Etfw">July 13, 2017</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">फोर्ब्स की रिपोर्ट ट्वीट को देखने के बाद यही लगता है कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देश इस मामले में भारत से कहीं पीछे हैं।भारत के बाद कनाडा इस मामले में दूसरे नंबर पर है फ्रांस जैसा देश कहीं अधिक पीछे है। इन सारे देशों में ग्रीस सबसे नीचे है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रैंकिंग में तुर्की और रूस को संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रखा गया है, जहां 58 पर्सेंट लोगों को अपनी सरकार पर भरोसा है। यूरोपीय देश जर्मनी में 55 पर्सेंट और दक्षिण अफ्रीका में 48 फीसदी लोगों ने अपनी सरकार पर भरोसा है। 45 पर्सेंट लोगों के विश्वास के साथ ऑस्ट्रेलिया 7वें और 41 फीसदी के साथ ब्रिटेन 8वें पायदान पर है। जापान में 36 फीसदी लोग अपनी सरकार पर पूरा भरोसा करते हैं।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2017 00:36:22 +0530</pubDate>
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                <title>आत्मविश्वास के लिए आत्म-चिंतन जरुरी</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में इन्सान सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो इसके लिए उसके अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, मां-बाप या टीचर-मास्टर, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-is-necessary-for-confidence-2/article-650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pita-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Sirsa:</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में इन्सान सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो इसके लिए उसके अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, मां-बाप या टीचर-मास्टर, लेक्चरार की शिक्षा से हासिल नहीं हो सकता। इस आत्मबल को हासिल करने के लिए आत्मिक चिंतन जरूरी है और यह आत्मिक चिंतन केवल उस अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की भक्ति इबादत से हो सकता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो इन्सान मालिक का नाम जपा करते हैं, वही आत्मबल को हासिल कर सकते हैं।<br />
आत्मिक चिंतन केवल सुमिरन के द्वारा ही संभव है, सुमिरन करने से ही आत्मबल में वृद्धि हो सकती है और जब जीव में आत्मबल आ जाता है तो उसकी सहनशक्ति स्वयं ही बढ़ जाती है। आत्मबल से जीव का मन फिजूल की बातों में आना बंद कर देता है और आत्मा का मालिक से प्रेम बढ़ने लगता है। ज्यों-ज्यों इन्सान सुमिरन करता जाता है आत्मा को खुराक मिलती जाती है और वो और अधिक बलवान होती जाती है। आप जी फरमाते हैं कि एक दिन आत्मा व परमात्मा का मेल जरुर होता है। इसलिए सुमिरन के पक्के बनो। भले ही आपमें कोई भी गुण है, आप किसी भी प्रकार की सेवा करते हो, मन का कोई भरोसा नहीं कि वह कब डावांडोल हो जाए। मन से लड़ने का एकमात्र उपाय केवल सुमिरन ही है, लेकिन इसके साथ अगर आप सेवा भी करते हो तो बहुत बड़ी बात है। सेवा से सुमिरन में मन जल्दी लगता है व उस मालिक की धुन को आपका मन जल्दी पकड़ने लग जाएगा। वह बुराइयों की तरफ जाना बंद कर देगा। जब उसकी आत्मा राम नाम की धुन को पकड़ते हुए मालिक के नजारे लूटेगी तो मन भी उसके साथ होगा। इसके बाद मन बुराई की तरफ नहीं, बल्कि अच्छाई की तरफ चलता है। मन स्वाद का आशिक है। उसे जहां अधिक स्वाद मिलता है वह वहां दौड़ कर चला जाता है।<br />
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि राम नाम में जो लज्जत व स्वाद है वह दुनिया में कहीं पर भी नहीं है। इसलिए मालिक के नाम का सुमिरन, भक्ति, इबादत किया करो ताकि आप मालिक की खुशियों के काबिल बन सको। इन्सान को मालिक से मिलाने के लिए सुमिरन के अलावा और कोई भी उपाय नहीं है, अन्य सभी बातें बेफिजूल हैं उस मालिक से मिलने के लिए। यह बातें समाज में, घर-परिवार में इन्सान को इज्जत-शोहरत तो दिलवा सकती हैं, लेकिन इनसे आप भगवान को नहीं पा सकते। उस प्रभु-परमात्मा को हासिल करना है तो उसके लिए सुमिरन करना ही होगा व अपने अवगुणों को अंदर से मिटाना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Dec 2016 23:59:54 +0530</pubDate>
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                <title>मालिक को पाने के लिए आत्मविश्वास जगाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह होती है, जहां ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा होती हो, जहां पे इन्सान आकर बैठे तो उसे अपने मालिक, परमपिता, परमात्मा की याद आए, खुद में क्या गुण हैं, क्या अवगुण हैं, उनका पता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/confidence-is-necessary-to-meet-with-god/article-524"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह होती है, जहां ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा होती हो, जहां पे इन्सान आकर बैठे तो उसे अपने मालिक, परमपिता, परमात्मा की याद आए, खुद में क्या गुण हैं, क्या अवगुण हैं, उनका पता चले, भगवान के लिए रीत क्या है, सही रास्ता और कुरीत यानि गलत रास्ते कौन से हैं, इसका पता चले। सत् का मतलब है भगवान और उसकी चर्चा,<br />
जहां रीत-कुरीत का पता चले वो संग यानि साथ। मालिक को पाने के लिए इन्सान को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना चाहिए। सत्संग में मालिक के बारे में पता चलता है कि उसके अरबों नाम हैं, पर वो एक है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिस प्रकार पानी का नाम बदल देने से पानी का स्वाद या रंग नहीं बदलता।<br />
समाज में बहुत सी भाषाएं हैं, किसी भी वस्तु का नाम अलग भाषा में हो जाने से उस वस्तु के गुणों में परिवर्तन नहीं आता, तो सोचने वाली बात है कि भगवान का नाम बदल जाने से भगवान में अंतर कैसे आ जाएगा? वो एक है, एक था और एक ही रहेगा। आप जी फरमाते हैं कि मालिक को पाने के लिए इन्सान को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना चाहिए। जैसे-जैसे आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा, भगवान मिलेगा। बजाए फिजूल की बातों के क्यों न उन ख्यालों में मालिक के मूलमंत्र का अभ्यास करो, तो यकीनन आपके पाप-कर्म कटेंगे, आपके अंदर आत्मविश्वास आएगा और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। आप जी फरमाते हैं कि जिन लोगों का अंत:करण साफ हो जाता है, वो समाज के हर अच्छे-नेक क्षेत्र में तरक्की करते चले जाते हैं और वो कभी भी पीछे नहीं हटते। इसलिए आप भक्ति करो, सुमिरन करो। दुनियादारी के काम-धंधों में आपने सारी जिंदगी गुजार ली, क्या रिजल्ट निकला? बाल-बच्चे हो गए, बैंक-बैलेंस बन गया, लेकिन क्या पता वो बच्चे कब दुत्कार दें। हो सकता है कि आपकी बुजुर्ग अवस्था ऐसी हो कि आप चारपाई से न उठ पाओ, तब देखना कि कौन अपना और कौन पराया। अगर आपके खुद के नाम जमीन-जायदाद है, तो बच्चे आपके अपने बने रहेंगे, आपको लगेगा कि मेरा खून, मेरी बहुत सेवा कर रहा है। इसलिए अपने नाम जमीन-जायदाद जरूर रखो, क्योंकि आजकल सेवा के लिए मां-बाप नहीं बल्कि मायारानी चाहिए। अगर वो आपके नाम है, तो आपको अपने बच्चे बड़े अच्छे लगेंगे, क्योंकि उनको पता है कि बुजुर्ग जिसकी सेवा से खुश हो गए, उसको ही खजाना सौंप जाएंगे और अगर आपके पास कुछ भी नहीं है, तो उधर भी कुछ भी नहीं है। बीज नाश नहीं होता। आजकल अच्छे, नेक बच्चे भी होते हैं, जो बिना किसी गर्ज के सेवा करते हैं, लेकिन ज्यादातर गर्जी हैं। आप जी फरमाते हैं कि इस कलियुग में मेहनत करो, हिम्मत करो और मालिक का नाम जरूर जपो। क्योंकि भगवान एक ऐसा साथी है, जो कभी साथ नहीं छोड़ता। अपने-पराए सब पराए हो जाते हैं, लेकिन ईश्वर न इस दुनिया में और न ही अगले जहान में पराया होता है। एक बार जो उसे अपना बना लेता है, वो दोनों जहान में उसका हो जाता है और खुशियों से मालामाल करता रहता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Dec 2016 03:27:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राम-नाम जपने से जागता है आत्मविश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान दिन-रात भौतिकतावाद में ऐसा उलझा है कि उसे उस मालिक की या अपनी आत्मा का कोई ख्याल, होश, समझ नहीं है जिससे वह दुखी, परेशान होता है, चिंताओं में डूब जाता है। अगर वह मेहनत करता है, कोशिश करता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/confidence-build-up-by-doing-meditation/article-336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/guru-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान दिन-रात भौतिकतावाद में ऐसा उलझा है कि उसे उस मालिक की या अपनी आत्मा का कोई ख्याल, होश, समझ नहीं है जिससे वह दुखी, परेशान होता है, चिंताओं में डूब जाता है। अगर वह मेहनत करता है, कोशिश करता है तो कई बार चिंताओं से निकल जाता है, लेकिन दूसरी चिंताएं और तैयार हो जाती हैं। चिंता, टेंशन जीते-जी इन्सान को जलाने वाली चिता है। एक चिता वो होती है जो मरने के बाद इन्सान को जलाकर राख कर देती है। वो एक बार में काम-तमाम कर देती है लेकिन गम, चिंता, टेंशन ऐसी चिता है जो जीते-जी इन्सान को जलाती रहती है। इन्सान कभी मर जाता है, फिर जी उठता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के साथ ये चिंताएं, परेशानियां जुड़ी रहती हैं क्योंकि इन्सान को अपना आत्म-विश्वास जगाना नहीं आता। बड़े-बड़े वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च किया है। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने भगवान को मानने वाले और न मानने वाले लगभग 14000 लोगों पर सर्च किया। उन्होंने रिजल्ट यह निकाला कि जो राम का नाम नहीं लेते वो जल्दी पेरशान हो जाते हैं और आत्महत्या तक भी पहुंच जाते हैं और वे टेंशनों से भरे रहते हैं। जो राम का नाम लेने वाले हैं वो जल्दी से उत्तेजित नहीं होते। जो वास्तव में राम-नाम का जाप करने वाले हैं। यह नहीं कि राम-नाम ले लिया और जाप किया ही नहीं। जो सुबह-शाम जाप करते हैं वो जल्दी से पेरशान नहीं होते और आत्महत्या की भावना कभी आ भी गई तो उस पर अमल करने का तो सवाल ही नहीं होता। उन वैज्ञानिकों ने रिजल्ट निकाला कि जो लोग प्रेयर (भगवान को याद करते हैं) करते हैं उनके ऊपर ब्रह्मांड से एक अदृश्य शक्ति की किरणें टकराती हैं और उनके टकराने से इन्सान का आत्म-विश्वास बढ़ जाता है जिससे वे गम, चिंता, टेंशनों से जल्दी मुक्त हो जाते हैं। आप जी फरमाते हैं कि हमारे धर्मों में यह लिखा है कि भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, राम है। कोई साधक उसे याद करता है तो उससे किरणें टकराती हैं जो इन्सान का आत्म-विश्वास बढ़ाती हैं और आत्म-विश्वास बढ़ने से आदमी सफलता की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है। यह बात वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि यह सही है कि अगर कोई मालिक का नाम लेता है, उन्हें एक अलग शक्ति, ताकत, हिम्मत मिलती है ताकि वो बुराइयों से लड़ सके, अपने अंदर की बुरी आदतों को बदल सके। आप जी फरमाते हैं कि सुमिरन के बिना आत्म-विश्वासी नहीं बन पाओगे, नेक कामों में तरक्की नहीं कर पाओगे। जगह-जगह रूकावटे हैं, बुराई के नुमाइंदें जाल बिछाए बैठे हैं। ज़रा सी बात हुई नहीं कि उनका जाल आप पर आ पड़ता है और आप उनकी मीठी-मीठी, लचकदार बातों में उलझ जाते हैं और ऐसे उलझते हैं कि अपनी असलियत से दूर हो जाते हैं। तो भाई, सुमिरन करो। सुमिरन करने में कोई जोर नहीं लगता। इसके लिए कोई अलग से कपड़े नहीं पहनने। जो आपको अच्छे लगते हैं वो कपड़े पहनो। यह रूहानियत में कहीं भी नहीं आता कि भगवान कपड़ों पर मोहित होता है या किसी अलग तरह की वेशभूषा से खुश होते हैं। किसी भी धर्म में रहो, जो मर्जी कपड़े पहनो। अपने अंदर के विचारों को स्वच्छ करो। अगर अंदर के विचार शुद्ध हैं, अंदर का शुद्धिकरण आप कर लेते हो तो मालिक की मुसलाधार रहमत बरसती हुई आपको नज़र भी आएगी और आप उसका आनंद भी उठा पाएंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2016 22:11:21 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी के खिलाफ जीत से हमारा मनोबल बढ़ा हैः हरेंद्र सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरू:  भारतीय जूनियर हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले महीने वेलेंसिया में चार देशों के आमंत्रण टूर्नामेंट में जर्मनी की मजबूत टीम के खिलाफ मिली दो जीत से भारतीय टीम का आगामी एफआईएच जूनियर विश्व कप से पहले मनोबल बढ़ा है। भारतीय जूनियर हाकी टीम ने चार देशों के टूर्नामेंट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/our-confidence-increase-by-defeating-germany-harinder-singh/article-293"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/harender-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरू:</strong>  भारतीय जूनियर हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले महीने वेलेंसिया में चार देशों के आमंत्रण टूर्नामेंट में जर्मनी की मजबूत टीम के खिलाफ मिली दो जीत से भारतीय टीम का आगामी एफआईएच जूनियर विश्व कप से पहले मनोबल बढ़ा है। भारतीय जूनियर हाकी टीम ने चार देशों के टूर्नामेंट के फाइनल में जर्मनी को 5-2 के अच्छे अंतर से हराया था। भारत ने इससे पहले टूर्नामेंट के शुरूआती मैच में भी जर्मनी को 3-1 से परजित किया था। हरेंद्र ने कहा, जर्मनी को हराने से टीम के आत्मविश्वास में काफी अंतर आया। जूनियर विश्व कप की तैयारियों के सिलसिले में इससे पहले तक हम किसी यूरोपीय टीम से नहीं खेले थे। उन्होंने कहा, हमने स्पेन के खिलाफ भी अच्छा प्रदर्शन किया जहां हमने लीग मैच में उसे 3-1 और सेमीफाइनल में 1-0 से हराया। हमें बेल्जियम के हाथों हार झेलनी पड़ी। लेकिन खिलाड़ी अच्छी स्थिति में हैं और यहां बेंगलुरू में दो सप्ताह का शिविर काफी महत्वपूर्ण होगा। हरेंद्र ने इसके साथ ही बताया कि जूनियर विश्व कप के लिये आखिरी चयन ट्रायल यहां शुक्रवार को होगा। भारतीय जूनियर टीम विश्व कप में अपने अभियान की शुरूआत आठ दिसंबर को कनाडा के खिलाफ करेगी।<em> एजेंसी </em></p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Nov 2016 11:45:38 +0530</pubDate>
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