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                <title>सॉयल साइंस - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>सॉयल साइंस RSS Feed</description>
                
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                <title>सॉयल साइंस में बनाएं करियर | Soil Science</title>
                                    <description><![CDATA[सॉयल साइंस या मृदा विज्ञान में एक नेचुरल रिसोर्स के रूप (Soil Science) में मिट्टी का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत मिट्टी का निर्माण, वर्गीकरण, भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों और उर्वरकता का अध्ययन किया जाता है। बीते सालों में फसल उत्पादन, वन उत्पाद और कटाव नियंत्रण में मिट्टी के महत्त्व को देखते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/make-career-in-soil-science/article-47199"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/soil-science.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सॉयल साइंस या मृदा विज्ञान में एक नेचुरल रिसोर्स के रूप (Soil Science) में मिट्टी का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत मिट्टी का निर्माण, वर्गीकरण, भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों और उर्वरकता का अध्ययन किया जाता है। बीते सालों में फसल उत्पादन, वन उत्पाद और कटाव नियंत्रण में मिट्टी के महत्त्व को देखते हुए सॉयल के क्षेत्र में जॉब के ढेरों मौके बने हैं। मृदा विज्ञान मनुष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल खाद्य उत्पादन का संसाधन है, बल्कि यह हमें अपशिष्ट निपटान, खेल के मैदानों को बनाए रखने, पानी और पोषक तत्वों को वितरित करने और संग्रहित करने और हमारे पर्यावरण का समर्थन करने में भी मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शैक्षणिक योग्यता | Soil Science</h3>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए सबसे पहले सॉयल साइंस या संबंधित विषय में बैचलर डिग्री होनी चाहिए। परंतु एक सॉयल साइंटिस्ट बनने के लिए मास्टर डिग्री या डॉक्टरल स्तर की डिग्री होनी चाहिए। सॉयल साइंटिस्ट का काम केवल रिसर्च से संबंधित होता है। टीचिंग में भी बेसिक शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता पड़ती है। इसके साथ ही जिन छात्रों ने सफलतापूर्वक सांइस विषय में बारहवीं पास कर ली है, वे सॉयल साइंस की बैचलर डिग्री कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। अंडर ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने के बाद ये छात्र मास्टर स्तर के कोर्स में प्रवेश पा सकते हैं। एडवांस डिग्री लेने के बाद संबंधित विषय में अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र इंटर्नशिप ट्रेनिंग भी ले सकते हैं। इसके बाद वे डॉक्टरेट डिग्री और बाद में रिसर्च डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वेतनमान| Soil Science</h3>
<p style="text-align:justify;">यल साइंस के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। सॉयल साइंस में एमएससी किया हुआ एक फ्रेश व्यक्ति 20000 रुपए प्रतिमाह वेतनमान प्राप्त कर सकता है। सरकारी संस्थानों में एक सॉयल साइंटिस्ट या सीनियर साइंटिस्ट 30000 रुपए से 40000 रुपए प्रतिमाह आसानी से प्राप्त कर लेता है। कुछ सालों का अनुभव होने के साथ-साथ वेतनमान भी बढ़ता रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विस्तृत क्षेत्र:</h3>
<p style="text-align:justify;">मृदा विज्ञान का संबंध सीधे तौर पर कृषि से है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसी भी देश की आर्थिकी उसकी कृषि पैदावार पर निर्भर करती है। मृदा विज्ञान कृषि के हर क्षेत्र का स्पर्श करता है। इसीलिए इस क्षेत्र में काम के अवसर भी बढ़ते जा रहे हैं। मृदा विशेषज्ञों की मांग हमेशा ही बनी रहती है। इसमें सरकारी क्षेत्र में बेशक कम संभावनाएं हैं, लेकिन निजी क्षेत्र में मृदा विज्ञानियों के लिए ढेरों अवसर हैं। इस फील्ड में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी के अलावा निजी संस्थानों में हाथोंहाथ काम मिलता है। केवल कृषि ही नहीं कृषि से जुड़ा हर विभाग, हर क्षेत्र मृदा विज्ञानियों के लिए अवसरों के द्वार खोलता है। इसीलिए मृदा विज्ञान का क्षेत्र सीमित न होकर व्यापकता लिए हुए है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोजगार के अवसर | Soil Science</h3>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं ज्यादातर निजी क्षेत्र में हैं। निजी क्षेत्र में एग्रीकल्चरल कंसल्टिंग फर्मों के साथ काम किया जा सकता है। परंतु नौकरी राज्य, फेडरल और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तथा शैक्षिक संस्थानों में की जा सकती है। जिन व्यक्तियों ने सॉयल साइंस में अपनी शिक्षा पूरी कर ली है, वे लैंड यूज प्लानिंग, नैचुरल रिसोर्स इवेल्यूशन, वेटलैंड यूज और प्रोटेक्शन, सॉयल मैपिंग, फार्मिंग फोरेस्ट्री, इकोलाजी, वाटर एंड एग्रीकेमिकल मैनेजमेंट, फर्टिलाइजर टेक्नोलाजी, पर्यावरण, सॉयल एंड वाटर प्रोटेक्शन, जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम आदि में करियर बना सकते हैं। सॉयल साइंस में शिक्षा के लिए आप भारत में कई एग्रीकल्चरल विश्वविद्यालयों से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सॉयल साइंस में रोजगार की ढेरों संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में आप एक सॉयल कंजर्वेशनिस्ट, सॉयल माइक्रोबायोलॉजिस्ट, सॉयल इकोलॉजिस्ट, सॉयल केमिस्ट, सॉयल साइंटिस्ट, लैंड यूज स्पेशलिस्ट, सॉयल फिजिसिस्ट और नेचुरल रिसोर्स मैनेजर के रूप में काम कर सकते हैं। सॉयल साइंस में रोजगार की संभावनाएं केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब है। विदेशों में भी आप विश्वविद्यालयों, कृषि विभागों आदि में अच्छे वेतनमान के साथ रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।<br />
प्रमुख शिक्षण संस्थान</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">नौणी विश्वविद्यालय, सोलन</li>
<li style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश ।</li>
<li style="text-align:justify;">कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर।</li>
<li style="text-align:justify;"> पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना।</li>
<li style="text-align:justify;"> कालेज आॅफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, लुधियाना।</li>
<li style="text-align:justify;"> कालेज आॅफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी, हिसार।</li>
<li style="text-align:justify;"> हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार।</li>
<li style="text-align:justify;"> राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, बीकानेर।</li>
<li style="text-align:justify;"> इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीच्यूट, नई दिल्ली।</li>
<li style="text-align:justify;"> जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली।</li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 13:09:04 +0530</pubDate>
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