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                <title>King Charles III - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>King Charles III RSS Feed</description>
                
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                <title>राज्याभिषेक से उठते सवाल!</title>
                                    <description><![CDATA[अंग्रेज वर्षों से भारत को येन-केन प्रकारेण उपहास का पात्र बनाते रहते हैं। वे अक्सर हिंदू धार्मिक प्रथाओं-परम्पराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को लक्षित करते हुए टीका-टिप्पणी करते रहते हैं। वे उदारवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के प्रति भारतीयों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए भारत को शासन-प्रशासन के बारे में गाहे-बगाहे सलाह भी देते हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/questions-arising-from-the-coronation/article-47849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/prince-charls1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंग्रेज वर्षों से भारत को येन-केन प्रकारेण उपहास का पात्र बनाते रहते हैं। वे अक्सर हिंदू धार्मिक प्रथाओं-परम्पराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को लक्षित करते हुए टीका-टिप्पणी करते रहते हैं। वे उदारवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के प्रति भारतीयों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए भारत को शासन-प्रशासन के बारे में गाहे-बगाहे सलाह भी देते हैं। हालांकि, वे शायद ही कभी अपने स्वयं के समाज की निष्पक्ष और नियमन समीक्षा करते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="टीवी की बजाय अब चलती-फिरती स्क्रीन जेब में लेकर घूमते हैं क्रिकेट के दीवाने" href="http://10.0.0.122:1245/cricket-match-on-mobile/">टीवी की बजाय अब चलती-फिरती स्क्रीन जेब में लेकर घूमते हैं क्रिकेट के दीवाने</a></p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में 6 मई 2023 को सम्पन्न King charles III का राज्याभिषेक समारोह एक ऐसा ही प्रसंग है। इस समारोह में एक 74 वर्षीय व्यक्ति को औपचारिक रूप से राजा की पदवी प्रदान की गई। यह पद उसे वंशानुगत प्राप्त हुआ है। माँ से बेटे को हस्तांतरित यह पद ज्येष्ठाधिकार की सामंती परंपरा द्वारा वैधता और वर्चस्व प्राप्त करता है। यह मध्यकालीन परम्परा एक परिवार विशेष को यूनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देशों का राज्य प्रमुख होने का वंशानुगत अधिकार प्रदान करती है। लोकतांत्रिक समाज में ऐसी मध्यकालीन व्यवस्था को वैधता प्रदान करना और उसका धूम-धड़ाके से प्रदर्शन करना हास्यास्पद और चिंतनीय है। उल्लेखनीय है कि नेपाल जैसे अपेक्षाकृत छोटे और नवजात लोकतंत्र ने भी ऐसी सामंती व्यवस्था को विदाई दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह राज्याभिषेक समारोह सम्राट के शासन के दैवीय अधिकार को पुष्ट करता है, (King charles III) जोकि आधुनिक उदार लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। एक उदार लोकतंत्र के भीतर एक वंशानुगत संवैधानिक राजतंत्र की उपस्थिति और महिमामंडन उसमें अंतर्निहित विरोधाभास का प्रकटन है। यह सामंती समारोह अपने आप में एक अनपेक्षित, अनावश्यक और अप्रासंगिक कार्यक्रम था। यह ईसाई पंथ के प्रतीकों और परम्पराओं से भी परिपूर्ण था। समारोह के दौरान, सिंहासनारूढ़ राजा ने इंग्लैंड के चर्च और उसके कानून को बनाए रखने की शपथ ली। पवित्र तेल से पादरी द्वारा राजा का अभिषेक किया गया। ‘क्राउन आॅफ सेंट एडवर्ड’ के रूप में जाना जाने वाला मुकुट कैंटरबरी के आर्कबिशप और इंग्लैंड के चर्च के धर्मगुरु जस्टिन वेल्बी द्वारा राजा को पहनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समारोह में तमाम पूर्व-शासित राज्यों को आमंत्रित किया गया था। (King charles III) उन राज्यों के प्रतिनिधियों ने ‘मैं कसम खाता हूँ कि मैं आपकी महिमा के प्रति, और आपके उत्तराधिकारियों और उपाधिकारियों के प्रति सच्ची निष्ठा अदा करूंगा। हे भगवान, मेरी मदद करें।’ घोषणा करके मध्यकालीन शैली में राजा और राजतन्त्र में अपनी आस्था और निष्ठा व्यक्त की। यह प्रथा आज के समय में अत्यंत बेतुकी है। इस अवसर पर अन्य धर्मों और राज्यों के प्रतिनिधियों से उपहार प्राप्त करना औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है। यह ईसाई धर्म के वर्चस्व और अन्य सभी धर्मों की दोयमता को भी प्रकट करता है। यह राज्याभिषेक ईसाई धर्म के अनुष्ठानों और राजा या राज्य-प्रमुख के अपने ईसाई विश्वासों का प्रकटन करता है। जिस देश की अघोषित राष्ट्रीय विचारधारा धर्मनिरपेक्ष उदारवाद है, उस देश में पंथ विशेष को सार्वजनिक जीवन और राजकीय कार्यक्रमों में प्रदर्शित करना विरोधाभाषपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">मत-पंथ और राज्य संवेदनशील विषय हैं (King charles III) जिन्हें सावधानीपूर्वक अलग रखने की आवश्यकता होती है। मत-पंथ और राज्य को मिलाना आपत्तिजनक है यह सामाजिक विभाजन, अलगाव और असहिष्णुता को जन्म दे सकता है। यह वास्तव में हैरान करने वाला है कि रिकॉर्ड स्तर पर बेरोजगारी और जीवनयापन के गंभीर संकट से त्रस्त देश में करदाताओं ने दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक के राज्याभिषेक को वित्त पोषित किया। इस कार्यक्रम के व्यय का अनुमान $100 मिलियन से अधिक है। एक अनिर्वाचित, वंशानुगत राज्य प्रमुख पर इतना सार्वजनिक धन खर्च किया जा रहा है, यह अनैतिक और अकल्पनीय है। नि:संदेह, ब्रिटेन को अपने मध्यकालीन अतीत की धूमधाम के बजाय वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं और चुनौतियों का संज्ञान लेकर उनके समाधान की दिशा में सक्रिय होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">तथाकथित शाही परिवार की लोकप्रियता हर बीतते दिन के साथ कम होती जा रही है। (King charles III) इसकी समकालीन शक्ति इसकी शानोशौकत और तमाशेबाजी में ही निहित है। लंदन की सड़कों पर भी यह भावना प्रदर्शित हुई, जहां प्रदर्शनकारियों ने ‘नॉट माय किंग’ के नारे लगाए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को लंदन की सड़कों से केवल एक विपरीत विचार व्यक्त करने के लिए जबरन हटा दिया जाना निराशाजनक अनुभव था। उनके शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए नए सार्वजनिक व्यवस्था कानूनों का इस्तेमाल ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पश्चिमी समाज के उदारवादी दावों’ की कलई खोलता है। हालाँकि, यूके अक्सर अन्य देशों की उनके प्रचारवादी और अधिनायकवादी दृष्टिकोण के लिए आलोचना करता है, लेकिन वह अपने आत्म-परीक्षण में प्राय: असमर्थ रहता है। ‘जो शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए’ यह कहावत ब्रिटेन के तथाकथित संभ्रांत, उदार और धर्म-निरपेक्ष समाज के लिए सही सबक और संदेश है।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चय ही, कथनी और करनी का द्वैत उनकी नैतिक आभा को धूमिल करता है। (King charles III) लंबे औपनिवेशिक अतीत और श्रेष्ठता-बोध के बावजूद ब्रिटेन भारत की समृद्ध और वैविध्यपूर्ण संस्कृति, विकसित लोकतंत्र और राजतन्त्र की समूल समाप्ति से बहुत कुछ सीख सकता है। निर्वाचित नेताओं/शासकों की अवधारणा (गण-व्यवस्था) प्राचीन भारत की सामान्य विशेषता थी, जिसे बहुत बाद में शेष विश्व ने भी अपनाया। भारत का पूर्ण विकसित संसदीय लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देता है। शासन को जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी बनाता है। भारतीय लोकतंत्र किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करता है (जैसा कि अनुच्छेद 15 में कहा गया है) और गणतंत्रवाद, कानून के समक्ष समानता, तथा मत-पंथ व राज्य के स्पष्ट अलगाव जैसे मूल्यों में आस्था रखते हुए उनका कार्यान्वयन भी करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये सिद्धांत भारतीय संविधान की आत्मा, आधुनिक भारतीय (King charles III) राज्य की नींव और भारतीय संस्कृति के सनातन मूल्य हैं। भारत के राष्ट्रपति ‘संविधान के संरक्षण, रक्षा और बचाव’ की शपथ लेते हैं, जबकि ब्रिटिश सम्राट ‘स्वधर्म की रक्षा’ की शपथ लेते हैं। ब्रिटेन मध्यकालीन राजशाही के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रणाली का ‘कॉकटेल’ है। लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक प्रणाली अथवा संरचना मात्र नहीं है, यह किसी भी राष्ट्र की आत्मा है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि हर इंसान की जरूरतें और आकांक्षाएं समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता, समानता की भावना और शोषणमुक्त दुनिया बनाने की इच्छा ने सरकार के लोकतांत्रिक स्वरूप को जन्म दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय इतिहास में विभिन्न युगों के दौरान, (King charles III) नागरिक समाज की यह गहन विचारणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती रही है, जिसने लंबी पराधीनता के बावजूद भारत को लोकतंत्र का पालना बनाया है। ब्रिटेन में मौजूद रॉयल्टी और नोबल्टी तथा हाउस आॅफ लॉर्ड्स और हाउस आॅफ कॉमन्स जैसे सामाजिक/राजनीतिक पदानुक्रम लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध हैं। कुल मिलाकर, भारत का लोकतांत्रिक अनुभव ब्रिटेन को समावेशिता बढ़ाने, संवैधानिक मूल्यों/व्यवस्थाओं को दृढ़ करने, सांस्कृतिक बहुलता और विविधता का सम्मान करने की दिशा में मार्गदर्शक अंतर्दष्टि प्रदान करता है। भारत के लोकतांत्रिक सिद्धांतों और प्रथाओं से सीखकर ब्रिटेन अपनी खुद की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और समृद्ध व सुदृढ़ कर सकता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>प्रो. रसाल सिंह, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 09:49:48 +0530</pubDate>
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                <title>किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक के दौरान दिखा कुछ ऐसा, जिसे देख हड़कंप मच गया</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन। गत दिनों हुए लंदन में ब्रिटिश किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक के दौरान (King Charles III) कैमरों में कुछ ऐसा कैद हो गया जिसे देखने के बाद कार्यक्रम में आए सभी लोग हैरान हो गए। लेकिन घटना के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। यह भी पढ़ें:– Trending News: बालकनी में सुखाई रजाई, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/something-strange-was-witnessed-at-the-coronation-of-king-charles-iii/article-47433"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/london.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लंदन।</strong> गत दिनों हुए लंदन में ब्रिटिश किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक के दौरान (King Charles III) कैमरों में कुछ ऐसा कैद हो गया जिसे देखने के बाद कार्यक्रम में आए सभी लोग हैरान हो गए। लेकिन घटना के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Trending News: बालकनी में सुखाई रजाई, तभी नोटों की बरसात हो आई" href="http://10.0.0.122:1245/trending-news-today/">Trending News: बालकनी में सुखाई रजाई, तभी नोटों की बरसात हो आई</a></p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश किंग चार्ल्स की भव्य राज्याभिषेक का कार्यक्रम अभी हाल (King Charles III) ही में पूरा हो चुका है। महारानी एलिजाबेथ की तरह किंग चार्ल्स की ताजपोशी का कार्यक्रम भी बहुत ही शानदार और यादगार रहा। कार्यक्रम की यादें अपने कैमरे में कैद करने पहुंचे फोटोग्राफर तब हैरान रह गए जब उनके कैमरे में कुछ ऐसा कैद हो गया जोकि अजीब था।</p>
<p style="text-align:justify;">मिरर की एक खबर की मानें तो ताजपोशी के कार्यक्रम में उपस्थित फोटोग्राफर ने कार्यक्रम में एक यूएफओ जैसी चीज उनके कैमरे में कैद होने का दावा किया है, जिसे लंदन में उड़ रहे रॉयल एयर फोर्स रेड एरो विमानों के बैकग्राउंड में देखा गया। जब इस बारे में कार्यक्रम में बताया गया तो वहां हड़कंप मच गया। लोगों को ऐसा लगा कि ताजपोशी के कार्यक्रम के दौरान वहां एलिसंस थे।</p>
<p style="text-align:justify;">खबर में फोटोग्राफर साइमन बालसन ने कहा कि जब वो लाइमहाउस में एक अपार्टमेंट की इमारत की 13वीं मंजिल से कार्यक्रम की फोटो ले रहा था तो उसने हवा में एक अजीब सी चीज देखी। मौसम खराब था और हवा में एक भी पक्षी नहीं था लेकिन उसने हवा में एक छोटी लाल सी चीज देखी। जब उसने जूम करके देखा तो एक लाल रंग का एकोर्न जैसा कुछ दिखा। बालसन ने दावा किया है कि पूर्वी लंदन के आस-पास आजकल बहुत सारे अजीब से यूएफओ देखे गए हैं। लेकिन अधिकारियों ने ऐसी कोई पुष्टि नहीं की है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 13:36:40 +0530</pubDate>
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                <title>किंग चार्ल्स तृतीय का भव्य राज्याभिषेक, क्वीन ने नहीं पहना कोहिनूर सजा ताज</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन। आज 6 मई को लंदन के वेस्टमिंस्टर ऐबे चर्च में 80 मिनट (King Charles) तक राजा-रानी की ताजपोशी से जुड़ी रस्मों के बीच ब्रिटेन के नए राजा किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला की ताजपोशी हो गई है। रस्मों के दौरान आर्चबिशप ने किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला को ताज पहनाए। किंग चार्ल्स ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-grand-coronation-of-king-charles-iii/article-47269"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/prince-charls.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लंदन।</strong> आज 6 मई को लंदन के वेस्टमिंस्टर ऐबे चर्च में 80 मिनट (King Charles) तक राजा-रानी की ताजपोशी से जुड़ी रस्मों के बीच ब्रिटेन के नए राजा किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला की ताजपोशी हो गई है। रस्मों के दौरान आर्चबिशप ने किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला को ताज पहनाए। किंग चार्ल्स ने 1661 में बना सेंट एडवर्ड का ताज पहना है। लेकिन ब्रिटिश राजशाही का प्रतीक माने जाने वाले कोहिनूर हीरे से जड़ा ताज क्वीन कैमिला ने नहीं पहना। जो अपने आप में ऐतिहासिक है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Pakistan: खालिस्तान आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ को दिन दहाड़े गोलियों से भूना" href="http://10.0.0.122:1245/khalistan-terrorist-paramjit-singh-panjwad-was-gunned-down-in-broad-daylight/">Pakistan: खालिस्तान आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ को दिन दहाड़े गोलियों से भूना</a></p>
<p>उल्लेखनीय है कि क्वीन विक्टोरिया ने सबसे पहले कोहिनूर (King Charles) को अपने मुकुट में जड़वा कर पहना था। 1901 में क्वीन विक्टोरिया की मृत्यु के बाद क्वीन कॉन्सोर्ट मैरी ने कोहिनूर जड़ा ताज अपने सिर पहना। उनके बाद महारानी अलेक्जैंड्रा ने इसे अपने ताज में जड़वाया। 1953 में एलिजाबेथ द्वितीय ने कोहिनूर सजा ताज अपने सिर पर पहना। एलिजाबेथ द्वितीय पिछले साल तक ब्रिटेन की महारानी थीं। माना जाता रहा है कि यह हीरा पुरुषों के भाग्यशाली नहीं है। इसलिए इसे हमेशा औरतें ही पहनती हैं।</p>
<h3>रस्म में शामिल सोने का कलश और 12वीं सदी का चम्मच</h3>
<p>ताजपोशी की रस्मों के दौरान आर्चबिशप ने सोने के कलश से पवित्र तेल लेकर किंग चार्ल्स के हाथ और सिर पर डाला। इसके लिए चर्च में उन्हें पर्दे लगाकर कवर किया गया था। इसके लिए सोने के कलश और 12वीं सदी की चम्मच का इस्तेमाल किया गया। इस स्टेप को पूरी सेरेमनी का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है।</p>
<h3>चर्च की सुरक्षा एवं न्याय के लिए थामी तलवार</h3>
<p>महत्वपूर्ण रस्मों में किंग को न्याय के लिए तलवार सौंपी गई, आर्चबिशप ने कहा कि इसे हमेशा चर्च की सुरक्षा और न्याय करने के लिए इस्तेमाल करें। इसके अलावा उन्हें सोवरन आॅर्ब भी दिया गया। इस पर लगा क्रॉस ईसाई धर्म का प्रतीक होता है। प्रिंस विलियम ने उनके सामने घुटनों पर झुककर उनका हाथ चूमा और किंग को सम्मानित किया।</p>
<h3>लोगों से दिलवाई वफादारी की शपथ</h3>
<p>किंग चार्ल्स को ताज पहनाने के बाद आर्चबिशप ने लोगों से वफादारी की शपथ दिलवाई। क्वीन कैमिला को भी साधारण सेरेमनी कर क्वीन मैरी का ताज पहनाया गया। इसमें कोहीनूर नहीं लगा था। 1937 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने अपने पति किंग जॉर्ज की ताजपोशी के समय पहना था। वही, किंग चार्ल्स की ताजपोशी के बाद ब्रिटेन में 13 जगहों पर 21 गन सैल्यूट दिए गए। इनके बीच 10 सैकेंड का गैप रखा गया था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 19:10:28 +0530</pubDate>
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