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                <title>Cotton Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Cotton Farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गुलाबी सुंडी व टिंडा ग्लन की बीमारी से गांव नांगल के किसानों की 80 से 100 प्रतिशत फसल खराब</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों की मांग: कपास की बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर प्रति एकड़ मुआवजा दिलवाए प्रशासन गांव के 700 से 800 एकड़ कपास की फसल हुई है बर्बाद : नांगल सरपंच | Gulabi Sundi भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। भिवानी जिला के गांव नांगल के ग्रामीणों ने आज बड़ी संख्या में अपनी बर्बाद हुई कपास की फसल (Cotton […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/crops-of-farmers-of-village-nangal-spoiled-due-to-pink-bollworm/article-52620"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/bhiwani-news.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">ग्रामीणों की मांग: कपास की बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर प्रति एकड़ मुआवजा दिलवाए प्रशासन</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">गांव के 700 से 800 एकड़ कपास की फसल हुई है बर्बाद : नांगल सरपंच | Gulabi Sundi</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> भिवानी जिला के गांव नांगल के ग्रामीणों ने आज बड़ी संख्या में अपनी बर्बाद हुई कपास की फसल (Cotton Crop) को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंच बर्बाद फसल का सर्वे करवाकर मुआवजा दिए जाने की मांग की। गांव के सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हाथों में कपास की बर्बाद फसल व कीड़ा लगे कपास के टिंडों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा तथा उन्हे अपनी खराब फसल की भरपाई की मांग की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बर्बाद फसलों के साथ उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीण | Gulabi Sundi</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव के सरपंच कुलदीप, बुजुर्ग राजमल व युवा किसान मोहित ने बताया कि उनके गांव की लगभग 700 से 800 एकड़ कपास की फसल गुलाबी सुंडी व बीमारी के लगने से 80 से 100 प्रतिशत के लगभग खराब हो गई। गांव के सभी कपास उत्पादक किसानों पर इन बीमारियों का प्रभाव पड़ा। इससे गांव में कपास की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भिवानी जिला प्रशासन जल्द से जल्द गांव नांगल की बर्बाद हुई कपास की फसल का कृषि विभाग के माध्यम से सर्वे करवाकर मुआवजे की व्यवस्था करें। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रति एकड़ कपास की बिजाई, खाद, दवाई व सिंचाई खर्च को देखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द सर्वे करवा किसानों को 40 से 45 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिलवााएं। Gulabi Sundi</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि गांव के किसानों को सर्वे करवाने के बाद बीमा कंपनियों के माध्यम से क्लेम दिलवाने का कार्य जिला प्रशासन करवाएं, ताकि किसान कपास की बीामरी की मार आर्थिक रूप से सहन करने में सक्षम हो पाएं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने बीमा नहीं करवाया है, उनके लिए भी प्रशासन अन्य माध्यमों से मुआवजे की व्यवस्था करें, ताकि 80 से 100 प्रतिशत तक कपास के खराबे की भरपाई की जा सकें। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन गांव की बर्बाद फसलों के मुआवजे की व्यवस्था नहीं करता है तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन पर उतरना होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="महिलाओं ने ‘नारी अधिनियम’ को बताया क्रांतिकारी कदम" href="http://10.0.0.122:1245/women-called-womens-act-a-revolutionary-step/">महिलाओं ने ‘नारी अधिनियम’ को बताया क्रांतिकारी कदम</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 17:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नरमे पर गुलाबी सुंडी की मार, बेबस किसान दे रहे कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर ओढां (सच कहूँ/राजू)। विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/gulabi-sundi-in-cotton/article-51825"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/gulabi-sundi.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसान बोले : सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर नहीं हो रहा दवा का असर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (सच कहूँ/राजू)।</strong> विगत वर्ष की बजाय इस बार नरमे की फसल बेहद अच्छी दिख रही है, लेकिन गुलाबी सुंडी किसानों को दोहरी चपेट मार रही है। किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सुंडी टिंडे के अंदर होने के चलते उस पर असर न के बराबर हो रहा है। परेशान किसानों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्या किया जाए। गांव नुहियांवाली, रत्ताखेड़ा, जंडवाला जटान, चोरमार खेड़ा, मलिकपुरा व ओढां सहित अन्य गांवों में नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी का काफी प्रकोप देखा जा रहा है। Gulabi Sundi</p>
<p style="text-align:justify;">गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए किसान एक सप्ताह के भीतर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन फिर भी निजात नहीं मिल रही। नुहियांवाली के किसान डॉ. जगदीश सहारण व चेतराम दादरवाल, ओढां के किसान कौर सिंह कुंडर, गुरचेत सिंह आदि ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने व पर्याप्त बरसात होने के चलते फसल पूर्व ही अपेक्षा बेहद अच्छी है, लेकिन गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान सुंडी पर नियंत्रण करने हेतु महंगे कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन फिर भी नियंत्रण नहींं हो पा रहा। सुंडी मर नहीं रही और टिंडे गलकर खराब हो रहे हैं। ऐसे में उत्पादन पर काफी विपरीत असर पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने बताया कि सुंडी की रोकथाम के लिए वे एक सप्ताह के भीतर छिड़काव कर रहे हैं। वे 8 से 10 बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सुंडी का ख्रात्मा नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि छिड़काव में प्रति एकड़ करीब 2 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऊपर से इस बार मजदूर भी एक हजार रुपये क्विंटल चुगाई मांग रहे हैं। विगत वर्ष 850 रुपये का रेट था। ऐसे में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। किसान जगदीश सहारण ने बताया कि वह अब से पहले 10 बार नरमे में छिड़काव कर चुका है तथा 2 छिड़काव और होंगे। लेकिन फिर भी सुंडी का खात्मा नहीं हो पा रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये करें उपचार :-</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विभाग ओढां के कार्यवाहक खंड कृषि अधिकारी पवन यादव ने बताया कि अपने खेतों में नरमे के 100 फूलों का निरीक्षण करें। यदि इनमें करीब 10 फूल गुलाबी सुंडी से ग्रसित मिलते हैं या फिर 20 टिंडों को फाड़कर देखने पर कुछ टिंडों में गुलाबी सुंडी मिलती है तो कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी का प्रकोप फलीय भागों पर 5 से 10 प्रतिशत तक होने पर रोकथाम के लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी की 3 मिलीलीटर मात्रा प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इसके बाद अगला छिड़काव जरूरत पड?े पर क्यूनालफॉस 20 एफ की 4 मिलीलीटर या थियोडिकार्ब 75 डबल्यूपी की 1.5 ग्राम मात्रा प्रतिलीटर की दर से 10-12 दिनों बाद करें। उन्होंने कहा कि एक ही कीटनाशक का बार-बार छिड़काव न करें। Gulabi Sundi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’" href="http://10.0.0.122:1245/one-nation-one-election-news/">जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 16:14:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नरमें की फसल पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप, किसान चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[40 हजार हेक्टेयर में फसल पर मंडराया खतरा | Cotton Crop नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। सरसा जिले के चौपटा क्षेत्र में नरमें की फसल (Cotton Crop) में गुलाबी सुंडी का प्रकोप शुरू हो गया है। अचानक से गुलाबी सुंडी के हमले से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। क्षेत्र के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/outbreak-of-gulabi-sundi-on-softwood-crop/article-49513"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/cotton-crop.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">40 हजार हेक्टेयर में फसल पर मंडराया खतरा | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> सरसा जिले के चौपटा क्षेत्र में नरमें की फसल (Cotton Crop) में गुलाबी सुंडी का प्रकोप शुरू हो गया है। अचानक से गुलाबी सुंडी के हमले से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। क्षेत्र के डिंग मंडी, जोधंका, रूपावास, रायपुर, बकरियांवाली, गुडिया खेड़ा, गिगोरानी, रामपूरा ढ़िल्लों, कुम्हारिया, कागदाना, खेड़ी, जसानिया, हंजीरा, नाथूसरी, शाहपूरिया, चाहरवाला, शक्करमन्दोरी, रामपूरा नवाबाद सहित कई गांवों में इस बार करीब 39000 हेक्टेयर में नरमें व 800 हेक्टेयर में कपास की फसल की बिजाई की गई है। गुलाबी सुंडी के प्रकोप को रोकने के लिए किसानों को अभी से ही कपास की फसल में कीटनाशक दवाई का प्रयोग करना पड़ेगा। उधर कृषि अधिकारियों ने भी खेतों में जाकर निरीक्षण शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिंग मंडी के किसान ज्ञान धारी पचार, विकाश, रामस्वरूप, भरत सिंह, धर्मपाल ने बताया सुंडी के प्रकोप से फसल खराब होने लगी है। किसान प्रमोद बिरड़ा, देवीलाल मंडा ने बताया कि नरमें कपास की फसल में शुरूआती दौर में गुलाबी सुंडी का हमला शुरू हो गया है। अभी पकाने में काफी समय है। ऐसे में फसल को बचाना काफी मुश्किल हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसान यह बरतें सावधानियां | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;">कीटनाशक का छिड़काव दोपहर 12 बजे से पहले या फिर शाम के समय ही करना चाहिए। एक ही कीटनाशक का छिड़काव बार-बार नहीं करना चाहिए। कीटनाशक के छिड़काव के बाद 24 घण्टों के भीतर अगर वर्षा आ जाती है तो, कीटनाशक का छिड़काव दोबारा करें।</p>
<p style="text-align:justify;">कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानी रखें जैसे छिड़काव करते समय शरीर, चेहरे और आँखों का ढकना, हवा के विपरीत छिड़काव नहीं करना इत्यादि। कपास की बिजाई के 90-120 दिन के बीच में अण्डा परजीवी ट्राईकोग्रामा बेक्टीरिया के 60000 अण्डे प्रति एकड़ के हिसाब से छोडेÞं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुंडी की रोकथाम | Cotton Crop</h3>
<p style="text-align:justify;">कपास की फसल में गुलाबी सुंडी (Gulabi Sundi) की निगरानी फूलों व टिंडो पर करें। फलिय भागों पर 10 प्रतिशत से अधिक प्रकोप इसका आर्थिक कगार है। खेत के विभिन्न हिसों से 60 फूलों की जांच करने पर अगर इन में से रॉजेटेड फूल तथा सुंडी के द्वारा नुकसान किये गए 6 फूल मिलते हैं तो गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए स्प्रे करें। खेत में अलग-अलग पौधों से 20 हरे टिंडे तोड़ कर उसमें घुसी गुलाबी सुंडी को गिनो अगर इनमें दो या दो से ज्यादा सुंडियां मिलती हैं तो गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए स्प्रे करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार चौपटा खंड में देसी कपास लगभग 700 हेक्टयर, बीटी कॉटन 39000 हेक्टयर, ग्वार लगभग 15000 हेक्टयर, मूंग 250 हेक्टयर, मूंगफली 1200 हेक्टयर, अरंड की 400 हेक्टयर में बिजाई की गई है। कई खेतों में निरीक्षण भी किया है। नरमे की फसल में कई स्थानों पर सुंडी का प्रभाव देखा गया है, सुंडी की पहचान व रोकथाम के लिए किसानों को कई प्रकार की सावधानियां रखनी चाहिए।<br />
<strong>                                                                                    – शलेन्द्र सहारण, कृषि विकास अधिकारी।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी" href="http://10.0.0.122:1245/water-crisis-in-india/">Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/outbreak-of-gulabi-sundi-on-softwood-crop/article-49513</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 15:39:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि विभाग ने नरमे की कास्त को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता वैन चलाई</title>
                                    <description><![CDATA[फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। जिले में नरमे की खेती (Fazilka News) को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग ने किसानों को नरमे की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए खुइयां सरवर प्रखंड में जागरूकता वैन चलाई है. इस वैन को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/agriculture-department-runs-awareness-van-to-promote-cotton-farming/article-47151"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/cotton-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)।</strong> जिले में नरमे की खेती (Fazilka News) को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग ने किसानों को नरमे की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए खुइयां सरवर प्रखंड में जागरूकता वैन चलाई है. इस वैन को अबोहर के एसडीएम श्री आकाश बंसल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा नरमे के बीजों (Fazilka News) पर किसानों को 33 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है और किसानों की मांग के अनुसार नहर का पानी भी मुहैया करवाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जो किसान नरमे के बीटी बीज पर सब्सिडी प्राप्त करना चाहते हैं, वे कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के प्रखंड कृषि कार्यालय या कृषि विकास अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं.</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/agriculture-department-runs-awareness-van-to-promote-cotton-farming/article-47151</link>
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                <pubDate>Thu, 04 May 2023 14:51:32 +0530</pubDate>
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